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इस्लाम पार्टी की नसरीन बानो शेख बनीं मालेगांव की मेयर, शिवसेना की लता घोडके को दी मात…

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महाराष्ट्र के मालेगांव नगर निगम में हुए मेयर चुनाव में बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है. स्थानीय राजनीतिक दल इस्लाम पार्टी की उम्मीदवार नसरीन बानो शेख मालेगांव की नई मेयर चुनी गई हैं.

उन्होंने शिवसेना की उम्मीदवार लता घोडके को 25 मतों के बड़े अंतर से हराकर यह जीत दर्ज की. इस चुनाव ने नगर निगम की राजनीति में नए समीकरण बना दिए हैं और सेक्युलर फ्रंट की ताकत को भी साफ तौर पर दिखा दिया है.

नसरीन बानो शेख के पक्ष में कुल 43 नगरसेवकों ने डाले वोट

मतदान के दौरान नसरीन बानो शेख के पक्ष में कुल 43 नगरसेवकों ने वोट डाले. जबकि शिवसेना की लता घोडके को सिर्फ 18 मत ही मिल सके. नसरीन बानो शेख को इस्लाम पार्टी के सभी 35 नगरसेवकों का समर्थन मिला. इसके अलावा समाजवादी पार्टी के 5 और कांग्रेस के 3 नगरसेवकों ने भी उनका साथ दिया, जिससे उनकी जीत मजबूत हो गई.

लता घोडके को पार्टी के 18 नगरसेवकों का मिला समर्थन

जानकारी के अनुसार, दूसरी ओर शिवसेना की उम्मीदवार लता घोडके को पार्टी के 18 नगरसेवकों का समर्थन मिला. लेकिन यह संख्या जीत के लिए काफी नहीं थी. इस चुनाव में एआईएमआईएम (एमआईएम) और बीजेपी के नगरसेवक तटस्थ रहे और उन्होंने किसी भी उम्मीदवार के पक्ष में मतदान नहीं किया. जिससे मुकाबले का रुख पहले से ही साफ होता चला गया.

मेयर पद के लिए मैदान में उतरे कुल तीन उम्मीदवार

मेयर पद के लिए कुल तीन उम्मीदवार मैदान में थे और पांच नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे. लेकिन अंत में मुकाबला नसरीन बानो शेख और लता घोडके के बीच ही रहा. परिणाम आने के बाद नगर निगम सभागृह में सेक्युलर फ्रंट के नगरसेवकों और समर्थकों ने जोरदार जश्न मनाया. ढोल-नगाड़ों, नारों और तालियों के साथ नसरीन बानो शेख की जीत का स्वागत किया गया.

Exclusive: नागरिकता मामले को लेकर सोनिया गांधी की तरफ से कोर्ट में जवाब दाखिल, जानें क्या है पूरा मामला…

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बिना नागरिकता हासिल किए मतदाता सूची में कथित जालसाजी कर नाम शामिल कराए जाने के मामले में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ दाखिल रिवीजन पिटीशन पर राउज एवेन्यू कोर्ट में उनकी तरफ से जवाब दाखिल किया गया है.

कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में सोनिया गांधी ने कहा कि यह याचिका पूरी तरह गलत आधार पर दाखिल की गई है और इसका उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ लेना है. कोर्ट में दाखिल जवाब में साफ तौर पर कहा गया है कि नागरिकता से जुड़े मामलों का अधिकार केंद्र सरकार के पास है, जबकि मतदाता सूची से जुड़े विवाद चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आते हैं.

‘आरोप केवल अनुमान और कल्पना पर आधारित’

कांग्रेस नेता की तरफ से कहा गया कि ऐसे मामलों में आपराधिक अदालतों का दखल संविधान के अनुच्छेद 329 के तहत प्रतिबंधित है. सोनिया गांधी की ओर से कहा गया कि शिकायत में लगाए गए आरोप केवल अनुमान और कल्पना पर आधारित हैं. शिकायतकर्ता यह तक स्पष्ट नहीं कर पाया कि कौन से दस्तावेज़ कथित रूप से जाली बनाए गए, कब बनाए गए और किसने बनाए. न तो किसी आवेदन की कॉपी लगाई गई और न ही यह बताया गया कि ऐसे किसी दस्तावेज़ को पाने के लिए कोई कानूनी प्रयास किया गया.

कोर्ट को बताया गया कि शिकायत जिन घटनाओं पर आधारित है, वे 1980-83 के दौर की बताई जा रही हैं. इतने लंबे समय बाद न तो विश्वसनीय साक्ष्य मिल सकते हैं और न ही ऐसे मामलों को आगे बढ़ाना कानूनन उचित है. सोनिया गांधी ने कहा कि 40 साल से ज्यादा पुराने आरोपों को उठाना व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है.

जवाब में यह भी कहा गया है कि शिकायतकर्ता ने मीडिया रिपोर्ट्स और पुराने अखबारों की कतरनों के आधार पर मामला खड़ा करने की कोशिश की है, जिनका कोई कानूनी महत्व नहीं है. एक दस्तावेज़ पर तो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली शब्द का इस्तेमाल बताया गया जबकि यह शब्द 1991 के बाद प्रचलन में आया, जिससे उस दस्तावेज़ की प्रामाणिकता पर सवाल उठता है.

21 फरवरी को अगली सुनवाई

इसके अलावा अदालत को यह भी बताया गया कि कानून के अनुसार धारा 175(3) के तहत दायर याचिका के साथ सही ढंग से सत्यापित हलफनामा अनिवार्य होता है, जो इस मामले में मौजूद नहीं है. ऐसे में मजिस्ट्रेट को इस शिकायत पर सुनवाई करने का अधिकार ही नहीं बनता. सोनिया गांधी ने कोर्ट से मांग की कि यह आपराधिक रिविजन याचिका खारिज की जाए, क्योंकि यह न केवल कानून का दुरुपयोग है, बल्कि निराधार और दुर्भावनापूर्ण भी है. राउज एवन्यू कोर्ट 21 फरवरी को मामले की अगली सुनवाई करेगा.

“दवा से लेकर डायमंड तक, किस-किस पर लगेगा जीरो टैरिफ? वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया”

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भारत और अमेरिका के बीच शनिवार (7 फरवरी) को हुए अंतरिम व्यापार समझौते के बाद केंद्रीय वाणिज्‍य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसे दोनों देशों के हित में बड़ी डील बताया है. केंद्रीय मंत्री ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में कहा कि अमेरिका ने हमारे पड़ोसी देशों चीन पर 35 फीसदी और बांग्‍लादेश पर 20 फीसदी टैरिफ लगाया है, जबकि भारत पर केवल 18 फीसदी टैरिफ लगाएगा.

पीयूष गोयल ने कहा कि बहुत से ऐसे आइटम्‍स भी हैं, जिन पर अमेरिका कोई टैरिफ नहीं लगाएगा. इस समझौते के तहत अमेरिका कुछ भारतीय एक्सपोर्ट जैसे जेनेरिक दवाएं, रत्न-जवाहरात, हीरे और विमान के पार्ट्स-पर ये टैरिफ हटा देगा. उन्होंने कहा कि हमारे निर्यातकों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था मोस्ट प्रीफर्ड ड्यूटी के साथ खुलती है. कल देर रात जो भारत-अमेरिका के बीच संयुक्त बयान तय हुआ, दुनिया के सामने रखा गया. इसका हर तरफ स्वागत हुआ है. गोयल ने कहा कि आज का दिन भारत के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा.

विकसित भारत 2047 को लेकर क्या कहा

केंद्रीय उद्योग मंत्री ने कहा कि आज का दिन विकसित भारत 2047 की राह में एक महत्वपूर्ण दिन है. भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक वार्ता फरवरी 2025 में शुरू हुई थी, जिसका लक्ष्य प्रति वर्ष 500 अरब डॉलर का निर्यात कारोबार हासिल करना था. उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करते हुए एक भव्य, दूरदर्शी दृष्टिकोण प्रस्तुत करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व की प्रशंसा की.

ये सामान होंगे टैरिफ फ्री

उन्होंने कहा कि इस समझौते से भारतीय निर्यातकों, विशेष रूप से लघु एवं मध्यम उद्यमों, किसानों और मछुआरों के लिए अवसरों में वृद्धि होने की उम्मीद है. भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत कई प्रमुख वस्तुओं के अमेरिका को निर्यात पर कोई शुल्क नहीं लगेगा. रत्न और आभूषणों के साथ-साथ औषधीय उत्पादों को भी अब टैरिफ फ्री पहुंच प्राप्त होगी, जिससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और मेक इन इंडिया को भी समर्थन मिलेगा.

पीयूष गोयल ने कहा कि डायमंड, फार्मा, कॉफी, आम और अन्य कई वस्तुएं अमेरिका को टैरिफ फ्री निर्यात की जाएंगी. कृषि क्षेत्र में कई भारतीय उत्पाद अब बिना किसी टैरिफ के अमेरिका को निर्यात किए जा सकेंगे. इनमें चाय, मसाले, नारियल तेल, वनस्पति मोम, सुपारी, ब्राजील नट्स और कई प्रकार के फल और सब्जियां शामिल हैं. पीयूष गोयल के अनुसार सब्जी की जड़ें, अनाज, जौ, बेकरी उत्पाद, कोको उत्पाद, तिल के बीज, खसखस और खट्टे फलों के रस पर भी कोई रेसिप्रोकल टैरिफ नहीं लगेगा और अब वे अमेरिकी बाजार में टैरिफ फ्री हो जाएंगे.

चीन और बांग्लादेश पर कितना टैरिफ

उन्होंने आगे बताया कि कई ऐसे सामान जिन पर पहले 50 फीसदी टैरिफ लगता था, अब जीरो टैरिफ के साथ अमेरिकी बाजार में जाएंगे. पीयूष गोयल ने नए भारत-अमेरिका व्यापार ढांचे के तहत भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ी जीत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चीन पर 35 फीसदी टैरिफ लगाया गया है, जबकि बांग्लादेश और वियतनाम पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया गया है.

पानी के नीचे कितनी देर रह सकता है वाटरप्रूफ फोन? जानिए क्या होता है IP68 और IP69 रेटिंग का मतलब…

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आजकल कई लेटेस्ट फोन के वाटर-रजिस्टेंट होने का दावा किया जाता है. इसके लिए कंपनियां IP रेटिंग यूज करती है, जिसके जरिए यह दिखाया जाता है कि कोई फोन कितनी वाटर प्रोटेक्शन के साथ आ रहा है.

आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि वाटर प्रूफ और वाटर रजिस्टेंट में क्या फर्क होता है और जो IP68, IP69 और IPX8 रेटिंग यूज की जाती है, उसका क्या मतलब होता है.

वाटरप्रूफ और वाटर रजिस्टेंट में क्या अंतर होता है?

वाटर रजिस्टेंट फोन पानी की बूंदों और बारिश आदि को झेल सकता है, लेकिन इसे ज्यादा समय तक पानी में रखने के लिए डिजाइन नहीं किया जाता है. दूसरी तरफ वाटरप्रूफ फोन को कड़े इमर्शन टेस्ट से गुजारा जाता है और यह एक निश्चित गहराई में लंबे समय तक रह सकता है. हालांकि, फिर भी स्विमिंग पूल आदि में ज्यादा समय तक पहने पर इसके खराब होने का खतरा बना रहता है.

रेटिंग का क्या मतलब?

क्या आपका फोन वाटरप्रूफ है? इसका जवाब उसकी IP रेटिंग से मिल जाएगा. IP का पूरा नाम इनग्रेस प्रोटेक्शन होता है और इसके आगे लिखे नंबर यह बताते हैं कि यह डस्ट और पानी के प्रति कितना रजिस्टेंट है. इस रेटिंग में दो नंबर होते हैं. पहला नंबर डस्ट के प्रति प्रोटेक्शन को दिखाता है और इसकी रेंज 0-6 होती है. दूसरा नंबर पानी और दूसरे लिक्विड के प्रति प्रोटेक्शन दिखाता है और इसकी रेंज 0-9 तक होती है.

IP68- इस रेटिंग में 6 का मतलब है कि डिवाइस फुल डस्ट प्रूफ है. वहीं 8 नंबर दिखाता है कि यह 30 मिनट तक 1.5 मीटर गहरे पानी में रह सकता है. हालांकि, कुछ फोन इससे भी ज्यादा समय और गहराई तक पानी में सुरक्षित रह सकते हैं. इस रेटिंग वाले फोन को पूल, बारिश और हल्के बहाव वाले पानी के नीचे फोटो लेने के लिए यूज किया जा सकता है.

IP69- इस रेटिंग का मतलब है कि यह फोन हाई प्रैशर और हाई टेंपरेचर वाले पानी को आसानी से झेल सकता है. मुश्किल कंडीशन में काम कर सकने वाले फोन में यह रेटिंग मिलती है, जहां फोन कई बार तेज बहाव के संपर्क में आ जाता है.

IPX8- इसमें पहले डिजिट की जगह X का इस्तेमाल किया गया है, जो दिखाता है कि इसे डस्ट प्रोटेक्शन के लिए टेस्ट नहीं किया गया है. वहीं 8 नंबर का मतलब है कि यह फोन लगभग 1.5 मीटर तक की गहराई में कुछ देर तक रह सकता है. ये फोन आमतौर पर स्विमिंग और बारिश के दौरान इस्तेमाल के लिए सेफ होते हैं.

US PoK Map: अमेरिका-भारत ट्रेड डील के साथ जारी नक्शे ने बढ़ाई पाकिस्तान की चिंता, चीन को भी लिया लपेटे में, जानें पूरी बात…

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भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम ट्रेड डील के फ्रेमवर्क के ऐलान के साथ एक और बात ने सबका ध्यान खींचा है. अमेरिका की ट्रंप सरकार की ओर से जारी भारत के नए नक्शे ने पाकिस्तान को असहज कर दिया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा शुरू हो गई है.

अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ऑफिस ने ट्रेड डील की जानकारी देते समय जो नक्शा जारी किया, उसमें पूरा जम्मू-कश्मीर, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और अक्साई चिन को भारत का हिस्सा दिखाया गया है.

हालांकि भारत हमेशा से यह साफ कहता आया है कि जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न अंग है और इसके लिए किसी बाहरी देश की मंजूरी की जरूरत नहीं है. इसके बावजूद अमेरिका की तरफ से इस तरह का नक्शा जारी किया जाना पाकिस्तान के लिए एक बड़ा राजनीतिक और कूटनीतिक झटका माना जा रहा है.

क्यों अहम है यह नक्शा?

अब तक अमेरिका की सरकारी एजेंसियां नक्शों में PoK को लेकर संतुलित रुख अपनाती रही थीं, ताकि पाकिस्तान की आपत्तियों से बचा जा सके. लेकिन ट्रंप प्रशासन के इस ताजा नक्शे में पाकिस्तान के दावों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है. यही वजह है कि यह कदम अमेरिका की पुरानी नीति से अलग माना जा रहा है. इसका समय भी काफी अहम है. हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर लंबी बातचीत चली थी. पहले ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया था, जो सहयोगी देशों में सबसे ज्यादा था. अब अंतरिम समझौते के तहत इसे घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है.

अक्साई चिन को भी भारत का हिस्सा दिखाया गया

इस नक्शे की एक और खास बात यह है कि इसमें अक्साई चिन को भी भारत का हिस्सा दिखाया गया है. यह वही इलाका है जिस पर चीन लंबे समय से दावा करता रहा है. पहले भारत ने कई बार विदेशी एजेंसियों द्वारा जारी गलत नक्शों पर आपत्ति जताई थी. ट्रंप प्रशासन का यह कदम भारत की उन्हीं आपत्तियों को मान्यता देने जैसा माना जा रहा है.

विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

रणनीतिक मामलों के जानकारों ने इस कदम की सराहना की है. रिटायर्ड मेजर गौरव आर्य ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह अमेरिका का शानदार कदम है. कई लोगों का कहना है कि यह पाकिस्तान की हालिया कूटनीतिक कोशिशों के लिए बड़ा झटका है.

ट्रेड डील से भारत को फायदा

इस अंतरिम ट्रेड डील से भारत को स्टील, एल्युमिनियम, फार्मा, ऑटो और ऑटो पार्ट्स जैसे क्षेत्रों में राहत मिली है. वहीं कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भारत ने अपने हितों की पूरी रक्षा की है.

कमाई का शानदार मौका! IPO लेकर आ रही है InCred Holdings, जानें इश्यू साइज से लेकर बाकी सभी डिटेल…

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प्राइवेट इक्विटी फर्म केकेआर समर्थित इनक्रेड फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (InCred Holdings) अपना आईपीओ लेकर आ रही है. गुरुवार, 5 फरवरी को मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) से कंपनी को इस इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के जरिए फंड जुटाने की मंजूरी मिल गई है.

इससे पहले मामले से जुड़े लोगों के हवाले से पीटीआई ने 9 नवंबर, 2025 को अपनी रिपोर्ट में बताया था कि फाइनेंशियल सर्विसेज प्लेटफॉर्म इनक्रेड ने पिछले नवंबर में प्री-फाइलिंग रूट के जरिए सेबी के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DHRP) जमा कराया था. इसका मतलब है कि कंपनी ड्राफ्ट पेपर्स में IPO की जानकारी का खुलासा बाद के चरणों तक रोक सकती है. यह बाजार की स्थितियों के आधार पर जरूरी जानकारियों का खुलासा किए बिना ड्राफ्ट को वापस लेने का भी मौका देती है.

इन कंपनियों को भी मिली IPO लाने की मंजूरी

जिन दूसरी कंपनियों को रेगुलेटरी मंजूरी मिली है, उनमें लेजर पावर एंड इंफ्रा, सेडेमैक मेकाट्रॉनिक्स, आर्डी इंडस्ट्रीज, आर्मी इन्फोटेक, आरवी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स और शंकरेश ज्वैलर्स शामिल हैं. इन कंपनियों ने भी पिछले साल सितंबर और नवंबर के बीच अपने ड्राफ्ट पेपर जमा किए थे और 2 से 6 फरवरी के बीच सेबी से ऑब्जर्वेशन मिले थे.

ये मंजूरी 2026 की शुरुआत में भारत कोकिंग कोल लिमिटेड, शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड और अमागी मीडिया लैब्स जैसे तीन बड़े IPOs के भारतीय प्राइमरी मार्केट में आने के बाद मिली है.

इनक्रेड होल्डिंग के आईपीओ का साइज लगभग 3,000-4,000 करोड़ रुपये के बीच होने की संभावना है. आईपीओ में नए शेयरों के साथ-साथ ऑफर फॉर सेल भी शामिल रहेगा.

क्या करती है कंपनी?

InCred NBFC InCred फाइनेंशियल सर्विसेज की सहायक कंपनी है. IIFL कैपिटल सर्विसेज ऑफर के लिए बुक-रनिंग लीड मैनेजर है. साल 2016 में भूपिंदर सिंह ने इनक्रेड ग्रुप की शुरुआत की थी. इसके निवेशकों में अबू धाबी इनवेस्टमेंट अथॉरिटी, TRS (टीचर रिटायरमेंट सिस्टम ऑफ टेक्सास), KKR, ओक्स, एलेवर इक्विटी और मूर वेंचर पार्टनर्स जैसे बड़े नाम शामिल हैं. कंपनी अपने 3 वर्टिकल्स- इनक्रेड फाइनेंस, इनक्रेड कैपिटल और इनक्रेड मनी के जरिए अपना ऑपरेशन चलाती है. 2022 में इनक्रेड फाइनेंस को केकेआर इंडिया फाइनेंशियल सर्विसेज के साथ मर्ज किया गया.

TMMTMTRM OTT Release: ओटीटी पर रिलीज हुई कार्तिक-अनन्या की ‘तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी’, लेकिन ये है ट्विस्ट…

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कार्तिक आर्यन और अनन्या पांडे स्टारर रोमांटिक कॉमेडी ‘तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी’ पिछले साल सिनेमाघरों में क्रिसमस के मौके पर रिलीज हुई थी. इस फिल्म से यूं तो बॉक्स ऑफिस पर काफी धमाल मचाने की उम्मीद थी लेकिन धुरंधर के तूफान के आगे ये टिक नहीं पाई और बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई. हालांकि फैंस कार्तिक की इस फिल्म की ओटीटी रिलीज का इंतजार कर रहे थे तो ये रोमांटिक ड्रामा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आ गई है.

चलिए यहां जानते हैं ‘तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी’ को ओटीटी पर कहां देख सकते हैं

‘तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी’ ओटीटी पर कब और कहां होगी रिलीज?

‘तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी’ फाइनली OTT पर आ गई है. यह फिल्म क्रिसमस 2025 वीकेंड पर सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी. बहुत से लोग इसे घर पर देखने का इंतज़ार कर रहे थे, और अब यह आखिरकार आ गई है. यह फिल्म प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो रही है, लेकिन अभी यह सिर्फ़ रेंट पर अवेलेबल है, अगर लोग इसे अभी देखना चाहते हैं, तो उन्हें 349 रुपये देने होंगे.

प्राइम वीडियो आमतौर पर शुरुआत में फिल्में रेंट पर अवेलेबल कराता है औरकुछ समय बाद, आमतौर पर शुरुआती डिजिटल रेवेन्यू फेज खत्म होने के बाद, उन्हें सब्सक्राइबर के लिए अपनी फ्री स्ट्रीमिंग लाइब्रेरी में जोड़ देता है.

‘तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी’ बॉक्स ऑफिस कलेक्शन

‘तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी’ की बॉक्स ऑफिस कमाई की बात करें तो इस फिल्म ने भारत में 32.95 करोड़ की नेट कमाई की थी जबकि इसकी ग्रॉस कमाई 39.35 करोड़ रही थी. फिल्म ने वर्ल्डवाइड 49.5 करोड़ का कलेक्शन किया था. इस फिल्म का बजट 90 करोड़ रुपये बताया गया था और ये बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही थी.

क्या है कहानी?

यह फ़िल्म लॉस एंजिल्स में रहने वाले एक बहुत सफल वेडिंग प्लानर रेहान ‘रे’ मेहरा (कार्तिक आर्यन स्टारर) की कहानी बताती है. उसे अपना काम और अपनी शानदार ज़िंदगी बहुत पसंद है. उसकी सिंगल मां ने उसे पाला-पोसा और उसे आत्मनिर्भर बनना सिखाया. इसी वजह से रे को इमोशनल चीज़ें पसंद नहीं हैं. वह कैज़ुअल रिलेशनशिप और आज के ज़माने के ऐसे प्यार में विश्वास करता है जिसमें कोई दिक्कत न हो. वह कमिटमेंट नहीं चाहता और ज़िंदगी को सिंपल रखना पसंद करता है, सब कुछ तब बदल जाता है जब रे क्रोएशिया में एक लग्ज़री यॉट क्रूज़ पर जाता है. वहाँ उसकी मुलाकात रूमी वर्धन (अनन्या पांडे स्टारर) से होती है. रूमी एक उभरती हुई राइटर है जो आगरा की रहने वाली है. वह रे से बहुत अलग है. बाद में कहानी और दिलचस्प हो जाती है.

बीजेपी की रितु तावड़े बनेंगी BMC मेयर, अब उद्धव ठाकरे गुट ने लिया ये बड़ा फैसला…

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मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के मेयर चुनाव को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. बीजेपी की रितु तावड़े अब निर्विरोध मेयर बन सकती हैं. अगर आज (7 फरवरी) शाम 6 बजे तक कोई और दल मेयर पद के लिए उम्मीदवारी नहीं दाखिल करता है, तो रितु तावड़े सीधे मेयर चुन ली जाएंगी.

इस बार महायुति की ओर से बीजेपी की रितु तावड़े ने मेयर पद के लिए और शिंदे गुट की शिवसेना के संजय घाड़ी ने उपमहापौर पद के लिए नामांकन दाखिल किया है. वहीं, उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना और कांग्रेस ने अभी तक मेयर पद के लिए कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा है. इस स्थिति में महायुति की उम्मीदवार रितु तावड़े का निर्विरोध मेयर बनना लगभग तय माना जा रहा है.

11 फरवरी को होगा बीएमसी मेयर पद का चुनाव

एनसीपी (एसपी) के एकमात्र पार्षद अजीत राव राणे ने भी महायुति का समर्थन करने का ऐलान किया है. इससे यह संभावना और मजबूत हो गई है कि मेयर और उपमहापौर का चुनाव बिना मुकाबले के ही संपन्न होगा. बीएमसी मेयर पद का चुनाव 11 फरवरी को दोपहर 12 बजे होगा. नामांकन दाखिल करने की अंतिम समय-सीमा आज शाम 5 बजे तक है. अगर इस समय तक विपक्ष की ओर से कोई उम्मीदवार नहीं आता है, तो रितु तावड़े बिनविरोध मेयर बन जाएंगी और उपमहापौर का पद भी निर्विरोध तय हो सकता है.

मुंबई की राजनीति में मजबूत दिखाई दे रहा महायुति का दबदबा

इस चुनाव में महायुति की जीत लगभग पक्की मानी जा रही है. शिवसेना के मेयर पद के लिए उम्मीदवार न देने के फैसले ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं. ऐसे में मुंबई की राजनीति में महायुति का दबदबा और मजबूत होता दिखाई दे रहा है.

Google का रेड अलर्ट! करोड़ों स्मार्टफोन यूजर्स खतरे में, ये एक सेटिंग नहीं बदली तो पड़ सकता है भारी…

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इस चेतावनी की सबसे बड़ी वजह पुराने Android ऑपरेटिंग सिस्टम हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, Android 13 या उससे पुराने वर्जन पर चल रहे स्मार्टफोन सबसे ज्यादा जोखिम में हैं. दुनिया में आज भी बड़ी संख्या में लोग ऐसे ही डिवाइस इस्तेमाल कर रहे हैं.

अनुमान है कि करीब 40 प्रतिशत स्मार्टफोन अब भी पुराने Android सिस्टम पर चल रहे हैं जिनकी संख्या लगभग एक अरब तक पहुंचती है. इन डिवाइसों के लिए अब नियमित सिक्योरिटी अपडेट जारी नहीं किए जाते जिससे हैकर्स के लिए उनमें सेंध लगाना काफी आसान हो जाता है.

अगर Android वर्जन के हिसाब से देखा जाए, तो सबसे नया Android 16 अभी बहुत कम यूजर्स तक ही पहुंच पाया है. Android 15 पर भी सीमित संख्या में फोन चल रहे हैं. इसके मुकाबले Android 14 और Android 13 अब भी बड़ी संख्या में इस्तेमाल हो रहे हैं. कुल मिलाकर देखा जाए तो सिर्फ करीब आधे से थोड़ा ज्यादा स्मार्टफोन ही ऐसे हैं जिन्हें फिलहाल सुरक्षित माना जा सकता है जबकि बाकी डिवाइस संभावित खतरे के घेरे में हैं.

इस स्थिति में यूजर्स के लिए सबसे जरूरी कदम यही है कि वे अपने फोन का ऑपरेटिंग सिस्टम तुरंत अपडेट करें. अगर आपका स्मार्टफोन किसी पुराने Android वर्जन पर चल रहा है और उसे अब अपडेट नहीं मिल रहा तो वह डिवाइस हैकर्स के लिए आसान शिकार बन सकता है. ऐसे फोन में मौजूद निजी जानकारी चोरी होने का खतरा रहता है जिसका इस्तेमाल ठगी, ब्लैकमेलिंग या बड़े फ्रॉड के लिए किया जा सकता है.

स्मार्टफोन कंपनियां आमतौर पर सीमित समय तक ही सिक्योरिटी अपडेट देती हैं. ज्यादातर ब्रांड्स चार से पांच साल तक अपडेट सपोर्ट प्रदान करते हैं, जिसके बाद फोन को बदलना ही सुरक्षित विकल्प रह जाता है. हालांकि, अब कुछ प्रीमियम कंपनियां जैसे Samsung और Google अपने नए फ्लैगशिप फोन में सात साल तक सिक्योरिटी अपडेट देने का वादा कर रही हैं. इसके उलट, मिड-रेंज और बजट स्मार्टफोन में यह सपोर्ट आमतौर पर तीन से चार साल तक ही सीमित रहता है.

ऐसे में अगर आप अपने डेटा और प्राइवेसी को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो पुराने फोन को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. समय पर सॉफ्टवेयर अपडेट करना या जरूरत पड़ने पर नया स्मार्टफोन लेना ही इस बढ़ते साइबर खतरे से बचने का सबसे भरोसेमंद तरीका है.

CG: कवासी लखमा जमानत के बाद उड़ीसा के मलकानगिरी में क्यों रहेंगे, छत्तीसगढ़ बजट सत्र में आएंगे या नहीं?

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शराब घोटाले के मामले में जमानत पर रिहा होने के बाद कांग्रेस नेता कवासी लखमा सुप्रीम कोर्ट की शर्त के चलते उड़ीसा के मलकानगिरी में रहेंगे. सीमावर्ती इलाका और राजनीतिक प्रभाव इसकी मुख्य वजह मानी जा रही है. बजट सत्र में शामिल होने के लिए उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से अनुमति मांगी है.

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के आरोप में लगभग एक साल तक जेल में रहने के बाद जमानत पर रिहा हुए कांग्रेस विधायक और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा अब उड़ीसा के मलकानगिरी जिले में रहेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते समय यह शर्त लगाई है कि कवासी लखमा छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा से बाहर रहेंगे.

कवासी लखमा 4 फरवरी 2026 को रायपुर सेंट्रल जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद 6 फरवरी को न्यायालय में पेश हुए. इस दौरान उन्होंने अदालत को जानकारी दी कि वे अब उड़ीसा के मलकानगिरी में निवास करेंगे. सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद यह उनकी पहली पेशी थी. मामले में अगली सुनवाई 19 फरवरी 2026 को ईडी की विशेष अदालत में होगी.

मलकानगिरी को ही क्यों चुना कवासी लखमा ने?

कवासी लखमा बस्तर क्षेत्र के वरिष्ठ आदिवासी नेता माने जाते हैं. वे छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले की कोंटा विधानसभा सीट से छह बार विधायक रह चुके हैं. लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहने के कारण उनका प्रभाव पड़ोसी राज्य उड़ीसा के मलकानगिरी जिले में भी है.

मलकानगिरी और कोंटा दोनों ही सीमावर्ती इलाके हैं और इनके बीच की दूरी मात्र 20 से 25 किलोमीटर है. नजदीकी क्षेत्र होने के कारण राजनीतिक और सामाजिक संपर्क बनाए रखना आसान होता है. माना जा रहा है कि इसी वजह से कवासी लखमा ने मलकानगिरी को अपना ठिकाना चुना है.

बजट सत्र में शामिल होने की मांग

सुप्रीम कोर्ट से मिली सशर्त जमानत के चलते कवासी लखमा फिलहाल छत्तीसगढ़ में निवास नहीं कर सकते. ऐसे में उन्होंने छत्तीसगढ़ विधानसभा के आगामी बजट सत्र में शामिल होने की अनुमति के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह को आवेदन सौंपा है.

कवासी लखमा ने विधानसभा अध्यक्ष से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर बजट सत्र में शामिल होने की मांग रखी है. सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय में निर्णय लेने का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष को दिया है कि वे बजट सत्र में शामिल हो सकते हैं या नहीं. गौरतलब है कि शराब घोटाले के मामले में कवासी लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया था.