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पाकिस्तान की हिमाकत रोकने को बॉर्डर पर एयर डिफेंस यूनिट तैनात करेगी सेना

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ख़ुफ़िया एजेंसियों के इनपुट और सेना के इंटरनल रिव्यू के बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सीमा पर एयर डिफेंस यूनिट्स को तैनात करने का फैसला लिया है. ये फैसला पाकिस्तान की तरफ से हवाई हमलों को नज़र में रखकर लिया गया है. सेना का ये डिफेंस सिस्टम पाकिस्तान के हर हवाई हमले को नाकाम करने में सक्षम है.

क्या है मामला?
भारतीय सेना के सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तानी बॉर्डर की घेराबंदी के तहत कई सैन्य टुकड़ियां और एयर डिफेंस यूनिट को भी तैनात किया जाएगा. जानकारी के मुताबिक इस डिफेंस सिस्टम को बॉर्डर के और नज़दीक ले जाने से दुश्मन की तरफ से होने वाली किसी भी हवाई कार्रवाई को वक़्त रहते रोका जा सकता है.

कहां-कहां होगी तैनात
ये डिफेंस सिस्टम जम्मू-कश्मीर, पंजाब, गुजरात और राजस्थान से सटे पाकिस्तान बॉर्डर पर तैनात किया जाने वाला है. इसके सिस्टम के पास इन सीमाओं पर दुश्मन की तरफ से होने वाले हवाई हमलों को रोकने की क्षमता है और पैदल सेना के लिए ये सुरक्षा चक्र की तरह काम करेगा.

आकाश मिसाइल्स होंगी तैनात
ये डिफेंस सिस्टम भारत में ही बनीं आकाश मिसाइल्स और राशियन क्वादार्ट सिस्टम से बनाया गया है. जल्द ही आर्मी को इजरायल और डीआरडीओ द्वारा मिलकर बनाए गया MR-SAM डिफेंस सिस्टम भी मिल जाएगा.

बताया जा रहा है कि बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद सुरक्षा के मद्देनज़र ये कदम उठाया गया है. भारतीय मिग-21 और सुखोई-30 के साथ पाकिस्तानी F-16 लड़ाकू विमान की डॉग फाइट के बाद ये महसूस किया जा रहा था कि एयर डिफेंस सिस्टम होता तो भारतीय सीमा में घुसे पाकिस्तानी विमानों को ज्यादा नुकसान पहुंचाया जा सकता था.

राहुल गांधी ने नीमच में कहा, किसानों के लिए होगा अलग से बजट पेश

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 लोकसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण में प्रचार के लिए राजनीतिक दल जमकर प्रचार कर रहे हैं। बता दें की मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र में 19 मई को मतदान होना है। इसके चलते दोनों दलों के स्टार प्रचारकों ने यहां अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसी कड़ी में मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने नीमच में चुनावी सभा को संबोधित किया। यहां उन्होंने मंदसौर-नीमच सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के समर्थन में सभा की। उन्होंने पीएम मोदी पर जमकर निशाना साधा। राहुल गांधी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मैं प्रधानमंत्री के इंटरव्यू देख रहा हूं, उसमें वो रोजगार, 15 लाख और किसानों की बात नहीं कर रहे। वो बता रहे हैं कि आम किस तरह खाता हूं। बता रहे हैं कुर्ता काट लिया क्योंकि सूटकेस में जगह नहीं होती, फिर कहते हैं मेरे पास तो कपड़े ही नहीं। मैं कहता हूं सूटकेस में कपड़े नहीं तो जगह कैसे भर गई।

राहुल गांधी ने कहा कि, “मंदसौर के किसानों पर गोली चली थी। मुझे बुलाया था। मैं आया था। हमने घोषणा पत्र में लिख दिया है। मंदसौर, मध्य प्रदेश और हिंदुस्तान का कोई भी किसान कर्जा न लौटाने के लिए 2019 के चुनाव के बाद कर्जा न लौटाने के लिए जेल में नहीं डाला जाएगा। वहीं उन्होंने किसानों के लिए अलग से बजट पेश करने की बात भी दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा, जब दो बजट पेश होंगे। किसानों के लिए पहले बजट पेश होगा। साल की शुरुआत में मंदसौर के किसानों को बता दिया जाएगा कि इतना पैसा आपके लिए दिया जाएगा। आपके लिए कितना समर्थन मूल्य बढ़ाया जाएगा, इसकी जानकारी दी जाएगी। मौसम की मार से होने वाले नुकसान के लिए कितना मुआवजा मिलेगा, ये पहले ही बता दिया जाएगा। बता दें कि लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में मालवा-निमाड़ की 8 सीटों पर 19 मई को मतदान होगा।

छत्तीसगढ़िया सरकार में मोर्चे पर क्यों है छत्तीसगढ़ी सिनेमा?

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छत्तीसगढ़ में 15 साल बाद दिसंबर 2018 में जब कांग्रेस पार्टी की राज्य में सरकार बनी. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बने. इसके बाद चर्चा होने लगी कि प्रदेश में 15 साल बाद छत्तीसगढ़िया सरकार बनी है. कांग्रेस के ज्यादातर विधायकों ने विधानलसभा में छत्तीसगढ़ी में ही शपथ भी ली. हालांकि मध्यप्रदेश से अलग होकर 2000 में छत्तीसगढ़ का निर्माण हुआ तब से ही यहां जिनकी भी सरकार बनी सभी ने छत्तीसगढ़िया सरकार ही होने का दावा किया. अब इस छत्तीसगढ़िया सरकार में छत्तीसगढ़ी सिनेमा से जुड़े लोग मोर्चे पर हैं. अपनी बदहाली के लिए वे सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.

छत्तीसगढ़ी फिल्मों के प्रदर्शन को लेकर भेदभाव का आरोप लगाते फिल्म जगत से जुड़े कलाकार और निर्माता निर्देशक मोर्चे पर हैं. राजनांदगांव शहर के कमल टॉकीज के सामने बीते दिनों धरना प्रदर्शन भी किया. इसके अलावा प्रदेश के कई शहरों में सांकेतिक विरोध किया गया. उन्होंने टॉकीज संचालक पर अनुबंध तोड़ने का आरोप लगाया. छत्तीसगढ़ी फिल्म कलाकारों का ये गुस्सा हालिया रिलीज फिल्म महुं कुवारी तहुं कुंवारा को लेकर था. टॉकीज प्रबंधन पर आरोप है कि फिल्म को लगभग 2 सप्ताह चलाने के बाद इसकी जगह दूसरी फिल्म को प्रदर्शित किया जा रहा है.

File Photo.

दरअसल प्रदर्शन सिर्फ इस बात के लिए नहीं है कि किसी एक टॉकिज ने फिल्म अनुबंध की समय सीमा समाप्त होने से पहले ही हटा दी. इसके अलावा प्रदेश के मॉल में छत्तीसगढ़ी फिल्मे न लगाना, प्रदेश में फिल्मों को टैक्स फ्री करना, फिल्म निर्मताओं और कलाकारों को सुविधा उपलब्ध कराने जैसी तमाम मांगें भी हैं, जिसको लेकर समय समय पर फिल्म से जुड़े लोगों का गुस्सा सामने आते रहता है.

छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री छालीवुड से जुड़े लोगों से मिले आंकड़े के अनुसार प्रति वर्ष 25 से 30 छत्तीसगढ़ी फिल्म का निर्माण होता है. 90 करोड़ से अधिक का फिल्म निर्माण में खर्च किया जाता है. इसके बाद भी सिनेमा घरों में महज 10 से 12 फिल्म ही लगती है. राज्य  में छॉलीवुड से जुड़े लगभग दो लाख लोग हैं. इनमें से प्रत्यक्ष रूप से पांच हजार कलाकार, गायक, अभिनय के क्षेत्र में जुड़े हुए है.

Demo Pic.

2003 के बाद बढ़ा दिया गया टैक्स

सत्ताधारी दल कांग्रेस की स्टार प्रचारक, छत्तीसगढ़ी फिल्म प्रोड्यूसर और लोककलाकार सीमा कौसिक कहती हैं कि पिछली सरकार ने इस क्षेत्र में कुछ भी खास नहीं किया. पिछले साल चुनाव से ऐन पहले फिल्म विकास निगम का गठन प्रदेश में कर खानपूर्ति मात्र की गई. साल 2000 से 2003 तक 3 फिसदी कर छॉलीवुड फिल्म से लिया जाता था, जिसे 2003 के बाद यह कर 10 फिसदी कर दिया गया. जबकि यहां ​छत्तीसगढ़ी फिल्में टैक्स फ्री की जानी चाहिए.

छत्तीसगढ़ी फिल्म प्रोड्यूसर मनोज वर्मा का कहना है कि सिनेमाघरों में होल्डओवर नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है. सरकार को कई स्थाई नीति इसपर नहीं अपना रही है. सिनेमा घरों में छत्तीसगढ़ी फिल्म हमेशा ही लगनी चाहिए. साथ ही जिन सिनेमा घरों में फिल्में नहीं लगती वहां छालीवुड फिल्म के ट्रेलर दिखाने चाहिए.

छत्तीसगढ़ में मॉल तो फिल्म क्यों नहीं?
सीमा कौसिक कहती हैं कि छत्तीसगढ़ की धरती पर मॉल व मल्टीप्लेक्स संचालित कर करोड़ों रुपयों को व्यावसाय किया जा रहा है, लेकिन संचालकों को यहां छत्तीसगढ़ी फिल्में प्रदर्शित करने पर ऐतराज होता है. प्रदेश में सरकार बदली है. उम्मीद है कि प्रदेश की मौजूदा कांग्रेस सरकार इस ओर कोई ठोस कदम जरूर उठाएगी.

बीजेपी ने वादा निभाया
छत्तीसगढ़ी फिल्मों के अभिनेता, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम के पहले अध्यक्ष और बीजेपी के सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक राजेश अवस्थी का कहना है कि बीजेपी ने वादा निभाया और प्रदेश में फिल्म निगम बनाया. मौजूदा सरकार को संस्कृतिक कलाकारों के प्रति सहानुभूति नहीं है. तमाम बड़े कलाकारों को परेशानी नहीं हो रही. सरकार को 100 दिन में 90 दिन सिनेमाघरों में छत्तीसगढ़ी फिल्म प्रदर्शित करना अनिवार्य करना चाहिए. हमने अपने कार्यकाल में पहल की, लेकिन ज्यादा मौका नहीं मिला.

पीली साड़ी वाली इस महिला अफसर की ‘Lifestyle’

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देसी Lady Bond रजनी पंडित, अब कर रही हैं राजनीतिक दलों के लिए ‘जासूसी’

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एक समय में कई मर्डर मिस्ट्रीज सॉल्व करने वाली और कई धोखेबाज मंगेतरों को सबक सिखाने वाली भारत की मशहूर ‘लेडी बॉन्ड’ रजनी पंडित अब चुनाव के समय राजनीतिक पार्टियों के लिए जासूसी कर रही हैं. भारत की पहली महिला जासूस के तौर पर मशहूर रजनी ने 22 साल की उम्र में ही पहला केस सुलाझाय था. रजनी के पिता सीआईडी में थे इसलिए काफी छोटी उम्र में ही उन्होंने जासूसी के गुर सीख लिए थे.

लोकसभा चुनाव 2019 में पंडित और उनके जैसे अन्य कई लोगों की हाई डिमांड है ताकि एक राजनीतिक दल विपक्षी दल पर आरोप लगा सकें और इसके जरिए अपने प्रत्याशी की मदद कर सकें. मुंबई निवासी पंडित ने एएफपी को बताया, ‘यह गोपनीय है लेकिन जब भी कोई पार्टी अपने उम्मीदवारों या विपक्षी उम्मीदवार में से किसी एक को संदिग्ध पाती है तो हमें उनसे जांच करने के लिए कहती है.’

57 वर्षीय पंडित ने बताया कि ‘हमसे यह भी कहा जाता है कि उम्मीदवारों के पास कितने पैसा है और वह कैंपेन के लिए पैसे कहां से लाए हैं. हम ऐसे कामों के दौरान बहुत ही लो प्रोफाइल रहते हैं.’ पंडित का कहना है कि उनकी टीम जनवरी से राजनीतिक दलों में खुद को ‘एकीकृत’ करने में व्यस्त हैं. वे फाइनेंस के मामले देख रही हैं और क्लाइंट्स को रिपोर्ट देने से पहले रैलियों में भी जाती हैं.

उन्होंने कहा, ‘आम तौर पर चुनावों से पहले मामलों में वृद्धि होती है. हमारे पास बहुत सारे आवेदन आए लेकिन हम कुछ को ही स्वीकार कर पाए.’ इंडियाज एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट डिटेक्टिव्स एंड इन्वेस्टिगेटर्स के अध्यक्ष कुंवर विक्रम सिंह ने कहा, ‘बहुत अधिक मेहनत करनी होती है.’ सिंह ने एएफपी को बताया, ‘(एक उम्मीदवार की) स्थानीय प्रतिष्ठा, प्रभाव, उसकी अपनी जाति में उसका रुख … इन सभी बातों पर गौर किया जाता है.’

देसी ‘शर्लोक होम्स’ रजनी

महाराष्ट्र में पैदा हुई और यहीं पली-बढ़ीं देसी ‘शर्लोक होम्स’ रजनी का दावा है कि अब तक उन्होंने 80 हजार से ज्यादा केस सुलझाए हैं. उन्होंने ‘ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे’, जो जीवन की सच्ची घटनाओं को छापता है, को अपने इस सफर के शुरूआत के बारे में बताया. साथ ही अपने एक खास केस के बारे में भी जिक्र किया कि क्यों वो उनके जासूसी जीवन के यादगार लम्हों में शामिल है.

उन्होंने कहा, ‘मैं कॉलेज में थी जब मैंने अपना पहला केस सॉल्व किया था. मैं फर्स्ट इयर में पार्ट टाइम ऑफिस क्लर्क का काम करती थी. इस दौरान मेरे साथ काम करने वाली एक महिला ने मुझे अपने घर हुई चोरी के घटना के बारे में बताया. उसे अपनी नई बहू पर शक था लेकिन उसके पास इसके कोई सबूत नहीं थे.’

अपने पिता से प्रभावित होकर रजनी ने इसे अपने पहले केस के तौर पर सॉल्व करने का निर्णय लिया. उन्होंने महिला के घर से लगी सड़क पर नजर रखनी शुरू की. तो मैंने पाया कि उनका बेटा ही असली चोर है. जब उससे पूछताछ की गई, तो उसने चोरी की बात क़ुबूल कर ली. इसके बाद यहीं से मेरे करियर की शुरुआत हो गई. उस वक्त मैं सिर्फ 22 साल की थी.’

उस जमाने में न इंटरनेट था और न सोशल मीडिया, ऐसे में रजनी अपनी तफ्तीश के लिए पूरी तरह से लोगों से पूछताछ पर निर्भर रहती थीं. इस पेश में मौजूद खतरे के बावजूद वो मजबूती से इसमें आगे बढ़ती रहीं.

यह मुश्किलों से भरा काम 

रजनी ने कहा, ‘यह मुश्किलों से भरा काम है. शुरुआत में मेरे माता-पिता को इसके बारे में पता नहीं था. पर जब मेरे पिता को पता चला, उन्होंने मुझे याद दिलाया कि यह पेशा बेहद खतरनाक है. पर जब वो इसे कर सकते हैं तो, मैं भी. इसलिए मैं इस काम में जुटी रही. मुझे अपने काम से प्यार हो गया था इसलिए शादी और परिवार के बारे में सोचने का वक्त नही मिला.

रजनी के काम पर मीडिया की नजर तब पड़ी जब उन्होंने एक मर्डर केस को सुलझाने के लिए नौकरानी (मेड) के रूप में 6 महीने तक काम किया. यह उनके लिए सबसे मुश्किल केस साबित हुआ था.

उन्होंने कहा, ‘मेरा सबसे कठिन मामला हत्या की तफ्तीश के लिए सबूत जुटाना था. महिला के पति और बेटे दोनों की हत्या कर दी गई थी, मगर वारदात को किसने अंजाम दिया उसका पता नहीं चल पा रहा था. मैं इसका सुराग तलाशने के लिए महिला के घर में 6 महीने तक नौकरानी बनकर रही जिस पर हत्या का संदेह था.’

रजनी ने बताया कि, ‘जब वो (महिला) बीमार पड़ गई, तो मैंने उसका ख्याल रखा और धीरे-धीरे उसका भरोसा हासिल किया. मगर एक बार जब घर में खामोशी पसरी थी मेरे रिकॉर्डर से ‘क्लिक’ की हल्की सी आवाज आई. तब उसे मुझपर शक होने लगा. वो मुझे बाहर जाने से भी रोकने लगी थी.’

नवजोत कौर ने कैप्टन अमरिंदर सिंह पर लगाया टिकट नहीं मिलने का आरोप

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पंजाब में लोकसभा चुनाव के लिए मतदान से पहले राज्य सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर ने सिद्धू के प्रचार को लेकर बड़ा बयान दिया है। नवजोत कौर ने पार्टी नेतृत्व पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि नवजोत सिंह सिद्धू से पंजाब में इसलिए प्रचार नहीं कराया जा रहा है कि क्योंकि कैप्टन अमरिंदर सिंह नहीं चाहते हैं। हालांकि, खबर यह आई थी कि सिद्धू के गले में समस्या है जिसका इलाज चल  रहा है, इसलिए वह प्रचार से दूर हैं। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के बीच कई मसलों पर मतभेद की सुर्खियां बनती रही हैं। अब सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर ने पंजाब में 19 मई को होने जा रहे लोकसभा चुनाव के लिए मतदान से पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह को लेकर बड़ा दावा किया है।

नवजोत कौर ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी को सिद्धू की जरूरत नहीं है, इसीलिए उनसे पंजाब में प्रचार नहीं कराया जा रहा है। देशभर में कांग्रेस पार्टी के लिए वोट मांगने जा रहे स्टार प्रचारकर नवजोत सिंह सिद्धू से पंजाब में प्रचार न कराए जाने की वजह नवजोत कौर ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को बताया है। नवजोत कौर ने कहा है कि अमरिंदर सिंह नहीं चाहते कि सिद्धू पंजाब में प्रचार करे। यहां तक कि नवजोत ने खुद को टिकट न मिलने पर भी बड़ा आरोप लगाया। नवजोत कौर ने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह की वजह से उन्हें लोकसभा चुनाव का टिकट नहीं मिला। कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ ही उन्होंने आशा कुमारी को भी अपना टिकट कटने के लिए जिम्मेदार बताया। नवजोत कौर ने कहा कि दशहरा पर जो ट्रेन हादसा हुआ था, उसके लिए मुझे वजह मानकर मेरा टिकट काटा गया।

बता दें कि अमृतसर में दशहरा के मौके पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जिसमें शामिल होने के लिए नवजोत कौर पहुंची थीं। इस कार्यक्रम को देखने बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए थे, जिनमें से कुछ रेलवे ट्रैक पर भी खड़े थे और ट्रेन से कुचलकर उनमें से कई की मौत हो गई थी। इस हादसे को लेकर नवजोत कौर पर काफी सवाल उठे थे। नवजोत कौर ने इस हादसे को ही अपना टिकट कटने के पीछे वजह बताया है। साथ ही इस बहाने अपने पति व पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू से पंजाब में प्रचार न कराने को लेकर भी नवजोत कौर ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की आलोचना की है।

गर्मियों में फायदेमंद है कच्ची कैरी की चटनी

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नई दिल्ली। गर्मियों में कच्ची आमी को सब्जियों में आप बहुत इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में आप कच्ची कैरी की चटनी भी बना सकते हैं।

सामग्री : 1 कच्चा आम
आधा कप कद्दूकस नारियल
1 चम्मच चीनी, गुड़,
आधा कप बारीक कटा हरा धनिया
नमक स्वादानुसार
1 चम्मच तेल,
1 चम्मच चना दाल, चुटकी भर मैथी दाना,
पाव चम्मच जीरा
2-3 सूखी लाल मिर्च
मीठा नीम
चुटकी भर हींग
1 चम्मच तेल और राई।

सबसे पहले कच्चे आम को कद्दूकस कर लें। इसके बाद सबसे पहले कड़ाही में तेल गरम कर चना दाल, मैथी और जीरा डालकर भून लें। लाल मिर्च, मीठा नीम, हींग और कद्दूकस किया हुआ कच्चा आम डालें और 3-4 मिनट तक नरम होने दें। ठंडा होने पर इसमें नारियल, गुड़ या शक्कर, हरा धनिया, हल्दी और नमक डालें और खाने के साथ सर्व करें।

पीएम मोदी के खिलाफ प्रचार करने 15 मई को वाराणसी जाएंगे सीएम भूपेश बघेल

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 लोकसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण के प्रचार में सियासी दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसी कड़ी में प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पार्टी के प्रचार के लिए 15 मई को बहुचर्चित संसदीय सीट वाराणसी जाएंगे। यहां वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध प्रचार में हिस्सा लेगें। सीएम भूपेश बघेल कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनावी सभा और रोड शो करेंगे। सातवें और अंतिम चरण के 19 मई को मतदान होगा। इसमें 8 राज्यों की 59 सीटें में मतदान होगा। इसमें बिहार 8, झारखंड 3, मध्यप्रदेश 8, पंजाब 13, चंडीगढ़ 1, पश्चिम बंगाल 9, हिमाचल 4, उत्तर प्रदेश 13 सीटें में वोट डाले जाएंगे।

छत्तीसगढ़ : अप्रैल माह में बढ़ी बियर की खपत

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रायपुर। भीषण गर्मी के चलते राजधानी में बियर की खपत बढ़ गई है। बियर के लिए बार व दुकानों में लोगों की काफी भीड़ बढ़ गई है। जिससे शाम तक बीयर का स्टॉक खाली हो रहा है। वही बियर के लिए  दुकानों में भी लाइन लग रही है।
बता दें कि इस वर्ष अप्रैल माह में बियर की खपत 5,29,000 बल्क लीटर रही जो गत वर्ष अप्रैल माह की तुलना में 16.5 फीसदी बढ़ी है। पिछले वर्ष अप्रैल माह में बियर की खपत 4,54,000 बल्क लीटर थी। जो इस बार बढ़ गई है। जिला आबकारी अधिकारी डी. आर. नेताम ने बताया कि गर्मी में बियर की मांग बढ़ी है। वहीं दुकानों में भी बियर की आपूर्ति की जा रही है। जिससे बियर की कमी में शिकायत नहीं आ रही है।
प्रचलित ब्रांड की बियर-राजधानी में बिक रही है, जिसमें मसलन कार्ल्सबर्ग एलीफेंट, गॉडफादर, हेनिकेन, हंटर, किंगफिशर, माउंट-6000, प्रेसिडेंट-5000, रॉक बर्ग, सिंबा, मार्टिन-7 सहित अन्य ब्रांड की बियर बिक रही है।

छत्तीसगढ़ : ‘‘गैर संचारी रोग रोकथाम एवं उपचार माह’’ का आयोजन 15 मई से 15 जून तक

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शासन के निदेर्शानुसार जिले में गैर संचारी रोगों के संदर्भ में लोगों को जागरूक करने के साथ ही इससे बचाव, निदान एवं उपचार के लिए स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘‘गैर संचारी रोग रोकथाम एवं उपचार माह’’ का आयोजन 15 मई से 15 जून तक किया जाएगा। इसके तहत स्वस्थ्य शैली अपनाकर मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कैंसर, लकवा, ट्रामा जैसे घातक रोगों से बचाए जाने की जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के लिए कलेक्टर रजत बंसल ने कलेक्टोरेट सभाकक्ष में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बैठक ली।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए इसका व्यापक प्रचार-प्रसार व संदेश को जनसमुदाय तक पहुंचाने के लिए कार्ययोजना बनाकर कार्य करने के निर्देश भी दिए।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.डीके तुर्रे ने बैठक में बताया कि जिले में इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है तथा ग्राम, मजरा, टोला, स्लम, झुग्गी आदि स्थानों को चिन्हांकित कर सूक्ष्म कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसके तहत 30 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के सभी व्यक्तियों का मधुमेह और उच्च रक्तचाप की जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि महिलाओं में स्तन एवं गर्भाशय ग्रीवा कैंसर इत्यादि की स्क्रीनिंग की जाएगी। इसी तरह पुरूषों एवं महिलाओं में मुंह के कैंसर की भी स्क्रीनिंग इस दौरान किया जाएगा। डॉ.तुर्रे ने यह भी बताया कि जिले में 69 हेल्थ वेलनेस सेंटर संचालित हैं, जहां प्रति केन्द्र में 500 स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा गया है। इसमें महिला एवं बाल विकास, निजी चिकित्सालय, यूनिसेफ, एनजीओ और महिला स्व सहायता समूहों की भागीदारी भी सुनिश्चित होगी।