एक भाई ने अपनी बहनों और भाई को सिविल सर्विस का एग्जाम पास कराने के लिए लाखों की नौकरी छोड़ दी। उसने ऐसा काम किया जो हर कोई नहीं कर पाता है। जी हां पहले तो भाई ने खुद अपनी लाखों की नौकरी छोड़ी और उसके बाद सिविल सर्विस की तैयारी की। पहले उसने सिविल सर्विस का एग्जाम पास किया और बात में वही फॉर्मूला अपने भाई और बहनों को बताया।
जिसके दम पर आज इस परिवार में 2 IAS और 1 IPS अधिकारी है। इस परिवार का ताल्लुक यूपी के प्रतापगढ़ के लालगंज से है।
परिवार की बेटी क्षमा मिश्रा का कहना है कि उनका बचपन से सपना था कि वो सिविल सर्विसेज में जाएं। ग्रेजुएशन के बाद उनकी शादी हो गई, लेकिन उन्होंने तैयारी जारी रखी। उनके पति ने भी उनको सहयोग दिया, लेकिन कहते हैं न कि बिना गुरू के सफलता नहीं मिलती है। क्षमा के गुरू बनकर उनके भाई योगेश आए। योगेश ने अपनी बहन से कहा कि वो गलती कर रही है। इसके बाद ने अपनी नौकरी छोड़ दी, वो इंजीनियर हैं। 66 लाख की नौकरी छोड़ कर उन्होंने खुद सिविल सर्विस का एग्जाम देने का मन बनाया। योगेश ने कभी सिविल सर्विस का एग्जाम नहीं दिया था। उम्र के कारण उनके पास एक ही अटेम्प्ट था।
योगेश ने सिविल सर्विस के पुराने पेपर उठाए, उनको स्टडी किया, योगेश ने सिर्फ उन्ही टॉपिक्स को डीटेल में पढ़ा जो ज्यादातर एग्जाम में पूछे जाते हैं। उन्होंने बताया कि ज्यादातर छात्र सब्जेक्ट के मुताबिक डीटेल्ड स्टडी करते हैं, इस कड़ी में वो पुराने पेपर्स को दरकिनार कर देते हैं।
लेकिन उन्होंने इसका उल्टा किया और इसका फल देखने को मिला। योगेश ने पहली बार में ही सिविल सर्विस क्रैक कर ली। वो बताते हैं कि उनका फॉर्मूला काम आया और उसी फॉर्मूले को उन्होंने अपने भाई और बहन को बताया। जिसके दम पर उनके भाई बहन आज की तारीख में IAS और IPS अधिकारी बनने की ट्रेनिंग ले रहे हैं।
योगेश की पहली बहन क्षमा मिश्रा कर्नाटक कैडर की IPS हैं फिलहाल हैदराबाद में ट्रेनिंग ले रही हैं। दूसरे नंबर की बहन माधवी मिश्रा झारखंड कैडर की IAS अधिकारी हैं, वो वर्तमान में प्रतिनियुक्ति पर मिनिस्ट्री ऑफ फूड एंड प्रोसेसिंग में असिस्टेंट सेक्रेटरी के पद पर काम कर रही हैं।
इन दोनों बहनों के अलावा योगेश का भाई लोकेश भी बिहार कैडर का IAS अधिकारी है, लोकेश फिलहाल चंपारण में ट्रेनिंग पूरी कर रहे हैं। इस तरह से योगेश ने न केवल खुद सिविल सर्विस क्लियर किया बल्कि अपने भाई और बहनों को भी सफलता का मंत्र दिया।
योगेश के भाई और बहनों का कहना है कि भाई के कारण उनको काफी मदद मिली। उन्होंने अपनी लाखों की नौकरी छोड़कर हमारी मदद की। आज इस घर में 4 सिविल सर्विस अधिकारी हैं। योगेश भी इंडियन इंजीनियरिंग सर्विस पास करने के बाद अधिकारी हैं।
दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल से मुंबई के एक उद्योगपति के किडनैपिंग मामले में पुलिस ने कारवाई करते हुए लक्ष्मीनगर के एक मकान से सुरक्षित आजाद करा लिया है. पुलिस ने कार्रवाई के दौरान मौके से 6 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद 6 अपहरणकर्ताओं को भी गिरफ्तार किया है.
दरअसल मुंबई की मरीन इंजिनियरिंग कंपनी के 64 वर्षीय मैनेजिंग डायरेक्टर को दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके के एक होटल से एक महिला की मदद से को किडनैप किया गया था, जिसके बदले में 30 लाख रुपये की फिरौती मांगी जा रही थी. बता दें कि अपहरणकर्ताओं ने कारोबारी को नगर के एक मकान में रखा गया था और वहीं से फिरौती की रकम को लेकर सौदा चल रहा था, लेकिन तब तक पुलिस ने कामयाबी हासिल करते हुए सभी आरोपियों को धर दबोचा.
पुलिस के मुताबिक होटल से किडनैपिंग के बाद जांच में पता चला कि कारोबारी ने गुरुवार रात एक फाइव स्टार होटल में चेक-इन किया था. वहीं होटल के सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर पता चला कि होटल में एक महिला आई थी और कारोबारी को अपने साथ कार में बिठाकर बाहर ले गई थी.
सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल सर्विलांस के आधार पर पुलिस ने कारोबारी की लोकेशन का पता लगाया, इस बीच किडनैपर लगातार कंपनी के अधिकारियों को कॉल कर कारोबारी की फिरौती की रकम के लिए सौदा करते रहे. पुलिस के मुताबिक अपहरणकर्ताओं सभी कॉल्स वाट्सएप के जरिए की थी, जिससे उनकी लोकेशन और पहचान गुप्त रहें. आखिरकार 6 घंटे बाद पुलिस ने कारोबारी का पत लगाकर आरोपियों से चंगुल से बचा लिया.
वहीं कारोबारी ने बताया कि वह कारोबार के काम से दिल्ली आए थे और उसी दौरान एक महिला ने संपर्क कर खुद को उनका जानने वाला बताया और उसने मिलने के लिए कहा और उनके रूम पर पहुंच गई. थोड़ी देर बातचीत के बाद उसने किसी से मिलवाने की बात कही और दोनों साथ में होटल से निकल गए.
जिसके बाद महिला उन्हें लक्ष्मीनगर पहुंच गई और वहां दो अन्य महिलाएं के साथ मिलकर कारोबारी पर उनकी बेटी के रेप का आरोप लगाने लगीं. जब उन्होंने आरोप को झूठा बताया तो कहने लगीं कि अगर वह उन्हें 30 लाख रुपये दिलवा देंगे तो उन्हें छोड़ दिया जाएगा. फिलहाल पुलिस ने कारोबारी के चंगुल से सकुशल वापस छुड़ा लिया है और आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले की जांच में जुट गई है.
कुछ समय पहले ही पेट्रोल पंपों की मशीन में चिप लगाकर कम तोलने का खेल सामने आया था. देशभर में छापेमारी के बाद सैकड़ों की संख्या में पेट्रोल पंप मालिकों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी. पंप को सील कर दिया गया था. दूसरे विभागों के साथ ही यूपी एसटीएफ ने भी घटतौली के इस खेल को उजागर किया था.
एक बार फिर से पेट्रोल पंप पर कम पेट्रोल-डीजल तोलने का खेल शुरू हो गया है. ग्राहक को कम पेट्रोल देने के लिए अब नया तरीका निकाला गया है. पेट्रोल कम तोलने के इस खेल को यूपी का बाट-माप विभाग खुद अपनी आंखों से देख चुका है. एक लीटर पेट्रोल के बजाए ग्राहक को 900 ग्राम पेट्रोल दिया जा रहा है. परेशानी की बात ये है कि पहले की तरह से ये खेल पूरे यूपी और उसके आसपास के राज्यों में भी फैल चुका है. ग्राहक चाहकर भी इस घटतौली को पेट्रोल पंप पर नहीं पकड़ सकता है.
हाल ही में बाट-माप विभाग की एक टीम हापुड़ गई थी. वहां एक पंप मालिक की मदद से टीम पंप की मशीनों के सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ करने वाले दो इंजीनियरों से पंप मालिक बनकर मिली. इंजीनियरों ने उन्हें दिखाया कि कैसे सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ करके ग्राहक को 100 ग्राम पेट्रोल कम तौल सकते हैं.
पेन ड्राइव के जरिए ये नई तकनीक दो लाख रुपये में पेंट्रोल पंप मालिकों को बेची जा रही है. हालांकि बाद में उन दो इंजीनियरों को पकड़ लिया गया है. विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पश्चिमी यूपी के सैकड़ों पंप पर ये खेल चल रहा है. विभाग ने ये रिपोर्ट लखनऊ में मुख्यालय को सौंप दी है. रिपोर्ट के बाद से हड़कंप मचा हुआ है.
जांच और छापेमारी की तैयारी शुरू हो गई है. जांच की कमान एसटीएफ को दी गई है. रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि पकड़े गए दोनों इंजीनियर तेल कंपनियों को डिस्पेंसिंग यूनिट सप्लाई करने वाली कंपनी के इंजीनियर हैं.
दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से रोजाना एटीएम फ्रॉड के कई मामले सामने आ रहे हैं. ऐसे में दिल्ली में रहने वाले लोगों के एटीएम पर खतरा काफी हद तक बढ़ गया है. हाल ही में तिलक नगर में 88 लोगों के एटीएम से 19 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया था. इस पर एक्सपर्ट्स कहते हैं कि एटीएम कार्ड को इस्तेमाल करते वक्त सावधानी नहीं बरतने से लोगों के खाते में फ्रॉड हो रहा है. ये जालसाज कार्ड क्लोनिंग के जरिए एटीएम कार्ड तक अपनी पहुंच रहे हैं, जिसके बाद आपको ठगना उनके लिए बाएं हाथ का खेल है. इसलिए एटीएम से पैसे निकालते वक्त और कार्ड से पेमेंट करते वक्त आपको सावधानी बरतने की जरूरत है.
आइए जानें कैसे जालसाज देते हैं इस तरह की वारदात को अंजाम..
ऐसे तैयार होता हैं आपके ATM कार्ड का डुप्लीकेट >> एक्सपर्ट्स बताते हैं कि कई तरह की कार्ड स्किमर डिवाइस होती हैं जिनके अंदर क्रेडिट-डेबिट कार्ड स्वाइप करने पर उस कार्ड की सारी जानकारी आपके कंप्यूटर या लैपटॉप में आ जाती है. >> इसके बाद एक खाली कार्ड लिया जाता है और एडवांस्ड तरह के प्रिंटर के जरिए क्लोन किए गए कार्ड की सारी जानकारी उस कार्ड के ऊपर प्रिंट कर दी जाती है.
>> कई बार तो हूबहू ओरिजनल कार्ड के जैसा डुप्लीकेट या क्लोन्ड क्रेडिट-डेबिट कार्ड तैयार कर लिया जाता है.
इन जगहों पर हो सकता हैं आपके साथ धोखा- जालसाज डेबिट और क्रेडिट कार्ड का डाटा चुराने के लिए कई तरह के तरीके अपनाते हैं. आपके कार्ड का डाटा चुराकर आपके कार्ड से कैसे शॉपिंग की जाती है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि होटल, पेट्रोल पंप, मेडिकल जैसे कई जगहों पर आपके साथ धोखा हो सकता है. स्किमिंग, क्लोनिंग, फिशिंग से कैसे आपके डाटा की चोरी होती है.
इन चीजों का इस्तेमाल करते हैं धोखेबाज़
(1) फिशिंग में साइबर क्रिमिनल, कार्ड धारक के बैंक की ईमेल आईडी से मिलती-जुलती एक फर्जी ई-मेल आईडी तैयार करते हैं. उस फर्जी ई-मेल आईडी को कस्टमर को भेजकर सीक्रेट डेटा मंगाते हैं.
(2) क्रेडिट कार्ड क्लोनिंग के जरिए डुप्लिकेट कार्ड बनाकर लोगों को शिकार बनाते हैं. दरअसल, क्रेडिट कार्ड को मशीन से स्वाइप करने के दौरान ही कार्ड की मैगनेटिक स्ट्रिप पर दर्ज सारे डेटा को चुरा लिया जाता है. इसके बाद डुप्लिकेट कार्ड तैयार कर जालसाज शॉपिंग कर लेते हैं.
(3) बैंक की तरह मिलती-जुलती वेबसाइट की मदद से कार्ड की डिटेल लेकर भी कस्टमर को जालसाज अपना शिकार बनाते हैं. जैसे ही आप बैंक की साइट खोलते हैं, उसी लिंक से फर्जी साइट भी खुल जाती है. इस वेबसाइट में आप जैसे ही अपने कार्ड का नंबर व पासवर्ड एंटर करेंगे उसकी जानकारी जालसाजों के पास पहुंच जाती है.
एटीएम से पैसे निकालते वक्त रहें सावधान-जिस जगह पर आप अपना कार्ड डालते हैं, वहां चेक कीजिए कि स्लॉट के ऊपर कोई दूसरी चीज अलग से तो नहीं लगी है.
>> स्कीमर देखने में मशीन का हिस्सा ही लगती है. आसपास की दीवारों और कीबोर्ड के आसपास देखें कि वहां कहीं कोई कैमरा तो नहीं लगा है.
>> अगर किसी भी मशीन पर जरा भी शक हो तो उसका इस्तेमाल न करें और बैंक या वहां मौजूद किसी कर्मचारी को जरूर बताएं.
>> एटीएम से पैसा निकालते वक्त किसी को अपने आसपास न खड़ा होने दें. हो सकता है कि आपके पीछे खड़ा शख्स ही आपका एटीएम पिन देखकर आपको चूना लगानेवाला हो.
>> इसलिए एटीएम में कोई अन्य शख्स हो या नहीं आपको हमेशा दूसरे हाथ से कीबोर्ड को कवर करके पिन डालना चाहिए.
पेमेंट करते वक्त- किसी शॉप, मॉल या अन्य जगह पर अगर आप कार्ड से पेमेंट करते हैं तो भी सावधान होने की जरूरत है. अगर कोई आपसे स्वाइप मशीन दूर रखी है, कार्ड दीजिए स्वाइप करके ला देते हूं आदि बातें कहे तो बिल्कुल न सुनें. हमेशा अपने कार्ड को अपने सामने ही स्वाइप करवाएं और खुद ही पासवर्ड डालें.
इन जरूरी बातों का रखें ख्याल >> एटीएम से रकम निकालने से पहले जांच लें कि कोई स्कीमर तो नहीं है. >> स्वैपिंग पॉइंट के अगल-बगल हाथ लगाकर देखें. कोई वस्तु नजर आए तो सावधान हो जाएं. स्कीमर की डिजाइन ऐसी होती है कि वह मशीन का पार्ट लगे. >> कीपैड का एक कोना दबाएं, अगर पैड स्कीमर होगा तो एक सिरा उठ जाएगा. >> मौजूदा समय में जरूरी है कि डेबिट कार्ड का पिन बदल दें. इससे जालसाजों के जाल में फंसने से बच सकते हैं. >> अपना कार्ड कहीं दूर न ले जाने दें. >> सामने खड़े हो कर कार्ड पेमेंट करें. >> होटल, पंप, मेडिकल, दुकान पर इस बात की सावधानी रखें. >> फोन पर अपना पासवर्ड किसी को न बताएं. >> लालच देने वाले फर्जी मेल से सावधान रहें.
30 जनवरी, 1948 को दिल्ली के बिड़ला हाउस में शाम 5 बजकर 17 मिनट पर महात्मा गांधी की प्रार्थना सभा होने वाली थी. तभी प्रार्थना स्थल की ओर बढ़ते गांधी के सामने एक शख्स आया और उनपर 9 एमएम की बरेटा पिस्टल से तीन बार फायर किया. ढाई फीट की दूरी से किए गए इन फायर से भारत के राष्ट्रपिता की हत्या कर दी गई.
इसके साथ ही 14 सालों से अलग-अलग जगहों पर किए जा रहे महात्मा गांधी की हत्या के प्रयास आखिरकार स्वतंत्र भारत की राजधानी दिल्ली में सफल हो गए. महात्मा गांधी की हत्या ही भारत की पहली बड़ी राजनीतिक हत्या थी.
कौन था नाथूराम? गोडसे एक मध्यमवर्गीय चितपावन ब्राह्मण परिवार में पैदा हुआ था. चितपावन का मतलब होता है, ‘आग में पवित्र किए गए.’ इनके बारे में कुछ लोग कहते हैं कि ये आर्यों के सीधे वंशज हैं तो कुछ कहते हैं कि ये यहूदियों की एक जाति हैं, जो आगे चलकर ब्राह्मण हुए हैं. वैसे जानने वाली बात यह भी है कि ब्राह्मणों की इसी जाति से गोपाल कृष्ण गोखले और लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक भी आते थे.
बहरहाल, नाथूराम के पिता विनायक भारतीय डाकसेवा में एक छोटे पद पर थे. गोडसे के मां-बाप की पहली तीन संतानें पैदा होने के कुछ ही वक्त में चल बसीं थीं. सिर्फ दूसरी संतान, एक बेटी, जी सकी थी. इसके बाद इस दंपत्ति ने एक ज्योतिषी से सलाह ली. ज्योतिषी ने उन्हें एक ‘श्राप’ मिले होने की बात कही और बताया, ‘अपने बेटे को आप तभी बचा पाएंगे, जब उसका लड़की की तरह पालन-पोषण करें.’
नाथूराम के मां-बाप ने इसके बाद कई धार्मिक अनुष्ठान किए और मनौती मानी कि जन्म के बाद वो अपने बेटे की बाईं नाक छिदवाएंगे और उसे नथ पहनाएंगे. इसके बाद 19 मई, 1910 को जन्मे नाथूराम के साथ ऐसा ही किया गया. इसी नथ के चलते उनके बेटे का नाम नाथूराम पड़ा. हालांकि बड़े होने पर उसकी नथ निकाल दी गई. नाथूराम के तीन भाई और दो बहने थीं.
नाथूराम का अंतर्मुखी स्वभाव और हीन भावना
नाथूराम को नथ पहनने और लड़कियों की तरह रखने के चलते उसके बचपन के साथी अक्सर चिढ़ाते रहते थे. इससे वह धीरे-धीरे अकेला होता गया. हालांकि कुछ ही दिनों बाद लोगों ने यह भी कहा कि उसपर कुल देवता आते हैं. ऐसे में पास-पड़ोस में कुछ लोग उसे मूर्ख समझते थे तो कुछ दैवीय शक्तियों वाला. इन दोनों ही वजहों से नाथूराम अंतर्मुखी होता गया.
नाथूराम मराठी माध्यम से पढ़ा और अंग्रेजी उसके लिए बड़ी समस्या थी. वह मैट्रिक की परीक्षा भी नहीं पास कर सका. जिसके चलते उसे नौकरी भी नहीं मिली. कई बार उसे बढ़ईगिरी का काम मिला लेकिन वह उससे खुश नहीं था तो रत्नागिरी चला आया. वहीं उसकी मुलाकात सावरकर से भी हुई.
एक बार नाथूराम हैदराबाद में हिंदुओं के अधिकारों को लेकर एक रैली निकाल रहा था. इसी दौरान उसे गिरफ्तार किया गया. वह एक साल जेल में रहा. जेल से जब वह छूता तो लौटकर पूना आया. इसी दौरान सावरकर एक राष्ट्रीय पार्टी बनाने के लिए प्रयासरत थे, इसमें वे केवल मराठी ब्राह्मणों को शामिल कर रहे थे.
कोर्ट में सुनवाई के दौरान नाथूराम गोडसे, गांधी की हत्या के अन्य आरोपियों के साथ (फाइल फोटो)
1940 में इन्हीं सबके बीच नाथूराम, नारायण डी. आप्टे नाम के आदमी से मिला. जो हिंदू महासभा के लिए काम कर रहा था. दोनों के बीच कई बातों पर असहमति थे लेकिन दोनों ताउम्र बेहतरीन दोस्त रहे. इन दोनों ने 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में कांग्रेस के ज्यादातर नेताओं की गिरफ्तारी के बाद सावरकर के विचारों पर बने एक दल को ज्वाइन कर लिया. दल में ज्यादातर पूना के ही लोग थे. यह दल कांग्रेसियों के खिलाफ हिंसक गतिविधियों में भी शामिल रहता था और कहा जाता है कि नाथूराम को भी हिंसा की ट्रेनिंग यहीं से मिली. नाथूराम और उसका दोस्त आप्टे इस दल का एक अख़बार भी निकालते थे. और दोनों गांधी को हिंदू विरोधी मानते थे और बेहद नापसंद करते थे.
क्यों की गांधी की हत्या? नाथूराम परिवार बसाने से हमेशा इंकार करता था और जब उसकी शादी के रिश्ते आते तो उन्हें नकार देता था. नाथूराम हमेशा ही आदमियों के इर्द-गिर्द रहता था. दरअसल नाथूराम को कुछ लोगों ने संत जैसा होने का भ्रम दिला रखा था, इसलिए वह कुछ हद तक औरतों से भी नफरत करने लगा था.
इसी बीच नाथूराम और आप्टे मिलकर अपनी पार्टी का जो अख़बार निकाला करते थे, उसपर संकट के बादल मंडराने लगे क्योंकि इंवेस्टर्स पैसा देने से मना कर रहे थे. इसी बीच आप्टे ने नाथूराम को उसका पुराना लक्ष्य याद दिलाया, ‘चलो गांधी को मारते हैं’.
इसके आगे जो भी हुआ, भारत की स्वतंत्रता के बाद के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक है. गांधी की हत्या की घटना पर ‘लेट्स किल गांधी’ किताब लिखने वाले उनके परपोते तुषार गांधी किताब के चैप्टर ‘हत्यारे’ की शुरुआत में हत्यारों का परिचय देते हुए लिखते हैं –
‘सभी लोग जो गांधी की हत्या में शामिल थे, स्वभाव में बहुत अलग-अलग थे. पर उन सबके अंदर एक बात बिल्कुल एक जैसी थी. सारे ही धर्मांध थे. एक औरतों से नफरत करने वाला रोगी (नाथूराम गोडसे), एक जिंदादिल पर व्याभिचारी (नारायण दत्तात्रेय आप्टे), एक अनाथ फुटपाथ पर रहने वाला बदमाश लड़का जिसने कट्टर बनकर खुद को बड़ा आदमी बनाना चाहा, एक धूर्त हथियारों का व्यापारी (दंडवते) और उसका नौकर, एक बेघर शरणार्थी जो बदला लेना चाहता था (मदनलाल पाहवा), एक भाई जो अपने भाई को हीरो की तरह मानकर पूजता था (गोपाल गोडसे) और एक डॉक्टर जिसका बचाने से ज्यादा मारने में विश्वास था (डॉ. दत्तात्रेय सदाशिव परचुरे). इनका हथियार था एक बंदूक. जो कि गांधी के हत्यारे के हाथ में पहुंचने से पहले तीन महाद्वीपों में घूम चुकी थी.’
नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी, 1948 को महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी (फाइल फोटो)
9 एमएम की बरेटा पिस्टल की कहानी, जिससे महात्मा गांधी की हत्या हुई एक ब्रिटिश आर्मी के भारतीय लेफ्टिनेंट कर्नल वीवी जोशी के हाथों यह पिस्टल मुसोलिनी की सेना के एक अफसर के आत्मसमर्पण करने के बाद उससे छीनकर लाई गई थी. बाद में जोशी ग्वालियर के महाराजा जयाजीराव सिंधिया की मिलिट्री में ऑफिसर हो गए.
वहां से ये पिस्तौल जगदीश प्रसाद गोयल के पास कैसे पहुंची? ये रहस्य है. पर गोयल ने इसे दंडवते को बेचा, जिसने नाथूराम गोडसे के लिए इसे खरीदा. इसके बाद महात्मा गांधी की हत्या से ठीक दो दिन पहले दंडवते ने भरी हुई पिस्तौल और साथ में सात कारतूस 28 जनवरी की शाम नाथूराम गोडसे को एक होम्योपैथी के डॉक्टर परचुरे के घर सौंपे.
पेट्रोल-डीजल के दाम में लगातार कटौती का सिलसिला आज रुक गया है. रविवार को पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है. आपको बता दें कि शनिवार को पेट्रोल के दाम 7 पैसे सस्ते हुए हैं तो वहीं डीजल के दाम में आज कोई बदलाव नहीं हुआ है.
क्यों हुआ सस्ता- अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड का दाम 73.03 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 0.76 फीसदी की तेजी के साथ 63.35 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा हैं. वहीं, एक हफ्ते के दौरानकीमतें 7 फीसदी तक कम हो गई है. इसीलिए भारतीय बाजार में पेट्रोल-डीज़ल के दाम भी घट गए है.
इंडियन ऑयल (IOC) की वेबसाइट के अनुसार, शनिवार को देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 71.03 रुपए प्रति लीटर हो गई हैं. कोलकाता में पेट्रोल 8 पैसे सस्ता होने के बाद 73.11 रुपए प्रति लीटर हो गया है. देश की आर्थिक राजधानी के रूप में मशहूर मुंबई में पेट्रोल 8 पैसे की कटौती के बाद 76.64 रुपए प्रति लीटर मिल रहा है. चेन्नई में पेट्रोल 9 पैसे सस्ता होकर 73.72 रुपए प्रति लीटर मिल रहा है.
>> दिल्ली में डीजल 65.96 रुपए प्रति लीटर मिल रहा है. कोलकाता में यह कीमत 67.71 रुपए प्रति लीटर हो गई हैं. मुंबई में डीजल 6 पैसे की बढ़ोतरी के बाद 69.11 रुपए प्रति लीटर हो गया है. चेन्नई में डीजल 6 पैसे महंगा हुआ है और अब यह 69.72 रुपए प्रति लीटर मिल रहा है.
रोज़ाना सुबह 6 बजे से लागू होती हैं नई कीमतें देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनी (HPCL, BPCL, IOC) रोजाना पेट्रोल-डीजल की कीमतों की समीक्षा करती है. नई दरें सुबह 6 बजे से लागू होती है. आपको बता दें कि कीमतों को तय करने के लिए 15 दिन की औसत कीमत को आधार बनाया जाता है. इसके अलावा रुपये और डॉलर के विनिमय दर से भी तेल की कीमत प्रभावित होती है.
आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप 2019 भारतीय टीम विराट कोहली की अगुवाई में उतर रही है और उसे इंग्लैंड के साथ प्रबल दावेदार माना जा रहा है. वर्ल्ड कप मिशन पर जाने वाले भारतीय खिलाड़ियों ने आईपीएल में ना सिर्फ प्रदर्शन बल्कि फिटनेस का भी सबूत दिया और अब ये सब 22 मई को इंग्लैंड के लिए रवाना होंगे. हालांकि भारतीय टीम के बिजी शेड्यूल की वजह से बीसीसीआई को खिलाड़ियों के वर्कलोड की चिंता सता रही थी.
आखिर भारतीय खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया के लंबे दौरे के बाद न्यूजीलैंड पहुंचे और फिर भारत में कंगारू टीम की मेजबानी करने के बाद आईपीएल के मैदान में उतर गए. इसी वजह से बीसीसीआई ने वर्ल्ड कप में विराट कोहली एंड कंपनी के लिए एक खास डिवाइस का इस्तेमाल करने का फैसला किया है, ताकि खिलाड़ियों के वर्कलोड का पता लगाया जा सके.
हाईटेक डिवाइस का ऐसे होगा प्रयोग बहरहाल, बीसीसीआई ने खिलाड़ियों के वर्कलोड को जानने के लिए वर्ल्ड कप में एक हाईटेक डिवाइस इस्तेमाल करने का फैसला किया है. यह जीपीएस परफॉमेंस ट्रैकिंग डिवाइस खिलाड़ियों के वर्कलोड और उनकी फिटनेस पर नजर रखेगी. स्टेटस्पोटर्स ने पिछले साल दिसंबर में खिलाड़ियों को इस हाईटेक डिवाइस का डेमो दिया था. इस डिवाइस को भारतीय खिलाड़ियों को टीशर्ट के अंदर लगाना होगा. यह जीपीएस सिस्टम शरीर से संबंधित सटीक जानकारी देगा जो खिलाड़ियों के वर्कलोड को समझने में काफी मददगार साबित होगा. इस जीपीएस परफॉमेंस ट्रैकिंग डिवाइस के जरिए खिलाड़ी के फिटनेस लेवल के अलावा हाई स्पीड रनिंग और डाइनामिक स्ट्रेस लोड आदि का भी पता चलेगा.
रोहित शर्मा और शिखर धवन की जोड़ी फिर दिखेगा जलवा.
कंपनी के साउथ एशिया के मैनेजर पंकज वानखेड़े के मुताबिक, यह डिवाइस खिलाड़ियों के कारगर साबित होगी. जबकि इस डिवाइस का इस्तेमाल श्रीलंका, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की टीमों ने भी किया है.
इस कंपनी के साथ किया करार भारतीय बोर्ड ने यह डील स्टेटस्पोटर्स के साथ की है. ग्रेट ब्रिटेन की यह कंपनी कई बड़ी टीमों के साथ काम कर चुकी है, जिसमें ब्राजील, इंग्लैंड, जर्मनी, पुर्तगाल की फुटबॉल टीमों के अलावा मैनचेस्टर युनाइटेड, लिवरपूल, आर्सेनल, बार्सिलोना, जुवेंतस, पेरिस सेंट जर्मेन जैसे क्लब शामिल हैं.
आपको बता दें कि भारतीय टीम मौजूदा वर्ल्ड कप में अपने अभियान की शुरुआत साउथ अफ्रीका के खिलाफ करेगी. यह मैच साउथेम्पटन में 5 जून को खेला जाएगा.
नाश्ते का समय हो या फिर शाम के समय स्नैक्स खाने का दिल करे, तो बनाकर खाइए लजीज बेकड चिली चीज टोस्ट। जो बनाने में बेहद आसान और हैल्दी है। बच्चों को तो यह टोस्ट बहुत पसंद आएंगे। तो आइए जानते हैं बेक्ड चिली चीज टोस्ट रेसिपी बनाने का रेसिपी।
– सबसे पहले ब्रेड स्लाइस को तिकोण शेप में काट लें। – एक बाउल में पनीर, ओट्स, हरी मिर्च, रेड चिली फ्लेक्स और नमक डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह मिक्स करें। – अब तैयार मिश्रण को कटे हुए ब्रेड स्लाइस पर लगा लें, साथ ही उपर से चीज ग्रेड करके भी डाल दें। – साथ ही ओवन को 180°C पर प्रीहीट कर लें। – ओवन के गर्म होने पर टोस्ट ओवन के अंदर रख दें। – चीज के मेल्ट होने तक टोस्ट को पकने दें, लगभग 10 मिनट में टोस्ट पक कर तैयार हो जाएगें। – तैयार चिली चीज टोस्ट को अपनी मनपसंद सॉस के साथ सर्व करें।
रायपुर। कमलेश पांडेय को अधिवक्ता संघ ने अपना बहुमत देकर सचिव बनाया है। बताया जा रहा है कि अपने स्तर के कार्यो को लेकर हमेशा से ही सार्थक पहल करने का प्रयास में लगे रहते है। वही उन्होंने इस चुनाव में अपनी जीत का श्रेय सभी मतदाता अधिवक्ताओं को दिया है।
रायपुर। लोकसभा निर्वाचन के लिए 23 मई को होने वाली मतगणना की तैयारियों और णनामतग प्रक्रिया पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुब्रत साहू की रेडियो वार्ता 19 मई को आकाशवाणी, रायपुर से रात 8.30 बजे प्रसारित होगी। इसे आकाशवाणी के छत्तीसगढ़ स्थित सभी केंद्र एक साथ प्रसारित करेंगे।