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LPG Shortage in CG: गैस रिफिल कराने अचानक जागे छत्तीसगढ़ के लोग! एक ही दिन में दोगुनी हुई सिलेंडर बुकिंग…

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पश्चिम एशिया संकट के चलते पूरे देश में एलपीजी की किल्लत शुरू हो गई है। छत्तीसगढ़ में भी जगह-जगह से घरेलू गैस सिलेंडर की कमी की तस्वीर सामने आ रही है। लोग परेशान हो रहे हैं और इस पर सियासत भी खूब हो रही है, लेकिन क्राइसिस में लोग अब धड़ल्ले से एलपीजी बुकिंग करा रहे हैं। इसके साथ ही कालबाजारी करने वाले लोग भी सक्रिय हो गए हैं।

दरअसल, छत्तीसगढ़ ऑयल कंपनियों की रिपोर्ट बताती है कि छत्तीसगढ़ में घरेलू गैस उपभोक्ताओं की संख्या 66.62 लाख हैं। इनमें से सिर्फ 10 प्रतिशत उपभोक्ता यानी 6.86 लाख उपभोक्ता ही हर महीने एलपीजी सिलेंडर बुक कराते थे। 24.98 लाख यानी 38% उपभोक्ता ऐसे थे जो 1 से 3 महीने में एक सिलेंडर की बुकिंग कराते थे। 19.54 लाख यानी 29% उपभोक्ताओं ने पिछले एक साल कभी भी एक भी सिलेंडर की बुकिंग नहीं कराई। इसी 66.62 लाख उपभोक्ताओं में से 15.22 लाख यानी 23 प्रतिशत उपभोक्ता ऐसे थे जो 6 महीने में एक सिलेंडर बुक कराते थे। इसी आधार पर पश्चिम एशिया युद्ध शुरू होने से पहले छत्तीसगढ़ में हर दिन सिर्फ 74 हजार गैस सिलेंडर की बुकिंग होती थी, लेकिन जैसे ही युद्ध का संकट शुरू हुआ, एक दिन में गैस सिलेंडर की बुकिंग का आंकड़ा 1.42 लाख सिलेंडर की बुकिंग तक चली गई।

जानिए राजधानी रायपुर का हाल

राजधानी रायपुर की बात करें तो यहां हर दिन साढ़े 4 हजार से लेकर 5 हजार गैस सिलेंडर की ही बुकिंग होती थी। युद्ध संकट शुरू हुआ तो एक दिन में बुकिंग का आंकड़ा 16 हजार तक चला गया। आंकड़े साफ साफ बता रहे हैं कि जो लोग कभी सिलेंडर बुक नहीं कराते थे, वहीं लोग अब धड़ल्ले से एलपीजी बुकिंग करा रहे हैं।

कौन है इसके पीछे?

छत्तीसगढ़ 38 लाख यानी एलपीजी उपभोक्ताओं में से आधे से अधिक उपभोक्ता उज्जवला गैस कनेक्शन वाले हैं। इनमें से अधिकांश लोग साल भर में दो चार सिलेंडर ही रिफिल कराते हैं, लेकिन क्राइसिस के दौर में इस कैटेगरी की बुकिंग में अचानक उछाल आया है। माना जा रहा है कि जब होटल, रेस्टॉरेंट, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कॉमर्शियल गैस सप्लाई की आपूर्ति 20 प्रतिशत तक सीमित की गई, तब दूसरे तरीके से रास्ता निकाला गया और समान्य दिनों में जो लोग घरेलू गैस सिलेंडर नहीं लेते थे, उनकी बुकिंग कराकर इस जरूरत को पूरा किया गया। क्राइसिस दौर में जमाखोरी भी बढ़ी और उसके लिए भी इसी कैटेगरी से गैस सिलेंडर को हासिल किया गया।

CG: जमाखोरी के खिलाफ अभियान में 3,841 एलपीजी सिलेंडर जब्त, 97 मामले दर्ज…

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छत्तीसगढ़ में अधिकारियों ने रसोई गैस की जमाखोरी की सूचना पर कार्रवाई करते हुए पिछले दो सप्ताह से अधिक समय के दौरान 3,841 एलपीजी सिलेंडरों को जब्त किया तथा इस संबंध में 97 मामले दर्ज किए। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे रसोई गैस और पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण व वितरण व्यवस्था की लगातार निगरानी सुनिश्चित करें तथा जमाखोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।

अधिकारियों के मुताबिक साय ने पश्चिम एशिया में मौजूदा हालात को ध्यान में रखते हुए आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी संभागायुक्तों, पुलिस महानिरीक्षकों, जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की।

उन्होंने बताया कि बैठक में पेट्रोलियम उत्पादों, एलपीजी सिलेंडर, उर्वरकों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता एवं आपूर्ति व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

साय ने ‘एक्स’ पर कहा, “पश्चिम एशिया की परिस्थितियों के मद्देनजर आज (शनिवार को) निवास कार्यालय में प्रदेश के उच्च अधिकारियों, आयुक्त, आईजी एवं जिलाधिकारियों के साथ पेट्रोलियम उत्पादों, एलपीजी और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता व आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा बैठक की।”

उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ में आवश्यक वस्तुओं, पेट्रोलियम उत्पादों और रसोई गैस की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। आपूर्ति पूरी तरह सुचारू एवं सामान्य है और इसमें किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।”

साय ने कहा, “ अधिकारियों को रसोई गैस व पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण एवं आपूर्ति की सतत निगरानी और जमाखोरी व मुनाफाखोरी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।”

उन्होंने कहा, “ राज्य के प्रत्येक नागरिक तक समय पर सेवाएं पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रदेशवासियों को किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।”

मुख्यमंत्री साय ने बैठक में कहा, ”हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदृष्टि और संवेदनशील नेतृत्व के कारण कोविड-19 महामारी जैसी चुनौतीपूर्ण स्थिति में भी देश एकजुट रहा और सफलतापूर्वक उसका सामना किया। मौजूदा समय में कोविड-19 महामारी जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन सतर्क रहना जरूर है। राज्य में पेट्रोलियम पदार्थों, गैस सिलेंडरों और उर्वरकों की कोई कमी नहीं है, इसलिए नागरिक किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें।”

साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पश्चिम एशिया संकट पर सभी राज्यों के साथ विस्तृत चर्चा की गई है और यह आश्वस्त किया गया है कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुचारू रूप से जारी है। राज्य स्तर पर नियंत्रण केंद्र की स्थापना की गई है तथा उच्चस्तरीय समिति द्वारा स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है।

उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक जिले में भी नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जाए तथा प्रभारी सचिव और जिलाधिकारी नियमित रूप से इसकी समीक्षा करें। अफवाहों और भ्रामक खबरों से बचने के लिए आमजन तक समय पर तथ्यात्मक जानकारी पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिया कि आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। सभी पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों के भंडारण और आपूर्ति की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने अधिकारियों को टीम भावना के साथ कार्य करते हुए हर परिस्थिति में आमजन तक सेवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

अधिकारियों ने बताया कि बैठक में एचपीसीएल, बीपीसीएल और आईओसीएल के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि राज्य में गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है तथा आपूर्ति नियमित रूप से जारी है। गैस सिलेंडरों की ऑनलाइन बुकिंग सामान्य रूप से संचालित है।

अधिकारियों ने बताया कि उज्ज्वला गैस कनेक्शन के लिए 45 दिन तथा सामान्य गैस कनेक्शन के लिए 25 दिन की समय सीमा निर्धारित है और वर्तमान में उसी अंतराल के अनुसार बुकिंग की जा रही है। पेट्रोलियम उत्पादों के परिवहन में भी किसी प्रकार की बाधा नहीं है और पूरे प्रदेश में स्थिति सामान्य है।

CG: सीएम साय ने 79 हजार से अधिक श्रमिकों को एक क्लिक में ट्रांसफर किए 27 करोड़, पेट्रोल-डीजल की किल्लत पर दिया ये बड़ा बयान…

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  • 79,340 निर्माण श्रमिकों और उनके परिजनों को 27.15 करोड़ रुपए DBT से ट्रांसफर।
  • मुख्यमंत्री ने पेट्रोल, डीज़ल और LPG को लेकर अफवाहों पर भरोसा न करने की अपील की।
  • श्रमिकों के लिए 12 योजनाओं का लाभ और कई आर्थिक सहायता योजनाओं की जानकारी दी गई।

जशपुर में आयोजित श्रमिक सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 79 हजार से ज्यादा निर्माण श्रमिकों के खातों में 27.15 करोड़ रुपए की राशि सीधे ट्रांसफर की। इस दौरान उन्होंने ईंधन आपूर्ति को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों पर भी बड़ा बयान दिया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जशपुर में आयोजित जिला स्तरीय श्रमिक सम्मेलन में 79,340 निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिजनों को 27.15 करोड़ रुपए की राशि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बावजूद छत्तीसगढ़ में पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी गैस की उपलब्धता को लेकर किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी ईंधन आवश्यकताओं के लिए आयात पर निर्भर है, लेकिन केंद्र सरकार की प्रभावी विदेश नीति और विभिन्न देशों के साथ मजबूत संबंधों के कारण आपूर्ति पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें और अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जिससे लोगों में अनावश्यक भय और भ्रम का वातावरण बन रहा है।उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें और पेट्रोल, डीज़ल या गैस का अनावश्यक भंडारण न करें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जैसे पहले ईंधन की उपलब्धता बनी रही है, वैसे ही आगे भी निर्बाध रूप से मिलती रहेगी।कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने श्रमिकों के कल्याण के लिए राज्य और केंद्र सरकार द्वारा संचालित 12 विभिन्न योजनाओं का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पंजीकृत श्रमिकों को बच्चे के जन्म पर 20,000 रुपए की सहायता राशि दी जाती है। इसके अलावा मकान निर्माण के लिए 1.5 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। श्रमिकों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ई-रिक्शा खरीदने में भी सहायता दी जा रही है, जिसे पहले 1 लाख रुपए से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपए कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। यदि किसी श्रमिक का बच्चा 10वीं या 12वीं बोर्ड परीक्षा में टॉप-10 में स्थान प्राप्त करता है, तो उसे 2 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

CM Vishnu Deo Sai Jashpur, इसके साथ ही मेधावी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए पहले 100 बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाया जाता था, जिसे अब बढ़ाकर 200 सीट कर दिया गया है।मुख्यमंत्री साय ने बताया कि भूमिहीन कृषि मजदूरों के लिए “दीनदयाल भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना” संचालित की जा रही है, जिसके तहत ऐसे मजदूरों को सालाना 10,000 रुपए की सहायता राशि प्रदान की जाती है। उन्होंने जानकारी दी कि हाल ही में लाखों भूमिहीन मजदूरों के खातों में लगभग 495 करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की गई है।

मुख्यमंत्री साय ने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि जनधन खातों के माध्यम से अब योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुंच रहा है।उन्होंने कहा कि पहले भेजी गई राशि का बड़ा हिस्सा बीच में ही खत्म हो जाता था, लेकिन अब पूरी राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रही है, जिससे पारदर्शिता और विश्वास दोनों मजबूत हुए हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रोविडेंट फंड (PF) प्रणाली को यूनिवर्सल बनाया गया है, जिससे श्रमिक देश के किसी भी हिस्से में काम करने पर अपना पीएफ लाभ जारी रख सकते हैं। PF NEWS इसके अलावा न्यूनतम पेंशन राशि को बढ़ाकर 1000 रुपए किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि ईएसआईसी अस्पतालों के माध्यम से पंजीकृत श्रमिकों को बेहतर और निःशुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन के अंत में श्रमिकों को प्रदेश के विकास की रीढ़ बताते हुए कहा कि उनके परिश्रम और योगदान से ही राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने सभी श्रमिकों का सम्मान करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रदेशभर में आयोजित हो रहे श्रमिक सम्मेलन—श्रम मंत्री

श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरे प्रदेश में श्रमिक सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि श्रमिकों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचे और उन्हें अधिकतम लाभ मिल सके। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों को प्रसूति सहायता के रूप में 20,000 रुपए, मकान निर्माण के लिए आर्थिक सहायता, छात्रवृत्ति सहित कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसके साथ ही 10वीं और 12वीं में टॉप-10 में आने वाले श्रमिकों के बच्चों को 2 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि पिछले सवा दो वर्षों में 800 करोड़ रुपए से अधिक की राशि श्रमिकों के खातों में डीबीटी के माध्यम से सीधे ट्रांसफर की गई है।

इसके अलावा “अटल शिक्षा योजना” के तहत श्रमिकों के बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाई की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि श्रमिकों को योजनाओं का पूरा लाभ मिले और उनके जीवन स्तर में सुधार हो। छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह ने भी राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों के हित में संचालित योजनाओं की जानकारी देते हुए श्रमिकों से इनका अधिकाधिक लाभ उठाने की अपील की।

इस अवसर पर श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा, माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष श्री शंभूनाथ चक्रवर्ती, नगर पालिका जशपुर के अध्यक्ष श्री अरविंद भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष यशप्रताप सिंह जुदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष जशपुर गंगाराम भगत सहित अन्य जनप्रतिनिधि, श्रमिक बंधु एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।

CG: पूर्व सीएम का सरकार पर आरोप, मंत्री और सांसद ने ऐसे किया पलटवार…

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केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये घटाकर 3 रुपये और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी। फैसले पर जनता को राहत मिली लेकिन विपक्ष को ये फैसला रास नहीं आया। पूर्व मुुख्यमंत्री भूपेश बघेल का दावा है कि इस कदम से जनता को एक कौड़ी राहत नहीं मिलने वाली। भूपेश बघेल के पोस्ट पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने फौरन पलटवार कर कहा कि आपकी इन्हीं हरकतों के चलते जनता ने लानत भेज आपको सत्ता से बाहर किया।

याद दिलाया कि कोविड काल में भूपेश सरकार ने पेट्रोल पर वैट बढ़ाया था। बीजेपी सांसद संतोष पांडे ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार कर कहा कि कांग्रेस और विपक्षी आपदा में भी राजनीति करने से बाज नहीं आ रहे।.सत्तापक्ष का दावा है कि इस फैसले से लोगों को सीधे-सीधे राहत मिलेगी।

छत्तीसगढ़ में पेट्रोल-डीजल की एक्साइज ड्यूटी में कटौती का मुद्दा पूरी तरह से सियासी केंद्र में है। बीजेपी नेताओं का दावा है कि इससे जनता को राहत मिलेगी, तो कांग्रेस इसे सीधे-सीधे जनता से धोखा बता रही है तो सवाल ये है कि इस कदम से जनता को कैसे लाभ है, कितना लाभ है , भला विपक्ष को ये कटौती रास क्यों नहीं आ रही?

CG: मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत 240 नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद…

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज जशपुर के रणजीता स्टेडियम में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में शामिल हुए, जहां 240 नवविवाहित जोड़ों का विवाह विधिवत सम्पन्न हुआ। मुख्यमंत्री श्री साय विवाह मंडप में पहुंचकर नवदंपतियों के बीच गए और उन्हें शुभाशीष प्रदान करते हुए उनके सुखद, समृद्ध एवं मंगलमय दांपत्य जीवन की कामना की। कार्यक्रम का वातावरण पारंपरिक रीति-रिवाजों, वैदिक मंत्रोच्चार और सामाजिक एकता के भाव से ओतप्रोत रहा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के लिए एक बड़ा सहारा बनकर उभरी है। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह में सहयोग प्रदान कर उनके माता-पिता के आर्थिक बोझ को कम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सामूहिक विवाह जैसे आयोजन अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाने के साथ ही समाज में एकता और समरसता को भी बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से हजारों परिवारों को राहत मिली है और बेटियों के विवाह को लेकर उनकी चिंता काफी हद तक दूर हुई है। सामूहिक कन्या विवाह समारोह में विभिन्न समाजों के 240 जोड़ों ने एक साथ विवाह कर सामाजिक समरसता और एकता का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत प्रत्येक जोड़े को कुल 50 हजार रुपए की सहायता प्रदान की जाती है, जिसमें 35 हजार रुपए की राशि चेक के माध्यम से सीधे हितग्राही को दी जाती है, जबकि लगभग 7 हजार रुपए की वैवाहिक सामग्री एवं 8 हजार रुपए आयोजन व्यय के रूप में खर्च किए जाते हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने नवदंपतियों को 35 हजार रुपए की राशि के चेक वितरित किए और उनके खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना की।

सामूहिक विवाह कार्यक्रम में गायत्री परिवार के सदस्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान से विवाह सम्पन्न कराया गया। कार्यक्रम में नवदंपतियों को विवाह प्रमाण पत्र एवं उपहार सामग्री भी प्रदान की गई। इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने भी नवविवाहित जोड़ों को शुभकामनाएं दीं और योजना की सराहना की। यह आयोजन न केवल एक सामाजिक कार्यक्रम रहा, बल्कि शासन की जनकल्याणकारी सोच और समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता का भी प्रतीक बना।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष श्री रामप्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष जशपुर गंगाराम भगत, विजय आदित्य सिंह जूदेव, सरगुजा कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, आईजी दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लाल उमेद सिंह, वनमंडलाधिकारी शशिकुमार, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार समेत स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं गणमान्यजन उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ के किसानों के फैन हुए पीएम मोदी, अन्नदाताओं ने किया ऐसा काम कि ‘मन की बात’ में हुई तारीफ…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 132वें एपिसोड में मिडिल ईस्ट संकट के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले की किसानों की सराहना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 132वें एपिसोड में मिडिल ईस्ट संकट के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले की किसानों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कोरिया जिले के किसानों ने अपनी मेहनत और नवाचार से गांव के जल संकट को कम करने में अहम भूमिका निभाई है।

‘मन की बात’ में छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले का जिक्र

पीएम मोदी ने विशेष रूप से ग्राउंड वाटर के सुधार पर किए गए कार्य की तारीफ़ की और इसे अन्य राज्यों के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बताया। प्रधानमंत्री ने बताया कि कोरिया के किसान छोटे-छोटे रिचार्ज तालाब और सोखता गड्ढे बनाने जैसे प्रभावशाली उपायों पर काम कर रहे हैं। इन उपायों से बारिश का पानी सीधे खेतों में रुकता है, जिससे भूमिगत जल स्तर में सुधार हुआ है। पीएम मोदी ने बताया कि इस मॉडल को कोरिया जिले के 12 सौ से अधिक किसानों ने अपनाया है और इस प्रयास से उनकी फसलों की पैदावार में भी सुधार देखने को मिला है।

पीएम ने की कोरिया की तारीफ

पीएम मोदी ने कहा कि इस पहल के कारण गांव का ग्राउंड वाटर लेवल बहुत अच्छा हो गया है और स्थानीय किसानों को जल संरक्षण में मदद मिल रही है। उन्होंने किसानों की मेहनत और नवाचार की सराहना की और कहा कि इस तरह के प्रयास पूरे देश के किसानों के लिए सीख और प्रेरणा बन सकते हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी जोर दिया कि सामूहिक प्रयास और नई तकनीक अपनाने से कृषि और जल संरक्षण के क्षेत्र में स्थायी और सकारात्मक परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

CG: पश्चिम एशिया की परिस्थितियों पर मुख्यमंत्री की उच्चस्तरीय समीक्षा: वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कमिश्नर, आईजी और कलेक्टरों को दिए निर्देश’

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पेट्रोलियम, गैस और उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धताअफवाहों से दूर रहने की अपील’

आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी करने वालों पर कड़ी करवाई के निर्देश’

आमजनों की सुविधा के लिए बनाया गया है राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम:1800-233-3663 पर कॉल कर ले सकते है सही जानकारी’

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पश्चिम एशिया में उत्पन्न परिस्थितियों के मद्देनज़र आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी संभागायुक्तों, पुलिस महानिरीक्षकों, कलेक्टरों एवं पुलिस अधीक्षकों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में पेट्रोलियम उत्पादों, एलपीजी गैस, उर्वरकों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता एवं आपूर्ति व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि और संवेदनशील नेतृत्व के कारण कोविड जैसी चुनौतीपूर्ण स्थिति में भी देश एकजुट रहा और सफलतापूर्वक उसका सामना किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में कोविड जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन सतर्क रहना आवश्यक है। प्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थों, गैस सिलेंडरों और उर्वरकों की कोई कमी नहीं है, अतः नागरिक किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा पश्चिम एशिया संकट पर सभी राज्यों के साथ विस्तृत चर्चा की गई है और यह आश्वस्त किया गया है कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुचारू रूप से जारी है। राज्य स्तर पर कंट्रोल रूम की स्थापना की गई है तथा उच्च स्तरीय समिति द्वारा स्थिति की सतत निगरानी की जा रही है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में भी कंट्रोल रूम स्थापित किया जाए तथा प्रभारी सचिव और कलेक्टर नियमित समीक्षा करें। अफवाहों और भ्रामक खबरों से बचने के लिए आमजन तक समय पर तथ्यात्मक जानकारी पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।

कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी या जमाखोरी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। सभी पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों के भंडारण एवं आपूर्ति की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।उन्होंने अधिकारियों से टीम भावना के साथ कार्य करते हुए हर परिस्थिति में आमजन तक सेवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में एचपीसीएल, बीपीसीएल और आईओसीएल के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि प्रदेश में गैस एवं पेट्रोलियम पदार्थों की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति नियमित रूप से जारी है। गैस सिलेंडरों की ऑनलाइन बुकिंग सामान्य रूप से संचालित है।
उज्ज्वला गैस कनेक्शन के लिए 45 दिन तथा सामान्य गैस कनेक्शन के लिए 25 दिन की समय सीमा निर्धारित है और वर्तमान में उसी अंतराल के अनुसार बुकिंग की जा रही है। पेट्रोलियम पदार्थों के परिवहन में भी किसी प्रकार की बाधा नहीं है और पूरे प्रदेश में स्थिति सामान्य है।

मुख्य सचिव श्री विकास शील ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों की सतत निगरानी के लिए राज्य स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। उपभोक्ता घरेलू गैस आपूर्ति से संबंधित समस्याओं, शिकायतों अथवा कालाबाजारी की सूचना  1800-233-3663 पर दे सकते हैं।उन्होंने निर्देश दिए कि उक्त नंबर का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि आमजन को सही जानकारी समय पर उपलब्ध हो सके और शिकायतों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जा सके।

बैठक में निर्देश दिए गए कि गैस, पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति से संबंधित समाचारों पर सतत निगरानी रखी जाए। भ्रामक खबरों से भय की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, अतः ऐसी खबरों का तत्काल संज्ञान लेकर वास्तविक जानकारी जनता तक पहुंचाई जाए। सोशल मीडिया की भी विशेष निगरानी रखने और मीडिया प्रतिनिधियों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता, किसानों को समय पर मिलेगा खाद

वीडियो कांफ्रेंस के दौरान अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि उर्वरकों की होल्डिंग पर रोक लगाई जाए और दैनिक स्टॉक की नियमित समीक्षा की जाए। सभी किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार समान रूप से उर्वरक उपलब्ध कराया जाए।साथ ही खाद वितरण प्रणाली को और अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के लिए सॉफ्टवेयर आधारित मॉनिटरिंग की जानकारी भी साझा की गई।

महत्वपूर्ण संस्थानों में गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश

मुख्यमंत्री श्री साय ने अस्पतालों, छात्रावासों, शैक्षणिक संस्थानों, रेलवे, भारत सरकार की संस्थाओं, सैन्य एवं अर्धसैनिक बलों, समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित संस्थानों और एयरपोर्ट कैंटीनों में गैस आपूर्ति निर्बाध बनाए रखने के निर्देश दिए।

राज्यभर में सतत कार्रवाई—3841 सिलेंडर जब्त, 97 एफआईआर दर्ज

बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेशभर में 335 स्थलों पर छापेमारी की गई, जिसमें कालाबाजारी की कोई पुष्टि नहीं हुई। हालांकि जमाखोरी की सूचना पर कार्रवाई करते हुए 3841 गैस सिलेंडरों को जब्त किया गया तथा 97 एफआईआर दर्ज की गई हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने सीमावर्ती चेक पोस्टों पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। गैस सिलेंडरों एवं पेट्रोल-डीजल वाहनों की आवाजाही पर निगरानी रखने के साथ ही निर्देश दिए गए कि पेट्रोल-डीजल को कंटेनरों में आम जनता को उपलब्ध न कराया जाए। केवल अधिकृत मोबाइल टावर एवं जेनसेट संचालित आवश्यक प्रतिष्ठानों को ही कंटेनर में ईंधन उपलब्ध कराया जाए।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी संभागायुक्त, आईजी एवं जिला कलेक्टर भी बैठक में शामिल हुए।

बैठक में मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. बसवराजू एस, कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती शहला निगार, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, खाद्य विभाग की सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले, उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार सहित आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल के पेट्रोल, डीजल एवं गैस डिवीजन के अधिकारी उपस्थित थे।

CG: 79 हजार से अधिक श्रमिकों को 27.15 करोड़ की सीधी सहायता…

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मेहनतकश श्रमिकों का सशक्तिकरण ही विकसित छत्तीसगढ़ की नींव है — मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज जशपुर में आयोजित जिला स्तरीय श्रमिक सम्मेलन में 79,340 निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिजनों को 27.15 करोड़ रुपए की राशि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बावजूद छत्तीसगढ़ में पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी गैस की उपलब्धता को लेकर किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी ईंधन आवश्यकताओं के लिए आयात पर निर्भर है, लेकिन केंद्र सरकार की प्रभावी विदेश नीति और विभिन्न देशों के साथ मजबूत संबंधों के कारण आपूर्ति पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें और अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जिससे लोगों में अनावश्यक भय और भ्रम का वातावरण बन रहा है।उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें और पेट्रोल, डीज़ल या गैस का अनावश्यक भंडारण न करें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जैसे पहले ईंधन की उपलब्धता बनी रही है, वैसे ही आगे भी निर्बाध रूप से मिलती रहेगी।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रमिकों के कल्याण के लिए राज्य और केंद्र सरकार द्वारा संचालित 12 विभिन्न योजनाओं का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पंजीकृत श्रमिकों को बच्चे के जन्म पर 20,000 रुपए की सहायता राशि दी जाती है। इसके अलावा मकान निर्माण के लिए 1.5 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। श्रमिकों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ई-रिक्शा खरीदने में भी सहायता दी जा रही है, जिसे पहले 1 लाख रुपए से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपए कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। यदि किसी श्रमिक का बच्चा 10वीं या 12वीं बोर्ड परीक्षा में टॉप-10 में स्थान प्राप्त करता है, तो उसे 2 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
इसके साथ ही मेधावी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए पहले 100 बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाया जाता था, जिसे अब बढ़ाकर 200 सीट कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि भूमिहीन कृषि मजदूरों के लिए “दीनदयाल भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना” संचालित की जा रही है, जिसके तहत ऐसे मजदूरों को सालाना 10,000 रुपए की सहायता राशि प्रदान की जाती है।
उन्होंने जानकारी दी कि हाल ही में लाखों भूमिहीन मजदूरों के खातों में लगभग 495 करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की गई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि जनधन खातों के माध्यम से अब योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुंच रहा है।

उन्होंने कहा कि पहले भेजी गई राशि का बड़ा हिस्सा बीच में ही खत्म हो जाता था, लेकिन अब पूरी राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रही है, जिससे पारदर्शिता और विश्वास दोनों मजबूत हुए हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रोविडेंट फंड (PF) प्रणाली को यूनिवर्सल बनाया गया है, जिससे श्रमिक देश के किसी भी हिस्से में काम करने पर अपना पीएफ लाभ जारी रख सकते हैं।

इसके अलावा न्यूनतम पेंशन राशि को बढ़ाकर 1000 रुपए किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि ईएसआईसी अस्पतालों के माध्यम से पंजीकृत श्रमिकों को बेहतर और निःशुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संबोधन के अंत में श्रमिकों को प्रदेश के विकास की रीढ़ बताते हुए कहा कि उनके परिश्रम और योगदान से ही राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने सभी श्रमिकों का सम्मान करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रदेशभर में आयोजित हो रहे श्रमिक सम्मेलन—श्रम मंत्री

श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरे प्रदेश में श्रमिक सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि श्रमिकों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचे और उन्हें अधिकतम लाभ मिल सके।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों को प्रसूति सहायता के रूप में 20,000 रुपए, मकान निर्माण के लिए आर्थिक सहायता, छात्रवृत्ति सहित कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसके साथ ही 10वीं और 12वीं में टॉप-10 में आने वाले श्रमिकों के बच्चों को 2 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि पिछले सवा दो वर्षों में 800 करोड़ रुपए से अधिक की राशि श्रमिकों के खातों में डीबीटी के माध्यम से सीधे ट्रांसफर की गई है।

इसके अलावा “अटल शिक्षा योजना” के तहत श्रमिकों के बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाई की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि श्रमिकों को योजनाओं का पूरा लाभ मिले और उनके जीवन स्तर में सुधार हो।

छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह ने भी राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों के हित में संचालित योजनाओं की जानकारी देते हुए श्रमिकों से इनका अधिकाधिक लाभ उठाने की अपील की।

इस अवसर पर श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा, माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष श्री शंभूनाथ चक्रवर्ती, नगर पालिका जशपुर के अध्यक्ष श्री अरविंद भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री यशप्रताप सिंह जुदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष जशपुर श्री गंगाराम भगत सहित अन्य जनप्रतिनिधि, श्रमिक बंधु एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।

अर्थ आवर: आज पृथ्वी के लिए जिम्मेदारी निभाने का समय, रात 8:30 से 9:30 बजे तक बंद रखें लाइट…

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पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने वाला विश्व का सबसे बड़ा जन आंदोलन है अर्थ आवर। मार्च महीने के अंतिम शनिवार को अर्थ आवर मनाया जाता है। आज दुनियाभर में 8.30 से 9.30 के बीच यह मनाया जाएगा।

अर्थ आवर दुनियाभर के लोगों से अपील करता है कि वे अपनी अनावश्यक बत्तियां बंद कर दें। यह अभियान एक घंटा (60 मिनट) पृथ्वी के लिए समर्पित करने को कहता है। इस दौरान कोई भी सकारात्मक कार्य करने की सलाह देता है जैसे बिजली बचाना, पेड़ लगाना या पर्यावरण की रक्षा के लिए छोटा कदम उठाना।

अर्थ आवर की शुरुआत साल 2007 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर से हुई थी। विश्व वन्यजीव कोष द्वारा शुरू किया गया यह अभियान लोगों से अपील करता है कि वे रात में एक घंटे के लिए लाइट बंद कर दें। शुरुआत के समय यह सिर्फ एक शहर तक सीमित था और कुछ हजार लोगों ने इस मुहिम में हिस्सा लिया था, लेकिन पिछले 19 वर्षों में यह आंदोलन पूरे विश्व में फैल गया। आज 190 से ज्यादा देशों और क्षेत्रों में लाखों-करोड़ों लोग इसमें शामिल होते हैं।

इसके लिए संगठन रात 8:30 बजे से 9:30 बजे तक एक घंटे के लिए अपने घरों, दफ्तरों और सार्वजनिक स्थानों की अनावश्यक बत्तियां बंद करने की सलाह देते हैं। इस साल 2026 में अर्थ ऑवर अपनी 20वीं वर्षगांठ मना रहा है। दो दशकों से यह अभियान पृथ्वी की रक्षा के लिए सामूहिक कार्रवाई और जागरूकता का प्रतीक बन गया है।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सिर्फ एक घंटे की बिजली बचाना नहीं है। इसका मकसद लोगों को यह समझाना है कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी ऊर्जा का सही और जिम्मेदाराना उपयोग किया जा सकता है। बिजली की बचत से कार्बन उत्सर्जन कम होता है, जो जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में मदद करता है। एक घंटे की यह छोटी सी पहल बड़े स्तर पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है।

भारत में अर्थ आवर का प्रभाव हर साल बढ़ रहा है। देश के प्रमुख शहरों में प्रसिद्ध स्मारक, सरकारी भवन, होटल, मॉल और निजी संस्थान इस मुहिम में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। सिर्फ लाइट बंद करने के अलावा पर्यावरण अनुकूल गतिविधियां, पेड़ लगाने, प्लास्टिक कम करने और सस्टेनेबल जीवन शैली अपनाने जैसे संदेशों पर जोर दिया जा रहा है। समुदाय स्तर पर कहानी कहने और सामूहिक कार्रवाई को बढ़ावा दिया जा रहा है।

Dollar vs Rupee: रुपया 95 के करीब पहुंचा, जानिए इतनी भारी गिरावट के पीछे क्या है कारण ?

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शुक्रवार को, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.7 के स्तर से नीचे गिर गया। यह अब तक का इसका सबसे कमज़ोर स्तर है। हालाँकि यह आँकड़ा शायद बहुत बड़ा न लगे, लेकिन यह उन बढ़ते दबावों को दिखाता है जो पिछले कुछ हफ़्तों से बन रहे हैं-ऐसे दबाव जिन्हें अब नज़रअंदाज़ करना मुश्किल हो गया है। रुपया चुपचाप देश के भीतर बढ़ते आर्थिक तनाव का एक मुख्य संकेतक बनकर उभरा है।

तेल की कीमतें: मुख्य वजह

फिलहाल, इस रुझान को बढ़ाने वाला सबसे अहम कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ी है। पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के बीच, तेल की कीमतें एक बार फिर बढ़कर लगभग $110 प्रति बैरल तक पहुँच गई हैं। इसके साथ ही, भारत के कच्चे तेल की बास्केट की कीमत भी लगभग $157 प्रति बैरल तक पहुँच गई है। यह देखते हुए कि भारत अपनी तेल की ज़रूरतों का 85-90% हिस्सा आयात करता है, कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी का अर्थव्यवस्था पर सीधा और तुरंत असर पड़ता है।

महँगा तेल रुपये पर दबाव और बढ़ाता है

तेल की कीमतें बढ़ने का मतलब है कि भारत को उतनी ही मात्रा में तेल आयात करने के लिए ज़्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। डॉलर की इस बढ़ी हुई माँग से रुपये पर नीचे की ओर दबाव पड़ता है। इसके अलावा, इस समय वैश्विक पूँजी भारत से बाहर जा रही है।

विदेशी निवेशकों द्वारा निकासी

रॉयटर्स के अनुमानों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने हाल के हफ़्तों में भारतीय इक्विटी बाज़ार से लगभग $9.5 बिलियन निकाल लिए हैं। अनिश्चितता भरे माहौल में, निवेशक ज़्यादा सुरक्षित बाज़ारों, जैसे कि संयुक्त राज्य अमेरिका, की ओर रुख करते हैं। जब निवेशक किसी बाज़ार से निकलते हैं, तो वे अपनी भारतीय संपत्तियाँ बेच देते हैं और उससे मिली रकम को रुपये से डॉलर में बदल लेते हैं; इस प्रक्रिया से रुपये पर दबाव और भी बढ़ जाता है।

मज़बूत होता डॉलर: एक और वजह

अमेरिकी डॉलर भी लगातार मज़बूत हो रहा है, जिसे ऊँची बॉन्ड यील्ड और सुरक्षित निवेश (safe-haven investments) की बढ़ी हुई माँग से सहारा मिल रहा है। डॉलर के इस तरह मज़बूत होने से रुपये जैसी मुद्राओं के लिए अपनी स्थिरता बनाए रखना और भी मुश्किल होता जा रहा है।

समय के साथ गिरावट और तेज़ होती गई

पिछले कुछ सालों पर नज़र डालें तो यह गिरावट और भी साफ़ तौर पर दिखाई देती है। 2022 की शुरुआत में, डॉलर के मुकाबले रुपया लगभग 74 के स्तर पर था; अब यह 95 के स्तर के करीब पहुँच गया है। इसका मतलब है कि चार सालों के दौरान रुपये में लगभग 20 रुपये की गिरावट आई है। सिर्फ़ पिछले एक साल में ही, रुपये की कीमत 10% से ज़्यादा गिर गई है। कुछ अनुमानों के मुताबिक, अगर ये दबाव बने रहे, तो रुपया और भी नीचे गिर सकता है, और डॉलर के मुकाबले 98 तक पहुँच सकता है।

भारत की अर्थव्यवस्था पर असर

रुपये की कमज़ोरी का असर सिर्फ़ एक्सचेंज रेट तक ही सीमित नहीं है। भारत का इंपोर्ट बिल FY27 में बढ़कर लगभग $911 बिलियन तक पहुँच सकता है; इससे पहले, यह आँकड़ा लगभग $814 बिलियन था। इस बीच, चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़कर GDP का 2.6% होने का अनुमान है। इसका मतलब है कि देश से ज़्यादा मात्रा में डॉलर बाहर जा रहे हैं-एक ऐसा कारण जो रुपये पर और भी ज़्यादा दबाव डालता है।

आम आदमी पर इसका क्या असर होगा?

रुपये के कमज़ोर होने से इंपोर्ट महँगा हो जाता है। इसमें तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद और दूसरी ज़रूरी चीज़ें शामिल हैं। इसका असर धीरे-धीरे साफ़ दिखाई देने लगता है: ईंधन की कीमतें बढ़ जाती हैं, ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ जाता है, और खाने-पीने की चीज़ें भी महँगी हो जाती हैं। इसके अलावा, विदेश में पढ़ाई कर रहे छात्रों को ज़्यादा पैसे चुकाने पड़ते हैं।