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बलरामपुर में बड़ी लापरवाही; बच्चों के राशन पर डाका, ग्रामीणों ने वायरल कर दिया

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सरकारी स्कूलों पर पढ़ने वाले बच्चों के पोषक को ध्यान में रखते हुए मिड डे मील योजना संचालित की जा रही है, जिसमें सालाना करोड़ों रुपए खर्च कर पोषणयुक्त मध्याह्न भोजन (मिड डे मील) देखकर शिक्षा से नियमित जोड़े रखने का प्रयास कर रही है, लेकिन बलरामपुर जिले में स्कूल से चावल की बोरियां भरकर बाजार में बिक्री करने के लिए ले जाने की तस्वीर सामने आई है. जिससे शिक्षा विभाग में पूरी तरह से हड़कंप मचा हुआ है. वहीं इस मामले के बाद अब विभाग पर कई तरह के सवाल भी खड़े हो रहे हैं.

ग्रामीणों ने वायरल कर दिया वीडियो
ये पूरा मामला बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर विकासखंड क्षेत्र में आने वाले मेघुली गांव में स्थित पूर्व माध्यमिक शाला का है. जहां स्कूल में मध्याह्न भोजन के लिए रखे चावल को अवैध तरीके से निजी वाहन में भरकर बाजार बिक्री के लिए ले जाया जा रहा था. इस घटना को ग्रामीणों ने अपने मोबाइल में कैद कर लिया, फिर सोशल मीडिया पर वीडियो को वायरल किया. इतना ही नहीं ग्रामीणों ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर पूरे मामले की लिखित शिकायत कर जांच की मांग भी की है.

ग्रामीणों का क्या कहना है?
प्रत्यक्षदर्शी एवं ग्रामीणों ने बताया कि कुछ दिन पहले स्कूल में करीब 4 बजे एक लोडिंग गाड़ी पहुंची, जहां प्रधान पाठक की मौजूदगी में स्टोर रूम से चावल की बोरियां निकाल कर गाड़ी में लोड की जा रही थी. इस पूरे मंजर को जब ग्रामीणों ने देखा तो मौके पर पहुंचे और पहले तो अपने मोबाइल से वीडियो बनाया फिर प्रधान पाठक से पूछताछ की तो आनन-फानन में गाड़ी पर लोड़ की गई बोरियां प्रधान पाठक के द्वारा उतरवा कर फिर से स्टोर रूम में रखवा दी गई और लोग वहां से भाग निकले.

अधिकारी ने क्या कहा?
इस पूरे मामले को लेकर विकासखंड शिक्षा अधिकारी सदानंद कुशवाहा ने जानकारी देते हुए बताया कि घटना की जांच के निर्देश दिए गए हैं. सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी अनिल तिवारी के नेतृत्व में टीम भेजी गई है. इस मामले पर जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा उसके ऊपर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.

छत्तीसगढ़ के भू माफिया तो गजब के निकले ! सैकड़ों एकड़ सरकारी जमीनों का कर दिया सौदा, बैंक से लोन भी उठाया

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छत्तीसगढ़ में बड़ा जमीन घोटाला हुआ है. सरकार की ऑनलाइन भूइयां साइट में गड़बड़ी कर सैकड़ों एकड़ सरकारी जमीन को निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिया गया है. इतना ही नहीं सरकार की इन जमीनों को बैंकों में बंधक रख निजी व्यक्तियों द्वारा करोड़ों रुपये लोन लेने का भी आरोप है. ताजा मामला दुर्ग जिले के मुरमुंदा पटवारी हल्का से जुड़ा है. मुरमुंदा हल्का के मुरमुंदा, अछोटी, चेटुवा, बोरसी गांवों में बड़े पैमाने पर जमीनों की हेराफेरी पकड़ी गई है. इन गांवों में 250 एकड़ से अधिक शासकीय और निजी जमीनों का फर्जी तरीके से बटांकन कर अलग-अलग व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिया गया है. मामले की जानकारी लगते ही विभाग ने आनन-फानन में जांच शुरू कर दी है. जिला प्रशासन ने राज्य सरकार के भू-राजस्व अभिलेख शाखा के आयुक्त को भी मामले की जानकारी दी है. साथ ही इस बात का पता लगाने का अनुरोध किया है कि आखिर ऑनलाइन किसकी आईडी से गड़बड़ी हुई.


अकेले अछोटी गांव में 191 एकड़ का घपला
जमीन घोटाला मामले के इनपुट पर NDTV की टीम ने भी पड़ताल की तो कई हैरान करने वाले तथ्य सामने आए हैं. तहसील कार्यालय, पटवारी दफ्तर, राजस्व विभाग के अधिकारियों से मिले इनपुट से हमें पता चला कि सबसे बड़ी गड़बड़ी अछोटी गांव में हुई है. यहां बेशकीमती शासकीय जमीनों पर 52 बोगस खसरा नंबर जारी कर 191 एकड़ से ज्यादा जमीनों की हेराफेरी की गई है. इन जमीनों का बड़ा पैच मुख्य मार्गों से लगा है, जिसकी बाजार में वर्तमान कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक है. मामला सामने आने के बाद सभी बोगस खसरा को संदिग्ध मानकर तहसीलदार स्तर पर जांच की जा रही है. ऑनलाइन डिजिटल सिग्नेचर बी-1 की कॉपियों से हटा दिए गए हैं. फिलहाल इतने बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है.

जशपुर के स्कूल में घुसी हथिनी और बच्चा, मचाया आतंक; वन विभाग ने छात्रों को भिजवाया घर

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जशपुर जिले के पत्थलगांव वन परिक्षेत्र में हाथियों का आतंक जारी है. तड़के सुबह एक जंगली मादा हाथी और उसका बच्चा दल से बिछड़कर स्कूल परिसर में आ धमके. आक्रमक हाथी स्कूल परिसर में रखी बाइक को क्षतिग्रस्त कर दिया. इस दौरान स्कूल में अफरा-तफरी की वजह से स्थिति गंभीर हो गई. जब घटना की सूचना जिला शिक्षा अधिकारी को मिली तो उन्होंने स्कूल में छुट्टी करने का निर्देश दे दिया

हाथियों की आमद से गांव में दहशत का माहौल है और ग्रामीण काफी भयभीत हैं. स्कूल परिसर में हाथी के आमद से प्रबंधन ने बच्चों को सुरक्षित घर भेज दिया. दो जंगली हाथियों की आमद से गांव में दहशत का माहौल है. वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है.

वन विभाग ने ग्रामीणों से सतर्क रहने और जंगल की ओर न जाने की अपील की है. तेज बारिश में वन विभाग की टीम स्कूल की छतों पर चढ़कर लगातार निगरानी में जुटी हुई है, हाथियों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है. हथिनी को सुरक्षित जंगल की ओर लौटाने का प्रयास कर रहा है.

बिल्डर व फिल्म अभिनेता के खिलाफ FIR दर्ज, जानें – क्या है पूरा मामला

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छत्तीसगढ़ के दुर्ग (Durg) के चर्चित बिल्डर, जमीन व्यापारी व फिल्म अभिनेता मनोज राजपूत (Manoj Rajput) के खिलाफ सुपेला थाना में केस दर्ज किया गया है. FIR में उल्लेख है कि उसने अपने आपराधिक मामले छिपाते हुए गलत तरीके से शपथ पत्र बनाया और पासपोर्ट लिया. इतना ही नहीं, मनोज राजपूत के खिलाफ अलग-अलग थाना क्षेत्रों में 11 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिसमें रेप, धोखाधड़ी सहित मारपीट के मामले शामिल हैं. आपराधिक प्रवृत्ति की वजह से मनोज राजपूत को दुर्ग के मोहन नगर थाना क्षेत्र में गुंडा बदमाश सूची में भी शामिल किया गया है. नियमानुसार, पासपोर्ट जारी होने से पहले किसी व्यक्ति का क्रिमिनल रिकॉर्ड चेक किया जाया है और पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट के आधार पर ही पासपोर्ट जारी होता है. लेकिन, मनोज राजपूत के नाम पर कई मामले दर्ज होने के बाद भी पासपोर्ट जारी होना बड़ा सवाल है.

क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, मनोज राजपूत ने अपने आपराधिक इतिहास को छिपाने के लिए अपने मूल पते में हेरफेर किया. वह मूल रूप से दुर्ग के मोहन नगर थाना क्षेत्र का निवासी है, जहां उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. लेकिन, उसने अपना पता बदलकर सुपेला थाना क्षेत्र का दिखाया और सुपेला पुलिस थाना से पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट प्राप्त कर फर्जी तरीके से पासपोर्ट बनवाया. मामले में सबसे बड़ा सवाल है कि पासपोर्ट बनवाने से पहले व्यक्ति के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जाती है और केवल साफ रिकॉर्ड वाले व्यक्तियों को ही पासपोर्ट जारी किया जाता है. फिर भी, मनोज राजपूत जैसे अपराधी को सुपेला थाना से

कौन है मनोज राजपूत?
मनोज राजपूत न केवल एक जमीन व्यापारी है, बल्कि छत्तीसगढ़ी फिल्मों में अभिनेता और निर्माता के रूप में भी जाना जाता है. उनके खिलाफ पहले से ही दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज है. इसके अलावा, धोखाधड़ी और मारपीट जैसे कई अन्य आपराधिक मामले भी उनके नाम पर दर्ज हैं. उनकी कुख्यात गतिविधियों के कारण उन्हें गुंडा-बदमाश की सूची में शामिल किया गया है.

जल प्रलय से टूटा MP-CG का संपर्क, लगातार हो रही बारिश से पूरा जिला जलमग्न!

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छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में बीते 24 घंटे से लगातार हो रही झमाझम बारिश (Heavy Rains) ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है. जिले के चारों ओर सड़कों पर पानी का सैलाब नजर आ रहा है, वहीं निचले इलाकों में घरों में पानी घुसने लगा है. राष्ट्रीय राजमार्ग 45 पर पीपरखूंटी और केवची के बीच जैसे-तैसे बनाई गई डायवर्टेड पुलिया शुक्रवार दोपहर बाद फिर से भारी बारिश में बह गई, जिससे एक बार फिर से मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है. इस मार्ग से गौरेला-पेंड्रा से दर्जनों गांवों का संपर्क टूट गया है.

मेन संपर्क रोड टूटा
मरवाही-सिवनी से होकर मध्य प्रदेश के अनूपपुर वेंकटनगर को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग भी भेढ़वा नाला पर पानी का बहाव तेज होने के कारण बंद हो गया है. पुलिया पर बहते पानी के कारण वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो चुकी है. हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट रूप से ऐसे बहते नालों को पार करने से मना किया है, फिर भी कुछ लोग जोखिम लेकर पार करने की कोशिश कर रहे हैं, जो कभी भी गंभीर दुर्घटना को जन्म दे सकता है.

गांवों में भरा पानी
बारिश का कहर सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है. चंगेरी और परासी गांवों की सड़कों पर भी तेज बहाव से पानी बह रहा है, जिससे निचले इलाकों के घरों में पानी घुस गया है. लोग रातभर बाल्टियों और मगों से पानी निकालते दिखे, कई परिवारों ने घर खाली कर सुरक्षित जगहों का रुख किया है. लगातार बारिश से हालात बेकाबू होते जा रहे हैं. बचाव व राहत कार्यों में भी बाधा आ रही है. तेज बारिश और जलभराव से काम रुक-रुक कर हो रहा है.

आर्मी जवान से ठगी; एक महिला गिरफ्तार, जानिए कैसे जाल में फंसाया?

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बिलासपुर के सरकंडा थाना क्षेत्र में तैनात पुलिस टीम ने एक सैन्यकर्मी से ऑनलाइन ठगी के मामले में तल्काल कार्रवाई करते हुए एक महिला को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि एक पूर्व सैनिक द्वारा भारतीय सेना में कार्यरत जवान को मल्टी मिलियन डॉलर प्रोजेक्ट में नौकरी और माइक्रोसॉफ्ट कंपनी का फर्जी लाइसेंस दिलाने का झांसा देकर 3 लाख रुपए की धोखाधड़ी की गई. शिकायतकर्ता सोमेश सिंह वर्तमान में भारतीय सेना में कार्यरत है, उन्होंने बताया कि उसकी जान-पहचान राजू साहू नामक व्यक्ति से सेना में काम करते हुए हुई थी.

ऐसे फंसाया जाल में
पीड़ित ने बताया कि “कुछ समय पहले राजू साहू ने फोन पर संपर्क कर खुद को एक अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट में कार्यरत बताया और भरोसा दिलाया कि वह भी इससे जुड़ सकता है.” हालांकि, सरकारी सेवा में होने के कारण सोमेश ने इंकार किया, तो आरोपी ने उसे परामर्श दिया कि वह अपने किसी परिजन के नाम से इसमें काम करा सकता है.

झांसे में आकर सोमेश ने राजू साहू के कहने पर दो बार में कुल 3 लाख रुपये, आरोपी की मां ईश्वरी साहू के ICICI बैंक खाते में ट्रांसफर किए. आरोपी लगातार माइक्रोसॉफ्ट का लाइसेंस दिलाने का आश्वासन देता रहा, लेकिन जब कई दिनों बाद भी कोई दस्तावेज प्राप्त नहीं हुआ, तब सोमेश को ठगी का एहसास हुआ. इसके बाद रुपये मांगने पर आरोपी ने धमकी तक दे डाली और अंतरराष्ट्रीय खाते से पैसे भेजने की बात कहकर डराने लगा.

पुलिस का एक्शन
पुलिस के पास जब शिकायत पहुंची तो सरकंडा पुलिस ने मामले की जांच कर ईश्वरी साहू निवासी ईमलीभाठा को गिरफ्तार कर लिया है. पूछताछ में उसने खाते में पैसे आने की बात स्वीकार की है. फिलहाल आरोपी राजू साहू फरार है और उसकी तलाश जारी है. मामले में आईटी एक्ट सहित भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है.¥

100 रुपये की जगह आ रहा ₹5000 का बिल; बिजली उपभोक्ता परेशान, गहने गिरवी रखकर किया भुगतान

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बिजली विभाग द्वारा सागर शहर में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर अब उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बनते जा रहे हैं. शनिचरी वार्ड के रहवासियों ने बिजली बिलों को लेकर नाराजगी जताते हुए कहा कि पहले जहां हर महीने 100 से 200 रुपये तक का बिल आता था, अब वह बढ़कर 5000 से 6000 रुपये तक पहुंच गया है. स्थानीय निवासी आसिफ खान ने बताया कि इस महीने का बिल इतना अधिक आया कि उन्हें मजबूरी में घर के जेवर गिरवी रखकर भुगतान करना पड़ा. उनका कहना है कि न तो घर में कोई अतिरिक्त बिजली उपकरण लगे हैं और न ही खपत बढ़ी है, इसके बावजूद बिल में भारी बढ़ोतरी हो रही है.

अन्य लोगों ने भी लगाए हैं आरोप
इस वार्ड के अन्य लोगों ने भी बिजली विभाग पर मनमाने तरीके से बिल भेजने का आरोप लगाते हुए कहा कि स्मार्ट मीटर से बिलिंग पारदर्शी होने की बात कही गई थी, लेकिन हकीकत इसके उलट है. लोगों ने मांग की है कि विभाग इन बिलों की जांच करे और पुराने बिल के आधार पर खपत का सत्यापन कराए. लोगों की मांग है कि स्मार्ट मीटर की हो जांच, बिल की फिर से समीक्षा होनी चाहिए. उपभोक्ताओं ने चेतावनी दी है कि अगर विभाग ने शीघ्र ही इस समस्या का समाधान नहीं किया, तो वे विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे.

बिजली विभाग के अधिकारियों का क्या कहना है?
जब इस पूरे मामले पर बिजली विभाग के कार्यपालन अभियंता अजीत सिंह चौहान से बात की गई तो उन्होंने कहा कि “अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, यदि कोई उपभोक्ता शिकायत लेकर आता है तो उसकी जांच जरूर कराई जाएगी.”

“क्या आप नहीं चाहते बिलासपुर एयरपोर्ट का विस्तार हो?” HC की सरकार को फटकार

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बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट के विस्तार को लेकर दायर जनहित याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. यह सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस राजेन्द्र चंद्र सिंह सामंत की डिवीजन बेंच में हुई. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई और तल्ख टिप्पणियां कीं. बता दें कि बिलासपुर संभाग का यह एकमात्र एयरपोर्ट है, जिसकी सीमित सुविधाओं के कारण न केवल उड़ानें बाधित रहती हैं बल्कि नाइट लैंडिंग जैसी मूलभूत सुविधाएं भी अब तक शुरू नहीं हो सकी हैं. जनहित याचिका में यह मांग की गई है कि इस एयरपोर्ट को पूरी तरह विकसित कर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत किया जाए.

कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने राज्य सरकार से स्पष्ट रूप से पूछा, “क्या आप नहीं चाहते कि बिलासपुर में एयरपोर्ट का निर्माण और विस्तार हो? आपकी ओर से कोई ठोस प्रयास नजर नहीं आ रहा है.” कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद राज्य सरकार की ओर से मौजूद अधिकारियों को जवाब देने में असहजता का सामना करना पड़ा.

एयरपोर्ट विस्तार की राह में सबसे बड़ी बाधा रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाली लगभग 286 एकड़ भूमि है, जिसकी मुआवजा और हस्तांतरण प्रक्रिया अब तक अटकी हुई है.
इस संदर्भ में कोर्ट ने केंद्र सरकार के रक्षा मंत्रालय के सचिव को निर्देश दिया है कि वे व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत कर विस्तार से जवाब दें कि अब तक मुआवजा व भूमि हस्तांतरण को लेकर क्या प्रगति हुई है.

राज्य सरकार से मांगी गई रिपोर्ट
साथ ही, राज्य सरकार के मुख्य सचिव से भी एयरपोर्ट के नाइट लैंडिंग, रनवे विस्तार व अन्य आवश्यक अधोसंरचना के विकास कार्यों की अद्यतन स्थिति पर रिपोर्ट मांगी गई है. कोर्ट ने दोनों पक्षों को अगले 8 सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. अगली सुनवाई की तारीख 6 अक्टूबर 2025 निर्धारित की गई है.

हत्या करके भागे बदमाशों से पुलिस की मुठभेड़, एक को गोली लगी, दिल्ली से लेकर MP तक दर्ज हैं कई केस

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मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हत्या करके भागे एक आरोपी की पुलिस के साथ तड़के पांच बजे पुलिस के साथ मुठभेड़ हो गई. शंकरपुर क्रिकेट स्टेडियम के पास पुलिस मुठभेड़ मे गौरव तोमर नामक अपराधी को पुलिस की गोली लगी.

घायल होने के बाद पुलिस ने दबोचा लिया. इसके दो साथियों को भी पुलिस ने पकड़ लिया है. पुलिस हवलदार के भाई की देर रात हत्या करके अपने साथियों के साथ भागा था. एक फरार है.

एसपी धर्मवीर सिंह ने बताया कि बदमाशों ने देर रात लक्ष्मीपुरम इलाके के प्रॉपर्टी डीलर रामरूप तोमर की गोली मारकर हत्या कर दी थी. इसमें हिमेश शर्मा और गौरव तोमर सहित चार आरोपी थे. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने घेराबंदी की थी. सुबह पुलिस पार्टी से शंकरपुर स्टेडियम के पास सुबह 5:00 बजे मुठभेड़ हो गई. इसमें अपराधी गौरव तोमर पुत्र मोहन सिंह तोमर को पैर में गोली लगी है.

पुलिस ने उसे तत्काल दबोच लिया और सीधे लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंची, जहां उसका उपचार चल रहा. पुलिस ने उसकी निशानदेही पर हत्या मे नामजद उसके दो और साथी बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया है. जबकि हिमेश शर्मा मौके से भाग निकला. जिसका पीछा किया जा रहा है.

एसपी ने बताया कि मुठभेड़ में घायल व्यक्ति रिकवरी एजेंट का काम करता है और कुख्यात बदमाश है. इसके खिलाफ मुरैना और ग्वालियर जिले के अलग-अलग थानों में हत्या, हत्या के प्रयास, सहित अनेक संगीन धाराओं मे केस दर्ज है. दिल्ली में भी इसके खिलाफ आर्म्स एक्ट के एक आपराधिक केस दर्ज है.

बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल के लिए सरकार कर्मचारियों को देगी विशेष छुट्टी

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केंद्र सरकार के कर्मचारी 30 दिनों की छुट्टी का लाभ उठा सकेंगे, जिसमें 20 दिन की अर्धवेतन छुट्टी, 8 दिन की आकस्मिक छुट्टी और 2 दिन का प्रतिबंधित अवकाश शामिल है. यह जानकारी केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा सांसद सुमित्रा बाल्मीकि के सवाल के जवाब में दी.

दरअसल, केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों को बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल सहित निजी कारणों के लिए प्रति वर्ष 30 दिन की अर्जित छुट्टी (ईएल), 20 दिन की अर्धवेतन छुट्टी (हाफ पे लीव), 8 दिन की आकस्मिक छुट्टी (सीएल), और 2 दिन की प्रतिबंधित अवकाश (आरएच) लेने की अनुमति दी है.

मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि ‘केंद्रीय सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 1972′ के तहत कर्मचारी निजी कारणों (बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल) के लिए ये छुट्टियां ले सकते हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को प्रति वर्ष 30 दिन की अर्जित छुट्टी, 20 दिन की अर्धवेतन छुट्टी, 8 दिन की आकस्मिक छुट्टी और 2 दिन की प्रतिबंधित अवकाश के साथ-साथ अन्य पात्र छुट्टियां दी जाती हैं, जिनका उपयोग वे किसी भी निजी कारण के लिए कर सकते हैं.

‘केंद्रीय सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 1972’ (1 जून 1972 से लागू हैं) में कर्मचारियों के लिए कई प्रकार की छुट्टियों का प्रावधान है. इनमें अर्जित छुट्टी, अर्धवेतन छुट्टी, मातृत्व अवकाश, पितृत्व अवकाश, गोद लेने की छुट्टी, कार्य-संबंधी बीमारी और चोट, नाविकों की छुट्टी, विभागीय छुट्टी और अध्ययन अवकाश शामिल हैं.

बनता है लीव अकाउंट
कर्मचारियों का एक ‘लीव अकाउंट’ बनाया जाता है, जिसमें हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को छुट्टियों का ब्योरा होता है. छुट्टियां लेने पर इस खाते से कटौती होती है. हालांकि, मातृत्व, पितृत्व और बाल देखभाल जैसी विशेष छुट्टियां खाते से नहीं काटी जातीं और जरूरत पड़ने पर दी जाती हैं.

ये है नियम
नियमों के अनुसार, कुछ छुट्टियों को अन्य छुट्टियों या अवकाशों के साथ जोड़ा जा सकता है. प्रत्येक कर्मचारी को हर महीने की सेवा के लिए 2.5 दिन की अर्जित छुट्टी दी जाती है. इसके अलावा, दो से कम बच्चों वाली महिला कर्मचारी (प्रशिक्षु सहित) को 180 दिन तक का मातृत्व अवकाश और पुरुष कर्मचारी को 15 दिन तक का पितृत्व अवकाश मिल सकता है.