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बिलासपुर : हम गरीबी का सर्जिकल स्ट्राइक करेंगे : राहुल गांधी

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बिलासपुर। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को बिलासपुर के सकरी में चुनावी सभा को संबोधित किया। इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि हमने जनता से जो वादा किया था पूरा किया है। जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कांग्रेस पार्टी देश की 30 प्रतिशत सबसे गरीब जनता के बैंक खातों में राशि डालना चाहती है। छत्तीसगढ़ का पैसा आपका और आपको ही मिलेगा। भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि जनता देखती रह गई और नीरव मोदी, मेहुल चौकसी मालमाला हो गए और देश के भाग गए। उन्होंने कहा कि मैं कोई झूठे वादे करने नहीं आया हूं।

मैं पीएम मोदी की तरह 15 लाख देने का वादा नहीं करुंगा। उन्होंने कहा भाजपा सरकार ने गरीबों का पैसा छिना है। हमने किसानों की जमीन वापस दिलाई है। उन्होंने कहा कि हम गरीबी का सर्जिकल स्ट्राइक करेंगे। भाजपा सरकार ने गरीबों का पैसा निकाला, बैंक में डाला और अमीरों में बांट दिया। उन्होंने कहा कि नोटबंदी में महिलाओं का बहुत नुकसान हुआ। नरेंद्र मोदी ने गब्बर सिंह टैक्स लागू किया है। इस दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेलए प्रदेश प्रभारी पीएल पूनियाए पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेवए कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे और गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू मौजूद रहे।

उनके 60 महीने सिर्फ नाम के और हमारे 60 दिन काम के : भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्र सरकार पर एक बार फिर से निशाना साधते हुए ट्वीट किया कि उनके 60 महीने सिर्फ नाम के और हमारे 60 दिन काम के। इधर मुख्यमंत्री के सलाहकार और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आज साध्वी प्रज्ञा का विरोाध करते हुए राजधानी में विरोध जताया।
प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्र के मोदी सरकार पर एक बार फिर से हमला बोला है। इस बार मुख्यमंत्री बघेल ने अपने ट्वीट के माध्यम से कहा-उनके 60 महीने सिर्फ नाम के, हमारे 60 दिन हैं काम के। जो कहा, सो निभाया, आगे भी हम निभाएंगे। ज्ञात हो कि इन दिनों भाजपा और कांग्रेस के बीच जमकर घमासान मचा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ शुरू से ही आक्रामक रूख रखने वाले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लगातार केन्द्र सरकार पर हमला बोलते आ रहे हैं। राज्य में 23 अपै्रल को तीसरे चरण के लिए मतदान होना है। इसके पूर्व कांगे्रस और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
इधर मुख्यमंत्री के सलाहकार रूचिर गर्ग और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आज राजधानी के अंबेडकर चौक पहुंचकर साध्वी प्रज्ञा का जोरदार विरोध किया। साध्वी प्रज्ञा ने हाल ही में शहीद पुलिस अफसर हेमंत करकरे पर टिप्पणी की थी। इसके बाद पूरे देश भर में साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ आवाजें उठनी शुरू हो गई थी। हालांकि साध्वी प्रज्ञा सिंह ने अपने बयान से यू टर्न ले लिया है, लेकिन इसके बाद भी विरोध का स्वर लगातार बुलंद हो रहा है।

जानिए क्या है इसमें खास, नोकिया 7.1 से जुड़ी जानकारी

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Nokia 7.1 को भारत में कीमत में कटौती मिली है। स्मार्टफोन को देश में नवंबर के अंत में Rs.19,999 की कीमत के साथ लॉन्च किया गया था, हालांकि अब इसे आधिकारिक Nokia eShop पर केवल Rs.17,999 में सूचीबद्ध किया गया है। यह 2000 रुपये की कीमत में कटौती को दर्शाता है। नोकिया 7.1 की फ्लिपकार्ट लिस्टिंग भी संशोधित मूल्य निर्धारण को दर्शा रही है, हालांकि अन्य ई-रिटेलर्स, जैसे कि अमेज़ॅन, को अभी तक नई कीमत का उल्लेख नहीं करना है। फोन की मुख्य झलकियों में एचडीआर सपोर्ट के साथ 19: 9 प्योरडिस्प्ले, स्नैपड्रैगन 636 SoC और Zeiss ऑप्टिक्स के साथ डुअल रियर कैमरा सेटअप शामिल हैं।

आधिकारिक नोकिया ईशॉप पर अद्यतन लिस्टिंग के अनुसार, नोकिया 7.1 Rs.18,485 अब रुपये की कीमत पर उपलब्ध है। भारत में Rs.17,999। इसी तरह, फ्लिपकार्ट नोकिया फोन को रुपये में बेच रहा है। याद करने के लिए, नोकिया 7.1 रुपये की कीमत के साथ लॉन्च किया गया था। 19,999। गैजेट्स 360 ने कीमत में कटौती पर स्पष्टता के लिए HMD ग्लोबल से संपर्क किया है और हम इस रिपोर्ट को अपडेट करेंगे जब हम वापस सुनेंगे। जैसा कि हमने उल्लेख किया है, नवंबर के अंत में Nokia 7.1 को भारत में लॉन्च किया गया था, और यह दिसंबर की शुरुआत में बिक्री पर चला गया था। फोन दो कलर ऑप्शन में आता है, जिसका नाम है मिडनाइट ब्लू और स्टील।

नोकिया 7.1

डुअल-सिम (नैनो) नोकिया 7.1 एंड्रॉइड ओरेओ के साथ आया था, हालांकि यह एंड्रॉइड 9.0 पाई के अपग्रेड करने योग्य है। इसमें 19: 9 आस्पेक्ट रेशियो वाला 5.84-इंच फुल-एचडी + (1080×2280 पिक्सल) प्योरडिसप्ले पैनल दिया गया है। डिस्प्ले पैनल HDR10 को भी सपोर्ट करता है और कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास 3 प्रोटेक्शन के साथ आता है। हुड के तहत, 4GB रैम के साथ मिलकर स्नैपड्रैगन 636 SoC है।

फ़ोटो और वीडियो के लिए, नोकिया 7.1 एक दोहरी रियर कैमरा सेटअप पैक करता है जिसमें f / 1.8 लेंस के साथ 12-मेगापिक्सल का प्राथमिक सेंसर और f / 2.4 लेंस के साथ 5-मेगापिक्सल का द्वितीयक सेंसर शामिल है। फोन में फ्रंट में 8-मेगापिक्सल सेंसर के साथ f / 2.0 लेंस और 84-डिग्री फील्ड-ऑफ-व्यू है।

नोकिया 7.1 में 64 जीबी ऑनबोर्ड स्टोरेज है जो माइक्रोएसडी कार्ड (400 जीबी तक) के माध्यम से विस्तार योग्य है। कनेक्टिविटी विकल्पों में 4 जी एलटीई, वाई-फाई 802.11ac, ब्लूटूथ v5.0, जीपीएस / ए-जीपीएस, ग्लोनास, एनएफसी, यूएसबी टाइप-सी और 3.5 मिमी हेडफोन जैक शामिल हैं। बोर्ड पर सेंसर में एक्सेलेरोमीटर, एंबियंट लाइट सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक कंपास, जायरोस्कोप, प्रॉक्सिमिटी सेंसर और रियर-माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, फोन एक 3,060mAh की बैटरी पैक करता है जो 18W फास्ट चार्जिंग का समर्थन करता है।

साध्वी प्रज्ञा को चुनाव आयोग ने नोटिस भेजा, 24 घंटे में मांगा जवाब

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भोपाल से भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा को चुनाव आयोग ने नोटिस भेजकर 24 घंटे में जवाब मांगा है। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने 26/11 हमले के शहीद हेमंत करकरे पर आपत्तिजन बयान दिया था ।हालांकि अपनी कटु टिप्पणी को लेकर मचे हंगामे के बाद शुक्रवार देर रात अपने शब्द वापस लेने की घोषणा की। साध्वी की सहायक उपमा सिंह ने उनका बयान जारी किया, जिसमें साध्वी ने कहा, मुझे लगता है कि मेरी टिप्पणी से देश के दुश्मनों को लाभ होगा, इसलिए मैं अपने बयान को वापस लेती हूं और इसके लिए माफी मांगती हूं। यह मेरा निजी दर्द था। यदि मेरे शब्दों से कोई आहत हुआ है, तो मुझे इसके लिए खेद है।

जाने Recipe : घर पर आसानी से बनाएं ‘साबूदाना डोसा’

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नई नयी चीज़े खाना सभी को पंसद आती है। ऐसे में आप भी घर पर कुछ न कुछ ट्राई करते रहते होंगे। अगर बात करें नवरात्री की तो ऐसे में आपको क्या बनाना चाहिए व क्या खाना चाहिए इसके बारे में बताने जा रहे हैं। अभी चैत्र नवरात्र प्रारंभ होने जा रहे है इसलिए आज हम आपके लिए स्पेशल ‘साबूदाना डोसा’ बनाने की Recipe लेकर आए है। जी हाँ, ऐसा आपने कभी ट्राई भी नहीं किया होगा। इसे बनाना बहुत ही सरल हैं। तो आइये जानते हैं इस Recipe के बारे में।

* आवश्यक सामग्री :

– आधा कप साबूदाना
– एक चौथाई कप उड़द दाल
– तीन चौथाई कप चावल
– आधा टीस्पून मेथीदाना
– एक चौथाई कप पोहा
– स्वादानुसार सेंधा नमक
– आवश्यकतानुसार घी
– डोसा बनाने वाला तवा
– नारियल की चटनी

* बनाने की विधि :

– एक बड़े बर्तन में साबूदाना, पोहा , उरद दाल व मेथी दाने में आवश्यकता के हिसाब से पानी डालकर 4-5 घंटे के लिए रख दें ।

– इसके साथ ही एक दूसरे बर्तन में चावल में पानी डालकर 4 घंटे के लिए रख दें ।

– तय समय बाद दोनों का पानी छानकर अलग-अलग छन्नी में रख दें । ताकि अलावा पानी निकल जाए ।

– मिक्सर जार में पोहा, साबूदाना वाला मिलावट डालें व एक कप पानी डालकर बारीक पीस लें ।

– मिलावट या पेस्ट को एक बाउल में निकालकर रख लें ।

– फिर उसी जार में चावल व एक कप पानी डालकर बारीक पीसकर पेस्ट बना लें ।

– चावल के मिलावट को साबूदाने वाले मिलावट में डालें और नमक मिलाकर अच्छी तरह मिक्स कर लें ।

– इस पेस्ट को ढककर कम से कम 7-8 घंटे के लिए रख दें । फ्रिज में न रखें ।

– इतने समय में यह अच्छी तरह फर्मेंट हो जाएगा व डोसा बनाने के लिए बढ़िया हो जाएगा ।

– मीडियम आंच पर तवा गर्म करें ।

– जब यह गर्म हो जाए तो इस पर पानी की कुछ छींटे डालें । इस पानी को कपड़े से पोछ लें ।

– आंच धीमी करके इस पर एक छोटी बैटरमिश्रण लेकर फैलाएं ।

– फिर आंच तेज कर दें व डोसे पर एक चम्मच घी डालकर फैला लें ।

– जब डोसा करारा होने लगे तो किनारे से छुड़ाते हुए फोल्ड कर लें ।

– तैयार डोसे को एक प्लेट पर निकालकर रख लें ।

– इसी विधि से बाकी बैटर से डोसा बना लें ।

– तैयार डोसे को नारियल की चटनी के साथ सर्व करें व खाएं ।

– आप चाहें तो बिना प्याज वाला सांभर भी बना सकती हैं ।

स्वास्थ्य के लिए बेहद फायेदेमंद होता है भुना हुआ लहसुन

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हम आपकी जानकारी के लिए बताते चलें लहसुन का मुख्य रूप से उपयोग मसाले के रूप में किया जाता है, किन्तु लहसुन एक तरह से औषधि भी है, जो एक नहीं कई रोगों में कार्यआता है. वेद-पुराणों में लहसुन को अमृत तुल्य बताया गया है. आयुर्वेद के अनुसार लहसुन को एक बहुत ही फायदेमंद औषधि बताया गया है.

यह है इसके फायदे

जानकारी के अनुसार अगर प्रतिदिन लहसुन की 2-4 कलियां खाएं तो इससे ह्रदय संबंधी रोगों से बचा जा सकता है . यह कई तरह की बीमारियों से दूर रखने में मदद करता है . जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत रहती है उन्हें भुना हुआ लहसुन जरूर खाना चाहिए . वही भुना हुआ लहसुन दिल के लिए बहुत ही कार्य की वस्तु है . भुन हुए लहसुन में ऐसे तत्व होते हैं जो बॉडी में गुड कॉलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाते हैं जिनसे बैड कोलेस्ट्रॉल को समाप्त करने में सरलता होती है .

हड्डियां भी होती है मजबूत

इसी के साथ सर्दी-जुकाम में भुना हुआ रामबाण का कार्य करता है . यह बॉडी की इम्यूनिटी क्षमता को बढ़ाता है . इसके अतिरिक्त यह एंटी एजिंग का कार्य भी करता है . भुना लहसुन खाने से हड्डियां मजबूत होती है . इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि रात को सोने से पहले भुना हुआ लहसुन खाने से यूरिन के माध्यम से आपके बॉडी में मौजूद विषाक्त तत्व बाहर निकल जाएंगे . वजन कम करने भी यह बहुत ज्यादा मददगार है . इसका सेवन करने से बॉडी का फैट तेजी से बर्न होता है जिससे कि वजन कम होने लगता है .

बड़ी खबर : फिल्म उरी के एक्टर विक्की कौशल को शूटिंग के दौरान लगी चोट, चेहरे पर लगे 13 टांके

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उरी फिल्म के एक्टर विक्की कौशल को लगी शूटिंग के दौरान चोट, चेहरे पर लगे 13 टांके

बॉलीवुड एक्टर विक्की कौशल एक दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए हैं। गुजरात में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें चेहरे पर गंभीर चोटें लगी हैं। विक्की कौशल एक एक्शन सीक्वेंस की शूटिंग कर रहे थे जब उन्हें यह चोट लगी।

बॉलीवुड फिल्मों के कारोबार का विश्लेषण करने वाले तरण आदर्श ने अपने ट्विटर पर यह जानकारी दी है। उन्होंने लिखा है कि भानु प्रताप सिंह के डायरेक्शन में बन रही फिल्म की शूटिंग के दौरान विक्की कौशल के चेहरे पर चोट लगी है और उन्हें 13 टांके लगे हैं।

जानिए कैसी होगी ये बाइक, ट्रियांफ भारत में लॉन्च करेगी 2019 ट्रियांफ स्पीड ट्विन

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मशहूर मोटरसाइकिल निर्माता कंपनी ट्रायम्फ मोटरसाइकिल इंडिया भारत में बहुत जल्द अपनी स्पीड टविन 2019 को लॉन्च करने जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इस नई 2019 ट्रायम्फ स्पीड टविन को भारत के साथ-साथ वैश्विक बाजार में भी उतारा जाएगा। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बाइक में इंटरनेशल बाजार की कुछ नए फीचर्स देखने को मिल सकती है।

इस नई ट्रियांफ 2019 स्पीड ट्विन बाइक को बेहतर पावर के लिए 1200 सीसी का पैरेलल ट्विन लिक्विड कूल्ड इंजन दिया जाएगा।यह इंजन इस मोटरसाइकिल को मैक्सिमम 97 बीएचपी की पावर और 112 न्यूटन मीटर का टॉर्क जनरेट करती है। इसके अलावा इस इंजन को 6-स्पीड गियरबॉक्स से लैस किया गया है।

ट्रियांफ मोटरसाइकिल को भारतीय बाजार में इस महीने 24 तारिख को लॉन्च किया जाना है। माना जा रहा है कि इस नई ट्रियांफ स्पीड ट्विन बाइक को कई नए बदलावों और फीचर्स के साथ पेश किया जाएगा। अगर हम इस बाइक के नए फीचर्स की बात करें तो इसमें रेट्रो स्टाइल वाले ट्विन पॉड डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर का इस्तेमाल किया गया है जो कि ऑडोमीटर, गियर इंडीकेटर, ट्रैक्शन कंट्रोल सेटिंग, फ्यूल लेवल जैसे कई शानदार फीचर्स दिए जाएंगे।

इस नई 2019 ट्रियांफ स्पीड ट्विन मोटरसाइकिल में TPMS इंडिकेटर, एलईडी सेटअप (हेडलैंप, टेललाइट तथा इंडिकेटर), हीटेड ग्रिप्स, बार एंड मिरर्स जैसे अन्य फीचर्स भी शामिल किया गया है। इस खूबसूरत पावरफुल बाइक में तीन राइडिंग मोड्स रेन, रोड और इस बाइक में तीन राइडिंग मोड रेन,रोड और स्पोर्ट दिया गया है। इस बाइक को बेहतर ब्रेकिंग के लिए फ्रंट में डुअल डिस्क और रियर में सिंगल डिस्क एबीएस से लैस किया जाएगा।

प्रज्ञा पर चेतावनी, मोदी बोले- मुगालते मे न रहें, कांग्रेस को महंगी पड़ेगी साध्वी

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मध्यप्रदेश में भोपाल से साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को प्रत्याशी बनाए पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि साध्वी की उम्मीदवारी कांग्रेस को महंगी पड़ने वाली है। उन्होंने राहुल गांधी और सोनिया गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा कि अमेठी और रायबरेली से कांग्रेस उम्मीदवार भी जमानत पर रिहा है। इस पर चर्चा नहीं, लेकिन भोपाल की उम्मीदवार जमानत पर हो तो ये बहुत बड़ा तूफान खड़ा कर देते हैं ये कैसे चलेगा।

उन्होंने कहा कि उन सबको जवाब देने के लिए साध्वी प्रज्ञा एक प्रतीक है और यह कांग्रेस को महंगा पड़ने वाला है। पीएम नरेंद्र मोदी ने एक टीवी चैनल को दिए गए साक्षात्कार के दौरान ये बातें कही। उन्होंने कहा कि समझौता एक्सप्रेस का फैसला आ गया है। क्या निकला? दुनिया में 5,000 साल तक जिस महान संस्कृति और परंपरा ने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का संदेश दिया, ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:’ का संदेश दिया, जिस संस्कृति ने ‘एकम् सद् विप्रा: बहुधा वदन्ति’ का संदेश दिया, ऐसी संस्कृति को आपने(कांग्रेस) बिना सबूत के आतंकवादी कह दिया।

पीएम मोदी ने कांग्रेस के दिवंगत नेता पूर्व पीएम राजीव गांधी को भी निशाने पर लिया। कहा कि जब 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या हुई तो उनके सुपुत्र ने कहा था, एक बड़ा पेड़ गिरता है तो जमीन हिलती है। उसके बाद देश में हजारों सरदारों का कत्लेआम किया गया। क्या यह एक निश्चित लोगों का आतंक नहीं था क्या? इसके बावजूद उन्हें प्रधानमंत्री बना दिया गया। इसके संबंध में देश के न्यूट्रल मीडिया ने सवाल नहीं पूछा, जो आज पूछ रहे हैं।

लोकसभा चुनाव 2019 : छत्तीसगढ़ में यूपी-बिहार जैसा नहीं है जाति का गणित

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‘तेली हैं हम और हममें है दम’

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगे अभनपुर इलाके में एक नौजवान के सेलफ़ोन पर बज रहे तेली-साहू समाज को एकजुट करने की कोशिश वाले इस गीत को सुनते हुए यह समझना मुश्किल नहीं है कि इस बार फिर चुनाव में जाति को आज़माने की कोशिश जारी है.

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने छत्तीसगढ़ दौरे में साहू जाति का कार्ड खेला और उसके बाद से तो जैसे राज्य में जाति की राजनीति को लेकर घमासान मचा हुआ है.

पीएम मोदी ने छत्तीसगढ़ की अपनी सभाओं में कहा, “नामदार गालियां दे रहे हैं. सारे मोदी को चोर कहते हैं. यहां का साहू समाज गुजरात में होता तो उन्हें मोदी कहते हैं. राजस्थान में होता तो राठौर कहते. तो सोचिए, सारे साहू चोर हैं क्या?”

नरेंद्र मोदी की सभा समाप्त होते-होते राज्य भर में साहू समाज के बीच इस भाषण की चर्चा शुरू हो गई. राज्य की 14 फ़ीसदी आबादी और लगभग एक-तिहाई सीटों पर निर्णायक वोटों वाले इस समाज की ओर से राज्य के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कमान संभाली और सोशल मीडिया में अपना रिकॉर्डेड बयान जारी करते हुए कहा कि एक व्यक्ति की ग़लती पूरे समाज की ग़लती नहीं हो सकती.

राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट करके तंज कसा, “गुजरात में ‘चायवाला’, यूपी में जाकर ‘गंगा मां का बेटा’, छत्तीसगढ़ में आते ही ‘साहू’ और अंबानी के यहां जाते ही ‘चौकीदार’. साथियों, बहुरूपिए से सावधान रहें ! क्योंकि जैसे ही सावधानी हटी, वैसे ही पंचवर्षीय दुर्घटना घटी!! जानकारी और जागरूकता ही बचाव है. जय जोहार, जय कर्मा माता !”

इसके बाद से छत्तीसगढ़ में जाति को लेकर बयानों की भरमार आ गई है.

जाति की गहरी जड़ें

चुनावों में यह आम धारणा है कि बिहार या उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में सारा चुनावी समीकरण जाति के आस-पास घूमता है. लेकिन हकीकत यह है कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी एक-एक सीट का बंटवारा जाति के आधार पर ही होता है और राजनीति जाति की धुरी के आस-पास ही घूमती है.

जाति की प्रतिद्वंद्विता भले ही उत्तर प्रदेश, राजस्थान या बिहार जैसी न भी हो तो भी चुनाव में यहां जाति एक बड़ा आधार होता है.

छत्तीसगढ़ में 32 फ़ीसदी आदिवासी आबादी है और 13 फ़ीसदी अनुसूचित जाति. इसी तरह राज्य में 47 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की आबादी है.

दोनों ही पार्टियों ने अन्य पिछड़ा वर्ग के चार-चार उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है. एक-एक कुर्मी और एक-एक अनुसूचित जाति के उम्मीदवार दोनों ही पार्टियों की ओर से चुनाव मैदान में हैं. कांग्रेस ने ब्राह्मण उम्मीदवार उतारा है तो भाजपा ने भी.

छत्तीसगढ़ में लोकसभा का चुनाव प्रचार अपने चरम पर है और चुनाव के दूसरे चरण में गुरुवार को तीन सीटों पर मतदान होना है.

ज़ाहिर है, मतदाताओं को साधने के लिये राजनीतिक दल अपने सारे हथियार अपना रहे हैं और मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जाति कार्ड ने इन हथियारों को और धार दे दी है.

19 साल पहले बने छत्तीसगढ़ में किसी भी दल को यह मानने में अब गुरेज नहीं है कि जाति के नाम पर वोट राजनीति की बड़ी सच्चाई है.

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव कहते हैं, “जातिगत समीकरण पर भाजपा पूर्णतः नहीं चलती है लेकिन हम उसे नकार भी नहीं सकते. थोड़ा-बहुत समीकरणों को देखना ही पड़ता है. जहां जिस जाति की बहुलता है, वहां पर उस जाति को प्राथमिकता देते हैं. लेकिन केवल जातिगत आधार पर ही भाजपा चुनाव नहीं लड़ती है. जैसे साहू बहुल इलाके में भी हमने सामान्य जाति के उम्मीदवार को टिकट दिया है.”

हम जाति की राजनीति नहीं करते: कांग्रेस

दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता शैलेष नितिन त्रिवेदी मानते हैं कि टिकट बंटवारे में जातिगत समीकरणों का ध्यान रखा गया है, लेकिन वे इससे साफ़ इनकार करते हैं कि उनकी पार्टी जातिगत राजनीति करती है.

त्रिवेदी कहते हैं, “दरअसल भाजपा जब धर्म की राजनीति में असफल हो गई है तो अब जाति के नाम पर समाज को विभाजित करने की राजनीति कर रही है, जिसे छत्तीसगढ़ के लोग कभी पसंद नहीं करते.”

लेकिन पिछले कई सालों से अपनी जाति को लेकर तरह-तरह के आयोग और निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मुकदमा झेल चुके छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का कहना है कि पहले जाति छत्तीसगढ़ में बहुत बड़ा मुद्दा नहीं हुआ करता था लेकिन पिछले तीन-चार सालों में पिछड़े वर्ग की जो जातियां हैं, उनमें एकजुटता बढ़ती जा रही है.

जोगी कहते हैं, “जातिगत समीकरण का महत्व अब बढ़ गया है. भाजपा, कांग्रेस और काफ़ी हद तक बसपा ने भी जातिगत समीकरणों को देख कर ही टिकट दिए हैं.”

‘जाति नहीं विकास है मुद्दा’

बिलासपुर स्थित गुरुघासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान की प्रमुख डॉक्टर अनुपमा सक्सेना मानती हैं कि छत्तीसगढ़ के चुनाव में जाति आधार तो है लेकिन यही एकमात्र आधार नहीं है.

पिछले कई चुनावों में तमाम राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय शोध और सर्वेक्षणों से जुड़ी रहीं डॉक्टर सक्सेना मानती हैं कि छत्तीसगढ़ की राजनीति के जातिगत समीकरण बिहार या उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से अलग है.

वो कहती हैं, “दूसरे राज्यों में जाति व्यवस्था ज़्यादा जटिल है. इन राज्यों में कई बार तो जाति ही चुनाव में हार-जीत का भी निर्धारण कर देती है. यहां तक कि वहां जाति आधारित राजनीतिक दल भी विकसित हो गये हैं, जबकि छत्तीसगढ़ की राजनीति अभी भी दो राष्ट्रीय दलों के इर्द-गिर्द ही घूम रही है.”

अनुपमा सक्सेना का दावा है कि राज्य बनने के बाद से शासन और लोक कल्याण की नीतियां यहां चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं. राज्य में 15 सालों तक भाजपा की सरकार के काबिज़ रहने के पीछे विकास से जुड़ी योजनाओं की सफलता को वो बड़ा कारण मानती हैं.

उनका कहना है कि किसानों से जुड़े मुद्दों की भाजपा सरकार द्वारा अनदेखी और दूसरी लोक कल्याणकारी योजनाओं में आई गड़बड़ियों को लगातार कांग्रेस पार्टी ने उठाया और सरकार बनाने में सफल हुई.

छत्तीसगढ़ में माओवादियों ने चुनाव बहिष्कार किया है

सत्ता और समाज में सहभागिता

हालांकि राजनीति और समाज की पड़ताल करने वाला एक बड़ा वर्ग मानता है कि पिछले कुछ सालों में जैसे-जैसे जीवन में कॉर्पोरेट का हस्तक्षेप बढ़ा है और रोजगार में कमी आई है, उसने भी जाति समाज को मज़बूती प्रदान की है.

पहले से ही सत्ता और समाज में अपनी सहभागिता से वंचित एक बड़े वर्ग के लिये जाति व्यवस्था ने सम्मान के साथ और बिना शर्त के समावेशन का अवसर उपलब्ध कराया है.

सामाजिक और राजनीतिक विश्लेषक डॉक्टर विक्रम सिंघल कहते हैं, “छत्तीसगढ़ में आप इस बात पर ख़ुश हो सकते हैं कि यहां राजनीति में जातिगत समीकरणों के बाद भी उनमें तरलता बची हुई है. यानी पिछले साल किसी जाति ने किसी ख़ास पार्टी को वोट किया था वो इस साल किसी दूसरी पार्टी को वोट कर सकती है. यही कारण है कि यहां किसी भी पार्टी में किसी ख़ास जाति विशेष का कब्जा नहीं है जैसा कि हम बिहार या उत्तर प्रदेश में देखते हैं.”

हालांकि सामाजिक कार्यकर्ता और एसोसिएशन फ़ॉर डेमोक्रेटिक रिफ़ॉर्म (एडीआर) के संयोजक गौतम बंद्योपाध्याय इसके पीछे राष्ट्रीय कारण भी देखते हैं.

गौतम बंद्योपाध्याय का कहना है कि पिछले तीन-चार चुनावों से राष्ट्रीय दलों ने अपने राजनीतिक अभियान को जाति की दिशा में तेजी से मोड़ा है.

आदिवासियों और वंचितों के बीच जल, जंगल और ज़मीन के मुद्दे पर काम करने वाले बंद्योपाध्याय कहते हैं कि इन संगठनों ने तरह-तरह की जातिगत पंचायतों को खाद-पानी देने का काम किया है, जिसके कारण जाति की राजनीति लगातार मजबूत होती चली गई है.

वो मानते हैं कि राजनीतिक दल, प्रत्याशियों के चयन से पहले से ही जातिगत संभावनाओं को टटोलते हैं और यही प्रक्रिया चुनाव के दौरान भी जारी रहती है.

गौतम बंद्योपाध्याय कहते हैं, “36-36 राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन करने वाले राष्ट्रीय दलों ने जाति आधारित राजनीतिक संगठनों को अपने साथ जोड़ कर रखा है. इसका असर दूसरे राज्यों में बसने वाली उन जाति विशेष पर भी पड़ना लाज़मी है.”

यह सच है कि जिन समस्याओं को महज सामाजिक समस्या की तरह देखा जाता है, उनकी जड़ें भी अंततः राजनीति में ही छुपी हुई हैं. ऐसे में राजनीति से जाति अगले कुछ सालों में जाती हुई नज़र आयेगी, इसकी संभावना तो कम ही है.