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हर दिन डिस्प्रिन लेते हैं तो, लंबे वक्त तक डिस्प्रिन लेना इन गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है.

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देश के कई राज्यों में आंधी-तूफान के साथ होगी भयंकर बारिश

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ओडिशा, झारखंड, बिहार, पश्चिम उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात के कुछ

हिस्सों में तथा पश्चिम बंगाल में गंगा के तटवर्ती इलाके, पूर्वी उत्तर

प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़ दिल्ली, पश्चिम राजस्थान, सौराष्ट्र और कच्छ के

शेष हिस्सों में तापमान सामान्य से नीचे रहा। देश के मैदानी इलाकों में

रायलसीमा के तिरुपति और तमिलनाडु के पारामथी में सबसे अधिक तापमान 40.2

डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

तमिलनाडु और रायलसीमा के अलग अलग हिस्सों में गर्म हवा की स्थिति बनी रही। दिन का तापमान तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में सामान्य से अत्यधिक ऊपर रहा। रायलसीमा और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक के कुछ हिस्सों में तथा तमिलनाडु के शेष हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर रहा। तमिलनाडु और मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में तथा उत्तर आंतरिक कर्नाटक के शेष हिस्सों में तापमान सामान्य से ऊपर रहा।

दिन के तापमान हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पश्चिम राजस्थान के कुछ हिस्सों में सामान्य से अत्यधिक नीचे रहा जबकि पश्चिम बंगाल, सिक्किम, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पंजाब, पूर्वी राजस्थान, सौराष्ट्र और कच्छ के कुछ हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी नीचे रहा।

रात का तापमान असम, मेघालय, ओडिशा, बिहार, पूर्व मध्य प्रदेश और विदर्भ के कुछ हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी नीचे रहा। पश्चिम बंगाल, सिक्किम, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, पश्चिम मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में तथा असम , मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, ओडिशा, पूर्व मध्य प्रदेश और विदर्भ के शेष हिस्सों में तापमान सामान्य से नीचे रहा। रात के तापमान तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में सामान्य से अत्यधिक ऊपर रहा जबकि सौराष्ट्र, कच्छ, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और केरल के कुछ हिस्सों में तथा तमिलनाडु के शेष हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर रहा।

पूर्वी राजस्थान, पश्चिम मध्य प्रदेश, सौराष्ट्र, कच्छ, तेलंगाना और केरल के कुछ हिस्सों में तापमान सामान्य से नीचे रहा। पंजाब के भङ्क्षटडा में न्यूनतम तापमान 6.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अगले 24 घंटे के दौरान तटीय आंध्र प्रदेश , आंतरिक तमिलनाडु, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और केरल के कुछ हिस्सों में आंधी और गरज के साथ बारिश होने का अनुमान है।

पिछले 24 घंटे में अरुणाचल प्रदेश के कई हिस्सों में तथा असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल के पर्वतीय क्षेत्र, सिक्किम, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, पश्चिमी राजस्थान, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल के अलग-अलग हिस्सों में बारिश हुयी या फिर गरज के साथ छींटे पड़े। नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, गांगेय पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, पूर्वी राजस्थान, गुजरात, कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, रायलसीमा और कर्नाटक राज्य में मौसम शुष्क रहा।

दूरदर्शन देखने वालों के लिए आए अच्छी खबर, जानिए कैसे

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 राज्यों में क्षेत्रीय क्षेत्रीय चैनल लांच करने का निर्णय लिया है। इसमें उत्तराखंड के अलावा छत्तीसगढ़, गोवा, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा आदि हैं। दूरदर्शन देहरादून के केंद्राध्यक्ष डॉ. सुभाष चंद्र थलेड़ी ने बताया कि प्रदेश में शुरू हो रहे चैनल का नाम डीडी उत्तराखंड रखा जाएगा।

यह मिक्सड चैनल होगा, जिसमें कृषि, मनोरंजन, संगीत, समाचार व अन्य कार्यक्रम प्रसारित होंगे। सभी कार्यक्रम गढ़वाली, कुमाउंनी व अन्य स्थानीय बोलियों में होंगे। शुरू होने वाले नए 11 चैनलों का बजट भी पास हो चुका है, अब जल्द ही प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। डीडी उत्तराखंड फ्री-टू-एयर चैनल होगा। उत्तराखंड को पृथक दूरदर्शन चैनल दिए जाने के लिए राज्यसभा सांसद और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी ने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया है।

सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उत्तराखंड को दूरदर्शन चैनल की सुविधा दिए जाने पर प्रधानमंत्री का आभार जताते हुए ट्वीट किया है। कहा कि निश्चित रूप से डीडी उत्तराखंड हमारे राज्य की संस्कृति, सभ्यता को प्रचारित करके एक भारत-श्रेष्ठ भारत की संकल्पना को मजबूती देगा।

रिपोर्ट : भारत में साल 2013 के बाद से किसान परिवारों की स्थिति का कोई सर्वे नहीं हुआ

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किसानों की स्थिति को लेकर देश में जारी बहस के बीच पिछले पांच वर्षो में कृषि परिवारों की आय में वृद्धि का कोई तुलनात्मक अनुमान उपलब्ध नहीं है । राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय :एनएसएसओ: ने 2013 के बाद से कृषि परिवारों की स्थिति के आकलन का कोई सर्वेक्षण नहीं किया । संसद के हाल में सम्पन्न बजट सत्र के दौरान एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने यह बात बतायी । राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय द्वारा पिछला ‘कृषि परिवारों की स्थिति का आकलन सर्वेक्षण’ कृषि वर्ष जुलाई 2012…जून 2013 के लिये 70वीं पारी के संदर्भ में किया गया था ।

मंत्रालय ने कहा, ” एनएसएसओ ने 2013 के बाद ऐसा कोई सर्वेक्षण नहीं किया । इसलिये 2014 से 2018 के दौरान कृषि परिवारों की आय में वृद्धि के तुलनात्मक अनुमान उपलब्ध नहीं हैं । ” इस सवाल पर कि सरकार वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिये किन आंकड़ों पर निर्भर है, कृषि मंत्रालय ने बताया, ” वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने संबंधी अंतर-मंत्रालयी समिति की उपलब्ध रिपोर्टो के अनुसार समिति ने कृषि परिवारों की स्थिति का आकलन सर्वेक्षण की 70वीं पारी के इकाई स्तरीय आंकड़ों से प्राप्त कृषि परिवारों की आय के अनुमानों को आधार माना है । ” मंत्रालय ने बताया कि सरकार ने कृषि वर्ष जुलाई 2018 से जून 2019 के संदर्भ में अगला ‘कृषि परिवारों की स्थिति का आकलन सर्वेक्षण’ संचालित करने का निर्णय किया है ।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने सदन को बताया कि गृह मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो :एनसीआरबी: ‘भारत में दुर्घटनावश मृत्यु और आत्महत्याएं’ शीर्षक वाले अपने प्रकाशन में आत्महत्याओं के बारे में सूचनाओं को संकलित और प्रसारित करता है । 2015 तक की आत्महत्याओं संबंधी ये रिपोर्ट इसकी वेबसाइट पर उपलब्ध है । वर्ष 2016 से आगे की रिपोर्ट अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है । ‘भारत में दुर्घटनावश मृत्यु और आत्महत्याएं’ रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2014 के दौरान कृषि क्षेत्र में शामिल कुल 12,360 व्यक्तियों ने आत्महत्याएं की जिसमें 5650 किसान या कृषक और 6710 कृषि मजदूर शामिल हैं । इसी प्रकार से 2015 में कृषि क्षेत्र में शामिल कुल 12,062 व्यक्तियों ने आत्महत्या की जिसमें 8007 किसान एवं कृषक तथा 4595 कृषि श्रमिक शामिल हैं । भाषा दीपक पवनेशपवनेश1003 1150 दिल्लीनननन.

तारीखों के ऐलान से पहले लोकसभा चुनाव 2019 के जानिए संभावित कार्यक्रम

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चुनाव आयोग रविवार शाम को 5 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा. माना जा रहा है कि इस दौरान वो आगामी लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है. न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि ये चुनाव अप्रैल-मई में 7-8 चरणों में कराए जा सकते हैं.

पहले चरण की वोटिंग के लिए मार्च के आखिर तक नोटिफिकेशन जारी हो सकता है और इसके लिए वोटिंग अप्रैल के पहले हफ्ते में हो सकती है.

इस बात की पूरी संभावना जताई जा रही है कि चुनाव आयोग पहले की तरह ही आंध्र प्रदेश, ओडिशा, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव भी लोकसभा चुनाव के साथ करा सकता है.

जम्मू-कश्मीर के लिए ये है संभावना

जम्मू-कश्मीर विधानसभा भंग हो चुकी है, इसलिए चुनाव आयोग मई में खत्म हो रही 6 महीने की समयसीमा के अंदर वहां भी चुनाव कराने के लिए बाध्य है. ऐसे में माना जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव भी लोकसभा चुनाव के साथ होंगे. मगर भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव के चलते राज्य के जटिल सुरक्षा हालात को ध्यान रखते हुए ही इस बारे में कोई फैसला किया जाएगा.

3 जून को खत्म हो रहा है मौजूदा लोकसभा का कार्यकाल

मौजूदा लोकसभा का कार्यकाल 3 जून को खत्म हो रहा है. लोकसभा चुनाव कार्यक्रम का ऐलान होते ही आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी. इसके बाद सरकार नीतिगत फैसले नहीं ले सकेगी.

2019 के चुनाव में इतने लोगों के पास होगा वोट डालने का अधिकार

2014 के लोकसभा चुनाव में 83.4 करोड़ लोगों के पास वोट डालने का अधिकार था. माना जा रहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में 8 करोड़ फर्स्ट टाइम वोटर होंगे. इस तरह 2019 के लोकसभा चुनाव में 90 करोड़ से ज्यादा लोगों के पास वोट डालने का अधिकार होगा.

विडिओ : कीमत जानकर रह जाएंगे हक्के-बक्के, दुनिया की सबसे महंगी एकलौती लग्ज़री कार

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स्विट्ज़रलैंड: लग्ज़री गाड़ियों का शौक किसे नहीं होगा, आए दिन सोशल मीडिया पर आने वाली कारों की तस्वीरें एक्साइटमेंट बढ़ा देती हैं. कार के दीवानों के लिए गाड़ियों के नए-नए मॉडल्स को देखना और अपनी पसंद की गाड़ी खरीदने से ज्यादा खुशी देने वाली चीज़ और कोई नहीं. ऐसे ही दीवानों के लिए एक नई कार मार्केट में हाल ही में आई है, जो आते ही बिक गई. क्योंकि इस गाड़ी का दूसरा पीस बनाया ही नहीं.

ये गाड़ी है बुगाती (Bugatti) की ला वेच्यू नुआ ‘La Voiture Noire’, जिसे स्विट्ज़रलैंड में हुए 89वें जेनेवा इंटरनेशनल मोटर शो (International Motor Show) में शोकेस किया गया.

ला वेच्यू नुआ ‘La Voiture Noire’ एक फ्रेंच शब्द है, जिसका मतलब है ‘द ब्लैक कार’ (The Black Car). बुगाती ने इस गाड़ी का सिर्फ एक ही मॉडल बनाया, जिसे 18.9 मिलियन डॉलर (करीब 132 करोड़ रुपये) में बेच भी दिया.

ला वेच्यू नुआ ‘La Voiture Noire’.

दुर्भाग्य से, जीन की ये गाड़ी दूसरे विश्व युद्ध (Second World War) में खो गई थी. उसके बाद से सिर्फ 57एससी अटलांटिक (57SC Atlantic) के 3 ही मॉडल बचे, जिसे आज भी सबसे कीमती विंटेज गाड़ियों में गिना जाता है.

बुगाती (Bugatti) की इस गाड़ी की 4 खास बाते हैं – W16 8-लिटर 16- सिलेंडर ईंजन, जिससे 1,479 हॉर्सपावर और 1,180 पाउंड-फीट का टॉर्क रफ्तार मिलती है.

 

https://twitter.com/Bugatti/status/1102863823633965057

वेनेजुएला में बिजली आपूर्ति ठप, डायलिसिस के 15 मरीजों की मौत

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वेनेजुएला में बिजली आपूर्ति ठप होने के कारण किडनी की बीमारी से पीड़ित 15 लोगों का डायलसिस नहीं हो पाने से उनकी मौत हो गयी. स्वास्थ्य अधिकारों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन कोडेविडा के निदेशक फ्रांसिस्को वालेंसिया ने कहा, ‘कल और आज के बीच डायलसिस नहीं हो पाने के कारण 15 लोगों की मौत हो गयी.’

उन्होंने कहा, ‘जिन लोगों की किडनी खराब हो गयी हैं, वे मुश्किल स्थिति में हैं. हम करीब 95 प्रतिशत डायलसिस इकाइयों की बात कर रहे हैं, जो विद्युत संकट के कारण बंद हो गयीं. आज इनकी संख्या 100 फीसदी पहुंचने की आशंका है.’

इस बीच, वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने शनिवार को दावा किया कि एक नये ‘साइबरनेटिक्स’ हमले के कारण प्राधिकारियों को बिजली आपूर्ति बहाल करने में मुश्किलें पेश आयी. मादुरो ने काराकस में समर्थकों को बताया कि करीब 70 प्रतिशत बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गयी थी, तभी ‘उचित तरीके से काम कर रहे’ एक जनरेटर पर एक और साइबरनेटिक्स हमला हुआ और जो सफलता मिली थी, उस पर पानी फिर गया.

इस बीच, वेनेजुएला में विपक्ष के नेता जुआन गुइदो ने शनिवार को लोगों से देशभर में जुलूस निकालने का आह्वान किया और हजारों लोग सड़कों पर उतर आये. उल्लेखनीय है कि गुइदो, मादुरो को सत्ता से बेदखल की कोशिशों में जुटे हैं और स्वयं को अंतरिम राष्ट्रपति घोषित कर चुके हैं. गुइदो को अमेरिका समेत 50 देशों का समर्थन प्राप्त है.

होली की बिहार में खास हैं अल्हड़ परंपराएं

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देश भर के परंपराओं को देखें तो होली वर्षारंभ की उत्सवी दस्तक है. पुरानी वस्तुओं के ढेर को जलाने की जो कथा है, उससे अलग इसकी परंपरा अत्यंत गहरी है और गेहूं की बालियों को उसकी आग में भून कर लाना-उसका स्वाद चखना भी उसी का हिस्सा है.

इन तमाम परंपराओं से अलग बिहार की होली राष्ट्रीय परंपराओं का एक मिश्रित और सम्मिलित रूप है जो यहां के गायन से लेकर उत्सवी रंग ढंग में दिखता है. मिथकीय कथाओं के अनुसार पिता हिरण्य कश्यप और उनके बेटे भक्त प्रह्लाद के बीच युद्ध की चरम स्थिति, होलिका द्वारा प्रह्लाद को लेकर अग्नि में प्रविष्ट होना और प्रह्लाद का वहां से बच निकलने की खुशी का ही प्रतीक होली है. इसी कहानी में आगे भगवान श्रीकृष्ण आते हैं और होली का गायन उन्हीं के इर्द-गिर्द घूमता है.

ब्रजभाषा का गायन व मगध क्षेत्र का धमाल

बिहार में जिन शैलियों में होली का गायन है उसमें ब्रजभाषा का गायन और मगध क्षेत्र का धमाल है. गायन होली में दल सवाल और उत्तर गाते हैं. सवाल और उलाहने गोपियों के होते हैं और उत्तर गोपाल के होते हैं. इस परंपरा में वाद्य गायन का साथ देता है और गीत की प्रधानता तो होती ही है, राग अपनी लय से आगे बढ़ता चलता है. अंत में राग अपनी लय के साथ ही विराम तक पहुंचता है. धमाल में गायन तुरंत ही चरम पर पहुंचता है और अंत में अचानक ही उसकी परिणति आती है. होली की इस गायन शैली में राग शिखर पर ही बना रहता है. गायन की परंपरा मिथिला के क्षेत्र में है तो धमाल मगध क्षेत्र की. भोजपुरी में दोनों का मिश्रित रूप है लेकिन उसपर धमाल हावी है.

पटोरी में आज भी ‘छाता होली’ का प्रचलन
बिहार के समस्तीपुर जिले के भिरहा और पटोरी गांव में परंपरागत रूप से होली की खासियत बरकरार है. भिरहा में झरीलाल पोखर में गांव के विभिन्न टोलों के लोग पहुंच जाते हैं. वे सभी लोग पोखर में ही विभिन्न रंगों को घोल कर एक साथ स्नान करते हैं. ढोल, मंजीरे के साथ जुलूस की शक्ल में होलिका दहन करने सारे ग्रामीण उसी तालाब के पास आते हैं. पटोरी में आज भी ‘छाता होली’ का प्रचलन है. पटोरी तथा इसके आसपास के क्षेत्र के लोग यहां होली के दिन इकट्ठा होते हैं, सभी के हाथों में छाता होता है. इस दौरान लोग एक-दूसरे को रंगने की कोशिश करते हैं जबकि लोग रंग से बचने के लिए छाते का इस्तेमाल करते हैं, इस दौरान होली के गीत गाये जाते हैं.

बिहार : जयमाला के दौरान स्टेज पर शराब के नशे में दूल्हे ने दुल्हन व उसकी सहेलियों के साथ ये काम, फिर…

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 बिहार के सारण में तरैया थाना क्षेत्र के छपिया गांव में छपरा से आयी बरात बिन दुल्हन के लौट गयी. जानकारी के अनुसार छपिया गांव निवासी त्रिभुवन साह की पुत्री की शादी छपरा के 51 नंबर ढाला मगाही डीह निवासी शिवपूजन साह के पुत्र बबलू कुमार के साथ तय हुई थी. शुक्रवार को त्रिभुवन साह के यहां गाजे-बाजे के साथ बरात पहुंची. द्वारपूजा की रस्म हुई. उसके बाद जयमाला के दौरान दूल्हे ने स्टेज पर जयमाला को तोड़ दिया और दुल्हन व उसकी सहेलियों के साथ अभद्र व्यवहार किया. यह सब कन्या पक्ष वालों को बुरा लगा. कन्या पक्ष वालों ने जब दूल्हे से बातचीत की तो दूल्हा नशे में चूर था. उसके बाद भी कुछ लोगों ने समझा-बुझाकर आंगन में वरनेत की रस्म करायी. शादी के लिए जब दूल्हे को आंगन में बुलाया गया तो महिलाओं ने जब नजदीक से बात की तो नशे के कारण ठीक ढंग से बात नहीं करने के कारण दुल्हन ने शादी से इन्कार कर दिया. इस पर कन्या पक्ष वालों ने दूल्हे को बंधक बनाकर वर पक्ष वालों से उपहार में दिये गये सभी सामान वापस करने की मांग की.

वहीं, नशे में चूर दूल्हे की खबर जैसे ही बरात के जनमासे में पहुंची तो बराती धीरे-धीरे कर खिसक गये. दूल्हे के नशे में रहने के कारण शादी से इन्कार करने के मामले में जनप्रतिनिधियों ने शनिवार को दोनों पक्षों की बातों को सुनकर व समझकर सुलह का रास्ता निकाला. कन्या पक्ष द्वारा तिलक में उपहार स्वरूप दी गयी बाइक, रंगीन टीवी, अलमारी, पलंग, बरतन समेत सभी सामान को वर पक्ष ने लौटाया और वर पक्ष द्वारा वरनेत में चढ़ाये गये गहनों को कन्या पक्ष ने वापस किया.

मुखिया प्रतिनिधि सुनील चौरसिया, सरपंच प्रतिनिधि साबिर हुसैन समेत दोनों पक्षों के बुद्धिजीवियों की मध्यस्थता के बाद कागजी प्रक्रिया को पूरा करने के बाद शनिवार को दोपहर में दूल्हे को मुक्त किया गया. उसके बाद छपिया से बिन दुल्हन की बरात लौट गयी.

नज़रिया : पुलवामा हमले के बाद प्रियंका गांधी की चुप्पी के मायने

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उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के 11 उम्मीदवारों की लिस्ट आई तो कार्यकर्ताओं से लेकर पत्रकारों की निगाहें लिस्ट में प्रियंका गांधी के नाम को खोज रही थीं.

माना जा रहा था कि ख़राब स्वास्थ्य की वजह से सोनिया गांधी रायबरेली से चुनाव नहीं लड़ेंगी और उनकी जगह प्रियंका गांधी वाड्रा चुनावी समर में कूदेंगी.

लेकिन कांग्रेस की पहली लिस्ट में प्रियंका का नाम नहीं है.

रायबरेली से सोनिया गांधी और अमेठी से राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस के पुराने दिग्गज अपनी-अपनी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं.

2014 की मोदी लहर में कांग्रेस रायबरेली और अमेठी ही बचा पाई थी.

प्रियंका कांग्रेस की मजबूरी?

इसी साल जब प्रियंका गांधी की सक्रिय राजनीति में आने की घोषणा हुई थी तो क़यास लगाए जा रहे थे कि वो विपक्षी पार्टियों के लिए बहुत बड़ी चुनौती बनेंगी.

जानकार मानते हैं कि प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में लाना कांग्रेस की मजबूरी भी थी.

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी में गठबंधन की घोषणा ने कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी थी.

उत्तर प्रदेश की इन पार्टियों ने देश की इस सबसे पुरानी पार्टी को नज़रअंदाज़ किया. ऐसे में कांग्रेस के सामने विपक्ष के रूप में सिर्फ़ बीजेपी नहीं, बल्कि उनके पुराने सहयोगी भी थे.

सपा और बसपा से मिले इस सबक से कांग्रेस ने शुरुआत में उत्तर प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने की घोषणा की है. हालांकि उन्होंने अन्य समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ गठबंधन की ओर इशारा भी किया है.

प्रियंका गांधी के आगमन से एक बार फिर न केवल कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में जबर्दस्त उत्साह आया, बल्कि मीडिया में भी कांग्रेस फिर से ख़बरों से आ गई.

ख़ास तौर से जब प्रियंका गांधी को जिस क्षेत्र की ज़िम्मेदारी दी गई यानी पूर्वी उत्तर प्रदेश वहां पर उनका सीधा मुक़ाबला नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ से है.

साथ ही कांग्रेस ने सपा-बसपा गठबंधन को भी इशारा किया वो उन्हें हल्के में ना लें.

प्रियंका का उत्तर प्रदेश दौरा

प्रियंका गांधी ने पार्टी दफ़्तर में आने के बाद ज़ोर-शोर से काम शुरू किया. उनका चार दिन का उत्तर प्रदेश दौरा मीडिया की सुर्खियों में रहा.

राजनीति में औपचारिक एंट्री के बाद लखनऊ के पहले दौरे में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने चार दिन और पांच रातों के दौरान पार्टी के चार हज़ार से अधिक कार्यकर्ताओं से मुलाक़ात की.

जिस दिन प्रियंका मीडिया से बात करना चाहती थीं उसी दिन पुलवामा में हमला हो गया. तब प्रियंका गांधी ने मीडिया के सामने कहा कि ये समय राजनीति की बात करने का नहीं है. उसके बाद प्रियंका ख़बरों की सुर्खियों से ग़ायब हो गईं.

कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि देश में जब-जब संकट के बादल छाए हैं तब-तब कांग्रेस ने राजनीति छोड़ कर देश हित में काम करती है.

पुलवामा हमले के वक़्त प्रियंका गांधी का राजनीति पर बात न करना इस बात को दर्शाता है कि वो राजनीतिक रूप से परिपक्व हैं.

हालांकि कांग्रेस ने इस बहाने बीजेपी पर भी निशाना कसा था कि जब देश में गंभीर हमला हुआ तब बीजेपी के शीर्षस्थ नेता प्रचार में लगे रहे.

कार्यकर्ताओं से नज़दीकी

शुरू से माना जाता है कि प्रियंका गांधी कार्यकर्ताओं में काफ़ी लोकप्रिय हैं. कांग्रेस के ज़्यादातर नेता जब कार्यकर्ताओं से बात करने के बजाय उनको निर्देश देने में लगे रहते हैं, प्रियंका गांधी उनके साथ बैठ कर उनकी बातें सुनती हैं.

कार्यकर्ताओं के ज़रिए वो ज़मीनी हक़ीक़त तो पता करती ही हैं साथ ही उनका मनोबल बढ़ाने के दौरान उनकी बातें सुनती हैं और साथ फ़ोटो खिंचवाती हैं.

छोटे दल और असंतुष्टों पर नज़र

कार्यकर्ताओं को समय देने के साथ-साथ उन्होंने अलग-अलग पार्टी के असंतुष्ट नेताओं को अपनी तरफ़ जोड़ना शुरू किया. इस कड़ी में पहला नाम महान दल के नेता केशव देव मौर्य का है.

केशव देव मौर्य पहले बहुजन समाज पार्टी में थे और उनकी पैठ कुशवाहा, निषाद, नाई, राजभर समाज में है जो कि पिछड़ों में यादवों के बाद सबसे बड़ी आबादी हैं.

इसी कड़ी में बीजेपी की बहराइच से सांसद सावित्री बाई फुले को भी कांग्रेस के साथ जोड़ लिया.

दलित नेता की पहचान रखने वालीं फुले क़रीब एक साल से ज़्यादा समय से बीजेपी के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाती रही हैं. उन्होंने बीजेपी को ‘दलित विरोधी’ भी क़रार दिया था.

पिछले साल दिसंबर में उन्होंने बीजेपी पर समाज में बंटवारे की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया था.

सावित्री बाई फुले के साथ ही समाजवादी पार्टी के नेता और फतेहपुर से पूर्व सांसद राकेश सचान भी कांग्रेस में शामिल हो गए थे.

कांग्रेस के लिए इन दोनों नेताओं को अपने साथ करना उनकी बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है.

जानकारों का मानना है कि अपने-अपने इलाक़े में अच्छी पैठ वाले नेताओं को जोड़ने से कांग्रेस के वोटों में इज़ाफ़ा होगा.

कांग्रेस में हर सीट पर समन्वयक

इसके साथ ही कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने लोकसभा चुनाव के लिए सभी सीटों पर समन्वयक की तैनाती कर दी है.

मैदान में उतारने से पहले इन समन्वयकों को कम्प्यूटर से लेकर चुनाव प्रबन्धन आदि की ट्रेनिंग दी गई है.

अमेठी, रायबरेली की तर्ज़ पर नियुक्त पार्टी के ये समन्वयक अपने-अपने क्षेत्रों में चुनाव और पार्टी नेताओं से जुड़ी हर छोटी-बड़ी गतिविधियों पर नज़र रखेंगे.

ऐसा प्रयोग मध्य प्रदेश में हो चुका है.

समन्वयकों की तैनाती में युवाओं और एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस में रहे नेताओं को तरजीह दी गई है.

इनकी सीधी रिपोर्टिंग प्रियंका गांधी को होगी. ये समन्वयक प्रियंका की आंख और कान होंगे.

प्रियंका के चुनावी अभियान की टीम

अपने चुनावी अभियान को गति देने के उद्देश्य से प्रियंका गांधी ने प्रोफ़ेशनल लोगों की एक टीम गठित की है. इसमें रॉबिन शर्मा सलाहकार की भूमिका निभाएंगे.

रॉबिन प्रशांत किशोर की अगुवाई वाले सिटीजन फॉर एकाउंटेबल गवर्नेंस (सीएजी) के को-फाउंडर हैं और इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (आई-पीएसी) से जुड़े हैं.

2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी की ‘चाय पे चर्चा’ के पीछे रॉबिन शर्मा का ही दिमाग़ था.

इसके अलावा 2015 के बिहार चुनाव में नीतीश कुमार की ‘हर घर नीतीश, हर मन नीतीश’ नाम से निकाली गई साइकिल यात्रा और 2017 के उत्तर प्रदेश के चुनाव में राहुल गांधी के ‘खाट सभा’ अभियान के पीछे भी रॉबिन शर्मा ही थे.

कांग्रेस की रणनीति

कांग्रेस प्रियंका और ज्योतिरादित्य से बड़ी रैली करवाने के बजाय नुक्कड़ सभा, मोहल्ला सभा, चौपाल और रोड शो में ज़्यादा ध्यान देना चाहती है.

कांग्रेस का मानना है कि बड़ी सभाओं के बजाय छोटे प्रोग्राम कर क़रीब से और पुख्ता तरीक़े से अपनी बात जनता के बीच रखी जा सकती है.

प्रियंका वैसे भी बड़ी रैलियों के बजाय छोटी-छोटी सभाओं को पसंद करती है.

प्रियंका का रोड शो का रूट ऐसा रखा जाएगा ताकि एक लोकसभा क्षेत्र का ज़्यादा-से-ज़्यादा हिस्सा कवर हो जाए.

हालांकि 14 फ़रवरी के बाद से देश की राजनीति में काफ़ी परिवर्तन आया है.

पुलवामा हमला और उसके बाद भारत सरकार की जवाबी कार्रवाई को बीजेपी ने अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश की है.

जानकारों का मानना है कि किसी भी देश में सुरक्षा से ज़्यादा कोई बड़ा मसला नहीं होता. यही वजह है कि रफ़ाल, बेरोज़गारी और किसान जैसे मुद्दे एकदम पीछे हो गए.

वैसे भी बालाकोट के हवाई हमले को बीजेपी राजनीतिक रूप से लगातार भुना भी रही है.

ऐसे में कांग्रेस क्या रणनीति अपनाएगी यह काफ़ी अहम होगा.