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छत्तीसगढ़: इंजीनियरिंग के तीन कॉलेज बंद, 4 होंगे मर्ज, घटेंगी 3 हजार सीटें

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रायपुर.छत्तीसगढ़ में इजीनियरिंग शिक्षा से जुड़े लोगों के लिए अच्छी खबर नहीं है. यहां संचालित तीन निजी इंजीनियरिंग कॉलेज इस बार बंद हो रहे हैं. इसके अलावा 4 इंजीनियरिंग कॉलेजों को दूसरे कॉलेजों के साथ मर्ज किया जा रहा है. एक अनुमान के मुताबिक सत्र 2019-20 में प्रदेश में इंजीनियरिंग की करीब 3 हजार सीटें कम हो जाएंगी. 15 मई से पहले छत्तीसगढ़ की टेक्नीकल यूनिवर्सिटी सीएसवीटीयू (छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकांनद टेक्निकल यूनिवर्सिटी), भिलाई की होने वाली कार्यपरिषद की बैठक के बाद इसका ऐलान कर दिया जाएगा.
छत्तीसगढ़ में टेक्निकल यूनिवर्सिटी सीएसवीटीयू के वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यूनिवर्सिटी से संबंधित 3 शासकीय और 42 निजी इंजीनियंरिंग कॉलेज सत्र 2018-19 में संचालित हैं. अब सत्र 2019-20 के लिए तीन निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों ने बंद करने, चार ने दूसरे कॉलेजों में मर्ज करने का आवेदन ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) को दिया था. इन कॉलेजों ने नए सत्र की संबंद्धता के लिए, डायरेक्टोरेट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (डीटीई), छत्तीसगढ़ और सीएसवीटीयू को आवेदन नहीं दिया है. मिली जानकारी के मुताबिक एआईसीटीई ने कॉलेजों को आवेदन को स्वीकार करते हुए लेटर ऑफ अप्रुवल जारी कर दिया है.
सीएसवीटीयू से मिली जानकारी के अनुसार रायपुर जिले में संचालित सीआईटी, रावतपुरा सरकार समूह का एक इंजीनियरिंग कॉलेज और दुर्ग जिले में संचालित पार्थिवी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट ने नए सत्र में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग कोर्स को बंद करने का आवेदन दिया है. इसके अलावा प्रदेश के बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज समूह शंकराचार्य ने भिलाई में संचालित एक और संतोष रूंगटा कॉलेज समूह ने दो और संजय रूंगटा कॉलेज समूह ने अपने एक इंजीनियरिंग कॉलेज को दूसरे कॉलेजों में मर्ज करने का आवेदन दिया था.

चुनाव के पहले आई खबर, देश छोड़ कर भाग रहे crorepati

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दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था (Fastest growing economy) और व्यापार करने में सबसे आसान देश का दर्जा (Ease of Doing Business in India) मिलने से खुश हो रहे भारतीयों के लिए एक हैरान करने वाली रिपोर्ट सामने आई है। चुनाव के पहले आई इस रिपोर्ट के अनुसार विदेश में रहने की इच्छा रखने वाले लोग बड़ी संख्या में देश छोड़कर (Rich people leaving the country) जा रहे हैं। यह आंकड़ा दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। जानकारी के अनुसार करीबन 5000 करोड़पति (crorepati) और अच्छी-संपत्ति रखने वाले शख्स (HNWIS) ने पिछले साल भारत को छोड़ कर विदेशों में अपना ठिकाना बना लिया है।

ग्लोबल वेल्थ माइग्रेशन रिव्यू 2019 (global wealth migration review 2019) में हुआ खुलासा

अफरासिया बैंक और अनुसंधान फर्म न्यू वल्र्ड वेल्थ द्वारा कराए गए एक ग्लोबल वेल्थ माइग्रेशन रिव्यू (GWMR) 2019 में पता चला कि पिछले साल ही भारत से बहुत सारे धनी व्यक्ति देश छोड़कर गए। करीबन 5000 करोड़पति और अच्छी-संपत्ति रखने वाले शख्स (HNWIS) ने देश को छोड़ दिया, जोकि पूरे भारत में एचएनडब्ल्यूआईएस वाले लोगों का 2 प्रतिशत है।

भारत से ज्यादा लोग ब्रिटेन में कर रहे पलायन

वर्ष 2018 में भारत छोड़कर जाने वाले करोड़पतियों की संख्या ब्रिटेन से कहीं ज्यादा रही। ब्रेक्सिट के कारण ब्रिटेन में उथल-पुथल मची हुई है। पिछले तीन दशकों में ब्रिटेन आकर बसने वाले करोड़पति लोगों की संख्या में तेजी आई थी, लेकिन पिछले दो सालों में ब्रेक्सिट के कारण यह ट्रेंड पलट गया है।

इन देशों में करोड़पतियों ने छोड़ा देश

-चीन करीब 15 हजार
-रूस से 7 हजार
-ब्रिटेन से 3 हजार
-फ्रांस से 3 हजार
-ब्राजील से 2 हजार
-सऊदी अरब से एक हजार
-इंडोनेशिया से 1 हजार

भाग कहां बसे ये करोड़पति लोग
-आस्‍ट्रेलिया में 12 हजार
-अमेरिका में 10 हजार
-ग्रीस में एक हजार
-कनाडा में चार हजार
-केरेबियन में 2 हजार
-यूएई में 2 हजार
-स्‍पेन में एक हजार
-सिंगापुर में एक हजार

 

ट्रेड वॉर से भाग रहे सबसे ज्यादा लोग

चीन इस सूची में सबसे ऊपर है। अमेरिका के साथ व्यापार जंग से उसकी अर्थव्यवस्था पर असर दिखना शुरू हो गया है। पिछले सप्ताह चीन पर अमेरिका ने ताजा शुल्क लगा दिए हैं जिसके बाद अब दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए हालत और खराब हो सकते हैं। रूस सूची में दूसरे स्थान पर है और भारत से आगे है। रूसी अर्थव्यवस्था कई उतार-चढ़ाव के प्रभावों से जूझ रही है।

 

अमीरों की पसंद बन रहा अमेरिका और आस्ट्रेलिया

पलायन करने वाले करोड़पति लोगों के लिए सबसे अच्छे गंतव्यों की सूची में अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सबसे ऊपर है।

भारत के लिए समस्या
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में असामनता तेजी से बढ़ रही है। देश में कुल संपत्ति के आधे के मालिक करोड़पतियों यानी अच्छी-संपत्ति रखने वालों के पास है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह भी एक बड़ी समस्या बनकर उभर रही है।

 

भूल भुलैया सीक्वल- अक्षय कुमार की फिल्म का धमाकेदार सीक्वल- लौट रही है मंजोलिका?

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अक्षय कुमार और विद्या बालन की सुपरहिट फिल्म भूल भुलैया को लेकर एक बार फिर से चर्चा हो रही है और खबर है कि 2007 में रिलीज हुई इस फिल्म का सीक्वल बनने जा रहा है। गौरतलब है इस फिल्म में विद्या बालन ने दमदार अभिनय किया था। फिल्म में इन दोनो के अलावा अमीषा पटेल और शाईनी अहूजा लीड रोल में थे। अब खबर है कि इस फिल्म के सीक्वल में उनसे से कोई नजर नहीं आएगा और लगभग सभी एक्टर्स नए चेहरे होंगें।

मुंबई मिरर में छपी खबर की बात करें तो इस फिल्म को फरहाद सामजी निर्देशित करने जा रहे हैं। वहीं इस खबर से जुडे एक सुत्र ने बताया कि एक बार अंतिम स्क्रिप्ट पर काम पूरा हो जाए उसके बाद, टीम कास्टिंग और अन्य चीजों पर काम शुरू करेगी।

इसके साथ हा फिल्म निर्माता भूषण कुमार ने फिल्म का नाम भूल भुलैया 2 भी दर्ज करवाया है। खैर अभी इस फिल्म को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

अक्षय कुमार के वर्कफ्रंट की बात करें तो इस समय वो फिल्म हाउसफुल 4 और सूर्यवंशी को लेकर काफी चर्चा में चल रहे हैं। अक्षय कुमार काफी जल्दी जल्दी फिल्में करने के लिए जाने जाते हैं और इस साल भी कुछ ऐसा ही होगा।

बैंग बैंग 2

ऋतिक रोशन की फिल्म बैंग बैंग का सीक्वल बनने जा रहा है। फैंस को बेसब्री से इंतजार है।

 

किक 2

फिल्म किक के सीक्वल में काफी जल्दी सलमान खान नजर आने वाले हैं। किक 2 की कर लो तैयारी।

 

हाउसफुल 4

अक्षय कुमार की हाउसफुल की चौथी किश्त आने वाली है। इस बार बॉबी देओल भी आएंगे नजर।

 

एबीसीडी 3

वरुण धवन और श्रद्धा कपूर एबीसीडी 3 के साथ धमाकेदार वापसी कर रहें हैं।

 

दबंग 3

फिल्म दबंग 3 को लेकर शूटिंग शुरु हो चुकी है और ये फिल्म साल के अंत तक रिलीज होगी।

 

टोटल धमाल

टोटल धमाल मे रिलीज होकर धमाका कर दिया था और फिल्म लोगों को काफी पसंद आई है।

 

स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2

स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2 हाल ही में रिलीज हुई है और फिल्म का मिला जुला रिसपॉंस आ रहा है।

 

मदर्स डे : सीएम भूपेश बघेल ने मां के साथ पोस्ट की फोटो, लिखा- ‘मेरी मां मेरी ताकत, मेरा हौसला

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रायपुर । पूरी दुनिया में 12 मई को मदर्स डे मनाया जा रहा है। इस मौके पर सीएम भूपेश बघेल सहित कई हस्तियों ने मातृ दिवस की शुभकामनाएं दी हैं। सीएम बघेल ने मदर्स डे के अवसर पर अपनी मां के साथ फोटो ट्वीट कर शुभकामनाएं दी। उन्होंने लिखा कि, ‘मेरी मां मेरी ताकत-मेरा हौसला। हैप्पी मदर्स डे’। वहीं पूर्व सीएम रमन सिंह ने इस मौके पर प्रदेशवासियों को मदर्स डे दी शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने ट्वीट किया कि, ‘मां, यह वो शब्द है जिस पर बड़े-बड़े विद्वान नतमस्तक हुए हैं, मां, यह वो उपाधि है जहां पुरस्कार के रूप में त्याग व निस्वार्थ भावना मिलती है। मैं भाग्यशाली हूं, जो मुझे प्रदेश की माताओं और छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा का भरपूर अवसर मिला। आज मदर्स डे पर सभी मातृशक्ति को कोटिश: नमन।

स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने ट्वीट किया कि, ‘मेरे लिए हर एक दिन मदर्स डे है, क्योंकि मैं आज जो भी हूं, मेरे मां की शिक्षा के वजह से हूं। सभी माताओं को मातृ दिवस की शुभकामनाएं।

सीएम ममता बनर्जी की आपत्तिजनक फोटो शेयर करने पर भाजपा की छात्र विंग नेता गिरफ्तार

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प. बंगाल की सीएम ममता बनर्जी की आपत्तिजनक फोटो सोशल मीडिया  पर शेयर करने के आरोप में पुलिस ने भाजपा की छात्र विंग नेता प्रियंका शर्मा गिरफ्तार किया है। टीएमसी की तरफ से प्रियंका शर्मा के खिलाफ पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी की आपत्तिजनक फोटोशॉप इमेज शेयर करने के लिए एफआईआर भी दर्ज करवाई गई थी। इसके बाद पुलिस उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किया है। बता दें कि प्रियंका हावड़ा जिले में भाजपा छात्र विंग की संयोजक हैं और उन्हें गिरफ्तार करने के बाद 14 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। सीएम ममता बनर्जी की जो सोशल मीडिया पर फोटो शेयर की है उस फोटोशॉप इमेज में उन्हें मेट गाला इवेंट में अभिनेत्री प्रियंका चौपड़ा की लुक की तरह दिखाया गया है।

छत्तीसगढ़ : 350 मासूमों से मंगा रहे थे भीख, विभाग ने छापा मारा तो हुआ ऐसा खुलासा

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तिल्दा नगर की तीन नट बस्तियों के 380 परिवारों के लगभग साढ़े तीन सौ बच्चे बसों और ट्रेनों में भिक्षावृत्ति करते हैं। इसे संज्ञान में लेते हुए शुक्रवार की सुबह महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस की टीम ने तिल्दा के अटल निवास, देवार मोहल्ला और शिक्षा कॉलोनी में छापा मारा तो वहां हड़कंप मच गया।

अधिकारियों की टीम के अचानक आने से वे घबरा गए। उनके दरवाजे पर टीम के साथ सामाजिक संस्थाओं के कार्यकर्ताओं ने दस्तक दी तो वे एकजुट होकर विरोध पर उतारू हो गए। पुलिस ने उन्हें अपने बच्चों के साथ एक जगह एकत्रित किया। इसके बाद नट और देवार बस्ती के लोगों को समझाइश देने का सिलसिला चला।

इस पर उन्होंने बताया-हमारे सामने सबसे बड़ी परेशानी गृहस्थी चलाने की है। न तो राशन कार्ड है और न ही श्रमिक कार्ड है। ऐसे में चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते। इनकी समस्या सुनने के बाद अफसरों ने कहा-बच्चों से भिक्षावृत्ति न कराएं, अभी प्राथमिक स्तर पर आंगनबाड़ी में दाखिला कराएं।

इसके बाद राशनकार्ड और श्रमिक कार्ड बनवाया जाएगा। स्वरोजगार करने के लिए कौशल विकास का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। हर एक सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा। इसके बाद वे मान गए और खुद आंगनबाड़ी जाकर 80 बच्चों का दाखिला कराया।

बस्ती की महिलाएं और पुरुष मिले नशे में

बस्ती में टीम पहुंची तो अधिकतर महिला-पुरुष नशे में मिले। उन्हें अपने बच्चों के कहीं भी आने-जाने की सुध नहीं। इन्हीं लोगों में एक सिंडीकेट है, जो कुछ पैसे और नशा करने का साधन उपलब्ध कराने के नाम पर बच्चों को भिक्षावृत्ति के लिए ले जाता है। शाम तक बच्चों को लाकर घर छोड़ देता है। जिला बाल संरक्षण अधिकारी नवनीत स्वर्णकार के नेतृत्व अधिकारियों ने बस्ती के लोगों को समझाइश दी।

बच्चे के गुम होने की खबर भी नहीं

नट बच्चों का भिक्षावृत्ति में इस कदर इस्तेमाल होने लगा है कि कई परिवारों के बच्चे गुम हो गए, लेकिन उनकी भी चिंता नहीं है। अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए मासूमों की जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं।

स्थानीय पुलिस करेगी बच्चों की मॉनिटरिंग

प्रशासन ने नट बच्चों के बाहर आने-जाने की मॉनिटरिंग करने की जिम्मेदारी दी है। अब वे अपने बच्चों को अगर बस या ट्रेन में ले जाकर छोड़ते हैं तो उन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दोबारा भीख मंगवाने पर बच्चों को बाल आश्रम भेजेगा प्रशासन

दोबारा फिर बच्चों से भीख मंगवाने पर बच्चों को बाल आश्रम भेज दिया जाएगा। वहां माता-पिता को बच्चों से मिलने नहीं दिया जाएगा। नट बस्ती के लोगों को प्रशासन ने यह चेतावनी दी है। बाल अश्रम में बच्चों रहने, खाने-पीने के साथ पढ़ाई आदि की व्यवस्था की जाएगी। बस्ती के लोगों ने शपथ ली है कि वे बच्चों से भीख नहीं मंगवाएंगे।

बनेंगे इनके राशन कार्ड और श्रमिक कार्ड, उपलब्ध कराएंगे रोजगार

नट और देवार बस्ती के लोगों की माली हालत सुधारने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम जिला बाल संरक्षण समिति में इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इन बस्तियों के लोगों के राशनकार्ड और श्रमिक कार्ड बनाने के लिए प्रस्ताव दिए जाएंगे। इनके जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए एनजीओ की भी मदद ली जाएगी।

– बच्चों को अभी आंगनबाड़ी में दाखिल करा दिया गया है। आगे भी इनकी पढ़ाई की मॉनिटरिंग की जाएगी। नट बस्ती में जांच करने पर पता चला कि ये यहां पिछले 20 सालों से हैं, लेकिन अभी तक इनका राशनकार्ड नहीं है न ही श्रमिक कार्ड बना है। यह सब बनवाया जाएगा। इनकी बराबर मॉनिटरिंग की जाएगी। – अशोक पांडेय, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग

लोकसभा चुनाव में होगी प्यार की जीत : राहुल

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर नफरत फैलाने का आरोप लगाते हुए और इस बात पर जोर देते हुए कि कांग्रेस लोकसभा चुनाव की लड़ाई में प्यार फैला रही है, रविवार को कहा कि इस लड़ाई में प्यार की जीत होगी।
राहुल ने नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र में मतदान करने के बाद मीडिया को बताया कि इस चुनाव में तीन-चार मुख्य मुद्दों में बेरोजगारी, कृषि संकट, खराब अर्थव्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दे शामिल हैं।
राहुल ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि इस चुनाव में कांग्रेस कितनी सीटें जीतेगी। उन्होंने कहा, इसका फैसला जनता करेगी।

सानिया मिर्जा का बड़ा खुलासा, कहा मुझे इस नाम से बुलाता है पूरा पाकिस्तान . नाम है चौकाने वाला

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सानिया मिर्जा को भला कौन नहीं जानता होगा

सानिया मिर्जा भारत की टेनिस स्टार खिलाड़ी है जोकि भारत की तरफ से टेनिस खेलती है

इन्होंने कई मौकों पर बेहतरीन रिकॉर्ड बनाते हुए भारत देश का नाम ऊंचा किया है| सानिया मिर्जा ने साल 2010 में पाकिस्तान के महान खिलाड़ी शोएब मलिक के साथ शादी रचाई थी

सानिया मिर्जा और शोएब मलिक की शादी में उस वक्त काफी ज्यादा सुर्खियां बटोरी थी

सानिया मिर्जा और शोएब मलिक की शादी को 8 साल हो गए है

लेकिन कुछ दिनों पहले मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सानिया मिर्जा की मां बनने की खबरें सोशल मीडिया पर छाई हुई है और आपको बता दें यह अब मां बनने वाली है

सानिया मिर्जा अंतरराष्ट्रीय टेनिस में नंबर वन की रैंकिंग पर भी रह चुकी है और इन्होंने भारत देश को गोल्ड मेडल भी जिताया है

सानिया मिर्जा ने अभी हाल ही में एचटी ब्रंच को अपना बयान दिया जिसमें इन्होंने बताया कि पूरा भारत और पाकिस्तान देश मुझे काफी प्यार करता है और पूरा पाकिस्तान मुझे प्यार से भाभी कह कर बुलाता है

सानिया मिर्जा ने कहा जब भी मैं अपने ससुराल जाती हूं तो पूरा पाकिस्तान मुझे भाभी के नाम से पुकारता है और मेरी काफी इज्जत करता है

सानिया मिर्जा ने कहा कि 1 साल में मैं एक बार जरूर ससुराल जाती हूं और उन्हें भारत के साथ-साथ पाकिस्तान से भी काफी प्यार मिलता है|

पैरों की हड्डी टूट जाने पर क्या करें सबसे पहले उपचार , क्या होता है इसका प्राथमिक उपचार

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पैर की हड्डी बहुत ही नाजुक होती है । शायद हम में से बहुत ही कम लोग जानते हैं की पूरे शरीर में जल्द टूटने के लिए सबसे कमजोर हड्डी कोहनी और पैर की ही होती है । हमारा पैर जरा सा भी गलत पड़ा नही की सारे शरीर का भार उसी जगह आ जाता है जिसके कारण उसके टूट जाने की आशंका सबसे ज्यादा होती है ।

आज हम बात कर रहे हैं की जब किसी व्यक्ति के पैर की हड्डी टूट जाये तो उसका सबसे पहले उपचार कैसे किया जाये । अब जब हड्डी टूटेगी तो आप तुरंत तो डॉक्टर को बुला नही पाएंगे । व्यक्ति को उठाएंगे भी , उसको देखेंगे भी डॉक्टर का भी पता करेंगे वहाँ जाने तक का समय डॉक्टर के विजिट करने में भी बहुत समय जाएगा । तब तक व्यक्ति की हालत बहुत ही ज्यादा बुरी हो जाएगी । ऐसे में उसको प्राथमिक उपचार की जरूरत भी पड़ेगी ही । तो आइये जानते हैं ऐसे में क्या करें ?

आप किसी व्यक्ति की मदद कर रहे हैं तो सबसे पहले इस बात को सुनिश्चित करें कि वह फ्रेक्चर से ही पीड़ित है और उसे यह कोई और समस्या नहीं है। गंभीर दर्द, सूजन, विकृति, डिसकलरेशन आदि संकेतों से पहचान सकते हैं कि व्यक्ति को फ्रेक्चर है ।

लकड़ी की लंबाई पीड़ित व्यक्ति की आर्मपिट से पैर तक होनी चाहिए और दूसरी लकड़ी की लंबाई कमर से लेकर प्रभावित पैर तक रखें। इसके बाद आपको लकड़ियों को पैर पर रोकने के लिए स्प्लिंट्स की जरुरत होगी। अब लंबी वाली लकड़ी को आर्मपिट से लेकर पैर तक रखें और छोटी लकड़ी को पैर के दूसरी तरफ से सहारा देते हुए जांघ से लगाते हुए पैर तक रखें। इन दोनों लकड़ियों को आपस में बाँधने के लिए आपको किसी कपड़े या रस्सी आदि की आवश्यकता होगी। एड़ी को सपोर्ट देते हुए रस्सी या कपड़े से लकड़ियों को पैर के दोनों तरफ बांध दें। ध्यान रखें कि लकड़ियों की लंबाई दूसरे पैर की लंबाई के बराबर ही रहे ताकि बांधने के बाद दोनों पैरों की लंबाई बराबर रहे ।

सुगन्ध और अनुपम छटा बिखेरते वृंदावन के फूल बंगले

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इन दिनों वृंदावन के मंदिरों में फूलबंगलों की बहार देखने को मिल रही है, तपती दोपहरी और भीषण गर्मी के चलते मंदिरों में भगवान को सुगन्ध व ठंडक का अहसास कराने के लिए फूल बगलों का आयोजन किया जाता है जिससे कि मंदिरों में शीतलता का अहसास बरकरार रहे।

फूलों के बिना देव प्रतिमाओं का श्रृंगार अधूरा ही प्रतीत होता है इसीलिए ग्रीष्म काल में भगवान के मंदिरों में गर्मी से राहत दिलाने को श्रद्धालु फूलों का बंगला बनवाते हैं। यह क्रम पहले गर्मियों के दिनों में चलता था परंतु आज यही फूलबंगले वर्ष भर सजाये जाते हैं।

वृंदावनके प्रसिद्ध मंदिरों में फूल बंगलों का यह क्रम चैत्र शुक्ल पक्ष की एकादशी से श्रावण कृष्ण पक्ष अमावस्‍या (हरियाली अमावस्‍या) तक चलता है। इन दिनों फूल बंगलों की बड़ी जबर्दस्त बहार रहती है। फूलों के यह बंगले मुख्यतः वृंदावन के ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर, राधावल्लभ मंदिर, राधारमण मंदिर एवं राधा दामोदर मंदिर आदि में श्रद्धालु, भक्तगणों द्वारा मंदिरों के गोस्वामियों के सहयोग से नित नए रूप से बनवाए जाते हैं, जिनमें प्रतिदिन सायंकाल ठाकुर जी मंदिर के गर्भ गृह से बाहर निकल कर जगमोहन में विराजते हैं। साथ ही वे मंदिर प्रांगण में उपस्थित हजारों श्रद्धालु भक्तों को अपने दर्शन देते हैं।

फूलों के इन बंगलों को देखने के लिए देश के कोने-कोने से असंख्य लोग वृंदावन पहुंचते हैं। फूल बंगले धर्म, संस्कृति एवं कला के अद्भुत समन्वय का मिलाजुला रूप होने के साथ-साथ प्रभु को रिझाने का एक सशक्त माध्यम भी हैं। प्रभु को प्रसन्न करने वाली यह फूल सेवा पहले प्रतीकात्मक रूप से की जाती रही है परंतु अब यह अपने पूरे वैभव पर है।

फूल बंगलों का सर्वोत्कृष्ट स्वरूप श्री बांके बिहारी जी मंदिर में

phool bangla art of the temple of braj Vrindavan in the heart of devotees

भीषण गर्मी की झुलसाने वाली तपिश में अपने आराध्य ठाकुर जी को गर्मी के प्रकोप से बचाने एवं उन्हें पुष्प सेवा से आह्लादित कर रिझाने के लिये वृंदावन के प्रायः सभी प्रमुख मंदिरों में फूल बंगले बनते हैं परंतु फूल बंगले बनाने का सर्वोत्कृष्ट स्वरूप यहां के विश्व प्रसिद्ध ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर में देखने को मिलता है। बताया जाता है कि प्राचीन काल में ठाकुर बांके-बिहारी महाराज की सेवा करने हेतु उनके प्राकट्यकर्ता स्वामी हरिदास व उनके शिष्य जंगलों से तरह-तरह के फूल बीन कर लाते थे, जिन्हें बिहारी जी के सम्मुख रख दिया जाता था। साथ ही हरिदास जी, बिहारी जी को रायबेल व चमेली के फूलों की माला भी पहना दिया करते थे। बाद में वे फूलों से छोटी मोटी सजावट करने लगे। इस प्रकार वृंदावन में सर्वप्रथम फूल बंगला रसिकेश्वर स्वामी हरिदास ने ठाकुर बल्लभाचार्य महाराज, विट्ठलनाथ गोस्वामी, अलबेली लाल गोस्वामी, लक्ष्मीनारायण गोस्वामी, ब्रजवल्लभ गोस्वामी, छबीले बल्लभ गोस्वामी आदि के द्वारा संवर्धन हुआ। इन सभी से यह कला बिहारी जी के अन्य गोस्वामियों ने सीखी।

गोस्वामियों के द्वारा बिहारी जी के मंदिर में फूल बंगलों को बनाए जाने के मूल में यह भावना निहित थी कि इससे उनके ठाकुर जी को गर्मियों में फूलों से कुछ ठंडक मिलेगी। अतएव वह प्रतिवर्ष गर्मियों में उनके मंदिर में अपने निजी खर्चे पर फूलों के बंगले बनाते थे। बाद में इन फूल बंगलों को बाहर के भक्तों के द्वारा बनाए जाने का खर्चा उठाया जाने लगा किंतु इनको बनाने का कार्य आज भी बिहारी जी के गोस्वामियों के द्वारा ही किया जाता है। क्योंकि यह कला इनको अपने पूर्वजों से विरासत में प्राप्त हैं, इसलिए वह फूल बंगलों को बनाए जाने का कार्य बगैर किसी पारिश्रमिक के अत्यंत श्रद्धाभाव के साथ करते हैं।

बिहारी जी के लगभग डेढ़ सौ गोस्वामी परिवारों में आज कोई भी परिवार ऐसा नहीं है, जिसमें कि कोई न कोई व्यक्ति फूल बंगलों को बनाने का काम न जानता हो और सब अपनी सुविधानुसार फूल बंगले बनाते हैं। फूल बंगलों में केवल केले के पत्ते आदि का कार्य करने के लिए ही कुछ व्यक्ति मजदूरी पर बाहर से बुलाने पड़ते है। फूल बंगलों के बनाने में रायबेल, बेला, चमेली, चंपा गुलाबी, गुलदाऊदी, सोनजूही, मोतिया, मौलसिरि, लिली, रजनीगंधा, गुलाब, कमल, कनेर गेंदा आदि के फूलों का उपयोग किया जाता है।

एक दिन के छोटे से छोटे फूल बंगले में पचास क्विंटल तक फूल लग जाते हैं। इतनी बड़ी तादाद में फूल वृन्दावन में उपलब्ध नहीं हो पाते हैं, इसके लिये अन्य जनपदों से भी फूल मंगाने पड़ते हैं अब कुछ भक्त विदेशों से भी विदेशी फूल मंगवाने लगे हैं। दूरवर्ती स्थानों से फूलों को बर्फ की सिल्लियों पर रखकर वायुयान से दिल्ली, आगरा तक मंगाया जाता है। तत्पश्चात् उन्हें सड़क मार्ग से वृंदावन लाया जाता है। फूल बंगलों में फूलों के अलावा तुलसी दल, केले के पत्तों, सब्जियों, फलों, मेवों, मिठाइयों और रुपयों का भी इस्तेमाल होता है।

एक दिन का फूल बंगला बनाने में पाँच लाख रुपयों से लेकर बीस-पच्चीस लाख रुपये तक व्यय हो जाते हैं। फूल बंगलों को बनाने का कार्य यद्यपि ब्रज की एक लोक कला है किन्तु यह धार्मिकता से जुड़ी होने के कारण यहां का प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान बन गई है।

इस सम्बन्ध में ठाकुर बांके बिहारी के अनन्य सेवक व स्वामी हरिदास जी के वंशज सेवायत शैलेन्द्र गोस्वामी ने बताया कि ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में दूर दराज से आए उनके तमाम श्रद्धालु प्रायः मनौतियां पूर्ण होने पर फूल बंगला ठाकुर जी की सेवा में अर्पित करते हैं। मनौतियों के पूरे होने पर श्रद्धालु भक्त यहां अपने खर्चे पर मंदिर के गोस्वामियों के द्वारा फूल बंगले बनवाते हैं। इस कार्य में सभी जाति संप्रदाय के लोग बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते है।

बाँके बिहारी मंदिर के व्यवस्थापक मनीष कुमार शर्मा ने बताया कि यहां प्रतिवर्ष गर्मियों में फूल बंगलों के बनाए जाने के जो लगभग चार महीने होते हैं, उनमें किस दिन किस व्यक्ति के खर्चे पर फूल बंगला बनेगा, इसकी बुकिंग लगभग एक वर्ष पूर्व ही हो जाती है। फिर भी फूल बंगला बनवाने के इच्छुक तमाम लोगों को निराश होना पड़ता है।

ठाकुर बांके बिहारी मंदिर पर चैत्र शुक्ल एकादशी से श्रावण कृष्ण हरियाली अमावस्या तक बिना नागा नित्य-प्रति फूलों के बंगले बनते हैं।

इस वर्ष यह फूल बंगले 15 अप्रैल से 01 अगस्त तक 108 दिन फूल बंगले बनाये जायेंगे। उन्होंने बताया कि भक्तों की अधिक मांग होने के कारण अब फूलबंगले दोनों टाइम सजाये जाते हैं। लगभग 216 फूलबंगले सजाये जायेंगे।

बाँके बिहारी जी मंदिर प्रबन्ध कमेटी के पूर्व सदस्य व अनन्य भक्त विकास वार्ष्णेय ने इस सम्बन्ध में बताया कि वृंदावन के ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर में फूल बंगलों को बनाने का कार्य बड़े जोर-शोर से होता है। यहां से गोस्वामी कलाकारों का उत्साह व तल्लीनता देखते ही बनती है। वे यहां नित्यप्रति बनने वाले फूल बंगलों को बनाने का कार्य एक दिन पूर्व ही शुरू कर देते हैं, तब कहीं जाकर दूसरे दिन फूल बंगला बन कर तैयार हो पाते हैं।

कैसे बनाए जाते हैं फूलों के बंगले

फूलों के बंगले बनाने हेतु सर्वप्रथम बांस की खपच्चियों से बने फ्रेमों पर डोरे, सुतली व कीलों आदि की मदद से रायबेल के फूलों के द्वारा विभिन्न प्रकार के जाल बुने जाते है। इन जालों के चौमासी, छैमासी, आठमासी, बारहमासी, सांकर व सतिया आदि नाम होते हैं। फिर इन जालों के उपर फूलों को गोस्वामी कलाकार अपने हाथों से इधर उधर सरका कर चक्रव्यूह प्रणाली में तरह-तरह की डिजायनें डालते हैं, जिन्हें फूल बंगले बनाने की भाषा में जाल का तोड़ना कहते हैं। इन जालों की यह विशेषता होती है कि इनका आदि व अंत ढूंढे नहीं मिलता है। तत्पश्चात चार-चार मंजिल तक के फूलों के बंगले देखते ही देखते खड़े कर दिए जाते हैं, जिनमें खिड़कियां, दरवाजे, छज्जे, जीने, अट्टालिकाएं आदि सभी कुछ होते हैं। इन बंगलों की छतें पिरामिड नुमा होती है। साथ ही इनकी संरचना उद्यान की तरह होती है। इन बंगलों में प्रतिदिन सायंकाल बिहारी जी विराजते है। बिहारी जी की पोशाक व आभूषण आदि भी फूलों से ही बनाए जाते हैं।

केले के वृक्ष के तने की परतों से बनाते हैं बिहारी जी का बिछौना

केले के वृक्ष के तने को काटकर उसमें से निकाली गई परतों के द्वारा बिहारी जी का बिछौना बनाया जाता है। कलाकारों द्वारा लकड़ी के चौखटों पर केले के तने की परतें लगाकर उन पर रंगीन कपड़ा या कागज व गोटा आदि चिपका कर भगवान श्री कृष्ण की लीलाओें का सजीव चित्रण भी किया जाता है। साथ ही मंदिर प्रांगण में विभिन्न प्रकार के फूलों से बड़े-बड़े झाड़ व फानूस बनाए जाते है। फूलों के द्वारा गाय, मोर, तोता आदि पशु-पक्षियों की रचना करके उनकों फूल बंगलों में विचरण करते हुए दिखाया जाता है।

मंदिर में स्वामी हरिदास जी के वंशज व सेवायत रजत गोस्वामी व ब्रजेश गोस्वामी बताते हैं कि फूल बंगलों का निर्माण करते समय इसके कारीगरों का ध्यान निकुंज भाव में ललिता व विशाखा आदि सहचारियो की लीला पर केंद्रित रहता है। इन फूल बंगलों पर गोस्वामीगण निरंतर गुलाब जल छिड़कते रहते है, जिससे उनकी सुगंध व ठंडक में इर्द-गिर्द शीतल जल के फव्‍वरे भी चला करते हैं। इसके अलावा बिहारी जी को विभिन्न शीतल पेय पदार्थो से भोग भी लगाए जाते है। फूल बंगले नित्य प्रति नई-नई डिजाइन के बनाए जाते हैं। यह डिजाइन्‍स यहां के गोस्वामीगण स्वयं ही पूरे वर्ष ग्राफ पेपर पर आड़ी तिरछी रेखाएं खींच कर ईजाद करते हैं। फूल बंगले के दर्शन केवल सायंकाल मंदिर खुलने के समय ही होते थे लेकिन हाल के कुछ वर्षों से भक्तों की अत्यधिक मांग के कारण फूल बंगलों की संख्या में वृद्धि को देखते हुए अब एक दिन में दो फूल बंगले सजते हैं।

मंदिर के उप प्रबन्धक उमेश सारस्वत ने बताया कि एक बंगले को बनाए जाने में जो फूल प्रयोग में आ जाता है, उसे दूसरा फूल बंगला बनाने हेतु किसी भी सूरत में प्रयौग में नहीं लाया जाता है। एक बार प्रयोग में आ चुका फूल बतौर प्रसाद भक्तगणों में वितरित किया जाता है अथवा यमुना में विसर्जित कर दिया जाता है।

फूल बंगले बनाने हेतु प्रतिदिन ताजा फूल ही इस्तेमाल होते हैं। दोपहर के समय यहां के मंदिरों में फूल बंगले बनाने का कार्य अपने चरमोत्कर्ष पर होता है। वृंदावन के विभिन्न मंदिरों में कभी-कभी एक रूपये से लेकर दो हजार रुपये तक के नोटों को कलात्मक रूप से सजा कर भी फूलों के बंगले बनने लगे है। इन बंगलों की लागत चार-पांच लाख से लेकर बीस व पच्चीस लाख रुपयों तक जा पहुंचती है। इन बंगलों में सिक्कों का भी प्रयोग होता है।

आजकल गुब्बारों से फल-फूल सब्जियों व अन्य सामग्री से भी बंगले बनने लगे हैं जो अत्यंत चित्ताकर्षक होते है। देश के कोने कोने से श्रद्धालु अपनी मनोकामना के पूर्ण होने पर भगवान बाँके बिहारी जी को फूल बंगला अर्पित करते हैं। इन फूल बंगलों को देखने के लिए श्रद्धालु वृंदावन प्रतिदिन पहुंचते हैं।