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“‘ये 500 वाला रावण कितने का है जी…’, दिल्ली की ‘लंकेश मंडी’ में क्या चल रहा”

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भइया, 300 में दे दो ना… ‘ना-ना! 500 का है, 350 से नीचे एकदम घाटा!’

दिल्ली की रावण मंडी में इस वक्त यही महाभारत चल रही है. सौदेबाजी इतनी तगड़ी कि खुद रावण भी अगर यहां आ खड़ा हो जाए तो माथा पकड़कर सोचने लगे, ‘ भइया, जलना तो मुझे था, जल तो तुम्हारी जेब रही है .’

ये मंडी है वेस्ट दिल्ली के तितारपुर की, जिसे ‘एशिया की सबसे बड़ा पुतला मार्केट’ कहा जाता है. यहां पुतलों के कद देखकर खरीदारों का अहंकार अक्सर छोटा पड़ जाता है. बताते हैं करीब 50 साल पहले यहां कोई ‘रावण वाले बाबा’ ने पुतले बनाना शुरू किया था, तब से ये वहां की परंपरा सी बन गई.

तितारपुर वैसे तो शादी-ब्याह का बैंड मार्केट भी है, लेकिन इन दिनों यहां सिर्फ ‘रावण राज’ चलता है. दशहरा से कुछ दिन पहले अगर आप तितारपुर जाएं, तो लगेगा कि रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद ने पूरा इलाका कब्जा लिया है.

टेगौर गार्डन मेट्रो से लेकर राजौरी गार्डन तक- एक किलोमीटर के एरिया में बस पुतले ही पुतले! सड़क किनारे, पार्कों में, यहां तक कि लगता है कि खंभों को भी रावण की कंपनी ने स्पॉन्सर कर रखा हो.

हर गली-मोहल्ले का सीन ऐसा कि दोनों तरफ से रावण झांक रहा है. अगर अचानक असली रावण प्रकट हो जाए, तो खुद बोले-‘भाई, मेरे तो बस 10 सिर थे, यहां हजारों में कहां से आ गए?’

जैकेट फैक्ट्री से रावण-निर्माण तक रावण मंडी में हमारी पहली मुलाकात 63 साल के लेखराज से हुई. चेहरे पर झुर्रियां, हाथों में अब भी हुनर, और आंखों में ऐसा सुकून मानो वो रावण नहीं, पूरा जीवन गढ़ रहे हों. जैसलमेर के रहने वाले लेखराज बीते 40 साल से दिल्ली में जमे हुए हैं. कभी लेदर जैकेट फैक्ट्री में काम करते थे, बढ़िया भी चलता था, पर उम्र ने धीरे-धीरे वह हुनर छीन लिया. आठ साल पहले जब काम छूटा, तो एक दिन इधर-उधर भटकते हुए तितारपुर पहुंचे. देखा, लोग रावण बना रहे हैं. बस, वही दिन था और नया धर्म मिल गया- ‘रावण-निर्माण!’

लेखराज बताते हैं, ‘जुलाई से ही काम चालू हो जाता है. कोई ढांचा बनाता है, कोई रंग-रोगन करता है, कोई डिजाइन देता है. मानो IPL की फ्रेंचाइज़ी हो-हर कोई अपनी पोजिशन पर फिट.’

अब रावण कैसे जन्म लेता है, ये सुनिए. सबसे पहले UP और MP से बांस आता है. लेकिन कोई भी बांस नहीं- ऐसा चाहिए जिसमें लचक ज्यादा हो, ताकि आसानी से मुड़ सके. फिर उसकी छिलाई-कटाई होती है, और बांस से सिर, छाती, घाघरा सबको अलग-अलग शेप दी जाती है. इस अस्थि-पंजर को कारीगर अपनी भाषा में ‘जंगला’ कहते हैं.

इसके बाद असली कमाल- इस ‘जंगले’ को साड़ी पहनाई जाती है. फिर उस पर खाकी पेपर चिपकता है, ऊपर रंग-बिरंगे पेपर लगते हैं, और आखिर में डिजाइनिंग का मेकअप. लो जी, तैयार हो गया लंकापति- दहन के लिए रेड कार्पेट पर चलने को.

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. कुछ ग्राहक स्पेशल इफेक्ट्स भी मांगते हैं- ‘भइया, थोड़ा बम-शम भी लगाओ. धड़ाम से गिरे तो मजा आए.’

हालांकि ज्यादातर ग्राहक अपनी क्रिएटिविटी खुद ही दिखाते हैं. ये कारीगर तो बस रावण का बेसिक मॉडल तैयार करते हैं. अब उसमें बम-फुलझड़ी डालनी है, रॉकेट फिट करना है या एंट्री के वक्त ‘धमाकेदार DJ रावण’ बनाना है- वो सब खरीदार की मर्जी.

चलो भइया, रावण तैयार तो हो गया. लेकिन अब सवाल बड़ा है- ये बिकेगा कहां?

इसका जवाब हमें 40 साल के विक्की तंवर ने दिया. आम दिनों में हाउसकीपिंग का काम करने वाले विक्की दशहरा से दो महीने पहले ‘लंका प्रोडक्शन हाउस’ के प्रोजेक्ट मैनेजर बन जाते हैं.

ठिकाना- तितारपुर का DDA पार्क. विक्की बड़े फख्र से बताते हैं, ‘ये रावण दिल्ली ही नहीं, NCR, यूपी, पंजाब, बिहार तक जाते हैं. इस बार दो रावण तो अमेरिका और कनाडा भी गए.’

बात करते-करते विक्की अचानक कारीगरों पर गरजे, ‘जल्दी हाथ चला ओय! गाड़ी आ गई है… 20 रावण पंजाब जाने हैं!’… सीन ऐसा था मानो कोई कार्गो फ्लाइट रवाना हो रही हो, फर्क इतना कि कंटेनर में कार नहीं, 20 फुट लंबे रावण के पुतले लोड हो रहे थे.

वहीं बगल में उनकी 70-75 साल की मां, सरोज बैठी थीं. हाथों में गोंद और रंग-बिरंगे कागज लिए. सरोज बोलीं, ‘अब इस उम्र में मुझसे नया रावण तो बनेगा नहीं, लेकिन बेटों का हाथ बंटा देती हूं.’ वैसे, 30 साल से वो यही काम कर रही हैं- रावण को सजाने का.

हमने पूछा-‘अम्मा, दिक्कत क्या है इस काम में?’

अम्मा कुछ बोलतीं, इससे पहले पीछे से आवाज़ आई- ‘उंगलियां कट जाती हैं भइया. आसान नहीं है ये काम.’

ये थे राजा, 19 साल के.

हमने छेड़ा- ‘तो पढ़ाई क्यों नहीं की?’ राजा का जवाब तैयार था, ‘घरवाले तो पढ़ाना चाहते थे, लेकिन मेरा मन नहीं लगा. चौथी में ही पढ़ाई छोड़ दी. अब रैपिडो चलाता हूं, और सीजन में यहां आकर रावण बनाता हूं.’

राजा की क्रिएटिविटी भी कमाल की है- ‘देखिए भइया, बांस से तो सब बनाते हैं, लेकिन मैं पेप्सी की बोतल से रावण की गर्दन और चाय के कप से उसका मुंह बना देता हूं. हैं ना बढ़िया!’

मतलब, जहां दिल्ली वाले पेप्सी पीकर बोतल कूड़े में फेंक देते हैं, राजा उसे पकड़कर रावण का सिर बना देता है. किसी और के लिए ये प्लास्टिक का कचरा है, लेकिन राजा और उसके जैसे बाकी लड़कों के लिए

60-70 फुट लंबे ‘गगनचुंबी लंकेश’ DDA पार्क से निकलकर हम पहुंचे टेगौर गार्डन मेन रोड पर- जहां चल रहा था असली होलसेल तमाशा. छोटे-मोटे 10-15 फुट वाले नहीं, बल्कि 60-70 फुट लंबे ‘गगनचुंबी लंकेश’ तैयार हो रहे थे. पूरा नजारा ऐसा कि लगे रावण नहीं, कोई नई मेट्रो पिलर लाइन खड़ी हो रही हो.

एक पुतले पर गोंद लगाते हुए 34 साल के रोहित मिले. कपड़े गोंद से ऐसे चिपके थे जैसे किसी ने उन्हें पुतले के साथ कॉम्बो पैक में बेच दिया हो. रोहित ने बताया कि 70 फीट के रावण में 10 फीट का सिर और 30-30 फीट का धड़ और घाघरा होता है.

फिर रोहित ने बड़े नपे-तुले अंदाज़ में रेट कार्ड थमाया-‘500 रुपये फुट का हिसाब है. मान लीजिए 60 फुट का पुतला है, तो 30 हजार रुपये. बनाने में हमारी लागत करीब 12-15 हजार आती है, बाकी पैसा हमारी कारीगरी का है.’

सोचिए- 60 फुट का रावण यानी 30,000 रुपये. इतने में तो कोई पुराना iPhone मिल जाएगा, लेकिन वहां आपको सिर्फ एक ‘Face ID’ मिलेगी, यहां आपको 10 Face ID मिलती हैं!

कई जगहों से खबरें आई थीं कि पति को मारने की आरोपी सोनम, मुस्कान जैसी लोगों के पुतले भी जलाए जाने वाले हैं. हमने रोहित से पूछा- ऐसे कोई खास ऑर्डर आए हैं क्या?

रोहित ने हंसते हुए कहा, ‘भइया, हमारे यहां रावण तो बस रावण ही बनता है. ये चेहरा ही हमारा रोजगार है. इसी से हमारा घर चलता है.’

CG: मुख्यमंत्री श्री साय संत बाबा हरदास राम साहिब जी की बरसी महोत्सव में हुए शामिल, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना…

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय कल देर रात राजधानी रायपुर के देवपुरी स्थित गोदड़ीवाला धाम पहुंचे, जहाँ उन्होंने संत शिरोमणि बाबा हरदास राम साहिब जी की 34वीं बरसी महोत्सव में शामिल होकर संत परंपरा को नमन किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने श्री गोदड़ीवाला धाम में स्थापित संत गेला राम साहिब जी की प्रतिमा के समक्ष मत्था टेककर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा – “यह मेरा परम सौभाग्य है कि मुझे संत शिरोमणि बाबा हरदास राम साहिब जी की बरसी महोत्सव में शामिल होने का अवसर मिला। यहाँ देशभर से आए पूज्य संतों के दर्शन का लाभ मिल रहा है। मेरी कामना है कि छत्तीसगढ़ पर संतों का आशीर्वाद सदा बना रहे और घर-घर में खुशहाली एवं समृद्धि हो।”

मुख्यमंत्री ने बरसी महोत्सव में पधारे देशभर के संत-महात्माओं का छत्तीसगढ़ की पावन भूमि पर हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि श्री गोदड़ीवाला संत बाबा हरदास राम जी का संपूर्ण जीवन मानव सेवा, त्याग और समर्पण का प्रेरणास्रोत रहा है। उनके चरण पड़ने से छत्तीसगढ़ की यह धरा धन्य हुई है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि धाम परिसर में समय-समय पर आयोजित नि:शुल्क नेत्र जांच शिविर, स्वास्थ्य शिविर और रक्तदान शिविर संत बाबा हरदास राम जी की शिक्षाओं और आदर्शों का जीवंत उदाहरण हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बरसी महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भक्ति, एकता और सामाजिक सेवा का उत्सव है।

संत समाज को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या का मायका और भगवान श्रीराम का ननिहाल है। उन्होंने कहा कि राजिम में भगवान श्रीराम और माता सीता द्वारा स्थापित कुलेश्वर महादेव आज भी विराजमान हैं। भगवान श्रीराम ने अपने 14 वर्षों के वनवास में से लगभग 10 वर्ष छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर व्यतीत किए। प्रदेशवासी भगवान श्रीराम को आज भी अपना भांजा मानते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के दर्शन कराने हेतु ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ चला रही है। इस योजना के अंतर्गत पिछले वर्ष 22 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने अयोध्या पहुंचकर श्रीरामलला के दर्शन किए।

बरसी महोत्सव में मुख्यमंत्री के साथ विधायक श्री मोतीलाल साहू, विधायक श्री पुरन्दर मिश्रा, छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री नन्द कुमार साहू, छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष श्री अनिल थौरानी, श्री ललित जयसिंह, श्री श्रीचंद सुंदरानी सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे।

 

“‘IND-PAK मैच से BCCI ने कमाए 650 करोड़ रुपये… शहीदों की विधवाओं को दिए जाएं’, सौरभ भारद्वाज की मांग”

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आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने बीसीसीआई को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इंडिया-पाकिस्तान मैच से करीब 650 करोड़ रुपये का रेवेन्यू कमाया गया है. उनका कहना है कि अगर यह रकम पहलगाम हमले में शहीद हुए जवानों की विधवाओं को दी जाए, तो हर विधवा को 30 से 35 करोड़ रुपये मिल सकते हैं.

अमित मालवीय पर साधा निशाना उन्होंने सवाल उठाया कि ‘सूर्यकुमार यादव के जीते हुए महज 2 लाख रुपये से विधवाओं का क्या होगा?’ भारद्वाज ने भाजपा नेता अमित मालवीय पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा, ‘अमित मालवीय झूठ की फैक्ट्री हैं, पायरेटेड सीडी की दुकान हैं.’

सौरभ भारद्वाज ने कहा, ‘अमित मालवीय ने दावा किया कि भारतीय कप्तान ने पाकिस्तान कप्तान और वहां के मंत्री से हाथ नहीं मिलाया, जबकि हमने वीडियो भेजकर दिखाया कि दोनों से हाथ मिलाया गया था. मालवीय सिर्फ स्क्रिप्ट चला रहे हैं.’

‘शहीदों की विधवाओं को मिले बीसीसीआई का पैसा’

AAP नेता ने कहा कि शहीदों के परिवारों की मदद के लिए व्यक्तिगत खिलाड़ियों की कमाई नहीं बल्कि बीसीसीआई को अपनी आय से मदद करनी चाहिए. उनके मुताबिक, ‘बीसीसीआई के पास साढ़े छह सौ करोड़ रुपये हैं, वही पैसा विधवाओं तक पहुंचना चाहिए. सरकार को भी इसमें अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी.’

“PM मोदी के ट्वीट से बौखला गए पाकिस्तानी मंत्री मोहसिन नकवी और ख्वाजा आसिफ”

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पाकिस्तान को एशिया कप में करारी हार का स्वाद चखाने के बाद भारतीय टीम ने प्रतिद्वंद्वी देश की डबल बेइज्जती की है। पहले तो लगातार तीसरे मुकाबले में टीम इंडिया ने पाकिस्तान पर जोरदार जीत हासिल की।

इसके बाद जब फाइनल में ट्रॉफी पाकिस्तान के होम मिनिस्टर और एशिया क्रिकेट परिषद के चीफ मोहसिन नकवी के हाथ से लेने की बात आई तो इनकार ही कर दिया। मोहसिन नकवी काफी देर तक इंतजार करते रहे, लेकिन भारतीय टीम निकलकर ही नहीं आई। अंत में जलील होकर मोहसिन नकवी वहां से निकल ही गए।

एशिया कप फाइनल के परिणाम को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट किया और लिखा कि खेल के मैदान में भी ऑपरेशन सिंदूर जारी है और रिजल्ट वही निकला है- भारत की जीत। पीएम मोदी के इस ट्वीट ने पाकिस्तान के जले पर नमक छिड़कने का काम किया है। उनके इस ट्वीट पर ट्ऱॉफी लेकर खड़े रहे मोहसिन नकवी ने जवाब दिया है और कहा कि नरेंद्र मोदी ने खेल भावना का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि इस तरह खेल में जंग को घसीटना ठीक नहीं है। भारतीय पीएम ने खेल भावना को कमजोर करने की कोशिश की है। नकवी ने बौखलाहट में बढ़-चढ़कर यह दावा भी कर दिया कि भारत इतिहास में हर बार पाकिस्तान से हारा है।

वहीं एक ही तथ्य काफी कुछ कहता है कि 1971 की जंग में पाकिस्तान के 93,000 सैनिकों ने भारत के आगे सरेंडर किया था और इसके साक्ष्य आज भी फोटो सहित उपलब्ध हैं। नकवी ने एक्स पर फर्जी दावे करते हुए लिखा, ‘यदि जंग ही आपके लिए गर्व का विषय है तो इतिहास में कई जीत पाकिस्तान के नाम हैं। कोई क्रिकेट मैच सत्य नहीं बदल सकता। खेल में जंग को घसीटना दिखता है कि आप किस तरह से अधीर हैं।’ वहीं पाकिस्तान के डिफेंस मिनिस्टर ख्वाजा आसिफ भी बौखला गए हैं। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने खेल भावना के खिलाफ जाकर ट्वीट किया है। इससे महाद्वीप में शांति और स्थिरता पर असर होगा।

“GST रेट कट के बाद आम आदमी को अब एक और बड़ी राहत देने की तैयारी! कभी भी हो सकता ऐलान”

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जीएसटी में कटौती के बाद आम आदमी को एक और बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। खबर है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक सरप्राइज रेट कट कर सकता है। यानी अगर ऐसा होता है तो आने वाले दिनों में आम आदमी पर से ईएमआई का बोझ कम हो सकता है।

बता दें कि आरबीआई अपनी मौद्रिक नीति बैठक में बुधवार को रेपो रेट को 5.50% पर स्थिर रखने की संभावना है। हालांकि, कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि कमजोर निवेश, वैश्विक व्यापार दबाव और नरम महंगाई को देखते हुए RBI सरप्राइज रेट कट का विकल्प भी चुन सकता है। बता दें कि RBI की तीन दिवसीय मौद्रिक नीति बैठक 1 अक्टूबर को समाप्त हो रही है। अनुमान है कि RBI अपनी प्रमुख नीति दर (रेपो रेट) को 5.50% पर बनाए रखेगा। लेकिन, अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी व्यापार और कमजो महंगाई दर के प्रभाव को देखते हुए दर में कटौती की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

क्या है डिटेल रॉयटर्स पोल के मुताबिक, करीब तीन-चौथाई अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि दरों में कोई बदलाव नहीं होगा। हालांकि, सिटी, बार्कलेज, कैपिटल इकॉनॉमिक्स और एसबीआई जैसी बड़ी वित्तीय संस्थाओं ने रेट कट की संभावना जताई है। उनका कहना है कि विकास दर पर दबाव और महंगाई की नरमी, कटौती के पक्ष में माहौल बना रही है। इस साल की शुरुआत से अब तक RBI ने 100 बेसिस प्वाइंट की दरों में कटौती की है, लेकिन इसके बावजूद निजी निवेश कमजोर बना हुआ है। अगस्त पॉलिसी मीटिंग में RBI ने दरों को स्थिर रखते हुए ‘न्यूट्रल स्टांस’ बनाए रखा था, जिसके बाद वित्तीय हालात और सख्त हो गए।

एनालिस्ट की राय सिटी इकॉनॉमिस्ट्स ने लिखा कि अक्टूबर की बैठक फिर से ‘लाइव’ हो गई है। RBI एक ‘इंश्योरेंस रेट कट’ का विकल्प चुन सकता है ताकि बाहरी झटकों से अर्थव्यवस्था को सहारा मिल सके, या फिर डोविश पॉज लेकर संकेत दे सकता है कि आने वाले समय में कार्रवाई की जाएगी। भारत की अर्थव्यवस्था ने जून तिमाही में 7.8% की बेहतर-से-उम्मीद ग्रोथ दर्ज की। हालांकि, कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह आंकड़ा महंगाई के समायोजन के बाद वास्तविक मजबूती से अधिक दिख रहा है। बता दें कि सरकार ने अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए आयकर राहत और जीएसटी दरों में कटौती जैसे कदम उठाए हैं। लेकिन बढ़े हुए टैरिफ और रुपये की कमजोरी ने आर्थिक दृष्टिकोण को अनिश्चित बना दिया है।

अमेरिका के साथ व्यापार तनाव बढ़ने से भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव की आशंका गहराई है। अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर 50% टैरिफ लगा दिया है और वीजा फीस बढ़ाई है, जिससे सेवाओं के व्यापार पर और सख्त कदम उठाए जाने की चिंताएं बढ़ गई हैं। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि रिजर्व बैंक पूरी स्थिति का असर देखने का इंतजार करने की बजाय पहले ही कदम उठा सकता है। कैपिटल इकॉनॉमिक्स के मुताबिक, “अमेरिकी टैरिफ से जीडीपी ग्रोथ को झटका लग सकता है। वहीं, महंगाई का स्तर अभी भी नियंत्रित है। ऐसे में RBI एक बार फिर से रेट कट चक्र शुरू कर सकता है।” संस्था ने अनुमान जताया है कि RBI अगले हफ्ते दरों में कटौती कर सकता है और दिसंबर में एक और कटौती संभव है।

CG: 570 करोड़ रुपये के कोल लेवी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राज्य सरकार को पत्र…

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छत्तीसगढ़ में हुए 570 करोड़ रुपये के कोल लेवी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राज्य सरकार को पत्र लिखा है। पत्र में 10 वरिष्ठ IAS-IPS अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत कार्रवाई की सिफारिश की गई है। यह पत्र मुख्य सचिव और ईओडब्ल्यू को भेजा गया है।

ईडी की जांच में सामने आया है कि 15 जुलाई 2020 को तत्कालीन खनिज निदेशक व निलंबित IAS समीर विश्नोई ने एक आदेश जारी किया, जिसमें आनलाइन कोल परमिट को आफलाइन मोड में बदल दिया गया। इसके बाद अवैध लेवी वसूली का खेल शुरू हुआ। घोटाले का मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी को माना जा रहा है, जिनके साथ निलंबित IAS समीर विश्नोई, रानू साहू और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की तत्कालीन उप सचिव सौम्या चौरसिया, अनिल टुटेजा का नाम भी सामने आया है।

EOW द्वारा दर्ज FIR के बाद जनवरी 2024 में इन सभी को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि वर्तमान में कुछ आरोपी जमानत पर हैं और प्रदेश से बाहर रह रहे हैं। ईडी की रिपोर्ट में कहा गया है कि परमिट का दुरुपयोग कर साजिश के तहत कारोबारियो से करोड़ों की अवैध वसूली की गई। हालांकि वरिष्ठ IAS-IPS के नामों का खुलासा नहीं हुआ है फिलहाल ED के पत्र ने सियासी हलचल मचा दी है।

“‘देवी माता के आशीर्वाद से सबका कल्याण हो’, पीएम मोदी ने शेयर किया ‘जागो दुर्गा दशप्रहरणधारिणी’ भजन”

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नवरात्रि के पावन अवसर पर देवी माता से सभी भक्तों के कल्याण की प्रार्थना की. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ‘जागो दुर्गा दशप्रहरणधारिणी’ भजन भी शेयर किया.

यह भजन मां की कृपा और शक्ति की भावना व्यक्त करता है. पीएम मोदी ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “देवी मां के चरणों में नमन और वंदन. उनसे कामना है कि सभी के दुखों को दूर कर उनके जीवन में नए तेज का संचार करें. देवी माता के आशीर्वाद से सबका कल्याण हो.”

दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी नवरात्रि के पहले दिन से ही रोजाना माता के विभिन्न स्वरूपों की उपासना का उल्लेख सोशल मीडिया के माध्यम से कर रहे हैं. पीएम मोदी ने सोमवार को एक भक्ति भरा गीत ‘जागो दुर्गा दशप्रहरणधारिणी’ शेयर किया है, जिसे द्विजेन मुखर्जी ने गाया है. यह भजन एल्बम ‘दुर्गा वंदना’ का हिस्सा है, जो मां दुर्गा की महिमा और शक्ति का गुणगान करता है. इस भजन के बोल और संगीत भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देते हैं.

मां की महिमा का भजन

‘जागो दुर्गा दशप्रहरणधारिणी’ मां दुर्गा के दस शस्त्रों और उनकी असीम शक्ति का वर्णन करता है. यह भजन मां की महिमा, उनके दैवीय रूप और भक्तों पर उनकी कृपा को दर्शाता है. अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि मंगलवार को है. इस दिन दुर्गा अष्टमी और संधि पूजा है. इस तिथि को सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा धनु राशि में रहेंगे.

कितने बजे है अभिजीत का मुहूर्त

द्रिक पंचांग के अनुसार, अभिजीत मुहूर्त सुबह के 11 बजकर 47 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा और राहुकाल का समय दोपहर के 3 बजकर 9 मिनट से शुरू होकर 4 बजकर 39 मिनट तक रहेगा. महाष्टमी के दिन मां दुर्गा की आराधना का आरंभ महास्नान और षोडशोपचार पूजा से किया जाता है. यह पूजा महासप्तमी के समान ही होती है, लेकिन प्राण-प्रतिष्ठा केवल महासप्तमी को होती है.

“करूर भगदड़ को लेकर राहुल गांधी ने एक्टर विजय को लगाया फोन, सीएम स्टालिन से भी की बात; 41 लोगों की गई जान”

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लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से करूर में स्थिति के बारे में जानकारी ली. बता दें, करूर में तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) की रैली के दौरान भगदड़ के बाद अब तक 41 लोगों की मौत हो चुकी है.

मृतकों में 18 महिलाएं, 13 पुरुष, पांच युवतियां और पांच युवा लड़के शामिल हैं. अब तक 34 पीड़ित करूर जिले से दो-दो इरोड, तिरुप्पुर और डिंडीगुल जिलों से तथा एक सलेम जिले से है.

राहुल टीवीके अध्यक्ष विजय से भी की बात

कांग्रेस सूत्रों बताया कि राहुल गांधी ने टीवीके अध्यक्ष विजय से भी बात की और मृतकों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की. इससे पहले, करूर भगदड़ की विस्तृत जांच के लिए तमिलनाडु सरकार द्वारा नियुक्त सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय की न्यायाधीश अरुणा जगदीशन ने सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का दौरा किया और कहा कि घायल लोग अब ठीक हैं. रविवार को अपने दौरे के बाद पत्रकारों से बात करते हुए न्यायमूर्ति जगदीशन ने कहा कि अस्पताल में अब सभी ठीक हैं. उन्हें बहुत अच्छा इलाज मिल रहा है. न्यायमूर्ति जगदीशन भगदड़ की जांच के लिए मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द्वारा नियुक्त एक सदस्यीय जांच आयोग का नेतृत्व कर रहे हैं.

करूर दौरे से पहले मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि कमियों को दूर करने के लिए आयोग का गठन किया गया है. भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए और आवश्यक सुधारात्मक उपाय किए जाएंगे. बता दें, यह दुखद घटना शनिवार को हुई थी जब टीवीके प्रमुख विजय की रैली में भारी भीड़ कथित तौर पर अराजक हो गई जिससे अफरा-तफरी मच गई. कई लोग बेहोश हो गए और उन्हें पास के अस्पतालों में ले जाया गया. सूत्रों ने बताया कि कार्यक्रम स्थल पर अत्यधिक भीड़ के कारण यह हादसा हुआ.

“हथियार डाल दें, एक भी गोली नहीं चलेगी… अमित शाह ने ठुकराया नक्सलियों का संघर्षविराम प्रस्ताव”

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को माओवादियों के संघर्ष विराम के प्रस्ताव को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि अगर चरमपंथी हथियार डालकर सरेंडर करना चाहते हैं तो उनका स्वागत है.

सुरक्षा बल उन पर एक भी गोली नहीं चलाएंगे. लेकिन कोई संघर्षविराम नहीं होगा. अगर नक्सली आत्मसमर्पण करना चाहते हैं तो उनके लिए फायदेमंद पुनर्वास नीति के साथ स्वागत किया जाएगा. गृहमंत्री ने भरोसा जताया कि देश 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा.

‘नक्सल मुक्त भारत’ विषय पर संगोष्ठी के समापन सत्र को संबोधित करते हुए गृह मंत्री शाह ने कहा, “हाल ही में भ्रम फैलाने के लिए एक पत्र लिखा गया. उसमें कहा गया कि अब तक जो कुछ हुआ, वह एक गलती है. युद्धविराम घोषित किया जाना चाहिए. हम (नक्सली) आत्मसमर्पण करना चाहते हैं. मैं कहना चाहता हूं कि कोई संघर्षविराम नहीं होगा. अगर आप आत्मसमर्पण करना चाहते हैं, तो संघर्षविराम की कोई जरूरत नहीं है. हथियार डाल दें, एक भी गोली नहीं चलेगी.”

अमित शाह ने वामपंथी उग्रवाद को वैचारिक समर्थन देने के लिए वामपंथी दलों पर निशाना साधा और उनके इस तर्क को खारिज कर दिया कि विकास की कमी के कारण माओवादी हिंसा हुई. उन्होंने कहा कि यह “लाल आतंक” ही कारण था कि कई दशकों तक देश के कुछ हिस्सों में विकास नहीं हो सका.

गृह मंत्री ने यह बात कुछ समय पहले सीपीआई (माओवादियों) द्वारा की गई संघर्ष विराम की पेशकश के जवाब में कही. यह पेशकश सुरक्षा बलों द्वारा छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर चलाए गए ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट में कई शीर्ष नक्सलियों के सफाए के बाद की गई थी.

अमित शाह ने कहा कि ऐसे कई लोग हैं, जो मानते हैं कि नक्सलियों द्वारा की जा रही हत्याओं को रोकना ही भारत से नक्सलवाद को खत्म करने के लिए पर्याप्त है. हालांकि यह सच नहीं है. भारत में नक्सलवाद इसलिए विकसित हुआ क्योंकि इसकी विचारधारा को समाज के लोगों ने ही पोषित किया.

उन्होंने कहा कि देश में नक्सल समस्या क्यों पैदा हुई, क्यों बढ़ी और विकसित हुई? किसने उन्हें वैचारिक समर्थन दिया? जब तक भारतीय समाज यह नहीं समझेगा, नक्सलवाद का विचार और समाज में वे लोग जिन्होंने वैचारिक समर्थन, कानूनी समर्थन और वित्तीय सहायता प्रदान की, तब तक नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई खत्म नहीं होगी. हमें उन लोगों की पहचान करनी होगी और उन्हें समझना होगा जो नक्सल विचारधारा को पोषित करना जारी रखे हुए हैं.

“तीन कैटेगरी में बांटे वोटर, दिवाली से छठ के बीच मेन गेम! बिहार में NDA का ‘मिशन 160+’ कितना टफ, कितना आसान?”

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बिहार में दुर्गा पूजा के बाद विधानसभा चुनाव की घोषणा हो जाएगी. अभी तक सामने आई जानकारी के अनुसार दिवाली-छठ के आस-पास में राज्य में चुनाव होगा. जिसके लिए सभी राजनीतिक दलें अपनी-अपनी तैयारियों में जुटी हैं.

NDA के चुनाव अभियान की कमान गृह मंत्री अमित शाह ने संभाल ली है. पिछले दिनों अपने 2 दिन के दौर में उन्होंने 4 बैठक की, एक सभा को भी संबोधित किया. अमित शाह ने बेतिया, समस्तीपुर, अररिया और पटना में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की. उन्हें जीत के टिप्स दिए.

पहले अमित शाह ने 225 सीटें जीतने का लक्ष्य दिया. पिछले चुनाव में एनडीए को कुल 125 सीटें मिली थी. ऐसे में इस हिसाब से नए लक्ष्य को पाने के लिए गठबंधन को 100 और सीटें जितनी होंगी. जो इतना आसान नहीं है. इसलिए अमित शाह ने बाद में अररिया में आयोजित बैठक में 160 से अधिक सीटें जीतने की बात की.

ऐसे में यह तो क्लियर है कि बिहार में NDA ने 160+ को अपना टारगेट बना लिया है. लेकिन इस टागरेट तक कैसे पहुंचा जाए, यह टारगेट कितना आसान है, कितना मुश्किल है, आज की रिपोर्ट में चर्चा इसी बात की.

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में NDA का ऐसा था प्रदर्शन पिछले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी 110 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और 19.46% वोट लाकर 74 सीटें जीती थी.

जबकि जदयू 115 सीटों पर चुनाव लड़ी और 15.39% वोट लाकर 43 सीटें जीत पाई. हम ने 7 में से 4 और मुकेश सहनी की वीआईपी 13 में से 4 सीटें जीती थी. गठबंधन को कुल 125 सीटें आई थी.

पिछले चुनाव जहां पिछड़े, वहां इस बार ज्यादा फोकस पिछले विधानसभा चुनाव में जिन इलाकों में पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं था, वहां फोकस करने को कहा गया है. पिछले चुनाव में एनडीए का सबसे बुरा प्रदर्शन मगध के इलाके में था. यहां 47 में से 17 सीटें ही NDA जीत पाई थी.

इसके अलावा भोजपुर इलाके में भी NDA को बुरी हार का सामना करना पड़ा था. इस इलाके में 46 में से 12 सीटें महागठबंधन ने जीती थी. सिर्फ इन दोनों इलाकों में गठबंधन को पिछली बार से 50 सीटें अधिक जीतना होगा.</li><li>वहीं मिथिलांचल जैसे मजबूत गढ़ में भी 15 सीटें बढ़ानी होंगी. पिछली बार इस इलाके में 58 में से 38 सीटें एनडीए ने जीती थी.

अररिया में बीजेपी नेताओं के साथ बैठक करते अमित शाह.

कैसे बढ़ेंगी सीटें? NDA ने बनाई यह रणनीति अमित शाह ने हर बूथ पर 10 फीसदी वोट बढ़ाने का लक्ष्य दिया है. भाजपा दीपावली से छठ के बीच सभी मंडल में सम्मेलन करेगी. प्रवासी मतदाताओं के बीच अपनी योजनाओं का प्रचार-प्रसार करेगी. पार्टी ने मतदाताओं की मैपिंग की है. इस मैपिंग के हिसाब से मतदाताओं को 3 कैटेगरी में बांटा है.

A – जो पार्टी के कार्यकर्ता हैं, उनके परिवार के सदस्य हैं.

B – जो पार्टी के समर्थक वोटर रहे हैं.

C – जो मुद्दों के आधार पर वोट करते हैं, किसी के स्थाई वोटर नहीं हैं.

इन सभी मतदाता 12 बजे तक वोट डाल लें, यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है. इसके अलावा हर विधानसभा में 225 बार जाकर लोगों से मुलाकात करनी है. सीमांचल के इलाके में अल्पसंख्यक मतदाताओं को भी पार्टी से जोड़ने और सभी वार्ड के प्रमुख लोगों को भाजपा से जोड़ने पर फोकस किया जाएगा.

NDA का टारगेट कितना आसान, कितना मुश्किल वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय कहते हैं, “एनडीए को सबसे बड़ी जीत 2010 के चुनाव में मिली थी, तब धर्मेंद्र प्रधान सह प्रभारी थे. पार्टी ने फिर से उन्हें प्रभारी बनाया है. वे बिहार को समझते हैं. लेकिन 225 की राह आसान नहीं है. इसलिए अमित शाह ने भी 160 से अधिक सीटें की बात की. मगध और शाहाबाद के इलाके को जीतना NDA के लिए अभी भी इतना आसान नहीं है. इस इलाके में माले और राजद के गठबंधन के कारण महागठबंधन काफी मजबूत हो जाता है. लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को इस इलाके में सफलता नहीं मिली थी.

प्रशांत किशोर की सेंधमारी, मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप और नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को लेकर उठ रहे सवाल NDA के लिए चुनौती हैं. इसलिए मिशन 225 कार्यकर्ताओं को हौसला दिलाने के लिए भले ही दोहराया जाए लेकिन जमीन पर यह उतरते हुए नहीं दिख रहा.

रवि उपाध्याय वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत किशोर की सेंधमारी, मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप और नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को लेकर उठ रहे सवाल NDA के लिए चुनौती हैं. इसलिए मिशन 225 कार्यकर्ताओं को हौसला दिलाने के लिए भले ही दोहराया जाए लेकिन जमीन पर यह उतरते हुए नहीं दिख रहा.

BJP को भरोसा, NDA को बड़ी जीत मिलेगी भाजपा के प्रदेश मंत्री और मिथिला के प्रभारी रत्नेश कुशवाहा बड़ी जीत को लेकर आश्वस्त हैं. वे कहते हैं, “सरकार की योजनाएं, विकास कार्य, NDA में बेहतर समन्वय और बेहतर सामाजिक संतुलन हमें इस बार बड़ी जीत दिलाएगा. उन्होंने कहा कि पिछले चुनाव के प्रदर्शन की हमने समीक्षा की है. पार्टी इस बार टिकट वितरण में सामाजिक संतुलन का विशेष ध्यान रखने वाली है. इस बार एनडीए कार्यकर्ता सम्मेलन के कारण प्रखंड स्तर तक हमारा कॉर्डिनेशन बेहतर हुआ है.

उन्होंने आगे कहा कि हमने जिला सम्मेलन किए, विधानसभा स्तर पर सम्मेलन किए और प्रखंड स्तर तक भी हमारे कार्यकर्ताओं का समन्वय बना है. इसका फायदा चुनाव में मिलेगा. सबसे बड़ी बात है कि योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचा है. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के दस हजार, 125 यूनिट बिजली. इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, स्पेशल इकोनॉमिक जोन जैसी चीजों के कारण लोगों में उत्साह है. वे जानते हैं कि विकसित बिहार के लिए भाजपा जरूरी है. जाहिर है इसका फायदा तो हमें मिलेगा ही.