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सड़कों पर मवेशी छोड़ने पर स्थायी रूप से जब्त करने की होगी कार्रवाई…

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पशुपालकों से जिम्मेदारी निभाने की अपील’

माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के पालन में बिलासपुर जिला प्रशासन, नगर निगम एवं पशु चिकित्सा विभाग द्वारा सड़कों पर विचरण करने वाले निराश्रित एवं आवारा मवेशियों के नियंत्रण के लिए अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। जिला प्रशासन ने सभी पशुपालकों, डेयरी संचालकों एवं किसानों से अपने पशुओं को घर या निर्धारित स्थान पर सुरक्षित रखने तथा उन्हें राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों सहित सार्वजनिक सड़कों पर न छोड़ने की अपील की है।

बिलासपुर नगर निगम द्वारा शहर की सड़कों एवं राजमार्गों से पकड़े गए मवेशियों को मोपका स्थित पशु आश्रय केंद्र में रखा जाता है। यहां से चयनित पशुओं को गौ-इकाई अथवा बैल-जोड़ी इकाई के रूप में पशुपालन विभाग के माध्यम से स्थायी पालन हेतु उपलब्ध कराया जाता है। इसके बावजूद यह देखा गया है कि कुछ पशुपालक निगम के नियमों के तहत अपने पशुओं को वापस लेकर पुनः सड़कों पर छोड़ देते हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है और नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित होती है।

जिला प्रशासन ने इसे ध्यान में रखते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई गौवंशीय अथवा भैंसवंशीय पशु सड़कों, राष्ट्रीय राजमार्गों अथवा राज्य मार्गों पर विचरण करते हुए पाया जाता है, तो उसे स्थायी रूप से जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी। जब्त सांडों को बैगा-बिरहोर एवं जरूरतमंद किसानों को बैल-जोड़ी के रूप में तथा जब्त गायों को गौ-इकाई के रूप में स्थायी पालन हेतु वितरित किया जाएगा। आवश्यकता अनुसार उन्हें गौशालाओं एवं गौठानों में भी स्थायी रूप से विस्थापित किया जाएगा।

बिलासपुर जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सड़क पर छोड़े गए पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम, यातायात की सुरक्षा तथा पशुओं के बेहतर संरक्षण के लिए यह कार्रवाई की जा रही है। पशुपालकों से सहयोग की अपेक्षा करते हुए प्रशासन ने सभी से अपने पशुओं की समुचित देखभाल एवं जिम्मेदारी से पालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि जब्त पशुओं के संबंध में की गई कार्रवाई पर किसी प्रकार की दावा-आपत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी, क्योंकि यह व्यवस्था माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में लागू की जा रही है।

समर्थ भारत कॉन्क्लेव 2026 का उद्घाटन किया राज्यपाल श्री डेका…

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहायक है, मानव बुद्धि का विकल्प नहीं -श्री डेका

राज्यपाल श्री रमेन डेका आज डॉ सी.वी. रमन  विश्वविद्यालय बिलासपुर एवं आईसेक्ट इंडिया ग्रुप के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय समर्थ भारत कॉन्क्लेव 2026 के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर श्री डेका ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है और इसके साथ तकनीक भी निरंतर विकसित हो रही है। ऐसे समय में तकनीक का उपयोग मानव कल्याण, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए होना चाहिए।

’एआई और अन्य नई तकनीकों का उपयोग नवाचार तथा समाज हित में करें’ 

राज्यपाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधुनिक युग की एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जो चिकित्सा, कृषि, अर्थव्यवस्था और शिक्षा सहित अनेक क्षेत्रों में मानव की सहायक बन सकती है, लेकिन यह मानव बुद्धि, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों का स्थान नहीं ले सकती। तकनीक को जीवन में सहायक के रूप में अपनाया जाना चाहिए न कि उसे किसी खतरे के रूप में स्थान दिया जाना चाहिए।  उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे एआई और अन्य नई तकनीकों का उपयोग नवाचार तथा समाज हित के कार्यों में करें। अपने संबोधन में उन्होंने इंटरनेट के बढ़ते उपयोग पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसके सकारात्मक प्रभावों के साथ-साथ नकारात्मक पहलुओं पर भी ध्यान देना आवश्यक है। डिजिटल एडिक्शन न हो यह कोशिश करनी चाहिए।

’आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग समय की मांग’

राज्यपाल ने कहा कि मानव सभ्यता का विकास सदैव नवाचार और वैज्ञानिक खोजों के माध्यम से हुआ है। जिस प्रकार अग्नि की खोज ने मानव जीवन को नई दिशा दी, उसी प्रकार आधुनिक विज्ञान और तकनीक भविष्य के भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग समय की मांग है। स्टार्टअप और नवाचार केवल आर्थिक प्रगति के साधन नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम भी हैं। नवाचार के जरिए दिव्यांगजनों के जीवन को सरल बनाया जा सकता है, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं तथा समाज को नई संभावनाओं से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और इको-फ्रेंडली जीवनशैली को अपनाने पर जोर दिया। पर्यावरण संरक्षण पर विशेष बल देते हुए राज्यपाल ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा, सौर ऊर्जा, जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन तथा पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को अपनाना आज की आवश्यकता है।

’भारत के गांवों तक तकनीक और नवाचार का लाभ पहुंचाना समय की आवश्यकता’

छत्तीसगढ़ की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक समृद्ध आदिवासी संस्कृति और अपार संभावनाओं वाला राज्य है। यहां के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और अवसरों से जोड़ने की है। उन्होंने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कृषि, वन उत्पाद, उद्योग और सेवा क्षेत्र सहित प्रत्येक क्षेत्र में वैल्यू एडिशन पर विशेष जोर देना होगा। राज्यपाल ने कहा कि भारत के गांवों तक तकनीक और नवाचार का लाभ पहुंचाना समय की आवश्यकता है।

’सरकार युवाओं को हर तरह से सक्षम बनाने का कर रही है प्रयास’ 

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, अनुसूचित जाति विकास मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एआई की पढ़ाई प्रारंभ की गई है। जिस तरह देश आगे बढ़ रहा है इस तरह तकनीकी क्षेत्र में भी राज्य को आगे बढ़ा रहे हैं। आज कंपनियों को जिस तरह के कोर्स की आवश्यकता है उसी के अनुरूप तकनीकी संस्थानों में कोर्स संचालित करने के प्रयास हो रहे हैं। सरकार युवाओं को हर तरह से सक्षम बनाने का प्रयास कर रही है जिससे  युवा जाब मांगने वाले नहीं बल्कि  देने वाले बने।

’राज्यपाल ने एआई कौशल रथ को दिखाई हरी झंडी’ 

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रदीप कुमार घोष ने एआई के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला। कॉन्क्लेव में पद्मश्री श्री अजय मांडवी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने भी अपना प्रेरक उदबोधन दिया। इस अवसर पर राज्यपाल ने एआई कौशल रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा आम नागरिकों को एआई की उपयोगिता, संभावनाओं और रोजगार के अवसरों की जानकारी देगा, विशेष कर ग्रामीण युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जेनरेटिव एआई की निशुल्क व्यवहारिक शिक्षा देने के लिए यह अत्याधुनिक मोबाइल लैब तैयार किया गया है।

कौशल रथ व एआइ पर आधारित पुस्तक का विमोचन

इस अवसर पर राज्यपाल ने आईसेक्ट के वार्षिक प्रतिवेदन एवं कौशल रथ व एआइ पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया। कार्यक्रम का संचालक डॉ. ज्योति बाला गुप्ता  और आभार प्रदर्शन कुलसचिव डॉ. अरविंद कुमार तिवारी ने किया।  इस कॉन्क्लेव में विश्वविद्यालय के अधिकारी, प्राध्यापक, उद्योग एवं बैंक के अधिकारी, आईसेक्ट इंडिया ग्रुप के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उद्यमी उपस्थित रहे।

लोकभवन में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए AI प्रशिक्षण सत्र आयोजित…

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लोकभवन में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक से अवगत कराने तथा शासकीय कार्यों में नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से Artificial Intelligence (AI) संबंधी प्रशिक्षण सत्र का आयोजन कॉन्फ्रेंस हॉल में किया गया।

प्रशिक्षण सत्र का आयोजन अवर सचिव श्री अनुभव शर्मा के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान अधिकारियों एवं कर्मचारियों को AI की कार्यप्रणाली, उपयोगिता तथा विभिन्न क्षेत्रों में इसके प्रभावी इस्तेमाल से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गईं।

सत्र में AI के माध्यम से कार्यों को अधिक सरल, प्रभावी एवं समयबद्ध बनाने के तरीकों पर प्रकाश डाला गया। उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने प्रशिक्षण में उत्साहपूर्वक भाग लेकर आधुनिक तकनीक की उपयोगी जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम का उद्देश्य शासकीय कार्यप्रणाली में नई तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देना तथा अधिकारियों-कर्मचारियों को डिजिटल दक्षताओं से सशक्त बनाना रहा।

इस अवसर पर राज्यपाल के विधिक सलाहकार श्रीमती सत्यभामा अजय दुबे, उप सचिव सुश्री निधि साहू, श्री सुधीर सुलतानिया, श्री लक्षित त्रिलोक सेठिया श्री अनूप अग्रवाल एवं लोकभवन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

कृषि विज्ञान केंद्र सुरगी में भव्य जिला स्तरीय किसान मेला व कार्यशाला संपन्न…

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डॉ. रमन सिंह, सांसद संतोष पांडेय व कलेक्टर की मौजूदगी में हुआ बीज वितरण’

राजनांदगांव: जिला प्रशासन राजनांदगांव, उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी विभाग तथा कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) सुरगी के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को एक्सटेंशन रिफॉर्म्स (आत्मा) योजना के अंतर्गत जिला स्तरीय ‘किसान मेला सह प्रदर्शनी’, ‘जैविक कृषि कार्यशाला’ एवं ‘कृषक संगोष्ठी’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस वृहद शासकीय कार्यक्रम में क्षेत्र के वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों सहित भाजपा किसान मोर्चा के पदाधिकारियों और सैकड़ों प्रगतिशील किसानों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष व स्थानीय विधायक डॉ. रमन सिंह, क्षेत्र के सांसद संतोष पांडेय, प्रदेश किसान मोर्चा अध्यक्ष आलोक सिंह ठाकुर, भाजपा जिला अध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत, किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष दादूराम सोनकर एवं कलेक्टर जितेंद्र यादव द्वारा छत्तीसगढ़ महतारी व भारत माता के तैलचित्र पर दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण कर किया गया।
जैविक खेती को अपनाकर लागत कम करें किसान: डॉ. रमन सिंह

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. रमन सिंह ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की साय सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता किसानों को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने उपस्थित किसान भाइयों से सीधा संवाद करते हुए पारंपरिक खेती के स्थान पर आधुनिक कृषि तकनीकों और जैविक खेती को अपनाने का आग्रह किया। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने आत्मा योजना के तहत किसान साथियों को उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराए। साथ ही डॉ. रमन सिंह व सांसद संतोष पांडेय ने प्रदर्शनी में लगाए गए विभिन्न स्टालों का अवलोकन कर जैविक खाद्य पदार्थों व उन्नत कृषि उत्पादों की सराहना की।

कलेक्टर जितेंद्र यादव के कुशल निर्देशन में हुआ आयोजन

प्रशासनिक स्तर पर कार्यक्रम का कुशल संयोजन करते हुए जिला कलेक्टर जितेन्द्र यादव एवं उद्यानिकी विभाग की टीम ने जिले में संचालित कृषि व उद्यानिकी कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। कार्यशाला में कृषि वैज्ञानिकों द्वारा उपस्थित कृषकों को जैविक खाद तैयार करने, नवाचारों, लागत में कमी लाने और फसलों के बेहतर विपणन के संबंध में व्यावहारिक व तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया।
वरिष्ठ जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी रहे उपस्थित

इस अवसर पर मंच पर विधायक प्रतिनिधि संतोष अग्रवाल, पूर्व विधायक विनोद खांडेकर,  सहित जिला प्रशासन के कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के आला अधिकारी, किसान मोर्चा के विभिन्न मंडलों के अध्यक्ष व पदाधिकारी और भारी संख्या में ग्रामीण व किसान भाई उपस्थित रहे।

यह जानकारी भाजपा किसान मोर्चा के जिला मीडिया प्रभारी सतीश यादव द्वारा दी गई।

 Re-NEET: 21 जून, 2026 को होने वाली NEET की दोबारा परीक्षा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम…

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मई में NEET परीक्षा के दौरान पेपर लीक होने से NTA और सरकार को पूरे देश में काफी शर्मिंदगी उठानी पड़ी थी। उस अनुभव से सीखते हुए, केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) इस बार बहुत सावधानी बरत रही हैं। 21 जून, 2026 को होने वाली NEET की दोबारा परीक्षा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं—ऐसे इंतजाम जो भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं के इतिहास में पहले कभी नहीं देखे गए।

ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, परीक्षा से सिर्फ़ पांच दिन पहले ही सीलबंद प्रश्न पत्रों को राज्यों की राजधानियों और अहम केंद्रों तक पहुंचाने का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया। हालांकि, इस बार पेपर आम कूरियर सर्विस, प्राइवेट वेंडर या सामान्य डाक नेटवर्क के भरोसे नहीं छोड़े जा रहे हैं—ये वही माध्यम थे जिनसे पहले पेपर लीक होने का सबसे ज़्यादा खतरा रहता था। आइए जानते हैं कि पेपर की सुरक्षा कौन कर रहा है और राज्यों में पहुंचने के बाद उन्हें कहां रखा जा रहा है।

IAF के C-17 ग्लोबमास्टर और Mi-17 हेलीकॉप्टर तैनात

इस बार सुरक्षा की पहली और सबसे मज़बूत परत आसमान में बनाई गई है। रक्षा और शिक्षा मंत्रालयों के बीच हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक के बाद, परीक्षा सामग्री को पहुंचाने के लिए पहली बार भारतीय वायु सेना (IAF) को तैनात किया गया है। गोपनीय प्रश्न पत्रों वाले पैकेट सीधे IAF के विशाल C-17 ग्लोबमास्टर विमान और Mi-17 हेलीकॉप्टर के ज़रिए देश भर के 18 अहम केंद्रों (जैसे पटना, जयपुर आदि) तक पहुंचाए जा रहे हैं।

सुरक्षा की कड़ी (Chain of Custody)

इस मिशन में वायु सेना को शामिल करने का एकमात्र मकसद उन तमाम ‘हैंडलिंग पॉइंट्स’ या बिचौलियों को पूरी तरह खत्म करना है जो पहले प्रिंटिंग प्रेस और मुख्य राज्य केंद्रों के बीच होते थे। रास्ते में किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति के लिए इस ‘VIP कार्गो’ तक पहुंचना नामुमकिन है।

कमांडो और अर्धसैनिक बलों की सुरक्षा

जैसे ही वायु सेना के विमान इन सीलबंद बक्सों के साथ राज्यों की राजधानियों या तय एयरबेस पर उतरते हैं, देश के सबसे भरोसेमंद सुरक्षा बल ज़मीनी सुरक्षा का जिम्मा संभाल लेते हैं। सुरक्षा का एक बहु-स्तरीय घेरा बनाया गया है; CRPF (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) और CISF (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) के जवान इन पेपरों को हवाई अड्डों और एयरबेस से मुख्य स्टोरेज सेंटर्स तक ले जाते समय अपनी निगरानी में रखते हैं। आम सरकारी दफ़्तरों के कमरों में रखने के बजाय, इन प्रश्न-पत्रों को हाई-टेक मज़बूत कमरों और अभेद्य तिजोरियों में लॉक करके रखा जा रहा है—जिनकी सुरक्षा 24/7 मिलिट्री या पैरामिलिट्री फ़ोर्स करती है। यह नया सुरक्षा सिस्टम सिर्फ़ पेपर को सेंटर्स तक पहुँचाने तक ही सीमित नहीं है; बल्कि 21 जून को जब छात्र परीक्षा हॉल में बैठेंगे, तब भी सुरक्षा का माहौल किसी मिलिट्री छावनी जैसा होगा।

इसके लिए, देश भर में परीक्षा केंद्रों, ट्रांसपोर्टेशन हब और स्टोरेज यूनिट्स पर लगभग 5,00,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए जा रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सर्विलांस का इस्तेमाल करते हुए, सभी सेंटर्स पर लगे 1,00,000 से ज़्यादा CCTV कैमरों को सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसियों (IB और CBI) के कंट्रोल रूम से जोड़ा जा रहा है, ताकि AI-इनेबल्ड फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी की मदद से रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सके।

राबड़ी देवी ने आवास खाली करने को एक महीने का समय मांगा…

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बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और बिहार विधान परिषद में नेता विपक्ष राबड़ी देवी ने प्रशासन द्वारा दी गई 15 दिन की समय सीमा खत्म होने के बाद पटना में 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने के लिए एक महीने का समय और मांगा है।

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और बिहार विधान परिषद में नेता विपक्ष राबड़ी देवी ने प्रशासन द्वारा दी गई 15 दिन की समय सीमा खत्म होने के बाद पटना में 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने के लिए एक महीने का समय और मांगा है।

अल्टीमेटम की समय सीमा खत्म होने के बाद पूर्व सीएम राबड़ी देवी ने अधिकारियों को एक आधिकारिक पत्र सौंपकर और समय मांगा।

अपनी अर्जी में पूर्व सीएम राबड़ी देवी ने और समय मांगने की मुख्य वजह अपने पति लालू प्रसाद यादव की सेहत का हवाला दिया है।

राबड़ी देवी के पत्र के अनुसार, डॉक्टरों ने सलाह दी है कि लालू प्रसाद यादव को परिवार के दूसरे सदस्यों से अलग रखा जाए क्योंकि उन्हें संक्रमण का खतरा बहुत ज्यादा है।

राबड़ी देवी ने बताया कि मेडिकल सलाह पर 10 सर्कुलर रोड वाले घर में उनके लिए खास तौर पर एक अलग कमरे का इंतजाम किया गया था।

उन्होंने कहा कि परिवार तभी दूसरी जगह जाएगा जब नए अलॉट किए गए घर यानी 39 हार्डिंग रोड बंगले में भी वैसे ही इंतजाम हो जाएंगे।

लालू प्रसाद यादव पिछले कुछ सालों से सेहत से जुड़ी कई दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। दिसंबर 2022 में सिंगापुर में उनका किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था, जिसमें उनकी बेटी रोहिणी आचार्य ने किडनी डोनेट की थी।

उन्होंने 2014 में मुंबई के एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट में ओपन हार्ट सर्जरी भी करवाई थी और खबरों के मुताबिक 2024 में उसी अस्पताल में उनकी एंजियोप्लास्टी भी हुई थी।

हाल ही में, वे मेडिकल चेक-अप के लिए फिर से सिंगापुर गए थे।

बिहार सरकार ने राबड़ी देवी को बिहार विधान परिषद में विपक्ष की नेता होने के नाते 39 हार्डिंग रोड पर एक बंगला अलॉट किया है।

इस बीच, खबरों के मुताबिक 10 सर्कुलर रोड वाला घर नंद किशोर राम को अलॉट किया गया है।

शुरू में राबड़ी देवी के बंगला खाली करने से इनकार करने के बाद, पटना प्रशासन ने 31 मई को उन्हें आखिरी 15 दिन का नोटिस जारी करके प्रॉपर्टी का कब्जा सौंपने का निर्देश दिया था। वह समय-सीमा अब खत्म हो चुकी है।

10 सर्कुलर रोड वाला घर लंबे समय से लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के परिवार से जुड़ा रहा है। यह बंगला मूल रूप से 2005 में नीतीश कुमार सरकार ने राबड़ी देवी को पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते अलॉट किया था।

हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि पूर्व मुख्यमंत्रियों से बंगला वापस ले लिया जाए लेकिन बाद में बिहार सरकार ने विधान परिषद में विपक्ष की नेता के तौर पर राबड़ी देवी को इसे फिर से अलॉट कर दिया था।

इस घर में लालू प्रसाद यादव समेत उनके परिवार के कई सदस्य अभी भी रहते हैं।

सत्ता परिवर्तन होते ही टीएमसी टूट गई, रिजु दत्ता ने बताई वजह…

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टीएमसी से निष्कासित नेता रिजु दत्ता ने पार्टी के आंतरिक विवादों, कुणाल घोष पर अंडे फेंकने और अभिषेक बनर्जी से सीआईडी और ईडी द्वारा की गई पूछताछ पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए दावा किया कि पहले भी सांसदों ने कल्याण बनर्जी के व्यवहार को लेकर शिकायत की थी, लेकिन ममता और अभिषेक बनर्जी ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसी का परिणाम है कि सत्ता परिवर्तन होते ही टीएमसी टूट गई।

टीएमसी से निष्कासित नेता रिजु दत्ता ने पार्टी के आंतरिक विवादों, कुणाल घोष पर अंडे फेंकने और अभिषेक बनर्जी से सीआईडी ​​और ईडी द्वारा की गई पूछताछ पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए दावा किया कि पहले भी सांसदों ने कल्याण बनर्जी के व्यवहार को लेकर शिकायत की थी, लेकिन ममता और अभिषेक बनर्जी ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसी का परिणाम है कि सत्ता परिवर्तन होते ही टीएमसी टूट गई।

“सांसद कल्याण बनर्जी के बर्ताव को लेकर पहले भी कई बार ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी से सांसदों ने शिकायत की थी, लेकिन वह पार्टी की बात थी तो अंदर ही रह गई। अब जब सत्ता परिवर्तन हो गया है तो काकोली घोष दस्तीदार के पास पूरा अधिकार है कि वह लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से शिकायत करें। मैंने दस्तीदार का पत्र पढ़ा है और एक्स पर पोस्ट भी किया है। पत्र में कल्याण बनर्जी के भाषा और दुर्व्यवहार को लेकर शिकायत की गई है। इसके साथ ही संसद से बर्खास्त करने की अपील की है। अब स्पीकर के पास मामला है, वही जांच करेंगे और फैसला लेंगे। जांच में अगर कल्याण बनर्जी दोषी पाए जाते हैं तो लोकसभा स्पीकर कानून के अनुसार सजा तय करेंगे।”

ममता बनर्जी के घर के सामने कुणाल घोष को अंडे मारने पर रिजु दत्ता ने कहा, “मैं इस घटना की कड़ी शब्दों में निंदा करता हूं। पूर्व मुख्यमंत्री के घर के सामने विधायक द्वारा मीडिया से बात करते समय हमला किया जाना लोकतांत्रिक राजनीति का हिस्सा नहीं हो सकता। अगर ऐसा होता रहा तो ठीक नहीं है। हालांकि मेरा विश्वास है कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष इस कल्चर का समर्थन नहीं करते हैं। इस तरह के हमले बंद होने चाहिए, अन्यथा आने वाले दिनों में खराब परिणाम देखने को मिलेंगे। नेताओं पर हमले करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”

अभिषेक बनर्जी से सीआईडी ​​और ईडी द्वारा की गई पूछताछ पर दत्ता ने कहा, “एजेंसी अपना काम कर रही है और अभिषेक बनर्जी जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। लगातार वह पूछताछ का सामना कर रहे हैं और अपना पक्ष रख रहे हैं। अगर एजेंसी के पास सबूत है तो जल्द से जल्द अभिषेक बनर्जी पर कार्रवाई करनी चाहिए, नहीं तो जनता एजेंसी पर भरोसा करना छोड़ देगी और कहेगी कि राजनीति के तहत ये सब हो रहा था।”

बेरोजगारी दर एक बार फिर बढ़ गई है, और मई में यह 5.5 प्रतिशत हो गई है…

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भारत के आंकड़े चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं। बेरोजगारी दर एक बार फिर बढ़ गई है और मई में यह 5.5 प्रतिशत हो गई है। अप्रैल में यह दर 5.2 प्रतिशत थी जो बढ़कर 5.5 प्रतिशत हो गई—यह पिछले 11 महीनों में सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। हैरानी की बात यह है कि जहां शहरी इलाकों में थोड़ी सुधार देखी गई है, वहीं ग्रामीण इलाकों में स्थिति तेजी से बिगड़ रही है। गांवों में लोगों को काम नहीं मिल पा रहा है, जिससे नौकरी के बाजार में संकट पैदा हो गया है।

**ग्रामीण इलाकों में बढ़ती बेरोजगारी**

ग्रामीण बेरोजगारी दर अप्रैल में 4.6 प्रतिशत से बढ़कर 5.1 प्रतिशत हो गई। इसके विपरीत, शहरी बेरोजगारी दर में गिरावट आई; मई में यह आंकड़ा 6.6 प्रतिशत से घटकर 6.4 प्रतिशत हो गया। यह साफ तौर पर शहरी इलाकों में नौकरी के बेहतर मौकों की ओर इशारा करता है। गौरतलब है कि बेरोजगारी बढ़ने का यह लगातार चौथा महीना है और यह 11 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।

**कामकाजी आबादी में गिरावट**

सिर्फ बेरोजगारी ही नहीं बढ़ी है; कामकाजी आबादी का अनुपात भी घटा है। मई में श्रम बल भागीदारी दर (लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट) अप्रैल के 55 प्रतिशत से घटकर 54.4 प्रतिशत हो गई। इसी तरह, वर्कर पॉपुलेशन रेश्यो (WPR) 52.2 प्रतिशत से घटकर 51.4 प्रतिशत हो गया। इसका मतलब है कि श्रम बाजार में आने वाले लोगों की संख्या की तुलना में नौकरियां पैदा होने की रफ्तार धीमी है।

**महिलाओं और युवाओं के लिए चुनौतियां**

हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के लिए रोजगार के सीमित अवसर हैं, जबकि युवाओं में बेरोजगारी को लेकर चिंता बनी हुई है। यह मुद्दा सिर्फ जेंडर (लिंग) तक सीमित नहीं है; बेरोजगारी देश की कुल आर्थिक सेहत के लिए खतरा पैदा करती है। रोजगार बढ़ने से आय बढ़ती है, जिससे खपत और आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं। इसके विपरीत, बेरोजगारी बढ़ने से उपभोक्ताओं का खर्च कम हो सकता है और आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी हो सकती है।

भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार, वैगन-आर बायो-फ्लेक्स लॉन्च….

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मारुति सुजुकी ने सोमवार को भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार, वैगन-आर बायो-फ्लेक्स लॉन्च की। यह E85 फ्यूल (85% इथेनॉल के साथ मिला हुआ पेट्रोल) पर चलती है। कार की शुरुआती कीमत ₹7.24 लाख है और यह दो वेरिएंट में उपलब्ध है। E85 वैगन-आर स्टैंडर्ड मॉडल से ₹86,000 ज़्यादा महंगी है। टूर H3 (कमर्शियल सेगमेंट में उपलब्ध) की तुलना में, इसकी कीमत ₹1.35 लाख से ₹2.25 लाख ज़्यादा है; वैगन-आर टूर H3 की कीमत ₹4.99 लाख और ₹5.89 लाख के बीच है। अभी, इसे सिर्फ़ कमर्शियल सेक्टर के खरीदार – जैसे टैक्सी और फ्लीट ऑपरेटर – ही खरीद सकते हैं।

मारुति वैगन-आर बायो-फ्लेक्स स्टैंडर्ड मॉडल से ₹86,000 ज़्यादा महंगी है

वेरिएंट | वैगन-आर बायो-फ्लेक्स | वैगन-आर ZXi+ MT | अंतर
— | — | — | —
नॉन-मेटैलिक पेंट | ₹7.24 लाख | ₹6.38 लाख | + ₹86,000
मेटैलिक पेंट | ₹7.24 लाख | ₹6.38 लाख | + ₹86,000

नए फ्यूल के लिए कई पार्ट्स बदले गए

हालांकि कार का एक्सटीरियर डिज़ाइन रेगुलर वैगन-आर जैसा ही है, लेकिन इंजन और कंपोनेंट्स में टेक्निकल बदलाव किए गए हैं ताकि यह E85 फ्यूल पर चल सके। कंपनी ने इसमें अपग्रेडेड फ्यूल इंजेक्टर, एक नया फ्यूल पंप, नई फ्यूल लाइन, एक रीकैलिब्रेटेड ECU और एक स्पेशल इथेनॉल सेंसर लगाया है।

फ्लेक्स-फ्यूल कारों के बारे में 5 पॉइंट्स में सब कुछ जानें…

  1. परफॉर्मेंस: 1.2-लीटर फ्लेक्स-फ्यूल पेट्रोल इंजन

फ्लेक्स-फ्यूल वैगन-आर में मौजूदा 1.2-लीटर (1200 cc) इंजन का रिवाइज्ड वर्जन है। हालांकि कंपनी ने ऑफिशियली परफॉर्मेंस के आंकड़े नहीं बताए हैं, लेकिन रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह रेगुलर पेट्रोल इंजन से थोड़ी ज़्यादा पावर और टॉर्क देता है। फिलहाल, कार में 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स होगा।

कंपनी ने अभी नए मॉडल के माइलेज के आंकड़े नहीं बताए हैं। हालांकि, हाल के फ्यूल टेस्ट से पता चलता है कि कार को E85 फ्यूल पर चलाने से माइलेज लगभग 24% कम हो सकता है। मैनुअल ट्रांसमिशन वाली स्टैंडर्ड पेट्रोल वैगन-आर 23.56 km प्रति लीटर का माइलेज देती है।

  1. एक्सटीरियर: रेगुलर मॉडल जैसा बॉक्सी लुक, ‘फ्लेक्स फ्यूल’ बैजिंग

नई वैगन-आर फ्लेक्स फ्यूल का ओवरऑल डिज़ाइन स्टैंडर्ड मॉडल जैसा ही है, हालांकि इसे अलग पहचान देने के लिए कुछ कॉस्मेटिक बदलाव किए गए हैं। इस स्पेशल वेरिएंट को रेगुलर मॉडल से अलग दिखाने के लिए, कंपनी ने बॉडी पर अलग-अलग जगहों पर ‘फ्लेक्स फ्यूल’ ग्राफिक्स लगाए हैं। टेलगेट पर एक छोटा ‘फ्लेक्स फ्यूल’ क्रोम बैज भी लगाया गया है।

फ्रंट प्रोफाइल: फ्रंट में बड़े, चौकोर हैलोजन हेडलैंप और चौड़ा बोनट है। हेडलैंप के बीच एक हॉरिजॉन्टल ग्रिल है, जिसमें सिंगल क्रोम स्लैट और हनीकॉम्ब डिटेलिंग है, जो इसे और मॉडर्न लुक देती है। फ्रंट बंपर में एक बड़ा एयर डैम है, जिसमें ब्लैक-टिंटेड फॉग लैंप हैं।

साइड प्रोफाइल: साइड से देखने पर, कार का ट्रेडिशनल ‘बॉक्सी और टॉल-बॉय’ लुक बना रहता है। बड़ी खिड़कियां केबिन को बड़ा और हवादार महसूस कराती हैं। इसमें 14-इंच के एलॉय व्हील हैं। इसके अलावा, C-पिलर पर ब्लैक इंसर्ट एक ट्रेंडी ‘फ्लोटिंग रूफ’ इफ़ेक्ट बनाता है।

रियर प्रोफाइल: कार का पिछला हिस्सा काफी फ्लैट और स्मूद है। इसमें बड़े, सिग्नेचर-स्टाइल वर्टिकल टेल लैंप हैं। नंबर प्लेट लगाने के लिए टेलगेट पर एक खास रिसेस (कास्टिंग) है, जिसके ऊपर क्रोम गार्निश स्ट्रिप है जो इसे प्रीमियम टच देती है। इसके अलावा, रियर बंपर में एक ब्लैक इंसर्ट है।

  1. इंटीरियर: डुअल-टोन थीम वाला मॉडर्न केबिन

एक्सटीरियर की तरह, नई वैगनआर फ्लेक्स फ्यूल का इंटीरियर लेआउट भी स्टैंडर्ड मॉडल जैसा ही है। हालांकि, केबिन में कई खास फीचर्स हैं जो प्रैक्टिकैलिटी और आराम को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

E20 पेट्रोल और इंजन के बारे में नई जानकारी क्या कहती है? वाहन मालिकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

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देश भर में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ रहा है। सरकार पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाकर ईंधन के आयात को कम करने और प्रदूषण पर रोक लगाने की दिशा में काम कर रही है। हालाँकि, इससे लाखों वाहन मालिकों के मन में एक अहम सवाल उठा है: क्या E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से इंजन को नुकसान पहुँच सकता है, और अगर ऐसा होता है, तो क्या बीमा कंपनियाँ क्लेम देने से इनकार कर सकती हैं? इसे लेकर काफी उलझन है, खासकर पुराने वाहनों के मालिकों के बीच। हाल ही में एक अहम जानकारी सामने आई है जिसने कई लोगों की चिंताओं को दूर किया है।

जानकारी के मुताबिक, सिर्फ़ इसलिए बीमा क्लेम को अपने-आप खारिज नहीं किया जाएगा कि E20 पेट्रोल का इस्तेमाल किया गया था। दूसरे शब्दों में, E20 ईंधन के इस्तेमाल को क्लेम खारिज करने का सीधा आधार नहीं माना जाएगा। हालाँकि, भविष्य की दिक्कतों से बचने के लिए वाहन मालिकों को कुछ अहम बातों का ध्यान रखना चाहिए।

E20 पेट्रोल और इंजन के बारे में नई जानकारी क्या कहती है?

E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। नई पीढ़ी के कई वाहन पहले से ही E20-कम्पैटिबल टेक्नोलॉजी के साथ बाज़ार में आ रहे हैं। वहीं, कुछ पुराने वाहनों को लेकर चिंताएँ बनी हुई हैं। ICICI लोम्बार्ड ने हाल ही में साफ़ किया है कि सिर्फ़ E20 पेट्रोल का इस्तेमाल बीमा क्लेम को खारिज करने का आधार नहीं होगा। अगर वाहन में कोई समस्या आती है, तो उसकी जाँच स्टैंडर्ड प्रक्रियाओं के तहत की जाएगी।

इसका मतलब है कि हर मामले की जाँच उसकी खास परिस्थितियों के आधार पर की जाएगी। हालाँकि, अगर निर्माता द्वारा सुझाए गए ईंधन दिशानिर्देशों का गंभीर उल्लंघन होता है, या किसी अन्य तकनीकी कारण से नुकसान होता है, तो जाँच के बाद अलग फ़ैसला लिया जा सकता है। इसलिए, वाहन मालिकों को हमेशा वाहन निर्माता की सलाह का पालन करना चाहिए।

वाहन मालिकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

जानकारों का मानना ​​है कि अगर आपका वाहन E20-कम्पैटिबल है, तो E20 पेट्रोल के इस्तेमाल को लेकर चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है। हालाँकि, पुराने वाहनों के मालिकों को अपनी कार या बाइक के यूज़र मैनुअल में दिए गए निर्देशों को ज़रूर देखना चाहिए। इंजन को सुरक्षित रखने के लिए नियमित सर्विसिंग, अच्छी क्वालिटी के ईंधन का इस्तेमाल और समय पर रखरखाव ज़रूरी है। बीमा कंपनियाँ आमतौर पर दुर्घटना या नुकसान के कारणों की जाँच करती हैं और क्लेम पर फ़ैसला सिर्फ़ इस्तेमाल किए गए ईंधन के प्रकार के आधार पर नहीं लेती हैं।

यही वजह है कि E20 पेट्रोल को लेकर फैली कई गलतफहमियाँ धीरे-धीरे दूर हो रही हैं। सरकार इथेनॉल-मिश्रित ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है और वाहन निर्माता अपने नए मॉडल ऐसे बना रहे हैं जो इसके अनुकूल हों। इस संबंध में, वाहन मालिकों के लिए यह ज़रूरी है कि वे अपने वाहन की तकनीकी विशेषताओं को समझें और निर्माता के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही ईंधन का इस्तेमाल करें। ऐसा करने से इंजन सुरक्षित रहता है और संभावित विवादों से बचा जा सकता है।