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Republic Day 2026: ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार कॉम्बैट परेड, कर्तव्य…

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26 जनवरी 2026 को मनाया जा रहा गणतंत्र दिवस भारत के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है. इस बार कर्तव्य पथ पर होने वाली गणतंत्र दिवस परेड पारंपरिक सेरेमोनियल स्वरूप से हटकर पूरी तरह कॉम्बैट थीम पर आधारित होगी.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहला गणतंत्र दिवस होगा, जिसमें भारत अपनी वास्तविक युद्ध-तैयारी और आधुनिक सैन्य सोच का सीधा प्रदर्शन करेगा. यह बदलाव केवल परेड की शैली तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की बदलती रक्षा रणनीति और तीनों सेनाओं की संयुक्त युद्ध क्षमता को दर्शाता है.

गणतंत्र दिवस परेड 2026 में पहली बार थलसेना, वायुसेना और नौसेना के मार्चिंग दस्ते पारंपरिक वर्दी के बजाय पूरी तरह लड़ाकू भूमिका में नजर आएंगे. कर्तव्य पथ पर तीनों सेनाएं संयुक्त रूप से युद्ध-तैयार स्वरूप में मार्च करती दिखाई देंगी. यह परेड भारत की इंटीग्रेटेड डिफेंस अप्रोच का स्पष्ट संकेत मानी जा रही है. अब तक गणतंत्र दिवस परेड में सेरेमोनियल अनुशासन और परंपरा को प्राथमिकता दी जाती रही है, लेकिन इस बार फोकस वास्तविक युद्ध स्थितियों के प्रदर्शन पर होगा.

जंग के मैदान जैसी बैटल एरे का प्रदर्शन

इस वर्ष की परेड में कर्तव्य पथ को एक तरह से युद्ध क्षेत्र की तरह प्रस्तुत किया जाएगा. भारतीय सेना की बैटल एरे इस तरह दिखाई जाएगी, जैसे सैनिक वास्तविक युद्ध में तैनात हों. इसमें विशेष बलों की इकाइयां, इन्फैंट्री और स्काउट्स के दस्ते, मुख्य युद्धक टैंक, भारी तोपें, रॉकेट सिस्टम और मिसाइल प्लेटफॉर्म शामिल होंगे.

कैवलरी भी बदलेगी परंपरा, दिखेगी कॉम्बैट गियर में

अब तक गणतंत्र दिवस परेड में कैवलरी यानी घुड़सवार टुकड़ी पारंपरिक सेरेमोनियल पोशाक में दिखाई देती रही है. लेकिन 2026 में यह परंपरा भी बदलेगी. इस बार कैवलरी यूनिट युद्ध-तैयारी की वेशभूषा में, कॉम्बैट गियर के साथ कर्तव्य पथ पर मार्च करेगी.

ऑपरेशन सिंदूर में उपयोग हुए हथियारों की झलक

गणतंत्र दिवस परेड 2026 में उन आधुनिक हथियार प्रणालियों को भी प्रदर्शित किया जाएगा, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इसमें ड्रोन वॉरफेयर सिस्टम, एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम और अत्याधुनिक सर्विलांस व टार्गेटिंग उपकरण शामिल होंगे. यह प्रदर्शन भारत की तकनीक-आधारित और नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध क्षमता को सामने लाएगा, जहां सूचना, निगरानी और सटीक हमले की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है.

‘समाज एकजुट हुआ तो 300 सीटें जीतेंगे’, चंद्रशेखर आजाद का दावा…

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उत्तर प्रदेश के आगरा में जीआईसी ग्राउंड में रविवार (25 जनवरी) आजाद समाज पार्टी की ओर से एक विशाल रैली आयोजित की गई, जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद शामिल हुए.

रैली में उन्हें सुनने के लिए हजारों की संख्या में लोग पहुंचे. जैसे ही चंद्रशेखर आजाद मंच पर पहुंचे, जनता की ओर से जमकर नारे लगाए गए. रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने मुस्लिम समाज से आजाद समाज पार्टी के साथ जुड़ने की अपील की और कहा कि मुस्लिम समाज पार्टी के साथ खड़ा हो जाए, 15 दिन में माहौल बदलने वाला है. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार बनी तो बहन और बेटियों की तरफ बुरी नजर रखने वालों को किसी लायक नहीं छोड़ा जाएगा.

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि प्रदेश में सरकार बनने पर 5 किलो राशन मिले या नहीं, लेकिन अच्छी शिक्षा, अच्छा उपचार और रोजगार जरूर मिलेगा. सरकार धर्म के नाम पर लोगों को लड़ाना चाहती है, जबकि हमारी सरकार बनने पर अधिकारी आपकी सुनवाई करेंगे. अमीरों की तिजोरी से पैसा निकालकर गरीबों को दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि अगर समाज एकजुट हो जाए तो प्रदेश में 300 सीटें जीतेंगे. रैली में एक बड़ा जनसैलाब देखने को मिला और लोगों में खासा उत्साह नजर आया.

अविमुक्तेश्वरानंद से वैचारिक मतभेद

रैली के बाद मीडिया से बातचीत में चंद्रशेखर आजाद ने प्रयागराज में संत अविमुक्तेश्वरानंद के मामले पर कहा कि उनसे वैचारिक मतभेद हैं, क्योंकि वे मनुस्मृति को मानते हैं और हम संविधान को मानते हैं, लेकिन प्रयागराज में जो हुआ वह गलत था. छोटे ब्रह्मचारियों के बाल पकड़ कर डंडों से पीटा गया, इसके लिए सरकार को माफी मांगनी चाहिए.

यूजीसी बिल का किया समर्थन

यूजीसी को लेकर चंद्रशेखर ने कहा कि नए नियमों का विरोध वही लोग कर रहे हैं जिन्होंने नियम पढ़े नहीं हैं. 2027 समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि सत्ता में आने पर अति पिछड़ा वर्ग को 15 प्रतिशत अलग से आरक्षण, निजी क्षेत्र में आरक्षण, बेहतर चिकित्सा, अच्छी शिक्षा, मजबूत कानून व्यवस्था लागू की जाएगी और महंगाई को कमजोर किया जाएगा. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि व्यापारियों से छापे के नाम पर अधिकारी रिश्वतखोरी कर रहे हैं.

T20 वर्ल्ड कप से पहले भारत के लिए आई खुशखबरी, फिट हुआ धाकड़ बल्लेबाज;

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टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए भारतीय क्रिकेट टीम पूरी तरह तैयार हैं. इस बड़े टूर्नामेंट से पहले भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ 5 मैचों की टी20 सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त बना ली है. पहले मैच को छोड़कर अन्य दोनों मुकाबलों में टीम ने एकतरफा जीत हासिल की, बीते रविवार को तो टीम ने 154 के लक्ष्य को 10 ही ओवरों में पूरा कर लिया.

अभिषेक शर्मा शानदार लय में हैं, तो वहीं कप्तान सूर्यकुमार यादव भी शानदार फॉर्म में लौट आए हैं. इस बीच टीम के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई, तिलक वर्मा फिट हो गए हैं.

तिलक वर्मा टी20 वर्ल्ड कप 2026 का हिस्सा हैं, जो पेट की समस्या के चलते टीम से बाहर चल रहे हैं. वैसे टीम में अभिषेक शर्मा, ईशान किशन, सूर्यकुमार यादव जैसे विस्फोटक बल्लेबाज हैं, लेकिन भारतीय टीम की ताकत ये हैं कि अगर टीम का टॉप आर्डर फ्लॉप हो जाए तो मिडिल आर्डर के बल्लेबाज रनों की गति को ध्यान में रखते हुए अच्छी पारियां खेलते हैं. हार्दिक पांड्या, तिलक वर्मा ऐसे ही मिडिल आर्डर बल्लेबाज हैं.

5वां टी20 खेल सकते हैं तिलक वर्मा

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार तिलक वर्मा 31 जनवरी को होने वाले तिरुवनंतपुरम में न्यूजीलैंड के खिलाफ पांचवें टी20 में उपलब्ध रहेंगे. बता दें कि विजय हजारे ट्रॉफी के दौरान उनके पेट का ऑपरेशन हुआ था, जिसके बाद डॉक्टर्स ने उन्हें 2 हफ्ते आराम करने को कहा था. वह बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में फिट होने के लिए मेहनत कर रहे हैं. वैसे टीम मैनेजमेंट नहीं चाहता कि तिलक की वापसी में कोई जल्दबाजी की जाए, इसके बजाय वह चाहते हैं कि तिलक टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए पूरी तरह फिट हो जाएं.

ट्रेनिंग शुरू कर चुके हैं तिलक

बीसीसीआई ने पहले बताया था कि तिलक वर्मा फिजिकल ट्रेनिंग शुरू कर चुके हैं. उनके सिम्प्टम्स पूरी तरह से सही हो जाएंगे और घाव ठीक होने की प्रक्रिया संतोषजनक होगी तब वह धीरे-धीरे स्किल-बेस्ड एक्टिविटीज में लौटेंगे. बीसीसीआई के सचिव देवजीत सैकिया ने उनको लेकर कहा था कि न्यूजीलैंड के खिलाफ शुरूआती 3 मैचों से वह बाहर हैं, ट्रेनिंग और स्किल फेज में उनकी प्रोग्रेस के आधार अन्य 2 मैचों में उनकी उपलब्धता पर फैसला लिया जाएगा.

टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत का स्क्वॉड

सूर्यकुमार यादव (कप्तान), अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, संजू सैमसन, शिवम दुबे, इशान किशन, हार्दिक पंड्या, अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमराह, हर्षित राणा, वरुण चक्रवर्ती, कुलदीप यादव, एक्सर पटेल, वाशिंगटन सुंदर, रिंकू सिंह.

गणतंत्र दिवस की परेड में यूपी की झांकी ने सभी को चौंकाया, कालिंजर किले…

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उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ आधुनिकता के संगम ने आज गणतंत्र दिवस के मौके पर नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर प्रदेश की झांकी ने सभी को मंत्र-मुग्ध कर दिया. बुंदेलखंड की प्राचीन विरासत और आधुनिक उत्तर प्रदेश का अनूठा संगम देख लोग तालियां बजाते हुए अपने स्थानों से खड़े होने पर मजबूर हो गए.

प्रदेश की झांकी की थीम ‘बुंदेलखंड की शाश्वत भव्यता’ पर आधारित थी.

प्रदेश की झांकी के सामने वाले हिस्से में एकमुखी शिवलिंग (कालिंजर की प्रसिद्ध मूर्तियों में से एक) का भव्य चित्रण नजर आ रहा था. यह बुंदेलखंड की गहरी आध्यात्मिकता और असाधारण वास्तुकला विरासत का उदहारण है. बीच का हिस्सा इस क्षेत्र की जीवित शिल्प परंपराओं को उजागर करता है, मिट्टी के बर्तन (मृद्भांड कला), मनके का काम (मनका शिल्प) और जीवंत स्थानीय हाट. ये सभी वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के अंतर्गत आते हैं, जो बुंदेलखंड की सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक आत्मनिर्भरता की रीढ़ हैं.

कालिंजर किले का शानदार चित्रण

झांकी में मुख्य आकर्षण का केंद्रकालिंजर किले का शानदार जीवंत चित्रण था, जिसके अन्दर नक्काशीदार पत्थर के खंभे, द्वार और ऐतिहासिक भव्यता को जीवंत किया गया था. ट्रेलर के पिछले हिस्से में नीलकंठ महादेव मंदिर का पूजनीय दृश्य था, जो क्षेत्र के आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करता है.

बुन्देली लोक नृत्य ने झांकी को जीवंत बनाया

झांकी में पारंपरिक बुंदेली लोक नर्तकों ने रंग-बिरंगे परिधानों, लय और गति से जीवंत बनाय दिया. यह बुन्देलखंड की सांस्कृतिक पहचान को बिलकुल सजीव दर्शा रही थी. इसके बाद झांकी आधुनिक उत्तर प्रदेश के शक्तिशाली चित्रण में बदल गई, कालिंजर किले से प्रेरित वास्तुकला के मुखौटे के अंदर एक्सप्रेसवे, औद्योगिक विकास, विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा और नए जमाने के विनिर्माण के दृश्य आकर्षित कर रहे थे.

कुल मिलकर उत्तर प्रदेश की झांकी ने इस बार कर्तव्य पथ पर इतिहास रच दिया. इस झांकी के जरिये प्रदेश के विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प को प्रस्तुत किया कि किस प्रकार उत्तर प्रदेश आज अपनी संस्कृति के साथ आधुनिकता से कदम मिला रहा है.

70 प्रतिशत टैरिफ घटाएगा भारत…. इंडिया-EU ट्रेड डील के बीच 27 देशों…

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भारत यूरोपीयन यूनियन (EU) देशों की कारों पर टैरिफ घटाकर 40 प्रतिशत तक कर सकता है. अभी 110 प्रतिशत टैरिफ लागू है. अमेरिका की टैरिफ धमकियों के बीच भारत की यूरोपीयन यूनियन के साथ मंगलवार (27 जनवरी, 2026) को ट्रेड डील होने वाली है, जिसे मदर ऑफ द डील्स भी कहा जा रहा है.

कुछ दिन पहले ही ईयू ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील सस्पेंड करने का फैसला किया था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर नियंत्रण चाहते हैं और कई ईयू देश इसके खिलाफ हैं. वह खुलकर इस फैसले की आलोचना भी कर चुके हैं, जिसके बाद ट्रंप ने फरवरी से आठ ईयू देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है.

10 प्रतिशत तक हो सकता है टैरिफ

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार दो सूत्रों ने बताया है कि भारत सरकार यूरोपीयन यूनियन के 27 देशों की कारों पर टैरिफ में तत्काल कटौती करने के लिए तैयार हो गई है. उन्होंने यह भी बताया कि यह टैरिफ आने वाले समय में और घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया जाएगा. इस तरह यूरोपीय ऑटोमोबाइल कंपनियों जैसे फॉक्सवेगन, मर्सडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू के लिए इंडियन मार्केट में पहुंच आसान हो जाएगी.

सूत्रों ने नाम न बताने की शर्त पर यह जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि यह बेहद गोपनीय जानकारी है, जिसमें लास्ट-मिनट पर बदलाव भी हो सकते हैं. हालांकि, भारतीय वाणिज्य मंत्रालय और यूरोपीयन कमीशन ने इस पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है.

27 जनवरी को भारत और ईयू के बीच साइन होगा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट

भारत और यूरोपीय यूनियनके बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 27 जनवरी को साइन हो सकता है. इसे दोनों पक्षों की ओर से ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है और इससे भारत की ईयू के साथ ट्रेड सरप्लस साल 2031 तक 51 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच एफटीए पर बातचीत करीब एक दशक पहले शुरू हुई थी, लेकिन दुनिया में बढ़ती व्यापारिक अनिश्चितता को देखते हुए दोनों देशों ने इसे तेजी से आगे बढ़ाया है.

एमके ग्लोबल की ओर से रविवार को जारी एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौता ईयू के साथ भारत की व्यापारिक स्थिति को काफी मजबूत कर सकता है. इस समझौते से वित्त वर्ष 2031 तक यूरोपीय संघ के साथ भारत का ट्रेड सरप्लस 50 अरब डॉलर से अधिक बढ़ सकता है, जिससे भारत के कुल निर्यात में ईयू संघ की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2025 के 17.3 प्रतिशत की तुलना में बढ़कर लगभग 22-23 प्रतिशत हो सकती है, जिससे भारत की निर्यात वृद्धि को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा. हालांकि, वर्तमान में ईयू के निर्यात बाजार में भारत की हिस्सेदारी केवल 0.8 प्रतिशत है, फिर भी यह समझौता यूरोप के लिए भी तेजी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है.

Shashi Tharoor News: शशि थरूर हुए नाराज तो बढ़ेगी कांग्रेस की टेंशन…

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केरल में सब कुछ ठीक नहीं है। कांग्रेस की तमाम कोशिशों के बावजूद वरिष्ठ नेता शशि थरूर पार्टी के लिए नई मुश्किलें पैदा कर रहे हैं। पार्टी जहां सरकार पर संविधान के ऊपर हमला करने का आरोप लगा रही है, वहीं थरूर ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संविधान को पवित्र मानते हैं।

इसके साथ उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र करते हुए केंद्र सरकार के रुख की वकालत की है।

शशि थरूर की पार्टी से नाराजगी कोई नई बात नहीं है। केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता वाली बैठक से भी थरूर दूर रहे थे। उस वक्त पार्टी ने दलील दी थी कि केरल लिटरेचर फेस्टिवल में शशि थरूर की दो किताबों का विमोचन है, इसलिए वह शामिल नहीं हुए। पर, केरल के कोझिकोड में हुए इस फेस्टिवल में उनके बयान से विवाद बढ़ गया है।

प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि शशि थरूर के बयानों से पार्टी की मुश्किलें बढ़ रही हैं। वह लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं, जो पार्टी लाइन से अलग हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित तमाम नेता सरकार पर संविधान के ऊपर हमले करने के आरोप लगा रहे हैं, पर थरूर सार्वजनिक तौर पर संविधान को लेकर सरकार का बचाव कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ कर रहे हैं।

केरल में कुछ माह बाद विधानसभा चुनाव हैं। पार्टी पिछले 10 वर्षों से सत्ता से बाहर है। पार्टी की स्थानीय निकाय चुनाव में अच्छे प्रदर्शन से भी उम्मीद जगी है। पर, थरूर के बयानों से भ्रम की स्थिति पैदा होती है। तिरुवनंतपुरम से थरूर लगातार चार बार लोकसभा चुनाव जीते हैं, पर निगम चुनाव में इस सीट से भाजपा ने जीत हासिल की है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में भी एलडीएफ का प्रदर्शन बेहतर था।

ऐसे में तिरुवनंतपुरम क्षेत्र की 14 विधानसभा सीट को लेकर पार्टी रणनीतिकारों की धड़कनें बढ़ रही हैं। कांग्रेस नेता मानते हैं कि इन सीटों पर बेहतर प्रदर्शन के लिए शशि थरूर को जिम्मेदारी संभालनी होगी। इसलिए, संसद के बजट सत्र में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी थरूर से सीधा मुलाकात कर सकते हैं। तिरुवनंतपुरम के सांसद भी काफी दिनों से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से बात करने की मांग करते रहे हैं।

अचानक भारत आए नाहयान और पाकिस्तान को दे दिया बड़ा झटका…

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बीते दिनों संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने अचानक भारत का दौरा कर सबको चौंका दिया था। इस यात्रा के दौरान भारत और यूएई के बीच कई समझौते भी हुए, जिनमें सबसे अहम रहा- दोनों देशों के बीच हुआ ऐतिहासिक रक्षा समझौता।

इस समझौते को पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच बीते साल हुई डिफेंस डील का करारा जवाब माना जा रहा है। इन सब के बाद अब नाहयान की इस यात्रा का असर भी दिखने लगा है। इस दौरे के कुछ ही दिनों बाद यूएई ने पाकिस्तान को झटका देते हुए इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन की योजना से खुद को अलग कर लिया है। यह समझौता अगस्त 2025 में हुआ था।

पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक यूएई ने इस प्रोजेक्ट से कदम पीछे खींच लिए हैं और एयरपोर्ट संचालन के लिए किसी लोकल पार्टनर का चयन भी नहीं किया। ऐसे में इस डील को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब यूएई और सऊदी अरब के रिश्तों में खटास बढ़ती जा रही है और पाकिस्तान सऊदी से नजदीकियां बढ़ा रहा है।

पाक से क्यों उखड़ा यूएई का मन?

करीब चार दशक पहले तक यूएई पाकिस्तान के सबसे बड़े ट्रेडिंग पार्टनर्स में से एक था। यूएई में काम करने वाले लाखों पाकिस्तानी नागरिकों से भेजी जाने वाली रेमिटेंस भी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा रही है। दोनों देशों ने रक्षा, ऊर्जा और निवेश जैसे क्षेत्रों में भी साथ काम किया था। हालांकि समय के साथ सुरक्षा चिंताओं, लाइसेंस विवादों और पाकिस्तान की हरकतों की वजह से यूएई का मन पाक से उखड़ गया।

हाल की रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई है कि खराब गवर्नेंस और राजनीतिक दखल के कारण पाकिस्तान के सरकारी उपक्रमों को भारी नुकसान हो रहा है। इसके बाद इन्हें सस्ते दामों पर बेचने की नौबत भी आई है। इसी क्रम में पिछले साल शहबाज शरीफ सरकार ने पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस को भी निजी हाथों में बेच दिया था। ऐसे हालात में पाकिस्तान पर भरोसा करना मुश्किल है। यही वजह है कि यूएई समझौते से पीछे हट गया है।

भारत-यूएई के बीच अहम समझौता

इसके उलट भारत यात्रा के बाद यूएई और भारत के रिश्तों में और मजबूती देखने को मिली है। इस दौरे के बाद यूएई ने 900 भारतीय कैदियों को रिहा करने को मंजूरी दी, जिसे भारत के प्रति एक बड़ा सद्भावना कदम माना जा रहा है। वहीं भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद ने द्विपक्षीय सहयोग के हर पहलू की समीक्षा की। दोनों देशों के बीच कई अहम साझेदारियां हुई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नाहयान ने दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार को 2032 तक 200 अरब अमेरिकी डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वहीं भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने एक रणनीतिक रक्षा साझेदारी की योजना भी पेश की है, जिसे बेहद अहम माना जा रहा है।

‘हम दुनिया को…’, रिपब्लिक डे पर EU चीफ ने भारत को लेकर क्या कहा…

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भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर अंतिम मुहर लगाने की दिशा में बड़ा कदम उठता दिख रहा है. इसी क्रम में भारत दौरे पर पहुंचीं यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने रविवार को अहम बयान देते हुए कहा कि भारत और यूरोप ने रणनीतिक साझेदारी, संवाद और खुलेपन का स्पष्ट विकल्प चुना है.

उन्होंने इस प्रस्तावित समझौते को दुनिया के लिए उम्मीद की किरण बताया.

रणनीतिक साझेदारी का स्पष्ट संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली शिखर वार्ता से पहले वॉन डेर लेयेन ने कहा कि भारत और यूरोप की यह साझेदारी पूरी दुनिया को एक मजबूत संदेश दे रही है. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘भारत और यूरोप ने एक स्पष्ट विकल्प चुना है,रणनीतिक साझेदारी, संवाद और खुलेपन का विकल्प. अपनी ताकतों का लाभ उठाना और आपसी समझ बनाना. हम एक विभाजित दुनिया को दिखा रहे हैं कि यह रास्ता भी संभव है.’

गणतंत्र दिवस समारोह में EU के शीर्ष नेता होंगे मुख्य अतिथि

गौरतलब है कि यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा सोमवार को भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. वहीं एंटोनियो कोस्टा ने भारत को यूरोपीय संघ का एक अहम साझेदार बताया. यूरोपीय संघ के एक संक्षिप्त बयान में कोस्टा के हवाले से कहा गया, ‘साथ मिलकर हम नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की रक्षा करने की क्षमता और जिम्मेदारी साझा करते हैं.

जयशंकर ने जताई नई शुरुआत की उम्मीद

इस बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को यूरोपीय संघ के दोनों शीर्ष नेताओं से मुलाकात की. उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय शुरू करेगा. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा, ‘यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन का भारत में स्वागत करते हुए मुझे बेहद खुशी हो रही है. 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में पाकर हम सम्मानित महसूस कर रहे हैं. मुझे पूरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी आगामी चर्चा भारत-यूरोपीय संघ संबंधों में एक नया अध्याय शुरू करेगी.

सभी समझौतों की जननी

इससे पहले 20 जनवरी को दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान भी वॉन डेर लेयेन ने इस प्रस्तावित समझौते को लेकर बड़ा बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि भारत और यूरोपीय संघ एक ऐसे ऐतिहासिक व्यापार समझौते की दहलीज पर हैं, जिससे दो अरब लोगों का विशाल बाजार बनेगा और जो वैश्विक जीडीपी के लगभग एक चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करेगा. उन्होंने इस समझौते को ‘सभी समझौतों की जननी’ करार दिया था.

136 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार

उल्लेखनीय है कि बीते कुछ वर्षों में भारत और यूरोपीय संघ के बीच संबंध लगातार मजबूत हुए हैं. यूरोपीय संघ, एक समूह के रूप में, वस्तुओं के मामले में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच कुल वस्तु व्यापार लगभग 136 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें करीब 76 अरब डॉलर का निर्यात और लगभग 60 अरब डॉलर का आयात शामिल है.

‘संविधान से ही देश की ताकत…’, गणतंत्र दिवस पर मौलाना खालिद रशीद…

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देश में आज गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और उमंग के साथ राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जा रहा है. इस मौके पर लखनऊ में प्रमुख इस्लामिक विद्वान मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने भी देशवासियों को बधाई देते हुए देश की खुशहाली और तरक्की के लिए जुटने की अपील की.

मौलाना ने कहा कि आज का दिन हमे यह याद दिलाता है कि हम एक लोकतांत्रिक राष्ट्र हैं और हमारी शक्तियां हमारे संविधान में निहित हैं. आज की पीढ़ी को यह जानना बहुत जरूरी है.

अपने संदेश में मौलाना खालिद रशीदी ने कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपनी नई पीढ़ी को अपने देश के संविधान के बारे में जागरूक और शिक्षित करें. सभी को यह पता होना चाहिए की हमारे संविधान की मूल प्रस्तावना क्या है और उसका उद्देश्य क्या है. उन्होंने बताया कि संविधान सबको एक नजरिये से देखता है.

गणतन्त्र दिवस पर दिया सन्देश

मौलाना खालिद रशीदी फरंगी महली उत्तर प्रदेश और देश के प्रमुख इस्लामिक विद्वानों में शुमार हैं. वे हमेशा आपसी सद्भाव और भाईचारे की बात करते हैं. गणतंत्र दिवस पर बधाई देकर उन्होंने सभी को संविधान के मुताबिक साथ रहकर कार्य करने की अपील की है. वे अक्सर महत्वपूर्ण पर्वों और राष्ट्रीय पर्वों पर ऐसे सन्देश देते हैं.

प्रदेश वासियों को सीएम योगी ने दी शुभकामनाएं

इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में गणतंत्र दिवस के मौके पर ध्वजारोहण के बाद प्रदेश वासियों को बधाई देते हुए देश सेवा का संकल्प लिया. सीएम ने कहा, “हर भारतीय नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह संविधान के प्रति पूरे विश्वास, सम्मान और समर्पण के साथ काम करे, क्योंकि यह अनुकूल और चुनौतीपूर्ण दोनों परिस्थितियों में देश के लिए मार्गदर्शक शक्ति रहा है. यह बदले में संविधान के प्रति हमारी प्रतिबद्धता और भक्ति को दर्शाता है. हम सभी जानते हैं कि जब भी हम संविधान के मूल मूल्यों और भावना को बनाए रखते हैं, तो हम वास्तव में भारत माता के उन महान सपूतों का सम्मान करते हैं जिनके बलिदान ने एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र की नींव रखी.”

‘अच्छे पड़ोसी और दोस्त…’, गणतंत्र दिवस पर चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग…

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देश के 77वें गणतंत्र दिवस के खास मौके पर पूरी दुनिया की नजरें राजधानी दिल्ली पर हैं। इसी बीच चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भी दोनों देशों के रिश्तों पर बात करते हुए खास संदेश भेजा है।

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कहा कि भारत-चीन एक अच्छे पड़ोसी, दोस्त और पार्टनर्स हैं। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को संदेश भेजते हुए कहा कि भारत-चीन की दोस्ती “ड्रैगन और हाथी का टैंगो” है। ये एक चीनी लोकोक्ति है, जो दो परमाणु संपन्न देशों के बीच अच्छे रिश्तों को दर्शाने के लिए इस्तेमाल होता है।

चीनी राष्ट्रपति ने क्या कहा?

चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति ने आगे कहा कि पिछले कुछ सालों में भारत-चीन के रिश्तों में काफी सुधार आया है। इससे दुनिया में शांति और समृद्धि स्थापित करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने आगे कहा-

हमारा मानना है कि भारत और चीन के लिए अच्छे पड़ोसी, दोस्त और पार्टनर्स बने रहना ही एक बेहतर विकल्प है। ऐसे में हमें उम्मीद है कि दोनों देश अच्छे और स्थिर संबंधों को बढ़ावा देने के लिए एक-दूसरे का सहयोग करेंगे।

भारत-चीन के रिश्ते

बता दें कि ट्रंप के टैरिफ के बीच पिछले कुछ समय में भारत और चीन के संबंधों में सुधार आया है। अक्टूबर 2024 में कजान में आयोजितब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच मुलाकात देखने को मिली थी। 2025 में दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें फिर शुरू हो गई हैं।