Home Blog Page 3096

मानसरोवर यात्रा: कंप्यूटर से ड्रॉ में पहली बार तीर्थयात्रा करने वालों को मिली प्राथमिकता

0

कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने की इच्छा रखने वाले तीर्थयात्रियों के चयन के लिए बुधवार को कंप्यूटर के जरिए ड्रॉ निकाला गया. इसमें सॉफ्टवेयर में पहली बार आवेदन करने वालों को प्राथमिकता देने या वरिष्ठ नागरिकों की पसंद के मार्ग को शामिल किया गया है.

विदेश सचिव विजय गोखले ने जवाहर नेहरू भवन में आयोजित हुए इस ड्रॉ की अध्यक्षता की और उन्होंने इस दौरान तीर्थयात्रियों से हिमालय के संवेदनशील पर्यावरण की ‘सुरक्षा और संरक्षण’ की अपील की.

विदेश मंत्रालय हर साल जून से लेकर सितंबर के बीच में इस यात्रा का आयोजन दो मार्गों लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड) और नाथूला दर्रा (सिक्किम) के जरिए करता है. यह यात्रा अपने धार्मिक मूल्यों और सांस्कृतिक महत्व के लिए जानी जाती है. इस यात्रा में हर साल सैंकड़ों लोग हिस्सा लेते हैं.

कैलाश मानसरोवर यात्रा 2019 के लिए मंत्रालय को 2,996 आवेदन मिले जिनमें से 2,256 आवेदनकर्ता पुरुष और 740 महिलाएं हैं. वहीं 640 वरिष्ठ नागरिकों ने भी इस यात्रा के लिए आवेदन किया है.

नाथू ला दर्रा मार्ग में 10 जत्थे होंगे
लिपुलेख दर्रा मार्ग के लिए प्रत्येक जत्थे में 58 यात्री होंगे और कुल 18 जत्थे होंगे. वहीं नाथू ला दर्रा मार्ग में 10 जत्थे होंगे और प्रत्येक जत्थे में 48 यात्री होंगे. प्रत्येक जत्थे में दो अधिकारी सहायता के लिए होंगे.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नाथू ला मार्ग, लिपुलेख मार्ग की अपेक्षा कम दुर्गम है. इसलिए वरिष्ठ यात्री नाथूला मार्ग को प्राथमिकी देते हैं. इस यात्रा में करीब 19,500 फुट तक की चढ़ाई करनी होती है.

चयनित यात्रियों को दी गई जानकारी
विदेश मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि यात्रियों का चयन लैंगिक पहचान को भी ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष तरीके से कंप्यूटर के जरिए किया गया है. चयनित यात्रियों को मोबाइल और ईमेल के जरिए जानकारी दे दी गई है.

मंत्रालय ने बताया कि 2015 से यात्रियों के चयन की पूरी प्रक्रिया आवेदन से लेकर चयन तक कंप्यूटर के जरिए होती है और इसलिए यात्रियों को जानकारी हासिल करने के लिए फैक्स या पत्र भेजने की जरूरत नहीं है.

रायबरेली गुण्डों की नहीं, कार्यकर्ताओं को किसी से डरने की जरूरत नहीं-प्रियंका वाड्रा

0

कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा बुधवार को अचानक रायबरेली पहुंची और कार्यकर्ताओं से कुशलक्षेम पूंछी। कहा कि रायबरेली गुंडों की नहीं है। यहां के लोग अराजकता बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर सकते। वे उक्त बातें मीडिया से वार्ता के दौरान कहीं।

उन्होंने कहा कि सत्ता के दबाव में जिस तरह की अराजकता की गई वह बेहद शर्मनाक है। कहा कि किसी को डरने की जरूरत नहीं है और कांग्रेस ऐसे लोगों के खिलाफ है जो डर का माहौल बना रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि मंगलवार को रायबरेली में जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के पूर्व मचे बवाल में कांग्रेस विधायक अदिति सिंह समेत कई कार्यकर्ता घायल हो गए थे।

इसके पूर्व फुरसतगंज हवाईअड्डे पर उतरने के बाद सीधे वह कांग्रेस के कार्यालय तिलक भवन पहुंची। वहां उन्होंने बंद कमरे में कार्यकर्ताओं के साथ एक बैठक कीं और सभी को एकता बनाये रखने व किसी तरह से न डरने को कहा।

प्रियंका ने कार्यकर्ताओं को चेतावनी दी कि यदि कोई भी कार्यकर्ता विपक्षियों से सम्पर्क में पाया गया तो उसे तुरंत पार्टी से बाहर कर दिया जाएगा।

गौरतलब है कि मंगलवार को सोनिया गांधी के खिलाफ भाजपा के उम्मीदवार रहे दिनेश सिंह के जिला पंचायत अध्यक्ष भाई के विरूद्ध अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान होना था। लेकिन मतदान के पूर्व ही जमकर बवाल हुआ। जिला पंचायत सदस्यों के अपहरण का प्रयास किया गया और गोलीबारी भी हुई। कांग्रेस विधायक अदिति सिंह पर भी हमला किया गया। जिसको लेकर प्रियंका वाड्रा अचानक बुधवार को रायबरेली पहुंची और सबका हालचाल लिया।प्रियंका ने कार्यकर्ताओं के साथ खड़े रहने का भरोसा भी दिया।

बलौदाबाजार : रेल्वे स्टेशन में भटक रही महिला को परिजनों से मिलवाया सखी सेंटर ने

0

महिला बाल विकास विभाग बलौदाबाजार-भाटापारा द्वारा जिले में विपत्ति ग्रस्त महिलाओं को आपातकालीन सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से सखी वन स्टॉप सेंटर का संचालन जिले में किया जा रहा है। विश्वसनीय सूत्रों से रेल्वे स्टेशन भाटापारा में महिलाओं के बच्चो ंके साथ भिक्षावृत्ति किए जाने की सूचना प्राप्त होने पर जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री विपिन जैन के निर्देश पर सखी वन स्टाप सेंटर तथा जिला बाल संरक्षण इकाई की टीम द्वारा रेल्वे स्टेशन भाटापारा जाकर निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान रेलवे स्टेशन भाटापारा में डेढ़ माह के बालक को लेकर भिक्षावृत्ति कर रही 30 वर्षीय महिला तथा एक अन्य लगभग 40 वर्षीय महिला का चिन्हांकन टीम द्वारा किया गया। रेल्वे पुलिस भाटापारा के सहयोग से दोनो महिलाओं को टीम के द्वारा सखी वन स्टाप सेंटर लाया गया। सखी वन स्टाप सेंटर लाए जाने पर दोनो महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार कराया गया।  दोनो महिलाओं की नियमित कांउसलिंग कर विश्वास में लेने पर महिलाओं द्वारा अपने गृह निवास तथा परिवार के बारे मे ंजानकारी प्रदान की गई जिसके अनुसार पहली महिला ने स्वयं को  बिलासपुर जिले तथा दूसरी महिला ने बेमेतरा जिले का निवासी होना बताया। महिलाओं के द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर सखी वन स्टाप सेंटर केन्द्र प्रशासक सुश्री तुलिका परगनिहा द्वारा बिलासपुर जिले की सखी सेंटर की टीम से समन्वय कर परिजनों से संपर्क किया गया । परिजनों द्वारा महिला(चांदनी बदला हुआ नाम) को अपने साथ रखने में असहमति व्यक्त करने पर महिला को उसके बच्चे के साथ रायपुर स्थित नारी निकेतन स्थानांतरित किए जाने की कार्यवाही की गई। दूसरी महिला के द्वारा दी गई जानकारी अस्पष्ट होने के कारण महिला के द्वारा बतायी गई उसकी जाति(कुर्मी) के आधार पर कुर्मी समाज के केन्द्रीय युवा अध्यक्ष श्री चंद्रशेखर परगनिहा सें संपर्क कर महिला के संबंध मे जानकारी प्रदान करने का अनुरोध केन्द्र प्रषासक द्वारा किया गया। केन्द्रीय युवा अध्यक्ष श्री परगनिहा ने मामलें की गंभीरता को देखते हुए अपने स्त्रोतो से महिला के परिजनों के संबंध में पतासाजी कर जानकारी केन्द्र प्रशासक को प्रदान की। जिसके द्वारा (पूजा बदला हुआ नाम) के परिजनों को संपर्क कर महिला के संबध में जानकारी प्रदान की गई। पूजा के परिजनों ने सखी सेंटर पहुचकर सखी वन स्टाप सेंटर के द्वारा महिलाओं के क्षेत्र में किए जा रहें कार्यो की भूरी-भूरी सराहना की।

छत्तीसगढ़ : किसानों को जेल भेजे जाने के मामले में एस.डी.एम.द्वारा की जा रही जांच : किसानों को उपलब्ध करायी जा रही है निःशुल्क विधिक सहायता

0

कर्ज के मामले में जेल भेजे गए किसानों का मामला संज्ञान में आते ही जिला प्रशासन बस्तर द्वारा मामले की जांच अनुविभागीय दण्डाधिकारी के माध्यम से कराई जा रही है। जांच में प्रथम दृष्टया किसानों के साथ धोखाधड़ी का मामला आ रहा है तथा जांच पूरी होते ही दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाएगी। किसानों को जमानत के माध्यम से राहत पहुंचाने के लिए बस्तर जिला प्रशासन द्वारा निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
बस्तर जिले के कलेक्टर डॉ. अय्याज तम्बोली ने बताया कि माड़पाल निवासी श्री तुलाराम मौर्य और बस्तर निवासी श्री सुखदास को खेती-किसानी हेतु लिए गए कर्ज के कारण जेल भेजे जाने के मामले की जांच अनुविभागीय अधिकारी श्री जीआर मरकाम के माध्यम से कराई जा रही है। उल्लेखनीय है कि राज्य के पुलिस महानिदेशक ने बस्तर जिले के पुलिस अधीक्षक को किसानों के खिलाफ धोखाधड़ी करने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि भारतीय स्टेट बैंक के कृषि विकास शाखा द्वारा चेक बाउंस होने के कारण दायर परिवाद के आधार पर प्रथम श्रेणी मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी न्यायालय द्वारा श्री तुलाराम मौर्य और श्री सुखदास को नेगोशियेबल, इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट 1881 की धारा 138 के तहत न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया है।
इस मामले में जांच अधिकारी श्री मरकाम के समक्ष दिए गए बयान के मुताबिक यह प्रथम दृष्टया किसानों के साथ धोखाधड़ी का मामला लग रहा है। बताया गया कि तुलाराम मौर्य द्वारा 16 नवम्बर 2009 को भारतीय स्टेट बैंक की कृषि विकास शाखा से किसान क्रेडिट कार्ड का तीन लाख रुपए, ड्रिप के लिए 2 लाख 3 हजार रुपए और फेंसिंग के लिए 60 हजार रुपए का कर्ज लिया गया था। इसी प्रकार का प्रकरण श्री सुखदास का भी है। इस मामले में किसानों के शीघ्र जमानत की कार्यवाही के लिए जिला प्रशासन द्वारा विधिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है और इस धोखाधड़ी के मामले में बैंक, दलालों और अन्य संबंधित लोगांे की भूमिका की जांच की जा रही है।

बात करोड़ों की, संगत भगोड़ों की : नवजोत सिंह सिद्धू

0

हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब के तारूवाला मैदान में कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में चुनाव प्रचार करने पहुंचे स्टार प्रचारक और पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने इस बार भी प्रधामनमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा को अपने निशाने पर लिया। सिद्धू ने कहा कि भाजपा गिरिपार के लोगों के साथ वादा करके भूल गई। गिरिपार के हाटी समुदाय को जनजातीय का दर्जा नहीं दिया गया। हाटी समुदाय के मुद्दे पर राजनाथ सिंह और अनुराग ठाकुर भी झूठ ही बोलते रहे हैं। सिद्धू ने कहा कि भाजपा ने 2014 में 342 संकल्प लिए थे। गंगा सफाई, 2 करोड़ नौकरियां, हर किसी के खाते में 15 लाख देंगे। सिद्धू ने शायराना अदांज में तंज कसते हुए कहा कि वादा तेरा वादा, मर गया सीधा सादा। सिद्धू ने ललकारते हुए कहा कि दम है तो सच सुन लो, झूठा है मोदी। मोदी पर हीरो नंबर वन नहीं, ऑनली फेंकू नंबर वन फिल्म आएगी। बात करोड़ों की, संगत भगोड़ों की। न खाऊंगा न ही खाने दूंगा। मोदी ने जमकर खाया। सिद्धू ने कहा कि काले अंग्रेजों से देश को आजाद कराना है। कहा कि मोदी आज मुद्दों व विकास के नाम पर नहीं, सैनिकों के नाम वोट मांग रहे हैं। वाराणसी में एक फौजी ही मोदी के खिलाफ वोट मांगेंगे। लोकतंत्र पर भयतंत्र हावी है। सिद्धू ने कहा कि सीबीआई और न्यायपालिका आज अपनी स्वतंत्रता को कायम रखने के लिए छटपटा रही है।

रविंद्र चौबे की सेहत में सुधार, अस्पताल में किया वॉक

0

रायपुर। प्रदेश के कृषि मंत्री रविंद्र चौबे लखनऊ के पीजीआई अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार आ रहा है। बुधवार को उन्होंने अस्पताल कारिडोर में वॉक की। उनके साथ अस्पताल के दूसरे सदस्य भी मौजूद हैं। इसका एक वीडियो सीएम भूपेश बघेल ने शेयर किया है। सीएम भूपेश बघेल ने रविंद्र चौबे को जल्द स्वस्थ होने की शुभकामनाएं दी है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा है कि बड़े भैया रविंद्र चौबे जी के स्वास्थ्य में आशातीत सुधार हुआ है। उन्हें इस तरह चहलकदमी करते देखना दिल को सुकून पहुंचाता है। उम्मीद है कि वे जल्द ही पूरी तरह स्वस्थ होकर छत्तीसगढ़ पहुंचेंगे।

49 वर्षीय कामी रीता शेरपा ने 23वीं बार की माउंट एवरेस्ट पर फतह, तोड़ा अपना रिकॉर्ड

0

दुनिया की सबसे ऊंचे पर्वत शिखर एवरेस्ट पर सर्वाधिक बार पहुंचने का विश्व रिकॉर्ड कामी रीता शेरपा ने बनाया है। रीता शेरपा ने बुधवार को 23वीं बार माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई की। रिपोर्ट के मुताबिक सेवेन समिट ट्रेक्स के कंपनी अध्यक्ष मिंगमा शेरपा ने इस बात की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि 49 वर्षीय कामी रीता शेरपा ने बुधवार की सुबह 7 बजकर 50 मिनट पर एवरेस्ट की चोटी पर सफलतापूर्वक पहुंचकर संसार की छत पर सबसे अधिक बार पहुंचने के अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ दिया। कामी रीता ने 16 मई, 2018 को एवरेस्ट की चोटी पर 22वीं बार पहुंचकर इतिहास रचा था।

बेस कैंप के अधिकारियों के अनुसार, कामी रीता ने मंगलवार की रात को शिविर चार से इस अभियान की शुरुआत की और बुधवार की सुबह वह पर्वत की चोटी तक सफलतापूर्वक पहुंचने में एक बार फिर से कामयाब हो गए।

कामी रीता आठ हजार मीटर से अधिक ऊंचाई की अधिकांश पर्वत चोटियों की चढ़ाई कर चुके हैं, जिनमें के2, छो-ओयू, ल्होत्से और अन्नपूर्णा जैसी कई पर्वत चोटियां शामिल हैं।

कौन हैं ईश्वर चंद्र विद्यासागर, जिन्हें लेकर बंगाल में मचा है बवाल

0

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह की रैली के दौरान हुई हिंसा के दौरान ईश्वर चंद्र विद्या सागर की प्रतिमा को भी नुकसान पहुंचा है. ईश्वर चंद्र विद्यासागर कॉलेज में भी तोड़फोड़ हुई है. इस मामले को लेकर बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच तब से ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. बीजेपी आरोप लगा रही है कि यह तोड़फोड़ टीएमसी समर्थक छात्रों ने की है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने ट्विटर हैंडल पर तस्वीर बदलकर ईश्वर चंद्र विद्यासागर की तस्वीर लगा दी है. उन्होंने लिखा है कि बीजेपी वाले शायद नहीं जानते हैं कि विद्यासागर कौन हैं… आइए जानते हैं कि भारतीय इतिहास में विद्यासागर का क्या स्‍थान है.

भारत निर्माण में विद्यासागर का है अहम योगदान
भारतीय इतिहास में ईश्वर चंद्र विद्यासागर को शिक्षक, फिलॉसोफर और समाज सुधारक जैसे कई रूपों में याद किया जाता है. उनके बारे में कमोबेश भारत के सभी बोर्ड के किताबों में प्राइमरी की पढ़ाई के दौरान ही बताया जाता है. ताकि उनके आदर्शों का प्रभाव बचपन से ही बच्चों के मन में पड़े. उनका जन्म 26 सितंबर 1820 को बंगाल के मेदिनीपुर जिले में एक गरीब ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उन्होंने अपनी पढ़ाई स्ट्रीट लाइट (सड़क किनारे लगे लाइट) के नीचे बैठकर की है, क्योंकि उनका परिवार गैस या दूसरी कोई लाइट खरीद नहीं सकता था, लेकिन उन्होंने कम सुविधाओं में ऐसी बढ़ाई की जो आज मिसाल है.

स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठकर की पढ़ाई
शुरुआती पढ़ाई के बाद 1829 में वे कोलकाता के संस्कृत कॉलेज में पढ़ने आए. यहां 1839 में एक प्रतियोगिता में उनके तेज बुद्ध‌ि को देखते हुए उन्हें विद्यासागर उपनाम दिया गया. साल 1941 तक करीब 12 साल तक अध्ययन के बाद वे तब कलकत्ता के संस्कृत कॉलेज में संस्कृत के प्रोफेसर की नौकरी मिल गई. फिर वह इसी कॉलेज के प्रिंसिपल बन गए. उनके कार्यकाल के दौरान कॉलेज सुधार का स्थान बन गया था. इस दौरान उन्होंने बंगाली वर्णमाला में सुधार किए.

यही नहीं केवल 21 साल की उम्र में उन्हें फोर्ट विलियम कॉलेज में संस्कृत के विभागाध्यक्ष (HoD) चुन लिया गया. बड़े-बड़े इतिहासकार मानते हैं कि उनकी लिखी किताबों से पश्चिम बंगाल के उत्‍थान में काफी मदद मिली है.

ब्रिटिश सरकार के सामने पत्‍थर की तरह खड़े होकर बनवाया विधवा विवाह एक्ट
विधवा विवाह कानून में उनकी भूमिका भी काफी अहम मानी जाती है. बताया जाता है कि उनके लगातार दबाव के कारण ही ब्रिटिश सरकार यह एक्ट बनाने के लिए विवश हुई थी. इस कानून के लिए शुरुआत में उन्होंने अकेले ही मुहिम चलाई थी, लेकिन देखते ही देखते ही उनके साथ हजारों और लोग भी जुड़ते गए. विद्यासागर को मिलते इस भारी समर्थन से सरकार मुश्किल में फंस गई. उनकी कोशिश का ही नतीजा रहा कि रूढ़ीवादी हिन्दू समाज के विरोध के बावजूद भी सरकार ने 1857 में विधवा विवाह एक्ट लागू किया.

बेटियों की शिक्षा के लिए उठाए कई कदम
विद्यासागर बंगाली पुनर्जागरण के प्रणेताओं में से एक थे. उनके प्रमुख उल्लेखनीय कामों में लड़कियों की पढ़ाई के लिए उठाए गए कदम अहम है. अपने पूरे जीवन में कई संस्थान खोलने वाले ईश्वर चंद्र आमरण प्रगतिशील समाज बनाने की कोशिश करते रहे और रूढ़ियों से लड़ते रहे.

जाति-पाति का करते थे जबर्दस्त विरोध
19वीं सदी में ही ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने जाति-पाति का पुरुजोर विरोध करना शुरू कर दिया था. उन्हें मालूम था भारत गुलाम है और प्रतिगामी कदम उसकी दासता को और लंबे समय तक खींचेंगे.
ईश्वर चंद्र विद्यासागर के जीवन का मशहूर किस्सा
विद्यासगर कलकत्ता के संस्कृत कॉलेज में पढ़ाते थे. उन्हें किसी काम से अंग्रेज शिक्षक से मिलने के लिए विल्सन कॉलेज पहुंचे. वहां अंग्रेज शिक्षक अपने कमरे में मेज पर पैर रखकर बैठे थे. विद्यासागर के लिए यह एक असहज स्थिति थी, लेकिन उन्होंने बातचीत पूरी की और वापस चले आए. संयोग से कुछ ही दिनों बाद उस अंग्रेज शिक्षक को विद्यासागर से मिलने के लिए संस्कृत कॉलेज मिलने आ गए. जैसे ही विद्यासागर ने उन्हें देखा वे मेज पर पैर रखकर बैठ गए. वह अंग्रेज शिक्षक गुस्से में तमतमाए वहां से वापस लौट गया. बाद में पूरी घटना को लेकर अंग्रेज शिक्षक को शर्मिंदा होना पड़ा.

रवींद्र नाथ टैगोर ने विद्यासागर के निधन पर कही थी ये बात
ईश्वर चंद्र विद्यासागर के निधन पर रवींद्रनाथ टैगोर ने लिखा था, ‘किसी को आश्चर्य हो सकता है कि भगवान ने चार करोड़ बंगाली बनाने की प्रक्रिया में एक ही इंसान बनाया’. ईश्वर चंद्र के बारे में मशहूर था कि वो समय के बड़े पाबंद थे. एक बार उन्हें लंदन में आयोजित एक सभा में भाषण देना था. जब वो सभागार के बाहर पहुंचे तो देखा काफी लोग बाहर खड़े हैं. उन्होंने किसी से पूछा कि ये लोग बाहर क्यों खड़े हैं तो जानकारी मिली कि सभागार के सफाई कर्मचारी नहीं पहुंचे हैं. उन्होंने बिना देर लगाए हाथ में झाड़ू उठाई और सफाई में लग गए. उन्हें देखकर वहां मौजूद लोग भी सफाई में लग गए. थोड़ी ही देर में पूरा हॉल साफ हो चुका था.

इसके बाद विद्यासागर ने वहां भाषण दिया. उन्होंने वहां मौजूद लोगों से कहा स्वावलंबी बनिए. हो सकता है कि इस सभागार के सफाई कर्मचारी किसी कारण न आ सके हों तो क्या ये कार्यक्रम नहीं होता? जो लोग इतना श्रम करके यहां पहुंचे हैं उनका समय व्यर्थ हो जाता? उनके भाषण पर लोगों ने जबरदस्त तालियां बजाईं. ये वो समय था जब भारत में ब्रिटिश हुकूमत थी और ईश्वर चंद्र ब्रिटिश लोगों को उनकी धरती पर जीवन के कायदे समझा रहे थे.

छत्तीसगढ़ : तीन महीने में मरीजों की संख्या 60 हुई, रायपुर में फिर स्वाइन फ्लू का खतरा

0

पहले गर्मी आते ही स्वाइन फ्लू से राहत महसूस की जाती थी, लेकिन अब आप इस खुशफहमी से बाहर निकलिए. खासतौर पर राजधानी रायपुर में, वजह है कि स्वाइन फ्लू का कैलीफोर्निया वायरस राजधानी में म्यूटेशन की वजह से अब मिशीगन वायरस में बदल गया है. यही वजह है कि 30 डिग्री में मरने वाला वायरस 45 डिग्री में भी न केवल जिंदा है, बल्कि लोगों को संक्रमित भी कर रहा है. पिछले तीन महीने में स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या इसी वजह से 60 से ज्यादा हो गई है.

भीषण गर्मी के महीने अप्रैल में ही 10 नए मरीज मिले. हालांकि राहत की बात ये है कि सारे लोग इलाज से स्वस्थ भी हो गए हैं. विशेषज्ञों के अनुसार स्वाइन फ्लू का वायरस एच1एन1 सामान्यत: 30 डिग्री तापमान में मर जाता है. लेकिन पिछले साल तापमान जब 40 डिग्री से ऊपर गया, तब भी स्वाइन फ्लू के मरीज मिलते रहे. इसलिए डॉक्टरों ने जांच करवाई तो पता चला कि वायरस में म्यूटेशन के कारण गर्मी से प्रतिरोध की क्षमता बढ़ गई है. इस साल गर्मी पिछले साल के मुकाबले ज्यादा है और पिछले 10 दिन से तापमान 44-45 डिग्री के आसपास चल रहा है. इसके बावजूद स्वाइन फ्लू के केस मिल रहे हैं.

डॉक्टरों का दावा है कि स्वाइन फ्लू का वायरस इतनी गर्मी में भी सक्रिय जरूर है, लेकिन तापमान की वजह से यह कम घातक है. इसीलिए पिछले डेढ़-दो महीने में सूबे में स्वाइन फ्लू से किसी की मौत नहीं हुई है. अंबेडकर और निजी अस्पतालों के आइसोलेटेड वार्ड में 10 से ज्यादा संदिग्ध मरीजों का इलाज चल रहा है. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार एक जनवरी से 3 मई तक पूरे प्रदेश में 140 मरीजों की रिपोर्ट पॉजीटिव रही. वहीं मृतकों की संख्या 26 है.

सबसे ज्यादा मौत रायपुर में आठ लोगों की हुई है. इनमें कुछ निजी लैब की रिपोर्ट को शामिल नहीं किया गया है. बिलासपुर में पांच, धमतरी और राजनांदगांव में 4-4 मरीजों की मौत हुई है. जांच के लिए पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और बलीराम कश्यप मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में कुल 697 स्वाब के सैंपल भेजे गए है.

छत्तीसगढ़ : रिजल्ट खराब होने पर छात्र ने की खुदकुशी, इस IAS अधिकारी ने शेयर की अपनी मार्कशीट

0

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ के एक 18 साल के छात्र ने बोर्ड परीक्षा में दूसरी बार फेल हो जाने के कारण खुदकुशी कर ली. ऐसे में छत्तीसगढ़ में तैनात भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के एक अधिकारी ने फेसबुक पर अपने बोर्ड परीक्षा के नंबर साझा किया. 2009 बैच के आईएएस अवनीश कुमार शरण ने छात्रों को समझाया कि जीवन में कम नंबर या फेल हो जाने से जिंदगी खत्म नहीं हो जाती है.

छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में तैनात अवनीश कुमार शरण ने अखबार में पढ़ा कि छत्तीसगढ़ बोर्ड रिजल्ट में एक छात्र ने कक्षा में फेल हो जाने पर खुदकुशी कर ली है. इससे व्यथित होकर उन्होंने फेसबुक पर छात्रों से कहा कि वे निराश न हों और न ही हार मानें. आपके भीतर छिपी काबिलियत आगे कई बेहतरीन मौके देगी.

छात्रों को प्रेरित करने के लिए से अवनीश कुमार शरण ने अपनी 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं और कॉलेज के मार्क्स भी बताए. उन्होंने 10वीं में 44.5 प्रतिशत, 12वीं की परीक्षा में 65 प्रतिशत और स्नातक में 60.7 प्रतिशत अंक हासिल किये थे.

बता दें कि हर वर्ष 8 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स सीजीबीएसई 10वीं 12वीं की परीक्षाएं देते हैं. इस बार 10वीं में 3.88 लाख स्टूडेंट्स ने और 12वीं में 2.66 लाख स्टूडेंट्स ने परीक्षाएं दी थी. ऐसे में इन सभी स्‍टूडेंट्स का इंतजार आज दोपहर 1 बजे खत्‍म हो जाएगा.