Home Blog Page 363

Budget 2026: बजट के पीछे की ताकत, जानिए कौन तैयार कर रहे हैं देश के विकास का रोडमैप?

0

Union Budget 2026 Team: देश का आम बजट तैयार करना एक बड़ी और जिम्मेदारी भरी प्रक्रिया होती है. जिसमें कई अनुभवी अफसरों की अहम भूमिका रहती है. इस बार वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना लगातार नौवां बजट को पेश करने वाली है.

इस काम में वित्त मंत्रालय की एक मजबूत टीम उनका साथ दे रही है. यह टीम मौजूदा आर्थिक हालात और वैश्विक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए बजट का खाका तैयार कर रही है.

गौरतलब है कि वित्त मंत्री 1 फरवरी को लोकसभा में बजट पेश करेंगी. जो मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा पूर्ण बजट होगा. इस बार के बजट में सबसे खास बात यह है कि इस बार बजट तैयार करने की जिम्मेदारी एक महिला अधिकारी के कंधों पर हैं. आइए जानते हैं कि बजट 2026-27 को तैयार करने वाली इस टीम में कौन-कौन से अधिकारी शामिल हैं…

बजट की तैयारी में अनुराधा ठाकुर की अहम भूमिका

बजट 2026-27 की तैयारियों में आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है. विभाग की प्रमुख होने के नाते संसाधनों के सही बंटवारे और देश के व्यापक आर्थिक ढांचे को तय करने की जिम्मेदारी वे संभाल रही हैं. उनके नेतृत्व में बजट विभाग पूरा बजट दस्तावेज तैयार कर रहा है. जिससे उन्हें इस प्रक्रिया की ‘चीफ आर्किटेक्ट’ कहा जाता है.

हिमाचल प्रदेश कैडर की 1994 बैच की आईएएस अधिकारी अनुराधा ठाकुर के लिए यह पहला बजट है, क्योंकि उन्होंने 1 जुलाई 2025 को इस पद की जिम्मेदारी संभाली थी. खास बात यह है कि वह इस विभाग का नेतृत्व करने वाली पहली महिला आईएएस अधिकारी भी हैं.

बजट टीम के अन्य प्रमुख सदस्य

बजट 2026-27 की तैयारी में शामिल प्रमुख अधिकारियों में अरविंद श्रीवास्तव (राजस्व सचिव), एम. नागराजू (वित्तीय सेवा सचिव) और वुमलुनमंग वुअलनाम (व्यय सचिव) शामिल हैं. ये सभी वरिष्ठ स्तर पर बजट प्रक्रिया से जुड़े हुए हैं.

इसके अलावा अरुणिष चावला (सचिव), के. मोसेस चालई (सार्वजनिक उद्यम विभाग सचिव) और वी. अनंत नागेश्वरन (चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर) भी इस टीम का अहम हिस्सा हैं.

उर्सुला फॉन डेर लायन की भारत यात्रा: फैशन और आधिकारिक कार्यक्रमों…

0

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष का भारत दौरा

“यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लायन भारत यात्रा के दौरान केवल अपनी उपस्थिति के लिए ही नहीं, बल्कि दिल्ली में आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रमों में पहने गए उनके आकर्षक परिधानों के लिए भी चर्चा में रहीं।

उनकी शालीन और आधुनिक वेशभूषा ने न केवल लोगों का ध्यान खींचा, बल्कि इस पर व्यापक चर्चा भी हुई। उनके कपड़े भारतीय परंपरा और यूरोपीय आधुनिकता का एक सुंदर संतुलन प्रस्तुत करते हैं।

गणतंत्र दिवस समारोह में उपस्थिति

ईयू की नेता ने सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया, जहां उन्होंने कत्थई और सुनहरे रंग के रेशमी ब्रोकेड का परिधान पहना था।

ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर

मंगलवार को, जब भारत और यूरोपीय संघ ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए, तो उन्होंने हैदराबाद हाउस में एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी की। इस दौरान उर्सुला ने नीले रंग की पोशाक और सफेद पैंट पहनी हुई थी।

फैशन डिजाइन काउंसिल का ध्यान

भारत में आयोजित कार्यक्रमों में यूरोपीय संघ की प्रमुख के पहनावे ने फैशन डिजाइन काउंसिल ऑफ इंडिया (एफडीसीआई) का भी ध्यान आकर्षित किया। एफडीसीआई ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में इसे भारतीय फैशन के लिए वैश्विक मंच पर गौरव का क्षण बताया।

छत्तीसगढ़ में गौमाता के संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री की पहल…

0

गौमाता के संरक्षण की दिशा में ठोस कदम

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गौमाता के संरक्षण और संवर्धन के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया है। अधिकारियों ने मंगलवार को इस संबंध में जानकारी दी।

मुख्यमंत्री साय ने राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में गौमाता पर आधारित पहली फिल्म ‘गोदान’ का ट्रेलर लॉन्च किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि गौमाता केवल आध्यात्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आर्थिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने घोषणा की कि फिल्म ‘गोदान’ को छत्तीसगढ़ में कर मुक्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में गौ संवर्धन के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। गौशालाओं में गायों के चारे के लिए अनुदान राशि को 20 रुपए से बढ़ाकर 35 रुपए किया गया है, और अब गौशालाओं को 25 लाख रुपए की सहायता भी दी जा रही है।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार द्वारा गोधाम का निर्माण भी किया जा रहा है, जहां घुमंतू गौवंश की उचित देखभाल की जा रही है। साय ने कहा, ‘गौमाता में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है। हर अनुष्ठान से पहले पंचगव्य का उपयोग किया जाता है। यह खुशी की बात है कि गौमाता पर केंद्रित पहली फिल्म ‘गोदान’ का ट्रेलर आज लॉन्च किया गया है।’

उन्होंने इस फिल्म के माध्यम से गौमाता के महत्व को समझने का अवसर मिलने की बात कही और फिल्म से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी। यह फिल्म 6 फरवरी को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी।

मध्यप्रदेश में 60,000 करोड़ रुपये के निवेश से बिजली उत्पादन के लिए समझ…

0

मध्यप्रदेश में बिजली उत्पादन के लिए नए समझौते

मध्यप्रदेश सरकार ने मंगलवार को राज्य में 60,000 करोड़ रुपये के निवेश के तहत 4,000 मेगावाट बिजली उत्पादन और आपूर्ति के लिए तीन निजी बिजली कंपनियों के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

समझौतों का आदान-प्रदान ‘मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी’ के प्रबंध निदेशक विशेष गडपाले और ‘टोरेंट पावर लिमिटेड’ के जिगिश मेहता, ‘अडानी पावर लिमिटेड’ के एस बी ख्यालिया तथा ‘हिंदुस्तान पावर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ के रतुल पुरी के बीच हुआ।

भोपाल के समत्व भवन (मुख्यमंत्री आवास) में मुख्यमंत्री मोहन यादव की उपस्थिति में इन बिजली आपूर्ति समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। यादव ने इन समझौतों की सराहना करते हुए कहा कि ये राज्य के सतत विकास की आधारशिला रखेंगे।

उन्होंने बताया कि इससे मध्यप्रदेश में बिजली की उपलब्धता में वृद्धि होगी और राज्य की बिजली की मांग को पूरा करने के लिए 100 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। यादव ने कहा कि ये नए बिजली संयंत्र डिजाइन, निर्माण, वित्त, स्वामित्व और संचालन (डीबीएफओओ) मॉडल पर स्थापित किए जाएंगे, जिससे लगभग 8,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।

ये संयंत्र अनूपपुर जिले में स्थापित किए जाएंगे। यादव ने यह भी बताया कि राज्य की उद्योग-अनुकूल नीतियों, मजबूत बुनियादी ढांचे और सुशासन के कारण, मध्यप्रदेश भारत और विदेशों में निवेशकों और औद्योगिक समूहों के लिए एक प्रमुख गंतव्य बन रहा है।

भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता संपन्न…

0

भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते की घोषणा

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अब आधिकारिक रूप से हो गया है। यह ऐतिहासिक घोषणा 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन में की गई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा शामिल थे।

इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है, क्योंकि यह वैश्विक GDP का लगभग 25% और वैश्विक व्यापार का एक-तिहाई हिस्सा कवर करता है, जिसमें लगभग 2 अरब लोगों का बाजार शामिल है।

समझौते की प्रमुख विशेषताएँ

भारत के 99% से अधिक निर्यात को EU बाजार में शून्य या न्यूनतम टैरिफ पर पहुंच मिलेगी।

EU से आयात होने वाले 97% उत्पादों पर टैरिफ में कमी या समाप्ति, जिससे EU को हर साल 4 अरब यूरो की बचत होगी।

टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स, ऑटोमोबाइल, मशीनरी, एयरोस्पेस, चाय, कॉफी, मसाले, फल-सब्जियां और प्रोसेस्ड फूड जैसे क्षेत्रों को महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा।

संवेदनशील क्षेत्रों जैसे डेयरी, अनाज, पोल्ट्री और कुछ फल-सब्जियों को सुरक्षित रखा गया है।

सेवाओं, निवेश, बौद्धिक संपदा और भौगोलिक संकेतकों (GI) पर मजबूत प्रावधान किए गए हैं।

सुरक्षा और रक्षा साझेदारी तथा भारतीय प्रतिभा की मोबिलिटी पर अलग समझौतों का प्रावधान है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ‘भारत के इतिहास का सबसे बड़ा FTA’ बताया और कहा कि यह साझा समृद्धि का एक ब्लूप्रिंट है, जो वैश्विक अस्थिरता के समय दुनिया को स्थिरता प्रदान करेगा। उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे ‘सभी सौदों की जननी’ कहा और जोर दिया कि यह 2 अरब लोगों के लिए नए अवसर पैदा करेगा।

शेयर बाजार पर प्रभाव

इस समझौते की घोषणा के बाद भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल आया। कई सेक्टर्स के शेयरों में तेजी देखी गई:

टेक्सटाइल कंपनियों (जैसे अरविंद, वेलस्पन, ट्रेंट) में 10-20% तक की वृद्धि।

फार्मा (सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज, सिप्ला) और केमिकल्स (उल्ट्राटेक, टाटा केमिकल्स) में मजबूत खरीदारी।

ऑटो (टाटा मोटर्स, महिंद्रा) और आईटी-सर्विसेज में भी सकारात्मक रुख।

निर्यात-उन्मुख कंपनियों जैसे जेम्स एंड ज्वेलरी (टाइटन) और लेदर (बाटा, मिरजा) के शेयरों में रिकॉर्ड वृद्धि।

विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता भारत के निर्यात को बढ़ावा देगा, रोजगार सृजन (विशेषकर टेक्सटाइल में 60-70 लाख नौकरियां) करेगा और ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूत बनाएगा। इसके अलावा, अमेरिकी टैरिफ नीतियों और वैश्विक तनावों के बीच यह भारत-EU के लिए एक रणनीतिक कदम है।

सोने की कीमतें $5200 के पार, वैश्विक तनाव से बढ़ी मांग…

0

आज बुधवार को सोने की कीमतों ने एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। वैश्विक बाजार में सोने का भाव  $5,200 प्रति औंस के स्तर को पार कर गया है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।

यह वृद्धि मुख्यतः बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव, व्यापार युद्ध की चिंताओं, अमेरिकी नीतियों में अनिश्चितता और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग के कारण हुई है।

ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स और अन्य प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के अनुसार, सोने का स्पॉट प्राइस आज $5,232.87 प्रति औंस तक पहुंच गया, जो पिछले दिन की तुलना में लगभग 1% की वृद्धि दर्शाता है। इस वर्ष अब तक सोने की कीमत में लगभग 20% की वृद्धि हुई है, जबकि पिछले वर्ष की तुलना में यह 89% से अधिक बढ़ा है।

फरवरी 2026 के लिए गोल्ड फ्यूचर्स भी $5,200 के स्तर को पार कर चुके हैं।

सोने की कीमतों में वृद्धि के कारण

जियोपॉलिटिकल और व्यापार तनाव: अमेरिका द्वारा कुछ देशों पर नए टैरिफ लगाने की खबरों और वैश्विक संघर्षों ने निवेशकों को डॉलर और बॉंड्स से दूर कर सोने की ओर आकर्षित किया है।

नीतिगत अनिश्चितता: अमेरिकी सरकार के शटडाउन की आशंका, फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति और वित्तीय चिंताओं ने सुरक्षित संपत्तियों की मांग को बढ़ावा दिया है।

केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: कई केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं, जिससे डिमांड मजबूत बनी हुई है। इसके साथ ही ETF में निवेश और प्राइवेट सेक्टर की मांग भी रिकॉर्ड स्तर पर है।

डॉलर की कमजोरी: अमेरिकी डॉलर में गिरावट ने सोने को और अधिक आकर्षक बना दिया है।

भारत में सोने की कीमतें

भारत में भी सोने के दाम वैश्विक तेजी के साथ ऊंचे स्तर पर हैं। हालांकि, घरेलू बाजार में आज मामूली गिरावट देखी गई है, जहां दिल्ली में 24 कैरेट सोना 1,62,090 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा है। मुंबई में यह 1,61,940 रुपये पर है। चांदी की कीमतें भी तेजी से बढ़ रही हैं, जो 1 किलो पर 3.70 लाख रुपये के पार पहुंच गई हैं।

विशेषज्ञों की भविष्यवाणी

एक्सपर्ट्स की राय: प्रमुख बैंकों जैसे ड्यूश बैंक, गोल्डमैन सैक्स और सोसाइटी जनरल ने 2026 के अंत तक सोने की कीमत $6,000 प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान लगाया है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह रैली जारी रहेगी, क्योंकि निवेशक मुद्रा अवमूल्यन और मैक्रो रिस्क्स से बचाव के लिए सोने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

मायावती ने नए UGC नियमों का समर्थन किया, सवर्णों के विरोध को बताया…

0

मायावती का बयान

बसपा की प्रमुख मायावती ने नए UGC नियमों के संदर्भ में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए इनका समर्थन किया है। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों में इक्विटी कमेटियों के गठन को अनिवार्य बनाने वाले नियमों का स्वागत किया, लेकिन यह भी कहा कि इनका कार्यान्वयन करने से पहले सभी संबंधित पक्षों को विश्वास में लेना आवश्यक था।

मुख्य प्रतिक्रिया

मायावती ने बताया कि इन नियमों का विरोध मुख्यतः

सामान्य वर्ग (सवर्ण) के कुछ व्यक्तियों द्वारा किया जा रहा है, जिनकी जातिवादी सोच है। उन्होंने इसे ‘नाजायज’ और ‘जातिवादी’ करार दिया, क्योंकि ये लोग नियमों को एक साजिश या भेदभाव के रूप में देख रहे हैं।

उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि ये नियम सरकारी और निजी कॉलेजों में जाति-आधारित भेदभाव को समाप्त करने के लिए बनाए गए हैं। हालांकि, सामाजिक तनाव से बचने के लिए नियमों को लागू करने से पहले व्यापक विचार-विमर्श होना चाहिए था।

मायावती ने दलितों और OBC वर्गों से अपील की कि वे स्वार्थी और अवसरवादी नेताओं के भड़काऊ बयानों से प्रभावित न हों, जो गंदी राजनीति कर रहे हैं। ऐसे लोगों से दूर रहना चाहिए और सतर्क रहना चाहिए।

UGC के नए नियम

UGC ने 13 जनवरी 2026 को “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” अधिसूचित किए, जो 2012 के पुराने नियमों को प्रतिस्थापित करते हैं। इसके मुख्य प्रावधान निम्नलिखित हैं:

सभी उच्च शिक्षा संस्थानों (सरकारी और निजी) में इक्विटी कमेटी का गठन अनिवार्य है।

कमेटी में OBC, SC, ST, दिव्यांग और महिलाओं के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए।

उद्देश्य: कैंपस में जाति, लिंग, दिव्यांगता आदि के आधार पर भेदभाव को रोकना और शिकायतों का त्वरित निपटारा (24 घंटे के भीतर कार्रवाई शुरू करना)।

हर संस्थान में Equal Opportunity Centre (EOC), 24/7 हेल्पलाइन, Equity Squads आदि का गठन आवश्यक है।

नियमों का पालन न करने पर UGC द्वारा सख्त कार्रवाई की जाएगी, जैसे डिग्री रोकना या फंडिंग बंद करना।

विरोध का कारण

छात्रों और कुछ संगठनों ने इन नियमों के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं। आलोचकों का कहना है कि कमेटी में सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व अनिवार्य नहीं है, भेदभाव की परिभाषा अस्पष्ट है, और झूठी शिकायतों पर कार्रवाई का प्रावधान कमजोर है, जिससे दुरुपयोग की संभावना है। कई स्थानों पर #UGCRollback ट्रेंड हुआ और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आश्वासन दिया है कि ये नियम किसी के खिलाफ नहीं हैं और भेदभाव के नाम पर गलत इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा।

भारत ऊर्जा सप्ताह 2026: ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता पर चर्चा…

0

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भारत ऊर्जा सप्ताह (IEW) 2026 के उद्घाटन पर कहा कि ऊर्जा की उपलब्धता एक बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए जीवन रेखा है और यह राष्ट्रीय स्थिरता का मुद्दा है।

उन्होंने बताया कि भारत ने हाल की वैश्विक उथल-पुथल के दौरान स्रोतों का विविधीकरण, आपूर्तिकर्ताओं के भूगोल का विस्तार और ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में सुधार करके कोई कमी नहीं आने दी।

एक उच्च-स्तरीय मंत्री पैनल ने ‘अनिश्चितता के बीच मार्ग प्रशस्त करना: एक उथल-पुथल भरे विश्व में सस्ती, सुलभ और स्थायी ऊर्जा की सुरक्षा’ विषय पर चर्चा की। इस पैनल में वरिष्ठ नीति निर्माताओं ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव को कैसे संभाला जाए, इस पर विचार-विमर्श किया।

पुरी के साथ इस पैनल में कनाडा के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्री टिम हॉजसन और अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा फोरम के महासचिव जसीम अल शिरावी शामिल थे। चर्चा में यह बात सामने आई कि विश्वभर में ऊर्जा प्रणालियाँ भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक गतिशीलता में बदलाव और संक्रमण की तेज गति के कारण दबाव में हैं। वक्ताओं ने सहमति व्यक्त की कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं से बढ़ती मांग ने ऊर्जा सुरक्षा, सस्ती कीमत और स्थिरता को प्राथमिकता दी है, और कोई एकल समाधान सभी देशों के लिए उपयुक्त नहीं है।

पुरी ने भारत की महत्वाकांक्षा को उजागर करते हुए प्राकृतिक गैस के हिस्से को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया और वैश्विक सहयोग, निवेश और यथार्थवादी संक्रमण मार्गों की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने चेतावनी दी कि विश्व की ऊर्जा संक्रमण को अचानक प्रतिस्थापन के बजाय जोड़ने के माध्यम से प्रबंधित किया जाना चाहिए, क्योंकि पूर्वानुमानित बाजारों का हित दोनों उत्पादकों और उपभोक्ताओं के लिए साझा है।

कनाडा के टिम हॉजसन ने बताया कि एक विखंडित व्यापारिक वातावरण ने विश्वसनीय साझेदारियों और विविध आपूर्ति श्रृंखलाओं को पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। उन्होंने कहा कि कनाडा, जो तेल, गैस और महत्वपूर्ण खनिजों का प्रमुख उत्पादक है, भारत के साथ LNG, महत्वपूर्ण खनिजों, तेल आपूर्ति और दीर्घकालिक ऊर्जा व्यापार में सहयोग बढ़ाने के लिए उत्सुक है। उन्होंने यह भी कहा कि मध्य शक्तियों को मुक्त व्यापार और विश्वसनीय ऊर्जा संबंधों को बनाए रखने के लिए एक साथ काम करना चाहिए।

शेयर बाजार में बजट 2026-27 की चिंता: LTCG टैक्स में बदलाव की आशंका…

0

बजट 2026-27 की तैयारी में बाजार की बेचैनी

केंद्रीय बजट 2026-27 के आगमन के साथ ही शेयर बाजार में अनिश्चितता का माहौल बढ़ गया है। निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बदलाव कर सकती हैं, खासकर जब बाजार पहले से ही कमजोर स्थिति में है।

बजट पेश करने की तारीख

वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट 1 फरवरी 2026 (रविवार) को सुबह 11 बजे संसद में प्रस्तुत किया जाएगा। यह निर्मला सीतारमण का लगातार नौवां बजट होगा, जो भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें 31 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण भी पेश किया जाएगा।

कैपिटल गेंस टैक्स पर चिंता

बाजार के विशेषज्ञों और निवेशकों की चिंता का मुख्य कारण कैपिटल गेंस टैक्स है। वर्तमान में, इक्विटी शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड्स पर लागू टैक्स इस प्रकार है:

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG): 12 महीने से अधिक होल्डिंग पर ₹1.25 लाख तक की छूट के बाद 12.5% टैक्स।

शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG): 20% टैक्स।

बाजार में विश्वास की कमी

2024 के बजट में टैक्स बढ़ोतरी के बाद से बाजार में विश्वास में कमी आई है। निवेशक चिंतित हैं कि सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए LTCG छूट सीमा को और कम कर सकती है या दरों में बदलाव कर सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार स्थिरता बनाए रखने के लिए कोई बड़ा बदलाव नहीं करेगी, क्योंकि इससे बाजार में और गिरावट आ सकती है।

निवेशकों की मांग

कई ब्रोकरेज और उद्योग निकायों ने LTCG छूट को ₹2 लाख तक बढ़ाने की मांग की है, ताकि छोटे निवेशकों को राहत मिले और दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहन मिले। लेकिन अधिकांश विश्लेषकों का मानना है कि बजट में टैक्स ढांचे में स्थिरता बनी रहेगी, क्योंकि बाजार पहले से ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितताओं से प्रभावित है।

बाजार पर दबाव

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली से बाजार पर दबाव बना हुआ है। हाल के दिनों में सेंसेक्स और निफ्टी में उतार-चढ़ाव देखा गया है, और निवेशक बजट से पहले सतर्कता बरत रहे हैं।

विशेषज्ञों की सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि बजट में फिस्कल कंसॉलिडेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान और मध्यवर्ग को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन कैपिटल मार्केट टैक्स में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया जाएगा। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बजट तक अपनी पोजिशन हल्की रखें और दीर्घकालिक होल्डिंग पर ध्यान केंद्रित करें।

बजट सत्र की शुरुआत: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संबोधन…

0

राष्ट्रपति का ऐतिहासिक संबोधन

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित किया, जिससे बजट सत्र की औपचारिक शुरुआत हुई।

यह कार्यक्रम भव्य समारोह और राजनीतिक उत्साह के बीच आयोजित किया गया।

राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय राजधानी में एक धुंधली सुबह में छह घोड़ों द्वारा खींची जाने वाली औपचारिक बग्घी में संसद पहुंचीं, जहां उन्हें घुड़सवार राष्ट्रपति गार्ड द्वारा escorted किया गया।

संसद परिसर के लॉन में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, इसके बाद उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने उन्हें लोकसभा कक्ष में escorted किया।

उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष ने राष्ट्रपति का स्वागत संसद भवन के गजा द्वार पर किया, जहां से जुलूस लोकसभा कक्ष की ओर बढ़ा, जिसमें ‘सेंगोल’ ले जाने वाले अधिकारी ने नेतृत्व किया, जिसे सरकार ने सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में अपनाया है।

राष्ट्रपति के आगमन से पहले, लोकसभा के एक वरिष्ठ मार्शल ने पारंपरिक वेशभूषा में ‘सेंगोल’ को हटाया और ढोल की थाप के बीच एक जुलूस का नेतृत्व किया।

अपने संबोधन में, राष्ट्रपति मुर्मू ने संघ सरकार की प्रमुख उपलब्धियों को उजागर किया, जिसमें बुनियादी ढांचे, सामाजिक न्याय और शासन सुधारों पर जोर दिया गया।

जैसे ही राष्ट्रपति ने अपना संबोधन शुरू किया, विपक्षी बेंचों से हंगामा हुआ।

फिर भी, मुर्मू ने सामाजिक न्याय के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया, यह बताते हुए कि सामाजिक सुरक्षा लाभ अब लगभग 95 करोड़ नागरिकों तक पहुंच चुके हैं।

उन्होंने कहा, “मेरी सरकार सच्चे सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध है,” और बताया कि पिछले 10 वर्षों में लगभग 25 करोड़ भारतीय गरीबी से बाहर निकल चुके हैं।

उन्होंने हाल ही में शुरू की गई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की प्रशंसा की, जो असम के कामाख्या को पश्चिम बंगाल के हावड़ा से जोड़ती है, इसे भारतीय रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

राष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि भारतीय रेलवे, जो गरीब और मध्यम वर्ग की बड़ी संख्या की सेवा करता है, 100% विद्युतीकरण के करीब है।

उन्होंने दिल्ली और आइजोल के बीच सीधी रेल कनेक्टिविटी की शुरुआत का भी जिक्र किया, जब राजधानी एक्सप्रेस को झंडी दिखाकर रवाना किया गया, और मिजोरम की राजधानी में ट्रेन के पहुंचने पर जो खुशी और उत्साह देखा गया, उसे याद किया।

महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को उजागर करते हुए, मुर्मू ने कहा कि भारत ने चेनाब नदी पर दुनिया का सबसे ऊंचा आर्च पुल और तमिलनाडु में नया पंबन पुल बनाने में रिकॉर्ड स्थापित किया है।

उन्होंने वंदे भारत नेटवर्क के तेजी से विस्तार पर भी जोर दिया, यह बताते हुए कि अब देश भर में 150 से अधिक ऐसी ट्रेनें चल रही हैं, जम्मू और कश्मीर से लेकर केरल तक।

अपने संबोधन में, राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार, जो अब अपने तीसरे कार्यकाल में है, गरीबों को और सशक्त बनाने के लिए काम कर रही है और भ्रष्टाचार से निपटने में भी सफल रही है।

राष्ट्रपति का यह संबोधन बजट सत्र के लिए एक दिशा निर्धारित करता है, जिसमें आने वाले हफ्तों में आर्थिक नीति, कल्याणकारी उपायों और शासन प्राथमिकताओं पर तीव्र बहस की उम्मीद है।