Home Blog Page 3111

रायपुर : WhatsApp में अश्लील एवं धमकी भरे मैसेज भेजने वाले के खिलाफ FIR दर्ज

0

रायपुर। वाट्सप में अश्लीलऔर धमकी भरा मैसेज भेजकर एक व्यक्ति को परेशान करने वाले मोबाइल नंबर 70497-86848 के धारक के खिलाफ तेलीबांधा पुलिस ने अपराध दर्ज किया है। प्रार्थी विजय निहिचलानी 39 वर्ष की रिपोर्ट पर पुलिस ने आरोपी मोबाइल धारके खिलाफ धारा 507, 294 के तहत अपराध दर्ज कर मामले को विवेचना में लिया है।

‘न्याय’ के पक्ष में मतदान कर रहे हैं मतदाता, मोदी जी का समय खत्म, आ गया बदलाव का वक्त- राहुल

0

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, “पूरे देश में सिर्फ नौजवान लोग ही नहीं, बल्कि बुजुर्ग भी बड़ी संख्या में ‘न्याय’ के पक्ष में मतदान कर रहे हैं। पुराने अधिक अनुभवी मतदाताओं ने भी समझा है कि यह विचार कितना शक्तिशाली है। मोदी जी, आपका वक्त खत्म हुआ, अब दलाव का समय आ गया है।”

मुसलमान समझकर 13 वर्ष की भारतीय बच्‍ची को मारी कार से टक्‍कर, लोगों ने जुटाए 600,000 अमेरिकी डॉलर

0

अमेरिका में एक हेट क्राइम (Hate Crime) के तहत फिर से भारतीयों को निशाना बनाया गया है। इस बार एक 13 वर्ष की बच्‍ची नफरत का शिकार हुई है। लेकिन इस घटना के बाद एक नया चेहरा भी देखने को मिला। बच्‍ची के इलाज के लिए ऑनलाइन लोगों ने इतना फंड इकट्ठा कर लिया है कि अब उसके माता-पिता को चिंता करने की जरूरत नहीं है। हालांकि अभी यह बच्‍ची कोमा में है और हर कोई इसके लिए प्रार्थना कर रहा है।

23 अप्रैल की घटना

घटना 23 अप्रैल की है और कैलिफोर्निया के सनीवेल की है। यहां पर कक्षा सात में पढ़ने वाली धृति नारायण को उस समय कार से टक्‍कर मार दी गई जब वह अपनी मां और दूसरे फैमिली मेंबर्स के साथ सड़क पार कर रही थी। ड्राइवर ने धृति और उसके साथ मौजूद कुछ और लोगों को सिर्फ इसलिए टक्‍कर मारी क्‍योंकि उसे को लगा कि वह मुसलमान है। धृति को टक्‍कर मारने वाले का आइसाया पीपुल्‍स और एक एक वॉर वेटरन है। आइसाया इराक वॉर में हिस्‍सा ले चुका है। हमले में धृति के पिता राजेश नारायण और उसका नौ वर्ष का भाई प्रखर भी घायल हो गए।

 

कोमा में है धृति

धृति इस समय कोमा में है और उसे कई ट्रॉमा और सिर की चोटें आई हैं। धृति के इलाज लिए गोफंडमी पर सात दिन पहले अपील की गई थी। अब तक 12,360 लोग इस पर मासूम धृति के इलाज के लिए डोनेट कर चुके हैं। सोमवार की शाम तक धृति के इलाज के लिए करीब 600,000 डॉलर तक की रकम जुटा ली गई थी। जबकि लक्ष्‍य केवल 500,000 डॉलर ही तय किया गया था। अमेरिकन बाजार न्‍यूज पोर्टल की ओर से इस बात की जानकारी दी गई है। धृति के दोस्‍त उसे एक प्‍यारी और खुश रहने वाली बच्‍ची बताते हैं।

 

लोगों से की गई थी अपील

साइट के फंडरेजर की तरफ से फंड कलेक्‍ट होने से पहले एक मैसेज पोस्‍ट किया गया था। इसमें कहा गया था, ‘हमारा दिल और हमारी सारी प्रार्थनाएं धृति के साथ हैं। हम कामना करते हैं कि वह जल्‍दी अच्‍छी हो जाए लेकिन एक बड़ा बिल और उसके बाद रेहाब पर आने वाले खर्च के लिए बड़ी रकम की जरूरत है।’ इसमें कहा गया था कि धृति के लिए एक उचित फंड रेजिंग कैंपेन चलाया जा रहा है ताकि मुश्किल समय में उसके परिवार की मदद की जा सके।

 

कोर्ट ने आठ आरोपों के तहत बताया दोषी

तीन मई को सांता क्‍लारा काउंटी के सुपीरियर कोर्ट में जब धृति को टक्‍कर मारने वाले आरोपी पर सुनवाई हो रही थी तो भारी तादाद में लोग इकट्ठा थे। आरोपीर को उसे कोर्ट की तरफ से आठ आरोपों के तहत दोषी मारा गया है जिसमें एक आरोप हत्‍या का भी है। मामले की अगली सुनवाई अब 16 मई को होगी। 23 अप्रैल को हुई घटना में कुल आठ लोग घायल हो गए थे। आइसाया, अमेरिकी सेना का एक शार्पशूटर रहा है और साल 2005 से 2006 तक इराक में उसकी तैनाती थी।

 

मोदी राम मंदिर पर गंभीर नहीं, केवल भावनाओं का दोहन कर रहे : सिब्बल

0

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अयोध्या में राम मंदिर को लेकन गंभीर नहीं हैं बल्कि उनके द्वारा इसका प्रयोग प्रत्येक चुनाव में लोगों की ‘भावनाओं का दोहन’ करने के लिए किया जाता है।

मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से दिसंबर 2017 तक पेश होने वाले वकील सिब्बल ने प्रधानमंत्री के आरोपों को खारिज कर दिया कि कांग्रेस के वकील मामले के समाधान को रोकने का प्रयास करते हैं, जोकि बीते दो दशकों से चल रहा है।

उन्होंने राजनीतिक और धार्मिक रूप से संवेदनशील इस मामले पर मोदी और भाजपा पर निशाना साधते हुए आईएएनएस से कहा, ‘उनको इसमें रुचि नहीं है। वे एकबार फिर लोगों को मूर्ख बना रहे हैं। यह एक और जुमला है। वे लोगों की भावनाओं का दोहन कर रहे हैं।’

उन्होंने कहा, ‘मोदी के लिए मंदिर मुद्दा आस्था का मामला नहीं है, क्योंकि अगर यह आस्था का मामला होता तो वे इसे काफी पहले उठाते। मोदी 2014 में (जब वह प्रधानमंत्री बने) और अन्य लोग इससे पहले इस मुद्दे को उठा सकते थे।’

उन्होंने कहा, ‘वास्तव में, मोदी कभी गंभीर नहीं थे। वे राम मंदिर को लेकर बिलकुल भी गंभीर नहीं हैं। अगर वे गंभीर होते, तो उन्होंने इसे क्यों नहीं 2014 या 2015 या 2016 या 2017 में उठाया?’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘भाजपा ने इन सालों में राम मंदिर को भुला दिया और चुनाव से पहले, वे इस मुद्दे को उठाना चाहते हैं। क्यों? क्योंकि वे हमेशा इसका इस्तेमाल करना चाहते हैं। इस वादे को उन्होंने देश से 30 वर्ष पहले किया था। लेकिन, वे इसे पूरा करने में कभी सक्षम नहीं हुए।’

यह पूछे जाने पर कि भाजपा अयोध्या में राम मंदिर बनाने के वादे को क्यों पूरा नहीं कर पाई, उन्होंने कहा, ‘क्योंकि वे इसको लेकर गंभीर नहीं हैं। वे हर बार चुनाव में इसका प्रयोग करने के लिए इस मुद्दे को जिंदा रखना चाहते हैं। वे इस बारे में गंभीर नहीं हैं।’

आठ मार्च को सर्वोच्च न्यायालय की पांच न्यायाधीशों की पीठ ने रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले के स्थायी समाधान के लिए अदालत की देखरेख में मध्यस्थता का आदेश दिया था।

अदालत ने सेवानिवृत न्यायाधीश एफ.एम. कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन मध्यस्थों की समिति गठित की है।

प्रधानमंत्री ने कहा था कि कांग्रेस के वकील सर्वोच्च न्यायालय में अयोध्या मामले के समाधान को रोकने की कोशिश कर रहे हैं, इस बारे में पूछे जाने पर पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘कैसे?.. वह कह सकते हैं लेकिन इसका कोई तो आधार होना चाहिए।’

उन्होंने कहा कि कांग्रेस उन कार्यवाहियों में कभी भी एक पार्टी नहीं रही है।

उन्होंने कहा, ‘मैं अंतिम बार दिसंबर 2017 में इस मामले में पेश हुआ था। हम अभी 2019 में हैं। किसने अदालत को मामले पर निर्णय लेने से रोका है। कांग्रेस पार्टी या कांग्रेस के वकील? वास्तव में, कांग्रेस के वकील राम मंदिर के लिए पेश हुए थे। मिस्टर मोहन परासरन। कौन हैं वह? कांग्रेस के आदमी..वह किसके लिए पेश हुए? राम मंदिर के लिए।’

सिब्बल ने कहा, ‘देखिए कोई पार्टी नहीं है, सभी व्यक्तिगत तौर पर हैं। कांग्रेस के वकील भी राम मंदिर मामले में पेश हुए। परासरन कांग्रेस वकील नहीं हैं? कम से कम, मैं दिसंबर 2017 के बाद से पेश नहीं हुआ हूं। वह लगातार पेश हुए हैं।’

उन्होंने कहा, ‘इसलिए प्रधानमंत्री का यह आरोप फर्जी है, तथ्यात्मक रूप से फर्जी है, क्योंकि 2017 के बाद से, 15 बार सुनवाई हो चुकी है। किसने रोका है?’

भाजपा पर निशाना साधते हुए सिब्बल ने कहा, ‘उनका कहना क्या है- यह कि अगर अदालत मामले के विरुद्ध सुनवाई करती है, तो हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे। हम तब इसे स्वीकार करेंगे जब अदालत हमारे पक्ष में फैसला सुनाएगी। एक तरफ उनके वकील कहते हैं कि यह टाइटिल सूट है। दूसरी तरफ वे कहते हैं कि यह आस्था का मामला है। दोनों एक साथ नहीं चल सकते।’

कांग्रेस ने फसल ऋण माफी का वादा किया था : कमलनाथ

0

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंगलवार को कहा कि कांग्रेस ने अपने वचन-पत्र में किसानों के दो लाख रुपये तक के फसल ऋण माफ करने का वादा किया था, मगर भाजपा और पूर्व मुख्यंमत्री शिवराज सिंह चौहान लगातार झूठ बोलकर जनता के बीच भ्रम फैला रहे हैं।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने आवास पर संवाददाताओं से बातचीत में भाजपा और पूर्व मुख्यमंत्री चौहान पर झूठ बोलने और भ्रम फैलाने का आरोप लगाया और कहा, ‘कांग्रेस ने किसानों का फसल ऋण माफ करने का वादा किया था। उसे पूरा किया जा रहा है। खरगोन के एक किसान का उदाहरण देकर कर्ज माफ न होने की भाजपा की ओर से बात कहीं जा रही है। उस किसान ने ट्रेक्टर-टॉली के लिए कर्ज लिया था, हमने यह कभी नहीं कहा था कि यह कर्ज माफ होगा। कांग्रेस ने फसल ऋण माफ करने का वादा किया था, ट्रैक्टर-ट्रॉली, मकान, बेटी की शादी के लिए लिया गया कर्ज माफ करने का वादा हमने कभी नहीं किया था।’

कमलनाथ ने भाजपा पर आरोप लगाया, ‘भाजपा लगातार प्रदेश की जनता को गुमराह कर रही है। कहा जा रहा है कि चुनाव आयोग से अनुमति की जरूरत नहीं है। वास्तव में चुनाव आयोग के निर्देश आवश्यक हैं, इसका प्रमाण आज मंगलवार को चुनाव आयोग द्वारा कर्जमाफी के लिए जारी किया गया पत्र है। इस पत्र में कहा गया है कि जिन जिलों में चुनाव प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां के 4़ 83 लाख किसानों के खातों में राशि हस्तांतरित की जाए।’

भाजपा के आरोपों का सिलसिलेवार जवाब देते हुए कमलनाथ ने कहा, ‘मैं देर से बोलता हूं, कम बोलता हूं, मगर झूठ नहीं बोलता। कर्जमाफी में दिक्कत है यह मानता हूं। एक किसान के चार बैंक खाते हैं, उसकी जांच की जानी है, सरकार को चुनाव आचार संहिता लगने से पहले जो समय मिला, उसमें यह काम किया जा सकता था क्या? जिन किसानों पर ढाई लाख रुपये का कर्ज है, उनका कर्ज माफ होने के बाद भी प्रमाण-पत्र नहीं दिया जा सकता, क्योंकि कर्ज तो दो लाख रुपये तक का ही माफ हो रहा है।’

उन्होंने आगे कहा, ‘राज्य में लाखों की संख्या में ऐसे किसान हैं, जिन पर दो लाख रुपये से ज्यादा का कर्ज है, लिहाजा उन्हें ऋण मुक्ति का प्रमाण पत्र नहीं मिल सकता। सरकार ने ऐसे किसानों के लिए प्रावधान किया है। दो लाख रुपये तो सरकार ने माफ कर दिए, और उसके ऊपर की जो राशि है, अगर उसमें से आधी राशि किसान दे देता है तो उसे प्रमाण-पत्र मिलेगा, साथ ही उसे 50 फीसदी का अतिरिक्त लाभ मिल जाएगा। इसके लिए बैंक से वन टाइम सेटेलमेंट (ओटीएस) किया गया है।’

ज्ञात हो कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले दो लाख रुपये तक का किसानों का कर्ज माफ करने का वादा किया था। सत्ता में आने के बाद कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही दो घंटे के भीतर किसान कर्जमाफी के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए थे। राज्य के 55 लाख किसानों के कर्ज माफ होने हैं। अब तक 21 लाख किसानों के कर्ज माफ किए जाने का दावा किया जा रहा है।

भाजपा लगातार आरोप लगा रही है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 10 दिनों में किसानों के कर्ज माफ करने का वादा किया था, साथ में कहा था कि अगर मुख्यमंत्री ऐसा नहीं करेगा तो उसे बदल दिया जाएगा। इन आरोपों का भी कमलनाथ ने जवाब दिया और कहा, ‘कांग्रेस ने 10 दिनों का समय दिया था, यह तो दो घंटे में ही हो गया था।’

वैज्ञानिकों ने निकाला ऐसा उपाय, अब हार्ट अटैक से नहीं होगी मौत

0

कहते है मौत कभी भी कही से भी आ सकती है। पर आजकल हार्ट अटैक से होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। हार्ट अटैक से रोज कई लोगों की मौत हो जाती है। यह ऐसी बीमारी है जिसका कोई इलाज नहीं है।

यह बीमारी ज्यादादत वृद्ध लोगोें में देखी जाती है। लेकिन आज के समय में युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। पर हाल ही में वैज्ञानिकों ने इस होने वाली अक्समात मौत से बचने के लिए उपाय ढूंढा जा सकता है। अमेरिका के येल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस मामले पर शोध करके इसका इलाज ढूंढा है।

शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में एक खास रसायन की मदद से मृत कोशिकाओं को जीवित करने की कोशिश की है, जिसमें उनको सफलता मिली है। लेकिन यह सफलता उनकों आधी अधूरी ही मिली क्योंकि इस रसायन से चार घंटे पहले खत्म हो चुके दिमाग को आधा ही जिन्दा किया गया।

शो​धकर्ता बताते है कि अगर दिमाग के अंदर के हिस्से को सर्कुलेट होना है,तो जरूरी है कि कोशिकाओं को पुनर्जीवित होना जरूरी है। पर इस शोध को न्यूरोसाइंस डिपार्टमेंट के दूसरे प्रोफेसर वोनिमीर वरसेल्जा ने चिकित्सा के क्षेत्र में बेअसर बताया है। क्योंकि उनका कहना है कि इस प्रयोग से दिमाग को पुनर्जिवित नहीं हो सकता है।

यह बात इसलिए कहीं क्योंकि वो मानते है कि इसमें सोचने समझने की क्षमता उत्पन्न नहीं होती है। उन्होंने इसके बारे में कहा कि इसका प्रयोग दुर्घटना में मस्तिष्क कोशिकाओं की क्षतिपूर्ति हेतु किया जा सकता है। उस जगह यह पद्धिति कारगार साबित हो सकती है।

भाजपा नेता रमेश बिधुड़ी ने तोड़ी सभी मर्यादाएं, भरे मंच से अरविंद केजरीवाल को दी भद्दी गाली

0

लोकसभा चुनाव के दौरान नेताओं का एक दूसरे के खिलाफ जुबानी जंग लगातार जारी है। साउथ दिल्ली से भाजपा उम्मीदवार रमेश बिधूड़ी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लेकर विवादित बयान दिया है। बिधूड़ी ने दिल्ली के मेहरौली में एक जनसभा के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए अपनी सभी मर्यादाओं को तोड़ दिया, उन्होंने अरविंद केजरीवाल को भड़वा कहा। उनके इस बयान का केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने समर्थन किया है। गिरिराज सिंह ने कहा कि अरविंद केजरीवाल टुकड़े-टुकड़े गैंग के सदस्य थे।

भारत माता की जय के नारे लगवाए

मेहरौली में आयोजित इस जनसभा में पूर्वांचली मतदाताओं को भाजपा के लिए वोट की अपील की गई। इस दौरान लोकप्रिय भोजपुरी गाना भी बजाया गया, जिसे खासकर चुनाव प्रचार के लिए तैयार किया गया था। गिरिराज सिंह ने इस दौरान पूर्वांचल के लोगों से कहा कि आप किसी से भी प्रभावित नहीं होना, आपको बता है कि किसे वोट देना है। गिरिराज सिंह के भाषण के बाद बिधूड़ी ने लोगों से भारत माता की जय के नारे लगवाए। उन्होंने कहा कि आप इतनी तेज से भारत माता की जय के नारे लगाइए कि जेएनयू वालों को भी सुनाई दे।

अपशब्द कहा

बिधुड़ी ने कहा कि जेएनयू में भारत तेरे टुकड़े करने वाले गैंग, वो जो दूसरे के टुकड़ों पर पलने वाले भड़वे वहां पर बैठे हैं, तुम्हारी आवाज से उनकी चारपाई हिल जानी चाहिए। इसके बाद बिधुड़ी ने केजरीवाल पर हमला बोलते हुए कहा कि वह देशद्रोह के मामले की फाइल पर बैठे हैं, इसके बाद उन्होंने कहा कि अबे ये केजरीवाल भी भड़वा है, ये कबतक रोकेगा। उसके पास अब सिर्फ 5-6 महीने बचे हैं।

केजरीवाल सबकुछ फ्री में देना चाहते हैं

रैली को संबोधित करते हुए बिधुड़ी ने मोदी सरकार की तमाम योजनाओं को गिनाया और केजरीवाल पर फ्री में चीजें बांटने को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वह सबकुछ फ्री में देने की बात करते हैं। केवल फ्री में बीवी, फ्री में बच्चे, फ्री में बिजली, फ्री में पानी, फ्री में वाई फाई, सब कुछ फ्री में है। केजरीवाल पिछले छह महीने से शीला दीक्षित के तलवे चाट रहे हैं ताकि कांग्रेस के साथ उनका गठबंधन हो जाए। उन्होंने अपने बीवी बच्चों की कसम खाई थी फिर भी वह कांग्रेस के साथ गठबंधन करना चाहते हैं।

कांग्रेस 40 सीट भी नहीं जीतेगी

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए बिधुड़ी ने कहा कि राहुल देशद्रोह का कानून खत्म करना चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस को इस बार 40 सीट पर भी जीत नहीं मिलेगी। पूर्वांचल के लोगों को लुभाने के लिए बिधुड़ी ने कहा कि यहां बने मेहरौली पार्क का नाम बदलकर छठ पार्क कर देना चाहिए। सेक्सी दुर्गा फिल्म बनाने वाले फिल्म निर्माता पर हमला बोलते हुए बिधुड़ी ने कहा कि अगर कोई मेरी मां, बहन को सेक्सी कहे तो मैं उसका सीना चीर देना चाहूंगा और उन्हें नरक में भेज दूंगा। ये लोग फातिमा पर फिल्म बना सकते थे। हिंदुओं पे अत्याचार बंद करो भैया, बहुत हुआ।

मिर्गी का दौरा समाप्त हो जाएगा

बिधुड़ी ने कहा कि समाज में एक वर्ग ऐसा है जोकि मोदी सरकार की योजनाओं का फायदा तो लेना चाहता है लेकिन जब वह मोदी का चेहरा देखते हैं तो उन्हें अच्छा नहीं लगता है। मैं उनसे कहता हूं अगर इस बार मोदी आएगा तो तेरा मिर्गी भी शांत हो जाएगा, तुम सदा के लिए सो जाओगे। बता दें कि दिल्ली की सभी 7 सीटों पर 12 मई को मतदान होना है, जबकि चुनाव के नतीजे 23 मई को घोषित किए जाएंगे।

जानिए, राजीव गांधी की बतौर प्रधानमंत्री 5 सफलता-विफलता

0

शाह बानो के मामले में मुस्लिम पुरुषों को ख़ुश करने के लिए राजीव गांधी का फ़ैसला और एक बार फिर राम मंदिर के मुद्दे को उठाने का मामला न केवल बीजेपी जैसी पार्टी को जनाधार पाने का मौक़ा दिया बल्कि देश के लोगों के बीच राजीव गांधी की छवि भी बदली.

पीएम मोदी ने झारखंड के चाईबासा में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को चुनौती देते हुए कहा है कि उनमें दम है तो शेष बचे दो चरण के चुनाव अपने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के मान-सम्मान और बोफोर्स के मुद्दे पर लड़ लें. इससे पता चल जायेगा कि ‘किसके बाजुओं में कितना दम है.’

प्रधानमंत्री ने कहा कि, ‘कांग्रेस को चुनौती देता हूं, नामदार परिवार के रागदरबारियों और चेले चपाटों को चुनौती देता हूं कि आज का चरण तो पूरा हो गया है, लेकिन अभी दो चरणों का चुनाव शेष है. आपके पूर्व प्रधानमंत्री जिनके लिए आप मोटे-मोटे आंसू बहा रहे हैं, उनके मान-सम्मान पर ही अंतिम दो चरणों का चुनाव लड़ लें.’ पीएम मोदी ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों को ललकारते हुए कहा, ‘आप में हिम्मत है तो आखिरी दो चरणों के चुनाव और दिल्ली का भी चुनाव, बोफोर्स के मुद्दे पर लड़ लें.’

हालांकि पीएम मोदी ने पांचवे चरण के मतदान से पहले ही यूपी की एक जनसभा में राजीव गांधी को लेकर कांग्रेस पर हमलावर हो गए थे. राहुल गांधी पर वार करते हुए पीएम ने कहा, ‘आपके पिताजी को आपके राग दरबारियों ने मिस्टर क्लीन बना दिया था. गाजे-बाजे के साथ मिस्टर क्लीन मिस्टर क्लीन चला था. लेकिन देखते ही देखते भ्रष्टाचारी नंबर वन के रूप में उनका जीवनकाल समाप्त हो गया.”

दरअसल, प्रधानमंत्री ने यह टिप्पणी बोफोर्स घोटाले के संदर्भ में की थी जिसमें राजीव गांधी का नाम भी शामिल किया गया था. हालांकि एक सच यह भी है कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान ही चार्जशीट में से राजीव गांधी का नाम हटाया गया और क्लीन चिट दी गई. दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में 64 करोड़ रुपए की कथित रिश्वत मामले में राजीव गांधी पर कोई आरोप साबित नहीं हो पाया.

सवाल यह उठता है कि 17वीं लोकसभा चुनाव के प्रचार में वो भी चार चरण बीत जाने के बाद पीएम मोदी को अचानक राजीव गांधी की याद क्यों आ गई. कई राजनीतिक जानकार इसे पीएम मोदी की हताशा के तौर पर देख रहे हैं. उनका कहना है कि चुनाव के आख़िरी दौर में पीएम मोदी कुछ ऐसे मुद्दे को लोगों के सामने रखना चाहते हैं जिससे 2014 के तर्ज पर एक बार फिर से कांग्रेस का भ्रष्टाचार और मोदी सरकार के नाम पर वोट पड़े.

पीएम मोदी की वजह से स्वर्गीय राजीव गांधी एक बार फिर से चर्चा में है. ऐसे में हमलोग उनके कार्यकाल की पांच विफलता और पांच उपलब्धियों पर नज़र डालते हैं.

राजीव गांधी की विफलता

– 24 मार्च 1986 को भारत सरकार और स्वीडन की हथियार निर्माता कंपनी एबी बोफोर्स के बीच 1,437 करोड़ रुपये का सौदा हुआ. इस सौदे के तहत भारतीय थल सेना को 155 एमएम की चार सौ होवित्जर तोप मिलना था. स्वीडिश रेडियो ने दावा किया कि कंपनी ने सौदे के लिए भारत के वरिष्ठ राजनीतिज्ञों और रक्षा विभाग के अधिकारियों को साठ करोड़ रुपये की रिश्वत दी है. स्वीडिश रेडियो के इस दावे के बाद भारत की राजनीति में भूचाल आ गया. पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर हमला करने वालों में से सबसे आगे उन्हीं की कैबिनेट के अहम सहयोगी विश्वनाथ प्रताप सिंह थे. इसका नतीज़ा यह हुआ कि 1984 में प्रचंड बहुमत हासिल करने वाले राजीव गांधी को 1989 में सत्ता गंवानी पड़ी.

– राजीव गांधी ने देश के पुरुष मुसलमानों को ख़ुश करने के लिए शाह बानो केस में अदालत के फ़ैसले को पलट दिया. ऐसे में देश के बहुसंख्यक समुदाय हिंदू नाराज़ हो गए. कहा जा सकता है कि सांप्रदायिक ताक़तों को देश में पैदा करने वाले राजीव गांधी थे. दरअसल इंदौर के मशहूर वकील मोहम्मद अहमद खान ने 43 साल तक साथ रहने के बाद 1975 में अपनी पहली बीवी शाह बानो को उसके पांच बच्चों सहित घर से निकाल दिया था. इसके बाद वे कभी-कभी अपने बच्चों की परवरिश के लिए कुछ रकम अपनी बेगम को दे दिया करते थे. लेकिन शाह बानो अपने शौहर से बाकायदा हर महीने गुजारा-भत्ता मांग रही थीं. मांग पूरी नहीं होने पर शाह बानो अदालत पहुंची. न्यायिक मजिस्ट्रेट से लेकर हाई कोर्ट ने फैसला शाह बानो के पक्ष में दिया. मोहम्मद अहमद खान ने सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती दी लेकिन नतीज़ा उल्टा पड़ गया.

– शीर्ष अदालत ने माना कि तलाकशुदा पत्नी को अपने पूर्व पति से गुजारा-भत्ता की मांग करने का पूरा हक़ है. इसके अलावा उसने सरकार से एक बार फिर ‘समान नागरिक संहिता’ कदम उठाने की अपील की. सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले से मुस्लिम शौहरों के लिए तीन तलाक देकर अपनी बेगम से पीछा छुड़ाना मुश्किल हो गया. देश के युवा प्रधानमंत्री जो नई सोच के परिचायक थे मुस्लिम वोटबैंक को लेकर लाचार हो गए और 25 फरवरी, 1986 को मुस्लिम महिला (तलाक अधिकार संरक्षण) विधेयक, 1986 को लोकसभा में पेश कर दिया. विपक्ष ने इसका जबरदस्त विरोध किया. इसके बावजूद यह राज्यसभा से पास होकर कानून बन गया. इसके जरिए तलाक के बाद गुजारा-भत्ता के लिए अदालत जाने का मुस्लिम महिलाओं का अधिकार खत्म हो गया. इस कानून में यह भी साफ कर दिया गया था कि तलाकशुदा बीवियों को उनके शौहर से केवल इद्दत (तीन महीने) तक का ही गुजारा-भत्ता मिलेगा.

– शाह बानो केस के बाद राजीव गांधी ने हिंदू समुदाय को ख़ुश करने के लिए विवादित स्थल पर शिलान्यास की इजाज़त दे दी. राम मंदिर की आधारशिला रखे जाने के बाद राजीव गांधी ने अयोध्या से ही अपने चुनाव अभियान की शुरुआत की और देश में राम-राज्य लाने का वादा किया. दरअसल ये पूरा विवाद 1980 के दशक में वीएचपी की धर्मसंसद में राम मंदिर बनाने का प्रण के बाद से शुरू हुआ. दो साल बाद फैजाबाद जिला न्यायाधीश ने मस्जिद का ताला खोलने का आदेश सुनाया. यानी इस फ़ैसले के बाद विवादित मस्जिद में पहले की तरह हिंदुओं को पूजा करने की इजाजत तो मिल गई. जिसके बाद राजीव गांधी ने हिंदू समुदाय को ख़ुश करने के लिए अयोध्या में 10 नवंबर 1989 को राम मंदिर की आधारशिला रखी गई. कांग्रेस सरकार ने ये फैसला शाहबानों केस के बाद नाराज हिंदू वोटबैंक और भ्रष्चाचार के आरोपों से घटते जनाधार को अपनी तरफ खींचने के लिए किया था. लेकिन कांग्रेस का दांव उल्टा पड़ गया और मंदिर आंदोलन पर राजनीति के ज़रिए आडवाणी ने बीजेपी की नई राजनीतिक विचारधारा तय कर दी.

– शाह बानो के मामले में मुस्लिम पुरुषों को ख़ुश करने के लिए राजीव गांधी का फ़ैसला और एक बार फिर राम मंदिर के मुद्दे को उठाने का मामला न केवल बीजेपी जैसी पार्टी को जनाधार पाने का मौक़ा दिया बल्कि देश के लोगों के बीच राजीव गांधी की छवि भी बदली. अब तक राजीव नई सोच के पुरोधा माने जा रहे थे जो वोटबैंक की राजनीति से इतर देश के विकास के लिए काम करने वाले थे लेकिन इन दो फ़ैसलों के बाद देश में सांप्रदायिक माहोल बना और कांग्रेस पर राजनीतिक तुष्टीकरण के आरोप की शुरुआत भी हुई.

राजीव गांधी की सफलता

– राजीव गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री की निर्मम हत्या के बाद देश की सत्ता संभाली थी. पूरे देश में निराशा का माहोल था जिस वजह से अर्थव्यवस्था काफी ख़राब हालत में थी. उन्होंने न केवल इनकम और कॉर्पोरेट टैक्स घटाने का महत्वपूर्ण फ़ैसला लिया बल्कि लाइसेंस सिस्टम को भी सरल किया. वित्तीय वर्ष 1987-88 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने बतौर वित्त मंत्री बजट भाषण पेश करते हुए संसद में कॉर्पोरेट टैक्स लगाने की सिफारिश की थी. विभिन्न टैक्सों के अलावा कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए अलग से एक विशिष्ट टैक्स लांच करने का फ़ैसला पहली बार हुआ था. दरअसल उनकी कैबिनेट के मंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने इस्तीफा दे दिया था इस वजह से राजीव गांधी ने बतौर वित्त मंत्री बजट पेश किया.

– आज भारत में सबसे अधिक इंटरनेट का प्रयोग किया जाता है लेकिन यह संभव इसलिए हो पा रहा है क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इसके लिए काम किया. देश में कंप्यूटर क्रांति लाने का श्रेय राजीव गांधी को दिया जाता है. उन्होंने ना सिर्फ कंप्यूटर को भारतीय घर तक लाने का काम किया बल्कि भारत में इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी को आगे ले जाने में अहम रोल निभाया. राजीव गांधी के वक्त ही नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर की स्थापना भी हुई थी. देश की दो बड़ी टेलीकॉम कंपनी एमटीएनएल और वीएसएनल की शुरुआत उनके कार्यकाल के दौरान ही हुई. उस समय कंप्यूटर्स महंगे होते थे, इसलिए सरकार ने ऐसेंबल किए हुए कंप्यूटर्स का आयात करना शुरू किया जिसमें मदरबोर्ड और प्रोसेसर थे. इस वजह से कंप्यूटर्स की कीमतें कम होनी शुरू हुई अन्यथा इससे पहले तक कंप्यूटर्स सिर्फ चुनिंदा संस्थानों में इंस्टॉल होते थे.

– राजीव गांधी ने साल 1988 में चीन की यात्रा कर उस देश के साथ संबंध सामान्य करने की शुरुआत की. दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर चल रहे विवाद को ख़त्म करने के लिए राजीन गांधी के कार्यकाल में ज्वाइंट वर्किंग कमेटी बनाई गई. इस कमेटी का मकसद दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करना था. 1954 के बाद इस तरह की यह पहली यात्रा थी. सीमा विवादों के लिए चीन के साथ मिलकर बनाई गई ज्वाइंट वर्किंग कमेटी शांति की दिशा में एक ठोस कदम थी.

– राजीव गांधी ने शक्ति का विकेंद्रीकरण करने के लिए पंचायती राज की शुरुआत की और शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और विभिन्न क्षेत्रों के विकास के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया. कांग्रेस ने 1989 में एक प्रस्ताव पास कराकर पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा दिलाने की दिशा में क़दम आगे बढ़ाया. जो 1990 के दशक में जमीन पर संभव हो पाया. सत्ता के विकेंद्रीकरण के अलावा राजीव ने सरकारी कर्मचारियों के लिए 1989 में 5 दिन काम का प्रावधान भी लागू किया. ग्रामीण बच्चों के लिए प्रसिद्ध नवोदय विद्यालयों के शुभारंभ का श्रेय भी राजीव गांधी को जाता है.

– राजीव गांधी ने पोलियो को खत्म करने के लिए अभियान शुरु किया, डॉ कूरियन के साथ मिलकर देश को दुग्ध उत्पादन में विश्व का नंबर एक देश बनाया. मतदान उम्र सीमा को 21 से घटाकर 18 साल करने का फ़ैसला भी राजीव गांधी का ही था. इतना ही नहीं ईवीएम मशीनों को चुनावों में शामिल करने का प्रयास भी उसी दौर में शुरू हुआ.

यानी कुल मिलाकर देखा जाए तो राजीव गांधी ने अस्सी के दशक के मध्य में भारत में विकास की प्रक्रिया को गति देने के लिए निजीकरण, उदारीकरण, मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था, लोकांत्रीकरण, अविनियमन यानी डिरेग्युलेशन, तकनीक, उद्यमिता, इनोवेशन आदि पर जोर दिया, जिसके परिणाम आज हमारे सामने हैं.

पाकिस्तान: लाहौर में दरगाह के बाहर बम ब्लास्ट, 4 लोगों की मौत

0

पाकिस्तान के लाहौर में एक दरगाह के बाहर बम ब्लास्ट की खबर है, इस ब्लास्ट में 4 लोगों की मौत हो गई है, उसके अलावा करीब 20 लोग घायल भी हो गए हैं. कई घायलों की हालत बेहद गंभीर है. सभी घायलों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

न्यूज के मुताबिक मरने वाले चारों लोग पुलिस अधिकारी हैं. ब्लास्ट के बाद पूरे इलाके को खाली करा दिया गया है. पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात हैं.

Embedded video

ये धमाका दरगाह की सुरक्षा में खड़ी जीप पर किया गया था. सोशल मीडिया पर उस जीप का वीडियो भी वारयल हो रहा है, जो ब्लास्ट के बाद पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है. धमाके के वक्त दरगाह के अंदर और बाहर काफी भीड़ थी. अचानक हुए इस ब्लास्ट से अफरातफरी मच गई, लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए.

ये दरगाह दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा सूफी दरगाह है जिसका निर्माण 11 वीं शताब्दी में हुआ था. यहां रोज हजारो लोग दर्शन के लिए आते हैं. यहां सुन्नी और शिया मुसलमानों के अलावा गैर-मुस्लिमों की भी बड़ी तादाद होती है.

अंतर्राष्ट्रीय शेफों की पसंद बनता जा रहा सरसों का तेल

0

विविधता के मामले में इसे हरा पाना आसान नहंीं है- चाहे वह खाना पकाने का माध्यम हो, ड्रेसिंग हो या एक प्रिजर्वेटिव के रूप में हो या फिर एक बॉडी मसाज के रूप में हो।

सबसे महत्वपूर्ण है कि इसने पिछले कुछ समय में वैश्विक पहचान प्राप्त की है। ट्रांसपरेंसी मार्केट रिसर्च की हालिया रपट इसकी उत्तरी अमेरिका, लातिन अमेरिका, पूर्वी यूरोप, पश्चिमी यूरोप, जापान को छोड़ एशिया प्रशांत और मध्य पूर्व व अफ्रीका में स्वीकार्यता बढ़ती जा रही है।

क्षेत्रों के आधार पर, सरसों तेल की एशिया प्रशांत क्षेत्र के भारत, थाइलैंड, चीन में इसकी जबरदस्त मांग है। यहां खाना पकाने में इसका प्रयोग किया जाता है। उत्तरी अमेरिका के बाजारों में भी विभिन्न औद्योगिक अनुप्रयोगों में जरूरी तेल की प्राथमिकता के तौर पर इसकी खपत में बढ़ोतरी होने की संभावना है।

पुरी ऑयल मिल्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक विवेक पुरी ने आईएएनएस से कहा, ‘स्वस्थ्य खाना पकाने के माध्यम के रूप में सरसों तेल की स्वीकार्यता में तेजी आना एसएमई दिग्गजों के पारंपरिक रूप से प्रभाव वाल क्षेत्रों में कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आगमन के बारे में भी बताएगा। भारत को मलेशिया और इटली जैसे देशों से सीखने की जरूरत है जो अपने खाद्य तेलों को पूरी दुनिया में बेचने में सफल रहे, जिस वजह से उनकी अर्थव्यवस्था में फायदा मिला है। भारत के सरसों तेल में खाद्य तेलों के आयातों में कमी लाने की क्षमता है और इससे बहुमूल्य विदेश एक्सचेंज को बचा सकते हैं। मलेशिया के लिए जो पॉम ऑयल है, इटली के लिए जो ऑलिव ऑयल है, अमेरिका के लिए जो सोया ऑयल है, सरसों का तेल भी भारत के लिए हो सकता है।’

लीला पैलेस नई दिल्ली में जापानीज फाइल डिनर, मेगु के प्रमुख शेफ शिमोमुरा कजुया ने आईएएनएस से कहा, ‘सरसों के तेल का खाना बनाने और चिकित्सा दोनों में उपयोग है। इसमे ओमेगा-3 और ओमेगा-6 वसायुक्त अम्ल (फैट्टी एसिड) होता है और संतृप्त वसा की कम मात्रा होती है। सरसों का तेल न केवल खाने के स्वाद और फ्लेवर में बढ़ोतरी करता है बल्कि त्वचा, ज्वाइंट, मांसपेशियों और दिल के रोगों को भी समाप्त करता है। इसका प्रयोग मेरीनेशन, सलाद, फ्राइ करने के लिए और प्रिजर्वेशन के लिए होता है।’

उन्होंने कहा, ‘कुछ लोग इससे इसके तीखे स्वाद और गंध की वजह से बचते हैं और इसके साथ अभ्यस्त होने में कुछ वक्त लगता है। जहां तक मैं जानता हूं, इस तेल का प्रयोग लेबनानी और भूमध्यसागरीय पाक प्रणाली में होता है।’

मेट्रोपोलिटन होटल एंड स्पा के एफ एंड बी प्रमुख राजेश खन्न ने आईएएनएस से कहा, ‘सरसों तेल से खाना पकाने का बहुत फायदा है। इसके काफी मात्रा में ओमेगा-3 और ओमेगा 6 वसायुक्त अम्ल के अलावा मोनोअनसैचुरेटेड (एमयूएफए) और पॉलीसैचुरेटेड (पीयूएफए) वसायुक्त अम्ल होता है। ये वसा अच्छे होते हैं, क्योंकि यह इस्केमिक दिल के रोग के खतरे को लगभग आधा कर देता है।’

इसके तीखे स्वाद की वजह से यह बंगाली डिशेस जैसे माछेर झोल, झालमुरी और मुरी घोंटा में स्वाद बढ़ाने के काम में आता है।

खन्ना ने कहा, ‘खाना पकाने के दौरान हमें इसे अत्यधिक गरम नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे उपयोगी तत्व समाप्त हो जाते हैं और कुछ हानिकारक अवयवों का निर्माण हो जाता है। इसे बाजार का सबसे स्वस्थ्यकर तेल माना जाता है।’

बंगाल, बिहार, कश्मीर, उत्तरप्रदेश में रहने वाले सरसों के तेल से वाकीफ होंगे। लेकिन पिछले दशक से कई गैर पारंपरिक सरसों तेल उपभोक्ताओं ने इसका प्रयोग करना शुरू कर दिया है।

इस संबंध में हुए अध्ययन ने तेल की उपयोगिता की पुष्टि की है, जिसे बोस्टन स्थित हवार्ड स्कूल ऑफ मेडिसिन, नई दिल्ली स्थित एम्स और बंगलुरू स्थित संत जोंस अस्पताल ने मिलकर किया है। यह रपट अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिीनिक न्यूट्रिशन में प्रकाशित हुई थी।

इस अध्ययन में भारतीयों की आहार की आदतों और उसका हृदय रोगों से सह संबंधों के बारे में पता लगाया गया और पता चला कि सरसों तेल का प्राथमिक खाना पकाने वाले माध्यम के रूप में प्रयोग करने से कोरोनरी हृदय रोग (सीएचडी) की घटनाओं में 71 प्रतिशत तक कमी आती है।

मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीसैचुरेटेड परिपेक्ष्य की ओर देखे तो, मैक्स अस्पताल, गुरुग्राम के कार्डियोलोजी के प्रमुख अरविंद दास ने कहा कि घर में पिसे सरसों तेल में वसायुक्त अम्ल होता है जोकि ‘खराब कोलेस्ट्रोल को कम’ करने में सहयोग करता है।

रेडिसन होटल समूह के कॉरपोरेट कार्यकारी शेफ राकेश सेट्ठी ने कहा, ‘न केवल खाना पकाने में, बल्कि यह प्रिजर्वेटिव के लिए भी अच्छा है। अधिकतर आचार को इसी में रखा जाता जाता है।’

चिकित्सकीय मूल्यों की अगर बात करे तो, सरसों के तेल को प्राकृतिक सनस्क्रीन के तौर पर माना जाता है। जब इसे नारियल के तेल में मिलाकर प्रयोग किया जाता है तो यह एक संपूर्ण हेड मसाज के लिए तैयार हो जाता है और यह एंटी-बैक्टिेरियल के रूप में काम करता है।

हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि आसान उपलब्धता और आसान प्रोसेसिंग की वजह से सरसों का तेल ग्रामीण क्षेत्रों में बारह मास प्रयोग किया जाता है।

जयपुर में ओटीएच एंड रसियन किचन चलानेवाले दुष्यंत सिंह ने आईएएनएस से कहा, ‘जब पारंपरिक भारतीय खाना पकाने की बात आती है तो सरसों के तेल को कोई नहीं हरा सकता। भारत में खाना बनाने में समय लगता है और सरसों का तेल आदर्श माध्यम है क्योंकि खाना को लंबे समय तक आग में रखा जाता है।’

दिल्ली में वसंत कुंज के मैक्स अस्पताल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. रिपन गुप्ता ने कहा, ‘प्रति माह 600-700 मिलीलीटर सरसों के तेल का खपत आदर्श है। रोजाना की अगर बात करे तो इसकी खपत प्रति भोजन एक चम्मच (वन टी स्पून ए मिल) करनी चाहिए। यह आपके हृदय के लिए अच्छा है।’