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“छठ पर्व का आज दूसरा दिन, खरना पूजा के साथ शुरू होगा 36 घंटे का निर्जला व्रत”

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लोक आस्था का बड़ा पर्व छठ आज अपने दूसरे दिन यानी खरना के रूप में मनाया जा रहा है. बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई इलाकों में यह पर्व बहुत श्रद्धा और भक्ति से मनाया जाता है.

चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में व्रती (छठ करने वाली महिलाएं) अपने परिवार की सुख-शांति और संतान की लंबी उम्र के लिए सूर्य देव और छठी माई की पूजा करती हैं. छठ के दूसरे दिन को खरना कहा जाता है. इस दिन व्रती पूरे दिन कुछ भी नहीं खाती-पीती हैं. शाम के समय सूर्य देव को अर्घ्य देकर पूजा करती हैं. खरना का मतलब होता है-मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि. इस दिन का उपवास बहुत कठिन माना जाता है क्योंकि पूरे दिन बिना पानी पिए रहना होता है.

शाम को व्रती स्नान करके साफ कपड़े पहनती हैं और घर या आंगन को मिट्टी से लीपकर पवित्र जगह बनाती हैं. वहां केले के पत्ते पर प्रसाद रखा जाता है. खरना के प्रसाद में गुड़ की खीर, रोटी (ठेकुआ) और फल होते हैं. सूर्यास्त के बाद सूर्य देव को जल अर्पित किया जाता है और फिर व्रती सबसे पहले खुद प्रसाद खाती हैं. उसके बाद परिवार और आस-पड़ोस के लोगों को प्रसाद देती हैं.

इस दिन का प्रसाद बहुत पवित्र माना जाता है. कोई भी व्यक्ति तब तक प्रसाद नहीं खाता जब तक व्रती उसे न दे. खरना के बाद व्रती अगले 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखती हैं, यानी बिना पानी पिए तीसरे दिन शाम तक उपवास करती हैं. छठ पूजा को सूर्य देव की उपासना का सबसे प्राचीन पर्व माना जाता है. माना जाता है कि सूर्य देव स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि के दाता हैं. छठ माई यानी सूर्य की बहन की पूजा करने से परिवार में खुशहाली आती है.

आत्मशुद्धि का दिन

खरना को आत्मशुद्धि का दिन कहा जाता है. यह दिन संयम, तपस्या और भक्ति का प्रतीक है. इस दिन घरों में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है. घर को गोबर और मिट्टी से लीपकर शुद्ध बनाया जाता है और चारों ओर गंगाजल का छिड़काव किया जाता है.

खरना के दिन से ही माहौल में भक्ति गीतों की गूंज शुरू हो जाती है. गांव-गांव में महिलाएं गाती हैं. इन गीतों से पूरा माहौल श्रद्धा से भर जाता है. इस दिन मिट्टी या पीतल के बर्तनों में ही प्रसाद बनाया जाता है, स्टील या एल्यूमीनियम के बर्तन नहीं चलते.

छठ सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि साफ-सफाई, अनुशासन और एकता का प्रतीक है. इस दिन लोग अपने आसपास की सफाई करते हैं, नदी-तालाबों को सजाते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं. यह पर्व हमें बताता है कि जब हम प्रकृति, पानी और सूर्य का सम्मान करते हैं, तो जीवन में संतुलन और शांति बनी रहती है.

आज पूरे बिहार में घाट सज गए हैं, घरों में पूजा की तैयारी जोरों पर है. महिलाएं व्रत रखकर सूर्य देव से अपने परिवार की भलाई की प्रार्थना करेंगी. खरना का यह दिन छठ के सबसे पवित्र और भावनात्मक दिनों में से एक है.

CG: हमारे पंडवानी कलाकारों ने न्यूयॉर्क, पेरिस और लंदन तक महाभारत की कथाओं पर आधारित प्रस्तुतियों से लोगों को मंत्रमुग्ध किया है.. मुख्यमंत्री साय!

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पंडवानी एक ऐसी विधा है, जिसके माध्यम से छत्तीसगढ़ को पूरी दुनिया में पहचान मिली है। हमारे पंडवानी कलाकारों ने न्यूयॉर्क, पेरिस और लंदन तक महाभारत की कथाओं पर आधारित प्रस्तुतियों से लोगों को मंत्रमुग्ध किया है। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से न केवल छत्तीसगढ़ की परंपरा को जीवित रखा है, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा को वैश्विक मंचों तक पहुँचाया है।

पंडवानी आज हमारी लोक चेतना, नारी सशक्तिकरण और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बन चुकी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस के अवसर पर दुर्ग जिले के ग्राम मेड़ेसरा में आयोजित पंडवानी महासम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।

छत्तीसगढ़ शासन संस्कृति विभाग रायपुर के सौजन्य से आयोजित इस कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं अहिवारा विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर, साजा विधायक ईश्वर साहू, राज्य तेलघानी बोर्ड के अध्यक्ष जितेंद्र साहू, पूर्व मंत्री रमशीला साहू एवं जागेश्वर साहू, पूर्व विधायक लाभचंद बाफना एवं डॉ. दयाराम साहू, जिला पंचायत दुर्ग की अध्यक्ष सरस्वती बंजारे तथा दुर्ग नगर निगम की महापौर अलका बाघमार भी उपस्थित थीं।

पंडवानी के पुरोधा स्वर्गीय झाड़ूराम देवांगन

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज मुझे पंडवानी के पुरोधा स्वर्गीय झाड़ूराम देवांगन जी की स्मृति भी हो रही है। जब वे हाथ में तंबूरा लेकर प्रस्तुति देते थे, तो दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते थे। पंडवानी गायन में महिला कलाकारों की विशेष सफलता उल्लेखनीय रही है। मुझे स्वर्गीय लक्ष्मी बंजारे जी का भी स्मरण हो रहा है। यह छत्तीसगढ़ का सौभाग्य है कि हमारी धरती पर तीजन बाई जैसी विभूति हुईं, जिन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण तीनों सम्मान प्राप्त हुए हैं। जब वे तंबूरा लेकर आलाप भरती हैं, तो ऐसा लगता है मानो आकाश के देवी-देवता भी उन्हें सुन रहे हों।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मैंने अनेक अवसरों पर तीजन बाई जी की पंडवानी सुनी है। श्याम बेनेगल की भारत एक खोज में उनका पंडवानी गायन दृश्य मन को आनंद और उत्सुकता से भर देता है। पद्मश्री डॉ. उषा बारले जी हमारे बीच उपस्थित हैं, जिन्होंने अपने अद्भुत पंडवानी गायन से सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंडवानी हमारी अमूल्य धरोहर है। आज इस महासम्मेलन के आयोजन के माध्यम से आप सभी ने इस धरोहर को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का अत्यंत सराहनीय कार्य किया है।

उन्होंने कहा कि हम लोगों ने बचपन में रामलीला मंडलियों के माध्यम से रामायण की कथाएं और पंडवानी के माध्यम से महाभारत की कथाएं सुनीं। पीढ़ी दर पीढ़ी इन लोककलाकारों ने रामायण और महाभारत जैसी महान कथाओं को जन-जन तक पहुँचाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडवानी गायन इस मायने में भी अद्वितीय है कि इसमें स्त्री-पुरुष का कोई भेद नहीं है। तीजन बाई और डॉ. उषा बारले जैसी कलाकारों ने अपनी प्रतिभा से यह साबित किया है कि यह विधा महिलाओं के कौशल और संवेदनशीलता की प्रतीक है। पंडवानी गायन के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सामाजिक तासीर भी झलकती है – यहां मातृशक्ति की भागीदारी कला के क्षेत्र में भी अग्रणी है और उन्हें सदैव प्रोत्साहित किया जाता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरगुजा से लेकर बस्तर तक हर क्षेत्र की अपनी विशिष्ट संस्कृति है। हमारी सरकार छत्तीसगढ़ी लोककला और संस्कृति को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। कलाकारों की पेंशन राशि में वृद्धि की गई है और अवसरों की संख्या भी बढ़ाई गई है। चित्रोत्पला फिल्म सिटी की स्थापना का निर्णय लेकर हमने छत्तीसगढ़ी सिनेमा को सशक्त बनाने का प्रयास किया है।

उन्होंने कहा कि जब अटल जी ने छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किया था, तब उनके मन में विकास के साथ-साथ संस्कृति को सहेजने की भी गहरी मंशा थी। आज जब ऐसा सुंदर आयोजन देखता हूं, तो मन को सुकून मिलता है कि अटल जी की मंशा पूर्ण हुई है। उन्होंने बताया कि 1 नवंबर को प्रदेश की रजत जयंती मनाई जाएगी, जो हमारी लोकसंस्कृति का महोत्सव होगा। इस अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का भी आगमन होगा। मुख्यमंत्री ने सभी से आग्रह किया कि वे ज्योत्सव में सम्मिलित होकर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाएं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा विभाग शीघ्र ही 5000 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ करेगा। इन पदों की पूर्ति से ग्रामीण एवं आदिवासी अंचलों में शिक्षकों की कमी काफी हद तक दूर होगी, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और निरंतरता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

मुख्यमंत्री साय ने नागरिक कल्याण महाविद्यालय नंदिनी में स्नातकोत्तर कक्षाएं प्रारंभ करने, अछोटी में बीएड महाविद्यालय खोलने, मेड़ेसरा को आदर्श ग्राम बनाने, समुदायिक भवन हेतु 20 लाख रुपये और क्षेत्र के सभी पंचायतों में सीसी रोड निर्माण की घोषणा की।

कार्यक्रम के अध्यक्ष उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस के अवसर पर सभी पंडवानी कलाकारों का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ कला और संस्कृति के लिए देश और दुनिया में विशिष्ट पहचान रखता है। यह कलाकारों से परिपूर्ण राज्य है। उन्होंने 1 नवंबर को राज्योत्सव में सभी को रायपुर आमंत्रित किया।

कार्यक्रम की संयोजक पद्मश्री डॉ. उषा बारले ने स्वागत उद्बोधन देते हुए अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस और पंडवानी महासम्मेलन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री साय सहित सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, संभाग आयुक्त एस.एन. राठौर, आईजी आर.जी. गर्ग, कलेक्टर अभिजीत सिंह, एसएसपी विजय अग्रवाल सहित अन्य अधिकारीगण, पंडवानी के लोककलाकार तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

CG: इस दीपावली पर राज्य में लगभग 15 हजार 250 करोड़ से 16 हजार करोड़ रुपये का व्यापार हुआ…

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इस दीपावली पर छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है। इस दीपावली पर राज्य में लगभग 15 हजार 250 करोड़ से 16 हजार करोड़ रुपये का व्यापार हुआ है। व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष दिवाली पर देशभर में कुल बिक्री 6.05 लाख करोड़ रुपये तक हुई, जिसमें 5.40 लाख करोड़ का वस्तु व्यापार और 65 हजार करोड़ का सेवा व्यापार शामिल है, जो अब तक का देश के व्यापार इतिहास का सबसे बड़ा त्योहारी कारोबार है।

देश के सबसे बड़े व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय वाइस चेयरमैन एवं राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के सदस्य अमर पारवानी, प्रदेश चेयरमैन जितेन्द्र दोशी, प्रदेश चेयरमेन विक्रम सिंहदेव, प्रदेश अध्यक्ष परमानंद जैन, प्रदेश महामंत्री सुरेन्द्र सिंह एवं प्रदेश कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल ने बताया कि कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने अपनी रिसर्च शाखा कैट रिसर्च एंड ट्रेड डेवलपमेंट सोसाइटी के सर्वेक्षण के आधार पर देशभर के 60 प्रमुख वितरण केंद्रों , जिनमें सभी राज्यों की राजधानियां एवं टियर-2 और टियर-3 शहर शामिल हैं।

कैट के अनुसार राष्ट्रीय वाइस चेयरमैन एवं राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के सदस्य अमर पारवानी ने बताया कि रिपोर्ट यह दर्शाती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जीएसटी दरों में राहत और स्वदेशी अपनाने के “मजबूत ब्रांड एंबेसडर” के रूप में उभरे हैं, जिन्होंने व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों को अभूतपूर्व रूप से प्रेरित किया है। पीएम मोदी का “वोकल फॉर लोकल” और “स्वदेशी दिवाली” का आह्वान जनता के बीच गहराई से गूंजा 87 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने भारतीय वस्तुओं को विदेशी वस्तुओं के मुकाबले प्राथमिकता दी, जिससे चीनी उत्पादों की मांग में तेज गिरावट दर्ज की गई। व्यापारियों ने बताया कि भारतीय निर्मित वस्तुओं की बिक्री पिछले वर्ष की तुलना में 25 प्रतिशत बढ़ी है ।

उन्होंने बताया कि दिवाली 2025 के आंकड़े पिछले वर्ष (₹4.25 लाख करोड़) की तुलना में 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाते हैं। मुख्य रूप से गैर-कारपोरेट एवं पारंपरिक बाजारों ने कुल व्यापार में 85 प्रतिशत योगदान दिया, जो भारतीय खुदरा बाजारों और छोटे व्यापारियों की शानदार वापसी को रेखांकित करता है।

वस्तुओं के क्षेत्रवार बिक्री

किराना एवं एफएमसीजी 12 प्रतिशत, सोना-चाँदी 10 प्रतिशत, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इलेक्ट्रिकल्स 8 प्रतिशत, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 7 प्रतिशत , रेडीमेड परिधान 7 प्रतिशत, गिफ्ट आइटम 7 प्रतिशत, होम डेकोर 5 प्रतिशत, फर्निशिंग एवं फर्नीचर 5 प्रतिशत, मिठाई एवं नमकीन 5 प्रतिशत, वस्त्र 4 प्रतिशत, पूजन सामग्री 3 प्रतिशत,फल एवं मेवे 3 प्रतिशत, बेकरी एवं कन्फेक्शनरी 3 प्रतिशत, फुटवियर 2 प्रतिशत, तथा अन्य विविध वस्तुएँ 19 प्रतिशत शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सेवा क्षेत्र में भी भारी वृद्धि दर्ज हुई और इसमें 65,000 करोड़ का व्यापार हुआ। पैकेजिंग, हॉस्पिटैलिटी, टैक्सी सेवाएँ, ट्रैवल, इवेंट मैनेजमेंट, टेंट एवं सजावट, मैनपावर और डिलीवरी जैसे क्षेत्रों में भी अभूतपूर्व गतिविधि रही, जिससे त्यौहारी अर्थव्यवस्था के दायरे का विस्तार हुआ।

CG: रजत जयंती वर्ष के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आगमन की तैयारी, सभी जिलों में तीन दिवसीय कार्यक्रम…

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छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष पर नवा रायपुर में 1 से 5 नवंबर तक राज्योत्सव का आयोजन किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री अरूण साव ने आज रायपुर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि राज्योत्सव के दौरान सभी जिलों में तीन दिवसीय कार्यक्रम होंगे। इस बार राज्य स्थापना का यह आयोजन अधिक व्यापक और ऐतिहासिक स्वरूप में किया जा रहा है। साव ने बताया कि रजत जयंती वर्ष के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आगमन की भी तैयारी की जा रही है। उनके स्वागत में नवा रायपुर में रोड शो होगा। इन मार्गों पर बारह आकर्षक स्वागत द्वार बनाए जा रहे हैं, जिसमें छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति, लोक परंपरा और विकास योजनाओं की झलक देखने को मिलेगी।

CG: प्रदेश के कई क्षेत्रों में हल्की मध्यम बारिश होने की संभावना, अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया…

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दीपावली के बाद बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाओं ने छत्तीसगढ़ के मौसम को प्रभावित कर रखा है। ऐसे में प्रदेश के कई क्षेत्रों में हल्की मध्यम बारिश होने की संभावना है। बंगाल की खाड़ी में दबाव बनने से 27 अक्टूबर को बारिश हो सकती है। आगामी चार दिनों तक दक्षिण छत्तीसगढ़ में मेघगर्जन के साथ हल्की मध्यम वर्षा होने की संभावना है।

दूसरी ओर अक्टूबर का अंतिम सप्ताह चल रहा है पर रात की ठंड गायब है। लोगों को गर्मी से बचने के लिए एसी का सहारा लेना पड़ रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक, एक कम दबाव का क्षेत्र दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के ऊपर सक्रिय है। इससे 25 तारीख तक दक्षिण-पूर्वी और उससे सटे मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर अवदाब में बदलने और 26 तारीख तक गहरे अवदाब में और 27 तारीख की सुबह तक दक्षिण-पश्चिम और उससे सटे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक चक्रवाती तूफान में बदलने की संभावना है।

पिछले 24 घंटे के दौरान प्रदेश में सबसे ज्यादा तापमान राजनांदगांव और दुर्ग में 33.5 डिग्री सेल्सियस और सबसे कम तापमान अंबिकापुर में 18 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कुछ हिस्सों में वर्षा की गतिविधि हुई है। दंतेवाड़ा और बड़े बचेली में 3 सेंटीमीटर, इसके अतिरिक्त भैरमगढ़ 2 सेमी और लोहांडीगुड़ा 2 सेमी. वहीं दरभा 1 सेमी, दोरनापाल 1 सेमी, कोंटा 1 सेमी, गीदम 1 सेमी., सुकमा 1 सेमी. और बीजापुर 1 सेमी बारिश हुई।

मौसम विभाग ने आज शनिवार को एक दो जगहों पर हल्की माध्यम बारिश और बादल गरजने के साथ ही वज्रपात की संभावना जताई है। अगले दो दिन तक यह सिलसिला जारी रह सकता है। वहीं बात राजधानी रायपुर की करें तो यहां आज बादल छाए रहने की संभावना है। अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है।

”चक्रवाती तूफान आ रहा; भारी बारिश और तेज हवाएं चलने की चेतावनी, इन इलाकों को अधिक खतरा”

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बंगाल की खाड़ी में बन रहे चक्रवाती तूफान के कारण ओडिशा में आपदा मैनेजमेंट टीमें हाई अलर्ट पर हैं। इस तूफान के 27 अक्टूबर से राज्य में भारी बारिश लाने की संभावना है। हालांकि, चक्रवात के ओडिशा में सीधे तट से टकराने की उम्मीद नहीं है।

इसके बावजूद जोरदार बरसात और तेज हवाएं चल सकती हैं। राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने आश्वासन दिया कि राज्य आने वाले चक्रवाती तूफान के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, जल संसाधन, ऊर्जा और कृषि विभाग स्थिति से निपटने के लिए तैयारी कर ली गई है।

सुरेश पुजारी ने कहा, ‘ओडिशा प्राकृतिक आपदाओं जैसे भारी बारिश, बाढ़, नदियों में उफान और चक्रवातों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। हम 22 या 29 अक्टूबर को तट से टकराने वाले संभावित चक्रवाती तूफान की तैयारी कर रहे हैं। स्वास्थ्य, जल संसाधन, ऊर्जा और कृषि विभाग पूरी तरह तैयार हैं। ओडिशा के स्थानीय प्रशासन विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में राहत केंद्रों, निकासी और आवश्यक आपूर्ति की व्यवस्था कर चुके हैं। हम लोगों से घबराने की बजाय शांत रहने की अपील करते हैं, क्योंकि हम पूरी तरह तैयार हैं।’

चक्रवाती तूफान में बदलने की आशंका

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 24 अक्टूबर को दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव क्षेत्र की पहचान की। इस सिस्टम के 25 अक्टूबर तक डिप्रेशन, 26 अक्टूबर तक गहरा डिप्रेशन और 27 अक्टूबर तक बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान में बदलने की संभावना है। मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि यह तूफान संभवतः आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ेगा। ओडिशा में 27 से 29 अक्टूबर तक तटीय और दक्षिणी जिलों में भारी बारिश की उम्मीद है। आईएमडी ने पूरे राज्य के लिए यलो अलर्ट जारी किया है, जिसमें कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक भारी बारिश की संभावना है। 27 अक्टूबर से दक्षिण ओडिशा तट पर 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं और 60 किमी प्रति घंटे तक की झोंकेदार हवाएं चलने की उम्मीद है।

“कहां हैं 12 हजार स्पेशल ट्रेनें? दरवाजों और छतों तक लटके हैं लोग; राहुल गांधी ने सरकार को घेरा”

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कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने त्योहारों के मौसम में कई रेलगाड़ियों में यात्रियों की भीड़ होने को लेकर सरकार पर निशाना साधा। शनिवार को उन्होंने आरोप लगाया कि फेल डबल इंजन सरकार के दावे खोखले साबित हुए हैं।

यह सवाल भी किया कि 12,000 स्पेशल ट्रेनें कहां हैं? रेल मंत्रालय ने 1 अक्टूबर से 30 नवंबर, 2025 तक निर्धारित 12,011 रेल यात्राओं की सूची पिछले दिनों जारी की थी। इसमें बताया गया कि त्योहारों के दौरान भारी भीड़ को देखते हुए देश के विभिन्न स्थानों से प्रतिदिन औसतन 196 विशेष रेलगाड़ियां चलाई जा रही हैं। अब तक एक दिन में संचालित विशेष रेलगाड़ियों की सबसे अधिक संख्या 18 अक्टूबर को लगभग 280 थी, जबकि सबसे कम 8 अक्टूबर को लगभग 166 थी।

राहुल गांधी ने कुछ रेलगाड़ियों में यात्रियों की भीड़ से जुड़े वीडियो साझा करते हुए एक्स पर पोस्ट किया, ‘त्योहारों का महीना है – दिवाली, भाईदूज, छठ। बिहार में इन त्यौहारों का मतलब सिर्फ आस्था नहीं, घर लौटने की लालसा है – मिट्टी की खुशबू, परिवार का स्नेह, गांव का अपनापन। लेकिन यह लालसा अब एक संघर्ष बन चुकी है।’ राहुल गांधी ने कहा कि बिहार जाने वाली ट्रेनें ठसाठस भरी हैं। टिकट मिलना असंभव है और सफर अमानवीय हो गया है। कई ट्रेनों में क्षमता से 200 प्रतिशत तक यात्री सवार हैं। लोग दरवाजों और छतों तक लटके हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि फेल डबल इंजन सरकार के दावे खोखले हैं।

राहुल गांधी ने उठाए गंभीर सवाल

कांग्रेस नेता गांधी ने सवाल किया, ‘कहां हैं 12,000 स्पेशल ट्रेनें? क्यों हालात हर साल और बदतर ही होते जाते हैं। क्यों बिहार के लोग हर साल ऐसे अपमानजनक हालात में घर लौटने को मजबूर हैं?’ राहुल गांधी ने कहा कि अगर राज्य में रोजगार और सम्मानजनक जीवन मिलता, तो उन्हें हजारों किलोमीटर दूर भटकना नहीं पड़ता। उन्होंने दावा किया कि ये सिर्फ मजबूर यात्री नहीं, राजग की धोखेबाज नीतियों और नियत का जीता-जागता सबूत हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि यात्रा सुरक्षित और सम्मानजनक हो यह अधिकार है, कोई एहसान नहीं।

“रूस ने यूक्रेन पर दागीं ताबड़तोड़ बैलिस्टिक मिसाइलें, इमारतों में लगी आग; कई मौतें”

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यूक्रेन में बीती रात रूस के मिसाइल और ड्रोन हमलों में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई जबकि 17 अन्य लोग घायल हो गए। कीव के नगर सैन्य प्रशासन के प्रमुख तिमुर तकाचेंको ने बताया कि राजधानी कीव में शनिवार तड़के बैलिस्टिक मिसाइल हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और दस अन्य घायल हो गए।

यूक्रेन की राज्य आपातकालीन सेवा के अनुसार तीन घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

आपातकालीन सेवा ने ‘टेलीग्राम’ पर लिखा कि एक स्थान पर एक गैर-आवासीय इमारत में आग लग गई, जबकि दूसरे स्थान पर मिसाइलों का मलबा खुले क्षेत्र में गिर गया, जिससे आस-पास की इमारतों की खिड़कियों को नुकसान पहुंचा।

मेयर विटाली क्लिट्स्को ने हमले के दौरान टेलीग्राम पर लिखा, “राजधानी में विस्फोट। शहर बैलिस्टिक हमले की चपेट में है।” द्निप्रोपेट्रोव्स्क क्षेत्र के कार्यवाहक गवर्नर व्लादिस्लाव हैवानेंको ने बताया कि क्षेत्र में रूसी हमलों में दो लोग मारे गए और सात घायल हो गए।

इससे पहले रूस ने दावा किया था कि उसने शुक्रवार रात में 121 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। मंत्रालय ने कहा, “पिछली रात, ड्यूटी पर तैनात वायु रक्षा प्रणालियों ने 121 यूक्रेनी मनावरहित विमानों को आसमान में रोका और उन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया।”

मंत्रालय के अनुसार, ड्रोन कई क्षेत्रों में मार गिराए गए। जिसमें रोस्तोव में 20, वोल्गोग्राड में 19, ब्रांस्क में 17, कलुगा में 12, स्मोलेंस्क में 11, बेलगोरोड और मॉस्को में नौ-नौ, वोरोनिश और लेनिनग्राद में आठ-आठ, नोवगोरोड, रियाज़ान और तांबोव में दो-दो, और त्वेर और तुला में एक-एक ड्रोन को हवा में मार गिरया।

इस बीच, विदेशी देशों के साथ आर्थिक सहयोग के लिए रूसी राष्ट्रपति के विशेष दूत और रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (आरडीआईएफ) के प्रमुख किरिल दिमित्रिव ने कहा कि रूसी और अमेरिकी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच शिखर सम्मेलन होगा, लेकिन अभी नहीं वह बाद में होगा।

“पढ़ाई, दवाई, सिंचाई और सप्लाई, अमित शाह ने एनडीए का एजेंडा सेट किया;  लालू, राहुल को घेरा”

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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने खगड़िया के बाद मुंगेर में चुनावी रैली को संबोधित किया। मुंगेर की जनसभा में उन्होंने स्कूलों में पढ़ाई, अस्पतालों में वक्त पर दवाई, खेतों की समय पर सिंचाई और हर घर में शुद्ध जल की सप्लाई को एनडीए का लक्ष्य करार दिया।

अमित शाह ने राहुल गांधी, लालू यादव और रबड़ी देवी पर बिहार को विकास की दौर में पीछे धकेलने का आरोप लगाया।

राहुल गांधी की पार्टी कांग्रेस के समर्थन से चल रही लालू-रबड़ी की सरकार ने अनेक सालों तक बिहार में जंगलराज कायम रखा। यह चुनाव फिर से जंगलराज को रोकने के लिए है। लालू-रबड़ी ने राज्य का काफी नुकसान किया। 2005 में जब बिहार की जनता ने उनके राज को समाप्त कर दिया तो नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य प्रगति के पथ पर आगे बढ़ा। अगर वे फिर वापस आए तो जंगलराज आने से कोई नहीं रोक सकता। इसलिए हर हाल में नीतीश और मोदी जी की सरकार बनाना है।

अमित शाह ने कहा कि किसानों के लिए केंद्र सरकार ने काफी काम किया। इसका लाभ बिहार के किसानों को भी मिला। इससे फसलों के उत्पादन में बिहार का पूरे देश में स्थान बना। इसे आगे भी कायम रखना है तो फिर से एनडीए का डबल इंजन सरकार बनाना पड़ेगा क्योंकि उनके पास(महागठबंथन) न नेता है और ना नीयत।

अमित शाह ने कहा कि लालू यादव अपने बेटे को सीएम बनाना चाहते हैं तो सोनिया गांधी राहुल गांधी को पीएम बनाने में लगे हैं। दूसरी ओर मोदी जी बिहार के युवाओं का भविष्य संवारने में लगे हैं। उन्हें पूरे बिहार की चिंता है। 11 सालों में लगभग 19 लाख करोड़ देकर बिहार को आगे बढ़ाया। मोदी जी और नीतीश जी की जोड़ी ने पिछड़ा और अति पिछड़ा समाज के लोगों के लिए बहुत काम किया जबकि राजद और कांग्रेस खुद को बनाने में लगे रहे।

“एक्टर सतीश शाह का निधन, 74 की उम्र में ली आखिरी सांस”

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बॉलीवुड एक्टर सतीश शाह का निधन हो गया है। 74 की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली। ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि वह काफी समय से किडनी से जुड़ी बीमारी से परेशान थे। हाल ही में उनका ट्रांसप्लांट भी हुआ था।

रविवार को अंतिम संस्कार

सतीश उनके शो साराभाई वर्सेस साराभाई, जाने दो यारों और मैं हूं ना से काफी पॉपुलर थे। सतीश के मैनेजर ने इस खबर को इंडिया टुडे से बात करते हुए कन्फर्म किया है। रविवार को एक्टर का अंतिम संस्कार होगा।

अशोक पंडित ने क्या कहा

सतीश शाह ने भी सोशल मीडिया पर लिखा, दुख के साथ बताना पड़ रहा है कि हमारे प्यारे दोस्त और शानदार एक्टर सतीश शाह का कुछ घंटे पहले किडनी फेलियर की वजह से निधन हो गया है। उन्हें तुरंत हिंदुजा अस्पताल ले जाया गया जहां उन्होंने आखिरी सांस ली। हमारी इंडस्ट्री का ये बड़ा नुकसान है। आम शांति।

पॉपुलर शोज में किया काम

सतीश ने लगभग 4 दशक तक काम किया और वह फिल्मों और टीवी शोज के जरिए घर-घर फेमस थे। उनकी प्यारी मुस्कान सबका दिल जीत लेती थी। सतीश को सबसे बड़ी सक्सेस 1983 में जाने भी दो यारों से मिली जिसमें उन्होंने कई किरदार निभाए थे।

इन हिट फिल्मों में भी थे शामिल

सतीश ने कई सुपरहिट फिल्मों में भी काम किया है जैसे हम साथ साथ हैं, मैं हूं ना, कल हो ना हो, कभी हां कभी ना, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे और ओम शांति ओम।