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EOW: निलंबित राज्य सेवा अधिकारी सौम्या चौरसिया पर अवैध वसूली से खरीदी गईं 16 संपत्तियां…

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रायपुर छत्तीसगढ़ की निलंबित राज्य सेवा अधिकारी सौम्या चौरसिया पर ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) ने शिकंजा कस दिया है।

रायपुर छत्तीसगढ़ की निलंबित राज्य सेवा अधिकारी सौम्या चौरसिया पर ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) ने शिकंजा कस दिया है। ईओडब्ल्यू ने विशेष न्यायालय में आवेदन लगाकर सौम्या की आय से अधिक 16 चल-अचल संपत्तियों को अटैच करने की अनुमति मांगी है।

अवैध वसूली से खरीदी गईं 16 संपत्तियां

आवेदन में ईओडब्ल्यू ने बताया कि सौम्या ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध वसूली और कमीशनखोरी से करोड़ों की राशि अर्जित की। इन्हीं पैसों से उन्होंने अपने परिजनों और अन्य लोगों के नाम पर कुल 45 संपत्तियां खरीदीं। इनमें से भिलाई-दुर्ग जिले की संपत्तियों को चिन्हांकित कर ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) 29 अगस्त को पहले ही अटैच कर चुका है। अब बाकी 16 संपत्तियों को भी अटैच करने की अनुमति मांगी गई है।

ईओडब्ल्यू ने लगाई संपत्ति अटैच करने की अर्जी

ईओडब्ल्यू का कहना है कि जांच में स्पष्ट हुआ है कि सौम्या ने अपने कार्यकाल के दौरान आय से कई गुना अधिक संपत्तियां खरीदी हैं। इन संपत्तियों के लिए प्रत्यक्ष रूप से कोई वैध आय स्रोत नहीं मिला है। दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने इन आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि जिन संपत्तियों को सौम्या की बताई जा रही है, वे परिजनों द्वारा खरीदी गई हैं और इसका दस्तावेजी साक्ष्य भी मौजूद है। बचाव पक्ष ने न्यायालय से अतिरिक्त समय की मांग करते हुए 2 पन्नों का आवेदन प्रस्तुत किया।

विशेष न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बचाव पक्ष को 22 सितंबर तक अपना पक्ष रखने का समय दिया है। इसके बाद ही इन संपत्तियों को अटैच करने पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। बता दें कि सौम्या चौरसिया को कोयला घोटाले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद हाल ही में रायपुर जेल से रिहाई मिली है।

बहुचर्चित शराब घोटाले में आर्थिक अपराध विंग (EOW) ने बड़ी कार्रवाई…

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छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में आर्थिक अपराध विंग (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रिटायर्ड आईएएस अधिकारी और पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को गिरफ्तार कर लिया है.

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में आर्थिक अपराध विंग (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रिटायर्ड आईएएस अधिकारी व पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को गिरफ्तार कर लिया है. यह मामला कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का है, जब निरंजन दास आबकारी आयुक्त के रूप में कार्यरत थे. EOW की जांच में सामने आया है कि शराब घोटाले में उनकी अहम भूमिका रही है. इस प्रकरण में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा पहले से ही जेल में हैं.

घोटाले का नेटवर्क

EOW के अनुसार, निरंजन दास ने पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, विशेष सचिव आबकारी अरुणपति त्रिपाठी, कारोबारी अनवर ढेबर (पूर्व मेयर एजाज ढेबर के भाई) और अन्य के साथ मिलकर एक शराब सिंडिकेट बनाया था. इस सिंडिकेट का काम सरकारी शराब दुकानों में कमीशन तय करना था. इसके अलावा डिस्टलरियों से अतिरिक्त शराब बनवाना, विदेशी ब्रांड की अवैध सप्लाई से वसूली करना और डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर शराब बेचना था.

3200 करोड़ का घोटाला

EOW ने बताया कि यह घोटाला पहले बताए गए 2200 करोड़ का नहीं, बल्कि लगभग 3200 करोड़ रुपये का है. रिपोर्ट के मुताबिक, हर महीने करीब 400 ट्रक शराब की अवैध सप्लाई की जाती थी. इसके चलते रिकॉर्ड और दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुईं.

बड़े नामों का हो सकता है खुलासा

जांच एजेंसी का मानना है कि इस मामले में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं. अदालत ने इसकी गंभीरता को देखते हुए EOW को जांच तेज करने के निर्देश दिए हैं. छत्तीसगढ़ का यह शराब घोटाला अब तक का सबसे बड़ा माना जा रहा है और लगातार कई बड़े अधिकारी और नेता जांच के दायरे में है.

IAS अफसर अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला की अग्रिम जमानत याचिका रद्द

उधर छत्तीसगढ़ घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने IAS अफसर अनिल टुटेजा  और आलोक शुक्ला की अग्रिम जमानत याचिका रद्द कर दी. दोनों को ईडी (ED) की चार हफ्ते की कस्टडी में भेज दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह अग्रिम जमानत देने योग्य मामला नहीं था, दोनों को एक हफ्ते के भीतर सरेंडर करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही दोनों को ED जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है.

हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ED हिरासत पूरी होने के बाद, अगर किसी अन्य मामले में जरूरत न हो तो उन्हें ट्रायल कोर्ट द्वारा निर्धारित शर्तों पर रिहा किया जाए.

हालांकि बेंच ने आदेश दिया कि दोनों अधिकारियों को आदेश की प्रति मिलने के एक सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा. सरेंडर के बाद उन्हें चार सप्ताह तक ED की हिरासत में रखा जाएगा, ताकि एजेंसी जांच पूरी कर सके और अपनी शिकायत दाखिल कर सके.

 

”कथित शराब सिंडिकेट मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल पर करोड़ों के शराब घोटाले का आरोप ”

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छत्तीसगढ़ में कथित शराब सिंडिकेट मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को आरोपी बनाया है. ईडी का आरोप है कि चैतन्य बघेल ने कथित तौर पर एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की रकम संभाली और अपने व्यवसायिक उद्यमों के लिए इसका उपयोग किया.

छत्तीसगढ़ में “बिग बॉस” चकाचौंध भरा टीवी शो नहीं, जिसे बॉलीवुड स्टार सलमान खान होस्ट करते हों, बल्कि यहां का “बिग बॉस” कथित तौर पर एक विशाल शराब सिंडिकेट था और इसका सूत्रधार कोई और नहीं बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल थे. अगर प्रवर्तन निदेशालय की मानें तो जो कुछ सामने आया वह रियलिटी शो नहीं, बल्कि राजनीतिक अंधेरे में बुना गया हजारों करोड़ का घोटाला था.

चैतन्य बघेल इस समय प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत में हैं और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू, EOW) भी उन्हें अपनी कस्टडी में लेने की तैयारी कर रही है. 15 सितंबर को ईडी ने विशेष अदालत में 5वां पूरक आरोपपत्र दाखिल किया. इस चार्जशीट में खुलासा हुआ कि चैतन्य ने अकेले ही हजार करोड़ रुपये से अधिक की रकम संभाली.

ग्रुप के जरिए लेनदेन, चैतन्य बघेल थे ‘बिट्टू’

जांच में कथित तौर पर एक वॉट्सऐप ग्रुप का खुलासा हुआ, जिसका नाम ही “बिग बॉस” था. पूरा सिंडिकेट इसी ग्रुप से चलता था. इस ग्रुप के जरिये सैकड़ों करोड़ के वित्तीय लेन-देन कथित तौर पर तय किए जाते थे. इसमें चैतन्य बघेल, जिन्हें “बिट्टू” नाम से सेव किया गया था, कांग्रेस नेता अनवर ढेबर, रिटायर्ड आईएएस अनिल टुटेजा, आबकारी अधिकारी सौम्या चौरसिया और व्यापारी पुष्पक शामिल थे.

ग्रुप में बनती थी रणनीति

आरोपपत्र में इन चैट्स के स्क्रीनशॉट भी जोड़े गए हैं, जिसमें पूरे तफसील से दर्ज है कि “बिट्टू” ने कब किसे फोन किया, कितनी देर बात हुई और किसे कितना पैसा कहां भेजना है. यह ग्रुप राज्य की शराब व्यवस्था का समानांतर कमांड सेंटर बन गया था, जहां नकद के रास्ते, नकली होलोग्राम और कमीशन बांटने की रणनीति तय होती थी. इसके ग्रुप के कई चैट्स एनडीटीवी के पास मौजूद हैं.

अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा और सौम्या चौरसिया के मोबाइल फोन से मिले साक्ष्यों ने केस को और पुख्ता किया. अनवर के फोन में चैतन्य का नंबर “बिट्टू” के नाम से सेव था. चैट्स में भारी नकद लेन-देन, नकली होलोग्राम बनाने और काले धन के बंटवारे की बातें दर्ज थीं.

अकेले चैतन्य ने कमाए 200 करोड़, 850 करोड़ कांग्रेस को भेजे

ईडी का कहना है कि चैतन्य ने अकेले कम से कम 200 करोड़ रुपये कमाए, जबकि 850 करोड़ रुपये तत्कालीन कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को भेजे गए. एजेंसी का दावा है कि यह पूरा ऑपरेशन एक सैन्य अनुशासन की तरह चलता था, जिसमें तय होता था कि किसे पैसा मिलेगा, कौन-सा ठेकेदार भुगतान पाएगा और कितनी रकम सफेद की जाएगी.

भूपेश बघेल के करीबी ने किया था सनसनीखेज खुलासा

सबसे सनसनीखेज बयान शराब कारोबारी लक्ष्मीनारायण उर्फ पप्पू बंसल का आया, जो भूपेश बघेल के करीबी माने जाते हैं. पूछताछ में बंसल ने माना कि उन्होंने और चैतन्य ने मिलकर एक हजार करोड़ रुपये से अधिक नकद को संभाला. बंसल ने खुलासा किया कि यह पैसा अनवर ढेबर से दीपेन चावड़ा और फिर कांग्रेस नेताओं रामगोपाल अग्रवाल और केके श्रीवास्तव तक पहुंचाया गया. सिर्फ तीन महीने में ही बंसल ने 136 करोड़ रुपये को इधर से उधर किया. ईडी अधिकारियों का कहना है कि बंसल की गवाही बताती है कि सिंडिकेट किस तरह राजनीतिक ढांचे में गहराई से पैठ बना चुका था.

रियल एस्टेट में लगाया पैसा, काला धन छिपाने की थी रणनीति

चार्जशीट यह भी दिखाती है कि घोटाले का पैसा किस तरह रियल एस्टेट में लगाया गया. चैतन्य की परियोजनाएं विठ्ठल ग्रीन और बघेल डेवलपर्स एंड एसोसिएट्स कथित तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग का अड्डा थीं. आधिकारिक रिकॉर्ड में 7.14 करोड़ रुपये खर्च दिखाए गए, जबकि जांचकर्ताओं के अनुसार, असली लागत 13 से 15 करोड़ थी, जिसमें से 4.2 करोड़ नकद ठेकेदारों को दिए गए. 2020 में एक ही दिन में शराब कारोबारी त्रिलोक सिंह ढिल्लों के कर्मचारियों ने विठ्ठल ग्रीन में 19 फ्लैट खरीदे. ईडी के मुताबिक यह काले धन को छिपाने की रणनीति थी.

भिलाई के नामी ज्वैलर्स भी शामिल

भिलाई के नामी ज्वैलर्स के नाम भी सामने आए. आरोप है कि उन्होंने बघेल की कंपनियों को 5 करोड़ रुपये “ऋण” दिया और बाद में मात्र 80 लाख रुपये में छह जमीनें खरीदी गईं. ईडी ने इसे क्लासिक मनी लॉन्ड्रिंग का उदाहरण बताया- नकद अंदर, ज़मीन बाहर, सब कुछ वैध व्यापार के नाम पर.

चैतन्य के वकील ने क्या कहा

हालांकि चैतन्य के वकील फैसल रिजवी ने इस केस को राजनीति से प्रेरित बताया है. उनका कहना है कि गिरफ्तारी अवैध है और केवल पप्पू बंसल के बयान पर आधारित है, जो खुद फरार है और जिसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी है. रिजवी ने कहा कि चैतन्य ने हमेशा जांच में सहयोग किया, सभी दस्तावेज सौंपे, फिर भी उन्हें कभी पूछताछ के लिए तलब नहीं किया गया और अचानक गिरफ्तार कर लिया गया. उनके अनुसार यह सब पूर्व मुख्यमंत्री को निशाना बनाने के लिए किया गया है.

2019 में होटल में बुलाई थी बैठक

शराब घोटाले की जड़ें फरवरी 2019 तक जाती हैं, जब अनवर ढेबर ने रायपुर के एक होटल में बैठक बुलाई. इसमें छत्तीसगढ़ डिस्टिलरी के नवीन केडिया, भाटिया वाइंस के प्रिंस भाटिया और वेलकम डिस्टिलरी के राजेंद्र जायसवाल सहित कई डिस्टिलर मौजूद थे. साथ ही एपी त्रिपाठी और अरविंद सिंह जैसे अफसर भी शामिल थे. बैठक में तय हुआ कि हर शराब केस पर कमीशन लिया जाएगा और बदले में डिस्टिलरी ऑपरेटरों को रेट बढ़ाकर दिए जाएंगे. जल्द ही सिंडिकेट का काम तीन हिस्सों में बंट गया. पहला, हर केस पर 75 रुपये का कमीशन, जिससे 300 करोड़ से अधिक जुटाए गए.

दूसरा, एक समानांतर शराब बाजार, जिसमें डुप्लीकेट होलोग्राम से हजारों केस सरकारी गोदामों से बाहर बेचे गए. 2022–23 में ही 400 ट्रक अवैध शराब हर महीने चली और प्रति केस 3000 रुपये का मुनाफा कमाया गया. तीसरा हिस्सा था फ़ॉरेन लिकर लाइसेंस FL-10A, जिसे चुनिंदा कंपनियों को बांटकर प्रीमियम ब्रांड ऊंचे दाम पर बेचने का अधिकार मिला और इससे 211 करोड़ रुपये की कमाई हुई.

एजेंसी के अनुसार, तत्कालीन मुख्य सचिव रहे रिटायर्ड आईएएस विवेक ढांड भी सिर्फ मूक दर्शक नहीं बल्कि सीधे लाभार्थी थे. ईडी के शब्दों में, आबकारी विभाग को “हाई-परफॉरमेंस करप्शन इंजन” में बदल दिया गया, जिसे डर, फायदे और अरबों की दौलत से चलाया जाता था.

घोटाले का पैमाना चौंकाने वाला है. ईडी का दावा है कि 2019 से 2022 के बीच ही कम से कम 1392 करोड़ रुपये कांग्रेस नेताओं और उनके सहयोगियों तक पहुंचे. चैतन्य की कथित भूमिका बतौर “बिग बॉस” ही इस गिरफ्तारी को विस्फोटक बनाती है. उनकी रियल एस्टेट परियोजनाएँ, वॉट्सऐप चैट्स, कैश हैंडलर्स की गवाही और नकली होलोग्राम की कड़ियां मिलकर एक भयावह तस्वीर पेश करती हैं. एजेंसी का कहना है कि उनके समन्वय के बिना यह सिंडिकेट इतने बड़े स्तर पर चल ही नहीं सकता था.

 

”प्रवर्तन निदेशालय-ईडी की टीमों ने छत्तीसगढ़ के दस जगहों में छापेमारी”

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करीब एक सौ चालीस करोड़ रूपये के कस्टम मिलिंग घोटाले के सिलसिले में 18 सितम्बर 2025 को प्रवर्तन निदेशालय-ईडी की टीमों ने छत्तीसगढ़ के दस जगहों में छापेमारी की कार्रवाई की है। जानकारी के अनुसार ईडी की टीम ने राज्य के पूर्व आईएएस अधिकारी आलोक शुक्ला के भिलाई स्थित दो ठिकानों पर दबिश दी। सूत्रों के अनुसार छापामार कार्रवाई के दौरान ईडी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं।

मौसम विभाग ने 13 जिलों में बिजली गिरने और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है।

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छत्तीसगढ़ का मौसम इन दिनों चरम रूप में है। अगले चार दिनों तक बारिश थमने से जहां धूप और उमस लोगों को बेहाल करेगी, वहीं 13 जिलों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और तेज हवाओं का खतरा मंडरा रहा है।

मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले चार दिनों तक छत्तीसगढ़ में बारिश और इससे जुड़ी गतिविधियों में कमी रहेगी। इस दौरान तेज धूप और उमस बढ़ सकती है। हालांकि, बीच-बीच में कहीं-कहीं हल्की फुहारें या रिमझिम बारिश होने की संभावना बनी रहेगी। पिछले 24 घंटों में सरगुजा, बिलासपुर और रायपुर संभाग के कई हिस्सों में हल्की बारिश दर्ज की गई।

वहीं, बस्तर और बिलासपुर संभाग के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम वर्षा हुई। सरसींवा में सबसे ज्यादा 40 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई। आज (शुक्रवार) राज्य के उत्तरी और दक्षिणी जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। कांकेर, नारायणपुर, कोंडागांव, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, सुकमा, जीपीएम, कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर, सरगुजा और जशपुर जिलों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की आशंका जताई गई है। वहीं, सेंट्रल छत्तीसगढ़ के जिलों में मौसम सामान्य रहने की उम्मीद है।

बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में लगातार तीन दिनों से हो रही बारिश से कन्हर नदी और नालों का जलस्तर बढ़ गया है। निचली बस्तियों में जलभराव की स्थिति बन गई है। क्षेत्र के तालाब और बांध लबालब भर चुके हैं। जल संसाधन विभाग की टीमें बांधों और जलाशयों की लगातार निगरानी कर रही हैं। जिले में अब तक 1455.5 मिमी बारिश हो चुकी है, जो सामान्य से 56% ज्यादा है।

प्रदेश में अब तक औसतन 1059.6 मिमी बारिश दर्ज की गई है। बलरामपुर में सबसे ज्यादा 1464.6 मिमी पानी गिरा है, जो सामान्य से 56% अधिक है। वहीं, बेमेतरा में सबसे कम 491.6 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से 50% कम है। बस्तर, राजनांदगांव और रायगढ़ जैसे जिलों में वर्षा सामान्य के आसपास रही है।

 

”सांस्कृतिक-धार्मिक स्थलों के विकास के लिए डीएमएफ से 2.16 करोड़ स्वीकृत”

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर कोरबा जिला प्रशासन द्वारा कोरबा जिले के प्रसिद्ध सांस्कृतिक एवं धार्मिक स्थलों के विकास के लिए डीएमएफ मद से दो करोड़ 16 लाख 94 हजार 766 रूपये की राशि स्वीकृत की गई है।

कोरबा जिला प्रशासन द्वारा कनकेश्वर महादेव मंदिर, मां मड़वारानी मंदिर और मां मातिन दाई मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए पेयजल व्यवस्था, मंच, आर्च-शेड, सोलर पावर प्लांट आदि के लिए डीएमएफ से राशि मंजूर की गई है।

इनमें करतला विकासखंड में मां मड़वारानी मंदिर परिसर में मंच निर्माण के लिए 19 लाख 92 हजार रुपए, आर्च-शेड निर्माण के लिए 25 लाख 97 हजार रुपए, पाइपलाइन बिछाकर पेयजल व्यवस्था के लिए 39 लाख 67 हजार रुपए शामिल हैं। इन कार्यों के लिए ग्रामीण यांत्रिकी सेवा तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को क्रियान्वयन एजेंसी नियुक्त किया गया है।

जिला प्रशासन द्वारा कनकेश्वर महादेव मंदिर कनकी में मंदिर परिसर में शेड निर्माण के लिए 45 लाख 50 हजार रुपए और 2.4 किलोवाट क्षमता के सोलर पावर प्लांट की स्थापना के लिए छह लाख 82 हजार 360 रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। इन कार्यों के लिए ग्रामीण यांत्रिकी सेवा और क्रेडा को क्रियान्वयन एजेंसी नियुक्त किया गया है।

पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम मातिन में स्थित मां मातिनदाई परिसर में पाइपलाइन बिछाकर पेयजल प्रदान करने के लिए 33 लाख नौ हजार रुपए तथा सीढ़ी निर्माण के लिए 30 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। इन कार्यों के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और पोंड़ी उपरोड़ा के जनपद पंचायत सीईओ को क्रियान्वयन एजेंसी बनाया गया है।

 

छत्तीसगढ़ में कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने हेतु आज मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बड़ी पहल करते हुए रायपुर-राजिम नई मेमू रेल सेवा का शुभारंभ…

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजिम में नई रेल सेवा का शुभारंभ किया।

उन्होंने क्षेत्र के लोगों की आवागमन सुविधा में वृद्धि करते हुए राजिम से रायपुर के लिए नई मेमू ट्रेन सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने राजिम-रायपुर-राजिम मेमू नई ट्रेन सेवा तथा रायपुर-अभनपुर 2 मेमू रेल सेवा का राजिम तक विस्तार भी प्रारंभ किया। भारी संख्या में यात्री इस अवसर पर ट्रेन में सवार हुए और उत्साहपूर्वक रायपुर की ओर रवाना हुए। सस्ती एवं सुलभ नई रेल सुविधा मिलने से पूरे क्षेत्र में हर्ष और उल्लास का वातावरण रहा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस नई रेल सेवा से राजिम सहित गरियाबंद एवं देवभोग क्षेत्र के लोगों को भी राजधानी रायपुर तक सस्ती और किफायती यात्रा का विकल्प प्राप्त होगा। विद्यार्थी, नौकरीपेशा वर्ग और व्यापारी वर्ग सहित सभी के लिए यह ट्रेन अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का प्रयाग, राजिम अब रेल नेटवर्क से जुड़ गया है। ग्रामीण अंचलों से राजधानी रायपुर का आवागमन अब और अधिक सुगम, सुविधाजनक और किफायती बन गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारे छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के आशीर्वाद से लगातार 19 महीनों से विकास की गति निरंतर अग्रसर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी से हो रहा निवेश आने वाली पीढ़ियों के लिए नया भविष्य गढ़ेगा। उन्होंने बताया कि लगभग आठ वर्ष पूर्व धमतरी से रायपुर तक नैरोगेज ट्रेन चलती थी और अब आठ वर्षों के अंतराल के बाद यहां ब्रॉडगेज ट्रेन सुविधा उपलब्ध हुई है। इसके लिए उन्होंने पूरे छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ में रेलवे की लगभग 45,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं संचालित हो रही हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में लगभग 7,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे प्रदेश में रेल सेवाओं का तीव्र विस्तार और विकास सुनिश्चित हो रहा है।

इस अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप, खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल, लोकसभा सांसद रायपुर श्री बृजमोहन अग्रवाल, महासमुंद सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, अभनपुर विधायक श्री इन्द्रकुमार साहू, राजिम विधायक श्री रोहित साहू, छत्तीसगढ़ राज्य भंडार गृह निगम के अध्यक्ष श्री चंदूलाल साहू, नगर पालिका गोबरा नवापारा अध्यक्ष श्रीमती ओमकुमारी संजय साहू, नगर पंचायत राजिम अध्यक्ष श्री महेश यादव सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक श्री तरुण प्रकाश, रेलवे अधिकारी-कर्मचारी एवं भारी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

वन मंत्री एवं रायपुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि इस नई सेवा से छत्तीसगढ़ के प्रयाग राजिम तक सीधी रेल पहुँच सुनिश्चित हो गई है, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि 22 मई को ‘निर्मल भारत रेलवे स्टेशन’ के नाम से देश के 103 रेलवे स्टेशनों को मॉडिफाई करने के लिए चयनित किया गया, जिनमें से छत्तीसगढ़ के पाँच रेलवे स्टेशन शामिल हैं और 32 स्टेशन भी इस योजना में जोड़े गए हैं। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के प्रति आभार व्यक्त किया और मुख्यमंत्री श्री साय के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग 45,000 करोड़ रुपये की रेलवे परियोजनाएँ चालू हैं, जिनसे रेल कनेक्टिविटी में तेजी आएगी। बस्तर को भी इससे लाभ हो रहा है और रावघाट प्रोजेक्ट के अंतर्गत 140 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन का कार्य प्रगति पर है।

रायपुर लोकसभा सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के प्रयागराज राजिम में बाहर से साधु-संत एवं पर्यटक भारी संख्या में आते हैं। अब उन्हें सीधे रायपुर से राजिम आने की सुविधा मिलेगी, जिससे पर्यटन एवं क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी और विश्व पटल पर राजिम का नाम और अधिक रोशन होगा।

महासमुंद सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी ने नई रेल सेवा के लिए लोगों को बधाई देते हुए कहा कि अब राजिम से रायपुर आना बहुत आसान हो गया है। श्रद्धालु एवं पर्यटक यात्री अब राजिम से सीधे डोंगरगढ़ तक भी यात्रा कर सकेंगे।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर रेल मंडल से प्राप्त जानकारी के अनुसार रायपुर-अभनपुर-रायपुर मेमू पैसेंजर ट्रेन का परिचालन अब राजिम तक किया जाएगा। 19 सितम्बर 2025 से नियमित समय-सारणी के अनुसार गाड़ी संख्या 68766/68767 राजिम-अभनपुर-रायपुर मेमू पैसेंजर प्रतिदिन दोनों छोरों—राजिम और रायपुर—से संचालित होगी। इस ट्रेन में 06 सामान्य श्रेणी के डिब्बे तथा 02 पावरकार सहित कुल 08 कोच होंगे।

“‘8 से 10 हफ्तों में सुलझा जाएगा भारत-अमेरिका टैरिफ विवाद’, CEA नागेश्वरन ने क्यों किया ये बड़ा दावा?”

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भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते एक बार फिर तनाव में आ गए हैं. ट्रंप प्रशासन ने भारतीय निर्यात पर भारी टैरिफ लगाकर बाजार में नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रही व्यापारिक वार्ता के बीच यह कदम न केवल आर्थिक बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी गंभीर असर डाल रहा है.

अब दोनों पक्ष जल्द ही समाधान तलाशने की दिशा में बातचीत कर रहे हैं. 27 अगस्त से लागू इस नए नियम के तहत अमेरिका ने भारत से आने वाले निर्यात पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया है. इसमें 25 फीसदी की पेनल्टी सीधे तौर पर रूस से तेल खरीदने के कारण जोड़ी गई है. इस फैसले से भारत के श्रम-प्रधान सेक्टर जैसे झींगा, टेक्सटाइल, लेदर और फुटवियर की एक्सपोर्ट इंडस्ट्री को तगड़ा झटका लगा है. इन सेक्टरों में लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी है, जिस पर अब सीधा असर देखने को मिल रहा है.

सीईए का समाधान पर भरोसा मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. आनंद नागेश्वरन ने कोलकाता में भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि ‘ऊपरी सतह पर भले ही स्थिति तनावपूर्ण दिख रही हो, लेकिन अंदरखाने सरकारों के बीच बातचीत लगातार चल रही है. मेरा अनुमान है कि अगले आठ से दस हफ्तों में इस समस्या का समाधान निकल आएगा.’ नागेश्वरन ने उम्मीद जताई कि दोनों देश इस विवाद को संवाद से सुलझा लेंगे.

वार्ता की नई कोशिश भारत और अमेरिका के बीच मार्च से द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) पर चर्चा चल रही है. अब तक पांच दौर की बातचीत हो चुकी है. छठे दौर की वार्ता के लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल 25 अगस्त को भारत आने वाला था, लेकिन अचानक यह दौरा रद्द कर दिया गया. इस बीच, अमेरिकी टीम का नेतृत्व कर रहे ब्रेंडन लिंच और भारतीय टीम के प्रमुख राजेश अग्रवाल के बीच बातचीत के कई मुद्दों पर सहमति बनी, मगर टैरिफ पर अड़चन बनी रही.

ट्रंप की सफाई और स्वीकारोक्ति पिछले सप्ताह ट्रंप ने अमेरिकी चैनल Fox and Friends से बातचीत में कहा कि भारत पर टैरिफ लगाना ‘आसान फैसला नहीं था.’ उन्होंने माना कि यह कदम भारत के साथ रिश्तों में दरार डाल रहा है. ट्रंप ने कहा, ‘भारत अमेरिका का बड़ा ग्राहक है. लेकिन रूस से तेल खरीदने पर हमें कड़ा संदेश देना पड़ा. यही वजह है कि मैंने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया. यह आसान नहीं था, लेकिन जरूरी था.’

“मराठा आरक्षण पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, गैर-पीड़ित की याचिका खारिज, 22 सितंबर को अगली सुनवाई”

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मराठा आरक्षण पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, गैर-पीड़ित की याचिका खारिज, 22 सितंबर को अगली सुनवाई!

Bombay High Court On Maratha Reservation: मुंबई उच्च न्यायालय ने कहा कि वह आरक्षण के लिए मराठा समुदाय के सदस्यों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी करने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले के खिलाफ जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करने का इच्छुक नहीं है, क्योंकि याचिकाकर्ता पीड़ित व्यक्ति नहीं हैं।

मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की पीठ ने कहा कि पीड़ित व्यक्ति (ओबीसी श्रेणी के लोग) पहले ही उच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर कर चुके हैं, जिस पर 22 सितंबर को एक अन्य पीठ सुनवाई करेगी।

अदालत ने कहा कि इस स्तर पर ये जनहित याचिकाएं ठीक नहीं हैं। यह विकल्प (सरकारी फैसले को चुनौती देने का) पीड़ित पक्ष के लिए है, हर किसी के लिए नहीं। पीठ ने कहा कि कानून में दुर्भावना का मुद्दा केवल पीड़ित पक्ष ही उठा सकता है और ये याचिकाकर्ता पीड़ित पक्ष नहीं हैं।

जनहित याचिका खारिज की अदालत ने कहा कि जनहित याचिकाओं को खारिज किया जाना चाहिए। उसने कहा कि अगर याचिकाकर्ता चाहें तो वे पीड़ित पक्ष द्वारा दायर याचिकाओं के साथ ही आवेदन दायर कर सकते हैं। उसने कहा कि अगर दूसरी पीठ को लगता है कि उसे इन याचिकाकर्ताओं की सहायता की आवश्यकता है, तो वह उनकी सुनवाई का फैसला कर सकती है।

उच्च न्यायालय गुरुवार दोपहर को इस मामले पर सुनवाई करेगा और उसने जनहित याचिकाकर्ताओं को यह बताने के लिए कहा कि वे क्या करना चाहते हैं। उच्च न्यायालय में अब तक तीन जनहित याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिनमें सरकार के उस आदेश (जीआर) को चुनौती दी गई है जिसके तहत मराठा समुदाय के सदस्यों को आरक्षण का लाभ लेने के लिए कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करने का निर्णय लिया गया है।

याचिकाओं में दावा किया गया है कि सरकार का यह फैसला मनमाना, असंवैधानिक और कानून के विरुद्ध है, इसलिए इसे रद्द किया जाना चाहिए। बाद में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के व्यक्तियों द्वारा सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए चार याचिकाएं दायर की गईं। इन याचिकाओं पर सोमवार को न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे की अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई करेगी।

“इस मंदिर में की जाती है अष्टमुखी शिवलिंग की पूजा, सावन पर लगता है भक्तों का मेला”

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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक ऐसा मंदिर है जहां पर आठ मुख वाले शिवलिंग की पूजा की जाती है। ये मंदिर एक प्रचानी मंदिर है और इस मंदिर में लाखों की संख्या में लोग आकर भगवान शिव के आठ मुख वाली मूर्ति की पूजा करते हैं।

ऐसी मान्यता है कि आठ मुख वाले भगवान शिव की पूजा करने से हर मनोकामना तुरंत पूरी हो जाती है। सावन के महीने में इस मंदिर में खूब सारी तादाद में भक्त आते हैं और सच्चे मन से शिव भगवान की पूजा करते हैं। इस मंदिर का नाम अष्टमुखी शिव मंदिर है और कई लोग इस मंदिर को पंचायती मंदिर के नाम से भी जानते हैं। ऐसा कहा जाता है कि भगवान शंकर की अष्टमुखी प्रतिमा चैतुरगढ़ से लाई गई थी और इसके आठ मुख हैं, जिसके कारण इसे अष्टमुखी नाम से जाना जाता है। ये मंदिर बेहद ही बड़ा और सुंदर है।

कई सालों पुराना है ये मंदिर अष्टमुखी शिव मंदिर एक प्रचानी मंदिर है और इस मंदिर के पुजारी के अनुसार ये मंदिर करीब 125 वर्ष पुराना है। इस मंदिर में रखा गया आठ मुखी शिवलिंग 10 फीट ऊंचा है और ये एक अनोखा शिवलिंग है। भगवान शिव के 8 मुख वाला ये शिवलिंग जीवन की 4 अवस्थाओं को दर्शाता है। जो कि इस प्रकार है, पूर्व का मुख बाल अवस्था को दर्शाता है, दक्षिण का मुख किशोर अवस्था को दर्शाता है, पश्चिम का मुख युवा अवस्था और उत्तर का मुख वृद्ध अवस्था को दर्शाता है। इस मंदिर में आने वाले लोगों की ये मान्यता है कि इस मंदिर में आकर अष्टमुखी पशुपतिनाथ के दर्शन से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है।

सावन के दौरान दूर-दूर से आते हैं लोग

सावन के महीने में इस मंदिर में दूर-दूर से लोग आते हैं और शिव भगवान की पूजा करते हैं। वहीं सावन के पहले सोमवार के दिन इस मंदिर में खूब भीड़ होती है और भगवान को बेलपत्र, फूल, फल, जल और दूध चढ़ाया जाता है। इतना ही नहीं विशेष पर्वों के दौरान यहां शिव को लड्डुओं और खीर का भोग भी लगाया जाता है और साथ में ही शिव की महा आरती की जाती है।

होती है विशेष पूजा सोमवार का दिन शिव भगवान से जुड़ा हुआ है और सोमवार के दिन इस मंदिर में भगवान शिव का महारुद्राभिषेक किया जाता है। इसके अलावा हर रोज भगवान शिव की आरती की जाती है और शिव से जुड़े मंत्रों का जाप किया जाता है। इतना ही नहीं रोज शिवपुराण की कथा भी पढ़कर भक्तों को सुनाई जाती है। भक्तों की मानें तो इस मंदिर में आकर जो लोग सच्चे मन से शिवलिंग की पूजा करते हैं उन भक्तों को शिव भगवान खाली हाथ नहीं लौटाते हैं और यहीं वजह है कि इस मंदिर पर लाखों लोगों की आस्था है और लोग सावन के महीने में इस मंदिर में आकर शिव भगवान की पूजा करते हैं।

आप भी अपने जीवन में एक बार छत्तीसगढ़ के बिलासपुर मेंं स्थित इस मंदिर में एक बार जरूर जाएं और शिव भगवान के 8 मुख वाले शिवलिंग की पूजा करें।