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1KM जाएं या 400, AC-3 में देने होंगे 960 रुपये; वंदे भारत का किराया

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भारतीय रेलवे ने वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को लेकर महत्वपूर्ण और बड़ा अपडेट जारी किया है। बताया जा रहा है कि यह ट्रेन पूरी तरह से आम आदमी के लिए होगी और इसमें किसी भी प्रकार का वीआईपी कल्चर नहीं होगा।

इसका मतलब है कि अफसरों या मंत्रियों के लिए कोई विशेष कोटा नहीं होगा, यानी हर यात्री को समान सुविधाएं मिलेंगी।

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसिलेशन (RAC) या आंशिक रूप से कन्फर्म टिकटों का कोई प्रावधान नहीं होगा। केवल पूर्ण रूप से कन्फर्म टिकट ही जारी किए जाएंगे। साथ ही, न्यूनतम चार्जेबल दूरी 400 किलोमीटर होगी, यानी इससे कम दूरी की यात्रा पर भी कम से कम 400 किमी का किराया देना होगा।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 1 जनवरी 2026 को एसी 1, एसी 2 और एसी 3 श्रेणियों के संभावित किरायों की घोषणा की थी। 9 जनवरी को जारी परिपत्र में किराया संरचना का विस्तृत विवरण दिया गया है…

400 किमी तक (न्यूनतम किराया)

  • एसी 1: 1520 रुपये
  • एसी 2: 1240 रुपये
  • एसी 3: 960 रुपये

(यह किराया दूरी चाहे 1 किमी हो या 400 किमी, न्यूनतम यही लागू होगा।)

400 किमी से अधिक दूरी के लिए प्रति किलोमीटर दरें

  • एसी 1: 3.80 रुपये प्रति किमी
  • एसी 2: 3.10 रुपये प्रति किमी
  • एसी 3: 2.40 रुपये प्रति किमी

(जीएसटी अलग से लगेगा।) इन यात्रियों को मिलेगा आरक्षण

  • महिला आरक्षण
  • दिव्यांगजन (PwD) आरक्षण
  • वरिष्ठ नागरिक आरक्षण
  • ड्यूटी पास आरक्षण
  • इसके अलावा कोई अन्य आरक्षण कोटा नहीं होगा

कैसे किया जाएगा बर्थ आवंटन

अगर कोई यात्री ऐसे बच्चे के साथ यात्रा कर रहा है जिसके लिए अलग बर्थ की जरूरत नहीं, तो सिस्टम उपलब्धता के आधार पर नीचे की बर्थ आवंटित करेगा।

60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पुरुष यात्रियों और 45 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिला यात्रियों के लिए सिस्टम उपलब्धता के आधार पर नीचे की बर्थ देने का प्रयास करेगा।

टिकट रद्द करने पर रिफंड

रद्दीकरण के 24 घंटे के भीतर रिफंड प्रक्रिया शुरू करने के लिए सभी भुगतान केवल डिजिटल माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे।

काउंटर से टिकट खरीदते समय भी डिजिटल भुगतान को प्राथमिकता दी जाएगी।

अगर कोई यात्री डिजिटल भुगतान नहीं कर पाता, तो रद्दीकरण पर सामान्य नियमों के अनुसार रिफंड मिलेगा।

वहीं अधिकारियों ने कहा कि इसमें मामूली संशोधन हो सकते हैं, जिनकी जानकारी जनता को दी जाएगी। नियमित यात्रियों के लिए व्यावसायिक संचालन लॉन्च के तुरंत बाद शुरू हो सकता है, और इसका विवरण आधिकारिक परिपत्र से जारी किया जाएगा।

US से फाइनल होने वाली है ट्रेड डील? एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री

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भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता के बीच विदेश मंत्री जयशंकर ने मंगलवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से फोन पर बात की है। दोनों नेताओं की बातचीत से संकेत यही मिल रहा हैं कि ट्रेड डील को लेकर जल्द ही दोनों देशों में बात बन सकती है।

जानकारी के मुताबिक दोनों नेताओं में व्यापार, क्रिटिल मिनरल्स, न्यूक्लियर एनर्जी और रक्षा मामलों को लेकर वार्ता हुई है। जयशंकर ने कहा कि मार्को रूबियो ने उनसे इन सभी मामलों में जुड़े रहने की बात कही है।

विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री के साथ उनकी सकारात्मक चर्चा हुई है। बता दें कि भारत और अमेरिका बीच ट्रेड डील अभी अटकी हुई है। बीते साल डोनाल्ड ट्रंप के पदभार संभालने के बाद ही दोनों देशों के बीच इसको लेकर वार्ता शुरू हो गई। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप बीच में ही टैरिफ की लड़ाई लड़ने लगे और भारत समेत दुनियाभर के देशों पर भारी भरकम टैरिफ थोप दिया। अमेरिका ने भारत पर भी 50 फीसदी का टैरिफ लगा दिया। इसी वजह से व्यापार वार्ता में भी ब्रेक लग गया।

अमेरिका के लिए बेहद अहम भारत

भारत में अमेरिका का राजदूत सर्जियो गोर ने बताया है कि दोनों नेताओं के बीच ट्रेड टॉक, जरूरी खनिजों और रक्षा मामलों को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई है। इससे पहले ही गोर कह चुके हैं कि अमेरिका के लिए भारत बेहद जरूरी है। सर्जियो गोर जबसे भारत में राजदूत नियुक्त हुए हैं यहां के प्रति उनका रुख बहुत ही नर्म और सकारात्मक देखा गया है। ट्रंप के इस फैसले को भी अच्छे नजरिए से देखा जा रहा है।

कहां तक पहुंची है व्यापार वार्ता

सर्जियो गोर ने ही कहा था कि 13 जनवरी से दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता शुरू होगी। हालांकि वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि इस हफ्ते बातचीत होनी मु्श्किल ही है। हालांकि बातचीत का अगला दौर जल्द शुरू हो सकता है जिसमें टैरिफ को लेकर भी कोई हल निकाला जा सकता है। हां इतना जरूर संभव है कि दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता हो जाए। दावा किया जा रहा है कि भारत ने अमेरिका के सामने एक अच्छी डील पेश की है और इसपर जल्द ही मुहर भी लग सकती है। अमेरिका इस डील को फाइनल करना चाहता है हालांकि फाइनल मंजूरी डोनाल्ड ट्रंप से ही मिलने वाली है।

ईरान के साथ बिजनेस करने वालों पर ट्रंप ने थोपा टैरिफ, भारत पर कितना असर

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की योजना का भारत पर लगभग कोई असर नहीं पड़ेगा। निर्यातकों के संगठन फियो ने यह बात कही।

भारतीय निर्यातक पहले से 50 प्रतिशत अमेरिकी शुल्क का सामना कर रहे हैं।

ट्रंप ने घोषणा की है कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश को अमेरिका के साथ अपने व्यापार पर 25 प्रतिशत शुल्क का भुगतान करना होगा। यह एक ऐसा कदम जो भारत, चीन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे ईरान के प्रमुख व्यापारिक भागीदारों को प्रभावित कर सकता है।

निर्यातकों के संगठन ‘फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस’ (फियो) ने मंगलवार को कहा कि भारतीय कंपनियां और बैंक, ईरान पर लगाए गए ओएफएसी (विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय) प्रतिबंधों का पूरी तरह से और स्पष्ट रूप से पालन कर रहे हैं। हम केवल मानवीय जरूरतों से जुड़े खाद्य पदार्थों और दवा क्षेत्र में ही काम कर रहे हैं जिनपर रोक नहीं है।

फियो के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा, ‘इसलिए भारत पर किसी भी प्रतिकूल प्रभाव की आशंका का कोई आधार नहीं है।’ भारत का ईरान के साथ 2024-25 (अप्रैल-मार्च) में कुल 1.68 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार था, जिसमें मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र से 1.24 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात शामिल था। भारत से ईरान को निर्यात किए जाने वाले प्रमुख उत्पाद में अनाज, पशु चारा, चाय व कॉफी, मसाले, फल व सब्जियां और दवाएं शामिल थे।

फियो ने कहा, ‘जैसा कि हम सभी जानते हैं कि अधिकतर उत्पाद मानवीय जरूरतों से जुड़े हैं। ईरान के साथ व्यापार, अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के दायरे से बाहर है। इसलिए फियो का मानना ​​है कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश पर अमेरिका द्वारा लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क का भारत पर लगभग कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।’

निर्यातकों के लिए यह घोषणा महत्वपूर्ण है क्योंकि वे अतिरिक्त शुल्क के प्रभाव को लेकर सर्तक हैं। ईरान को भारत के प्रमुख निर्यातों में चावल, चाय, चीनी, दवाइयां, कृत्रिम रेशे, विद्युत मशीनरी और कृत्रिम आभूषण शामिल हैं जबकि प्रमुख आयातों में सूखे मेवे, अकार्बनिक/कार्बनिक रसायन और कांच के बर्तन शामिल हैं।

भारत-ईरान संबंधों का एक महत्वपूर्ण पहलू चाबहार बंदरगाह का संयुक्त विकास है। ऊर्जा से भरपूर ईरान के दक्षिणी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित इस बंदरगाह का विकास भारत और ईरान द्वारा संपर्क एवं व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है।

भारत का ईरान को माल निर्यात 2024-25 में 1.55 प्रतिशत बढ़कर 1.24 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया जबकि आयात 29.32 प्रतिशत घटकर 44.183 करोड़ अमेरिकी डॉलर रह गया।

लावारिस कुत्तों से प्यार है तो घर क्यों नहीं ले जाते; सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि लावारिस कुत्तों के हमले से होने वाले किसी भी नुकसान के लिए नगर निगम और कुत्तों को खाना खिलाने वालों पर जिम्मेदारी डालेंगे। अदालत ने कहा, अगर आपको इन जानवरों से इतना प्यार है तो आप उन्हें अपने घर क्यों नहीं ले जाते?

जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की विशेष पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि वह लावारिस कुत्तों से होने वाली घटनाओं के लिए राज्य सरकारों, नगर निकायों से पीड़ितों को भारी मुआवजा देने को कहेंगे, क्योंकि ये संस्थाएं पांच सालों से लावारिस कुत्तों, जानवरों से जुड़े नियम- कानूनों को लागू करने में पूरी तरह से विफल रही हैं।

शीर्ष अदालत ने सवाल पूछते हुए कहा कि जब कुत्ते नौ साल के बच्चे पर हमला करते हैं तो किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, उस संगठन को ‌जो उन्हें खाना खिला रहा है। अदालत ने लावारिस कुत्तों की हिमायत करने और खाना खिलाने वालों से कहा कि आप चाहते हैं कि हम इस समस्या पर अपनी आंखें मूंद लें। जस्टिस मेहता ने कहा कि जब लावारिस कुत्ता किसी पर हमला करता है तो कौन जिम्मेदार होगा, यह किसी के कब्जे में नहीं हो सकता। आपको पालतू जानवर चाहिए, तो इसके लिए लाइसेंस लें।

मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में देशभर के नगर निकायों को बस अड्डा, रेलवे स्टेशन, हॉस्पिटल, अस्पताल आदि सार्वजनिक परिसरों से लावारिस कुत्तों को हटाने का आदेश दिया था। पीठ ने आदेश दिया था कि कुत्तों को उठाने के बाद टीकाकरण या बंध्याकरण कर उसी जगह पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए जहां से उन्हें उठाया गया था।

अब तक सिर्फ कुत्तों के लिए हैं भावनाएं : जस्टिस मेहता

वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने इस मुद्दे को भावनात्मक बताया तो जस्टिस मेहता ने कहा कि अब तक भावनाएं सिर्फ कुत्तों के लिए हैं। जब अधिवक्ता ने समर्थन में संसदीय बहस पेश कीं, तो जस्टिस मेहता ने कहा कि संसद सदस्य एलीट थे।

अदालत के आदेश का पालन नहीं किया जा रहा

सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले वर्ष सात नवंबर को पारित आदेश के अनुपालन की निगरानी कर रही पीठ ने कहा कि यह चिंता का विषय है कि सक्षम प्राधिकार कानून और इस अदालत के आदेश का प्रभावी पालन नहीं कर रहे हैं।

पीड़ित का पक्ष भी सुना

कामना पांडेय ने पीठ को उस कुत्ते को गोद लेने का अपना अनुभव बताया, जिसने उन्हें काटा था। उन्होंने बताया कि उसके बाद उस कुत्ते ने कभी किसी को नहीं काटा। उन्होंने बताया कि उन्हें पता चला कि जिस कुत्ते ने उन पर हमला किया था, उसके साथ लंबे समय तक क्रूरता की गई थी।

“सिद्धारमैया ने राहुल गांधी से मांगी क्लेरिटी; कहा- CM पद पर जारी कन्फ्”

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कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर चल रहा द्वंद्व अब दिल्ली के दरबार तक पहुंच गया है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राहुल गांधी से संपर्क कर राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर स्थायी समाधान निकालने का आग्रह किया है।

सिद्धारमैया का कहना है कि नेतृत्व को लेकर जारी निरंतर भ्रम के कारण शासन और कैबिनेट विस्तार के कार्यों में बाधा आ रही है।

आपको बता दें कि मंगलवार को मैसूर एयरपोर्ट पर राहुल गांधी और सिद्धारमैया के बीच हुई संक्षिप्त मुलाकात के बाद यह मुद्दा और गरमा गया है। राहुल गांधी तमिलनाडु से लौटते समय मैसूर में रुके थे, जहां मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार दोनों ने उनकी अगवानी की। हालांकि, सार्वजनिक रूप से सिद्धारमैया ने किसी भी राजनीतिक चर्चा से इनकार किया है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि उन्होंने राहुल गांधी से स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस अनिश्चितता को खत्म किया जाए।

पावर शेयरिंग फॉर्मूले के कारण विवाद

कर्नाटक में मचे इस घमासान के केंद्र में वह कथित समझौता है, जो मई 2023 में सरकार गठन के वक्त हुआ था। डीके शिवकुमार के समर्थकों का दावा है कि हाईकमान ने 2.5 साल बाद मुख्यमंत्री पद शिवकुमार को सौंपने का वादा किया था। सरकार के ढाई साल नवंबर 2025 में पूरे हो चुके हैं, जिसके बाद से शिवकुमार खेमा सक्रिय हो गया है। मुख्यमंत्री स्पष्ट कर चुके हैं कि वे अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा करेंगे और ऐसा कोई फॉर्मूला तय नहीं हुआ था।

सिद्धारमैया ने आलाकमान को संकेत दिया है कि वे अपनी कैबिनेट का विस्तार करना चाहते हैं और खाली पड़े पदों पर नियुक्तियां करना चाहते हैं। लेकिन नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच इन फैसलों पर ब्रेक लगा हुआ है। सिद्धारमैया का मानना है कि यदि हाईकमान उन्हें पूरे कार्यकाल के लिए हरी झंडी दे देता है, तो वे अधिक मजबूती से प्रशासन चला पाएंगे।

हाईकमान की चुप्पी और खरगे का बयान

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पिछले महीने इस विवाद को स्थानीय स्तर पर पैदा किया गया भ्रम बताया था। उन्होंने नेताओं को चेतावनी दी थी कि वे कर्नाटक की जीत का श्रेय व्यक्तिगत रूप से न लें। खरगे ने कहा है कि जब भी जरूरत होगी, सिद्धारमैया और शिवकुमार को चर्चा के लिए दिल्ली बुलाया जाएगा।

इस आंतरिक कलह पर भाजपा ने तीखा तंज कसा है। विपक्षी नेता आर. अशोक ने कहा कि जब जर्मन चांसलर बेंगलुरु के दौरे पर थे, तब मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री उनकी अगवानी करने के बजाय मैसूर में राहुल गांधी की खुशामद में लगे थे। भाजपा का आरोप है कि राज्य में प्रशासन ठप है और दोनों नेता सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने की रेस में दौड़ रहे हैं।

इस्लामिक नाटो को लेकर पाक, सऊदी और तुर्की के बीच पक रही खिचड़ी

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बीते साल सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुई डिफेंस डील वैश्विक स्तर पर चर्चा का केंद्र बनी। दोनों देशों ने एक ऐसा सुरक्षा समझौता कर लिया है जिसके तहत एक देश पर हमले को दूसरे के विरुद्ध भी हमला माना जाएगा।

यह समझौता काफी हद तक नाटो के उस अनुच्छेद की तरह है, जिसमें पश्चिमी देशों के इस समूह में किसी भी सदस्य पर हमले को पूरे समूह के खिलाफ हमला माना जाता है। अब पाक और सऊदी की इस डील से एक और मुस्लिम देश जुड़ना चाहता है और यह तीनों देश मिलकर इस्लामिक नाटो नाम की एक खिचड़ी पका रहे हैं।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक तुर्की ने सऊदी-पाकिस्तान डिफेंस डील का हिस्सा बनने में बेहद दिलचस्पी दिखाई है और इसके लिए बैठकों का दौर भी जारी है। मामले से परिचित लोगों के मुताबिक यह गठबंधन स्वाभाविक रूप से आकार ले रहा है क्योंकि दक्षिण एशिया, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के रणनीतिक हित आपस में मिलते हैं। वहीं तीनों देशों के बीच पहले से ही साठ गांठ बनी हुई है। इस समूह का संभावित विस्तार इसीलिए भी अहम है क्योंकि तुर्की सिर्फ एक और क्षेत्रीय खिलाड़ी नहीं है। यह अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटो गठबंधन का भी हिस्सा है और अमेरिका के बाद नाटो में दूसरी सबसे बड़ी सेना तुर्की की ही है।

रक्षा संबंध पहले से ही मजबूत

पाकिस्तान के साथ तुर्की के रक्षा संबंधों की बात की जाए तो वह बेहद अच्छे रहे हैं। तुर्की पाकिस्तानी नौसेना के लिए कार्वेट युद्धपोत बना रहा है, पाकिस्तान के दर्जनों F-16 लड़ाकू विमानों का आधुनिकीकरण किया है और सऊदी और पाक दोनों के साथ ड्रोन तकनीक साझा कर रहा है। वहीं सऊदी अरब और तुर्की शिया-बहुल ईरान को लेकर एकमत हैं और दोनों सैन्य टकराव के बजाय ईरानी शासन का समर्थन करते हैं। इसके अलावा दोनों देश एक स्थिर, सुन्नी-नेतृत्व वाले सीरिया का समर्थन करने और फिलिस्तीन को लेकर भी एकजुट हैं।

क्या कह रहे विशेषज्ञ?

अंकारा स्थित थिंक टैंक TEPAV के रणनीतिकार निहत अली ओजकान के मुताबिक इस समूह में तीनों देशों की भूमिका भी तय हो गई है। इस्लामिक नाटो को खड़ा करने में जहां सऊदी अरब वित्तीय सहायता देगा, वहीं पाकिस्तान अपने परमाणु हथियार, बैलिस्टिक मिसाइल और मैनपावर देगा। तुर्की अपनी सैन्य विशेषज्ञता और घरेलू रक्षा उद्योग का योगदान दे सकता है। ओजकान के मुताबिक, “जैसे-जैसे अमेरिका इस क्षेत्र में अपने और इजरायल के हितों को प्राथमिकता दे रहा है, बदलते समय में ये देश अपने दोस्तों और दुश्मनों की पहचान करने के लिए नए तरीके विकसित कर रहे हैं।”

मिस्र ने भी दिखाई थी दिलचस्पी

बीते साल कतर पर इजरायल के हमले के बाद दोहा में बुलाई गई आपात बैठक में भी मुस्लिम देशों ने अरब-नाटो पर भी चर्चा की थी। इस बैठक में पाकिस्तान, तुर्की, सऊदी अरब और यूएई सहित 60 मुस्लिम देशों ने हिस्सा लिया था। बैठक के दौरान अरब देशों में सबसे बड़ी सेना रखने वाले मिस्र ने अरब-नाटो के प्रस्ताव को पुनर्जीवित करने पर अन्य देशों का समर्थन मांगा था। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक मिस्र ने इस समूह के लिए शुरुआत में 20,000 सैनिकों का योगदान देने की पेशकश भी की थी। वहीं मिस्र की राजधानी काहिरा को अरब-नाटो का मुख्यालय बनाने और एक मिस्र के एक हाई रैंक जनरल को कमांडर बनाने की भी पेशकश की गई थी।

भारत के लिए चिंता?

पाकिस्तान और तुर्की जैसे भारत के दुश्मनों का इस तरह के सैन्य संगठन से जुड़ना भारत के लिए एक खतरे की घंटी हो सकती है। खासकर ऐसे समय में जब बीते मई महीने में भारत और पाक के बीच बनी युद्ध जैसी स्थिति के दौरान तुर्की ने पाक को अपने कई अहम हथियार और ड्रोन दिए थे। हालांकि भारत के एयर डिफेंस सिस्टम्स ने भारत की हिफाजत की औक पाक के कायराना हमलों का माकूल जवाब दिया था। वहीं विश्लेषकों का मानना ​​है कि इस तरह के समझौते को सक्रिय करने का संकल्प महज बातचीत है और खाड़ी देशों के लिए इसे जमीनी हकीकत बनाना बेहद मुश्किल है।

पश्चिमी विक्षोभ के चलते वातावरण में नमी बढ़ी, करीब तीन दिनों तक तापमान में खास उतार-चढ़ाव नहीं होने की संभावना

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छत्तीसगढ़ में बीते दिनों से मौसम पूरी तरह शुष्क बना रहा। पश्चिमी विक्षोभ के चलते वातावरण में नमी बढ़ी है, जिसके कारण अगले करीब तीन दिनों तक तापमान में खास उतार-चढ़ाव नहीं होने की संभावना है।

छत्तीसगढ़ में बीते दिनों से मौसम पूरी तरह शुष्क बना रहा। पश्चिमी विक्षोभ के चलते वातावरण में नमी बढ़ी है, जिसके कारण अगले करीब तीन दिनों तक तापमान में खास उतार-चढ़ाव नहीं होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस अवधि में ठंड और गर्मी दोनों ही लगभग स्थिर रहेंगी, लेकिन इसके बाद हवाओं की दिशा में बदलाव होते ही तापमान में फिर गिरावट दर्ज की जाएगी।

उत्तर छत्तीसगढ़ के जिलों में ठंड का असर सबसे ज्यादा नजर आ रहा है। बलरामपुर-रामानुजगंज और सरगुजा अंचल में सर्दी ने लोगों को खासा परेशान किया है। बीते 24 घंटों में इन इलाकों में न्यूनतम तापमान 3.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। वहीं दक्षिण छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और बस्तर क्षेत्रों में भी रात के तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। इसके विपरीत, मध्य छत्तीसगढ़ में फिलहाल ठंडी हवाओं से कुछ राहत बनी हुई है।

तापमान की बात करें तो राज्य में बीते 24 घंटे के दौरान दुर्ग सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 30.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं अंबिकापुर में सबसे कम 4.9 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड हुआ। बुधवार को रायपुर में सुबह के समय हल्की धुंध छाए रहने की संभावना है। दिन के दौरान तापमान 14 से 29 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान लगाया गया है।

मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले तीन दिनों तक मौसम में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। इसके बाद 15 जनवरी से प्रदेशभर में एक बार फिर कड़ाके की ठंड लौट सकती है। रात का तापमान सामान्य से नीचे जाने के साथ कई इलाकों में शीतलहर की स्थिति बनने के आसार हैं।

कौन हैं PCS अधिकारी सौम्या चौरसिया? भूपेश बघेल सरकार में थीं ‘सुपर सीएम’, शराब से लेकर कोयला स्कैम तक में नाम

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छत्तीसगढ़ की चर्चित पीसीएस अधिकारी सौम्या चौरसिया को हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत नहीं दी. भूपेश बघेल सरकार में सुपर सीएम कही जाने वाली सौम्या का नाम शराब से लेकर कोल लेवी स्कैम तक में है.

सौम्या चौरसिया बघेल सरकार में सीएमओ में उप सचिव थीं.

छत्तीसगढ़ की पीसीएस अधिकारी सौम्या चौरसिया को हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया. बहुचर्चित शराब घोटाले में सौम्या चौरसिया अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुंची थीं. सौम्या चौरसिया को भूपेश बघेल की सरकार में सुपर सीएम कहा जाता था. दरअसल, बघेल सरकार में वह मुख्यमंत्री कार्यालय में डिप्टी सेक्रेटरी थीं.

सौम्या चौरसिया ने साल 2008 में राज्य प्रशासनिक सेवा परीक्षा पास करके अधिकारी बनी थीं. यह भी कम दिलचस्प बात नहीं है कि वह सीनियर अधिकारी होने के बाद भी कलेक्टर नहीं बन सकी थीं. मतलब उनका आईएएस में प्रमोशन नहीं हुआ था. लेकिन भूपेश बघेल ने 17 दिसंबर 2018 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और तीसरे ही दिन सौम्या को सचिवालय में उप सचिव नियुक्त कर दिया गया.

शराब घोटाले में हुई गिरफ्तारी

प्रवर्तन निदेशालय ने 16 दिसंबर 2025 को सौम्या चौरसिया को शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार किया था. यह मामला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉड्रिंग एक्ट 2002 के तहत दर्ज है. मतलब कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच की जा रही है. ED के मुताबिक, इस घोटाले में राज्य को भारी वित्तीय नुकसान हुआ और लगभग 2500 करोड़ रुपये के अपराध से प्राप्त धन (Proceeds of Crime) का पता चला है. ED ने पाया कि सौम्या चौरसिया को लगभग ₹115 करोड़ के अवैध धन की प्राप्ति हुई, और वह सिंडिकेट की केंद्रीय समन्वयक (key coordinator) के रूप में काम कर रही थीं.

महापौर ने लखोली क्षेत्र के वार्डों का किया निरीक्षण, जलकुंभी सफाई और शौचालय मरम्मत के दिए निर्देश

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राजनांदगांव। महापौर मधुसूदन यादव ने लखोली क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 35 और 36 का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय वार्डवासियों से मुलाकात कर पानी, सफाई और अन्य संबंधित मुद्दों पर चर्चा की और अधिकारियों को व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए दिशा-निर्देश दिए।

महापौर ने निरीक्षण के दौरान कहा कि ग्रामीण वार्डों में सफाई व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए, ताकि मौसमी बीमारियों की रोकथाम हो सके। उन्होंने सघन बस्ती में साफ-सफाई और पानी की निकासी के लिए उचित व्यवस्था करने के साथ ही नालियों की सफाई करने के निर्देश दिए। साथ ही वार्डवासियों से भी अपील की कि वे अपने घरों के आस-पास सफाई रखें और कचरा केवल स्वच्छता दीदी को ही सौंपें, न कि नालियों या अन्य स्थानों पर डालें।

वार्ड 35 के शीतला तालाब में जलकुंभी की सफाई की समस्या पर महापौर ने अधिकारियों को जलकुंभी हटाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने शीतला मंदिर के आसपास भी सफाई बनाए रखने की बात की और तालाब में कचरा डालने से रोकने के लिए स्वास्थ्य अमले को सक्रिय करने की सलाह दी।

वार्ड 36 के निरीक्षण के दौरान महापौर ने साहू अपार्टमेंट के पास पानी की निकासी के लिए नाली बनाने और सड़क निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने उप अभियंता श्रीमती रीतू श्रीवास्तव को स्टीमेंट बनाने के निर्देश दिए। इसके अलावा, सेठी नगर के शौचालय की मरम्मत कराने के लिए भी उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया।

आयुक्त श्री अतुल विश्वकर्मा ने बताया कि शौचालय की मरम्मत के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। महापौर ने अधिकारियों से कहा कि निर्माण कार्य के साथ-साथ सफाई व्यवस्था का भी निरीक्षण करें और किसी भी समस्या का समाधान शीघ्र किया जाए।

पेयजल आपूर्ति में असुविधा
महापौर के निर्देश पर ग्रीष्मऋतु में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए टांकाघर नया टंकी (क्षमता 40 लाख लीटर) की सफाई कराई जा रही है। सफाई के कारण 14 जनवरी 2026 (बुधवार) को शाम के समय पेयजल आपूर्ति में बाधा आएगी।

नगर निगम आयुक्त श्री अतुल विश्वकर्मा ने बताया कि सफाई कार्य के चलते टंकी नहीं भर पाएगी, जिससे रायपुर नाका, रामाधीन मार्ग, कामठी लाइन, गुड़ाखू लाइन, जूनी हटरी, जय स्तंभ रोड, गोलबाजार, पुराना अस्पताल रोड, कैलाश नगर, और मठपारा जैसे क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति बाधित रहेगी।

आयुक्त ने नागरिकों से असुविधा के लिए खेद व्यक्त करते हुए सहयोग की अपील की और बताया कि 15 जनवरी को सुबह पेयजल आपूर्ति सामान्य रूप से बहाल कर दी जाएगी।

स्वामी विवेकानंद ने देश की समृद्ध विरासत से दुनिया को अवगत कराया : महापौर

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राजनांदगांव। युवा दिवस के अवसर पर स्थानीय ऊर्जा पार्क में आयोजित एक दिवसीय व्यक्तित्व विकास शिविर में महापौर मधुसूदन यादव ने युवाओं को स्वामी विवेकानंद के जीवन से प्रेरणा लेने की अपील की। महापौर ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने “उठो, जागो और अपने ध्येय की प्राप्ति होने तक मत रूको” का संदेश दिया था। उनका यह संदेश आज भी हमारे जीवन में प्रासंगिक है।

महापौर ने शिविर के बौद्धिक सत्र के दौरान युवाओं को संबोधित करते हुए स्वामी विवेकानंद के 1893 में शिकागो में दिए गए ऐतिहासिक भाषण का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि स्वामी विवेकानंद ने उस मंच से दुनिया को भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और मानवतावादी विरासत से अवगत कराया और देश को एक नई पहचान दिलाई। महापौर ने कहा कि स्वामी जी के इस भाषण ने भारत को वैश्विक सहिष्णुता, शांति और सहअस्तित्व का पाठ पढ़ाया।

राष्ट्रीय सेवा योजना के तहत आयोजित इस शिविर में छात्र युवा मंच की टीम भी सहयोगी के रूप में शामिल रही। यह आयोजन प्रातः 8 बजे से शुरू होकर देर शाम तक चला, जिसमें महापौर का अभिभाषण युवाओं का ध्यान आकर्षित करने वाला था। महापौर ने कहा कि आज का युवा अपनी मेहनत और समर्पण से ही भविष्य का निर्माण करेगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती मोनिका दास, जिला संगठक, एनएसएस ने की, जबकि विशेष अतिथि के रूप में पार्षदगण सावन वर्मा, मनोहर यादव, कमलेश बंधे, कुलेश्वर ध्रुव, और अन्य कई सम्मानित सदस्य उपस्थित थे।

इस आयोजन में युवा प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया और कैरियर मार्गदर्शन से जुड़े प्रयासों के लिए स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन किया गया। साथ ही, राष्ट्रीय और राज्य स्तर के शिविरों में भाग लेने वाले स्वयंसेवकों को भी सम्मानित किया गया। दिग्विजय महाविद्यालय, कमला कॉलेज, साइंस कॉलेज, गंडई, अम्बागढ़ चौकी, डोंगरगांव, डोंगरगढ़, घुमका महाविद्यालय और अन्य स्कूलों के 270 से अधिक स्वयंसेवकों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

महापौर ने युवाओं से आग्रह किया कि वे स्वामी विवेकानंद के आदर्शों पर चलकर अपने भविष्य को उज्जवल बनाएं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए हमेशा तत्पर रहें।