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रायपुर : 25 में सिर्फ दो प्रत्याशी इन्कम टैक्स पेयी

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लोकसभा चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे 25 उम्मीदवारों में गिने-चुने ही हैं, जो इन्कम टैक्स देने की हैसियत में हैं। बाकी प्रत्याशियों में कोई मजदूर तो कोई बेरोजगार है। इनके पास फूटी कौड़ी भी नहीं है। कांग्रेस और बीजेपी के प्रत्याशी हर साल लाखों रुपये के इन्कम पर टैक्स जमा करते हैं। कांगे्रस प्रत्याशी प्रमोद दुबे ने नामांकन पत्र जमा करते समय दिए एफिडेविट में आयकर रिर्टन की जानकारी दी है। इन्होंने 2013-14 में 21 लाख 55 हजार 340 रुपए, 2014-15 में 93 लाख 17 हजार 310, 2015-16 में 38 लाख 96 हजार 160, 2016-17 में 36 लाख 36 हजार, 2017-18 में 29 लाख 67 हजार 730 रुपये आय दिखाई है। उन्होंने पत्नी दिप्ती दुबे के भी 2013-14 में दो लाख, 2014-15 में तीन लाख 9 हजार, 2015-16 में तीन लाख 13 हजार, 2016-17 में तीन लाख 45 हजार और 2017-18 में तीन लाख 49 हजार रुपए आयकर देने का ब्योरा दिया है।

बीजेपी प्रत्याशी सुनील सोनी ने भी सालाना इन्कम की जानकारी दी है। इन्होंने 2013-14 में तीन लाख 95 हजार 132, 2014-15 में चार लाख 97 हजार, 2015-16 में चार लाख 79 हजार 51 व 2017-18 में चार लाख 66 हजार 877 सालाना इन्कम का ब्योरा दिया है। इनकी पत्नी तारा सोनी की 2013-14 में तीन लाख 76 हजार 655, 2014-15 में चार लाख 52 हजार, 2015-16 में पांच लाख 21 हजार 51 व 2016-17 में पांच लाख 55 हजार 877 व 2017-18 में पांच लाख 1698 रुपये आय का ब्योरा दिया है।

–बहुतों के पास फूटी कौड़ी नहीं

संजू कुमार यादव भी रायपुर लोकसभा से प्रत्याशी हैं। वे ग्राम खरोरा में नेता जी चौक के पास चाय होटल और जूस सेंटर चलाते हैं। इन्होंने चंदा कर और कर्ज लेकर नामांकन दखिल किया। इनका कहना है कि उनके पास फूटी कौड़ी नहीं है। इनके ही समान बहुतेरे प्रत्याशी हैं जिनके पास इन्कम शो करने लायक पैसे नहीं हैं।

रायपुर : सड़क पर कांग्रेस प्रत्याशी का पैदल रोड शो

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रायपुर लोकसभा क्षेत्र में चुनावी सरगर्मी बढ़ गई है। ग्रामीण अंचलों के बाद रायपुर के कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद दुबे ने अब शहर में रोड शो किया। प्रमोद दुबे सबसे पहले महावीर जयंती के अवसर पर सुबह बढ़ई पारा से दादा बाड़ी जैन समुदाय द्वारा निकाली गई रैली में शामिल हुए। उसके बाद वे पश्चिम विधानसभा गुढ़ियारी स्थित हनुमान मंदिर में पूजा अर्चना कर खमतराई, गुढ़ियारी होते हुए भारतमाता चौक तक रोड शो किया। भारी संख्या में शामिल होकर लोगों ने उनका हौसला बढ़ाया। रोड शो करने के बाद वह छोटा भवानी नगर वार्ड नंबर- 2 में नुक्कड़ सभा को संबोधित कर बीते 3 माह के अन्दर राज्य सरकार द्वारा किये गये कार्यों को बताया। प्रमोद दुबे ने कांग्रेस पार्टी के घोषणा पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि अन्याय के दिन अब जाने वाले हैं, कांग्रेस पार्टी हर गरीब के साथ खड़ी है।

राजनांदगांव : मतदान में कुछ ही देर में बूथों में लग गई है लोगों की भीड़

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दुधमुंहों को साथ लेकर पहुंचीं महिलाएं, बुजुर्गों की संख्या भी ज्यादा

00 राजनांदगांव लोकसभा सीट से 14 प्रत्याशी हैं मैदान में, कुल 2322 बूथ बनाए गए

लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में आज छत्तीसगढ़ की राजनांदगांव समेत महासमुंद व कांकेर सीट में कुछ ही समय बाद मतदान होने जा रहा है। वोटिंग सुबह सात बजे से शुरू होगी, लेकिन ग्रामीण अंचल में मतदाता सुबह छह बजे से ही पहुंचना शुरू हो गए हैं। इनमें ज्यादातर ऐसे मतदाता हैं, जो दूरदराज से अलसुबह ही निकल गए थे। शहरी इलाकों में भी बूथों के सामने रौनक है। लोग मतदान को लेकर काफी उत्साहित हैं। इस सीट के महाराष्ट्र से लगे नक्सल प्रभावित मोहला-मानपुर लोकसभा क्षेत्र में सुरक्षा के मद्देनजर अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। यहां दोपहर तीन बजे तक मतदान होगा। वहीं अन्य विधानसभा क्षेत्रों में शाम पांच बजे तक वोटिंग होगी।

राजनांदगांव लोकसभा सीट से कुल 14 प्रत्याशी मैदान में हैं। इनके भाग्य का फैसला 17 लाख 15 हजार 492 मतदाता करेंगे। इस सीट में कुल आठ विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जहां कुल 2322 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। मतदान को लेकर लोगों में काफी उत्साह है। करीब आधे घंटे बाद मतदान शुरू हो जाएगा। लेकिन लोग बूथों में अभी जुट गए हैं। बूथ से तय दूरी में टेंट लगाकर बैठे राजनीतिक दलों के बूथ प्रभारियों से मतदाता पर्ची का मिलान कर बूथ कक्ष का पता लगाने में भी लोग जुटे हुए हैं। मतदान केंद्रों के सामने महिलाओं की संख्या ज्यादा हैं। इनमें से कई दुधमुंहों को लेकर पहुंची हैं। बुजुर्ग भी हैं। धूप तेज होने के पहले ही ये मतदान कर लेना चाहते हैं। मोहला-मानपुर इलाके के कई बूथों में चारों तरफ हथियारबंद जवान तैनात हैं, जिससे किसी प्रकार की अप्रिय घटना न होने पाए।

राजनांदगांव लोकसभा चुनाव 2019: राजनांदगांव में वोटिंग जारी, मतदाताओं में दिख रहा उत्साह

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राजनांदगांव। लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में छत्तीसगढ़ की तीन सीटों राजनांदगांव, कांकेर और महासमुंद सीट में वोटिंग हो रही है। राजनांदगांव में सुबह से ही मतदाता पोलिंग बूथ पर पहुंचना शुरू हो गए हैं। तेज गर्मी को देखते हुए चुनाव आयोग ने वोटिंग के वक्त में परिवर्तन किया है। अब 8 बजे के बजाए सात बजे से मतदान हो रहा है। छत्तीसगढ़ पुलिस के साथ केंद्रीय सुरक्षा बलाें की कड़ी चाैकसी के बीच मतदान हो रहा है। यहां मुकाबला भाजपा के संतोष पांडे और कांग्रेस के भोलाराम साहू के बीच है। लाेकसभा क्षेत्र के माेहला-मानपुर विधानसभा क्षेत्र में सुबह 7 से दाेपहर 3 बजे तक मतदान हाेना है। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश की सीमा से लगे गांवाें में भी लगने लगी है मतदाताओं की कतार देखने को मिल रही है।

PM नरेन्द्र मोदी के साहू बयान पर JCCJ ने जताई आपत्ति, शिकायत की तैयारी

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लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए सभी पार्टियां पूरी ताकत झोंक रही हैं. मगर पिछले दिनों योगी आदित्यनाथ और मायावती पर चुनाव आयोग ने अपना डंडा चलाया था. अब उसी तर्ज पर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे पीएम नरेन्द्र मोदी के साहू मतदाताओं को लेकर दिये बयान पर कार्रवाई करने के लिए चुनाव आयोग के पास जाने की तैयारी में है.

चुनाव आयोग ने पिछले दिनों यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ को 72 घंटे और मायावती को 48 घंटे के लिए रैली और रोड शो करने पर बैन लगाया था. उसी तर्ज पर पीएम मोदी की भाटापारा में चुनावी रैली में दिये साहू समाज को साधने के प्रयास को लेकर अजीत जोगी की पार्टी ने आपत्ति दर्ज कराई है. अजीत जोगी की पार्टी के प्रवक्ता संजीव अग्रवाल का कहना है कि चुनाव आयोग को पीएम मोदी के बयान पर कार्रवाई करनी चाहिए. पीएम के बयान की शिकायत हम करेंगे.

संजीव अग्रवाल का कहना है कि जब बड़े-बड़े नेताओ की रैलियों को चुनाव आयोग बैन कर सकता हैं तो पीएम मोदी पर बैन क्यों नहीं लगा सकता हैं. दूसरी ओर साहू समाज के प्रतिनिधि मुरारी साहू का कहना है कि पूरे देश में 14 करोड़ तेली समाज के लोग हैं. कांग्रेस के कहने के हिसाब से हम सभी चोर हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. बहरहाल साहू समाज को लेकर मचे घमासान के बीच अब इस मामले को लेकर जोगी कांग्रेस चुनाव आयोग से शिकायत करने के मूड में आ गई है. अब देखने वाली बात यह होगी कि यह मामला चुनावी समय में और कितना उछलता है.

साहू समाज पर दिए पीएम मोदी के बयान पर सीएम भूपेश बघेल ने किया पलटवार, कही ये बात

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरगुजा और कोरबा जिले में चुनावी प्रचार के लिए बुधवार को रवाना हुए. स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव भी उनके साथ रवाना हुए. चुनाव प्रचार के लिए रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साहू समाज पर दिए एक बयान पलटवार किया है. पीएम मोदी द्वारा उठाए जातिवादी राजनीति के सवाल पर सीएम बघेल ने कहा कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह के बारे में आप कल्पना नहीं कर सकते उससे ज्यादा भी नीचे गिर गए है. पीएम मोदी का कल का भाषण भी उसी स्तर का था. सीएम बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में जातिवाद नहीं चलता. यदि एक व्यक्ति ने चोरी किया है तो वो पूरी जाति को लपेटने की कोशिश कर रहे है. ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. प्रधानमंत्री को इस प्रकार की भाषा का उपयोग नहीं करना चाहिए. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि व्यक्ति यदि चोरी करता है ,डकैती करता है तो वह किसी भी जाति या धर्म को मानने वाला होता है. इसका मतलब ये थोड़ी है कि जाति धर्म के लोग भी उस प्रकार के हत्यारे या लुटेरे हो जाएंगे, यह बिल्कुल गलत बात है. वहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के दौरे को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि 20 अप्रैल को बिलासपुर के सकरी में आएंगे और सभा को संबोधित करेंगे.

बता दें कि पीएम नरेन्द्र मोदी ने कोरबा में मंगलवार को चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस के उस बयान पर पलटवार किया, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि हर चोर मोदी क्यों होता है. नरेन्द्र मोदी ने कहा कि वो कहते हैं कि हर मोदी चोर होता है. छत्तीसगढ़ में साहू समाज के जो लोग हैं, उसी समाज को गुजरात में मोदी कहा जाता है तो क्या सारे साहू समाज के लोग चोर हैं. क्या उन्हें ऐसी भाषा का प्रयोग करना चाहिए.

भाजपा ने मालेगांव धमाके की आरोपी साध्वी प्रज्ञा को भोपाल से​ दिग्विजय सिंह के ख़िलाफ़ उतारा

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महाराष्ट्र के मालेगांव में साल 2008 में हुए बम विस्फोट में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर एक आरोपी हैं. वह फिलहाल ज़मानत पर बाहर हैं.

भोपाल: 2008 मालेगांव बम विस्फोट मामले में आरोपी रहीं साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर बुधवार को आधिकारिक रूप से भाजपा में शामिल हो गईं. भाजपा में शामिल होने के बाद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा, ‘मैं आज औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हो गई हूं. मैं चुनाव लड़ूंगी और जीतूंगी.’

भाजपा ने साध्वी प्रज्ञा को मध्य प्रदेश के भोपाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया है. इस सीट पर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह कांग्रेस के उम्मीदवार हैं. भोपाल से चुनाव लड़ने की बात पर साध्वी प्रज्ञा ने कहा, ‘हम तैयार हैं, अब उसी कार्य में लग गए हैं.’

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साध्वी प्रज्ञा बुधवार को भोपाल स्थित भाजपा के कार्यालय पहुंचीं और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित कई नेताओं से मुलाकात की. भोपाल से भाजपा के मौजूदा सांसद आलोक संजर ने कहा कि उनको पार्टी का पूरा समर्थन है और पार्टी सुनिश्चित करेगी कि वह चुनाव जीतें.

मालूम हो कि साध्वी प्रज्ञा पर मालेगांव बम धमाके का आरोप है. उनके अलावा लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित और छह अन्य आरोपी हैं.

नासिक जिले के मालेगांव में भिकू चौक के निकट 29 सितंबर 2008 को हुए बम विस्फोट में छह लोगों की मौत हुई थी और 101 से अधिक घायल हो गए थे. वह फिलहाल इस मामले में ज़मानत पर बाहर हैं.

साध्वी प्रज्ञा हमेशा से विवादों में रही हैं, वह भाजपा के युवा संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की महिला इकाई दुर्गा वाहिनी से जुड़ी रही हैं.

हालांकि, मालेगांव मामले में अदालत ने उनके ख़िलाफ़ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) हटा दिया था. उन पर गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामले की सुनवाई चल रही है.

छत्तीसगढ़ में लगातार गिरते जनाधार के बीच बसपा ने किया त्रिकोणीय मुकाबले का दावा

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छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद बहुजन समाज पार्टी का जनाधार लगातार कम होता चला गया. वोटो की संख्या भी कम होती चली गई. इसके विपरीत साल 2013 के चुनाव में निर्दलीयों ने प्रदेश में खूब वोट बटोरे थे. नया राज्य बनने के बाद अब तक हुए तीन लोकसभा चुनावों में तकरीबन 80 फीसदी से ज्यादा वोट भाजपा और कांग्रेस के बीच बंटते रहे हैं. तीसरी पार्टियो को बीते तीन चुनाव में 10 फीसदी वोट भी हासिल नहीं हुए हैं. इतना ही नहीं निर्दलीय प्रत्याशियों को संयुक्त रुप से छोटी पार्टियों से ज्यादा वोट मिलते रहे हैं.

साल 1998 के चुनाव में बसपा को 7.34 फीसदी वोट मिले थे. इसके बाद से प्रदेश में उसका वोट शेयर लगातार कम होता रहा है. 1998 से 2014 के चुनाव के बीच बसपा का वोट शेयर घटकर 2.44 फीसदी पर आ गया है. बावजूद इसके बसपा और जोगी कांग्रेस को उम्मीद है कि इस बार के लोकसभा चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले होने का साथ ही साथ बसपा के लिए चुनाव के अच्छे परिणाम आने की संभावना है. बसपा के प्रदेश प्रभारी अशोक सिद्धार्थ का कहना है कि छत्तीसगढ़ में इस बार पार्टी का खाता खुलेगा. पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का कहना है कि विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव में भी बसपा कुछ सीटें जरूर जीतेगी.

अगर तीन बार के लोकसभा चुनाव पार्टियां के वोट शेयर की बात करें तो साल 2014 में बसपा को 2.44, साल 2009 के चुनाव में 4.52 और 2004 के चुनाव में 4.54 फिसदी वोट मिले थे. यानी की साफ है कि छत्तीसगढ़ में बसपा का जनाधार लगातार कम होता गया है. बहरहाल लोकसभा चुनाव का सियासी ऊंट किस करवट बैठेगा. ये तो आने वाला चुनाव का परिणाम ही तय करेगा, लेकिन कहीं बसपा जो सपनों खुली आंखो से देख रही है. चुनाव के पिछले आंकड़े उस पर पानी फेरते नजर आ रहे हैं.

विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद लोकसभा चुनाव में क्या कर रहे हैं डॉ. रमन सिंह?

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छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 में सत्तारूढ़ बीजेपी को करारी हार मिली. सूबे में 15 साल सत्ता में रहने वाली बीजेपी मह​ज 15 सीटों पर ही सिमट गई. छत्तीसगढ़ में बीजेपी ने विधानसभा 2018 का चुनाव तब के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के चेहरे पर लड़ा था. चुनावी सभाओं में डॉ. रमन सिंह कहते थे कि प्रत्याशी नहीं रमन सिंह और कमल को देखकर वोट दीजिए. लिहाजा विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार की जिम्मेदारी खुद डॉ. रमन सिंह ने ली. अब सवाल उठ रहे हैं कि विधानसभा चुनाव के चार महीने बाद हो रहे लोकसभा चुनाव में डॉ. रमन सिंह की छत्तीसगढ़ में ​भूमिका क्या है?

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 में मिली करारी हार के कुछ दिन बाद ही आला कमान ने डॉ. रमन सिंह को बीजेपी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर ये संदेश दिया कि पार्टी को उनपर अब भी पूरा भरोसा है. विधानसभा चुनाव में विरोधी दल कांग्रेस को मिली बंपर जीत के बाद डॉ. रमन सिंह विपक्ष में भी सक्रिय नजर आए. हर मोर्चे पर मीडिया के सामने आए और अपने निर्वाचन क्षेत्र से ​चुनाव जीतने के बाद भी पार्टी की हार को खुद की हार बताई.

बदलापुर की राजनीति का नया नारा
जब कांग्रेस ने नागरिक आपूर्ति निगम घोटाला और अंतागढ़ टेपकांड में सीधे तौर पर डॉ. रमन और उनके परिवार के लोगों को घेरने की कोशिश की तो वे खुद सामने आए और कांग्रेस द्वारा बदलापुर की राजनीति करने का एक नया नारा प्रदेश में दे दिया. इतना ही नहीं नई सरकार बनने के बाद ताबड़तोड़ हो रहे तबादलों पर भी रमन सिंह ने राज्य सरकार को घेरा और तबादला उद्योग चलाने का एक और नया नारा दे दिया. इसी दौरान चर्चाएं होने लगीं कि डॉ. रमन सिंह को पार्टी लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी बना सकती है. अटकलें थीं कि उन्हें सांसद बेटे अभिषेक सिंह की राजनांदगांव सीट से चुनाव लड़ाया जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

अभिषेक सिंह को तिलक लगाती डॉ. रमन सिंह की पत्नी वीणा सिंह. फाइल फोटो.

बीजेपी ने छत्तीसगढ़ में नया प्रयोग किया और मौजूदा सभी सांसदों की टिकट काटकर नये चेहरों को मैदान में उतारा. यानी कि बेटे अभिषेक सिंह की टिकट तो कटी, लेकिन रमन सिंह को भी चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिला. माना जाने लगा कि लोकसभा चुनाव में डॉ. रमन सिंह की भूमिका नगण्य हो गई है और अंदरखाने चर्चा शुरू हो गई कि वे चुनाव में ज्यादा सक्रिय नहीं रहने वाले हैं.

रणनीतिकार की भूमिका
लोकसभा चुनाव 2019 के लिए छत्तीसगढ़ में सभी मौजूदा सांसदों की टिकट कटने के बाद विपक्ष के आरोप, मीडिया के सवाल और सांसद समर्थकों की नाराजगी से घिरी बीजेपी का चेहरा डॉ. रमन सिंह बने और उन्होंने आरोपों और सवालों का जवाब भी दिया और पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ता और सांसदों से व्यक्तिगत मुलाकात कर उन्हें साधने की कोशिश भी की. नामाकंन प्रक्रिया शुरू होने से पहले सबसे ज्यादा नाराज माने जा रहे रायपुर सांसद रमेश बैस से उनकी गुप्त मुलाकात की चर्चा भी खूब हुई. इसके अलावा चुनाव की रणनीति बनाने में भी अहम भूमिका निभाई है.

राजनांदगांव में चुनावी सभा में अमित शाह और डॉ. रमन सिंह.

हर मंच पर सक्रिय
लोकसभा चुनाव 2019 के लिए बीजेपी ने छत्तीसगढ़ प्रत्याशियों की पहली सूची 21 मार्च को जारी की. इसके बाद शुरू हुए नामांकन दाखिल प्रक्रिया में डॉ. रमन सिंह प्रदेश की लगभग सभी 11 सीटों पर बीजेपी प्रत्याशियों के साथ खुद मौजूद रहे. प्रचार प्रसार की जिम्मेदारी भी खुद संभाली. अलग सीटों पर अब तक 20 से अधिक सभा और रैलियं कर चुके हैं. लोकसभा चुनाव 2019 में 6 अप्रैल को पीएम नरेन्द्र मोदी की पहली चुनावी सभा से लेकर 16 अप्रैल को भाटापारा में पीएम मोदी की सभा हो या राजनांदगांव में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की सभा डॉ. रमन सिंह मंच पर साथ में नजर आए. इसके अलावा अलग से रैली और सभाएं भी कर रहे हैं.
चेहरे का प्रभाव
बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता श्रीचंद सुंदरानी कहते हैं छत्तीसगढ़ में पार्टी के लिए डॉ. रमन सिंह का चेहरा बहुत महत्वपूर्ण है. लोकसभा चुनाव में न सिर्फ संसदीय क्षेत्र बल्कि विधानसभा व बूथवार कार्यक्रमों की मॉनिटरिंग भी वे खुद कर रहे हैं. प्रचार प्रसार के साथ ही पार्टी की चुनावी रणनीति बनाने में भी वे अहम जिम्मेदारी निभा रहे हैं. विधानसभा चुनाव में पार्टी के हार का कारण कई हो सकते हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव में डॉ. रमन सिंह के चेहरे का प्रभाव मतदाताओं पर पड़ेगा, 15 सालों में किए विकास कार्यों को जनता बखूबी जानती है.

पीएम नरेन्द्र मोदी और डॉ. रमन सिंह​. फाइल फोटो.

पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने चर्चा में कहा कि पार्टी उन्हें जो भी जिम्मेदारी देती है, उसे पूरी इमानदारी के साथ पूरा करने की कोशिश करता हूं. विधानसभा चुनाव के बाद अब लोकसभा चुनाव में जो जिम्मेदारी मिली है, उसे भी पूरा करने का प्रयास है.

दुकानों पर नहीं मिल रहा है मशहूर शरबत रूह अफज़ा! जानें वजह

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गर्मियों में हर घर में रहने वाला मशहूर कोल्ड ड्रिंक रूह अफज़ा बाजार से गायब हो गया है. बाजार में अटकलें हैं कि इसे बनाने वाली कंपनी हमदर्द के मालिकों के बीच अनबन की वजह से रूह अफज़ा के प्रोडक्शन पर असर पड़ा है. हालांकि कंपनी का कुछ और ही कहना है. वर्षों से रूह अफज़ा गर्मियों में हमारा पसंदीदा पेय रहा है. मगर इस बार जब लोग बाजार में रूह अफज़ा खरीदने पहुंच रहे हैं तो उन्हें खाली हाथ वापस आना पड़ रहा है. खुद दुकानदार रूह अफज़ा के स्टॉक पर कंपनी की तरफ से ही नहीं आ पाने की बात मान रहे हैं.
1906 में हकीम हाफिज अब्दुल माजिद ने रूह अफज़ा का उत्पादन शुरू किया था. अब इसकी कमान उनके पोतों के हाथ में है. भारत के अलावा पाकिस्तान और बांग्लादेश भी काफी लोकप्रिय है रूह अफज़ा. खबर ये आ रही थी कि संपत्ति विवाद की वजह से रूह अफज़ा का प्रोडक्शन रुक गया. हालांकि कंपनी के प्रवक्ता का कहना है कि प्रोडक्शन बंद करना पड़ा और यह जल्द ही फिर से शुरू हो जाएगा. कंपनी ने मालिकों में किसी के विवाद से भी इनकार किया.