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NEET UG परीक्षा को लेकर नई याचिका, CJI सूर्यकांत ने सुनते ही दिया ये जवाब’

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1 जून को भी एक याचिका दाखिल हुई थी, जिसमें पेपर-पेन के बजाय कम्यूटर बेस्ट टेस्ट (CBT) मोड में परीक्षा आयोजित किए जाने की मांग की गई थी. कोर्ट ने यह अर्जी खारिज कर दी थी.

नीट परीक्षा को लेकर नई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है. नीट पेपर लीक मामले के बाद 21 जून को फिर से नीट यूजी परीक्षा होने जा रही है, जिसे लेकर एक याचिका दाखिल हुई.

याचिका में कहा गया कि पेपर लीक के आरोप के बाद करीब 22 लाख छात्रों को नए सिरे से परीक्षा देने के लिए कहना गलत है. गड़बड़ी कुछ लोगों और परीक्षा केंद्रों तक सीमित थी. हालांकि, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kant) ने याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया और कहा कि नीट से जुड़े मामले दूसरी बेंच सुन रही है. यह केस भी उसी बेंच के सामने जुलाई के महीने में लगेगा.

इस साल तीन मई को हुई नीट यूजी परीक्षा को पेपर लीक की जानकारी सामने आने के बाद 12 मई को रद्द कर दिया गया था. इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल हुई हैं, जिनमें नेशनल टेस्टिंस एजेंसी (NTA) को भंग करने या उसका बुनियादी पुनर्गठन करने जैसी कई मांग की गई हैं. इन याचिकाओं पर जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच सुनवाई कर रही है.

1 जून को भी एक याचिका दाखिल हुई थी, जिसमें पेपर-पेन के बजाय कम्यूटर बेस्ट टेस्ट (CBT) मोड में परीक्षा आयोजित किए जाने की मांग की गई थी. कोर्ट ने यह अर्जी खारिज करते हुए कहा था कि अब परीक्षा में काफी कम समय बचा है.

कोर्ट ने परीक्षा अधिकारियों पर मौजूदा दबाव और व्यावहारिक दिक्कतों का हवाला दिया. कोर्ट ने कहा, ‘हम पहले भी ऐसी याचिकाएं खारिज कर चुके हैं. परीक्षा रद्द होने के बाद उसके दोबारा आयोजन में प्रशासन के सामने वैसे ही दबाव और चुनौतियां हैं. ऐसे में अभी कोई आदेश देना सही नहीं होगा.’

दूसरी तरफ टेलीग्राम पर अस्थाई रोक लगाए जाने के खिलाफ मैसेजिंग ऐप ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. 16 जून को सरकार ने परीक्षा से जुड़ी धोखाधड़ी को रोकने के लिए एक बड़े कदम के तहत देश में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर 22 जून तक अस्थाई रोक लगा दी थी. इस फैसले को टेलीग्राम ने दिल्ली हाईोकोर्ट में चुनौती दी है और तत्काल सुनवाई की मांग की है.

ममता की टीएमसी में फूट को लेकर और परिसीमन बिल को लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अमित शाह पर जमकर निशाना साधा…

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ममता की टीएमसी में फूट को लेकर और परिसीमन बिल को लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अमित शाह पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि वो अपने असली मकसद में कामयाब नहीं हो पाएंगे.

उद्धव ठाकरे की शिवसेना में टूट के बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने केंद्रीय गृह मंत्री पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने अमित शाह पर विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने और लोकतंत्र की गरिमा को तार-तार करने का आरोप लगाया है. साथ ही कहा कि वो लगातार विपक्ष पर हमले कर रहे हैं.

जयराम रमेश ने बुधवार (17 जून) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि गृह मंत्री न सिर्फ विपक्ष पर ताबड़तोड़ हमले कर रहे हैं बल्कि वो भारतीय लोकतंत्र को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं. उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वो (अमित शाह) ऐसा 17 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में हुई अपनी उस बेइज्जती की भरपाई के लिए कर रहे हैं, जब वे परिसीमन बिल पास नहीं करवा पाए थे.

कांग्रेस नेता ने गृह मंंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि वो ऐसे कई नेताओं को लुभा रहे हैं जो सिर्फ़ दो साल पहले ही बीजेपी-विरोधी मजबूत एजेंडे के तहत चुने गए थे, ताकि वे अब बीजेपी में शामिल हो जाएं. इसके अलावा उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें (विपक्षी नेताओं को बीजेपी में शामिल होने पर) जो फायदे दिए जा रहे हैं, वे हैरान करने वाले हैं.

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की तरह कर रहे काम
ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस में जारी फूट की ओर इशारा करते हुए जयराम रमेश ने कहा कि गृह मंत्री पूरी तरह से मतलबी अभियान चला रहे हैं, जो बहुत अच्छी तरह से व्यवस्थित है और म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की तरह ही, लोगों को उनकी जरूरतों के हिसाब से कई तरह की स्कीम और प्रोडक्ट देता है. कांग्रेस सांसद ने आगे कहा कि उनकी अनैतिकता की कोई सीमा नहीं है लेकिन वे अपने असली मकसद में कामयाब नहीं हो पाएंगे.

अमित शाह पर साजिश रचने का लगाया आरोप
इससे पहले कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने गृह मंत्री पर आरोप लगाया कि उन्होंने टीएमसी के 20 बागी सांसदों को अलग कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी (एनसीपी) में शामिल करने की साजिश रची. कांग्रेस महासचिव ने कहा कि इस कदम का मकसद एनडीए की लोकसभा में ताकत बढ़ाना था. उन्होंने कहा कि इस तरह की साजिश भारत में लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए बड़ा झटका है.

PoK में पाकिस्तान की नई साजिश, 56 मौतों के बाद भी नहीं टूटा आंदोलन….

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PoK में 9 जून से चल रहे प्रदर्शन को कुचलने के लिए पहले पाकिस्तानी हुकूमत और सेना ने चार दिन पहले ही सरदार उमर नजीर और उनके साथी शाहजेब हबीब की हत्या की थी.

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर (PoJK) में आज प्रदर्शन का नौवा दिन है. 70 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारी रावलकोट के ईदगाह मैदान में अपने 38 अधिकारों की मांगों को लेकर डटे हुए हैं. इस बीच पाकिस्तान की क्रूर सेना और हुकूमत की ओर से प्रदर्शन को कुचलने के एक और अमानवीय प्रयास के सबूत एबीपी न्यूज के हाथ लगे हैं.

बीते तीन दिनों से पाकिस्तानी हुकूमत ने पाकिस्तान के अन्य हिस्सो से खाने की सामग्री जैसे आटा, चावल, सब्ज़ी, फल लेकर पीओके जाने वाले ट्रकों को PoK की अलग-अलग सीमाओं पर रोक रखा है. करीब हर बॉर्डर पर 30 से 40 ट्रकों की लाइन लगी हुई है जिन्हें पाकिस्तानी रेंजर्स और पंजाब हाईवे पेट्रोल पुलिस PoJK के अंदर प्रवेश नहीं करने दे रही है.

PoK में अब तक 56 की मौत

पीओके में 9 जून से चल रहे प्रदर्शन को कुचलने के लिए पहले पाकिस्तानी हुकूमत और सेना ने चार दिन पहले ही 5 जून को प्रदर्शन के प्रमुख आयोजक सरदार उमर नज़ीर और उनके साथी शाहज़ेब हबीब पर फायरिंग की, जिसमें जब शाहज़ेब हबीब की मौत हो गई तो लोग शाहज़ेब हबीब की लाश को लेकर बैठ गए. जिसमें फिर 6-7 जून को पाकिस्तानी रेंजर्स ने फायरिंग की और 26 लोगों को मार गिराया. इसके बाद जब 9 जून को प्रदर्शन शुरू हुआ तो 9 जून और 10 जून को भिम्बर, ददियाल, कोटली, मीरपुर और रावलकोट में फायरिंग की गई जिसमें 11 लोग मारे गए. इसके बाद जैसे PoJK के अलग अलग इलाकों से लोग रावलकोट में इकट्ठा हुए तो फिर से 11 जून और 14 जून को सुबह सुबह फ़ज़्र की नमाज़ पढ़ने के लिए सड़क पर इकट्ठा हुए प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई गईं, जिसमें 11 जून को 16 लोग मारे गए और 14 जून को 3 लोग.

पंजाब पुलिस ने बॉर्डर पर रोके राशन से भरे ट्रक

ऐसे में कुल 56 लोगों की जान लेकर भी जब पाकिस्तानी हुकूमत प्रदर्शन को खत्म नहीं करा पाई तो अब 15 जून से पाकिस्तानी रेंजर्स और पंजाब पुलिस ने पीओके के अंदर खाने का सामान लेकर जाने वाले ट्रकों को बॉर्डरों पर ही रोक दिया और एंट्री बंद कर दी ताकि पीओके के लोगो के ऊपर दबाव बनाया जाए.

कल बीती रात एक ट्रक चालक से जब अवामी एक्शन कमेटी के कार्यकर्ताओं ने सवाल किया की बॉर्डर पर क्यों खड़े हैं किसने रोका है तो उसने साफ कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने. हालांकि पाकिस्तानी हुकूमत का ये दबाव भी पीओके के लोगों के ऊपर काम नहीं कर रहा है और आज सुबह भारी बारिश के बीच भारी संख्या में प्रदर्शनकारी ईदगाह मैदान पर डटे हुए हैं और महिलाएं सड़कों के ऊपर आजादी के नारे लगा रही हैं.

 NIA की बड़ी कार्रवाई, तिहाड़ में बंद आरोपी शाहीन लोन के घर पर की छापेमारी…

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बारामूला के कनिस्पोरा में NIA ने उग्रवाद से जुड़े मामले में शाहीन अहमद लोन के घर तलाशी ली. आरोपी कई वर्षों से तिहाड़ जेल में बंद है.

नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने बुधवार (17 जून)  को उत्तरी कश्मीर के बारामूला ज़िले के कनिस्पोरा इलाके में तलाशी अभियान चलाया. यह कार्रवाई एजेंसी की ओर से की जा रही उग्रवाद से जुड़े एक मामले की जांच का हिस्सा थी. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि NIA की टीमों ने कनिस्पोरा में शाहीन अहमद लोन के घर पर छापा मारा. लोन इसी एजेंसी की जांच वाले एक मामले के सिलसिले में पिछले कई सालों से तिहाड़ जेल में बंद है.

यह घटनाक्रम उस पिछली कार्रवाई के बाद हुआ है जिसमें जम्मू में NIA एक्ट के तहत नियुक्त स्पेशल जज ने एजेंसी की उस अर्ज़ी को मंज़ूरी दी थी, जिसमें शाहीन अहमद लोन की अचल संपत्तियों को ‘गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम’ (UAPA) के प्रावधानों के तहत ज़ब्त करने की मांग की गई थी.

हथियार बरामदगी मामला
जांच रिकॉर्ड के अनुसार, यह मामला 11 जनवरी, 2020 को कुलगाम में मीर बाज़ार के पास ‘अल-स्टॉप नाका’ पर हुंडई i20 गाड़ी को रोके जाने से जुड़ा है. इस ऑपरेशन के दौरान गाड़ी से हथियार, गोला-बारूद और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद होने का दावा किया गया था. इसके बाद, गृह मंत्रालय ने जांच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी को सौंप दी, जिसने 17 जनवरी, 2020 को औपचारिक रूप से मामले की जांच अपने हाथ में ले ली.

शाहीन लोन पर आरोप
NIA का आरोप है कि शाहीन अहमद लोन प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों के लिए ‘ओवरग्राउंड वर्कर’ के तौर पर काम करता था. उस पर नियंत्रण रेखा (LoC) के पार से हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक लाने और उन्हें कश्मीर में सक्रिय उग्रवादियों तक पहुंचाने में मदद करने का आरोप है. अधिकारियों ने आज की तलाशी के दौरान ज़ब्त की गई सामग्री के बारे में तुरंत कोई जानकारी नहीं दी.

सिंधु जल संधि पर एड़ी-चोटी का लगा रहा जोर, क्या है शहबाज का प्लान?

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सिंधु जल संधि पर यूरोप से सहानुभूति पाने के लिए पाकिस्तानी सरकार बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में 18 जून को एक थिंक टैंक की मदद से साझा कार्यक्रम आयोजित कर रही है.

आज से 14 महीने पहले भारत ने पाकिस्तानी पोषित आतंकवाद से निपटने के लिए सिंधु जल संधि को स्थगित किया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कहा था कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते हैं. पिछले 14 महीने में पाकिस्तान ने कई देशों के माध्यम से भरसक कोशिश की कि भारत को मनाया जाए और सिंधु जल संधि को फिर से लागू करवाया जाए. इतनी ही नहीं बल्कि शहबाज सरकार भारत पर दबाव बनाने के लिए कथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन में भी गई, लेकिन भारत ना किसी दबाव में आया और ना ही सिंधु जल समझौते को स्थगित करने के फैसले में कोई बदलाव किया.

पाकिस्तानी सरकार अब यूरोपीय देश बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में 18 जून को एक थिंक टैंक की मदद से साझा कार्यक्रम आयोजित कर रही है, जिसमें सिंधु जल समझौते के मुद्दे को उठाया जाएगा और पाकिस्तान को पीड़ित बताने की कोशिश की जाएगी कि अगर भारत ने सिंधु जल संधि फिर से नहीं लागू की तो पाकिस्तान के लोग भूखे प्यासे मर जाएंगे और खेत बंजर हो जाएंगे.

ट्रांसबाउंडरी वाटर रिसोर्सेज: ए वेपनाइज़्ड ग्लोबल कॉमन” नाम के इस कार्यक्रम का आयोजन बेल्जियम का थिंक टैंक सेंटर फॉर यूरोपियन पॉलिसी स्टडीज़ (CEPS) और यूरोपीय संघ, बेल्जियम और लक्ज़मबर्ग में पाकिस्तान का दूतावास संयुक्त रूप से कर रहा है. इस कार्यक्रम में पाकिस्तानी उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री डॉ. इशाक डार का रिकॉर्डेड मुख्य संबोधन कार्यक्रम में प्रसारित किया जाएगा. साथ ही पाकिस्तान के केंद्रीय जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण समन्वय मंत्री डॉ. मुसादिक मसूद मलिक कार्यक्रम में शामिल होंगे, जिससे समझ आ रहा है कि पाकिस्तान भारत द्वारा सिंधु जल समझौते को स्थगित करने के बाद कितना परेशान और उतावला है.

दो सत्रों में आयोजित होगा कार्यक्रम
एबीपी न्यूज़ के पास कार्यक्रम के एजेंडा की कॉपी है, जिसके मुताबिक सम्मेलन की शुरुआत सीईपीएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैरेल लानू और यूरोपीय संघ, बेल्जियम और लक्ज़मबर्ग में पाकिस्तान के राजदूत रहीम हयात कुरैशी करेंगे. इसके बाद पाकिस्तानी उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री डॉ इशाक डार का रिकॉर्डेड संबोधन प्रसारित किया जाएगा. एजेंडा के मुताबिक कार्यक्रम के दो सत्र हैं.

कौनकौन होगा शामिल
पहला सत्र पाकिस्तान के जलवायु और जल संबंधी नैरेटिव पर केंद्रित होगा, जिसकी अध्यक्षता सीईपीएस की जलवायु कार्यक्रम प्रमुख डॉ. इसाबेल शेकेनबाख करेंगी और इसमें ईसीडीपीएम की एसोसिएट डायरेक्टर सोफी डेसमिड्ट और पाकिस्तान के केंद्रीय जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण समन्वय मंत्री डॉ. मुसादिक मसूद मलिक शामिल होंगे. इस सत्र में पाकिस्तान सिंधु जल समझौते को स्थगित करने की वजह से देश में बाढ़, खाद्य सुरक्षा और निचले क्षेत्रों की जल संबंधी समस्याओं को प्रमुखता से उठाने की कोशिश करेगा.

सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा 
सम्मेलन के एजेंडे में बार-बार सिंधु नदी बेसिन का उल्लेख किया गया है और जल बंटवारे के विवाद को जलवायु संकट, अंतरराष्ट्रीय कानून और क्षेत्रीय सुरक्षा के नजरिए से पेश करने की कोशिश की गई है. दूसरा सत्र सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय जल बंटवारे की व्यवस्थाओं और सिंधु जल संधि से जुड़े कानूनी और कूटनीतिक तर्कों पर केंद्रित होगा, जिसकी अध्यक्षता सीईपीएस की रिसर्च फेलो डॉ. सेरेन एरगेन्च करेंगी. पैनल में सिंधु जल संधि मामलों में पाकिस्तान सरकार के पूर्व कानूनी सलाहकार रहे फैसल हुसैन नकवी भी शामिल होंगे. इसके अलावा यूट्रेक्ट विश्वविद्यालय की वरिष्ठ शोधकर्ता कैथी सुइकेंस और पत्रकारिता की आड़ में लगातार भारत विरोधी प्रचार और भ्रामक नैरेटिव फैलाने के लिए कुख्यात दानिश कय्यूम भी शामिल होगा.

सम्मेलन के विवरण में साझा जल संसाधनों को लगातार हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है और सिंधु बेसिन को एक प्रमुख विवादित क्षेत्र के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे साफ है कि पाकिस्तान सिंधु जल संधि को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक संगठित नैरेटिव तैयार करने की कोशिश कर रहा है और पश्चिमी देशों का ध्यान इस मुद्दे की ओर खींचना चाहता है. हालांकि जितनी कोशिश और पैसा पाकिस्तान सिंधु जल संधि के स्थगित होने के बाद अंतर्राष्ट्रीय लॉबी में लगा रहा है अगर उतनी ही कोशिश पाकिस्तान ने अपने देश में आतंकी संगठनों पर लगाम लगाने के लिए की होती तो पाकिस्तान को ये सब करने की जरूरत ही नहीं होती.

पहली कार्गो फ्लाइट की लैंडिंग, AISATS के साथ शुरू हुआ हाई-टेक ऑपरेशन…

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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहली कार्गो फ्लाइट के साथ मल्टी-मोडल कार्गो हब शुरू हो गया है. इससे उत्तर भारत में व्यापार और लॉजिस्टिक्स को नई रफ्तार मिलेगी.

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब तेजी से एक बड़े एविएशन हब के रूप में उभर रहा है. पैसेंजर फ्लाइट्स शुरू होने के बाद अब यहां कार्गो ऑपरेशन की भी शुरुआत हो गई है. आज सुबह करीब 7:30 बजे चेन्नई से पहली कार्गो फ्लाइट नोएडा एयरपोर्ट पर लैंड हुई, जिसके साथ ही मल्टी-मोडल कार्गो हब लॉन्च हो गया.

इस पूरे कार्गो ऑपरेशन को संभालने की जिम्मेदारी AISATS यानी Air India SATS को दी गई है – नोएडा एयरपोर्ट पर कंपनी कार्गो टर्मिनल, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन को मैनेज करेगी. आज पहली कार्गो फ्लाइट चेन्नई से आई जिसमें ई-कॉमर्स और अन्य कमर्शियल सामान लाया गया. इस फ्लाइट के जरिए एयरपोर्ट की पूरी कार्गो व्यवस्था जैसे कार्गो हैंडलिंग, स्टोरेज, डिजिटल प्रोसेस और रोड कनेक्टिविटी का भी एक टेस्ट किया गया.

लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा

AISATS की एंट्री के साथ नोएडा एयरपोर्ट पर कार्गो ऑपरेशन प्रोफेशनल और हाई-टेक तरीके से चलने की उम्मीद है. इससे कारोबारियों को तेज़ और भरोसेमंद लॉजिस्टिक्स सपोर्ट मिलेगा. अब तक दिल्ली एयरपोर्ट पर कार्गो का काफी दबाव था, लेकिन नोएडा एयरपोर्ट के शुरू होने से यह दबाव कम होगा. खासकर ई-कॉमर्स, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि उत्पादों के ट्रांसपोर्ट में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.

AISATS की जिम्मेदारी

नोएडा एयरपोर्ट का यह कार्गो हब शुरुआती चरण में लाखों टन सामान संभालने की क्षमता रखता है और आने वाले समय में इसे और बड़ा किया जाएगा. यमुना एक्सप्रेसवे से सीधी कनेक्टिविटी होने की वजह से यहां से माल देशभर में तेजी से पहुंचाया जा सकेगा. कुछ ही दिनों पहले यहां पैसेंजर फ्लाइट की शुरुआत हुई थी और अब कार्गो ऑपरेशन शुरू होने के साथ यह एयरपोर्ट सिर्फ यात्रियों के लिए ही नहीं बल्कि व्यापार और लॉजिस्टिक्स के लिए भी एक बड़ा सेंटर बन गया है. आने वाले समय में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर भारत का एक बड़ा कार्गो हब बन सकता है जहां AISATS की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है.

दुर्ग को मिलेगी सौगात- बनेगा अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम…

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पं. रविशंकर शुक्ल परिसर का होगा कायाकल्प

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले को जल्द ही एक नया अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम मिलने जा रहा है। जिले में खेल अधोसंरचना को मजबूत करने और स्थानीय खिलाड़ियों को ग्लोबल लेवल की सुविधाएं देने के लिए जिला क्रीड़ांगन समिति की बैठक में एक बड़ा फैसला लिया गया है। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव और कलेक्टर सह समिति अध्यक्ष श्री अभिजीत सिंह की उपस्थिति में आयोजित इस बैठक में पंडित रविशंकर शुक्ल स्टेडियम परिसर में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के क्रिकेट स्टेडियम निर्माण के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई है।

33 वर्षों के लिए BCCI को लीज पर दी जाएगी जमीन

बैठक में तय प्रस्ताव के मुताबिक, वर्तमान परिसर में बने बैडमिंटन कोर्ट की जमीन को छोड़कर बाकी की पूरी भूमि छत्तीसगढ़ राज्य क्रिकेट संघ (CSCS) के माध्यम से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को सौंपने की तैयारी है। इसके लिए भूमि को 33 वर्ष की अवधि की लीज पर देने का एक औपचारिक प्रस्ताव अंतिम मंजूरी के लिए राज्य शासन को भेजा जा रहा है।

जर्जर रविशंकर स्टेडियम और मानस भवन ढहाए जाएंगे

परिसर के पुनर्विकास को गति देने के लिए समिति ने कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है।  वर्तमान में पंडित रविशंकर शुक्ल स्टेडियम और मानस भवन की इमारतें अत्यंत जर्जर और अनुपयोगी हो चुकी हैं। इन्हें ढहाकर (अपलेखन कर) नई खेल संरचना के लिए खाली जमीन तैयार की जाएगी। स्टेडियम परिसर में संचालित हो रही व्यावसायिक दुकानों को अनुबंध की शर्तों के तहत एक महीने का नोटिस देकर खाली कराया जाएगा। दुकानदारों की सुरक्षा निधि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) का नियमानुसार समायोजन और भुगतान किया जाएगा। प्रस्तावित स्टेडियम के निर्माण में आड़े आ रहे सभी तरह के स्थायी और अस्थायी अतिक्रमणों और अवरोधों को नियमानुसार हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक नोडल अधिकारी तय

स्टेडियम निर्माण और प्रशासनिक समन्वय को सुचारू रूप से चलाने के लिए महत्वपूर्ण नियुक्तियां की गई हैं। वित्तीय प्रबंधन को पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए जिला कोषालय अधिकारी को समिति का कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। जर्जर भवनों के अपलेखन, बीसीसीआई/छत्तीसगढ़ राज्य क्रिकेट संघ से तालमेल और निर्माण संबंधी विभागीय कार्यों के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) के कार्यपालन अभियंता (EE) को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

बैडमिंटन कोर्ट का होगा विस्तार

डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) मद से निर्मित अत्याधुनिक बैडमिंटन कोर्ट के रखरखाव, बेहतर संचालन और खेल गतिविधियों के विस्तार के लिए इसे अब पूर्ण रूप से जिला क्रीड़ांगन समिति को हस्तांतरित करने पर सहमति बन गई है।

दुर्ग बनेगा छत्तीसगढ़ का नया स्पोर्ट्स हब

इस ऐतिहासिक फैसले पर खुशी जताते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण से दुर्ग जिला छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के प्रमुख खेल केंद्रों में शुमार हो जाएगा। इससे हमारे स्थानीय खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की आधुनिक सुविधाएं अपने घर पर ही मिल सकेंगी।

 

बिजली दरों में संशोधन से आम उपभोक्ताओं पर न्यूनतम असर…

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41 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को राहत’

14.5 लाख परिवारों को अब भी मिल रही मुफ्त बिजली’

सिंचाई पम्प धारी कृषकों पर कोई अतिरिक्त भार नहीं’ 

सब्सिडी, सौर ऊर्जा एवं राहत योजनाओं से अधिकांश उपभोक्ताओं को संरक्षण’

छत्तीसगढ़ में विद्युत टैरिफ के वार्षिक संशोधन के बावजूद  छत्तीसगढ़ सरकार ने आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार को न्यूनतम रखने के लिए कई स्तरों पर राहत और संरक्षण की व्यवस्था की है। विद्युत नियामक आयोग द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए औसतन 6.23 प्रतिशत अर्थात लगभग 42 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि स्वीकृत की गई है, लेकिन राज्य में मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना, बिजली बिल समाधान योजना और पीएम सूर्यघर योजना जैसी पहलों के कारण अधिकांश उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव काफी सीमित रहेगा।

गौरतलब है कि विद्युत दरों का निर्धारण छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा किया जाता है, जो एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था है। आयोग विद्युत कंपनियों की वार्षिक राजस्व आवश्यकता, उत्पादन लागत, कोयला, ट्रांसमिशन तथा वितरण व्यय सहित विभिन्न आर्थिक पहलुओं का अध्ययन कर दरों का निर्धारण करता है। नए टैरिफ में घरेलू उपभोक्ताओं की दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक की वृद्धि की गई है। हालांकि मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना के कारण प्रदेश के अधिकांश परिवारों पर इसका अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा।

प्रदेश में लगभग 51 लाख घरेलू उपभोक्ता हैं। इनमें से 14.5 लाख बीपीएल परिवारों को 30 यूनिट तक बिजली निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है, जिसका पूरा खर्च राज्य सरकार वहन कर रही है। इसके अलावा 26.5 लाख ऐसे उपभोक्ता, जिनकी मासिक खपत 400 यूनिट तक है, उन्हें 200 यूनिट तक की खपत पर 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। इन राहतों के कारण लगभग 41 लाख घरेलू उपभोक्ताओं पर बिजली दर वृद्धि का प्रभाव शून्य से लेकर मात्र 3.65 प्रतिशत तक ही होगा।

किसानों पर अतिरिक्त व्यय भार नहीं

राज्य के 8.65 लाख कृषि उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा प्रभार में 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है, लेकिन इसकी प्रतिपूर्ति राज्य शासन द्वारा सब्सिडी के रूप में किए जाने के कारण किसानों पर इसका अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। कृषि पंपों के स्थायी प्रभार को भी यथावत रखा गया है।

सौर ऊर्जा से हजारों परिवारों का बिल हुआ शून्य

ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित पीएम सूर्यघर योजना का छत्तीसगढ़ राज्य में तेजी से क्रियान्वयन किया जा रहा है। अब तक लगभग 66 हजार उपभोक्ता इस योजना का लाभ प्राप्त कर चुके हैं, जिनमें से 16 हजार परिवारों का बिजली बिल शून्य हो गया है। वर्तमान में लगभग 89 हजार घरों में सौर संयंत्र स्थापित करने का कार्य प्रगति पर है। राज्य सरकार ने आगामी वर्षों में 5 लाख घरों में सोलर प्लांट लगाने का लक्ष्य रखा है, जिससे बिजली उपभोग की लागत में कमी आएगी।

बिजली बिल समाधान योजना से मिली बड़ी राहत

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार द्वारा 12 मार्च 2026 से मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना लागू की गई है। इस योजना के तहत बीपीएल, घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिलों में विशेष राहत प्रदान की जा रही है।

बीपीएल उपभोक्ताओं को मूल बकाया राशि में 75 प्रतिशत तथा संपूर्ण सरचार्ज में छूट दी जा रही है। वहीं घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को मूल राशि में 50 प्रतिशत तथा पूरे सरचार्ज में छूट का लाभ मिल रहा है। इसके साथ ही शेष राशि को अधिकतम 60 किस्तों में जमा करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। योजना के तहत अब तक 6 लाख बीपीएल, 1.5 लाख घरेलू तथा 33 हजार कृषि उपभोक्ताओं ने आवेदन किया है। लगभग 1328 करोड़ रुपये के बकाया देयकों का समाधान किया जा चुका है, जिसमें 749 करोड़ रुपये की राहत उपभोक्ताओं को दी गई है।

उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने पर भी जोर

राज्य में औद्योगिक निवेश और रोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए स्टील उद्योगों को लोड फैक्टर पर मिलने वाली 25 प्रतिशत छूट को पूर्ववत जारी रखा गया है। इससे राज्य के उद्योग अन्य राज्यों की तुलना में प्रतिस्पर्धात्मक बने रहेंगे और उत्पादन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

आदिवासी क्षेत्रों के छात्रावासों को विशेष राहत

बस्तर एवं सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में संचालित छात्रावासों को गैर-घरेलू श्रेणी से घरेलू श्रेणी में शामिल कर विशेष राहत प्रदान की गई है। इससे इन संस्थानों के संचालन व्यय में कमी आएगी।

कम बिजली खर्च करने का नया अवसर

10 किलोवाट से अधिक भार वाले घरेलू, गैर-घरेलू, औद्योगिक तथा सार्वजनिक उपयोगिता उपभोक्ताओं को ऑफ-पीक समय (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) बिजली उपयोग पर 5 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। वहीं पीक आवर्स में 5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क निर्धारित किया गया है। इससे उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत का बेहतर प्रबंधन करने का अवसर मिलेगा।

ऊर्जा अधोसंरचना को मजबूत करने बड़ा निवेश

राज्य सरकार बिजली उत्पादन और वितरण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। वर्तमान में 2×660 मेगावाट क्षमता के सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत संयंत्र का कार्य प्रारंभ किया जा चुका है, जिसकी पहली इकाई मार्च 2029 तक शुरू होने की संभावना है। इसके अलावा मड़वा में 800 मेगावाट क्षमता के नए विद्युत संयंत्र की योजना पर भी कार्य चल रहा है।

आगामी वर्षों में 400/132 केवी के 4, 220/132 केवी के 17 तथा 132/33 केवी के 34 नए उपकेंद्र स्थापित किए जाएंगे। वहीं वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 106 नए 33/11 केवी उपकेंद्रों का निर्माण जारी है तथा लगभग 300 अतिरिक्त उपकेंद्र स्थापित करने की योजना बनाई गई है।

उपभोक्ता हित और व्यवस्था दोनों का संतुलन

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती उत्पादन एवं वितरण लागत, पूर्व वर्षों के वित्तीय दायित्वों तथा विद्युत अधोसंरचना विस्तार की आवश्यकताओं को देखते हुए किया गया यह संशोधन सीमित दायरे का है। राज्य सरकार ने सब्सिडी, राहत योजनाओं और सौर ऊर्जा कार्यक्रमों के माध्यम से आम उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव न्यूनतम रखने का प्रयास किया है।

छत्तीसगढ़ में 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियां तेज…

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मुख्य सचिव ने ली उच्च स्तरीय बैठक,  “स्वस्थ आयु के लिए योग” थीम निर्धारित 

छत्तीसगढ़ में आगामी 21 जून को 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष योग दिवस की थीम “स्वस्थ आयु के लिए योग” निर्धारित की गई है। आयोजन को व्यापक और सफल बनाने के लिए राज्य के मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज मंत्रालय (महानदी भवन) में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय बैठक ली और तैयारियों की समीक्षा की।

सरगुजा में होगा राज्य स्तरीय मुख्य आयोजन

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का संभावित राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम सरगुजा जिले में आयोजित होगा। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को इसके लिए सभी आवश्यक और पुख्ता तैयारियां समय से पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक जन-भागीदारी

मुख्य सचिव श्री विकासशील ने निर्देश दिए कि भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य के सभी जिलों में योग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए। राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत के प्रमुख स्थलों पर अनिवार्य रूप से योगाभ्यास कार्यक्रम आयोजित करने के लिए सभी कलेक्टर्स को निर्देश दिए गए हैं। कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के लिए आयुष विभाग और समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को आपस में बेहतर समन्वय के साथ काम करने को कहा गया है। जिला स्तर पर अधिक से अधिक जन-सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

NEET परीक्षार्थियों का रखा जाएगा विशेष ध्यान

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को सचेत करते हुए कहा कि 21 जून को ही नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा नीट (NEET) की पुनः परीक्षा भी आयोजित की जा रही है। इसे ध्यान में रखते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि योग दिवस के आयोजनों के कारण नीट परीक्षा केंद्रों और परीक्षार्थियों को किसी भी तरह की असुविधा या तकलीफ न हो।

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की तैयारी और डिजिटल पंजीयन

आयुष विभाग के अधिकारियों के अनुसार, भारत सरकार द्वारा इस बार व्यापक जनभागीदारी के निर्देश हैं। 14 जून 2026 से सुबह 6.15 बजे से 7.35 बजे तक ऑनलाइन योग अभ्यास सत्र के माध्यम से गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का प्रयास किया जा रहा है। आम नागरिकों की सहभागिता बढ़ाने के लिए टोल-फ्री नंबर 1800-315-7008 जारी किया गया है, जिस पर मिस्ड कॉल देकर आसानी से पंजीयन कराया जा सकता है। अधिकारियों ने  बताया कि आयुष मंत्रालय द्वारा योग संगम पोर्टल-2026 प्रारंभ किया गया है।

जिसके माध्यम से विभिन्न संस्थाएं, विभाग, शैक्षणिक संस्थान, स्थानीय निकाय, स्वायत्तशासी संस्थाएं, सार्वजनिक उपक्रम योग संस्थान एवं सामुदायिक संगठन दिनांक 21 जून 2026 को आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रमों के लिए पंजीयन एवं  कार्यक्रम के उपरांत विवरण एवं फोटोग्राफ अपलोड किये जा सकते है। शासन के समस्त विभागों के सचिव, विभागाध्यक्ष, संभागायुक्त एवं कलेक्टरों को अधीनस्थ संस्थाओं, कार्यालयों को उक्त पोर्टल पर पंजीयन कराने एवं आयोजन उपरांत कार्यक्रम की जानकारी पोर्टल में अपलोड करने हेतु निर्देशित करने कहा गया है। पंजीयन हेतु वेब पोर्टल https//:yoga.ayush.gov.in/yoga-sangam  है। 

मंत्रालय में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ, गृह विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद समेत नगरीय प्रशासन, वाणिज्यिक कर, कृषि, श्रम और आयुष विभाग के सचिव एवं योग आयोग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

प्रदेश के सभी ग्राम पंचायतों में 24 जून को होगी ग्राम सभा…

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आवास प्लस 2.0 की स्थायी प्रतीक्षा सूची सहित विभिन्न विषयों पर होगी चर्चा

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों को ग्राम सभाओं के माध्यम से ग्रामीण विकास, पंचायतों की वित्तीय स्थिति, आवास योजनाओं, रोजगार, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय विकास कार्यों जैसे जनहित से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा एवं निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है। छत्तीसगढ़ के सभी ग्राम पंचायतों में 24 जून 2026 को ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। ग्राम सभाओं में आवास प्लस 2.0 की स्थायी प्रतीक्षा सूची सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की जाएगी।

आवास हेतु पात्र हितग्राहियों की प्राथमिकता सूची होगी तैयार
ग्राम सभा में विशेष रूप से आवास प्लस 2.0 सर्वेक्षण से प्राप्त सिस्टम जनरेटेड स्थायी प्रतीक्षा सूची (पीडब्ल्यूएल) का अवलोकन एवं वाचन किया जाएगा। ग्राम सभा द्वारा शासन की मार्गदर्शिका एवं एसओपी के अनुसार पात्र हितग्राहियों की प्राथमिकता सूची तैयार की जाएगी तथा ग्रामीणों से प्राप्त दावे-आपत्तियों को नियमानुसार प्राप्त कर निराकरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। ग्राम सभा से अनुमोदन के बाद स्थायी प्रतीक्षा सूची को आवास सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जाएगा।

वीबी जी राम जी के संबंध में ग्रामीणों को दी जाएगी जानकारी
ग्राम सभा में पूर्व बैठक के निर्णयों के पालन प्रतिवेदन, पंचायतों के आय-व्यय की समीक्षा एवं अनुमोदन, विभिन्न योजनाओं से स्वीकृत कार्यों की प्रगति, तथा अन्य विकासात्मक विषयों पर भी चर्चा की जाएगी। ग्राम सभाओं में विकसित भारत, रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी जी राम जी) के संबंध में भी ग्रामीणों को जानकारी दी जाएगी तथा इसके क्रियान्वयन पर चर्चा होगी। योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को रोजगार की गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन किए जाने, बेरोजगारी भत्ते के बेहतर प्रावधान, समय पर मजदूरी भुगतान और ग्राम सभा आधारित विकास योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।

ग्राम सभा में अधिक से अधिक सहभागिता हेतु ग्रामीणों से अपील
प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों से ग्राम सभा में अधिक से अधिक ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित करने तथा ग्राम विकास से जुड़े निर्णयों में जनभागीदारी बढ़ाने की अपील की गई है। ग्राम सभा में पिछली बैठकों में पारित प्रस्तावों की समीक्षा, पंचायतों के आय-व्यय का अनुमोदन, विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति, आवास प्लस 2.0 की प्रतीक्षा सूची तथा पंचायत संपत्तियों के प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। इसके साथ ही पंचायत उन्नति सूचकांक 2.0 के परिणामों को भी ग्रामीणों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।