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“लोकसभा में गिरफ्तार मंत्रियों को हटाने के बिल का जोरदार विरोध, विपक्षी सांसदों ने कॉपी फाड़ी, अमित शाह की ओर फेंके कागज”

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“लोकसभा में गिरफ्तार मंत्रियों को हटाने के बिल का जोरदार विरोध, विपक्षी सांसदों ने कॉपी फाड़ी, अमित शाह की ओर फेंके कागज”

लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तीन अहम विधेयक पेश किए हैं, जिनके तहत गंभीर आपराधिक आरोपों में लगातार 30 दिन तक जेल में रहने पर प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री या राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के मंत्री को पद से हटाने का प्रावधान है.

इस बिल के पेश होने के दौरान सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला और विपक्षी सांसदों ने बिल के पेश होने का पुरजोर विरोध किया. अमित शाह की तरफ उछाले कागज विपक्ष के कुछ सांसद लोकसभा की वेल में आकर नारेबाजी करने लगे. इस दौरान कुछ विपक्षी सांसदों ने बिल की कॉपी भी फाड़ दी और कागज के टुकड़े अमित शाह की तरफ उछाले. हालांकि अमित शाह ने बिल पेश करने के दौरान कहा कि सरकार इस बिल को जेपीसी को भेजने का प्रस्ताव रखती है. बावजूद इसके बिल को विरोध का सामना करना पड़ा.

संविधान के 130वें संशोधन विधेयक पेश होने के दौरान सदन में लगातार नारेबाजी होती रही. विपक्षी सांसदों ने सत्ता पक्ष को घेर लिया और गृह मंत्री का माइक मोड़ने की कोशिश की. इस पर काफी हंगामा हुआ और सदन के अंदर स्थिति तनावपूर्ण हो गई. इस दौरान सत्ता पक्ष के कई सांसद, गृह मंत्री का बचाव करने के लिए आगे आकर विपक्षी सांसदों को रोकने की कोशिश करने लगे.

बिल पेश करने के दौरान अमित शाह पर फेंके गए कागज वेल में आकर विपक्ष की नारेबाजी सत्ता पक्ष की ओर से रवनीत बिट्टू, कमलेश पासवान, किरेन रिजिजू, सतीश गौतम ने गृह मंत्री के पास नारेबाजी कर रहे आक्रामक सांसदों को रोकने की कोशिश की. लोकसभा की वेल में नारेबाजी की शुरुआत टीएमसी सांसदों ने की और कल्याण बनर्जी ने विधेयक पेश होते ही नारेबाजी शुरू कर दी. बाद में, कांग्रेस सांसद और महासचिव केसी वेणुगोपाल ने अपनी सीट से बिल की कॉपी फाड़कर फेंक दी. इसके बाद सभी कांग्रेस सांसद वेल में आ गए.

केसी वेणुगोपाल के बाद सपा के धर्मेंद्र यादव ने भी अपनी सीट से बिल की कॉपी फाड़कर फेंक दी और समाजवादी पार्टी के सभी सदस्य संसद वेल में आ गए. इसके बाद जब गृह मंत्री अमित शाह विधेयक पेश कर रहे थे, तो सभी विपक्षी दल के सदस्य लोकसभा की वेल में आ गए और हंगामा करने लगे. स्थिति बिगड़ती देख लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी.

‘जेल जाने पर मैंने दिया था इस्तीफा’ अमित शाह बिल पेश करते हुए कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल की आलोचना की और कहा कि मैं जब झूठे मामले में जेल गया था, तब नैतिकता के आधार पर पद से इस्तीफा देकर गया था. उन्होंने कहा कि जब तक अदालत ने मुझे निर्दोष साबित नहीं किया, तब तक किसी भी संवैधानिक पद को ग्रहण नहीं किया. हम इतने बेशर्म नहीं हैं, कि हम पर आरोप लगें और पद पर बने रहें. उन्होंने कहा कि विपक्षी नेता हमें नैतिकता का पाठ नहीं पढ़ा सकते. अमित शाह ने कहा कि मैं चाहता हूं कि ये नैतिकता के मूल्य बढ़ें.

अमित शाह ने बिल पेश करते हुए इसे 21 सदस्यों वाली जेपीसी के पास भेजने का प्रस्ताव पेश किया. इस पर ध्वनिमत से मतदान के दौरान विपक्ष ने वेल से ही विरोध दर्ज किया. लेकिन प्रस्ताव के ध्वनिमत से पारित होने के बाद स्पीकर ओम बिड़ला ने कहा कि कुछ विधेयक राजनीति में शुचिता और नैतिकता के लिए आते हैं, क्योंकि राजनीति में शुचिता और नैतिकता जरूरी है. अब ये बिल जेपीसी के पास चर्चा के लिए भेजे गए हैं.

मार्शलों को आदेश दो कि उद्दंडता करने वाले सांसदों को सदन से निकालकर बाहर सड़क पर कूड़े की तरह फेंक दें । जिन सांसदों ने बतमीजी की है उनको पूरे सत्र के लिए निलम्बित कर देना चाहिए।

यह बिल पास होना चाहिए ताकि संसद में अपराधियों के सम्मिलित होने पर प्रतिबंध लग सके। निसन्देह यह बिल पास होने के बाद संसद के बाहर घटित अपराधों में भी कमी आयेगी।

“बुल्स की वापसी! सेंसेक्स 213 अंक मजबूत होकर बंद, निफ्टी फिर 25000 के पार, ये प्रमुख स्टॉक्स चढ़े”

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“बुल्स की वापसी! सेंसेक्स 213 अंक मजबूत होकर बंद, निफ्टी फिर 25000 के पार, ये प्रमुख स्टॉक्स चढ़े”

ग्लोबल संकेतों के बीच बुधवार को भी घरेलू शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स कारोबार के आखिर में 213.45 अंक की तेजी के साथ 81,857.84 अंक के लेवल पर बंद हुआ। इसी तरह, एनएसई का निफ्टी भी 69.9 अंक की तेजी के साथ 25,050.55 के लेवल पर टिका। निफ्टी पर इंफोसिस, एचयूएल, टीसीएस, नेस्ले इंडिया और एनटीपीसी प्रमुख रूप से बढ़त वाले स्टॉक्स रहे, जबकि श्रीराम फाइनेंस, बजाज फाइनेंस, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, टाटा मोटर्स और इंडसइंड बैंक में गिरावट दर्ज की गई।

“US डॉलर पर बड़ा प्रहार, ब्रिक्स देशों के बीच रुपये में ट्रेड की अनुमति; टैरिफ के खिलाफ भारत का जवाब”

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“US डॉलर पर बड़ा प्रहार, ब्रिक्स देशों के बीच रुपये में ट्रेड की अनुमति; टैरिफ के खिलाफ भारत का जवाब”

इंडियन इकोनॉमी ने वर्ल्ड करेंसी सिस्टम में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। ब्रिक्स देशों के साथ सभी लेन-देन सीधे रुपये में करने की अनुमति देकर, भारत ने अमेरिकी डॉलर के दशकों से चले आ रहे वर्चस्व को एक बड़ी चुनौती दी है।

इस फैसले से भारत की आर्थिक मजबूती बढ़ने और डॉलर पर उसकी निर्भरता कम होने की उम्मीद है। वर्तमान में वैश्विक मुद्रा लेनदेन का 90 प्रतिशत डॉलर में होता है। पेट्रोलियम व्यापार लगभग 100 प्रतिशत डॉलर में होता था।

हालांकि, साल 2023 से यह तस्वीर बदलने लगी है। आज, दुनिया के 20 प्रतिशत तेल लेनदेन गैर-अमेरिकी मुद्राओं में होते हैं। अगर यह आंकड़ा बढ़ता है, तो डॉलर का प्रभुत्व खत्म होते देर नहीं लगेगी। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा हाल ही में जारी एक परिपत्र के अनुसार, बैंकों को अब वोस्ट्रो खाते खोलने के लिए पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। इस निर्णय से विदेशी बैंक सीधे रुपये में लेनदेन कर सकेंगे, जिससे डॉलर की बजाय रुपये का उपयोग करना आसान हो जाएगा।

वोस्ट्रो अकाउंट क्या है? वोस्ट्रो अकाउंट मूलतः किसी विदेशी बैंक द्वारा किसी देश के किसी भी बैंक में खोला गया एक अकाउंट होता है। इस अकाउंट का इस्तेमाल स्थानीय करेंसी के लेनदेन के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी अमेरिकी बैंक का भारत के किसी बैंक में वोस्ट्रो अकाउंट है, तो वह अमेरिकी बैंक उस अकाउंट से रुपये में लेनदेन कर सकता है। इससे इंपोर्ट और एक्सपोर्ट लेनदेन आसान हो जाता है।

टैरिफ के खिलाफ ट्रंप को जवाब ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) देशों की संयुक्त जनसंख्या लगभग 3 अरब है। उनका संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद लगभग 24 ट्रिलियन डॉलर है। इस महासंघ में रुपये को मान्यता मिलने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी स्थिति काफी मजबूत होगी।

दिलचस्प बात यह है कि यह सर्कुलर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद ही जारी किया गया था। इसलिए, इस फैसले को अमेरिकी नीतियों के खिलाफ एक जवाबी कदम के रूप में भी देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि भारत का यह कदम न केवल आर्थिक, बल्कि रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। इस फैसले का क्या होगा असर? इस फैसले से भारतीय रुपये का प्रभुत्व बढ़ेगा, डॉलर का प्रभुत्व कम होगा और वैश्विक बाजार में एक नया शक्ति संतुलन बनेगा। इससे भारत को अपना विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही, रुपये में लेनदेन बढ़ने से एक्सचेंज रेट स्थिर रहेगी और स्थानीय मुद्रा मजबूत होगी।

“पीएम मोदी 22 अगस्त को करेंगे बिहार और बंगाल का दौरा, 18200 करोड़ की योजनाओं की देंगे सौगात”

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“पीएम मोदी 22 अगस्त को करेंगे बिहार और बंगाल का दौरा, 18200 करोड़ की योजनाओं की देंगे सौगात”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 अगस्त को बिहार और पश्चिम बंगाल के दौरे पर जाएंगे. इस दौरान वे करीब 18200 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे. बिहार के गया में प्रधानमंत्री मोदी करीब 13,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और उनका उद्घाटन करेंगे.

“सीमा विवाद से व्यापार तक.SCO समिट बनेगा भारत-चीन रिश्तों का टर्निंग प्वाइंट? मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर टिकी निगाहें”

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“सीमा विवाद से व्यापार तक.SCO समिट बनेगा भारत-चीन रिश्तों का टर्निंग प्वाइंट? मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर टिकी निगाहें”

भारत और चीन के रिश्तों में जमी बर्फ पिघलने लगी है. बीजिंग से दिल्ली तक बातचीत का नया दौर शुरू हुआ है और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात पर सबकी नजर है.

दिल्ली में हुई बातचीत के बाद अब अगला पड़ाव तियानजिन है. सितंबर में SCO समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग आमने-सामने होंगे. इस मीटिंग के एजेंडे में सीमा पर तनाव, व्यापार, वीजा और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाना शामिल है.

दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करते हुए चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने पिछले साल कजान में हुई मोदी-जिनपिंग बैठक को याद किया. उन्होंने कहा कि उस मुलाकात ने रिश्तों को नई दिशा दी और सीमा मसले के समाधान की राह खोली.

मोदी औ जिनपिंग मीटिंग एजेंडा पीएम मोदी और जिनपिंग इस बैठक के दौरान कई एजेंडे तय हुए है. जिसमें LAC पर शांति और स्थिरता, कैलाश मानसरोवर यात्रा का विस्तार, बॉर्डर ट्रेड : Lipulekh, Shipki La, Nathu La से दोबारा शुरुआत, सीधी फ्लाइट्स बहाल, वीजा आसान, SCO और BRICS में सपोर्ट और नदियों के जल-साझाकरण पर समझौते आदि मुद्दे शामिल हैं. लेकिन इस मुलाकात से पहले ही चीन ने बड़ा संकेत दिया है. चीन ने फर्टिलाइज़र, रेयर अर्थ मटेरियल और टनल बोरिंग मशीनों पर लगी पाबंदियां हटाने का ऐलान किया गया है.

चीन से मिली ढील का असर फर्टिलाइज़र → किसानों को सस्ता और समय पर खाद रेयर अर्थ मटेरियल → मोबाइल, EV और रक्षा उद्योग को बढ़ावा टनल बोरिंग मशीनें  → मेट्रो, हाइवे, डिफेंस प्रोजेक्ट्स में तेजी फर्टिलाइजर-  भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद आयातक है.

यूरिया और पोटाश का बड़ा हिस्सा चीन से आता है. पाबंदी हटने का मतलब है किसानों को सस्ता और समय पर खाद मिलना. रेयर अर्थ मटेरियल- मोबाइल, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक कार और डिफेंस टेक्नॉलजी, सबमें रेयर अर्थ मेटल जरूरी हैं. चीन पर दुनिया की 90% सप्लाई निर्भर है. भारत के लिए इन पर ढील मिलना यानी टेक्नॉलजी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को बूस्ट.

टनल बोरिंग मशीनें- ये मशीनें मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की रीढ़ हैं, जैसे हाइवे, मेट्रो और डिफेंस बंकर. चीन पर रोक हटना मतलब भारत के लिए निर्माण कार्य तेजी से और कम लागत पर पूरा होना.

यानी इन तीन क्षेत्रों में चीन की रियायत का सीधा असर किसान, इंडस्ट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ेगा और यही कारण है कि मोदी-जिनपिंग मीटिंग का यह सबसे बड़ा पॉजिटिव सिग्नल माना जा रहा है. फर्टिलाइज़र से लेकर टेक्नॉलजी और इंफ्रास्ट्रक्चर तक चीन की यह रियायत भारत के तीन बड़े सेक्टरों को सीधा फायदा पहुंचाएगी. ये तीनों सेक्टर भारत की रीढ़ हैं. खेती से लेकर टेक्नॉलजी और इंफ्रास्ट्रक्चर तक भारत को सीधा फायदा मिलेगा. मोदी-जिनपिंग मीटिंग में इसका रोडमैप तय हो सकता है. यही वजह है कि मोदी-जिनपिंग मुलाकात से रिश्तों में नया अध्याय शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है.

भारत और चीन के बीच तनाव भले ही खत्म न हुआ हो, लेकिन सहयोग के नए रास्ते खुल रहे हैं. अब निगाहें इस बात पर हैं कि तियानजिन में मोदी-जिनपिंग की मुलाकात से रिश्तों की नई इबारत लिखी जा सकेगी या नहीं ? इससे पहले दिल्ली में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को भरोसा दिलाया कि चीन, भारत के लिए कई अहम पाबंदियां हटा देगा.

डोकलाम और गलवान ने डाली थी गहरी दरार असल में डोकलाम और गलवान ने रिश्तों में गहरी दरार डाल दी थी. कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत के बाद आज हालात कुछ बेहतर हैं, लेकिन अविश्वास अब भी बाकी है. यही वजह है कि मोदी-जिनपिंग मुलाकात को टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है. मोदी और जिनपिंग की यह मुलाकात सिर्फ फोटो-ऑप नहीं होगी, बल्कि दोनों देशों के भविष्य के रिश्तों का टेस्ट केस होगी. क्या सीमा पर शांति और व्यापार में भरोसा लौटेगा, इस पर सबकी नजर है.

भारत और चीन दोनों एशियाई ताकतें हैं, लेकिन आपसी अविश्वास ने रिश्तों को रोके रखा है. अब अगर बीजिंग में मोदी-जिनपिंग नई इबारत लिखते हैं, तो इसका असर सीधे भारत के किसानों से लेकर इंडस्ट्री और आम लोगों तक महसूस किया जाएगा.

वांग यी का यह दौरा ऐसे वक्त में हुआ जब भारत और अमेरिका के रिश्तों में ट्रेड से जुड़े अनिश्चितता के बादल छाए हुए हैं. वहीं, रूसभारतचीन के बीच लगातार बढ़ती बातचीत इस संतुलन को साधती नजर आ रही है. यही RIC एंगल मॉस्को में भी दिख सकता है, जहाँ विदेश मंत्री एस. जयशंकर पहुंचे हैं.

“5 साल में दोगुना होगा मुकेश अंबानी का एम्पायर, बनाया ये सुपर डुपर प्लान!”

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“5 साल में दोगुना होगा मुकेश अंबानी का एम्पायर, बनाया ये सुपर डुपर प्लान!”

देश के सबसे बड़े बिजनेसमैन मुकेश अंबानी ने एक बड़ा एलान किया है. उन्होंने कहा है कि वे अपनी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) को अगले पांच सालों में यानी 2030 तक दोगुना बड़ा बनाएंगे.

अब आप सोच रहे होंगे, इससे आम लोगों को क्या फायदा होगा? तो जान लीजिए, रिलायंस के 44 लाख से ज्यादा शेयरधारक हैं, यानी वे लोग जिनके पास कंपनी के शेयर हैं. जब कंपनी बड़ी होगी, तो इन शेयरधारकों को उनके निवेश पर सीधे लाभ मिल सकता है.

हालांकि 2024 में रिलायंस के शेयर ज्यादा दमदार प्रदर्शन नहीं कर पाए थे, लेकिन इस साल अब तक इसमें करीब 16% की बढ़त दर्ज की गई है. 29 अगस्त को होने वाली सालाना आम बैठक (AGM) में मुकेश अंबानी और भी बड़े ऐलान कर सकते हैं, जो निवेशकों के लिए और भी फायदेमंद साबित हो सकते हैं.

जियो और रिटेल से होगा बड़ा मुनाफा रिलायंस इंडस्ट्रीज का प्लान है कि कंपनी का मुनाफा (EBITDA) 2029-30 तक दोगुना कर दिया जाए. इसके पीछे सबसे बड़ा योगदान जियो (टेलीकॉम सेक्टर) और रिलायंस रिटेल (दुकानों और ब्रांड्स) का होगा. इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जियो ने हाल ही में अपने रिचार्ज के दाम बढ़ाए हैं, जिससे उसकी कमाई में बढ़ोतरी होगी.

वहीं, रिटेल बिजनेस में भी अब तेजी आने के साफ संकेत मिल रहे हैं. वहीं विदेशी निवेश फर्म CLSA ने कहा है कि रिलायंस का शेयर अभी के दामों पर काफी सस्ता है. अगर कंपनी की कमाई में बढ़ोतरी होती है, तो शेयर में जबरदस्त उछाल आ सकता है. CLSA ने तो अगले कुछ महीनों में ही रिलायंस के शेयर का भाव 1,650 रुपये तक पहुंचने का अनुमान जताया है.

नई ऊर्जा से बदलेगा खेल रिलायंस अब सिर्फ तेल और मोबाइल तक सीमित नहीं रह गई है. कंपनी अब ग्रीन एनर्जी यानी सौर ऊर्जा और बैटरी के क्षेत्र में भी तेजी से कदम बढ़ा रही है. रिलायंस का लक्ष्य है कि वह 2026 तक 10 गीगावाट (GW) सौर ऊर्जा उत्पादन की क्षमता हासिल कर ले. इससे कंपनी की फैक्ट्रियों और डेटा सेंटर्स की बिजली की लागत में करीब 25% तक की बचत होगी.

विदेशी निवेश फर्म नॉमुरा (Nomura) और गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) जैसे बड़े संस्थान मानते हैं कि ये नया बिजनेस रिलायंस के लिए मुनाफे का बड़ा स्रोत साबित होगा.

आने वाले महीनों में हो सकते हैं बड़े ऐलान आगामी एक साल में रिलायंस कई महत्वपूर्ण कदम उठाने वाली है, जो शेयर बाजार में हलचल मचा सकते हैं. इनमें जियो का आईपीओ (IPO) आना, नई फैक्ट्रियों का शुभारंभ और 29 अगस्त को होने वाली AGM में मुकेश अंबानी के बड़े ऐलान शामिल हैं. बड़ी फाइनेंशियल फर्म HSBC ने भी रिलायंस को चार साल बाद खरीदने की सलाह दी है और अगले कुछ महीनों के लिए इसके शेयर का टारगेट प्राइस 1,630 रुपये बताया है.

निवेशकों के लिए सुनहरा मौका? अगर रिलायंस अपने प्लान पर मजबूती से काम करती है तो कंपनी का मुनाफा और शेयर कीमत दोनों में तेज़ी देखने को मिल सकती है. इसका सीधा मतलब है कि जो लोग पहले से रिलायंस में निवेश कर चुके हैं या निवेश करने की सोच रहे हैं, उनके लिए आने वाला वक्त खासा फायदेमंद साबित हो सकता है.

ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.

“अमेरिकी टैरिफ से भारत के निर्यात क्षेत्र में हलचल”

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“अमेरिकी टैरिफ से भारत के निर्यात क्षेत्र में हलचल”

अमेरिका द्वारा भारत से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ाने की संभावना ने भारतीय निर्यातकों के बीच गंभीर चिंता उत्पन्न कर दी है। इसका सबसे तीव्र प्रभाव तमिलनाडु जैसे राज्य पर पड़ रहा है, जो अपने मजबूत विनिर्माण और निर्यात ढांचे के लिए जाना जाता है और जिसकी अर्थव्यवस्था बड़ी हद तक अमेरिकी बाजार पर निर्भर है।

अमेरिका की नई टैरिफ नीति और उसका असर हालिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर टैरिफ को मौजूदा 25% से बढ़ाकर 50% तक ले जाने की योजना बना रहा है। इसका दुष्परिणाम भारत जैसे साझेदार देशों पर पड़ रहे हैं। भारत के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 20% है, जबकि तमिलनाडु के मामले में यह आंकड़ा 31% तक पहुंच जाता है। इस आधार पर साफ है कि टैरिफ में कोई भी बढ़ोतरी तमिलनाडु के निर्यातकों को सीधे तौर पर प्रभावित करेगी।

किन क्षेत्रों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर? तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए पत्र में चिंता जताई है कि यह टैरिफ वृद्धि तमिलनाडु के श्रम-प्रधान उद्योगों को गहरा झटका दे सकती है। राज्य का वस्त्र उद्योग, जो भारत के कुल वस्त्र निर्यात का 28% हिस्सा बनाता है, विशेष रूप से संकट में है। इस क्षेत्र में लगभग 75 लाख लोग कार्यरत हैं, और अनुमान है कि टैरिफ वृद्धि के चलते करीब 30 लाख नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।

आर्थिक और सामाजिक असर निर्यात पर बढ़ता बोझ राज्य की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ लाखों परिवारों की आजीविका पर असर डालेगा। विदेशी बाजारों में तमिलनाडु के उत्पाद कम प्रतिस्पर्धी बनेंगे, जिससे खरीददार अन्य विकल्पों की तलाश कर सकते हैं। इससे उत्पादन घटेगा, ऑर्डर रद्द होंगे और नौकरियों में कटौती की स्थिति बन सकती है।

राज्य की चिंता, राष्ट्रहित में समर्थन मुख्यमंत्री स्टालिन ने यह भी स्पष्ट किया कि वे अमेरिका के साथ संतुलित व्यापार संबंधों के समर्थन में हैं और केंद्र सरकार की कूटनीतिक पहल का सम्मान करते हैं। लेकिन उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि तमिलनाडु की आर्थिक संरचना अमेरिका पर अत्यधिक निर्भर है, और इसीलिए केंद्र को राज्य की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कदम उठाने होंगे

स्टालिन की केंद्र से प्रमुख मांगें विशेष वित्तीय राहत पैकेज: कोविड काल की तर्ज पर, कर्ज की मूलधन अदायगी पर रोक दी जाए ताकि उद्योगों को कुछ राहत मिल सके।

GST ढांचे में सुधार: खासकर मानव-निर्मित फाइबर उद्योग के लिए इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को खत्म करके समान दर (5%) लागू की जाए।

कपास पर आयात शुल्क हटाना: जिससे वस्त्र उद्योग को सस्ता कच्चा माल मिल सके और वह वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना रहे।

ब्याज अनुदान योजना: प्रभावित निर्यातकों को राहत देने के लिए विशेष ब्याज सब्सिडी दी जाए।

एफटीए और द्विपक्षीय समझौते: अमेरिकी बाजार जैसे उच्च शुल्क वाले बाजारों में जोखिम को कम करने के लिए वैकल्पिक व्यापार समझौतों पर तेजी से काम हो।

“8वें वेतन आयोग: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ा अपडेट”

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“8वें वेतन आयोग: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ा अपडेट”

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वां वेतन आयोग एक बार फिर उम्मीदों का केंद्र बनता जा रहा है। खासतौर पर एक मुद्दा जो लंबे समय से चर्चा में है। वह है पेंशन कम्युटेशन की अवधि को मौजूदा 15 साल से घटाकर 12 साल करने की मांग। यह मुद्दा न केवल कर्मचारियों के लिए आर्थिक दृष्टि से अहम है, बल्कि यह सरकार की पेंशन नीतियों की पारदर्शिता और न्यायसंगतता पर भी प्रश्न उठाता है।

क्या होता है पेंशन कम्युटेशन? जब कोई केंद्रीय कर्मचारी सेवानिवृत्त होता है, तो उसे यह विकल्प दिया जाता है कि वह अपनी मासिक पेंशन का एक हिस्सा अधिकतम 40% एकमुश्त राशि के रूप में ले सकता है। इसे पेंशन कम्युटेशन कहा जाता है। इसके बदले उसकी मासिक पेंशन में तय अनुपात में कटौती कर दी जाती है। मौजूदा नियमों के अनुसार, यह कटौती 15 साल तक लागू रहती है। उसके बाद, पूरी पेंशन बिना कटौती के बहाल कर दी जाती है।

कर्मचारियों की मुख्य आपत्तियाँ कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार इस एकमुश्त दी गई राशि को ब्याज सहित लगभग 11 साल में ही वसूल कर लेती है। फिर भी पेंशन कटौती की अवधि 15 साल क्यों रखी गई है? कर्मचारियों का तर्क है कि यह न केवल आर्थिक रूप से अनुचित है, बल्कि यह सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर एक प्रकार का अनावश्यक बोझ भी है।

8वें वेतन आयोग में दोबारा उठी मांग अब जब 8वें वेतन आयोग की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होने की कगार पर है और इसकी संदर्भ शर्तें (ToR – Terms of Reference) तय की जानी हैं, कर्मचारी संगठनों ने इस मुद्दे को फिर से प्रमुखता से उठाया है। यदि यह मांग स्वीकार कर ली जाती है, तो सेवानिवृत्त कर्मचारियों को तीन साल पहले ही उनकी पूरी पेंशन मिलना शुरू हो जाएगी, जिससे उन्हें वित्तीय राहत मिल सकती है।

इस सन्दर्भ में आगे क्या होगा? अब सभी की निगाहें 8वें वेतन आयोग और सरकार के रुख पर टिकी हैं। यदि यह मांग मानी जाती है, तो यह न केवल कर्मचारियों के लिए एक बड़ा राहत कदम होगा, बल्कि यह सरकार की एक सकारात्मक छवि भी बनाएगा जो अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियों की आर्थिक भलाई को महत्व देती है।

“Ration Card: 1.17 करोड़ लोगों का कटगा राशन कार्ड, सरकार ने शुरू की बड़ी कार्रवाई”

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“Ration Card: 1.17 करोड़ लोगों का कटगा राशन कार्ड, सरकार ने शुरू की बड़ी कार्रवाई”

देशभर में मुफ्त राशन योजना का लाभ उठाने वालों के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है। केंद्र सरकार ने अपात्र लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें राशन कार्ड सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने पहली बार विभिन्न सरकारी डेटाबेस को मिलाकर एक ऐसी सूची तैयार की है, जिसमें उन लोगों को शामिल किया गया है जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के अंतर्गत मिलने वाले मुफ्त अनाज के हकदार नहीं हैं।

कौन हैं अपात्र? सरकार द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, करीब 1.17 करोड़ राशन कार्ड धारकों को अपात्र माना गया है। इनमें से: 94.71 लाख लोग आयकर दाता हैं, 17.51 लाख के पास चार पहिया वाहन है, और 5.31 लाख कंपनियों में निदेशक के रूप में सूचीबद्ध हैं। इन आंकड़ों को आयकर विभाग, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के डेटा से मिलाकर तैयार किया गया है।

क्यों हटाए जा रहे हैं कार्ड? NFSA के नियमों के अनुसार, जिन परिवारों की वार्षिक आय ₹1 लाख से अधिक है, जिनके पास कार या अन्य चार पहिया वाहन हैं, या जो आयकर देते हैं, वे इस योजना के अंतर्गत मुफ्त राशन के पात्र नहीं माने जाते। इसके बावजूद, बड़ी संख्या में ऐसे लोग अब तक इस लाभ का फायदा उठाते रहे हैं।

राज्यों को 30 सितंबर तक की डेडलाइन केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि वे 30 सितंबर 2025 तक इन अपात्र लाभार्थियों का सत्यापन कर राशन कार्ड को रद्द करें। ‘राइटफुल टारगेटिंग डैशबोर्ड’ नामक पोर्टल पर यह पूरी जानकारी API आधारित प्रणाली के जरिए राज्यों को उपलब्ध कराई जा रही है।

डेटा की सफाई और जरूरतमंदों को मौका खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने इस पहल को “लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (TPDS) की पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम” बताया है। उनका कहना है कि इससे उन लोगों को योजना में शामिल होने का अवसर मिलेगा, जो वास्तव में इसके हकदार हैं लेकिन अब तक सूची से बाहर थे।

अब तक कितने लाभार्थी? NFSA के तहत वर्तमान में देशभर में 19.17 करोड़ राशन कार्ड सक्रिय हैं, जिनसे करीब 76.10 करोड़ लोग लाभान्वित हो रहे हैं। हालांकि, योजना की अधिकतम सीमा 81.35 करोड़ लोगों के लिए निर्धारित है। यानी अब भी लाखों जरूरतमंद लोगों को जोड़े जाने की संभावना है, जो इस डेटा सफाई के बाद साकार हो सकती है।

पहले भी हो चुकी है छंटनी यह पहला मौका नहीं है जब फर्जी या अपात्र कार्डों पर कार्रवाई की गई हो। 2021 से 2023 के बीच भी सरकार ने 1.34 करोड़ फर्जी राशन कार्ड रद्द किए थे।

मुंबई में भारी बारिश से हाहाकार: मोनोरेल ट्रैक पर फंसी दो ट्रेनें, 780 से ज्यादा यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया”

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मुंबई में भारी बारिश से हाहाकार: मोनोरेल ट्रैक पर फंसी दो ट्रेनें, 780 से ज्यादा यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया”

मुंबई में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण मंगलवार शाम शहर की मोनोरेल सेवा बुरी तरह प्रभावित हुई। भीड़ से भरी दो मोनोरेल ट्रेनें एलिवेटेड ट्रैक पर फंस गईं जिससे उनमें सवार 780 से अधिक यात्रियों की जान खतरे में पड़ गई।

हालांकि अग्निशमन विभाग और बचाव टीमों की त्वरित कार्रवाई से सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बीच ट्रैक पर अटकी मोनोरेल, यात्रियों में दहशत यह घटना मैसूर कॉलोनी और भक्ति पार्क के बीच हुई। भारी बारिश की वजह से बिजली सप्लाई बाधित हो गई जिससे दो मोनोरेल ट्रेनें रुक गईं। ट्रेनों में सवार यात्री घबराहट में नीचे कूदने लगे थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दमकल विभाग ने तुरंत ट्रैक के नीचे जंपिंग शीट बिछा दीं ताकि अगर कोई यात्री कूदे तो उसे चोट न लगे।

मोनोरेल के अंदर एसी बंद होने से कई यात्रियों को सांस लेने में दिक्कत हुई और कुछ बेहोश भी हो गए। हालांकि सिर्फ एक यात्री को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा जिसकी हालत अब स्थिर है।

खिड़कियां तोड़कर चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन मुंबई अग्निशमन विभाग के प्रमुख रवींद्र अंबुलगेकर ने बताया कि मैसूर कॉलोनी के पास फंसी एक मोनोरेल से 582 यात्रियों को सीढ़ी लगाकर बचाया गया जबकि 200 अन्य यात्रियों को दूसरी मोनोरेल से निकाला गया जिसे खींचकर पास के वडाला स्टेशन तक लाया गया।

बचाव दल ने मोनोरेल की खिड़कियां तोड़कर और दरवाजे खोलकर सबसे पहले महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को बाहर निकाला। बाद में युवाओं को बचाया गया। बचाए गए 23 यात्रियों में दम घुटने के लक्षण थे जिनका मौके पर ही इलाज किया गया और उन्हें बाद में घर जाने दिया गया।