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देश के पहले लोकपाल बनेंगे सुप्रीम कोर्ट के ये पूर्व जज, ऐलान कल

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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज पिनाकी चंद्र घोष (पीसी घोष) का नाम देश के पहले लोकपाल के तौर पर फाइनल कर लिया गया है. सूत्रों के मुताबिक, सोमवार को आधिकारिक तौर पर इसका ऐलान किया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस पीसी घोष वर्तमान में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य हैं.

बता दें कि भ्रष्टाचार के मामलों पर एक स्वतंत्र और मजबूत संस्था स्थापित करने के लिए साल 2013 में लोकपाल व लोकायुक्त विधेयक पास किया गया था. 16 जनवरी 2014 को ये विधेयक लागू हुआ था. हालांकि, केंद्र की मोदी सरकार पांच साल के कार्यकाल में लोकपाल की नियुक्ति नहीं कर पाई.

न्यूजीलैंड आंतकी हमले में 5 भारतीयों की मौत, गुजरात के 3 लोग शामिल

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न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च शहर की दो मस्जिदों में हुई गोलीबारी में मरने वालों की संख्या 50 हो गई है. इसमें 5 भारतीयों के भी मरने की खबर सामने आ रही है. हालांकि, सूत्रों के मुताबिक इनकी संख्या 7 भी हो सकती है. मृतकों में एक शख्स हैदराबाद से और 3 शख्स गुजरात से हैं, जबकि एक व्यक्ति तेलंगाना का है. इस हमले में पाकिस्तान  और बांग्लादेश  भी दो-दो नागरिकों के मारे जाने की पुष्टि हुई है.

न्यूजीलैंड की मस्जिदों में भारी गोलीबारी के दो दिन बाद हाई कमीशन ने पांच भारतीयों के मरने की पुष्टि की. हैदराबाद के रहने वाले 30 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर फरहाज़ अहसान की गोलीबारी में मौत हो गई. अहसान पिछले 7 साल से न्यूजीलैंड में काम कर रहे थे. वह न्यूजीलैंड में अपनी पत्नी इंशा अजीज़, तीन साल की बेटी और सात महीने का बेटे के साथ रहते थे.


गुजरात के वडोदरा से बाप-बेटे और अहमदाबाद से एक शख्स की भी मौत की पुष्टि हुई है. तेलंगाना के करीमनगर जिले से मोहम्मद इमरान खान की मौत की पुष्टि हुई है.

न्यूजीलैंड बांग्लादेश के दो नागरिकों की मौत हो गई, पांच अन्य घायल हो गए और तीन लापता हैं. विदेश राज्यमंत्री मोहम्मद शहरयार आलम ने शनिवार को यह जानकारी दी. वहीं इस फायरिंग में दो पाकिस्तानी नागरिक मारे गए. उनमें से एक की मौत हमले के दौरान हमलावर को काबू में करने की कोशिश के दौरान हुई थी.

बता दें कि 15 मार्च को न्यूजीलैंड के क्राइस्ट चर्च की दो मस्जिदों में एक शख्स ने ताबड़तोड़ फायरिंग की. 28 साल का टन टैरेंट हेलमेट लगाकर मस्जिद में घुसा और ‘चलो पार्टी शुरू करते हैं’ कहते हुए ताबड़तोड़ गोलियां बरसाने लगा, जिस वक्त ये हमला हुआ मस्जिद नमाज़ियों से भरी हुई थी. बांग्लादेश की क्रिकेट टीम भी वहां मौजूद थी.

हमला होते ही वहां अफरा-तफरी मच गई. 49 लोगों का हत्यारा मुस्लिमों से बदला लेना चाहता था. उसने अपनी मंशा एक दिन पहले ही सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए 74 पेज के मैनिफेस्टो में जाहिर की थी. हैरान कर देने वाली बात ये है कि इस घटना को 17 मिनट तक फेसबुक पर लाइव दिखाया गया और ये काम खुद हमलावर ने किया.

लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को झटका: ओडिशा के विधायक प्रकाश चंद्र बेहरा आज भाजपा में होंगे शामिल

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नई दिल्‍ली। लोकसभा चुनाव से कुछ दिन पहले कांग्रेस को करारा झटका लगा है। ओडिशा के विधायक प्रकाश चंद्र बेहरा ने पार्टी से इस्‍तीफा दे दिया है और आज भाजपा में शामिल होंगे। आपको बता दें कि कटक जिला अंतर्गत सालेपुर के विधायक प्रकाश चंद्र बेहरा ने अपना इस्तीफा पत्र कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के पास भेज दिया है।

प्रकाश चंद्र बेहरा ने अपने इस्तीफा पत्र में उल्लेख किया है कि कांग्रेस नेतृत्व हमें अपमानित कर रहा था। हमें कटक जिला के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। मेरी शिकायत को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नहीं सुन रहे थे।

उन्होंने कहा कि मैं पिछले 20 साल से कांग्रेस के लिए काम कर रहा था मगर पार्टी में मेरी उपेक्षा हो रही थी, ऐसे में दुखित होकर मैं आज पार्टी की प्राथमिक सदस्यता पद से इस्तीफा दे रहा हूं।

Madhya Pradesh: कर्ज माफी में राहत कम, सियासत ज्यादा

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मध्य प्रदेश में किसानों की कर्ज माफी सियासी हथियार बन गई है। भाजपा जहां इसे महज शिगूफा करार देकर सरकार पर किसानों को ठगने का आरोप लगा रही है, वहीं कांग्रेस कर्ज माफी को ऐतिहासिक बताते हुए भाजपा पर भ्रम फैलाने का आरोप लगा रही है। ताजा विवाद किसानों को माफ हुए कर्ज की उम्मीद से कम धनराशि के मिल रहे संदेश (एसएमएस) को लेकर उपजा है, जिसे भाजपा ने मुद्दा बना लिया है।

कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के समय किसानों की कर्ज माफी का वादा किया था लेकिन बाद में कट ऑफ तारीख को लेकर हुई गफलत, कई बदलावों से किसानों को पूरा लाभ नहीं मिलने का आरोप लग रहा है। राज्य सरकार ने पहले तय किया था कि 31 मार्च 2018 तक का कर्ज माफ किया जाएगा लेकिन बाद में संभावित विरोध को देखते हुए कैबिनेट की बैठक में तय किया गया कि किसानों का 1 अप्रैल 2007 से 31 मार्च 2018 तक का कर्ज माफ किया जाएगा और जिन किसानों ने इस अवधि का कर्ज 12 दिसंबर 2018 (विधानसभा चुनाव परिणाम) तक जमा कर दिया था, उन्हें भी कर्ज की राशि वापस की जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

कांग्रेस नेताओं ने कहा था कि जिन किसानों ने कर्ज जमा कर दिया है, उन्हें भी दो लाख रुपए की कर्जमाफी का लाभ दिया जाएगा। सरकार ने दावा किया है कि 25 लाख किसानों की कर्ज माफी की गई है पर प्रदेश में 61 लाख किसान कर्जदार हैं। सरकार के आंकड़ों में अब तक 10 हजार 123 करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया जा चुका है। सरकार अब कह रही है कि आचार संहिता के कारण कर्ज माफी रुक गई है पर भाजपा इसे झूठ बताते हुए कांग्रेस की घेराबंदी कर रही है।

नाराजगी दिखाते उदाहरण

मामला-1 : अरविंद तिवारी, निवासी महुआखेड़ा, विदिशा को मुख्यमंत्री कमलनाथ का मैसेज मिला कि 31 मार्च 2018 को बकाया राशि 3990 रुपए आपके खाते में जमा कर दिए गए हैं। हकीकत ये है कि इन पर दो लाख रुपए का कर्ज था। राज्य सरकार की जीरो फीसदी योजना का लाभ लेने के लिए साहूकार से उधार लेकर 31 मार्च 2018 के दो दिन पहले कर्ज की राशि जमा कर दी। तिवारी का कहना है कि सरकार ने कैबिनेट फैसले के बाद प्रचारित किया था कि 12 दिसंबर तक के कर्ज माफ होंगे, जिन्होंने कर्ज जमा कर दिया है उन्हें भी योजना का लाभ दिया जाएगा पर वादा पूरा नहीं किया।

मामला-2 : अरविंद सिंह बघेल, ग्राम अरवरिया, विदिशा। कर्ज 2 लाख 40 हजार रुपए था, लेकिन मैसेज मिला 38 हजार 891 रुपए जमा कराने का। कल्याण सिंह बघेल को 5690 रुपए माफी का मैसेज मिला। इसी तरह महाराज सिंह बघेल को 6740 रुपए जमा कराने का संदेश मिला, उन पर भी एक लाख का कर्ज बकाया है।

मामला- 3 : खंडवा के ग्राम बावड़िया काजी के किसान पन्नालाल भाईराम ने बड़गांव गुर्जर सहकारी समिति से करीब डेढ़ लाख रुपए का कृषि ऋण लिया था। यह ऋण 31 मार्च 2018 से पहले किसान द्वारा चुका भी दिया गया है। किसान ने बताया कि कर्ज चुकाने के बाद भी सरकार उसे कर्ज माफी की सूची में रख रही है।

अधिकांश को राहत कम : नीमच में 91 हजार 293 किसानों ने कर्ज माफी के आवेदन जमा कराए। इनमें से 88 हजार 117 आवेदनों की ऑनलाइन एंट्री भी कर दी गई थी, लेकिन 39 हजार को ही लाभ मिला। इनमें अधिकांश किसानों की कर्ज माफी की राशि एक हजार से 50 हजार रुपए के बीच है। नयागांव की रतन बाई पुरोहित ने बताया मेरा सिर्फ 8140 रुपए का कर्ज माफ हुआ। कृषि विभाग के उप संचालक एनएस रावत ने बताया हमने कर्ज माफी योजना में एक हजार रुपए से कम की राशि के प्रकरणों को शामिल नहीं किया है।

कर्ज एक लाख, प्रमाण-पत्र में 41 हजार माफ

खरगोन जिले के भीकनगांव तहसील के ग्राम कालधा के कृषक महेश पिता गेंदालाल ने बताया कि उन्होंने सहकारी संस्था से एक लाख रुपए का कर्ज लिया था परंतु ऋ ण माफी योजना के अंतर्गत उन्हें जो प्रमाण-पत्र दिया गया है, उसमें केवल 41 हजार रुपए माफ होना बताया गया है। ऐसे ही अन्य किसान भी है जिन्हें अब तक कर्ज माफी का प्रमाण-पत्र नहीं मिला है। भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष श्यामसिंह पंवार ने बताया कि जिले में केवल 10 प्रतिशत किसानों का ही कर्ज माफ हुआ है।

कर्ज डेढ़ लाख का, माफ हुए 2196 रुपए

बड़वानी के भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष मंशाराम पंचाले ने बताया कि दो लाख के कर्ज पर महज 20 हजार 444 रुपए की कर्ज माफी का प्रमाण-पत्र मिला है। वहीं ग्राम मेणीमाता के किसान चमा पिता भाणिया ने बताया कि उस पर डेढ़ लाख का कर्ज है और उसे महज 2 हजार 196 रुपए की कर्ज माफी का प्रमाण-पत्र दिया गया है।

वादा पूरा नहीं हुआ

प्रदेश में कांग्रेस ने किसानों से कर्ज माफी का जो वादा किया गया था, वह आज तक पूरा नहीं हुआ। ऐसा ही वादा इन्होंने पंजाब, कर्नाटक की जनता से भी किया था, मगर आज तक वहां की जनता कर्ज माफी की राह देख रही है। – राकेश सिंह, प्रदेशाध्यक्ष, भाजपा

किसानों के साथ धोखा

कर्ज माफी के नाम पर सत्ता में आई कमलनाथ सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया है। किसानों के खाते में अब तक 4000 रुपए भी नहीं पहुंचे हैं। – नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय मंत्री

किसान धैर्य रखें

हमने चुनौती स्वीकार की है और अब तक 24 लाख 84 हजार किसानों का कर्ज माफ किया है। किसानों के हित के इस निर्णय को लोकसभा चुनाव के दृष्टिगत भाजपा संकीर्ण मानसिकता से देख रही है। उन्हें लगता है कि कमलनाथ सरकार के इस निर्णय से उन्हें लोकसभा चुनाव में नुकसान होगा, इसलिए वे भ्रम फैलाकर किसानों का मनोबल तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। आचार संहिता खत्म होते ही यह अभियान फिर शुरू होगा, किसान भाई धैर्य रखें। – कमलनाथ, मुख्यमंत्री, मप्र

चीन ने भारत को दिए संकेत, सुलझ जाएगा मसूद अजहर का मामला

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नई दिल्ली। क्या अब चीन ने भी मसूद अजहर के मामले में भारत का साथ देने का फैसला कर लिया है? यह संकेत भारत में चीन का राजदूत लिउ झाओहुई ने दिए हैं। उन्होंने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित करने का मसला हल कर लिया जाएगा। राजदूत के मुताबिक, यह एक टेक्निकल होल्ड है, यानी यह समय सलाह-मशविरे का समय है। मुझ पर विश्वास कीजिए यह मुद्दा हल हो जाएगा।

मालूम हो, बीती 14 मार्च को चीन उस समय एक बार फिर आतंकी अजहर के लिए सुरक्षा कवच बनकर आगे आया था, जब उसने यूएन में अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए अजहर को वैश्विक आंतकी बनने से बचा लिया था।

यह चौथा मौका है जब चीन ने आतंकी अजहर मसूद को वैश्विक आतंकी होने से बचाया था। चीन के वीटो के बाद यह साफ हो गया कि मसूद अजहर अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित नहीं होगा। और यूएन में मसूद अजहर के खिलाफ प्रस्ताव रद्द कर दिया था।

टॉप 10 कंपनियों में से 8 का बाजार पूंजीकरण 1.4 लाख करोड़ रुपए बढ़ा, RIL और HDFC बैंक को हुआ सबसे ज्‍यादा लाभ

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नई दिल्ली। सेंसेक्स की टॉप 10 कंपनियों में से 8 का बाजार पूंजीकरण (एम-कैप) पिछले सप्ताह कुल 1,42,643.2 करोड़ रुपए बढ़ा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक के बाजार पूंजीकरण में सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले सप्ताह सेंसेक्स 1,352.89 अंक यानी 3.68 प्रतिशत बढ़कर शुक्रवार को 38,024.32 अंक पर बंद हुआ था।

इस दौरान, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टीसीएस, एचडीएफसी बैंक, एचडीएफसी, इंफोसिस, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक का बाजार पूंजीकरण बढ़ा है, जबकि हिंदुस्तान यूनिलीवर और आईटीसी का बाजार पूंजीकरण घटा है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण 35,500.21 करोड़ रुपए बढ़कर 8,38,355.65 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। एचडीएफसी बैंक का एम-कैप 33,724.93 करोड़ रुपए बढ़कर 6,12,846.54 करोड़ रुपए और कोटक महिंद्रा बैंक का पूंजीकरण 16,676.22 करोड़ रुपए बढ़कर 2,52,871.75 करोड़ रुपए हो गया।

आईसीआईसीआई बैंक का बाजार पूंजीकरण 16,487.42 करोड़ रुपए चढ़कर 2,54,995.66 करोड़ रुपए, एचडीएफसी का 16,084.35 करोड़ बढ़कर 3,40,171.21 करोड़ रुपए, एसबीआई का 14,680.99 करोड़ रुपए चढ़कर 2,65,685.69 करोड़ रुपए, जबकि टाटा कंसल्टेंसी का बाजार पूंजीकरण 6,716.77 करोड़ रुपए की बढ़त के साथ 7,65,561.53 करोड़ रुपए हो गया। इंफोसिस का एम-कैप 2,772.32 करोड़ रुपए बढ़कर 3,14,060.64 करोड़ रुपए पर पहुंच गया।

वहीं, दूसरी ओर आईटीसी का बाजार पूंजीकरण 1,347.76 करोड़ रुपए गिरकर 3,56,481.45 करोड़ रुपए और हिंदुस्तान यूनिलीवर का एम-कैप 508.7 करोड़ रुपए घटकर 3,67,702 करोड़ रुपए रह गया।

बाजार पूंजीकरण के लिहाज से रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर रही। इसके बाद क्रमश: टीसीएस, एचडीएफसी बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईटीसी, एचडीएफसी, इंफोसिस, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक का स्थान रहा।

MP : मीटर रीडिंग लेने आया बिजलीकर्मी दरवाजे पर ही प्रिंट कर देगा बिल

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इंदौर

राजस्व जुटाने से लेकर बिजली आपूर्ति और सौभाग्य योजना के अमल में प्रदेश में नंबर वन इंदौर की बिजली कंपनी अब बिलिंग में नया प्रयोग करने जा रही है। अगले महीने से पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी स्पॉट बिलिंग शुरू करने जा रही है। रीडिंग लेने पहुंचा बिजलीकर्मी दरवाजे पर ही उपभोक्ता को बिल भी प्रिंट कर देगा। प्रदेश में पहली बार कोई बिजली कंपनी यह सिस्टम लागू कर रही है। शुरुआत इंदौर शहर के चार जोन से होगी।

विद्युत वितरण कंपनी को स्पॉट बिलिंग के नए सिस्टम में अपना और उपभोक्ता दोनों का फायदा नजर आ रहा है। विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों केमुताबिक शहर के चार जोन से स्पॉट बिलिंग की शुरुआत की जा रही है। इनमें डेली कॉलेज जोन, गोयल नगर जोन, मैकेनिक नगर जोन और जीपीएच जोन शामिल हैं। स्पॉट बिलिंग के लिए बिजली कंपनी की आईटी शाखा ने अपना स्वयं का सॉफ्टवेयर तैयार किया है। सॉफ्टवेयर तैयार होने के बाद इसका परीक्षण सफल रहा है। उपभोक्ता के दरवाजे पर पहुंचने वाला विद्युतकर्मी अपने साथ हैंड हेल्ड डिवाइस और प्रिंटर लिए होगा। उपभोक्ता के मीटर की रीडिंग सिस्टम में फीड करते ही बिल जेनरेट हो जाएगा। मौके पर ही बिल की प्रिंट निकालकर उपभोक्ता को दे दी जाएगी। मौजूदा सिस्टम बिल प्रोसेसिंग में पहले रीडिंग लेने कर्मचारी जाता है। फिर रीडिंग सिस्टम में फीड होती है।

बाद में बिल प्रिंटिंग होकर बांटने के लिए भेजा जाता है। इस सारी प्रक्रिया में 9 दिन का समय लगता है। 9 दिन की यह प्रक्रिया स्पॉट बिलिंग में कुल मिनटों में ही पूरी हो जाएगी। इससे बिल की लागत और वितरण का खर्च भी कम होगा। मौके पर बिल बनने से उपभोक्ता की बिल में गड़बड़ी व गलत रीडिंग जैसी अन्य शिकायतें भी समाप्त हो जाएगी। इस सिस्टम के लिए बिजली कंपनी छोटे प्रिंटर और हैंड हेल्ड डिवाइस खरीदने जा रही है। शुरुआत करने के लिए चुने गए चारों जोन भी खास हैं। गोयल नगर जोन पॉश और एडवांस जोन माना जाता है। वहां नए सिस्टम का फीडबैक मिल सकेगा। तीन अन्य जोन ऐसे हैं जिनमें हर तबके के उपभोक्ता हैं। साथ ही बिल में गड़बड़ी की शिकायत भी ज्यादा आती हैं।

एक लाख लाभान्वित

सूचना प्रौद्योगिकी के प्रयोग से उपभोक्ता सुविधाएं बढ़ाने के लिए कंपनी काम कर रही है। चार जोन में एक लाख उपभोक्ता सीधे लाभान्वित होंगे। इससे उपभोक्ता की शिकायतें भी कम करने में मदद मिलेगी। कंपनी का समय भी बचेगा। – विकास नरवाल, एमडी, पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी

पीएम मोदी का सफाई अभियान ‘साफ’, महाराष्ट्र में हकीकत बयां कर रहे पटरियों के किनारे बैठे लोग

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर, 2014 को महात्मा गांधी की याद में देश को साफ-सुथरा बनाने का संकल्प लिया और पूरा सरकारी अमला इस काम में जुट गया। इसके लिए करोड़ों के विज्ञापन दिए गए। यहां तक तो ठीक था, लेकिन उसके बाद यह सरकार आदत के मुताबिक आंकड़ों और तथ्यों की बाजीगरी करते हुए योजना की सफलता के दावे करने लगी। श्रेय लेने की होड़ में राज्यों ने करोड़ों के विज्ञापन देकर कहना शुरू कर दिया कि वे खुले में शौच से मुक्त हो गए हैं। पीएम मोदी की फ्लैगशिप योजनाओं में से एक स्वच्छता अभियान की नवजीवन द्वारा पड़ताल की इस कड़ी में पेश है महाराष्ट्र में इस योजना का जमीनी हाल।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस युवा हैं और वह विकास का कोई भी काम बड़ी तेजी से करने में विश्वास रखते हैं। यह दीगर बात है कि ऐसे में उन्हें अपने अधूरे कामों के बारे में पता भी नहीं चलता है। इसका उदाहरण है स्वच्छ भारत मिशन। पिछले साल अप्रैल में उन्होंने घोषणा कर दी कि महाराष्ट्र खुले में शौच से मुक्त हो गया है। इसके लिए उन्होंने 4 हजार करोड़ रुपये खर्च किए। लेकिन, जमीनी स्थिति कुछऔर कहती है। वैसे, इसकी बानगी कोई भी देख सकता है।

अगर आप मुंबई में रेलवे पटरी के किनारे और झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाकों पर नजर दौड़ाएंगे तो आपको वो दृश्य देखने को मिलेगा जो मुख्यमंत्री के दावे के बाद देखने को नहीं मिलने चाहिए थे। इतना ही नहीं, मुंबई के ट्रांबे इलाके के चीता कैंप (प्रभाग क्रं143) में महापालिका प्रशासन ने दो सार्वजनिक शौचालय को तुड़वा दिया है और अब उस जगह पर व्यायामशाला बनाया जा रहा है। ये शौचालय सांसद निधि से तैयार कराए गए थे।

शौचालय तोड़ देने के बाद स्थानीय लोग शौच के लिए कहां जाएंगे इसकी तो कल्पना की जा सकती है। आरटीआई कार्यकर्ता शकील शेख के प्रयास और स्थानीय लोगों के आंदोलन के बाद व्यायामशाला का महापालिका निधि से निर्माण अस्थायी तौर पर रोक तो दिया गया। मगर लोग खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं। अब ऐसे में मुख्यमंत्री के दावे का क्या कहा जाए?

मुख्यमंत्री के मुताबिक 2012 के बेसलाइन सर्वे के आधार पर राज्य में सिर्फ 45 फीसदी परिवारों को शौचालय की सुविधा थी और स्वच्छ महाराष्ट्र अभियान के तहत 55 फीसदी परिवारों के लिए शौचालय बनाना था जिसे निर्धारित समय से एक साल पहले ही पूरा कर लिया गया। इसमें साढ़े तीन साल का समय लगा और राज्य की तकरीबन 351 तहसीलों, 27, 667 ग्राम पंचायतोंऔर 40, 500 गांवों में 60 लाख 41 हजार 138 नए शौचालय बनाए गए। इससे इन तहसील, गांवों में खुले में शौच से मुक्ति मिली।

इसमें सार्वजनिक और सामूहिक तौर पर 2, 81,292 शौचालय बनाए गए। इसके लिए मुख्यमंत्री ने अपनी पीठ थपथपाई है। लेकिन मुख्यमंत्री के साथ सरकारी महकमा ने इस पर ध्यान नहीं दिया कि 2012 के बाद जो आबादी बढ़ी, उसके लिए कितने शौचालय की कमी है और उसे कैसे बनाना है। इस नई आबादी का सर्वे कब होगा। एक अनुमान के मुताबिक कम से कम 30-40 लाख परिवारों में और शौचालय बनाना पड़ेगा। शौचालय की यह कमी भी मुख्यमंत्री के दावे की हकीकत बयां करती है।

राज्य के चंद्रपुर जिले में पाटण नामक एक गांव है जो आदिवासी बहुल है। कम शिक्षित होने से इन आदिवासियों को बरगलाना आसान होता है और इन्हें ठगा भी गया। इस गांव में 112 शौचालय बनाए गए और इसे स्मार्ट गांव का प्रमाण पत्र भी दे दिया गया। मजे की बात यह है कि ग्राम पंचायत के सरकारी दस्तावेज में शौचालय है और अनुदान की राशि बांट दी गई है। सच्चाई तब सामने आई जब गांव की महिलाओं ने ग्राम पंचायत में जाकर शौचालय बनवाने की मांग की।

इसी तरह औरंगाबाद जिले में भी एक पोखरी गांव है जिसे एक साल पहले ओडीएफ घोषित कर दिया गया था। लेकिन गांव के लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं। यहां शौचालय बनाने में भेदभाव किया गया। गरीबों को छोड़कर सक्षम लोगों के घरों में शौचालय बनाया गया। गांव के सरपंच अमोल काकड़े शौचालय नहीं बनाने की बात स्वीकार करते हुए सफाई देते हैं कि अतिक्रमण की जमीन पर घर बनाने वालों को शौचालय की सुविधा नहीं दी जा सकती।

सरकारी नियम यह है कि पहले अपने खर्चे से शौचालय बनाओ फिर अनुदान की राशि मिलेगी। लेकिन पैसे न हों तो? लातूर के रामेगांव के लोगों के साथ यही स्थिति है। इसी कारण शौचालय नहीं बनवा रहे थे। बाद में एक सामाजिक संस्था ने मदद की और शौचालय बनवाकर अनुदान की राशि सरकार से ले ली।

इस तरह से राज्य के शहरी और ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ भारत मिशन को पूरा करने का काम किया गया। लेकिन यह शत-प्रतिशत पूरा नहीं हुआ, यह बात मुख्यमंत्री सीधे तौर पर स्वीकार नहीं करते हैं। लेकिन इसके बाद वह जिस तरह के कार्यक्रम चला रहे हैं, उससे तो जाहिर है कि राज्य में स्वच्छ भारत मिशन अधूरा है। इसमें पानी की भी भूमिका है जो हर घर में नहीं है। मुख्यमंत्री ने एक अभियान चलाया है जिसके तहत ओडीएफ वॉच प्रणाली इस्तेमाल किया जा रहा है यानी सीटी बजाकर लोगों को शर्मिंदगी महसूस कराना है। फिलहाल सीटी की आवाज भी धीमी पड़ गई है।

राजस्थान के कई जिलों में किए भूकंप के झटके का महसूस

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जयपुर। आज सुबह राजस्थान के कई जिलों में भूकंप के झटके महसूस किए गए है। लोगों में भगदड़ सी मच गई और लोग घरों से बाहर आ गए थे।

बता दें कि राज्य में इस भूकंप से किसी भी बड़े नुकसान की खबर नहीं है।  लेकिन कई घरों की दीवारों में दरार आने की बात सामने आई है। रविवार की सुबह 5.12 बजे 7 सेकेंड तक लगातार सीकर जिले में भूकंप के झटके लगातार महसूस किए गए, जिसका रिक्टर स्केल 4.0 था। हालांकि प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है।

Lok Sabha Elections 2019 : Twitter पर लोगों ने बदले नाम, आगे लिख लिया Chowkidar

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नई दिल्ली। भाजपा और नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ‘मैं भी चौकीदार’ अभियान की शुरुआत की थी। इसके अगले दिन यानी रविवार को बड़ी संख्या में नेताओं और इस अभियान का समर्थन करने वालों ने अपने ट्वीटर हैंडल नाम बदल लिए। अब हर किसी के नाम के आगे चौकीदार लिखा नजर आ रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने रविवार को ही ट्वीटर पर अपने नाम बदलते हुए आगे चौकीदार लिख लिया था। रविवार को बड़ी संख्या में भाजपा समर्थकों ने भी ऐसा ही किया।

इससे पहले शनिवार को पीएम मोदी ने ट्वीट किया था कि आज हर भारतीय कह रहा है ‘मैं भी चौकीदार’। उन्होंने अपने ट्वीट में एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा है कि आपका चौकीदार स्थिर खड़ा होकर देश की सेवा कर रहा है। लेकिन, मैं अकेला नहीं हूं। हर वो शख्स जो भ्रष्टाचार, गंदगी, समाजिक बुराईयों के खिलाफ लड़ रहा है वो चौकीदार है। हर वो शख्स जो देश के विकास के लिए काम कर रहा है वो चौकीदार है।