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25 वर्षों की विकास यात्रा थीम पर बनी कृषि विभाग के प्रदर्शनी को मिला द्वितीय पुरस्कार…

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रायपुर: छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के रजत जयंती के अवसर पर राज्य सरकार द्वारा नवा रायपुर, अटल नगर तूता स्थित पंडित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी व्यावसायिक परिसर, मेला स्थल में 1 से 5 नवम्बर तक राज्योत्सव का आयोजन किया गया। इस मेला में कृषि एवं संवर्गीय विभागों द्वारा 25 वर्षों की विकास यात्रा की थीम पर कृषि मॉडल प्रदर्शनी लगाई गई। आम जनता द्वारा इस प्रदर्शनी को काफी प्रशंसा एवं सराहना मिली। 05 दिवसीय स्थापना दिवस कार्यक्रम में जुरी कमेटी द्वारा कृषि विभाग के प्रदर्शनी को द्वितीय स्थान के लिए चयनित किया गया। राज्योत्सव के समापन समारोह के मौके पर उप राष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन के हाथों विभाग की सचिव श्रीमती शहला निगार ने पुरस्कार ग्रहण किया। कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने विभाग की इस सफलता के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। पुरस्कार मिलने से अधिकारी-कर्मचारी भी उत्साहित हैं। इस मौके पर कृषि विभाग के संचालक श्री राहुल देव सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

गौरतलब है कि राज्योत्सव में कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी तथा संवर्गीय विभाग -उद्यानिकी, पशु पालन, मछली पालन, कृषि अभियांत्रिकी, राष्ट्रीय जलग्रहण, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर एवं कामधेनु विश्वविद्यालय तथा सम्बंधित संस्थाओं द्वारा इन 25 वर्षों के विकास यात्रा की थीम पर कृषि मॉडल का प्रदर्शन किया गया।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य स्थापना वर्ष 2000 से वर्ष 2025 तक 25 वर्षो में केन्द्र शासन एवं राज्य शासन द्वारा संचालित विभिन्न महत्वकांक्षी योजनाओं के द्वारा हुए विकास का जीवंत प्रदर्शन करते हुए स्टॉल लगाया गया, जिसमें कृषि विभाग द्वारा प्राकृतिक खेती, किसान सम्मान निधि, ड्रोन द्वारा उर्वरक छिड़काव, बीज वितरण व विपणन की नवीन व्यवस्था, भूमि संरक्षण द्वारा वर्षा जल संरक्षण आदि को प्रदर्शित किया गया।

उद्यानिकी विभाग द्वारा पुष्पों की प्रदर्शनी एवं सब्जियों तथा फलों की उन्नत किस्म का प्रदर्शन किया गया। पशुपालन विभाग द्वारा पशुओं के उन्नत नस्ल एवं दुग्ध उत्पादन तथा मछली पालन विभाग द्वारा बायोफ्लॉक एवं केजकल्चर द्वारा मछलीपालन की नवीन तकनीक के साथ सजावटी मछलियों का प्रदर्शन किया गया। कृषि अभियांत्रिकी द्वारा कृषि में प्रयोग की जाने वाली उन्नत कृषि तकनीक से लैस कृषि यंत्रों को जनता के लिए प्रदर्शित किया गया। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य के अनुकूल तथा अधिक उत्पादन देने वाली विभिन्न फसल किस्मों के साथ स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित जैविक उत्पाद का प्रदर्शन किया गया था।

राज्योत्सव 2025 का समापन:  विभिन्न विद्यालयों एवं संस्थानों के कलाकारों ने मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति ने राज्योत्सव 2025 को बनाया यादगार…

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राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर म्यूनिसिपल स्कूल मैदान राजनांदगांव में तीन दिवसीय राज्योत्सव 2025 का भव्य आयोजन किया गया। राज्य स्थापना दिवस के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव के रूप में मनाया गया।

राज्योत्सव के तृतीय दिवस जिले के विभिन्न विद्यालयों एवं संस्थाओं के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। जिसमें एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय पेण्ड्री, पीएमश्री सर्वेश्वर दास नगर पालिक निगम उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, नीरज पब्लिक स्कूल पेण्ड्री के विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य पर मनमोहक प्रस्तुति दी।

इसके साथ ही श्रीमती कामनी साहू के छत्तीसगढ़ी लोक गीतों ने समा बांधा। चक्रधर कत्थक कल्याण केन्द्र के कलाकारों ने शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में समाज कल्याण विभाग के कलापथक दल द्वारा प्रस्तुति दी गई। आस्था, अभिलाषा व महासमुंद जिले से आए दिव्यांग कलाकारों ने भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों एवं संस्थानों के कलाकारों ने मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति से राज्योत्सव 2025 के आयोजन को यादगार बनाया।

विभिन्न विकास विभाग की विभागीय महत्वपूर्ण योजनाओं एवं सफल योजनाओं की प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। विभागीय स्टॉलों के माध्यम से शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं एवं कार्यक्रमों की जानकारी दी गई। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

“पहलगाम के बाद फिर कश्मीर में हमला करने की फिराक में आतंकी, शमशेर की टीम पर बड़ा खुलासा”

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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल महीने में हुए आतंकी हमले को कोई नहीं भूल पाया है. भारतीय सेना ने इस हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर के जरिए एक साथ कई आतंकियों को ठिकाने लगाया था. हालांकि आतंकी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं.

ऐसा इसलिए क्योंकि खुफिया सूत्रों के हवाले से सामने आया है कि आतंकी फिर से कश्मीर में पहलगाम जैसा हमला करने की फिराक में हैं. इस जानकारी के सामने आने के बाद से ही सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गए हैं.

खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर के बाद कश्मीर में आतंकी घुसपैठ, ड्रोन से नजर रखना और सीमा पार से रसद की आपूर्ति में बढ़ोतरी हुई है. लश्कर और जैश की कई यूनिट Loc के रास्ते जम्मू-कश्मीर में घुसी हैं. जिन्हें पाकिस्तान की ISI और एसएसजी से मदद मिल रही है.

आतंकी शमशेर की यूनिट एक्टिव

आतंकी शमशेर लश्कर की एक यूनिट ने कथित तौर पर हवाई निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया है, जिससे आने वाले हफ्तों में संभावित फिदायीन हमलों या हथियार गिराने के संकेतों का पता चला है. पाकिस्तान की बॉर्डर एक्शन टीम (BAT), जिसमें पूर्व SSG सैनिक और आतंकवादी शामिल हैं. इनको पूरे पाक अधिकृत कश्मीर में फिर से तैनात किया गया है, जो सीमा पार हमलों की नई योजनाओं का बनाने का सीधा संदेश है.

आतंकियों की हुई थी बड़ी बैठक

अक्टूबर 2025 में Pok में हुई हाईलेवल मीटिंग में जमात-ए-इस्लामी, हिज़्बुल मुजाहिदीन और आईएसआई के अधिकारी एकजुट हुए थे. जहां स्लीपर सेल को एक बार फिर एक्टिव करने, पूर्व कमांडरों को पैसा मुहैया कराने और ऑपरेशन सिंदूर में हुए नुकसान का बदला लेने के लिए “जवाबी हमले” करने की योजनाएं बनाई गईं. यह ऑपरेशन सिंदूर के बाद सबसे बड़ी एक्टिविटी है. यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियों को एक्टिव मोड पर रखा गया है. ऑपरेशन सिंदूर में तबाह होने के बाद भी पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है.

“Indian Job Market: खतरे में लाखों नौकरियां! भारत तेजी से बन रहा गिग इकोनॉमी, जारी हुई बड़ी चेतावनी”

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शेयर बाज़ार के जाने-माने विशेषज्ञ और मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के संस्थापक सौरभ मुखर्जी ने भारतीय रोज़गार बाज़ार के भविष्य पर एक बड़ी और कड़वी चेतावनी दी है। उनके अनुसार ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के कारण भारत में व्हाइट कॉलर जॉब्स (White Collar Jobs) में वृद्धि का पहिया लगभग थम चुका है।

यह बदलाव अस्थायी नहीं बल्कि जीवनयापन के तरीके में एक बुनियादी और स्थायी परिवर्तन का संकेत है।

नौकरियों की ग्रोथ रुकी: कॉर्पोरेट जॉब्स की वापसी मुश्किल

सौरभ मुखर्जी ने एक पॉडकास्ट के दौरान कहा कि भारत अब एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रहा है जहाँ सुरक्षित और पारंपरिक कॉर्पोरेट नौकरियों के मौके कम होते जाएंगे। उनका मानना है कि व्हाइट कॉलर जॉब्स की ग्रोथ में आया यह धीमापन अस्थायी नहीं है और पिछले 5 वर्षों में इनमें बमुश्किल ही बढ़ोतरी हुई है। उन्हें नहीं लगता कि अब इन नौकरियों में किसी भी तरह की सार्थक वृद्धि होने की कोई संभावना है क्योंकि ऑटोमेशन बड़ी कंपनियों के काम करने के तरीके को पूरी तरह से बदल रहा है।

ऑटोमेशन का प्रभाव: कंपनियां बिना भर्ती कर रही हैं विस्तार

मुखर्जी बताते हैं कि अब बड़ी कंपनियों को विस्तार के लिए बड़ी टीमों की आवश्यकता नहीं है। HDFC बैंक, बजाज फाइनेंस, टाइटन और एशियन पेंट्स जैसी दिग्गज कंपनियां भी अब कर्मचारियों की संख्या बढ़ाए बिना ही तेज़ी से विस्तार कर रही हैं। ऑटोमेशन ने इन कंपनियों के लिए कम कर्मचारियों के साथ काम करना बेहद आसान बना दिया है जिससे बड़ी संख्या में नई भर्तियाँ होने की संभावना बहुत कम हो गई है।

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भारत बन रहा है गिग वर्कर्स की दुनिया

सौरभ मुखर्जी के अनुसार भारत में अब स्ट्रक्चर्ड सैलरीड जॉब्स में तेज़ी से गिरावट देखने को मिलेगी। इसके बजाय,देश में सेल्फ-एंप्लॉयमेंट (स्वरोजगार) और गिग वर्क आम बात हो जाएगी। ज़्यादा लोग स्वतंत्र रूप से काम करेंगे, जैसे फ्रीलांसर, ड्राइवर, कोडर, पॉडकास्टर, वित्तीय सलाहकार या क्रिएटर। हर साल लाखों युवा जॉब मार्केट में आ रहे हैं ऐसे में देश को काम और कमाई के वैकल्पिक तरीकों पर सोचना होगा।

भारत की बेहतर स्थिति

मुखर्जी का मानना है कि इस बदलाव को अपनाने के लिए भारत कई देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में है। भारत के पास युवा आबादी सस्ते डेटा, आधार और UPI जैसी मज़बूत डिजिटल प्रणालियाँ मौजूद हैं। ये सारी चीजें “गिग कर्मचारियों को एक साथ जोड़ने वाला गोंद” हैं जो डीसेंट्रलाइज्ड (विकेन्द्रीकृत) काम का एक मज़बूत आधार प्रदान करते हैं।

भविष्य के लिए सलाह

मुखर्जी ने वर्तमान और आने वाली पीढ़ी को तैयार रहने की सलाह दी है। पारंपरिक व्हाइट कॉलर जॉब्स अब एक बड़ी चुनौती होंगे। हमें खुद को और अपने बच्चों को ऐसे भविष्य के लिए तैयार करना होगा जहां जीवन का एक बड़ा समय गिग वर्कर के रूप में बीतेगा। उनका कहना है कि ऑफिस कार्ड, ऑफिस कैब और एक ही कंपनी में दशकों तक काम करने का दौर अब खत्म हो रहा है।

“बिहार के मतदाताओं के पास अवसरवादी हुक्मरानों को सबक सिखाने का सुनहरा मौक़ा: खरगे”

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान आरंभ होने के बाद बृहस्पतिवार को राज्य के मतदाताओं से आग्रह किया कि वे बड़ी संख्या में मतदान करें क्योंकि यह जनता के साथ विश्वासघात करने वाले अवसरवादी हुक्मरानों को सबक सिखाने का सुनहरा मौक़ा है।

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में कुल 3.75 करोड़ मतदाता 1,314 उम्मीदवारों की चुनावी किस्मत का फैसला करेंगे। इस चरण में विपक्षी महागठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री पद के चेहरे तेजस्वी यादव और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता एवं उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा के साथ-साथ 16 मंत्रियों की किस्मत भी दांव पर है। खरगे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “लोकतंत्र की जन्मस्थली, बिहार में विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान शुरू हो चुका है। मेरी बिहार के मतदाता से अपील है कि अधिक से अधिक संख्या में अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करें और 20 साल बाद प्रदेश को बदलाव की एक नई दिशा प्रदान करें।” उन्होंने कहा कि एक ऐसे बिहार का निर्माण करना है जहां राज्य के युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो, उन्हें बेरोजगारी और पलायन का दंश नहीं झेलना पड़े।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “समाज के हर वर्ग- दलित, महादलित, आदिवासी, पिछड़ा, अति-पिछड़ा, आर्थिक रूप से कमज़ोर, अल्पसंख्यक सभी को बराबर का हक़ मिले और सामाजिक न्याय की एक नई परिभाषा हम रचें जिससे देश की तरक़्क़ी में बिहार का योगदान बढ़े।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया, “पिछले 20 वर्षों में बिहार में भ्रष्टाचार, कुशासन और जंगलराज को ‘विकास’ की ब्रैंडिंग कर, अवसरवादी हुक्मरानों ने जो जनता के साथ विश्वासघात किया है उन्हें सबक सिखाने का आज बिहार की जागरुक जनता के पास सुनहरा मौक़ा है। ये अवसर जाने ना दें। ” खरगे ने कहा, “मैं ख़ासकर पहली बार वोट डालने वाले युवाओं से दिल से अपील करता हूं कि वो इस मौक़े को ना गंवाएं और परिवर्तन के लिए अपने मताधिकार का ज़रूर प्रयोग करे। वोट ज़रूर करें और अपने मित्रों व परिवारजनों को भी प्रोत्साहित करें।

” कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने मतदाताओं का आह्वान किया कि वे लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए वोट करें। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “बिहार के मेरे प्यारे भाइयों, बहनों, माताओं एवं युवाओं! आज अपने हाथों से अपना भविष्य तय करने का दिन है। बड़ी संख्या में निकलकर लोकतंत्र के महापर्व में हिस्सा लीजिए।” प्रियंका गांधी ने कहा, ” नौकरी, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं बिहार के उज्ज्वल भविष्य के लिए, अपने लोकतंत्र, संविधान व वोट के अधिकार की रक्षा के लिए वोट कीजिए।”

“दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ विराट कोहली और रोहित शर्मा को नहीं मिला मौका! टीम इंडिया के ODI स्क्वाड से बाहर”

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भारत और साउथ अफ्रीका की ए टीमों के बीच दूसरा टेस्ट मैच खेला जा रहा है. इसके बाद दोनों टीमों के बीच वनडे सीरीज भी खेली जाएगी, जिसके लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने भारत का ए टीम का ऐलान कर दिया है.

लेकिन साउथ अफ्रीका के खिलाफ तीन मैचों की इस वनडे सीरीज के लिए विराट कोहली और रोहित शर्मा के नाम का चयन नहीं किया गया है. ये दोनों ही खिलाड़ी भारत की ए टीम का हिस्सा नहीं हैं.

रोहित-विराट टीम से बाहर?

साउथ अफ्रीका ए के खिलाफ तीन मैचों की सीरीज के लिए भारतीय स्क्वाड से रोहित शर्मा और विराट कोहली को बाहर रखा गया है. लेकिन साउथ अफ्रीका की सीनियर टीम के खिलाफ टीम इंडिया में रोहित और विराट दोनों ही खेलते नजर आ सकते हैं. ऑस्ट्रेलिया दौरे पर रोहित शर्मा के बल्ले से 3 मैचों में ही 200 से ज्यादा रन आए थे. वहीं ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आखिरी वनडे में विराट कोहली ने भी अर्धशतकीय पारी खेली थी.

अभिषेक शर्मा को मिला मौका

टी20 क्रिकेट में स्टार बल्लेबाज अभिषेक शर्मा को भारत की वनडे टीम में शामिल होने का इंतजार है. लेकिन भारत की सीनियर टीम में शामिल होने से पहले अभिषेक को भारत की ए टीम में जगह मिल रही है. ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ भी अभिषेक को मौका मिला था. भारत की ए टीम में जगह पाने के लिए ही अभिषेक ने अपनी बहन की शादी स्किप की थी. वहीं अब साउथ अफ्रीका ए के खिलाफ भी अभिषेक शर्मा को वनडे सीरीज के लिए लिया गया है.

वनडे सीरीज का शेड्यूल

भारत और साउथ अफ्रीका की ए टीमों के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज खेली जाएगी. इस सीरीज के सभी मुकाबले राजकोट के निरंजन शाह स्टेडियम में खेले जाएंगे.

पहला वनडे- 13 नवंबर, राजकोट

दूसरा वनडे, 16 नवंबर, राजकोट

तीसरा वनडे- 19 नवंबर, राजकोट

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत की ए टीम

तिलक वर्मा (कप्तान), ऋतुराज गायकवाड़ (उपकप्तान), अभिषेक शर्मा, रियान पराग, ईशान किशन (विकेटकीपर), आयुष बडोनी, निशांत सिंधु, विपरज निगम, मानव सुथार, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा, खलील अहमद और प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर).

“Bihar Election वोटिंग के बीच रेखा गुप्ता का बड़ा बयान, ‘जनता जानती है किसके साथ है विकास का रास्ता'”

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बिहार चुनावी माहौल में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है. पटना में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार की जनता पूरी तरह समझदार है और उन्हें अच्छे-बुरे की पहचान है.

उन्होंने कहा कि पिछले 15-20 वर्षों में बिहार ने जिस तरह विकास की दिशा पकड़ी है. वह केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही संभव हुआ है.

भ्रष्टाचार में डूबे लोगों को जेल जाने से कोई नहीं रोक सकता- रेखा गुप्ता

दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि बिहार की जनता ने देखा है कि जब राज्य में एनडीए की सरकार होती है. तब सड़कों, बिजली, शिक्षा और उद्योग में तेजी से प्रगति होती है. लोगों के जीवन में स्थिरता आती है. इसलिए अब कोई भी व्यक्ति बिहार के विकास को रोक नहीं सकता है. उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि जो लोग भ्रष्टाचार में डूबे हैं और जिन्होंने जनता के पैसे का दुरुपयोग किया, उन्हें जेल जाने से कोई नहीं बचा सकता है.

जनता अब जननायकों और खलनायकों में समझती है फर्क- सीएम रेखा

मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि बिहार की जनता को बेवकूफ बनाने का दौर खत्म हो गया है. उन्होंने कहा कि जो लोग झूठे वादे करके जनता को गुमराह करते हैं, वे जल्द ही जनता के गुस्से का सामना करेंगे. ऐसे लोग राजनीति नहीं, छुट्टियां मनाने विदेश जाएंगे. रेखा गुप्ता ने बिना नाम लिए राजद और महागठबंधन पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जनता अब जननायकों और खलनायकों में फर्क समझती है. जनता के दिलों पर वही राज करेगा जो जननायक होगा, जो उनके सुख-दुख में साथ देगा. बिहार की जनता भावनाओं में नहीं, विकास में विश्वास रखती है.

एनडीए को भारी बहुमत से सत्ता में लाएगी जनता- रेखा गुप्ता

रेखा गुप्ता ने दावा किया कि आने वाले चुनावों में जनता फिर से नीतीश कुमार के नेतृत्व और प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में एनडीए को भारी बहुमत से सत्ता में लाएगी. उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार ने बिहार में विकास के नए मानक स्थापित किए हैं और अब राज्य आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

अंत में उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों का भरोसा आज भी उसी विकासवादी राजनीति में है, जिसने राज्य को नई पहचान दी है. यह वही बिहार है जो कभी पलायन के लिए जाना जाता था, लेकिन आज उद्योग और शिक्षा में नए अवसर पैदा कर रहा है. जनता जानती है कि सही रास्ता कौन-सा है.

“पतंजलि का स्वदेशी मंत्र: भारतीय परंपराओं का हुआ पुनरुद्धार, सुरक्षित हुई सांस्कृतिक धरोहर!”

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आज के वैश्वीकरण के दौर में, जहां पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, भारतीय परंपराओं का संरक्षण एक चुनौती बन गया है. पतंजलि ने बताया है कि कंपनी ने न केवल स्वास्थ्य उत्पादों के माध्यम से बल्कि सांस्कृतिक जागरूकता अभियानों के जरिए भारतीय विरासत को पुनर्जीवित करने का अभियान चलाया है.

पतंजलि का कहना है कि संस्था आयुर्वेद, योग और प्राचीन ज्ञान को आधुनिक जीवनशैली से जोड़कर सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा कर रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रयास न केवल स्वास्थ्य को मजबूत कर रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक पहचान को जीवंत रखने का माध्यम भी बन रहा है.

पतंजलि का कहना है, ”कंपनी 5000 से ज्यादा उत्पादों के साथ बाजार में है, जिनमें हर्बल साबुन से लेकर योगिक चाय तक सब कुछ शामिल है. लेकिन पतंजलि का योगदान केवल व्यावसायिक नहीं है; यह सांस्कृतिक पुनरुत्थान का प्रतीक है. कंपनी के ‘स्वदेशी आंदोलन’ के तहत लाखों लोगों को आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया. योग शिविरों के माध्यम से प्राचीन ग्रंथों जैसे ‘योगसूत्र’ और ‘चरक संहिता’ का प्रचार हो रहा है, जो भारतीय दर्शन की नींव हैं.”

संस्कृति का बीज बोता है पतंजलि- बाबा रामदेव

बाबा रामदेव कहते हैं, “पतंजलि केवल उत्पाद नहीं बेचता, बल्कि वह संस्कृति का बीज बोता है. हमारी परंपराएं स्वास्थ्य और आध्यात्मिकता का खजाना हैं, जिन्हें आधुनिक विज्ञान से जोड़कर हम वैश्विक पटल पर मजबूत कर रहे हैं.”

पतंजलि ने बताया, ”हर्बल उत्पादों ने स्थानीय किसानों को जड़ी-बूटियों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया. इससे न केवल आर्थिक सशक्तिकरण हुआ, बल्कि प्राचीन कृषि परंपराओं का संरक्षण भी. पतंजलि का जैविक खेती मॉडल वेदों में वर्णित ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को जीवंत करता है. यह सांस्कृतिक धरोहर को पर्यावरण से जोड़कर स्थायी विकास सुनिश्चित करता है.”

धरोहर की रक्षा है परंपराओं का पुनरुद्धार- पतंजलि

पतंजलि का दावा है, ”हमारे योग कार्यक्रमों में 10 करोड़ से ज्यादा लोगों ने भाग लिया, जो भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रसार का प्रमाण है. पतंजलि का मॉडल सांस्कृतिक संरक्षण को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाता है. भविष्य में जब जलवायु परिवर्तन और सांस्कृतिक क्षय की चुनौतियां बढ़ेंगी, ऐसे प्रयास भारतीय पहचान को मजबूत करेंगे. अंततः, पतंजलि साबित कर रहा है कि परंपराओं का पुनरुद्धार न केवल धरोहर की रक्षा है, बल्कि एक स्वस्थ, समृद्ध राष्ट्र का निर्माण भी.”

“‘छत्तीसगढ़ में विकास और विश्वास ने भय और हिंसा का स्थान लिया’ – उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन”

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उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन आज नवा रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए. यह आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया, जिसमें राज्य की विकास, प्रगति और सांस्कृतिक समृद्धि की प्रेरक यात्रा का जश्न मनाया गया.

उपराष्ट्रपति ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए, इस ऐतिहासिक रजत जयंती समारोह में छत्तीसगढ़ के लोगों के साथ शामिल होने पर अपार प्रसन्नता व्यक्त की जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था. इस पाँच दिवसीय महोत्सव में लोगों ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और इसके प्रभावशाली सामाजिक-आर्थिक बदलाव की झलक देखी.

उपराष्ट्रपति ने 1 नवम्बर 2000 को राज्य के निर्माण में स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के दूरदर्शी नेतृत्व को गर्व से याद किया और एक पूर्व लोकसभा सांसद के रूप में अपने जुड़ाव को व्यक्तिगत तौर पर प्रकट किया, जब उन्होंने राज्य पुनर्गठन विधेयक का समर्थन किया था. उन्होंने छत्तीसगढ़ की असाधारण 25 साल की यात्रा की सराहना की – भारत के सबसे युवा राज्यों में से एक होने से लेकर सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में प्रगति के एक मॉडल के रूप में उभरने तक.

छत्तीसगढ़ में विकास और विश्वास ने भय और हिंसा का स्थान लिया’ – उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन

सी.पी. राधाकृष्णन ने नक्सलवाद के खतरे को खत्म करने में राज्य की सफलता की सराहना की और इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ नेतृत्व के साथ-साथ राज्य सरकार, सुरक्षा बलों और स्थानीय समुदायों के समर्पित प्रयासों को दिया. उन्होंने कहा कि विकास और विश्वास ने छत्तीसगढ़ में भय और हिंसा का स्थान ले लिया है.

उपराष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ की सफलता की नींव रखने वाले लोगों – किसानों, जनजातीय समुदायों, उद्यमियों, शिक्षकों और युवाओं – की सराहना की. उन्होंने राज्य की अनुकरणीय सार्वजनिक वितरण प्रणाली की विशेष रूप से सराहना की, जो 72 लाख से अधिक लाभार्थियों को निःशुल्क खाद्यान्न प्रदान करती है, और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को बधाई दी.

सी.पी. राधाकृष्णन ने राज्य की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए आदिवासी समुदायों को सम्मान दिया. उन्होंने आदिवासी समुदायों की बुद्धिमत्ता, संस्कृति और सतत जीवन शैली की सराहना की, जो आज के पारिस्थितिक और सामाजिक संदर्भ में गहरी प्रासंगिकता रखती है.

उपराष्ट्रपति ने राज्य में उल्लेखनीय बुनियादी ढांचे के विकास पर भी प्रकाश डाला, जिसमें व्यापक सड़क, रेल, एक्सप्रेसवे और हवाई अड्डे की कनेक्टिविटी शामिल है, जिसने सुदूरवर्ती जिलों को राष्ट्रीय बाजारों से जोड़ा है. उन्होंने नवा रायपुर की भारत के पहले ग्रीनफील्ड शहर के रूप में प्रशंसा की, जो आईटी हब, फार्मा हब, एआई डेटा सेंटर पार्क और उन्नत स्वास्थ्य सेवा के लिए एक विश्वस्तरीय मेडिसिटी जैसी नई-पुरानी पहलों के माध्यम से एक वैश्विक क्षमता केन्द्र बनने के लिए तैयार है.

उन्होंने ‘अंजोर विज़न @2047’ के अंतर्गत सेमीकंडक्टर निर्माण और डिजिटल शासन सुधारों सहित उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने वाले छत्तीसगढ़ के प्रयासों को रेखांकित किया, जिसका उद्देश्य आर्थिक विस्तार, मानव विकास और स्थायी शासन को बढ़ावा देना है, जो एक विकसित भारत की राष्ट्रीय कल्पना के अनुरूप है.

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परम्पराओं की प्रशंसा करते हुए, उपराष्ट्रपति ने क्षेत्र के पारंपरिक नृत्यों जैसे पंथी और कर्मा, और इसकी समृद्ध आदिवासी कलाओं और शिल्प की सराहना की. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ विविधता में एकता की भारतीय भावना का प्रतीक है, जहाँ सांस्कृतिक संरक्षण और आधुनिकीकरण साथ-साथ चलते हैं.

वास्तविक प्रगति पर ज़ोर देते हुए, सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि ‘प्रगति केवल सकल घरेलू उत्पाद से नहीं, बल्कि लोगों के चेहरों पर मुस्कान, शासन में उनके विश्वास और हर बच्चे की आँखों में चमकती आशा से भी मापी जाती है.’

अपने संबोधन के समापन पर, उपराष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ के युवाओं से कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हरित प्रौद्योगिकियों और वैश्विक बाज़ारों में उभरते अवसरों का लाभ उठाने और साहस, रचनात्मकता और करुणा के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया.

उन्होंने कहा कि रजत महोत्सव को केवल अतीत के उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक प्रतिज्ञा के रूप में देखा जाना चाहिए – एक विकसित छत्तीसगढ़ के माध्यम से एक विकसित भारत के निर्माण, लोकतंत्र को मजबूत करने, संस्कृति का सम्मान करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक उज्जवल कल छोड़ने की प्रतिज्ञा.

छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव के समापन समारोह में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमन डेका; मुख्यमंत्री विष्णु देव साय; छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह; और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे.

“भारतीय रुपये में नया जोश, ‘करेंसी की रिंग’ में निचले स्तर से उठकर अमेरिकी डॉलर को दी करारी शिकस्त”

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हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन भारतीय रुपये की शुरुआत मजबूती के साथ हुई. गुरुवार को रुपया 8 पैसे की बढ़त के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 88.62 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया.

रुपया की इस तेजी के पीछे डॉलर की कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी को प्रमुख वजह माना जा रहा है.

विदेशी मुद्रा कारोबारियों (Forex Traders) के अनुसार, घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक रुझान ने भी रुपये को समर्थन दिया. हालांकि, विदेशी निवेशकों (FIIs) की ओर से जारी बिकवाली के दबाव ने इसकी तेजी को कुछ हद तक सीमित कर दिया.

अंतरबैंक बाजार में उतार-चढ़ाव

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार (Interbank Foreign Exchange) में रुपया 88.51 रुपये प्रति डॉलर पर खुला और कुछ समय बाद 88.49 रुपये प्रति डॉलर तक मजबूत हुआ. शुरुआती कारोबार के बाद रुपया 88.6 रुपये2 प्रति डॉलर पर स्थिर रहा, जो पिछले बंद भाव 88.70 रुपये से 8 पैसे की बढ़त को दर्शाता है. बुधवार को प्रकाश पर्व की छुट्टी के चलते विदेशी मुद्रा बाजार बंद था, इसलिए मंगलवार को रुपया ₹88.70 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.16% गिरकर 99.90 पर आ गया.

शेयर बाजार में तेजी

घरेलू शेयर बाजारों में भी तेजी का रुख देखने को मिला. बीएसई सेंसेक्स 321.81 अंक या 0.39% की बढ़त के साथ 83,780.96 अंक पर पहुंचा. निफ्टी 50 57.05 अंक या 0.22% बढ़कर 25,654.70 अंक पर ट्रेड कर रहा था. वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 0.17% बढ़कर 63.63 डॉलर प्रति बैरल पर रही.

शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) मंगलवार को शुद्ध बिकवाल (Net Sellers) रहे. उन्होंने 1,067.01 करोड़ रुपये के शेयर बाजार से निकाले. कुल मिलाकर, कमजोर डॉलर, नरम क्रूड कीमतें और घरेलू बाजार की सकारात्मक धारणा ने रुपये को मजबूती दी है, हालांकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली से इसकी बढ़त सीमित रही.