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CG: साय सरकार के प्रयासों से सुधरी प्रशासनिक व्यवस्था, मिनटों में हो रहा राजस्व समस्याओं का हल, 10 नवाचारों से आसान हुआ काम…

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छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ने सुशासन, पारदर्शिता और जनहित को केंद्र में रखकर कई ऐसे निर्णय लिए हैं, जिन्होंने आम जनता के जीवन को आसान बनाने की दिशा में ठोस बदलाव किए हैं। राज्य गठन के बाद से ही छत्तीसगढ़ के सामने प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करना एक बड़ी चुनौती रही है। विशेषकर आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करना आसान नहीं था। लेकिन साय सरकार ने इन चुनौतियों को अवसर में बदलते हुए शासन को अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनाया है।

साय सरकार बनने के पहले राजस्व से जुड़े कामकाज जटिल और कागज़ी प्रक्रियाओं पर आधारित थे। नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और प्रमाण पत्र जैसे कार्यों के लिए लोगों को बार-बार तहसील कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। खासकर आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को जानकारी के अभाव में अधिक परेशानी होती थी। साय सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए राजस्व परामर्श केंद्रों की स्थापना की है। इन केंद्रों के माध्यम से अब लोग सीधे एसडीएम, तहसीलदार या नायब तहसीलदार से संपर्क कर अपनी समस्याओं का समाधान पा रहे हैं। इसके अलावा “राजस्व मितान” टोल फ्री नंबर 07763-299077 भी जारी किया गया है, जिससे नागरिकों को घर बैठे जानकारी मिल रही है।

रजिस्ट्री-नामांतरण में 10 बड़े नवाचार

राज्य सरकार ने पंजीयन प्रणाली में 10 बड़े सुधार लागू किए हैं। इनमें आधार सत्यापन के जरिए फर्जी रजिस्ट्री पर रोक, ऑनलाइन दस्तावेज उपलब्धता, नकद रहित भुगतान, व्हाट्सएप और डिजीलॉकर सेवाएं, घर बैठे स्टाम्प व रजिस्ट्री सुविधा और रजिस्ट्री के बाद स्वतः नामांतरण जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। नए नियमों के तहत अब बंधक जमीनों की अवैध बिक्री पर रोक लगेगी और कोई भी व्यक्ति किसी अन्य की जगह पर खड़े होकर रजिस्ट्री नहीं करा सकेगा। इसके अलावा त्रुटि सुधार का अधिकार अब एसडीएम की जगह तहसीलदारों को दे दिया गया है। राज्य में जमीनों की जियो-रिफ्रेसिंग का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है। इसके पूरा होने के बाद सीमा विवादों में कमी आने की उम्मीद है।

नए बदलावों के मुख्य लाभ

अब आम जनता को फौती नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन आदि जैसे मामलों में स्पष्ट जानकारी मिल रही है।

कागज़ी कार्यवाही और समय की बचत हो रही है।

सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और सुगमता बढ़ी है।

जनता को अब प्रक्रियाओं की सही जानकारी मिलने से भ्रांतियां और भ्रम कम हुए हैं।

रामनवमी: राजधानी में आज बंद रहेगी मांस-मटन की दुकानें, उल्लंघन करने वालों पर होगी कार्रवाई, होटल-ढाबा-रेस्टोरेंट को भी चेतावनी…

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आज पूरे देश में श्री रामनवमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है।

धार्मिक पर्वों के मद्देनजर रायपुर नगर निगम ने मांस-मटन की बिक्री पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार आज शहर में सभी मांस-मटन की दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी। यह आदेश महापौर मीनल चौबे के निर्देश पर लागू किया गया है। साथ ही

उल्लंघन करने वालों पर होगी कार्रवाई

नगर निगम ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि इस त्योहार पर मांस परोसना या बेचना खुले बाजारों के साथ-साथ होटलों के भीतर भी प्रतिबंधित है। यदि कोई भी इन नियमों का उल्लंघन करते हैं तो उसका सामान जब्त कर लिया जाएगा। साथ ही संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।

होटल, ढाबा या रेस्टोरेंट में भी नहीं होगी बिक्री

स्वास्थ्य विभाग के आदेश के अनुसार, सभी जोनों और स्वच्छता अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सघन निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया है। नगर निगम ने यह भी चेतावनी दी है कि प्रतिबंधित दिनों में यदि कोई होटल, ढाबा या रेस्टोरेंट मांस या मटन की बिक्री करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसकी निगरानी के लिए हुए पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

CG: श्रमिकों को बड़ी सौगात, सीएम साय कल कल देंगे इतने करोंड रुपए, सीधा खाते में आएगा पैसा…

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  • 79,340 श्रमिकों को 27.15 करोड़ रुपए का लाभ डीबीटी से मिलेगा’
  • 12 श्रमिक कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत राशि का वितरण’
  • मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि’
  • श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन अध्यक्षता’

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य में शनिवार 28 मार्च को दोपहर 01 बजे जिला मुख्यालय जशपुर के वशिष्ठ कम्युनिटी हॉल में जिला स्तरीय श्रमिक सम्मेलन आयोजित होगा। मुख्यमंत्री द्वारा श्रम विभाग के अंतर्गत 12 विभिन्न श्रमिक कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत 79,340 निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिजनों को 27.15 करोड़ रुपए की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में अंतरित किया जाएगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश की श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन करेंगे। अति विशिष्ट अतिथि के रूप में वित्त मंत्री ओपी चौधरी, विशिष्ट अतिथि लोकसभा सांसद राधेश्याम राठिया, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. राम प्रताप सिंह सहित अन्य जन प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।

छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के सचिव गिरीश रामटेके ने बताया कि दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के अंतर्गत 14 हितग्राहियों को 14 लाख 32 हजार रुपए, मिनीमाता महतारी जतन योजना के अंतर्गत 1960 श्रमिकों को 3 करोड़ 92 लाख रुपए, मुख्यमंत्री निर्माण मजदूर सुरक्षा उपकरण सहायता योजना के तहत 297 श्रमिकों को 44 लाख 55 हजार रुपए, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के अंतर्गत 20 हितग्राहियों को 20 लाख रुपए, मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत 325 श्रमिकों के बच्चों को 38 लाख 88 हजार 374 रुपए, मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना के अंतर्गत 3040 श्रमिकों को 6 करोड़ 08 लाख रुपए, मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना के तहत 71220 श्रमिकों के बच्चों को 14 करोड़ 53 लाख 96 हजार 500 रुपए, मुख्यमंत्री श्रमिक औजार सहायता योजना के अंतर्गत 1142 श्रमिकों को 39 लाख 50 हजार 624 रुपए, मुख्यमंत्री श्रमिक सियान सहायता योजना के तहत 526 हितग्राहियों को 1 करोड़ 52 लाख रुपए, मुख्यमंत्री सायकल सहायता योजना के अंतर्गत 784 श्रमिकों को 29 लाख 04 हजार 082 रुपए, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के अंतर्गत 9 हितग्राहियों को 9 लाख रुपए, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक दीर्घायु सहायता योजना के अंतर्गत 3 श्रमिकों को 60 हजार रुपए अंतरित किए जाएंगे।

CG: सीएम विष्णुदेव साय कल श्रमिकों के लिए खोलेंगे सौगातों का पिटारा…

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य में शनिवार 28 मार्च को दोपहर 01 बजे जिला मुख्यालय जशपुर के वशिष्ठ कम्युनिटी हॉल में जिला स्तरीय श्रमिक सम्मेलन आयोजित होगा। मुख्यमंत्री द्वारा श्रम विभाग के अंतर्गत 12 विभिन्न श्रमिक कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत 79,340 निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिजनों को 27.15 करोड़ रुपए की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में अंतरित किया जाएगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश की श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन करेंगे। अति विशिष्ट अतिथि के रूप में वित्त मंत्री ओपी चौधरी, विशिष्ट अतिथि लोकसभा सांसद राधेश्याम राठिया, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. राम प्रताप सिंह सहित अन्य जन प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।

सीएम साय देंगे श्रमिकों को सौगात

छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के सचिव गिरीश रामटेके ने बताया कि दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के अंतर्गत 14 हितग्राहियों को 14 लाख 32 हजार रुपए, मिनीमाता महतारी जतन योजना के अंतर्गत 1960 श्रमिकों को 3 करोड़ 92 लाख रुपए, मुख्यमंत्री निर्माण मजदूर सुरक्षा उपकरण सहायता योजना के तहत 297 श्रमिकों को 44 लाख 55 हजार रुपए, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना के अंतर्गत 20 हितग्राहियों को 20 लाख रुपए, मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत 325 श्रमिकों के बच्चों को 38 लाख 88 हजार 374 रुपए ट्रांसफर करेंगे।

जिला स्तरीय श्रमिक सम्मेलन

वहीं, मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना के अंतर्गत 3040 श्रमिकों को 6 करोड़ 08 लाख रुपए, मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना के तहत 71220 श्रमिकों के बच्चों को 14 करोड़ 53 लाख 96 हजार 500 रुपए, मुख्यमंत्री श्रमिक औजार सहायता योजना के अंतर्गत 1142 श्रमिकों को 39 लाख 50 हजार 624 रुपए, मुख्यमंत्री श्रमिक सियान सहायता योजना के तहत 526 हितग्राहियों को 1 करोड़ 52 लाख रुपए, मुख्यमंत्री सायकल सहायता योजना के अंतर्गत 784 श्रमिकों को 29 लाख 04 हजार 082 रुपए, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के अंतर्गत 9 हितग्राहियों को 9 लाख रुपए, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक दीर्घायु सहायता योजना के अंतर्गत 3 श्रमिकों को 60 हजार रुपए अंतरित किए जाएंगे।

क्या है दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना?

बता दें कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना महिला निर्माण श्रमिकों को आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए ई-रिक्शा खरीदने हेतु ₹1 लाख (जिसे अब ₹1.5 लाख करने का प्रावधान है) की सब्सिडी प्रदान करती है। यह योजना छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के तहत पंजीकृत महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर देती है, जिससे वे अपने परिवार की आय बढ़ा सकें।

“ईरान वॉर के बीच तेल के गहराते संकट को लेकर बड़ी चेतावनी, मई तक चरमरा सकती है ग्लोबल इकोनॉमी”

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Middle East Tensions Impact on Global Economy:

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को चार हफ्ते हो चुके हैं, लेकिन हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को ईरान पहले ही खारिज कर चुका है, जिससे यह संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ सकता है.

इस बीच Strait of Hormuz के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है और कई देशों में ऊर्जा आपातकाल जैसी स्थिति पैदा हो गई है. ऐसे में ऊर्जा विशेषज्ञ भविष्य को लेकर गंभीर चेतावनी दे रहे हैं.

बिगड़ सकते हैं हालात

ऊर्जा अर्थशास्त्री Anas Alhajji ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी बजाते हुए कहा है कि यदि यह ईरान से जुड़ा युद्ध जल्द खत्म नहीं हुआ, तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ सकता है. उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो कुछ ही हफ्तों में इसके गंभीर परिणाम सामने आने लगेंगे.

उन्होंने मौजूदा हालात को Strait of Hormuz से जोड़ते हुए बताया कि इस संकीर्ण मार्ग से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति गुजरती है. ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार को बड़ा झटका दे सकती है. इसका असर मिडिल ईस्ट से दूर यूरोप तक दिखाई देने लगा है.

एशियाई बाजार में बेकाबू होगा तेल

अनस अल्हाजी के अनुसार, यूरोप में ऊर्जा संकट तेजी से गहराता जा रहा है और कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे रूस के ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता फिर बढ़ सकती है. उन्होंने चेतावनी दी कि जिस रूसी तेल पर निर्भरता कम करने की कोशिश यूरोप कई वर्षों से कर रहा था, वह प्रयास इस संकट में कमजोर पड़ सकता है.

वहीं एशियाई बाजारों को लेकर उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें पहले ही 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी हैं. अगर तनाव इसी तरह जारी रहा, तो क्रूड ऑयल की कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव और बढ़ेगा.

How To Make Dried Dates At Home: खजूर से घर में कैसे बना सकते हैं छुआरा, एक किलो के लिए चाहिए कितने खजूर?

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How To Make Dried Dates Step By Step At Home:

खजूर सिर्फ स्वाद में ही नहीं, सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. यही वजह है कि लोग इन्हें ताजे फल के साथ-साथ सूखे रूप यानी छुआरे के तौर पर भी इस्तेमाल करते हैं.

छुआरा न सिर्फ लंबे समय तक खराब नहीं होता, बल्कि इसकी मिठास और पोषण भी ज्यादा कंसंट्रेटेड हो जाते हैं. ऐसे में अगर आप घर पर ही छुआरा बनाना चाहते हैं, तो यह काम उतना मुश्किल नहीं है जितना लगता है.

1 किलो छुआरा कैसे बना सकते हैं?

सबसे पहले बात करते हैं कि 1 किलो छुआरा बनाने के लिए कितने खजूर चाहिएय आमतौर पर खजूर सुखाने के बाद उनका वजन करीब 30-40 प्रतिशत तक कम हो जाता है, क्योंकि उनमें मौजूद पानी सूख जाता है. यानी अगर आपको 1 किलो छुआरा बनाना है, तो आपको लगभग 1.5 से 1.7 किलो ताजे खजूर की जरूरत पड़ेगी. यह मात्रा खजूर की किस्म और उसमें मौजूद नमी पर भी निर्भर करती है.

घर पर छुआरा बनाने का तरीका

होम टिप्स के बारे में जानकारी देने वाली तमाम बेवसाइटों के अनुसार, घर पर छुआरा बनाने का सबसे आसान और पारंपरिक तरीका है धूप में सुखाना. इसके लिए सबसे पहले अच्छे और हल्के सख्त खजूर चुनें, क्योंकि ज्यादा नरम खजूर सही से सूख नहीं पाते. खजूर को साफ पानी से धो लें और पूरी तरह सूखने दें. इसके बाद इन्हें एक ट्रे या जाली पर फैलाकर तेज धूप में रख दें.

Homemade Raisins: घर में अंगूर से कैसे बना सकते हैं किशमिश, एक किलो बनाने के लिए कितना अंगूर होना जरूरी?

धूप में सुखाते समय ध्यान रखें कि खजूर एक-दूसरे के ऊपर न हों. दिन में 2-3 बार इन्हें पलटते रहें, ताकि हर तरफ से बराबर सूख सकें. इसके साथ ही इन्हें हल्के कपड़े या जाली से ढक दें, ताकि धूल या कीड़े न लगें. मौसम के हिसाब से यह प्रक्रिया 7 से 12 दिन तक चल सकती है. जब खजूर पूरी तरह सख्त और सूखे लगने लगें, तो समझिए आपका छुआरा तैयार है. अगर धूप में सुखाना संभव नहीं है, तो आप ओवन का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. इसके लिए ओवन को 60 से 70 डिग्री सेल्सियस पर सेट करें और खजूर को ट्रे में फैलाकर रखें. ओवन का दरवाजा थोड़ा खुला रखें, ताकि नमी बाहर निकलती रहे. करीब 6 से 8 घंटे में खजूर सूखकर छुआरे में बदल जाते हैं.

स्टोर करने का तरीका जरूरी

छुआरा बनने के बाद इसे सही तरीके से स्टोर करना भी जरूरी है. इसे एयरटाइट डिब्बे में रखें और नमी से दूर रखें. अगर लंबे समय तक स्टोर करना हो, तो फ्रिज में भी रखा जा सकता है. छुआरा न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होता है, बल्कि यह ऊर्जा का अच्छा सोर्स भी है. इसमें फाइबर, आयरन, पोटैशियम और कई जरूरी विटामिन पाए जाते हैं, जो पाचन, दिल की सेहत और इम्यूनिटी के लिए फायदेमंद होते हैं.

मीठा खाने से है परहेज? जानिए कितना जरूरी है इसका सही मात्रा में सेवन…

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आज के दौर में ‘नो शुगर’ और ‘लो सोडियम’ डाइट का ट्रेंड बढ़ गया है, लेकिन सच यह है कि मीठा और नमक दोनों ही शरीर के लिए जरूरी हैं। बस इनका सेवन संतुलित मात्रा में होना चाहिए।

आजकल फिटनेस और हेल्थ को लेकर जागरूकता बढ़ने के कारण लोग मीठे से दूरी बनाने लगे हैं। ‘नो शुगर’ या ‘लो शुगर’ डाइट का चलन भी तेजी से बढ़ा है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार मीठा पूरी तरह छोड़ना सही नहीं है। शरीर के संतुलन और ऊर्जा के लिए मीठे का सीमित मात्रा में सेवन जरूरी माना गया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आयुवेद के मुताबिक मीठा शरीर के लिए कितना जरूरी है और मीठे का सेवन कब और कितना चाहिए?

समय पर लिया गया कोई भी आहार शरीर के लिए दवा की तरह काम करता है। भोजन से लेकर पानी तक का समय होता है और जब सभी चीजें प्रकृति के अनुसार की जाएं तो पूरा शरीर संतुलित रहता है। उसी तरह, मीठा भी अगर समय और सही तरीके से खाया जाए तो यह शरीर को ताकत देता है, मन को खुश रखता है और पाचन को बेहतर बनाता है, लेकिन ज्यादा मीठा या गलत समय पर मीठा खाने से मोटापा, आलस और कई बीमारियां भी हो सकती हैं।

मीठा हमारे शरीर में तुरंत ऊर्जा कारण बनता है और पेट भरा रहता है। मीठा खाने से भूख की तृप्ति होती है। अक्सर खाने के बाद लोगों को मीठा खाने की तलब लगती है, लेकिन आयुर्वेद की मानें तो मीठा, खाने से पहले खाना चाहिए। अगर मीठा खाने का मन करता है तो घर पर बने हलवे, या गुड़ या खजूर से बनी मिठाई का सेवन किया जा सकता है। इसके अलावा, प्रकृति से मिले मीठे फलों का सेवन भी किया जा सकता है।

मीठे की तलब को शांत करने के लिए आइसक्रीम या डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ के सेवन से बचें। ये रक्त में शर्करा की मात्रा को तेजी से बढ़ाते हैं और मधुमेह के रोगियों के लिए यह खतरा हो सकता है। इसके साथ ही खाना खाने के बाद मीठा खाने से बचें क्योंकि यह कफ दोष को बढ़ाता है। ध्यान रखने वाली बात यह भी है कि प्रकृति मीठे फल और घर पर बने मीठे पदार्थों का सेवन सीमित मात्रा में करें। मीठे की अधिकता, बढ़ते वजन, सूजन, मधुमेह, आलस और कफ से जुड़ी परेशानियों का कारक हो सकती है।

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर, वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी;

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पेट्रोल और डीजल की कीमतें आज 26 मार्च 2026 को भारत में पेट्रोल की कीमतें अपरिवर्तित रहीं, जबकि वैश्विक कच्चे तेल के बाजार में भू-राजनीतिक तनाव के बीच तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

तेल विपणन कंपनियां (OMCs) हर दिन सुबह 6 बजे ईंधन की कीमतों में संशोधन करती हैं, ताकि घरेलू दरें वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और मुद्रा विनिमय दरों के साथ समन्वयित हो सकें। अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव के बावजूद, खुदरा पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रखी गई हैं ताकि उपभोक्ताओं को अचानक झटकों से बचाया जा सके। हालांकि, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड इस सप्ताह के शुरू में $115 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया था, लेकिन फिर थोड़ी नरमी आई। ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष ने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से तेल शिपमेंट में संभावित व्यवधानों को लेकर चिंताओं को बढ़ा दिया है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा है।

महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें (26 मार्च 2026) प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि हालांकि आज मानक पेट्रोल की दरें अपरिवर्तित हैं, लेकिन तेल कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल वेरिएंट जैसे XP95 और पावर पेट्रोल की कीमतों में लगभग रु 2 से रु 2.3 प्रति लीटर की वृद्धि की है। कुछ आउटलेट्स पर, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन का XP95 अब लगभग रु 101.80 प्रति लीटर पर उपलब्ध है, जबकि हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा पेश किए गए प्रीमियम ईंधनों में भी इसी तरह की वृद्धि देखी गई है।

ईंधन की कीमतों को क्या प्रभावित कर रहा है? भारत में ईंधन की कीमतें कई प्रमुख कारकों से प्रभावित होती हैं। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें मुख्य चालक हैं, क्योंकि कच्चा तेल मूल कच्चा माल है। विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि भारत अपने तेल का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है; कमजोर रुपये से लागत बढ़ती है। इसके अलावा, केंद्रीय उत्पाद शुल्क और राज्य स्तर का वैट खुदरा कीमतों में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं, जिससे शहरों में भिन्नताएं होती हैं। रिफाइनिंग लागत और मांग-आपूर्ति की गतिशीलता भी मूल्य निर्धारण प्रवृत्तियों को प्रभावित करती हैं। वर्तमान वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद, भारतीय अधिकारियों ने संकेत दिया है कि निकट भविष्य में ईंधन की कीमतें स्थिर रहने की उम्मीद है, जिससे महंगाई के दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। फिलहाल, आज पेट्रोल की दरें स्थिर बनी हुई हैं, लेकिन वैश्विक घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि आने वाले दिनों में स्थिति तेजी से बदल सकती है।

Delimitation in India: परिसीमन के बाद राज्‍यों में कितनी बढ़ेगी लोकसभा सीटें? किस राज्‍य को होगा ज्‍यादा लाभ?

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Delimitation in India: केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले महिला आरक्षण को लागू करने के लिए बड़ी तैयारी में जुटी है। महिला आरक्षण बिल दिशा में एक अहम प्रस्ताव पर काम हो रहा है।

संसद में परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पेश होने की संभावना है।

परिसीमन लागू होने के बाद लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़कर करीब 816 की जा सकती है। यह बदलाव भारतीय लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व के स्वरूप को बड़े स्‍तर पर प्रभावित कर सकता है। आइए जानते हैं परिसीमन के बाद किन राज्‍यों की लोगसभा सीटें बढ़ेगी और किन राज्‍यों का सबसे ज्‍यादा लाभ होगा?

महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी

सरकार की योजना है कि लोकसभा की कुल सीटों में से एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएं। इसके लिए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन लाने की तैयारी चल रही है। सूत्रों के अनुसार, सरकार चाहती है कि यह प्रक्रिया 2029 के चुनाव से पहले पूरी हो जाए।

परिसीमन के बाद कुल कितनी बढ़ेगी लोकसभा सीटें?

प्रस्तावित योजना के तहत लोकसभा सीटों में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। इसके लिए परिसीमन आयोग के माध्यम से नई सीटों का निर्धारण किया जाएगा, जिसमें जनसंख्या अनुपात को संतुलित रखने की कोशिश की जाएगी। परिसीमन लागू होने के बाद लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़कर करीब 816 की जा सकती है

दक्षिणी राज्यों की चिंताओं पर ध्यान

दक्षिण भारत के राज्यों ने पहले जनसंख्या नियंत्रण के कारण सीटों में संभावित असंतुलन को लेकर चिंता जताई थी। हालांकि, सरकार का दावा है कि किसी भी राज्य के प्रतिनिधित्व को कमजोर नहीं किया जाएगा। तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, केरल और तेलंगाना में भी सीटों में वृद्धि प्रस्तावित है।

संवैधानिक संशोधन और राजनीतिक सहमति जरूरी

इस पूरी योजना को लागू करने के लिए संवैधानिक संशोधन आवश्यक होगा। इसके लिए सरकार सभी राजनीतिक दलों, सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों से सहमति बनाने की कोशिश कर रही है।

2011 जनगणना के आधार पर जल्द लागू करने की योजना

मौजूदा कानून के अनुसार महिला आरक्षण 2027 की जनगणना के बाद लागू होना था, लेकिन संभावित देरी को देखते हुए सरकार अब 2011 की जनगणना के आधार पर ही परिसीमन कर महिला आरक्षण को समय से पहले लागू करने पर विचार कर रही है।

2029 चुनाव से पहले लागू करने का लक्ष्य

सरकार का लक्ष्य है कि सभी कानूनी और प्रक्रियात्मक बाधाओं को पार करते हुए यह व्यवस्था 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू कर दी जाए, ताकि संसद में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो सके और प्रतिनिधित्व अधिक समावेशी बन सके।

IMD Alert: मुंबई से पुणे तक पारा 34 के पार, उमस ने किया बेहाल, अगले 48 घंटों के मौसम का हाल, कब होगी बारिश?

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महाराष्ट्र में इन दिनों मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। मुंबई, पुणे, ठाणे और रायगढ़ सहित कई इलाकों में भीषण गर्मी और उमस ने लोगों को परेशान कर दिया है। वहीं, भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने राहत की खबर देते हुए अगले 4-5 दिनों में मध्य महाराष्ट्र के कई हिस्सों में हल्की बारिश की संभावना जताई है।

गुरुवार को लगातार चौथे दिन मुंबई में अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया।

सांताक्रूज में तापमान 34.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो सामान्य से 3.8 डिग्री अधिक है। वहीं कोलाबा में अधिकतम तापमान 34.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो औसत से 2.6 डिग्री ज्यादा है। दहानू में भी तापमान 34.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से करीब 2.9 डिग्री अधिक रहा।

Maharashtra Weather: मुंबई में पड़ रही भयानक गर्मी

– उमस के कारण न्यूनतम तापमान भी सामान्य से ऊपर बना हुआ है। कोलाबा में न्यूनतम तापमान 25.7 डिग्री और सांताक्रूज में 24.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

– मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को भी मुंबई, ठाणे और रायगढ़ के कई हिस्सों में गर्म और उमस भरा मौसम बना रहेगा।

– मुंबई के लोगों को फिलहाल इस हफ्ते गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। आने वाले 3-4 दिनों में फिलहाल बारिश के आसार नहीं है।

Mumbai News: मुंबई की अदालत में ‘सास-बहू ड्रामा’, नौकरी को लेकर हुए घरेलू विवाद में कोर्ट का अहम फैसला

Pune IMD Alert: वीकेंड में मिल सकती है राहत

पुणे में भी गर्मी ने अचानक तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। पिछले सप्ताह हुई हल्की बारिश के बाद मौसम सुहावना हो गया था, लेकिन इस सप्ताह की शुरुआत से तापमान में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। दोपहर के समय तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोगों को बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। हालांकि, मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि गुरुवार और शुक्रवार को दोपहर के समय आंशिक बादल छाए रह सकते हैं, जिससे थोड़ी राहत मिल सकती है।

Maharashtra Weather Update: मध्य महाराष्ट्र में बारिश के आसार

मध्य महाराष्ट्र के कई जिलों में अगले 4-5 दिनों के लिए गरज-चमक के साथ हल्की बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया है। इसके चलते ‘येलो अलर्ट’ घोषित किया गया है। दूसरी ओर, कोंकण क्षेत्र में अगले दो दिनों तक गर्म और उमस भरा मौसम बना रहेगा। बदलते मौसम के कारण तापमान में इस तरह का उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। दिन में तेज गर्मी और सुबह-शाम हल्की ठंडक का यह मिश्रित प्रभाव लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी गई है।