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कश्‍मीर ही नहीं पंजाब भी निशाने पर, पाकिस्‍तान ने बदला आतंक वाला पार्टनर, क्या है नया प्लान? BSF का बड़ा खुलासा

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पंजाब और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की आग को भड़काने के लिए पाकिस्तान ने अपना एक नया टेररिस्ट पार्टनर खोज लिया है. पंजाब में खालिस्‍तानी आतंकियों के मंसूबों को आगे बढ़ाने और जम्मू-कश्मीर में दहशतगर्दी फैलाने के लिए पाकिस्तान का नया टेररिस्ट पार्टनर अब खुलकर हथियारों की सप्‍लाई भी करने लगा है. बॉर्डर सिक्‍योरिटी फोर्स (Border Security Force) ने हाल ही में एक ऐसी साजिश का पर्दाफाश किया है, जिसके बाद तुर्की और पाकिस्तान की मिलीभगत खुलकर सामने आ गई है.
जी हां, पाकिस्‍तान का यह नया टेरेरिस्‍ट पार्टनर, कोई और नहीं, बल्कि तुर्की ही है. आप को याद होगा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी तुर्की ने पाकिस्‍तान का खुलकर समर्थन करते हुए हथियारों की सप्‍लाई की थी. हाल का मामला भारत-पाकिस्‍तान इंटरनेशनल बॉर्डर से सटे पंजाब के अमृतसर और तरनतारन बॉर्डर से जुड़ा हुआ है, जहां बीएसएफ की सतर्कता ने पाकिस्तान के नापाक मंसूबों पर पानी फिर गया है. बीएसएफ ने तुर्की में बने हथियारों की एक खेप को पकड़ा है, जिसे ड्रोन के जरिए पाकिस्‍तान की तरफ से अमृतसर और तरनतारन बार्डर पर गिराया गया था.
बीएसएफ के सीनियर ऑफिसर ने बताया कि अमृतसर के पास नेस्ता गांव में संदिग्ध ड्रोन मूवमेंट की खबर मिलने के बाद बीएसएफ की क्विक एक्‍शन टीम और पेट्रोलिंग पार्टी एक्शन में आ गई थीं. तलाशी के दौरान मौके से दो पिस्टल, चार मैगजीन और एक बाइक बरामद की गई. इसके अलावा, तरनतारन के नौशेरा धल्ला गांव के पास एक प्लास्टिक की बोतल में छिपाकर रखे गए पिस्टल के पार्ट्स भी बरामद किए गए. इतना ही नहीं, तरनतारन के राजोके गांव के पास बीएसएफ ने 75 राउंड 9mm कैलिबर की गोलियां बरामद की है.

बॉर्डर से बरामद हुआ हथियारों का बड़ा जखीरा
उन्‍होंने बताया कि अमृतसर के नेस्ता गांव से बरामद की गईं स्‍टल और मैगजीन तुर्की में बने हुए हथियार हैं, जबकि तरनतारन के राजोके गांव के पास से बरामद की गई 75 राउंड 9mm कैलिबर की गोलियों पर पाकिस्तान ऑर्डिनेंस फैक्ट्री की मुहर लगी हुई थी. आपको बता दें कि पाकिस्तान अब अपनी आतंकी साजिशों को अंजाम देने के लिए चीनी हथियारों की जगह टर्की के हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है. पहले जहां AK-47 और दूसरे चीनी हथियार पंजाब और जम्मू-कश्मीर में तस्करी के जरिए पहुंच रहे थे, अब तुर्की में बने ड्रोन और हथियारों का इस्तेमाल बढ़ गया है.

तुर्की, पाक और खालिस्तानी आतंकियों का गठजोड़
कश्‍मीर में एंटी टेररिस्‍ट ऑपरेशन से जुड़ी एजेंसीज का यह भी कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद टर्की ने खुलकर पाकिस्तान का साथ देना शुरू कर दिया है. तुर्की अब पाकिस्‍तान को न सिर्फ हथियारों की सप्लाई कर रहा है, बल्कि खालिस्तानी और कश्मीरी आतंकियों को ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी दे रहा है. वहीं, पाकिस्तान की आईएसआई लंबे समय से खालिस्तानी आतंकियों को सपोर्ट कर रही है. पंजाब में खालिस्तानी मूवमेंट को हवा देने के लिए ड्रोन के जरिए हथियार, ड्रग्स और पैसे की सप्लाई हो रही है.

पीरियड में काम का स्ट्रेस खत्म! सरकार ने दिया महिलाओं को तोहफा, साल में मिलेंगी 12 Paid Period Leave

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महिलाओं के लिए बेहद राहत की खबर सामने आई है. कर्नाटक सरकार ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसला लिया है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह पॉलिसी मंज़ूर की गई कि अब राज्य की सभी महिला कर्मचारियों को हर महीने एक दिन की पेड पीरियड लीव मिलेगी. यानी महिलाएं सालभर में कुल 12 दिन की पेड पीरियड लीव ले सकेंगी.
किसे मिलेगा इस पॉलिसी का फायदा?

इस नई पॉलिसी का फायदा सरकारी दफ्तरों, प्राइवेट कंपनियों, आईटी फर्म्स, मल्टीनेशनल कंपनियों (MNCs), गारमेंट फैक्ट्रियों और इंडस्ट्रियल यूनिट्स में काम करने वाली सभी महिलाओं को मिलेगा. सरकार का अनुमान है कि इससे करीब 50 लाख महिलाओं को सीधा लाभ होगा.

सरकार का उद्देश्य
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि यह फैसला एक मानवीय, समझदार और समावेशी कार्यस्थल (Inclusive Workplace) बनाने की दिशा में अहम कदम है. कर्नाटक अब बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों की सूची में शामिल हो गया है, जहां महिलाओं को पीरियड लीव की सुविधा दी जाती है. बता दें बिहार में सिर्फ सरकारी महिला कर्मचारियों को दो दिन की छुट्टी प्रति माह दी जाती है. वहीं, ओडिशा में यह सुविधा सभी क्षेत्रों की महिलाओं के लिए साल में 12 छुट्टियों के रूप में उपलब्ध है.

क्या कहता है नया बिल?
कर्नाटक लॉ कमीशन ने ‘कर्नाटक मेंस्ट्रुअल लीव एंड हाइजीन बिल, 2025’ का मसौदा तैयार किया था. इसमें सुझाव दिया गया कि कामकाजी महिलाओं को हर साल 12 छुट्टियां दी जाएं. महिला छात्रों को भी हर महीने दो दिन की छुट्टी मिले. कमीशन को इस प्रस्ताव पर 75 प्रतिक्रियाएं मिलीं, जिनमें से 56 ने इसका समर्थन किया. इसके अलावा, अगर कोई नियोक्ता (Employer) पीरियड लीव देने से मना करता है या भेदभाव करता है, तो उस पर 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
कर्नाटक में महिलाओं की भागीदारी सबसे अधिक
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कर्नाटक में महिलाओं की लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट यानी कामकाजी महिलाओं की भागीदारी 31.5% है, जो देश में सबसे ज्यादा है. राजधानी बेंगलुरु में 1.4 करोड़ से ज़्यादा लोग रहते हैं और यहां गूगल, वॉलमार्ट, इंफोसिस, विप्रो जैसी बड़ी कंपनियों के साथ हजारों स्टार्टअप्स भी हैं.
श्रम मंत्री का बयान
राज्य के श्रम मंत्री संतोष लाड ने बताया कि इस पॉलिसी पर पिछले एक साल से काम चल रहा था. उन्होंने कहा, “महिलाएं घर और काम दोनों संभालती हैं. पीरियड के दौरान उन्हें शारीरिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है. समिति ने पहले साल में 6 दिन की छुट्टी का सुझाव दिया था, लेकिन सरकार ने इसे बढ़ाकर 12 दिन कर दिया है.”/

समाज की उन्नति और प्रगति के लिए शिक्षा ही एकमात्र मार्ग : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

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समाज की उन्नति और प्रगति के लिए शिक्षा ही एकमात्र रास्ता है। हमारी सरकार स्कूल शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवाओं को कलेक्टर, एसपी, डॉक्टर और इंजीनियर बनते देखना ही हमारी मंशा है। मुख्यमंत्री श्री साय आज कोरबा जिले के कटघोरा में आयोजित सातगढ़ कंवर समाज के सामाजिक सम्मेलन एवं वीर शहीद सीताराम कंवर की पुण्यतिथि समारोह को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वीर शहीद सीताराम कंवर समाज का गौरव हैं। इस अवसर पर उन्होंने रामपुर चौक में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद सीताराम कंवर की प्रतिमा का अनावरण किया। कार्यक्रम के दौरान समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री श्री साय का तीर-धनुष भेंट कर स्वागत एवं अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम में घोषणा की कि सातगढ़ कंवर समाज के सामाजिक भवन निर्माण के लिए ₹1 करोड़ की राशि प्रदान की जाएगी तथा इस भवन में बाउंड्रीवाल का निर्माण भी कराया जाएगा। उन्होंने रामपुर चौक में शहीद सीताराम कंवर की नई प्रतिमा स्थापना के लिए ₹10 लाख, कसनिया मोड़ में भगवान सहस्त्रबाहु की प्रतिमा स्थापना एवं प्रवेश द्वार निर्माण के लिए ₹25 लाख, तथा कटघोरा में हाईटेक बस स्टैंड के निर्माण की घोषणा की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कसनिया मोड़ में भगवान सहस्त्रबाहु चौक नामकरण, मूर्ति स्थापना, कल्चुरी स्वागत द्वार सह उद्यान निर्माण हेतु भूमिपूजन और शिलान्यास भी किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कंवर समाज के सम्मेलन में उपस्थित लोगों से समाज के विकास और उत्थान के लिए अपने बच्चों को शिक्षित करने, युवाओं को नशे से दूर रहने तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य में उच्च शिक्षा के लिए उत्कृष्ट संस्थान स्थापित किए गए हैं — मेडिकल कॉलेज, एम्स, आईआईआईटी, विश्वविद्यालय और लॉ कॉलेज संचालित हो रहे हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने पर रजत जयंती महोत्सव के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा छत्तीसगढ़ की जनता से की गई गारंटियों को पूरा करने का कार्य तेज़ी से किया जा रहा है। सरकार गठन के साथ ही 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए। किसानों से ₹3100 प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत 70 लाख महिलाओं को प्रति माह ₹1000 की आर्थिक सहायता उनके खातों में जमा की जा रही है। तेंदूपत्ता संग्राहकों से ₹5500 प्रति मानक बोरा की दर से खरीदी की जा रही है। चरण पादुका योजना पुनः प्रारंभ किया गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि श्री रामलला दर्शन योजना के तहत राज्य से प्रत्येक माह हजारों श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम की यात्रा सरकारी खर्च पर कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार गठन के मात्र 20 माह के भीतर ही 10 हजार से अधिक युवाओं को शासकीय नौकरी दी गई है। शीघ्र ही 5 हजार शिक्षकों और 700 से अधिक सहायक प्राध्यापकों की भर्ती की जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि नई औद्योगिक नीति को रोजगारमुखी बनाकर युवाओं के लिए अवसरों के नए द्वार खोले जा रहे हैं।

कार्यक्रम में विधायक श्री प्रेमचंद पटेल और श्री तुलेश्वर हीरा सिंह मरकाम, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह कंवर, महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत, कंवर समाज के केंद्रीय अध्यक्ष श्री छत्रपाल सिंह कंवर, सहित अनेक जनप्रतिनिधिगण और कंवर समाज के सामाजिक बंधु बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ के चहुंमुखी विकास के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज बेमेतरा जिले के लिए कुल ₹140.96 करोड़ के 47 विकास कार्यों की सौगात दी। इनमें 27 कार्यों का भूमिपूजन और 20 कार्यों का लोकार्पण शामिल है। इस अवसर पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जनता के विश्वास पर खरा उतरते हुए, राज्य सरकार चहुंमुखी और समावेशी विकास के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शासन का लक्ष्य प्रदेश में विकास कार्यों को तेजी और पारदर्शिता के साथ धरातल पर उतारना है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और संकल्पबद्धता के साथ प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और नगरीय सुविधाओं के क्षेत्र में तीव्र गति से कार्य किए जा रहे हैं, जिनसे जनता को सीधा लाभ मिल रहा है। इस अवसर पर उन्होंने ग्राम अमोरा में शिवनाथ नदी पर बैराज निर्माण, सिंघोरा में 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र की स्थापना, तथा ग्राम बसनी में मिडिल स्कूल प्रारंभ करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार गांवों को आत्मनिर्भर बनाने और किसानों को सशक्त करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा, “हमने यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की अधिकांश गारंटियों को अल्प समय में ही पूरा कर दिखाया है।” मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में ₹3100 प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। किसानों को दो वर्षों का बकाया बोनस प्रदान किया गया है और 18 लाख आवासहीन परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल रहा है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रति माह ₹1000 की आर्थिक सहायता दी जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में तेंदूपत्ता संग्राहकों से ₹5500 प्रति मानक बोरा की दर से खरीदी की जा रही है।

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार गांव, गरीब, किसान और महिला सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखकर कार्य कर रही है। खाद्य मंत्री श्री दयाल दास बघेल ने कहा कि राज्य सरकार पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का संचालन कर रही है, जिससे कोई भी परिवार भूखा न रहे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।

सांसद श्री विजय बघेल ने कहा कि प्रदेश सरकार जनता से किए गए वादों को पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ पूरा कर रही है। उन्होंने कहा कि बेमेतरा जैसे ग्रामीण जिलों में तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं, जिनसे आमजन को राहत और बेहतर सुविधाएं प्राप्त हो रही हैं। कार्यक्रम को विधायक श्री दीपेश साहू ने भी संबोधित किया।

इस अवसर पर खाद्य मंत्री श्री दयाल दास बघेल, सांस्कृतिक मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब,श्री प्रहलाद रजक, विधायक श्री ईश्वर साहू और श्रीमती भावना बोहरा, अवधेश चंदेल, श्री लाभचंद बाफना, तेलघानी बोर्ड के अध्यक्ष श्री जितेंद्र साहू सहित अनेक जनप्रतिनिधि, पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

जनभागीदारी से जल संचयन कर सुरक्षित होगा हमारा भविष्य : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ‘सुजलाम भारत’ के अंतर्गत राजधानी रायपुर स्थित ओमाया गार्डन में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने जल कलश पर जल अर्पित कर जल संचयन का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अनेक अवसरों पर जल संकट को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। जल संरक्षण के प्रति जनमानस में जागरूकता की कमी इस संकट को और गहरा कर सकती है। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में लोग अपने-अपने ढंग से जल संचयन के लिए प्रयास कर रहे हैं, और ऐसे मंचों के माध्यम से सभी अपने अनुभव साझा कर पाएंगे, जो अंततः नीति निर्माण में भी निर्णायक सिद्ध होंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने राजनांदगांव प्रवास का उल्लेख करते हुए बताया कि एक महिला सरपंच ने स्वप्रेरणा से सूख चुके हैंडपंपों को पुनर्जीवित करने का कार्य किया। उनके इस अभिनव प्रयास की सराहना केंद्र सरकार द्वारा भी की गई और इस पुनीत पहल को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे उदाहरण हमें प्रेरित करते हैं। हम सभी को मिलकर जल संरक्षण को एक जन आंदोलन का स्वरूप देना होगा, ताकि हमारा भविष्य सुरक्षित रह सके। उन्होंने कहा कि इस संगोष्ठी से प्राप्त होने वाले सुझाव और इनपुट आगामी कार्ययोजनाओं के निर्माण में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे।

मुख्यमंत्री ने केलो नदी का जल अर्पित कर धरती को सिंचित करने का दिया संदेश

कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पृथ्वी के प्रतीक स्वरूप स्थापित कलश में केलो नदी का पवित्र जल अर्पित किया और जल संरक्षण एवं संचयन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “जल ही जीवन है” और हमारी पावन नदियाँ धरती को सींचकर जीवनदायिनी बनाती हैं। इन्हीं नदियों से हमारी संस्कृति, सभ्यता और अस्तित्व की पहचान जुड़ी हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नदियाँ — महानदी, इंद्रावती, शिवनाथ, केलो और अन्य — प्रदेश की जीवनरेखाएँ हैं। ये नदियाँ न केवल धरती को उर्वर बनाती हैं, बल्कि कृषि, उद्योग और जीवन के हर क्षेत्र को संजीवनी प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि पृथ्वी रूपी कलश में केलो नदी का जल अर्पण इस बात का प्रतीक है कि हमें जल की हर बूंद का सम्मान करना चाहिए और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सहेजकर रखना चाहिए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और नागरिकों से आह्वान किया कि वे जल संरक्षण के इस संकल्प को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं, ताकि छत्तीसगढ़ की धरती सदैव हरियाली और समृद्धि से लहलहाती रहे।

जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में इस कार्यक्रम की संकल्पना की गई है। विभिन्न विभागों को एक-एक थीम पर संगोष्ठी आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत जलशक्ति मंत्रालय द्वारा जल संचयन विषय पर इस संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज लगभग 300 से अधिक लोगों ने, जो जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत हैं, अपना पंजीयन कराया है। जल संरक्षण को सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा है। पिछले एक वर्ष में जिलों के कलेक्टरों और संबंधित विभागों ने जल संचयन में उल्लेखनीय योगदान दिया है। अब तक साढ़े तीन लाख संरचनाओं का निर्माण किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप भू-जल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

कार्यक्रम में पद्मश्री श्रीमती फूलबासन बाई यादव, नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस., लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित थे।i]k,

नारायणपुर-अबूझमाड़ को महाराष्ट्र से जोड़ेगा नेशनल हाईवे 130-डी

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बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी के निर्माण को नई गति मिली है। छत्तीसगढ़ शासन ने कुतुल से नीलांगुर (महाराष्ट्र सीमा) तक 21.5 किलोमीटर हिस्से के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है। इस सड़क के निर्माण के लिए न्यूनतम टेंडर देने वाले ठेकेदार से अनुबंध की प्रक्रिया शर्तों सहित पूरी करने के निर्देश लोक निर्माण विभाग मंत्रालय द्वारा प्रमुख अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र रायपुर को दिए गए हैं। कुल तीन खंडों में निर्मित होने वाले 21.5 किलोमीटर सड़क के निर्माण हेतु लगभग 152 करोड़ रुपए न्यूनतम टेंडर दर प्राप्त हुई है, जिसे छत्तीसगढ़ शासन ने मंजूरी प्रदान कर दी है।

यह उल्लेखनीय है कि कुतुल, नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में स्थित है और कुतुल से महाराष्ट्र सीमा पर स्थित नीलांगुर की दूरी 21.5 किलोमीटर है। यह नेशनल हाईवे 130-डी का हिस्सा है। इस सड़क का निर्माण टू-लेन पेव्ड शोल्डर सहित किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि एनएच-130डी राष्ट्रीय राजमार्ग है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 195 किलोमीटर है। यह एनएच-30 का शाखा मार्ग (स्पर रूट) है। यह कोण्डागांव से शुरू होकर नारायणपुर, कुतुल होते हुए नीलांगुर (महाराष्ट्र सीमा) तक जाता है। आगे महाराष्ट्र में यह बिंगुंडा, लहरे, धोदराज, भमरगढ़, हेमा, लकासा होते हुए आलापल्ली तक पहुँचता है, जहाँ यह एनएच-353डी से जुड़ जाता है। इस मार्ग के विकसित होने से बस्तर क्षेत्र सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़ जाएगा और व्यापार, पर्यटन एवं सुरक्षा को बड़ी मजबूती प्राप्त होगी।

नेशनल हाईवे 130-डी का कोण्डागांव से नारायणपुर तक का लगभग 50 किमी हिस्सा निर्माणाधीन है। नारायणपुर से कुतुल की दूरी 50 किमी है और वहाँ से महाराष्ट्र सीमा स्थित नीलांगुर तक 21.5 किमी की दूरी है। इस राष्ट्रीय राजमार्ग की कुल लंबाई 195 किमी है, जिसमें से लगभग 122 किमी का हिस्सा कोण्डागांव-नारायणपुर से कुतुल होते हुए नीलांगुर तक छत्तीसगढ़ राज्य में आता है। इस सड़क के बन जाने से बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से सीधा और मजबूत सड़क संपर्क मिलेगा तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित एवं सुगम यातायात सुविधा सुलभ हो सकेगी।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के सहयोग से इस नेशनल हाईवे के अबूझमाड़ इलाके में स्थित हिस्से के लिए फॉरेस्ट क्लियरेंस और निर्माण की अनुमति प्राप्त हुई, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण का रास्ता खुल गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी केवल सड़क नहीं बल्कि बस्तर अंचल की प्रगति का मार्ग है। हमारी सरकार ने इस परियोजना को तेजी देने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। इस सड़क से बस्तर के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। यह सड़क न केवल छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र को जोड़ेगी, बल्कि बस्तर अंचल के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभाएगी। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की गति तेज करने के लिए यह परियोजना मील का पत्थर साबित होगी।

राज्यपाल श्री डेका को ‘प्रारंभ‘ पत्रिका का विशेषांक भेंट

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राज्यपाल श्री रमेन डेका को आज राजभवन में ‘‘सोसाइटी फॉर एम्पावरमेंट‘‘ द्वारा प्रकाशित मासिक पत्रिका ‘‘प्रारंभ‘‘ की प्रति भेंट की गई। विशेष पिछड़ी जनजातियों पर केंद्रित इस विशेषांक का संपादन मानवविज्ञानी एवं राज्यपाल के उप सचिव डॉ. रूपेन्द्र कवि द्वारा किया गया है।

इस विशेषांक में विशेष पिछड़ी जनजातियों समुदायों की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक स्थिति पर गहन विमर्श प्रस्तुत किया गया है, तथा इससे नीति-निर्माताओं, शोधार्थियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को उपयोगी जानकारी मिलेगी।

राज्यपाल श्री डेका ने पत्रिका की विषयवस्तु की सराहना करते हुए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इस पहल को जनजातीय समुदायों की जागरूकता एवं सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की डिजिटल प्रगति को मिला राष्ट्रीय मंच

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की डिजिटल प्रगति और तकनीकी क्षमता को राष्ट्रीय मंच पर प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत किया गया। नई दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित भारत मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2025 के अंतर्गत राज्यों के आईटी मंत्रियों की राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में राज्य के वित्त मंत्री एवं कैबिनेट मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी ने छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करते हुए देशभर के समक्ष राज्य के डिजिटल और दूरसंचार विकास की दृष्टि प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दूरसंचार अधोसंरचना के समन्वित विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयास सहकारी संघवाद का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

वित्त मंत्री श्री चौधरी ने अपने संबोधन में प्रदेश में मोबाइल नेटवर्क विस्तार की आवश्यकता, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश के अवसर, साइबर सुरक्षा, डेटा सेंटर विकास और नवीन तकनीकों के प्रोत्साहन पर विशेष बल दिया। उन्होंने इंडियन मोबाइल कॉन्फ़्रेंस में केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समक्ष छत्तीसगढ़ में मोबाइल टावरों और हाई-स्पीड इंटरनेट विस्तार के लिए ठोस तर्क प्रस्तुत किए। साथ ही विभिन्न राज्यों को छत्तीसगढ़ में भूकंपीय जोखिम कम होने के कारण डेटा सेंटर एवं डिज़ास्टर रिकवरी साइट स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया।

भारत सरकार के दूरसंचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की अध्यक्षता में आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में श्री चौधरी ने अवगत कराया कि छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में दूरसंचार अधोसंरचना के तीव्र विकास के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में राज्य ने भारत सरकार द्वारा जारी राइट ऑफ वे (ROW) नियम, 2024 को अधिसूचित कर 1 जनवरी 2025 से प्रभावी कर दिया है तथा केंद्रीय ROW पोर्टल पर ऑनबोर्ड होने का निर्णय लिया है।

श्री चौधरी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित क्षेत्रों में दूरसंचार विस्तार प्राथमिकता पर जारी है। राज्य के कम जनसंख्या घनत्व एवं सुरक्षा-संवेदनशील जिलों में लगभग 1,600 टावर स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने अनुरोध किया कि मोबाइल नेटवर्क विस्तार की वर्तमान योजनाओं — LWE फेज-I एवं II, Aspirational Districts और 4G Saturation — में छत्तीसगढ़ को विशेष श्रेणी रियायत प्रदान की जाए, ताकि इन क्षेत्रों में नेटवर्क कनेक्टिविटी को और सुदृढ़ किया जा सके।

इसके साथ ही उन्होंने नेटवर्क विस्तार की आगामी योजनाओं, जैसे “धरती आबा योजना”, के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में अतिरिक्त टावर स्वीकृति और राज्य-विशेष नई योजना के निर्माण की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने बताया कि राज्य के दूरस्थ वनांचलों में, जहाँ मोबाइल नेटवर्क विस्तार अत्यंत चुनौतीपूर्ण है, वहाँ सैटेलाइट आधारित कनेक्टिविटी के लिए नवीन परियोजनाओं की स्वीकृति आवश्यक है।

डिजिटल भारत निधि के अंतर्गत भारतनेट परियोजना फेज-III के तहत छत्तीसगढ़ द्वारा ₹3,761.15 करोड़ का प्रस्ताव भारत सरकार को प्रेषित किया गया है, जिसके माध्यम से राज्य की 5,659 ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर द्वारा हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी। श्री चौधरी ने इस प्रस्ताव की शीघ्र स्वीकृति का आग्रह करते हुए कहा कि इससे प्रदेश की ग्राम पंचायतें टेलीमेडिसिन, ई-गवर्नेंस और डिजिटल पेमेंट जैसी सेवाओं से जुड़ सकेंगी तथा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का डिजिटल इंडिया का स्वप्न साकार होगा।

साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा स्थापित किए जा रहे अत्याधुनिक स्टेट डेटा सेंटर और मैनेज्ड सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर (MSOC) की प्रगति से भी उन्होंने अवगत कराया। श्री चौधरी ने कहा कि अपनी भौगोलिक स्थिति, सरप्लस विद्युत उपलब्धता, Seismic Zone-II वर्गीकरण और आकर्षक निवेश नीति के कारण छत्तीसगढ़ डेटा सेंटर उद्योग के लिए देश का नया उभरता हुआ केंद्र बन रहा है। रैंक बैंक डेटा सेंटर्स द्वारा रायपुर में भारत का पहला AI-Optimized Data Center Park लॉन्च किया गया है, जिसमें ₹1,000 करोड़ का प्रारंभिक निवेश किया गया है, जो अगले पाँच वर्षों में ₹3,000 करोड़ तक बढ़ेगा। यह सुविधा 13.5 एकड़ में फैली है, 80 मेगावाट क्षमता प्रदान करती है और इसमें 1 लाख GPU होंगे, जिससे 500 से अधिक उच्च-कुशल रोजगार सृजित होंगे।इसके अतिरिक्त ESDS Software Solutions ने रायपुर में ₹600 करोड़ के निवेश से उन्नत AI-आधारित डेटा सेंटर स्थापना का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है।

इस अवसर पर श्री चौधरी ने केंद्र सरकार, सार्वजनिक उपक्रमों एवं अन्य राज्य सरकारों को छत्तीसगढ़ में अपने डिज़ास्टर रिकवरी डेटा सेंटर्स स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से सभी डेटा सेंटर निवेशकों को आवश्यक सभी सुविधाएँ प्रदान करने के लिए पूर्णतः कृतसंकल्पित है।

छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग के स्थानीय निकाय चुनाव 2025 के प्रबंधन को मिला अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान

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छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग को संयुक्त राष्ट्र लोक प्रशासन नेटवर्क (UNPAN) की शोध संस्था International Centre for Parliamentary Studies (ICPS) द्वारा अवार्ड से सम्मानित किया गया है। माननीय राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री अजय सिंह के निर्देशन में संपन्न स्थानीय निकाय निर्वाचन 2025 के उत्कृष्ट प्रबंधन के लिये उक्त संस्था को प्रस्ताव भेजा गया था। आयोग द्वारा प्रेषित प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए ICPS द्वारा उत्कृष्ट निर्वाचन प्रबंधन हेतु आयोग को नामांकित किया गया तथा बोत्सवाना की राजधानी गेब्रोन में आयोजित सम्मेलन में आयोग की प्रस्तुति के आधार पर आयोग को अवार्ड हेतु चयनित किया गया है।

संयुक्त राष्ट्र लोक प्रशासन नेटवर्क (UNPAN) की शोध संस्था International Centre for Parliamentary Studies (ICPS) का कार्यालय मिलबैंक टावर, लंदन (यू.के.) में स्थित है। ICPS, United Nations Development Program (UNDP) की सहयोगी संस्था है। ICPS के द्वारा लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का अध्ययन एवं अनुसंधान किया जाता है तथा अंतराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न सरकारों को लोकतांत्रिक व्यवस्था सुदृढ करने के लिये सुझाव भी दिये जाते हैं।

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा बताया कि ICPS द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग के नगरपालिका एवं पंचायत निर्वाचन 2025 एक साथ मात्र 36 दिन में संपन्न कराये जाने के लिये किये गये निर्वाचन प्रबंधन को उत्कृष्ट उपलब्धि मानते हुए Special Recognition for Outstanding Achievement Award श्रेणी में आयोग को अवार्ड प्रदान किया गया है। अवार्ड वितरण कार्यक्रम दिनांक 01.10.2025 से 04.10.2025 तक बोत्सवाना की राजधानी गेब्रोन में आयोजित था। सम्मेलन में आयोग की ओर से सर्वश्री सुखनाथ अहिरवार, सचिव एवं श्री आलोक कुमार श्रीवास्तव, उप सचिव ने भाग लिया।

दिल्ली पहुंचा कोरिया का स्वाद : देश की राजधानी में कोरिया के ’अमृत मोदक’ और ‘अमृत अचार’ का भारी मांग

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नई दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित सरस मेला 2025 में कोरिया जिले के ’अमृत मोदक’ और ‘कोरिया अमृत अचार’ की स्वाद देश की राजधानी में विशेष पहचान बना ली है। गौरतलब है कि कोरिया जिले के स्व-सहायता समूहों की महिलाओं के उत्पादों की सरस मेला में काफी चर्चा है। अमृत मोदक’ और ‘कोरिया अमृत अचार’ की खुशबू आगन्तुकों का दिल जीत लिया हैं।

सरस मेले में जिले के दो स्व-सहायता समूहों ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। ज्योति महिला स्व-सहायता समूह ने 200 किलोग्राम से अधिक कोरिया अमृत मोदक की बिक्री कर 88 हजार रुपए की आय अर्जित की तथा जागृति महिला स्व-सहायता समूह ने 260 किलोग्राम अचार तथा 36 किलोग्राम पापड़-बड़ी का विक्रय कर एक लाख रुपए से अधिक की आय प्राप्त की।

मेले में उपस्थित विभिन्न विक्रेताओं, खरीदारों और पर्यटकों ने कोरिया जिले के उत्पादों की गुणवत्ता और स्वाद की सराहना करते हुए भविष्य में ऑर्डर देने की इच्छा भी जताई। जिले की स्व-सहायता समूह की महिलाएं स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक विधियों से तैयार किए गए उत्पादों को राष्ट्रीय मंच तक पहुँचा रही हैं, जिससे महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल रही है।

कलेक्टर श्रीमती चन्दन त्रिपाठी ने कहा कि जिले की स्व-सहायता समूहों में काम करने वाली महिलाओं की आर्थिक निर्भरता और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए प्रशासन हर संभव प्रयास कर रहा है। हमारा उद्देश्य केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के पारिवारिक और शैक्षणिक वातावरण को भी सशक्त बनाना है।