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छत्तीसगढ़ : अग्रवाल समाज ने डीकेएस हॉस्पिटल में दाऊ कल्याण सिंह की मनाई जयंती

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 दाऊ कल्याण सिंह हॉस्पिटल (डीकेएस) में गुरुवार को अग्रवाल समाज की ओर से दाऊ कल्याण सिंह की जयंती मनाई गई। समाज के लोगों ने पूजा अर्चना कर जयंती मनाई और  दाऊ कल्याण सिंह के कार्यो को याद किया। बता दें कि प्रदेश में जहां डीकेएस हॉस्पिटल बनाया गया है वह जमीन दान में दाऊ कल्याण सिंह ने दी थी। इस वजह से दाऊ कल्याण सिंह के नाम से अस्पातल बनाया गया।

वहीं दाऊ कल्याण सिंह की प्रतिमा भी अस्पताल परिसर में लगाई गई ताकि प्रदेशवासियों को उनकी दानशीलता और परोपकारी कार्य का पता चले। दाऊ कल्याण सिंह ने प्रदेश की जनता के लिए अस्पताल बनवाने के लिए सरकार को जमीन दी थी। जयंती के अवसर पर अस्पताल के डॉक्टर, स्टॉफ सहित मरीज शामिल हुए।

दबंग सलमान के अख्तर ‘चचा’ भोपाल में काट रहे मुफलिसी के दिन

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 सलमान खान इन दिनों महेश्वर में दबंग-3 फिल्म की शूटिंग कर रहे हैं। नेकदिल ‘बीर्इंग ह्यूमन’ सलमान खान के बारे में मशहूर है कि वो जरूरतमंदों की मदद करते हैं। पीपुल्स समाचार आपको मिलवा रहा है 72 वर्षीय अख्तर चचा से। वह सलमान की मां सलमा को मुंबई से इंदौर लेकर आए थे जब सलमान पैदा होने वाले थे। वे सलमान के साथ बचपन से ‘मैंने प्यार किया’ फिल्म की रिलीज तक साथ रहे। खानसामा अख्तर सलमान के पिता सलीम से लेकर सभी घरवालों के चहेते थे। सलमान इनके हाथ के आलू के पराठे खाकर बड़े हुए। बीमार होने के कारण अख्तर मियां भोपाल आ गए थे। यहां वे मुफलिसी के दिन काट रहे हैं। चाहते हैं कि इंतकाल से पहले सलमान से मिल पाएं। सलमान खान को भी नहीं पता कि वे जीवित हैं भी या नहीं। पीपुल्स समाचार की मंशा है कि इस स्टोरी के जरिए सलमान को यह पता चले कि उनके चहेते अख्तर चचा जीवित हैं और भोपाल में हैं।

कभी सलमान के परिवार के साथ रहते थे, अब भोपाल में गुड़ बेचकर कर रहे बसर

भोपाल की तंग गलियों में एक छोटे से कमरे में अपनी जिंदगी गुजार रहे, पेट भरने के लिए गुड़ बेच रहे अख्तर मियां ने बताया कि वे बचपन में रायसेन के पास हमीद खां खंडेरे वाले के यहां काम करते थे। हमीद खां सलीम खान के बहनोई थे। जब हमीद खां खंडेरे वाले इंदौर में बस गए। तब वह इंदौर से सलीम खान साहब के कहने पर मुंबई चले गए। जब सलमान खान का जन्म भी नहीं हुआ था। सलीम खान की पत्नी सलमा को डिलीवरी के लिए इंदौर लाया गया था। सलमान उनके पेट में थे। तब वह उनके साथ आए थे। इंदौर पलासिया में सलमान खान का जन्म हुआ। सलमान के जन्म के बाद उनकी देखरेख की जिम्मेदारी अख्तर पर ही थी।

RLD अध्यक्ष अजीत सिंह का मोदी पर हमला, कहा – अगर श्रीलंका गए होते तो कहते रावण को मैंने ही मारा

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राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के अध्यक्ष अजीत सिंह ने चुनावी सभा के दौरानपीएम मोदी पर जमकर हमला बोला। इस दौरान अजीत सिंह अपनी जुवांन पर बेकाबू दिखे। उन्होंने पीएम मोदी को लेकर विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा- ये कभी झूठ नहीं बोलता… बस इसने आज तक सच नहीं बोला। बच्चों को कहते हैं सच बोला करो, लेकिन इनके मां-बाप ने कभी सच बोलना नहीं सिखाया

दरअसल अजीत सिंह बागपत में एक चुनानी सभा को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने पीएम मोदी पर जमकर जुवानी हमले किए।उन्होंने तीन तलाक का मुद्दा उठाते हुए कहा किवैसे तो महिलाओं के पक्षधर हैं, तीन तलाक तीन तलाक करते हैं… लेकिन अपनी पत्नी को बिना तलाक बोले और छोड़ दिया।

अजीत सिंह ने इसके आगे कहा कि ये इतना बड़ा झूठा है कि अगर श्रीलंका चला जाए को वापस आने पर कहेगा कि रावण को मैने मारा। उस समय भी कहता कि इस काम को कोई नहीं कर सकता जिसे मैने कर दिखाया।अजीत सिंह ने पीएम मोदीके निजी जीवन को लेकर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी पत्नी को एक बार भी तलाक नहीं बोला और छोड़ दिया।

बता दें कि बागपत रालोद की परंपरागत सीट मानी जाती है। जिससे अजीत सिंह के बेटे ओर रालोद नेता जयंत चौैधरी चुनावी मैदान में हैं। इससे पहले खुद अजीत सिंह इस सीट से कई बाद चुनाव लड़ चुके हैं।2014 में अजित सिंह को यहां से भाजपा प्रत्याशी डॉ. सत्यपाल सिंह ने हराया था।

गौरतलब है कि इसके अलावा अजीत सिंह ने बागपत की ही एक अन्य सभा में कहा कि अब नफरत की राजनीति खत्म होती जा रही है। इसके अलावा अजीत सिंह ने सीएम योगी पर भी जमकर हमला किया। उन्होंने कहा कि इन दोनों की क्या जोड़ी है पहले मूर्तिया बनवाते हैं , फिर पूजा करते हैं। फिर दंगे करवाते हैं।

BJP को भारी पड़ा ‘स्कर्ट वाली बाई’ कहना, EC पहुंचा मामला

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लोकसभा चुनाव (Loksabha Election)में प्रचार के बीचबदसलूकी का चलन भी पूरे जोर पर है। पिछले दिनों बीजेपी (BJP) के नेता जयकरण गुप्ता (Jayakaran Gupta) कांग्रेस महासचिव (CongressGeneral Secretary)प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी देते नजर आए थे। उनके द्वारा प्रियंका गांधी को स्कर्ट वाली बाई (Skirt wali baai) का मामला अब चुनाव आयोग (Election Commission) तक पहुंच गया है।

प्रियंका के लिए बीजेपी नेताद्वारा आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल पर कांग्रेस ने चुनाव आयोग को शिकायत दर्ज करवाई है। बता दें किबीजेपीनेता जयकरण गुप्ता मेरठ में ये कहते नजर आए थे कि कांग्रेस के नेता तो बड़ी जोर जोर से बोलते हैं कि अच्छे दिन आए?

उन्हें अच्छे दिन दिखाई नहीं देते। अरे! स्कर्ट वाली बाई साड़ी पहनकर मंदिर में शीश लगाने लगी हैं, गंगाजल से परहेज करने वाले लोग गंगाजल का आचमन करने लगे। मेरठ में रैली में दिया गए इस बयान वाले कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी मौजूद थे।

बाद में इस मामले पर सफाई देते हुएजयकरण गुप्ता ने कहा कि मैंने किसी पर टिप्पणी नहीं की है। मैंने त कहा था स्कर्ट वाली जिनको मंदिर जाने से परहेज था वह साड़ी पहनकर मंदिर मंदिर जा रही हैं और ऐसा बहुत लोग कर रहे हैं।

मुंगेली: सरकारी खजाना खाली होने पर गरमाई राजनीति, 34 करोड़ रुपए के बिल ट्रेजरी में अटके

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छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिला कोषालय (ट्रेजरी) में बिल भुगातन की स्थिति काफी खराब है. यहां 34 करोड़ रुपए के बिल अटके पड़े हैं. सरकारी खजाना खाली को सर्वर बंद होने का बहाना बताकर इन भुगतानों को टाला जा रहा है. साथ ही बिल अब संबंधित विभागों को वापस भी कर दिए गए हैं. मुंगेली ट्रेजरी कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक 1379 बिल वापस कर दिए गए हैं. इन बिलों में करीब 34 करोड़ की राशि का भुगतान होना है, जिसे लेकर अब राजनीति भी तेज हो गई है.

कांग्रेस और बीजेपी के पदाधिकारी इसके लिए एक-दूसरे की सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. बीजेपी के महामंत्री राणा प्रताप ने इसे कांग्रेस सरकार की नाकामी बताई है. साथ ही ये कहा है कि प्रदेश में पहली बार ऐसी स्थिति निर्मित हुई है. भूपेश सरकार फेल हो चुकी है.

वहीं कांग्रेस प्रवक्ता अरविंद वैष्णव ने कहा कि बीजेपी री सरकार ने 15 साल में इतना भ्रष्टाचार किया है, जिसकी वजह से कोषालय खाली हुआ है. वहीं प्रदेश और मुंगेली में ऐसी स्थिति पहली बार बनी है. कोषालय में राशि नहीं होने से जिला जनपद पंचायत, स्वास्थ्य विभाग, कलेक्ट्रेट, चुनाव कार्यों के भुगतान और विभिन्न निर्माण कार्यों के भुगतान महीनों से लंबित हैं. इससे संबंधित लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

वहीं जिम्मेदार अधिकारी इस संबंध में कुछ भी कहने से मना कर रहे हैं. केवल सर्वर का बहाना बनाते हुए सर्वर को ही जिम्मेदार बताते रहे हैं.

फायदे में रहने के लिए जरूर पढ़ें यह खबर, अप्रैल महीने की पहली तारीख से ही बदल चुके हैं ये 5 नियम

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केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2019 की शुरूआत के साथ ही एक अप्रैल से नियमों में पांच बड़े बदलाव किए हैं। नियमों में बदलाव का सीधा असर आम आदमी के आमदनी में बढ़ोतरी तथा सुविधाओं में सहूलियत के रूप में दिखेगा। तो देर किस बात की, आइए जानें सरकार ने वे कौन कौन से बड़े बदलाव किए हैं।

1- ट्रेन छूट जाने पर टिकट की रकम हो सकेगी रिफंड

एक अप्रैल से अगर आपकी कनेक्टिंग ट्रेन छूट जाती है तो आपके टिकट की धनराशि रिफंड हो जाएगी। आप आसानी से रेलवे के दो पीएनआर लिंक कर पाएंगे। बता दें कि दोनों टिकटों में यात्री की जानकारी एक जैसी होनी चाहिए, तभी टिकट की रकम रिफंड हो सकेगी। ये नियम रेलवे टिकट के सभी क्लासों में मान्य है।

2- एक अप्रैल से घर खरीदना हो जाएगा सस्ता

जीएसटी काउंसिल ने घर खरीदने वालों के लिए एक अप्रैल से नई दरें लागू करने के आदेश दिए हैं। इन नियमों के तहत अंडर कंस्ट्रक्शन मकानों पर 12 फीसदी की जगह अब 5 फीसदी जीएसटी लगेगा। वहीें अफोर्डेबल घरों की श्रेणी पर जीएसटी दर 8 फीसदी से घटाकर 1 फीसदी कर दी गई। ऐसे में घर खरीदने वालोें के लिए यह फायदे का सौदा रहेगा।

3- नौकरी बदलने पर अपने आप ट्रांसफर होगा पीएफ

ईपीएफओ के नए नियमानुसार नौकरी बदलने पर आपके पीएफ का पैसा स्वत: ही ट्रांसफर हो जाएगा। इससे पहले ईपीएफओ के सदस्यों को यूएन रखने के बाद भी पीएफ ट्रांसफर करने के लिए अलग से आवेदन करना पड़ता था। नए नियम से अब पीएफ अकाउंट सुविधायुक्त हो चुका है।

4- ऋण ब्याज दरों को लेकर होंगे अहम बदलाव

एक अप्रैल से अब बैंक लोन सस्ता हो सकता है। सभी बैंक अब एमसीएलआर के बजाय, आरबीआई के रेपो रेट के आधार पर लोन देंगे। ऐसे में रिजर्व बैंक के रेपो रेट कम करने पर बैंकों को भी तुंरत ब्याज दर घटानी होगी। इस नए नियम से अब सभी तरह का कर्ज सस्ता होने की पूरी उम्मीद है। अभी तक बैंक खुद ही तय करते रहे हैं कि ब्याज दर कब बढ़ानी या घटानी है।

5- पांच लाख रुपए तक की आय पर इनकम टैक्स फ्री

सरकार के नए नियमानुसार पांच लाख रुपए तक की आय पर इनकम टैक्स फ्री होगा। मतलब साफ है 5 लाख रुपये तक की आय टैक्स छूटे के दायरे में आएगी। पहले इनकम टैक्स छूट की यह रकम 4 लाख रुपए थी, जिसे बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर दिया गया है।

मिला यह जवाब जब आप विधायक अलका लांबा ने लोगों से पूछा-छोड़ दूं ‘आप’

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आम आदमी पार्टी (आप) के दो विधायकों सौरभ भारद्वाज व अलका लांबा के बीच मंगलवार देर रात तक चली ट्विटर वॉर के अगले दिन बुधवार को जामा मस्जिद इलाके में नुक्कड़ सभा बुलाई गई। अलका लांबा की तरफ से बुलाई गई इस सभा में उन्होंने कांग्रेस में जाने या आप में बने रहने पर लोगों की राय ली। दिलचस्प यह है कि सभा में मौजूद लोगों ने आप छोड़ने के बारे में नकारात्मक राय दी। अलका लांबा का कहना था कि सौरभ भारद्वाज ने सभा में आने का वादा किया था, लेकिन वह मौके पर नहीं आए।

अलका लांबा ने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी ने चार साल में दूसरी बार उनसे इस्तीफा मांगा है। बकौल अलका लांबा, आज वह लोगों के बीच एक बात लेकर आईं हैं। 

उन्होंने कहा कि 20 साल तक कांग्रेस में रहने के बाद दिल्ली में भाजपा को हराने के लिए वह आप में शामिल हुईं, लेकिन आज कुछ लोग उनसे ही लड़ रहे हैं। आप के लोग बार-बार इस्तीफा मांग रहे हैं। इसकी वजह यह है कि वह पार्टी में लोकतंत्र की बात कर रहीं हैं।अलका लांबा ने बताया कि सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर इस्तीफा मांगा था। इससे साबित होता है कि आंतरिक लोकतंत्र खत्म हो गया है। सौरभ भारद्वाज ने सभा में आने का देर रात वादा किया था, लेकिन वह नहीं आए। उनसे पूछा जाना चाहिए कि सोशल मीडिया के वादे को उन्होंने पूरा क्यों नहीं किया।

आप ने विधायकों का निजी मामला बताया
उधर, दो विधायकों की सोशल मीडिया की तकरार को आप ने उनका निजी मामला करार दिया है। दिल्ली प्रदेश संयोजक गोपाल राय का कहना है कि सोशल मीडिया पर दो विधायक आपस में कुछ लिख रहे हैं। 

यह दोनों का निजी मामला है। वक्त आने पर आप इस मसले को संज्ञान में लेगी। इस तरह की बातचीत का चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इस पर अलका लांबा का कहना है कि दिल्ली प्रदेश के मुख्य प्रवक्ता का बयान निजी कैसे हो सकता है।

गोलमोल बातों से सीधे-सीधे सवाल नहीं होते : सौरभ

विधायक सौरभ भारद्वाज का कहना है कि बुधवार दोपहर दो बजे याचिका समिति के 11 मामलों की सुनवाई थी। अध्यक्ष होने के नाते बैठक में उनका मौजूद रहना जरूरी था। अगर खाली भी होता तो उनका (अलका) भाषण सुनने नहीं जाता। 

जनमत कराने के लिए इच्छा शक्ति और साफ नीयत की जरूरत होती है। गोलमोल बातों से सीधे-सीधे सवाल नहीं होते। सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि अगर अलका कांग्रेस में जाएंगी, तो भी अनुशासन से काम करना होगा। आज सच्चाई देखकर उनमें सकारात्मक परिवर्तन और धैर्य की उम्मीद है।

लोकसभा चुनाव 2019 : नागपुर-गोंदिया सियासत पर सट्टा

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देश में बीजेपी के वापसी का दावा

गोंदिया: देशभर में 2019 के लोकसभा चुनावों को लेकर प्रचार अभियान तेज है। पहले चरण के लिए 20 राज्यों की 91 सीटों पर 11 अप्रैल को मतदान होना है। लेकिन चुनाव नतीजे आने से पहले ही तमाम तरह की अटकलें लगने लगी है। क्रिकेट पर सट्टा स्वीकार करनेवाले बुक्की अब चुनावी दौर में सियासत पर भी सट्टा स्वीकार करने में जुट गए है। गोंदिया तथा नागपुर के 3 बुक्कीयों ने दावा किया कि, देश में बीजेपी की वापसी हो रही है? सट्टा लगाने के शौकिन भी सबसे अधिक सियासत का दांव एनडीए गठबंधन पर ही खेल रहे है।

महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश में बीजेपी का पलड़ा भारी, छत्तीसगढ़ में कांटे की टक्कर 
सट्टेबाजों के भविष्यवाणी की मानें तो, महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन का पलड़ा भारी रहेगा। इस बार कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस , रिपा, पिरिपा, खोरिपा महागठबंधन को महाराष्ट्र में 20 से 22 सीट मिलने का दुगना भाव दिया जा रहा है। सट्टा बाजार के मुताबिक , महाराष्ट्र में सबसे बड़ा सियासी नुकसान युपीए महागठबंधन को दलित वंचित आघाड़ी और बसपा-सपा के मैदान में उतरने से हो रहा है।

गोंदिया से सटे पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में सट्टा बाजार कांटे की लड़ाई दिखा रहा है। सट्टेबाजों की भविष्यवाणी है कि, दोनों को सीट बराबर की आएगी, इसलिए सट्टा बाजार दोनों को बराबर का भाव दे रहा है। गोंदिया से लगे पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश में विधानसभा का चुनाव हारने के बाद लोकसभा चुनाव में बीजेपी बड़े अंतर से जीत दर्ज कर वापसी कर रही है, एैसा सट्टेबाजों का दावा है।

यूपी में भाजपा को 30 से 40 सीट के नुकसान का अनुमान 
महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश इन 2 राज्यों में बीजेपी के पक्ष में दावे के बाद सट्टा बाजार उत्तरप्रदेश में बड़े बदलाव के संकेत दे रहा है। बुक्कीयों की मानें तो यहां बसपा-सपा और राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के महागठबंधन को फायदा पहुंच रहा है। वहीं इस गठबंधन की वजह से उत्तरप्रदेश में बीजेपी को 30 से 40 सीटों के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है, जिसकी भरपाई भाजपा उड़ीसा, पश्‍चिम बंगाल, नार्थ ईस्ट के राज्यों और कर्नाटक-केरल से कर सकती है तथा सरकार बनाने के लिए लगने वाला 272 सीट का जादूई आंकड़ा नरेंद्र मोदी बिना बैसाखियों की मदद से ही हासिल कर लेंगे तथा एनडीए में शामिल घटक दलों के साथ आपसी तालमेल कायम कर मोदी की सरकार फिर से बनती दिख रही है, एैसा सट्टा बाजार का अनुमान है। बहरहाल यह तो हुई सट्टाबाजार की भविष्यवाणी किन्तु असल परीक्षा का पिटारा तो 23 मई को खुलेगा, कितने नंबर किस पार्टी के खाते में आते है ? और किसके हाथ मे सत्ता की चाबी पहुंचती है ? यह देखना दिलचस्प होगा।

क्या इस बार गोंदिया में मोदी का जादू चलेगा? 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनाव के मुद्देनजर भाजपा उम्मीदवार के प्रचारार्थ आज 3 अप्रैल बुधवार को गोंदिया दौरे पर है। क्या इस बार मोदी का जादू गोंदिया सीट पर चलेगा? इसे लेकर तरह-तरह की अटकलों का बाजार गर्म है।

सट्टेबाजों की भविष्यवाणी मानें तो गोंदिया-भंडारा संसदीय क्षेत्र में एनसीपी (युपीए गठबंधन) को झटका लग सकता है? तथा मोदी के आने से माहौल पलटेगा और इसका फायदा भाजपा को होगा? वहीं एक सट्टेबाज का यह भी कहना रहा कि, मोदी के पूर्व की 2 जनसभाओं पर ऩजर डाले तो 2009 में भाजपा को यहां हार का सामना करना पड़ा वहीं अक्टू 2014 के विधानसभा चुनाव के दौरान प्र्रधानमंत्री मोदी ने इंदिरा गांधी स्टेडियम में एक ओर बड़ी रैली की लेकिन नतीजा बीजेपी के पक्ष में नहीं रहा। गोंदिया दौरे के बाद भी गोंदिया विधानसभा का बीजेपी उम्मीदवार 10 हजार 758 वोटों से चुनाव हार गया जबकि मोदी लहर के बावजूद गोंदिया सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार ने जीत की हैट्रिक मारी।

विधायक कृष्णा खोपड़े का बयान बोले- रिकॉर्ड वोटों से जनता जीताएगी नितिन गडकरी को

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नागपुर: शहर में लोकसभा मतदान करीब आने के साथ ही पार्टियों का प्रचार और रैलियों का दौर भी बढ़ रहा है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के प्रचार के लिए भाजपा के विधायक भी मेहनत कर रहे हैं. नागपुर टुडे ने भाजपा के विधायक कृष्णा खोपड़े से बातचीत की. खोपड़े ने बताया कि पूर्व नागपुर में प्रचार और रैलियां की जा रही है. लोगों से संपर्क बनाया जा रहा है. शहर के नागरिकों में गडकरी को लेकर काफी उत्साह का माहौल है. लोगों को विश्वास है कि भाजपा के कार्यकर्ता किसी भी समस्या का हल निकाल सकते हैं. नितिन गडकरी 2014 में चुनाव में खड़े थे.

उस समय गडकरी 2 लाख से ज्यादा मतों से जीतकर आए थे. 2014 से लेकर 2019 तक शहर में काफी काम हुए हैं. कांग्रेस के नेता के नाम से कोई भी बड़ा प्रोजेक्ट हो ऐसा कोई उदाहरण शहर में दिखाई नहीं देता है. गडकरी कहते हैं कि यह तो ट्रेलर है. इसका मतलब यह है कि उन्हें नागपुर शहर को देश का सबसे बेहतर शहर बनाना है. इस बार के चुनाव में पिछले बार से ज्यादा की मार्जिन से वे जीतकर आएंगे.

खोपड़े ने आगे कहा कि विपक्षी पार्टियों ने शहर की जनता का सुख दुःख नहीं जाना. शहर में विकास काम नहीं किए. इसलिए जनता उनको मतदान के जरिए ही सबक सिखाएगी. उनके भाषा शैली और उनके विचार काफी निचले स्तर के हो गए हैं. गडकरी ने काम किया इसलिए डंके की चोट पर वह यह बोलते हैं. मेट्रो ट्रैन शहर में लाई. झोपड़पट्टीवासियो को मालकी हक के पट्टे देने का कार्य सरकार की ओर से किया जा रहा है.

कांग्रेस के पास नागपुर से नेता ही नहीं था. गडकरी के सामने किसी भी कांग्रेसी नेता ने टिकट नहीं माँगा. इस शहर ने बड़े बड़े नेता दिए हैं, लेकिन अब गडकरी के सामने किसी भी नेता की हिम्मत नहीं हुई चुनाव लड़ने की. इसलिए भंडारा के व्यक्ति को नागपुर में उम्मीदवार के रूप में खड़ा किया है. जिसका नागपुर की जनता से कोई लेना देना नहीं है.

जाने ग्राउंड रिपोर्ट : संबित पात्रा के वायरल वीडियो और उज्ज्वला योजना का सच क्या है?

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रविवार को जब भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पुरी लोकसभा क्षेत्र से पार्टी के उम्मीदवार डॉ. संबित पात्रा ने अपने ट्विटर हैंडल पर चुनाव प्रचार के दौरान एक बूढ़ी औरत के घर खाना खाने का वीडियो पोस्ट किया तब उन्होंने कभी नहीं सोचा होगा कि इस वीडियो को लेकर ऐसा हड़कंप मचेगा और उनकी इतनी खिंचाई हो जाएगी.

इस वीडियो पर कई लोगों ने कहा कि ‘उज्ज्वला’ योजना की नाकामी का यह सबसे बड़ा सबूत यही है.

वीडियो में संबित पात्र खाना खाते हुए नज़र आए जबकि उनके पास बैठी उन्हें खाना खिलानेवाली महिला चूल्हे में रसोई करती दिखी. वीडियो देखने के बाद लोगों ने मान लिया कि घर में गैस न होने के कारण ही यह महिला लकड़ी के चूल्हे पर रसोई कर रही है.

इस वीडियो की सच्चाई की पड़ताल करने के लिए बीबीसी पुरी में उस महिला के घर पर पहुंची.

इससे पहले बीबीसी ने भारत सरकार के उस दावे की पड़ताल की थी कि ग्रामीण इलाकों के करीब एक करोड़ घरों में घरेलू गैस सिलेंडर पहुंचाने की उज्जवला योजना बेहद कामयाब रही थी.

बीबीसी जब पुरी में इस महिला के घर पहुंची तो पाया कि उनके घर में ‘उज्ज्वला योजना’ के तहत मिला गैस कनेक्शन है और उसका इस्तेमाल भी होता है.

पुरी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत डेलांग इलाके में रामचंद्रपुर गांव में रहनेवाली 62 वर्षीय इस महिला का नाम है उर्मिला सिंह.

चूल्हे में रसोई करने के बारे में पूछे जाने पर उर्मिला ने बीबीसी से कहा, “हमारे यहाँ पिछले एक साल से गैस है. लेकिन उसका इस्तेमाल मेरी बहू और बेटी करती है. मगर मैं चूल्हे में ही खाना बनाना पसंद करती हूँ.”

“संबित बाबू हमारे गांव प्रचार के लिए आए थे तो मैंने उन्हें अपने घर बुला लिया और अपने हाथों से “चकुली” (एक तरह का दोसा) और सब्ज़ी बनाकर उन्हें परोसा. उन्होंने भी बड़े प्यार से खाया और मुझे भी खिलाया.”

मेरे और सवाल करने पर वो मुझे घर के अन्दर ले गईं और गैस सिलिंडर और चूल्हा दिखाया. उनकी बहू, बेटियों ने भी इस बात की पुष्टि की कि वे गैस पर ही खाना बनाती हैं.

उर्मिला ने बताया कि संबित पात्र ने भी उनसे पूछा था कि वे गैस से रसोई क्यों नहीं करतीं. उनका कहना है, “मैंने उन्हें वही कारण बताया जो अभी आपको बता रही हूँ.”

उन्होंने इस आरोप का भी खंडन किया कि संबित पात्र ने उन्हें अपना जूठा खिलाया. “यह बिलकुल ग़लत है. उन्होंने पहले प्यार से मुझे खिलाया और फिर खुद खाया. मुझे तो वे बहुत अच्छे लगे, अपने बेटे जैसे.”

उर्मिला के घर को बाहर से देखने पर ही उनके परिवार की आर्थिक स्थिति का अंदाज़ा लग जता है. उनके घर के भीतर घुसते ही पता चल जाता है कि परिवार के लिए बसर करना अपने आप में एक चुनौती है. घर में मिट्टी की फर्श है. छत से कई जगह पुआल नदारद है; टीवी या मनोरंजन का कोई दूसरा सामान कहीं नज़र नहीं आया.

उर्मिला के पति का देहांत करीब 20 साल पहले ही हो गया था. घर में दो अविवाहित और मानसिक रूप से पीड़ित बेटियाँ हैं.

38 साल की आशामणि और 33 साल की निशामणि की देखभाल उर्मिला ही करती हैं और शायद मरते दम तक करती रहेंगी.

उनकी तीसरी बेटी लक्ष्मीप्रिया (26) सामान्य है और उसकी शादी हो चुकी है.

उनका एक बेटा भी है- विश्वनाथ (30), लेकिन वह भी आंशिक रूप से बीमार है. विश्वनाथ मजदूरी करते हैं और उन्हीं की कमाई से घर चलता है.

सरकारी सहायता के नाम पर उर्मिला के पास बस एक बी.पी.एल. कार्ड है जिसमें उन्हें महीने में 25 किलो चावल 1 रूपया प्रति किलो की दर से मिलता है और एक विधवा पेंशन जिसके तहत उन्हें 500 रुपये हर महीने मिलते हैं.

जब मैंने उनसे पूछा कि क्या मानसिक रूप से कमज़ोर उनकी दो बेटियों को कोई सरकारी सहायता नहीं मिलती तो उन्होंने बताया कि पिछले महीने ही पहली बार आशामणि को अविवाहित लड़कियों के लिए सरकारी योजना के तहत 500 रुपये मिले हैं.

उर्मिला के घर के बगल में ही रहनेवाले उनके भतीजे को उनकी चाची के बारे में मीडिया की अचानक दिलचस्पी को लेकर हैरानी भी है और दुःख भी.

शिकायती लहजे में उन्होंने बीबीसी से कहा, “सभी की निगाहें बस उनके चूल्हे पर ही जाती हैं. लेकिन उनके घर की जर्जर हालत और उनकी दो बेटियों की दयनीय स्थिति किसी को नज़र नहीं आती.”

वो कहते हैं, “हो सके तो इस बारे में भी आप कुछ लिखें ताकि उन्हें कुछ आर्थिक मदद मिल सके.”