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‘पकौड़ा, भगोड़ा योजनाओं के लिए याद किए जाएंगे मोदी’, सिद्धू का PM पर हमला

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नवजोत सिंह सिद्धू ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोगों का ध्‍यान असल मुद्दों से भटका रहे हैं.

पंजाब सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है. उन्‍होंने कहा है कि पीएम मोदी को ‘भगोड़ा और पकौड़ा’ योजनाओं के लिए याद किया जाएगा. एक चैनल से इंटरव्‍यू में सिद्धू ने कहा, “सवाल हमेशा सत्‍ता पक्ष से होते हैं. जब कोई आपसे सवाल करता है तो आप भागते हैं. मोदीजी उसी तरह भाग रहे हैं. मैं उनको सवाल करता हूं और ये भी कहता हूं कि आप दो योजनाओं के लिए जाने जाओगे. एक पकौड़ा योजना युवाओं के लिए और एक भगोड़ा योजना. आज आम मुद्दों से भाग रहे हो. लोगों का ध्‍यान बंटा कर फौज की ओर ले जा रहे हो.”

सिद्धू ने घटती नौकरियों पर भी सवाल उठाए. उन्‍होंने कहा, “आप दो करोड़ नौकरी नहीं दे पाए. NSSO के आंकड़े हैं कि पिछले साल 1.10 लाख नौकरियां चली गईं. आपने दो करोड़ नौकरी कही थी और आपकी ही सरकार कह रही है कि पिछले चार साल में आपने 8 लाख नौकरी दी है.

कांग्रेस नेता ने कहा कि मुद्रा जैसी योजना युवाओं की मदद करने में विफल रही, क्योंकि इस योजना में औसत स्वीकृत ऋण मात्र 46,000 रुपये था. सिद्धू ने कहा, “मुद्रा योजना, जिसे लेकर मोदी जी दावा करते हैं कि उन्होंने युवाओं को व्यवसाय स्थापित करने में मदद की है, बड़ी विफल रही है. क्योंकि सिर्फ एक फीसदी आवेदनों को पांच लाख रुपये से ज्यादा का कर्ज मिल सका है. औसत कर्ज की राशि भी बहुत कम है.”

सिद्धू ने दावा किया कि केंद्र सरकार 2020 तक 40 करोड़ ट्रेनी के लक्ष्य को पूरा नहीं कर सकती और वह सिर्फ 41 लाख लोगों को प्रशिक्षित करने में समर्थ रही है, जिसमें मात्र छह लाख लोगों को रोजगार मिला है. उन्होंने कहा, “हमारा मानना है कि इन केंद्रों में 40 फीसदी प्रवेश फर्जी हैं और इसकी जांच की जरूरत है.”

‘चौकीदार चोर है’ पर राहुल गांधी ने SC से बिना शर्त माफी मांगी, कहा- गलती से बोला, माफी मांगता हूं

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‘चौकीदार चोर है’ को सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जोड़कर बोलने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को फिर सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांग ली. राहुल गांधी द्वारा दायर तीन पन्नों के नए हलफनामें माफी मांगी गई है.

अवमानना मामले में राहुल गांधी ने तीन पन्नों में नया हलफनामा दाखिल कर कहा है कि उन्‍होंने गलती से पार्टी का राजनीतिक नारा कोर्ट के आदेश के साथ मिलाकर बोल दिया था. इससे पहले के हलफनामे में राहुल ने गलती लिए सिर्फ ‘खेद’ जताया था. शुक्रवार को मामले पर सुनवाई होगी.

दरअसल, राफेल डील को लेकर पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राहुल गांधी ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि चौकीदार चोर है. वहीं, भाजपा सांसद एवं वरिष्‍ठ वकील मीनाक्षी लेखी का कहना है कि राफेल मामले में गोपनीय दस्तावेज को भी बहस का हिस्सा बनाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने गलत तरीके से पेश किया है. लेखी ने राहुल पर आरोप लगाते हुए कहा था कि उन्‍होंने ‘चौकीदार चोर है’ के अपने बयान को सुप्रीम कोर्ट के बयान की तरह प्रस्तुत किया है. उन्‍होंने कहा था कि राफेल पर पुनर्विचार याचिका के मामले में SC के फैसले के बाद राहुल गांधी ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि चौकीदार चोर है, जोकि सुप्रीम कोर्ट की अवमानना है.

आपको बता दें कि राफेल डील मामले में केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका बड़ा झटका लगा था. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस आपत्ति को खारिज कर दिया था, जिसमें गोपनीय दस्तावेजों के आधार पर पुनर्विचार खारिज करने की मांग की गई थी. कोर्ट ने कहा था कि गोपनीय दस्तावेज के आधार पर आगे पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई जारी रहेगी. सरकार ने गोपनीय दस्तावेज के आधार पर पुनर्विचार खारिज करने की मांग की थी. 14 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की शुरुआती आपत्तियों (गोपनीयता, विशेषाधिकार, राष्ट्रीय सुरक्षा) पर आदेश सुरक्षित रख लिया था.

इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में नया हलफनामा दाखिल कर कहा था कि केंद्र सरकार की बिना मंजूरी के संवेदनशील दस्तावेजों की फोटोकॉपी की गई. इन दस्तावेजों की अनाधिकृत फोटोकॉपी के जरिये की गई चोरी ने देश की सुरक्षा, सम्प्रभुता और दूसरे देशों के साथ दोस्ताना सम्बधों को बुरी तरह प्रभावित किया है. केंद्र ने कहा था कि पुनर्विचार याचिका के साथ सलग्न दस्तावेज एयरक्राफ्ट की युद्ध क्षमता से जुड़े है.याचिकाकर्ताओं ने बेहद गोपीनाय जानकारी को लीक किया है.

रक्षा मंत्रालय ने आगे हलफनामे में कहा था कि राफेल मामले में दायर पुर्नविचार याचिका सार्वजनिक रूप से सबको उपलब्ध है, हमारे प्रतिद्वंद्वी या दुश्मनों की भी इस तक पहुंच है.ये राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालना वाला है.आपको बता दें कि इस वक्त सुप्रीम कोर्ट राफेल डील के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है. याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने सौदे के बारे मे रक्षा मंत्रालय की उस फ़ाइल नोटिंग को पेश किया जिसे हिन्दू अख़बार ने छापा था,लेकिन अटार्नी जनरल ने इस पर आपत्ति जताई और कहा था कि ये चोरीकिया हुआ है जांच चल रही है मुक़दमा किया जाएगा.

भोपाल: दिग्विजय के लिए सुबह 10 बजे शुरू होगा साधुओं का रोड शो, 13 अखाड़ों के साधु लेंगे हिस्सा

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भोपाल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह लंबे समय के बाद चुनावी मैदान में हैं और इस बार वह अपननी जीत को सुनिश्चित करने के लिए अपनी हर संभव कोशिश कर रहे हैं। दिग्विजय सिंह के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी की ओर से साध्वी प्रज्ञा ठाकुर मैदान में हैं। भोपाल में दोनों ही नेताओं के बीच का यह मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है और हर किसी की नजर इस सीट पर है। दिग्विजय सिंह ने वोटरों को लुभाने के लिए एक नया दांव खेला है, आज उनके समर्थन में कई साधू, संत रोड शो करेंगे, जिसमे कंप्यूटर बाबा भी शामिल होंगे। जानकारी के अनुसार 13 अखाड़ों के संत इस रोड शो में हिस्सा लेंगे।

हवन किया

रोड शो के दौरान तमाम साधू संत मौजूद रहेंगे, इससे पहले दिग्विजय सिंह ने अपनी पत्नी संग मिलकर हवन किया था। दिग्विजय सिंह के लिए तमाम साधुओं ने हठयोग किया, जिसकी अगुवाई डिजिटल बाबा ने की थी। माना जा रहा है कि भाजपा की ओर से हिंदुत्व कार्ड पर पलटवार करने के लिए दिग्विजय सिंह ने यह तरीका अपनाया है। लेकिन दिग्विजय सिंह के इस रणनीति के खिलाफ साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने पलटवार किया है।

भगवा का व्यापार कर रहे हैं दिग्विजय सिंह

साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने दिग्विजय सिंह पर पलटवार करते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह भगवा का व्यापार कर रहे हैं, ये मुझे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं है। प्रज्ञा ठाकुर ने कहा कि पहले मैंने सुना था कि 40-50 हजार लोग रैली करेंगे, लेकिन अब सुनने में आ रहा है कि सिर्फ 40 ही बचे हैं। एक रैली के दौरान भी तमाम साधू आए थे, मंच पर डिजिटल बाबा भी मौजूद थे, लेकिन मीडिया ने जब इन संतों से पूछा कि आप लोग कहां से आए हैं तो उन लोगों ने कहा कि हम भीख मांगते थे, मंच पर जो बाबा खड़े हैं उन्होंने हमे पैसा दिया है और भगवा कपड़ा दिया है, फिर बोले कि चलो सभा में।

12 मई को होगा मतदान

बता दें कि 12 मई को भोपाल सहित तमाम सीटों पर लोकसभा चुनाव के छठे चरण का मतदान होगा, जिसमे मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। 12 मई को छठे चरण के तहत मतदान कराया जाएगा छठे चरण के लिए 7 राज्यों की 59 सीटों पर मतदान होगा। इसके साथ ही त्रिपुरा के बूथ नंबर 168 पर भी मतदान कराया जाएगा। छठे चरण में बिहार की 8, हरियाणा की 10, झारखंड की 4, मध्य प्रदेश की 8, यूपी की 14, पश्चिम बंगाल की 8, दिल्ली की 7 सीटों पर मतदान होगा। चुनाव के नतीजों की घोषणा 23 मई को की जाएगी।

आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का डाटा तैयार करेगी छत्तीसगढ़ सरकार

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छत्तीसगढ़ में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का नए सिरे डाटा तैयार करेगी. सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग की तरफ से परिपत्र जारी कर दिया गया है, जिसमें सभी कलेक्टर, कमिश्नर व जिला पंचायत सीईओ को जारी परिपत्र में सरकार ने निर्देशित किया है साथ ही प्रमाण पत्र बनाने के लिए सक्षम पदाधिकारी को नियुक्त किया गया है. राज्य सरकार की तरफ से राजस्व अधिकारी और तहसीलदार को सक्षम पदाधिकारी बनाया गया है.

ये अधिकारी आय व संपत्ति के आधार पर सर्टिफिकेट जारी करेंगे. इस आदेश के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को आरक्षण देने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है. इसके तहत ही प्रक्रिया की जा रही है. आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का डाटा तैयार कर गरीब सवर्णों की संख्यात्मक स्थिति तैयार की जा रही है. बता दें कि केंद्र सरकार ने 19 जनवरी को गरीब व निर्धन सवर्णों के लिए नौकरी और पढ़ाई में 10 प्रतिशत आरक्षण का कानून पारित किया है. छत्तीसगढ़ में फिलहाल इसे लागू नहीं किया गया है.

लोकसभा चुनाव: दिल्ली में आज पीएम मोदी VS प्रियंका गांधी

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लोकसभा चुनाव में पांच चरणों की वोटिंग के बाद अब हर किसी की निगाहें दिल्ली पर टिकी है. यहां सीटें सिर्फ सात हैं, लेकिन बीजेपी से लेकर कांग्रेस और फिर आम आदमी पार्टी हर किसी की साख दांव पर है. कहा जा रहा है कि यहां कई सीटों पर त्रिकोणीय मुक़ाबला है. लिहाज़ा तीनों पार्टियों ने यहां पूरी ताकत झौंक दी है.

बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में रैली करेंगे. तो प्रियंका गांधी दिल्ली के कुछ इलाकों में रोड शो करेंगी. इसके अलावा आम आदमी पार्टी के कई नेता भी आज चुनावी अखाड़े में मौजूद रहेंगे. यानी दिल्ली में बढ़ते पारे के बीच आज सियासी घमासान की गर्मी भी महसूस होगी.

दिल्ली में 12 मई को वोटिंग होनी है. ऐसे में यहां प्रचार के लिए सिर्फ 3 दिन का समय रह गया है. दिल्ली में पीएम मोदी की सिर्फ एक ही रैली होगी. लिहाजा बीजेपी इस मेगा रैली को ऐतिहासिक बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है. रैली को कामयाब बनाने के लिए बीजेपी पिछले कई दिनों से जी-जान से जुटी हुई थी.

बीजेपी की ओर से दावा किया जा रहा है कि मेगा रैली में करीब दो से ढाई लाख लोगों की भीड़ जुटेगी. रैली में भीड़ लाने के लिए बीजेपी ने अपने फ्रंटल संगठन पूर्वांचल मोर्चा, युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, एससी मोर्चा को सक्रिय कर दिया है. इस रैली को लेकर केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता विजय गोयल ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री की रैली आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के ताबूत में आखिरी कील साबित होगी.

दिल्‍ली में लोकसभा की कुल 7 सीटें हैं. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने सभी सातों सीटों पर जीत हासिल की थी. इस बार विपक्षी पार्टी आप और कांग्रेस भी पूरा जोर लगा रही है. कांग्रेस ने दिल्‍ली की मुख्‍यमंत्री रहीं शीला दीक्षित को चुनाव मैदान में उतारा है. कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में गठजोड़ न होने पर राष्‍ट्रीय राजधानी में चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है.

ऑटो ड्राइवर ने खरीदा 1.6 करोड़ का विला, सच्चाई पता लगाने में IT अफसरों के छूटे पसीने

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गर्मी के मौसम में अपने स्मार्टफोन का ऐसे रखें ख्याल, वरना हो सकता है ब्लास्ट

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हम आए दिन मोबाइल ब्लास्ट होने की खबरें पढ़ते और सुनते रहते हैं. इसका मुख्य कारण फोन की बैटरी का गर्म होना है, जिसके कारण वह फट जाती है. इसके अलावा ओवरहीट होने के कारण भी फोन फट जाता है. इसलिए जरूरी है कि हम अपने फोन का ख्याल रखें और उसे ब्लास्ट होने से बचाएं. आज हम आपको कुछ ऐसे ही तरीके बताने जा रहे हैं जिससे आप आसानी से फोन को ब्लास्ट होने से बचा सकते हैं…

थर्ड पार्टी चार्जर्स का न करें इस्तेमाल
एक बात का ध्यान रखें कि फोन को हमेशा उसके साथ मिले चार्जर से ही चार्ज करें. अगर आप किसी अन्य कंपनी के चार्जर से फोन को चार्ज कर रहे हैं तो हो सकता है कि उसे सही वोल्टेज न मिले और वह ब्लास्ट हो जाए. इसके अलावा अगर आप USB Type-C पोर्ट या फिर क्विक चार्ज का इस्तेमाल कर रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि आप फोन के बॉक्स में मिले केबल का इस्तेमाल कर रहे हैं.

फोन के गर्म होने पर न करें चार्ज

सूरज की तेज रोशनी से मोबाइल को रखें दूर

अगर आप मोबाइल फोन से सड़क पर किसी से बात कर रहे हैं तो कोशिश करें कि आपके मोबाइल फोन पर सूरज की किरणें सीधे न पड़ें. मोबाइल फोन सूरज की रोशनी में तेजी से गर्म होते हैं और उनके ब्लस्ट होने का डर बढ़ जाता है.

बेकार ऐप्स को बंद कर दें
मोबाइल का इस्तेमाल करने के दौरान यूजर्स बहुत सारे ऐप्स डाउनलोड कर लेते है. इन ऐप्स में से काफी ज्यादा ऐप्स का इस्तेमाल वो एक बार करता लेकिन वह हर वक्त ऑन रहते हैं. कोशिश करें कि बेकार के ऐप्स को तुरंत बंद कर दें. ज्यादा ऐप्स खुले रहने से मोबाइल फोन तेजी से गर्म होता है.

ब्राइटनेस ज्यादा न बढ़ाएं तो बेहतर
मोबाइल फोन की स्क्रीन की ब्राइटनेस को कम ही रखना चाहिए. तेज रोशनी के चलते मोबाइल तेजी से गर्म होने लगता है. अगर आप किसी से देर तक बात करते हैं तो कई बार फोन की स्क्रीन भी गर्म हो जाती है. ऐसे में जरूरी है कि मोबाइल की ब्राइटनेस को तेज रखने से बचा जाए.

फोन गर्म होने पर केस निकाल दें
अगर फोन पर बात करने के दौरान मोबाइल गर्म हो गया है तो तुरंत ही मोबाइल का कवर निकाल दें. मोबाइल का कवर निकालने से उसे ठंडा होने में कम समय लगता है और उसके ब्लास्ट होने का खतरा काफी कम हो जाता है.

चार्जिंग लगाने के साथ न करें मोबाइल पर बात
बहुत से लोग फोन को चार्जिंग में लगाकर बात करते हैं ऐसे में मोबाइल में धमाका होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है. मोबाइल चार्ज होने के समय सीधे बिजली के संपर्क में होता है और काफी गर्म हो चुका होता है. उसी दौरान फोन पर बात करने के कारण उसमें ब्लास्ट होने का खतरा बढ़ जाता है.

चुनाव के ठीक बाद विपक्ष कर सकता है राष्ट्रपति से मौका देने की अपील

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लोकसभा चुनाव अभी खत्म भी नहीं हुए हैं, लेकिन सरकार बनाने को लेकर जद्दोजहद अभी से शुरू हो चुकी है. विपक्षी दल चुनाव नतीजों से पहले ही राष्ट्रपति से मुलाकात करना चाहते हैं. सूत्रों के मुताबिक इस मुलाकात में राष्ट्रपति से अपील की जाएगी कि अगर किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिलता है तो सबसे ज्यादा सीटों वाली किसी एक पार्टी को सरकार बनाने के लिए न बुलाया जाए. इसकी जगह सभी को बहुमत साबित करने का मौका दिया जाए.

21 विपक्षी दलों का फैसला

राष्ट्रपति से मिलने वाले इस प्रतिनिधिमंडल में 21 विपक्षी पार्टियों के नेता शामिल होंगे. बीजेपी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरी ये पार्टियां एक साझा लेटर साइन करने वाली हैं. इन सभी पार्टियों का कहना है कि एक बार चुनाव खत्म हो जाएं तो नतीजों से ठीक पहले राष्ट्रपति से अगल पार्टी को मौका देने की बात कही जाएगी.

सूत्रों के मुताबिक विपक्षी पार्टियों के इस कदम के पीछे असली कारण ये है कि कहीं राष्ट्रपति एक सबसे बड़ी पार्टी को ही सरकार बनाने के लिए आमंत्रित न कर लें. पार्टियों का मानना है कि रीजनल पार्टियों और गठबंधनों को भी मौका दिया जाना चाहिए

विपक्षी दलों के पास मौका

किसी भी पार्टी को सरकार बनाने के लिए कुल 543 सीटों में से 272 सीटें चाहिए होंगी. पिछले सा यानी 2014 के चुनावों में बीजेपी अकेले ही 282 सीट जीतकर सत्ता में आई थी. इसके अलावा एनडीए के घटक दलों को मिलाकर ये आंकड़ा कुल 336 तक पहुंच गया था. लेकिन इस बार अगर बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाता है और एनडीए की सरकार नहीं बन पाती है तो विपक्षी दलों के पास एक सुनहरा मौका होगा.

पिछले कुछ चुनावों से लिया सबक ?

विपक्षी दलों का यह कदम पिछले कुछ चुनावों से लिया गया सबक भी हो सकता है. क्योंकि पिछले कुछ सालों में कई बार ऐसा हुआ है, जब किसी और के हाथ में आया लड्डू छीन लिया गया. कई राज्यों में सरकारें बनते-बनते रह गईं. मणिपुर, गोवा और कर्नाटक इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं. जहां आखिरी पलों में गेंद दूसरे के पाले में गिर गई.

मौलाना आमिर रशादी बोले, ‘साध्वी प्रज्ञा का जो दर्द है, वही बेकुसूर मुसलमानों का भी’

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आजमगढ़ पर लगे ‘आतंकगढ़’ के ठप्पे के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे राष्ट्रीय ओलमा काउंसिल के अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी ने मालेगांव बम कांड की आरोपी साध्वी प्रज्ञा से सहमति जताते हुए कहा है कि देश में भगवा या इस्लामी नहीं बल्कि ‘सरकारी आतंकवाद’ फैला है.

रशादी ने कहा कि मैं आतंकवाद के आरोप में बेकुसूर मुसलमानों को फंसाये जाने के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा हूं. अपनी जो व्यथा साध्वी प्रज्ञा बता रही हैं, वही उन बेकुसूर मुस्लिम युवकों की भी है जिन्हें दहशतगर्दी के आरोप में जेल में डाला गया है. उन्होंने यह भी कहा कि मुसलमानों को आतंकवाद के आरोप में फंसाने के पीछे का मकसद मुस्लिमों को राजनीतिक रूप से ‘अछूत’ बनाने का है.

रशादी ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा का कहना है कि सरकारी एजेंसियों ने उनको बेवजह फंसाया और धर्म को आतंकवाद से जोड़ा जाना देशद्रोह है. साध्वी जी भी हमारी ही बात कह रही हैं. साध्वी की बात से साबित होता है कि कांग्रेस सरकार की एजेंसियों ने सरकार की शह पर उनको फंसाया. आज वे ही एजेंसियां उन्हें क्लीनचिट दे रही हैं. जब उस वक्त की एजेंसियों ने साध्वी जी को फंसाया तो इसका मतलब यह है कि उन्हीं एजेंसियों ने ही मालेगांव कांड किया.

उन्होंने कहा ‘ठीक यही बात बेकुसूर मुस्लिम युवकों को फंसाने के लिये की जाती है. सचाई यह है कि हिन्दुस्तान में ना तो भगवा आतंकवाद है और ना ही इस्लामी आतंकवाद. यहां पर सरकारी आतंकवाद है. रशादी ने कहा कि बेकुसूर मुसलमानों को आतंकवाद के आरोपों में फंसाने के मामले में भाजपा और कांग्रेस एक ही नीति बनाकर उनको देशद्रोही साबित करने की होड़ में लगी हुई है. इसके पीछे सीधा मकसद यह है कि हिन्दुस्तान में मुसलमानों को राजनीतिक रूप से अछूत बनाया जाए और उनका कोई नेतृत्व ना तैयार हो, और अगर तैयार भी हो तो उसके बारे में कहा जाए कि इन आतंकवादियों को वोट मत देना, वरना ये हुकूमत में आ जाएंगे.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सपा, बसपा और कांग्रेस पर आजमगढ़ को ‘आतंकगढ़’ के तौर पर बदनाम करने का आरोप लगाये जाने पर मौलाना रशादी ने कहा कि आजमगढ़ के सम्मान की जो लड़ाई हमने शुरू की थी, उसके मद्देनजर योगी का यह बयान हमारी जीत है. मुख्यमंत्री के बयान से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वर्ष 2008 में हुआ दिल्ली का बटला हाउस मुठभेड़ कांड फर्जी था, और उसकी आड़ में आजमगढ़ को ‘आतंकगढ़’ बनाने की कोशिश की गयी.

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान पूर्व केन्द्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद को यह कहना पड़ा कि जब उन्होंने बटला हाउस के बारे में बताया तो तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की आंखों में आंसू आ गये थे. कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी उस मुठभेड़ कांड को फर्जी बताया था. अब योगी भी कह रहे हैं कि सपा, बसपा और कांग्रेस के जमाने में आजमगढ़ को आतंकगढ़ के तौर पर बदनाम करने की साजिश की गयी. यही बात हम भी कह रहे हैं. यह हमारी जीत है.

रशादी ने कहा कि बटला हाउस मुठभेड़ काण्ड तत्कालीन कांग्रेस सरकार की साजिश का नतीजा था. इसी वजह से उसने उसकी जांच नहीं करायी. उसके बाद कांग्रेस की ही मदद से सत्ता में आयी आम आदमी पार्टी भी जांच की दिशा में नहीं बढ़ी.

बीजेपी नेताओं पर FIR दर्ज करने की तैयारी, लेह में पत्रकारों को रिश्वत देने का मामला

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लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2019) के पांचवें चरण के मतदान के दौरान जम्मू-कश्मीर में बीजेपी नेताओं पर आरोप लगा था कि उन्होंने पार्टी के पक्ष में रिपोर्ट लिखने के लिए लेह में मीडियाकर्मियों को नोटों से भरे लिफाफे दिए थे। इन आरोपों के बाद फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने शुरुआती जांच में घूस देने के आरोपों में सच्चाई पाई जिससे बीजेपी नेताओं की मुश्किलों की बढ़ सकती है। निर्वाचन अधिकारी इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की तैयारी कर रहे हैं।

लेह की डिप्टी इलेक्टशन अफसर अवनी लावासा ने पूरे मामले में जांच के आदेश दिए थे। उन्होंने बताया, ‘हमनें मंगलवार को पुलिस के जरिए कोर्ट से संपर्क किया। हम लोग इस मामले में एफआईआर दर्ज किए जाने के निर्देश का इंतजार कर रहे हैं। इस मामले में कोर्ट से अभी कोई आदेश नहीं आया है।’ डिप्टी इलेक्शन अफसर ने बताया कि बीजेपी नेताओं के खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत आई है लेकिन ये दंडनीय अपराध के दायरे में आता है।

बीजेपी नेताओं पर मीडियाकर्मियों को रिश्वत देने का आरोप

लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण में लद्दाख सीट पर मतदान हुआ था। अवनी लवासा के मुताबिक, पुलिस को निर्देश दिया गया है कि या तो एफआईआर दर्ज करें या शिकायत। चुनाव अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने इस मामले में कोर्ट का रूख किया था। हम इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे हैं। अभी तक तीन शिकायतें आई हैं। एक हमारी तरफ से, बाकी दो शिकायतें लेह प्रेस क्लब की तरफ से दर्ज कराई गई हैं।

बता दें कि कि लेह प्रेस क्लब ने चुनाव अधिकारी और एसएचओ के पास अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई थी जिसमें बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र रैना, एमएलसी विक्रम रंधावा समेत कई नेताओं पर मीडियाकर्मियों को घूस देने का आरोप लगा था। हालांकि रविंद्र रैना ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि जो लिफाफे दिए गए थे, उसमें पत्रकारों को आमंत्रित करने के लिए इंविटेशन कार्ड था। उनके मुताबिक, 2000 कार्ड छपवाए गए हैं। इनमें से कुछ मीडियाकर्मियों को भी दिए गए थे।