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वर्ल्ड मलेरिया डे :- जान लेवा बीमारी मलेरिया का क्या है इलाज़ और इससे बचाव

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आज विश्व मलेरिया दिवस है , इस बीमारी के प्रति जागरूकता लाना बहुत ही आवश्यक है क्योंकि यह एक जान लेवा बीमारी है । सभी देश मिल कर इस बीमारी के प्रति जागरूकता लाने की अपनी अपनी भूमिका बखूबी निभा रहे हैं । हाल ही में हुए एक सर्वे में यह बात सामने भी आई है की भारत में इस बीमारी में 24% की कमी आई है । इस बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता तेज़ी से बढ़ी है । पर उसके बावजूद भी आज भी कई बच्चे और लोग इस बीमारी का शिकार हो रहे हैं और बच्चों की मौत का तो यह बड़ा कारण भी है ।

प्लास्मोडियम परजीवी की पांच प्रजातियां हैं, लेकिन, सभी असुरक्षित नहीं हैं। मनुष्यों के लिए जो खतरनाक हैं, अफ्रीका में सबसे आम मलेरिया परजीवी है, और दुनिया में सबसे अधिक मौत का कारण बनता है। यह परजीवी तेजी से पनपता है। इसकी वजह से रक्त को गंभीर नुकसान पहुंचता है और रक्त वाहिकाओं को अवरुद्ध करता है। उप-सहारा अफ्रीका के क्षेत्र में पाया जाता है, विशेष रूप से एशिया और लैटिन अमेरिका में। यह संक्रमण आमतौर पर सुप्त रहता है लेकिन कई महीनों या वर्षों बाद भी इसके उदय और संक्रमित करने की क्षमता होती है।

मलेरिया से बचाव ?

जब भी बाहर जाये तो हमेशा पूरी बॉडी को अच्छे से ढँक कर रखें ताकि मच्छर के आप शिकार होने से बच सकें । यदि घर और उसके आस पास कहीं भी पानी जमा हुआ है इकट्ठा हो रहा है तो वहाँ की सफाई अवश्य जल्द से जल्द करवाएँ । कचरा और पानी जमा ना होने दें यह मच्छरों को पनपने के लिए सहायक होता है । जब भी सोएँ तो शरीर को अच्छे से ढँक कर सोएँ यह आपकोमच्छरों से बचाता है । मच्छरों से बचाव वाले यंत्रों और क्रीम का प्रयोग करें , साथ ही साथ आप बाहर सोने से भी बचें व खिड़कियों को खोलने से बचें या फिर उन पर भी मच्छर दानी का प्रयोग करें ।

इलाज़ ?

मलेरिया से बचाव का कोई टीका नहीं है लेकिन कुछ एंटी-मलेरिया दवाएं हैं जो बीमारी होने की संभावना को कम कर सकती हैं। य़े हैं-क्लोरोक्विन,आर्टेसुनेट कॉम्बीनेशन थैरेपी ,क्विनिन सल्फेट,मेफ्लोक्विन

भारत सरकार मलेरिया को रोकने और खत्म करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रही है। 2017 में, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने मलेरिया उन्मूलन (2017-22) के लिए पांच वर्षीय नेशनल स्ट्रेटेजिक प्लान शुरू किया, जिसका लक्ष्य 2030 तक मलेरिया को पूरी तरह से हटाना है। 678 में से 578 जिलों में मलेरिया को 2022 तक समाप्त करने का लक्ष्य है। श्रीलंका, पराग्वे, उज्बेकिस्तान, मालदीव, मोरक्को, आदि कुछ ऐसे देश हैं जिन्हें लगातार तीन साल तक शून्य केस दर्ज करने पर डब्ल्यूएचओ ने मलेरिया-फ्री घोषित किया है।

खाना-खजाना : जानिए स्वादिष्ट तंदूरी आलू पराठा बनाने की रेसिपी.

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आलू का पराठा खाना हर किसी की पहली पसंद होता है और इसके खाने का मजा तब और बढ़ जाता है जब यह ढाबे का तंदूरी आलू पराठा हो। लेकिन इसे बनाने हर किसी के बस की बात नही है। पर क्या आप जानते है कि इसका मजा अब आप घर पर भी पा सकते हैं। इसलिए आज हम आपके लिए ढाबा स्टाइल की ‘तंदूरी आलू पराठा’ बनाने की विधि। जो कूकर में बड़ी आसानी से बनायी जा सकती हैं। तो आइये जानते है इस Recipe के बारे में।

सामग्री-
2 कटोरी- गेहूं का आटा
4 – उबले आलू
2 – हरी मिर्च (बारीक कटी हुई)
1 इंच – अदरक कद्दूकस किया हुआ
1 बड़ा चम्मच – हरा धनिया
1 छोटा चम्मच – लाल मिर्च पाउडर
1 छोटा चम्मच – गरम मसाला
1/2 छोटा चम्मच – अमचूर
तेल जरूरत के अनुसार
नमक स्वादानुसार

बनाने का तरीका- 
सबसे पहले एक बर्तन में आलू को साफ करके उबलने के लिये रख दें। इसी बीच एक परात में एक कटोरी में आटा, नमक और थोड़ा सा तेल डालकर उसे उसमें धीरे-धीरे पानी डालते हुए नरम आटा गूंथ लें। और कुछ देर के लिए ढक्कर रख दें।
आलूओं के उबल जाने के बाद इन्हें छीलकर फोड़ लें।
अब आलू में हरी मिर्च, अदरक, हरा धनिया, लाल मिर्च पाउडर, गरम मसाला, अमचूर और नमक डालकर अच्छे से मैश करके पीठी तैयार कर लें।
पराठा बनाने के लिए अब आटे से लोई तोडकर इसे गोलाकार में बेलें।
पराठे के बीचों-बीच हाथों से गहराई करके उसमें आलू की पीठी भरकर इसकी पोटली बनाते हुए बंद कर लें।
पोटली को हल्के हाथों से दोबारा बेल लें।
अब प्रेशर कूकर या कोई गहरे तले वाला बर्तन को मीडियम आंच में गरम करने के लिए रखें।
जब वह अच्छी तरह से गर्म हो जाये तो हाथों पर पानी लगाकर पराठे को उठाएं और गीले वाले साइड से इसे कूकर के अंदर चिपका दें।
जब पराठा बर्तन में अच्छे से चिपक जाए तब बर्तन को उल्टा कर आंच धीमी कर इसे सेंके।
पराठे को अच्छी तरह से सेकने को लिये बर्तन को घुमाते रहें।
पराठें के सिक जाने के बाद बर्तन को सीधा कर इसे एक प्लेट में निकाल लें।
इसी तरह से बाकी लोइयों से भी आलू पराठा बना लें।
अब आपका तंदूरी आलू पराठा बलकर पूरी तरह से तैयार है चटनी, दही या अचार के साथ सर्व करें।

गर्मियों में बहुत लाभदायक है स्वीट बेसिल लेमोनेड : जाने बनाने की विधि

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सामग्री :

1 नींबू
सब्जी / मीठी तुलसी के बीज -1 टी स्पून

ठंडा पानी – 1 कप
शक्कर – 2 टी स्पून ठीक जमाना ( स्वाद के लिए )
नमक – एक चुटकी

बनाने की विधि : सबसे पहले सब्जी के बीज को 1/2 कप पानी मे 3-5 मिनट के लिए फूलने तक और जेली जैसे दिखने तक भिगो दे। फिर सर्विंग ग्लास मे टी स्पून पतला बीज डालिये। अब उसमे नींबू का रस निचोडिये। फिर उसमे शक्कर और नमक के साथ ठंडा पानी डालिये और अच्छे से मिक्स कर ले। अब इसे ठंडा ठंडा सर्व करें।

गर्मी में क्यों करें दही का सेवन, फायदे जानकर आप चौक जायेंगे.

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गर्मी आते ही हम लोग ठंडी चीजों का सेवन करना शुरू कर देते हैं,जैसे दही एक ऐसा उत्पाद है जिसे उत्तर भारत में लोग चाव से खाते हैं. हर भारतीय आहार में दही काफी अहम भूमिका निभाता है. दही के ढेर सारे फायदे भी हैं. गर्मी के मौसम में हर कोई किसी न किसी रूप में दही का सेवन करता है. यह आपकी आंतों को दुरुस्त रखता है और इसे खाने से पेट को भी ठंडक मिलती है. इसलिए इस मौसम में लोग दही से लस्सी, छाछ, स्मूदी और रायते जैसी चीजें बनाकर इसको खाना पसंद करते हैं. इनके अलावा भी दही का इस्तेमाल चाट या चिकन करी में किया जाता है. इसे साइड डिश के तौर भी सर्व किया जाता है|दही, दूध से बनने वाला उत्पाद है, जिसे हर कोई पसंद करता है. यह स्वस्थ के लिए फायदेमंद होने के साथ साथ स्वादिष्ट भी है. दही में कैल्शियम, विटामिन बी 2, विटामिन बी 12, पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे कई आवश्यक पोषक तत्व होते हैं. दही का एक फायदा यह है कि इससे पेट हल्का रहता है और दूध की तुलना में पचने में आसान होता है. इसके अलावा भी दही के बहुत सारे फायदे है, जिनके बारे में आपको जानने की जरूरत है|आप में कुछ लोग ऐसे भी होंगे, जिन्हें दही खाना पसंद न हो, लेकिन दही के बेहतरीन फायदे जानने के बाद शायद आपकी राय बदल जाए|

दही पाचन अच्छा रखने में मदद करता है

रोजाना दही खाने से पाचन अच्छा रहता है और जिन लोगों को पेट की परेशानी जैसे अपच और कब्ज जैसी समस्याएं रहती हैं उनके लिए फायदेमंद साबित होता है|

वजन घटाने में भी मदद करता है

जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उन्हें आपनी डाइट में दही शामिल करना चाहिए. दही में कैल्शियम की काफी मात्रा होती है. कैल्शियम कोर्टिसोल के निर्माण को रोकता है, जो शरीर को वजन बढ़ाने से रोकता है|

सेवन करने से होते हैं ये फायदे, बड़े की काम का होता है नारियल

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नारियल का सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है, नारियल के साथ ही इसका पानी और तेल भी काफी गुणकारी होता है। आपको बता दें कि नारियल में पाए जाने वाले खनिज और विटामिन बहुत ही गुणकारी होते हैं जो व्यक्ति को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं। आइए जानते हैं नारियल के इन गुणों के बारे में ………

अगर रोज रात को नारियल का एक टुकड़ा खाया जाए तो इससे पेट की समस्याओें से छुटकारा मिलता है।

जिन लोगों को नकसीर यानि नाक से खून आने की समस्या होती है उनके लिए कच्चा नारियल बहुत ही फायदेमंद होता है। आपको बता दें कि कुछ लोगों को ज्यादा गर्मी बर्दाश्त नहीं होती है और नाक से खून आने लगता है। ऐसे में इन लोगों को कच्चे नारियल के साथ मिश्री खाने से फायदा होता है ।

नारियल कोलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल करता है जिससे दिल मजबूत होता है और इसे खाने से खून साफ होता है। नारियल का सेवन करने से दिल की बीमारी होने का खतरा कम रहता है।

जिन लोगों को नींद की समस्या होती है यानि रात को ठीक से नींद नहीं आती है उन्हें रात को सोने से पहले नारियल पानी का सेवन करना चाहिए। वहीं नारियल खाने से स्किन की एलर्जी भी दूर होती है।

नारियल का तेल बालों के लिए काफी फायदेमंद होता है, बालों में नारियल का तेल लगाने से बाल लंबे, काले और मजबूत होते हैं। जिन महिलाओं के बाल झड़ते हैं उनके लिए तो नारियल का तेल बहुत ही लाभकारी होता है। इससे बाल झड़ने बंद हो जाते हैं।

छत्तीसगढ़ : बिलासपुर वोटिंग में फिसड्डी : रायगढ़ ने मारी बाजी

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छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव के तीनों चरणों की सभी 11 सीटों पर 71.48 प्रतिशत वोटिंग हुई। जबकि 2014 के लोकसभा में 69.39 प्रतिशत वोट पड़े थे, जो इस बार 2.09 प्रतिशत अधिक वोट पड़े। रायगढ़ लोकसभा सीट पर 77.70 प्रतिशत के साथ यहां सर्वाधिक मतदान हुआ। वहीं बिलासपुर 64.36 प्रतिशत सभी लोकसभा सीटों में सबसे कम वोट पड़ा। वहीं रायगढ़ लोकसभा के विधानसभा क्षेत्र लैलूंगा में 81.78 प्रतिशत सर्वाधिक मत पड़े। इसके अलावा सबसे न्यूनमतम मत प्रतिशत 42.20 रहा। ज्ञात हो कि अभी तक बीते प्रथम चरण में 66.04 प्रतिशत मतदान हुआ था। जबकि 2014 में 59.32 प्रतिशत वोट पड़ा था। दूसरे चरण में इस बार 74.95 प्रतिशत और 2014 में 73.02 प्रतिशत मत पड़े।

प्रदेश के बीते विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में वोटिंग के प्रतिशत में इजाफा

लोकसभा और विधानसभा चुनाव के वोटिंग प्रतिशत के लिहाज से इजाफा हुआ है। 2009 विधानसभा चुनाव में 55.29 प्रतिशत, 2013 विधानसभा चुनाव में 77.42 प्रतिशत और बीते विधानसभा चुनाव में 76.60 प्रतिशत वोटिंग हुई। यही हाल लोकसभा चुनाव में भी रहा। पिछले लोकसभा 2014 की तुलना में सभी तीनों चरणों में 2.09 प्रतिशत अधिक वोटिंग हुई।

11 लोकसभा सीटों की तुलानात्मक वोटिंग प्रतिशत

लोकसभा 2014 2019

1-सरगुजा 77.97 77.29

2-रायगढ़ 76.86 77.70

3-जांजगीर चाम्पा 61.55 65.57

4-कोरबा 74.13 75.34

5-बिलासपुर 63.13 64.36

6-दुर्ग 67.89 71.66

7-रायपुर 65.70 65.99

8-बस्तर 59.32 66.04

9-महसमुंद 74. 61 74.03

10-राजनांदगांव 74.04 76.03

11-कांकेर 70.22 74.23

कोरबा लोकसभा के छह बूथों पर सौ फीसदी पड़े वोट

कोरबा लोकसभा के छह बूथों पर सौ फीसदी मत पड़े। मुख्य निर्वाचन अधिकारी सुब्रत साहू ने बताया कि यहां के इलाकों दूरस्थ थे, इसलिए चार से 10 वोटरों के लिए भी बूथ बनाए गए थे। कोरबा के भरतपुर सोनहट के बूथ क्रमांक 224 बैरागी, 143 सेरडांड, 184 पलारीडांड, 148 कुर्थी, 157 उढानी और बैकुण्डपुर विधानसभा के बूथ नंबर 74 गिरजापुर में सौ फीसदी वोट पड़े।

इन लोकसभा के बूथों पर सर्वाधिक महिला वोटरों ने डाले वोट

कोरबा लोकसभा के भरतपुर सोनहट के निगनोहर, गिरधेर, सेरडांड, रेवाला, मझगांव खुर्द सौ फीसदी वोट पड़े। वहीं जीरागांव और राजाआमा में 99 फीसदी वोट पड़े।

छत्तीसगढ़ : चुनाव खत्म, राजस्व वसूली अब तेजी से

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लोकसभा चुनाव के खत्म होते ही हाऊसिंग की योजनाओं में राजस्व वसूली के लिए पॉलिसी बदली जाएगी। करोड़ों रुपये के बकाया शेष रहने के कारण सरकार पुरानी योजनाओं में नए सिरे से काम करेगी। वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि संबंधित अधिकारियों को इसके लिए टारगेट भी दिया जाएगा। हाऊसिंग की योजनाओं में बड़ी लागत से निर्माण हुए हैं लेकिन राजस्व जुटाने के मामले में अफसर काफी पिछड़ गए हैं। हाऊसिंग की योजनाओं में ही भू-भाटक खर्च का बड़ा हिस्सा जाम हो गया है। आरडीए और हाऊसिंग बोर्ड में वित्तीय संकट की स्थिति बनी हुई है। दरअसल हाऊसिंग बोर्ड में आठ साल रजिस्ट्री के नियम से बेचे गए प्लाट के पैसे ही नहीं वसूल हो पाए हैं। विभाग ने नियम तो बदला है लेकिन जिनके नाम पर रजिस्ट्री कराई वहां पर निर्माण लागत की राशियां जाम है। रायपुर विकास प्राधिकरण ने भी लीज में करोड़ों रुपये की प्रापर्टी व्यवसायिक आयोजनों के लिए दे रखी है लेकिन उसका भी समय पर भुगतान नहीं हुआ है। भू-भाटक राशि के रूप में ही पिछले साल 20 करोड़ रुपये बकाया होने की जानकारी है। हालांकि अधिकारियों का कहना है रिकवरी एजेंट रखने के बाद स्थिति सुधरी है। हालांकि समय पर लक्ष्य पूरा नहीं कर सके।

छत्तीसगढ़ : लोक कलाकृति रहे जिंदा, महिलाएं-युवतियां सीख रहीं गोदना व मधुबनी आर्ट

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रंगायन द्वारा आयोजित बैरनबाजार समर कैंप में बड़ी संख्या में बच्चों के साथ महिलाएं व युवतियां लोक कलाकृति सीखने आ रही हैं। एक महीने तक चलने वाले इस कैंप में रोज अलग-अलग कलाकृति बनाना सिखाया जा रहा है। प्रशिक्षार्थी उत्साह से हिस्सा ले रहे हैं। बुधवार को कैनवास पर प्राकृतिक सौंदर्य के साथ कई मनोरम दृश्य बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही साड़ी और दुपट्टे पर क्लॉथ पेंटिंग व एंब्रॉयडरी करना बताया गया। इसके तहत युवतियां और महिलाओं ने फैब्रिक पेंट से ट्राइबल आर्ट बनाया। प्रमुख रूप से गोदना आर्ट व मधुबनी आर्ट बनाना सीखा। संस्था की संस्थापक जयश्री भगवानानी ने बताया कि कैंप में छोटे-बड़े सभी वर्ग को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विभिन्ना कलाओं में उन्हें पारंगत किया जाएगा। प्रशिक्षणार्थियों की संख्या को देखते हुए प्रशिक्षण की अवधि को बढ़ाने की बात चल रही है। एक मई तक प्रस्तावित कैंप को 15 मई तक चलाया जा सकता है। इससे महिलाएं एंब्रॉयडरी और कपड़े पर पेंटिंग की कला में निपुण हो जाएंगी। कैंप सुबह 10 से दोपहर 12 तक और शाम को 4 से 6 बजे तक चल रहा है।

42 दिन में की 89 सभाएं, उड़नखटोले में खूब उड़े CM भूपेश बघेल

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 आचार संहिता लगने के बाद 11 मार्च से तीसरे चरण के मतदान का प्रचार 21 अप्रैल को थमने तक मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 89 चुनावी सभाएं की। मुख्यमंत्री ने किराए के हेलीकॉप्टर से हर लोकसभा क्षेत्र का दौरा किया। केवल चुनावी सभाएं ही नहीं, उन्होंने नामांकन रैली, रोड शो और संवाद भी किया। 42 दिनों के धुआंधार प्रचार में मुख्यमंत्री ने 105 चुनावी कार्यक्रम किए।

जहां भाजपा के प्रत्याशियों का प्रचार करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अध्यक्ष अमित शाह समेत सात फायरब्रांड नेता छत्तीसगढ़ आए, वहीं कांग्रेस का मोर्चा मुख्यमंत्री ने संभाले रखा। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी अंतिम चरण में आए और केवल दो चुनावी सभा करके चले गए। पंजाब के मंत्री नवजोत सिद्धू को भेजा गया था, लेकिन मौसम और हेलीकॉप्टर ने उन्हें दगा दे दिया। उनकी छह सभाएं रखी गई थीं, लेकिन दो में ही पहुंच पाए।

दुर्ग लोकसभा क्षेत्र की नौ विधानसभा सीटों में से आठ में कांग्रेस का कब्जा है, इसके बाद भी मुख्यमंत्री को सबसे ज्यादा दुर्ग लोकसभा की चिंता रही। उन्होंने दुर्ग लोकसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा 18 सभाएं की। इसका कारण यह है कि मुख्यमंत्री का विधायकी क्षेत्र पाटन इसी लोकसभा क्षेत्र में आता है, इसलिए जाहिर तौर पर उनकी प्रतिष्ठा इस सीट पर दांव पर लगी है।

दुर्ग लोकसभा सीट जितना कांग्रेस के लिए और ज्यादा जरूरी है, क्योंकि इसी लोकसभा क्षेत्र से साजा विधायक व मंत्री रवींद्र चौबे, दुर्ग ग्रामीण विधायक व मंत्री ताम्रध्वज साहू और अहिवारा विधायक व मंत्री गुरु स्र्द्र कुमार भी हैं। साहू तो दुर्ग के सांसद भी थे, मंत्री बनने के बाद सांसद का पद छोड़ा।

मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी की भी दो में से एक सभा वैशालीनगर विधानसभा क्षेत्र में करा दी। मतलब, दुर्ग में ताकत झोंकने में मुख्यमंत्री ने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। विधानसभा सीट के आधार पर बात की जाए, तो दुर्ग लोकसभा क्षेत्र की नौ विधानसभा सीटों में से आठ में कांग्रेस का कब्जा है।

बिलासपुर में चुनौती ज्यादा थी, इसलिए 10 सभा की

बिलासपुर लोकसभा की आठ में से चार विधानसभा सीट में भाजपा का कब्जा है। दो सीट कांग्रेस और दो सीट जकांछ के पास है। यहां कांग्रेस के लिए चुनौती ज्यादा रही और प्रत्याशी अटल श्रीवास्तव मुख्यमंत्री के करीबी भी हैं, इसलिए भूपेश ने इस सीट में 10 सभा की। रोड शो भी किया। राहुल की सभा भी कराई।

महंत की प्रतिष्ठा के लिए कोरबा में सात सभा, दो रोड शो

कोरबा लोकसभा क्षेत्र में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत की पत्नी ज्योत्सना महंत प्रत्याशी थीं, इसलिए महंत की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री ने सात चुनावी सभा और दो रोड शो किए। 2009 में यहां से कांग्रेस के टिकट पर महंत चुनाव जीते थे, कांग्रेस इस पर वापस कब्जा करना चाहती है।

नक्सल प्रभावित तीन सीटों पर बराबर फोकस किया

नक्सल प्रभावित बस्तर, कांकेर और राजनांदगांव लोकसभा सीटों को बराबर फोकस किया। कांग्रेस राजनांदगांव जीतकर कांग्रेस पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के गढ़ में सेंध लगाना चाहती है। वहीं, बस्तर की आठ में सात और कांकेर की आठों विधायक कांग्रेस के हैं, इसलिए प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। तीनों सीटों पर कांग्रेस लंबे अरसे से लोकसभा चुनाव नहीं जीती है।

बसपा की चुनौती को देखकर जांजगीर में लगाया जोर

जांजगीर लोकसभा क्षेत्र में बसपा का प्रभाव है। यहां की आठ में से पांच विधानसभा सीट कांग्रेस, दो भाजपा और एक बसपा के पास है। बसपा की चुनौती को देखकर मुख्यमंत्री ने जांजगीर में जोर लगाया। उन्होंने एससी वोट को कांग्रेस की झोली में लाने की कोशिश की। सभा के अलावा रोड शो भी किया।

मंत्री के दावेदारों पर छोड़ा महासमुंद और रायपुर को

अभी मंत्री की एक कुर्सी खाली है। मुख्यमंत्री ने दो सीट महासमुंद व रायपुर को तीन दावेदार धनेंद्र साहू, अमितेष शुक्ल व सत्यनारायण शर्मा के भरोसे छोड़ दिया था। इस कारण खुद कम सभाएं की। महासमुंद से साहू खुद चुनाव मैदान में हैं। अगर, सांसद बन जाते हैं, तो मंत्री की दौड़ से बाहर हो जाएंगे। शुक्ल को मंत्री बनाया जा सकता है। यदि, रायपुर जीते तो शर्मा को मौका मिल सकता है।

सरगुजा तो पहले से सिंहदेव के हवाले

सरगुजा लोकसभा सीट को मुख्यमंत्री ने पहले ही मंत्री टीएस सिंहदेव के हवाले कर दिया था। इस कारण वहां बघेल ने दूसरी सीटों के मुकाबले ज्यादा ध्यान भी नहीं दिया। दूसरा कारण यह है कि सरगुजा लोकसभा की सभी आठ विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है, इसलिए भी मुख्यमंत्री ज्यादा चिंतित नहीं रहे। राज्य बनने के बाद यहां कांग्रेस लोकसभा चुनाव नहीं जीती है।

रायगढ़ में छह सभा और रोड कर बनाया माहौल

रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र की आठों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है, लेकिन यहां धर्मजयगढ़ विधायक और लोकसभा प्रत्याशी लालजीत सिंह राठिया की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी, इसलिए मुख्यमंत्री ने छह सभाएं और रोड शो करके कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की।

दुर्ग में सबसे ज्यादा, रायपुर में सबसे कम सभा

– दुर्ग-18

– बिलासपुर-10

– जांजगीर-09

– राजनांदगांव-08

– बस्तर-08

– कांकेर-08

– कोरबा-07

– रायगढ़-06

– महासमुंद-06

– सरगुजा-05

– रायपुर-04

सीएम की सभाएं, रैली और रोड शो

0 आमसभा-89

0 रोड शो-07

0 नामांकन रैली-06

0 आय पर चर्चा-02

0 युवा संवाद-01

चेकबुक के लिए नहीं जाना होगा बैंक, ATM से ऐसे करें आवेदन

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चेक बुक ऑर्डर करने के लिए अब बैंक खातेदारों को बैंकों की दौड़ लगाने की आवश्यकता नहीं है। अगर आप पुरानी चेक बुक का इस्तेमाल कर चुके हैं और नई चेक बुक की जरूरत है तो हम आपको आसान तरीका बता रहे हैं। देश के बहुत से प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर के बैंक बिना ब्रांच में जाए चेक बुक ऑर्डर करने की अनुमति देते हैं। बैंक के अनुसार आप अपने बैंक के एटीएम में जाकर चेक बुक के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा इंटरनेट बैंकिंग, फोन बैंकिंग और मिस्ड कॉल बैंकिंग से भी चेक बुक मंगा सकते हैं।

ऐसे ऑर्डर करें नई चेक बुक के लिए

एटीएम

बैंक के एटीएम में जाएं और अपना एटीएम-डेबिट कार्ड डालें स्वाइप करें। फिर चार अंकों का डेबिट कार्ड का पिन नंबर दर्ज करें। अब मोर ऑप्शन या सर्विस के विकल्प का चयन कीजिए। इसके बाद चेक बुक रिक्वेस्ट ऑप्शन को ढूंढ़कर उसका चयन कीजिए। कई एटीएम 25 से 100 तक की संख्या वाली चेक बुक के लिए पूछते हैं। बैंक चेक बुक की फीस लेगा, जो आपके अकाउंट से काट ली जाएगी। चेकबुक 3 से 4 वर्किंग डे में ग्राहक के रजिस्टर्ड पते पर पहुंचा दी जाएगी।

इंटरनेट बैंकिंग

बैंक की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं। नेट बैंकिंग यूजर आइडी और पासवर्ड डालकर लॉग इन कीजिए।’प्रोडक्ट एंड सर्विस” या ‘कस्टमर सर्विस” ऑप्शन में ‘चेक बुक रिक्वेस्ट’ का ऑप्शन ढूंढ़कर उस पर क्लिक कीजिए। उस अकाउंट का चयन कीजिए, जिसके लिए चेक बुक चाहिए और उस संख्या का चयन कीजिए जो आपको चेक बुक में चाहिए। चेक बुक रिक्वेस्ट दाखिल करने के लिए ‘सबमिट” पर क्लिक कीजिए।

फोन बैंकिंग / एसएमएस बैंकिंग

अपने बैंक के टोल-फ्री नंबर पर एसएमएस बैंकिंग सर्विस के लिए रजिस्टर्ड कीजिए। बैंक की वेबसाइट पर दिए गए नंबर पर एक तय फॉर्मेट में चेक बुक रिक्वेस्ट का मैसेज भेजें। इसी के साथ चेक बुक के लिए मिस्ड कॉल बैंकिंग ऑप्शन का चयन भी किया जा सकता है। चेक बुक रिक्वेस्ट पूरी होने के बाद कुछ कार्य दिवसों में चेक बुक भेज दी जाएगी।

बैंकिंग एप

बैंक मोबाइल एप में अपने चार अंकों का पिन कोड डालकर लॉग इन कीजिए। सर्विस पर क्लिक करें और ‘चेक बुक सर्विसेज” ऑप्शन को ढूंढ़ें, फिर ‘इश्यू चेक बुक’ का चयन करें। उस अकाउंट नंबर का चयन कीजिए जिसके लिए आपको चेक बुक की जरूरत है और ‘सबमिट’ पर क्लिक कीजिए।