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“इंटरपोल का बड़ा अभियान: ऑपरेशन लायनफिश-मेयाग में 76 टन ड्रग्स जब्त, 386 गिरफ्तार”

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ड्रग्स तस्करी के खिलाफ इंटरपोल ने एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय अभियान चलाया है, जिसका नाम ‘ऑपरेशन लायनफिश-मेयाग III’ है. यह ऑपरेशन भारत समेत 18 देशों में सिर्फ दो हफ्तों में चलाया गया. इस ऑपरेशन में 76 टन ड्रग्स, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 6.5 बिलियन डॉलर है, जब्त की गई. इस दौरान 386 गिरफ्तारियां भी हुईं.

इस ऑपरेशन को इंटरपोल की अब तक की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय ड्रग-रोधी कार्रवाई में से एक माना गया है. ऑपरेशन में रिकॉर्ड 297 मिलियन मेथ की गोलियां जब्त की गईं, साथ ही फेंटानिल, हेरोइन, कोकीन और प्रीकर्सर का बड़ा जखीरा भी बरामद किया गया. ड्रग्स को सर्फबोर्ड, टी बॉक्स, कैट फूड और कॉफी मशीन में छिपाया गया था.

भारत से फेंटानिल की जब्ती…

इस ऑपरेशन में सबसे ज्यादा फेंटानिल भारत से जब्त किया गया है. जब्त की गई फेंटानिल की मात्रा इतनी थी कि इससे 15.1 करोड़ लोगों की जान जा सकती थी. फेंटानिल एक ओपिऑइड ड्रग है, जो पूरी तरह से लैब में तैयार किया जाता है. हालांकि, इसे पेन किलर के रूप में मंजूरी मिली हुई है, लेकिन इसका गैरकानूनी तरीके से भारत में उत्पादन किया जाता है.

‘लव जिहाद’ और धर्मांतरण कानूनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर SC में सुनवाई, राज्यों को नोटिस जारी”

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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात सहित अन्य राज्यों में ‘लव जिहाद’ और गैरकानूनी धर्मांतरण के खिलाफ बने कानूनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है.

कोर्ट ने राज्यों को चार हफ्तों में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है. अगली सुनवाई छह हफ्तों बाद होगी, जिसमें कानून पर रोक लगाने की मांग पर विचार किया जाएगा.

याचिकाकर्ताओं की ओर से वकीलों ने अदालत को बताया कि ये कानून अंतर-धार्मिक जोड़ों को परेशान करने और त्योहारों एवं धार्मिक अनुष्ठानों में हस्तक्षेप करने का जरिया बन गए हैं.

याचिकाओं में कहा गया है कि इन कानूनों की आड़ में किसी को भी धर्मांतरण के आरोप में फंसाया जा सकता है. याचिका दाखिल करने वालों में जमीयत उलेमा-ए-हिंद और सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस जैसे संगठन शामिल हैं.

नोडल वकील नियुक्त…

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की ओर से नोडल वकील के रूप में वकील सृष्टि अग्निहोत्री और राज्यों की तरफ से वकील रुचिरा गोयल को नियुक्त किया है. यह नियुक्ति जवाब दाखिल करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए की गई है.

एक भी घुसपैठिए को बिहार में रहने नहीं दिया जाएगा. ,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घुसपैठियों का मुद्दा…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घुसपैठियों का मुद्दा उछाल कर कई चीजें साफ कर दी है. एक तो ये कि बीजेपी बिहार चुनाव में घुसपैठियों के मामले को चुनावी मुद्दा बनाने जा रही है. बिहार दौरे में प्रधानमंत्री मोदी ने घुसपैठियों के बहाने विपक्षी गठबंधन को घेरने की कोशिश की, और बोले, ये लोग चाहे जितना जोर लगा लें…

एक भी घुसपैठिए को बिहार में रहने नहीं दिया जाएगा.

विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक ने वोट-चोरी को बिहार में चुनावी मुद्दा बनाने में जुटा है, और बीजेपी घुसपैठियों के जरिए काउंटर करने की कोशिश कर रही है. समझा जा सकता है, क्यों मोदी की रैली के लिए पूर्णिया का इलाका चुना गया था. बीजेपी ने पूर्णिया का भरपूर फायदा उठाया. पूर्णिया के निर्दल सांसद पप्पू यादव को मंच पर मौका देकर बीजेपी ने दूर की कौड़ी भी खेल ली है. जिस कांग्रेस के कैंपेन में पप्पू यादव जी जान से लगे रहते हैं, वहीं राहुल गांधी के आसपास उनको पहुंचने से भी रोक दिया जाता है.

पूर्णिया में प्रधानमंत्री मोदी के निशाने पर विपक्ष ही था, आज देश के कुछ राज्यों सहित सीमांचल में डेमोग्राफी गड़बड़ा गई है… जब इसे बचाने के लिए लाल किले से अभियान शुरू किया गया तो कांग्रेस के लोग इन्हें बचाने के लिए यात्राएं निकालने लगे… ये घुसपैठियों के पक्ष में नारे लगा रहे हैं… जो भी नेता घुसपैठियों को बचाने के लिए आगे आ रहे हैं, उन्हें चुनौती देते हुए कहता हूं कि वे चाहे जितना जोर लगा लें, हम घुसपैठियों को निकालकर रहेंगे.

मोदी, असल में, हाल के इंडिया ब्लॉक की वोटर अधिकार यात्रा का जिक्र कर रहे थे, जिसमें राहुल गांधी और तेजस्वी यादव बिहार महागठबंधन के नेताओं के साथ जगह जगह नारे लगा रहे थे… ‘वोट-चोर, गद्दी छोड़’. बिहार में SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण को मुद्दा बनाकर राहुल गांधी और तेजस्वी यादव विरोध कर रहे हैं, जिसके बाद बिहार में एक अलग माहौल तो बन ही गया है.

विपक्ष की तरफ से लोगों को ये समझाने की कोशिश की जा रही है, एसआईआर के बहाने उनका नाम वोटर लिस्ट से हटाने की चाल है, और उसमें भी निशाने पर एक खास आबादी है. और, बीजेपी की तरफ से जिस घुसपैठिए के तौर पर पेश किया जा रहा है, वो भी उसी आबादी का वोट बैंक है – और इसीलिए चुनावी मुद्दा बनने की तरफ इशारा कर रहा है.

घुसपैठियों के लिए जिम्मेदार कौन? बीजेपी चुनावों में विपक्ष पर घुसपैठियों का हमदर्द और मददगार बन जाने का इल्जाम लगा रही है. और महागठबंधन के नेता सवाल उठा रहे हैं कि घुसपैठियों को देश की सीमा में घुसने से रोकने की जिम्मेदारी किसकी है? केंद्र में तो सरकार बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए की ही है. लोगों की मुश्किल ये है कि दोनों तरफ से सिर्फ सवाल ही पूछे जा रहे हैं, जवाब कोई नहीं दे रहा है. एक सवाल पूछा जाता है, तो जवाब में दूसरा सवाल उठा दिया जाता है.

बिहार की रैली में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव को निशाना बनाते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहते हैं, ये राजद और कांग्रेस वाले लोग देश की सुरक्षा और सम्मान को भी दाव पर लगा दे रहे हैं… ये राजद और कांग्रेस वाले जितना कर ले पर ये मोदी की गारंटी है कि यहां जो भी घुसपैठिए हैं उन्हें बाहर जाना ही पड़ेगा… जो नेता बचाव कर रहे हैं उन्हें चुनौती देता हूं… आप घुसपैठिए को बचाने की जितनी कोशिश कर लें, ये मैं होने नहीं दूंगा… ये राजद और कांग्रेस वाले लोग घुसपैठिए की ढाल बने हुए हैं.

प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाया है, ये लोग बेशर्मी की हद भी पार कर चुके हैं… ये राजद और कांग्रेस वाले लोग देश की सुरक्षा और सम्मान को भी दाव पर लगा दे रहे हैं. जैसे जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, आरोप प्रत्यारोप में तेजी देखने को मिल रही है. दोनों तरफ से. बीजेपी की तरफ से भी, और इंडिया ब्लॉक की तरफ से भी.

बिहार रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने सरकार का इरादा साफ कर दिया है, भारत में भारत का कानून चलेगा… घुसपैठियों की मनमानी नहीं… घुसपैठियों पर कार्रवाई होगी, और इसका सुपरिणाम देश देखेगा… राजद-कांग्रेस घुसपैठियों के समर्थन में हैं… बिहार की जनता इन्हें जवाब देगी.

बिहार के बाद पश्चिम बंगाल और असम तक हाल के असम दौरे में भी प्रधानमंत्री मोदी ने घुसपैठियों का मुद्दा उठाया था, भारतीय जनता पार्टी का उद्देश्य देश को घुसपैठियों से बचाना और अखंडता को बहाल करना है. असम में भी मोदी के निशाने पर कांग्रेस नजर आई, बोले, मैं उन राजनेताओं को कहना चाहता हूं, अगर वे चुनौती लेकर मैदान में आएंगे, तो मैं उनका सीना तानकर सामना करूंगा… मैं भी देखता हूं कि वे घुसपैठियों को बचाने में कितनी ताकत लगाएंगे… हम घुसपैठियों को हटाने में अपना जीवन लगा देंगे, वे सामने आएं और मुकाबला करें… घुसपैठियों को बचाने के लिए निकले लोगों को भुगतना पड़ेगा, और उन्हें मेरे ये शब्द जरूर सुनने चाहिए… ये देश उनको माफ नहीं करेगा.

बिहार के बाद अगले साल 2026 में पश्चिम बंगाल और असम में भी विधानसभा के चुनाव होने हैं. और, घुसपैठियों के मामले को चुनावी मुद्दा बनाने के पीछे यही मकसद है. लेकिन, एक सच ये भी है कि बीजेपी बीजेपी घुसपैठ के मुद्दे पर झारखंड विधानसभा का चुनाव नहीं जीत सकी. जबकि, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बांग्लादेश के तात्कालिक बवाल की तरफ इशारा करते हुए महाराष्ट्र में भी वही नारा लगवाया था जो उन दिनों काफी चर्चित रहा – ‘बंटेंगे तो कटेंगे’.

ये ठीक है कि झारखंड में बीजेपी को महाराष्ट्र जैसी कामयाबी नहीं मिली, लेकिन ये भी मानना पड़ेगा कि बीजेपी ने ‘डेमोग्राफी’ के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में तो ला ही दिया है. और बिहार में मोदी के भाषण में भी वही गूंज रहा है – कांग्रेस और राजद ने बिहार के सम्मान के साथ-साथ बिहार की अस्मिता को भी खतरे में डाल दिया है… सीमांचल और पूर्वी भारत में घुसपैठियों के कारण बहुत बड़ा डेमोग्राफिक संकट पैदा हो गया है… बिहार, बंगाल, असम और कई राज्यों के लोग अपनी बहन-बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं… और, इसीलिए मैंने लाल किले से डेमोग्राफी मिशन का ऐलान किया है.

क्या है डेमोग्राफी मिशन 15 अगस्त, 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से कहा था, ‘मैं आज एक चिंता और चुनौती के संबंध में आगाह करना चाहता हूं… सोची समझी साजिश के तहत देश की डेमोग्राफी को बदला जा रहा है… एक नए संकट के बीज बोए जा रहे हैं… ये घुसपैठिए मेरे देश के नौजवानों की रोजी रोटी छीन रहे हैं… ये घुसपैठिए मेरे देश की बहन बेटियों को निशाना बना रहे हैं, ये बर्दाश्त नहीं होगा.’

बोले, घुसपैठिए मेरे देश की बहनों-बेटियों को निशाना बना रहे हैं, इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा… ये घुसपैठिए भोले-भाले आदिवासियों को गुमराह करके उनकी ज़मीन हड़प लेते हैं.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, हमारे पूर्वजों ने त्याग और बलिदान से आजादी पाई है… उन महापुरुषों के लिए सच्ची श्रद्धा ये है कि हम घुसपैठियों को स्वीकार न करें… यही उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी, इसलिए मैं आज लाल किले की प्राचीर से कहना चाहता हूं कि हमने एक ‘हाई पावर डेमोग्राफी मिशन’ शुरू करने का निर्णय किया है.

“छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ED का बड़ा दांव, पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे पर 7000 पेज का आरोपपत्र”

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित शराब घोटाले के सिलसिले में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के खिलाफ 7,000 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया है। आरोपपत्र दाखिल होने के साथ ही चैतन्य की न्यायिक हिरासत आज समाप्त हो गई और उन्हें अदालत में पेश किया गया।

चैतन्य को 18 जुलाई को उनके जन्मदिन के दिन भिलाई स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था और तब से वे हिरासत में हैं।

चैतन्य बघेल पर 2019 से 2022 के बीच भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए कथित 2,160 करोड़ रुपये के शराब घोटाले से प्राप्त धन का “प्राप्तकर्ता” होने का संदेह है। एजेंसी का आरोप है कि उन्हें घोटाले की आय से 16.70 करोड़ रुपये मिले, जिसे उन्होंने अपनी रियल एस्टेट परियोजनाओं में निवेश किया। इस बीच, आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने भी प्रोडक्शन वारंट जारी कर उन्हें हिरासत में लेने और पूछताछ के लिए सात दिन की रिमांड की मांग की है। विशेष अदालत ने मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है और सुनवाई मंगलवार को होगी।

इसके अलावा, चैतन्य की गिरफ्तारी के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर याचिका पर 19 सितंबर को सुनवाई होनी है। यह गिरफ्तारी जुलाई में केंद्रीय एजेंसियों द्वारा की गई छापेमारी के बाद हुई। ईडी के अनुसार, मामले में नए सबूत मिलने के बाद यह कार्रवाई शुरू की गई। चैतन्य बघेल को आगे की पूछताछ के लिए अदालत से ईडी कार्यालय ले जाया जाएगा। इससे पहले मार्च में एजेंसी ने उनसे जुड़े कई परिसरों पर छापे मारे थे और करीब 30 लाख रुपये नकद, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज जब्त किए थे।

“Rajim-Raipur MEMU Train: रायपुर-राजिम के बीच मेमू ट्रेन की सौगात, इस दिन सीएम साय करेंगे शुभारंभ”

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रायपुर: Rajim-Raipur MEMU Train, लंबे इंतजार के बाद राजिम और रायपुर के बीच रेल सेवा की सौगात मिलने जा रही है। आगामी 18 सितंबर को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय इस बहुप्रतीक्षित रेल सेवा का शुभारंभ करेंगे।

 शुभारंभ अवसर पर स्थानीय विधायक सहित जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।

इससे पहले रायपुर मंडल रेल प्रबंधक दयानंद ने राजिम रेलवे स्टेशन का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। राजिमनवापारा क्षेत्र के लोगों के लिए यह रेल सेवा एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इससे सिर्फ स्थानीय व्यापार और कृषि को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि तीर्थाटन और पर्यटन को भी नया आयाम मिलेगा। साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि यह ट्रेन धर्म नगरी से धर्म नगरी अर्थात राजिम से डोंगरगढ़ तक भी जाएगी।

Rajim-Raipur MEMU Train रेल मंडल ने नई राजिम मेमू ट्रेन की समय सारणी जारी कर दी है। इसके शुरू होने से क्षेत्र के लोगों को रायपुर तक तेज और सुविधाजनक आवागमन की सुविधा मिलेगी। शुभारंभ को लेकर क्षेत्र के लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। लंबे अरसे से प्रतीक्षित इस रेल सेवा के शुरू होने से राजिमनवापारा क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

Rajim-Raipur MEMU Train: इस समय निकलेगी ट्रेनें रायपुरराजिम मेमू सर्विस रायपुर स्टेशन से 4.45 को रवाना हो कर, 05:03 बजे मंदिर हसौद , 05:15 बजे सीबीडी पीएच, 05:30 बजे केंद्री, 05:43 बजे अभनपुर, 05:56 बजे माणिकचौरि पीएच, 06.20 बजे राजिम पहुंचेगी। इसी प्रकार राजिमरायपुर मेमू सर्विस 06.45 बजे राजिम से रवाना होकर, 06:59 बजे माणिकचौरि पीएच, 07:13 बजे अभनपुर, 07:26 बजे केंद्री, 07:41 बजे सीबीडी पीएच, 07:53 बजे मंदिर हसौद, 08:20 बजे रायपुर पहुंचेगी।

रायपुरअभनपुर मेमू का राजिम तक विस्तार के साथ समय बदला गाड़ी 68760 रायपुरअभनपुर मेमू का भी विस्तार किया गया है।

ये मेमू रायपुर स्टेशन से सुबह 09:00 बजे रवाना होकर 09:18 बजे मंदिर हसौद, 09:30 बजे सीबीडी पीएच, 09:45 बजे केंद्री, 09:50 बजे अभनपुर, 10:11 बजे माणिकचौरि पीएच, 10:35 बजे राजिम पहुंचेगी। इसी तरह गाड़ी 68761 राजिमरायपुर मेमू राजिम स्टेशन से 11:10 बजे को रवाना होकर, 11:24 माणिकचौरि पीएच, 11:38 अभनपुर स्टेशन, 11:51 बजे केंद्री, 12:06 बजे सीबीडी पीएच, 12:18 बजे मंदिर हसौद, 12:45 बजे रायपुर आएगी।

गाड़ी 68762 रायपुरराजिम मेमू रायपुर स्टेशन से 16:20 बजे रवाना होकर, 16:38 बजे मंदिर हसौद,16:50 बजे सीबीडी पीएच, 17:05 बजे केंद्री, 17:18 बजे अभनपुर, 17:31 बजे माणिकचौरि पीएच, 18:00 बजे राजिम पहुंचेगी। इसी तरह गाड़ी 68763 राजिमरायपुर मेमू राजिम स्टेशन से 18:30 बजे रवाना होकर, 18:44 बजे माणिकचौरि पीएच, 18:58 बजे अभनपुर, 19:11 बजे केंद्री, 19:26 बजे सीबीडी पीएच, 19:38 बजे मंदिर हसौद, 20:15 बजे रायपुर आएगी।

उत्तराखंड में भयंकर कुदरत का कहर, देहरादून में बादल फटने से तमसा नदी में आई बाढ़…

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उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में रात भर हुई भारी बारिश के कारण सड़कें, मकान और दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं। मंगलवार तड़के एक पुल का एक हिस्सा टूटकर बह गया। देहरादून-हरिद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक पुल का एक हिस्सा टूटकर बह गया। यह घटना फन वैली और उत्तराखंड डेंटल कॉलेज के पास हुई, जिससे यातायात प्रभावित हुआ।

सहस्त्रधारा में बादल फटा

आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा, “देहरादून में सहस्त्रधारा, माल देवता और मसूरी से नुकसान की खबरें मिली हैं। देहरादून में दो से तीन लोगों के लापता होने की खबर है। मसूरी में एक व्यक्ति की मौत की खबर है और उसकी पुष्टि की जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “दुखद समाचार है कि कल देर रात देहरादून के सहस्त्रधारा में भारी बारिश के कारण कुछ दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं। जिला प्रशासन, एसडीआरएफ और पुलिस मौके पर पहुँच गए हैं और राहत एवं बचाव कार्य में लगे हुए हैं।” उन्होंने कहा, “मैं स्थानीय प्रशासन के लगातार संपर्क में हूँ और व्यक्तिगत रूप से स्थिति पर नज़र रख रहा हूँ। मैं ईश्वर से सभी की सुरक्षा की प्रार्थना करता हूँ।

“Indian Railways: ऑनलाइन टिकट बुक करने के नियमों में बड़ा बदलाव, 1 अक्टूबर से लागू होंगे नए नियम”

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Online Train Ticket Booking Rules: ऑनलाइन रेलवे टिकट बुक करने के नियमों में बदलाव होने जा रहे हैं। 1 अक्टूबर, 2025 से, किसी भी ट्रेन के लिए ऑनलाइन बुकिंग खुलने के बाद शुरुआती 15 मिनट के दौरान सिर्फ आधार-प्रमाणित यूजर्स को ही IRCTC वेबसाइट या ऐप के माध्यम से सामान्य आरक्षण बुक करने की अनुमति होगी।

हालांकि, मौजूदा वक्त में भारतीय रेलवे के कम्प्यूटरीकृत पीआरएस काउंटरों के जरिए, सामान्य आरक्षित टिकटों की बुकिंग के समय में कोई बदलाव नहीं होगा। सामान्य आरक्षण खुलने के 10 मिनट के प्रतिबंध के समय में भी कोई बदलाव नहीं होगा, जिसके दौरान भारतीय रेलवे के अधिकृत टिकट एजेंटों को पहले दिन आरक्षित टिकट बुक करने की अनुमति नहीं होगी। बताते चलें कि अभी इस तरह का नियम सिर्फ तत्काल बुकिंग पर लागू है। बताते चलें कि सामान्य रिजर्वेशन के लिए बुकिंग रोजाना आधी रात 12.20 बजे से शुरू होती है और रात 11.45 बजे तक चलती है। सामान्य टिकटों के लिए एडवांस बुकिंग यात्रा की तारीख से 60 दिन पहले खुलती है।

उदाहरण से समझें कैसे काम करेगा नया नियम उदाहरण के लिए, मान लीजिए आपको नई दिल्ली से वाराणसी जाने वाली शिवगंगा एक्सप्रेस में 15 नवंबर के लिए टिकट बुक करनी है, इसके लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग विंडो 16 सितंबर को आधी रात 12.20 बजे खुलेगी। अब 12.20 बजे से लेकर 12.35 बजे तक इस ट्रेन में सिर्फ वही यूजर्स टिकट बुक कर पाएंगे, जिनका आईआरसीटीसी अकाउंट आधार वेरिफाइड होगा। अगर आपका अकाउंट आधार वेरिफाइड नहीं होगा तो आप विंडो खुलने के बाद 12.20 बजे से लेकर 12.35 बजे तक बुकिंग नहीं कर पाएंगे।

त्योहारों और शादी के सीजन में सामान्य टिकट के लिए भी होती है मारामारी आमतौर पर दीपावली, छठ पूजा, होली जैसे बड़े त्योहारों और शादी के सीजन में 2 महीने पहले बुकिंग विंडो खुलते ही टिकट बुक करने के लिए यात्रियों की भीड़ टूट पड़ती है। ये भीड़ सामान्य बुकिंग के लिए भी बिल्कुल वैसे ही टूटती है, जैसे तत्काल बुकिंग के लिए टूटती है।

जुलाई में तत्काल टिकट बुकिंग के लिए अनिवार्य हुआ था नियम बताते चलें कि भारतीय रेल ने इस साल जुलाई में ऑनलाइन तत्काल टिकट बुकिंग के लिए आधार ऑथेंटिफिकेशन अनिवार्य कर दिया था। इस नियम के अनुसार, आईआरसीटीसी के मोबाइल ऐप और वेबसाइट से ऑनलाइन तत्काल टिकट बुक करने के लिए यूजर का अकाउंट आधार वेरिफाइड होना जरूरी है। अगर आपका अकाउंट आधार वेरिफाइड नहीं है तो आप ऑनलाइन तत्काल टिकट बुक नहीं कर सकते हैं।

“नया बिजली कनेक्शन लेना महंगा, लगेंगे प्रीपेड स्मार्ट मीटर, कीमत उपभोक्ता देगा”

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अब उपभोक्ताओं के लिए कैस्को से नया बिजली कनेक्शन लेना महंगा हो गया है। कंपनी ने नियमों में बदलाव करते हुए स्पष्ट किया है कि नए कनेक्शन पर सिर्फ प्रीपेड स्मार्ट मीटर ही लगेंगे और पूरी कीमत उपभोक्ता से ही वसूली जाएगी।

यानी, नया कनेक्शन लेने के लिए उपभोक्ता को 6,018 रुपये देने होंगे। वहीं, पुराने कनेक्शन पर मीटर बदलने पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

पहले जहां नया कनेक्शन लेने पर पोस्टपेड मीटर लगते थे, उसके लिए करीब 1,800 रुपये का शुल्क लिया जाता था, वहीं अब प्रीपेड मीटर के नाम पर उपभोक्ता पर पूरी कीमत थोपी जा रही है। इससे नया कनेक्शन करीब ढाई गुना महंगा हो गया है। हालांकि, पुराने उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। जिनके घरों में पहले से पोस्टपेड या प्रीपेड मीटर लगे हैं, उनसे इन्हें बदलने पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। लेकिन नए उपभोक्ताओं को शुरू से ही स्मार्ट मीटर की पूरी कीमत चुकानी होगी।

अधिकारियों का कहना है कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद साबित होंगे। इससे बिलिंग में होने वाली गड़बड़ियों और बकाया राशि को लेकर होने वाले विवादों पर रोक लगेगी। ग्राहक अपने मोबाइल या ऑनलाइन माध्यम से रिचार्ज करके अपनी बिजली की लागत को सीधे नियंत्रित कर सकेंगे। कंपनी का दावा है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और चोरी भी रुकेगी।

हालांकि, उपभोक्ता संगठनों और आम जनता का कहना है कि यह नई व्यवस्था जनता पर सीधा बोझ डाल रही है। जहाँ पहले नया कनेक्शन कम कीमत पर मिल जाता था, वहीं अब हज़ारों रुपये अतिरिक्त देने होंगे। इस फैसले से नए कनेक्शन की माँग थोड़ी कम हो सकती है। खासकर मध्यम वर्ग और किरायेदार परिवारों के लिए यह व्यवस्था महंगी साबित होगी। वहीं, दूसरी ओर, यह कदम कंपनी के लिए फायदेमंद हो सकता है क्योंकि इसकी लागत तुरंत वसूल हो जाएगी।

एक साल में तीन प्रतिशत स्मार्ट मीटर लगाए जा सकेंगे बिजली उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर की सुविधा देने का सपना अभी भी अधूरा है। स्मार्ट मीटर लगाने का अभियान फरवरी 2024 में शुरू हुआ था, लेकिन एक साल बाद भी केस्को लक्ष्य से काफी पीछे है। इस योजना पर 696.22 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं और छह लाख पच्चीस हज़ार घरों में स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य है। लेकिन अभी तक केवल 23 हज़ार मीटर ही लग पाए हैं। यानी कुल लक्ष्य का केवल तीन प्रतिशत ही हासिल हो पाया है। जिससे योजना का समय पर पूरा होना लगभग असंभव सा लग रहा है। 8 फरवरी 2024 को स्मार्ट मीटर लगाने का ठेका मेसर्स जीनस पावर सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था। स्मार्ट मीटर लगाने की समय सीमा 7 मई 2026 तक 27 महीने है।

स्मार्ट मीटर स्थापना विवरण कुल उपभोक्ता मीटर लक्ष्य: 6,25,000 प्रगति: 22,904 उपलब्धि: 3.66% फीडर मीटर लक्ष्य: 584 प्रगति: 584 उपलब्धि: 100% वितरण ट्रांसफार्मर (डीटी) मीटर लक्ष्य: 6,715 प्रगति: 508 उपलब्धि: 7.57% एकल-चरण उपभोक्ता मीटर लक्ष्य: 5,55,438 प्रगति: 22,325 उपलब्धि: 4.02% एलटी सीटी उपभोक्ता मीटर: लक्ष्य: 5,200 प्रगति: 53 उपलब्धि: 1.02% तीन-चरण उपभोक्ता मीटर लक्ष्य: 64,362 प्रगति: 526 उपलब्धि: 0.82%

“70 में से 27 चाहिए जिताऊ सीटें, बिहार में राजद-कांग्रेस के बीच खींचतान? किन सीटों पर INC की नजर”

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Bihar Elections 2025: बिहार में विधानसभा चुनाव होने में अब करीब दो महीने ही रह गए हैं। ऐसे में सभी गठबंधनों के बीच सीटों के बंटवारे पर चर्चा जोर पकड़ रही है। विपक्षी महागठबंधन में सीटों के बंटवारे पर बातचीत जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे सहयोगी दलों की महत्वाकांक्षाएं और मांगें सामने आ रही हैं।

राजद की अगुवाई वाले इस महागठबंधन में दूसरे सबसे बड़े दल कांग्रेस ने पिछले हफ्ते जिताऊ सीट की मांग कर सीट बंटवारे को न सिर्फ पेचीदा बना दिया है बल्कि यह कौतूहल भी पैदा कर दिया है कि आखिर कौन सी सीटें जिताऊ हैं और कौन सी हारने वाली?

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस ने 243 सदस्यों वाली विधानसभा में 70 सीटों की मांग की है लेकिन इनमें से 27 वैसी सीटों की डिमांड की है, जो जिताऊ हैं। यानी जहां पार्टी उम्मीदवाकर की जीत की संभावना ज्यादा है। कांग्रेस के मुताबिक, अच्छी या जिताऊ सीटें वे हैं, जहाँ पार्टी ने पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2020 के विधानसभा चुनावों में या तो जीत दर्ज की थी या बहुत कम मार्जिन से चुनाव हारी थी।

किन सीटों पर कांग्रेस की नजर? इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कांग्रेस के एक नेता ने कहा, “हमारा दावा उन सभी 19 सीटों पर होगा जो कांग्रेस ने 2020 के चुनावों में जीती थीं और उन सीटों पर भी जहाँ पार्टी के उम्मीदवार लगभग 5,000 वोटों के अंतर से हारे थे। मौजूदा माहौल में, जब राहुल गांधी की मतदाता अधिकार यात्रा ने पूरे बिहार में इंडिया ब्लॉक कार्यकर्ताओं में जोश भर दिया है, हमें यकीन है कि हम सहयोगियों के सहयोग से ऐसी सीटें जीत सकते हैं।”

बता दें कि 2020 के चुनावों में, कांग्रेस ने कुल 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था और केवल 19 पर ही जीत हासिल की थी। 2015 के विधानसभा चुनावों में, पार्टी ने 41 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 27 सीटों पर जीत हासिल की थी। इस बार भी, कांग्रेस 70 सीटों के लिए दबाव बना रही है, खासकर राहुल गांधी की हालिया यात्रा के मद्देनजर। सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस की 27 जिताऊ और अच्छी सीटों में वे सीटें शामिल हैं, जिन पर 2020 में जीत दर्ज की जा चुकी है। ऐसी सीटों की संख्या 19 है। इसके अलावा 8 ऐसी सीटें हैं, जहां पार्टी को लगभग 5,000 वोटों से हार मिली थी। लिहाजा, पार्टी चाहती है कि 2025 में भी कांग्रेस को ये 27 सीटें मिलनी चाहिए।

राजद के लिए कितनी सीटें अच्छी और जिताऊ? 2020 में, राजद ने 144 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें से 75 पर जीत हासिल की थी और 17 सीटों पर 5,000 से कम वोटों से दूसरे स्थान पर रही थी। कांग्रेस के मानदंडों के अनुसार, राजद के लिए ये 92 सीटें अच्छी हैं। इसके अलावा महागठबंधन के दूसरे सहयोगी दल CPI (ML) लिबरेशन ने 19 में से 12 सीटें जीती थीं, जबकि दो पर 5000 वोटों के कम मार्जिन से हारी थी। उसके लिए 14 अच्छी सीटें हैं। CPI (M) और CPI ने भी 2020 के चुनावों में दो-दो सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि एक-एक सीट पर 5000 से कम वोटों के अंतर से हारी थी। उन दोनों के लिए भी तीन-तीन अच्छी सीटें हैं।

बता दें कि कांग्रेस के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु ने कहा है कि हर राज्य में अच्छी और बुरी सीटें होती हैं। अल्लावरु पहले ही तहचुके हैं कि ऐसा नहीं होना चाहिए कि एक पार्टी को सभी अच्छी सीटें मिलें और दूसरी को बुरी सीटें। सीटों के बंटवारे में अच्छी और बुरी सीटों के बीच संतुलन होना चाहिए। उन्होंने कहा था कि सीटों का बंटवारा इस तरह नहीं होना चाहिए कि कांग्रेस को केवल वही सीटें मिलें जहाँ राजद और अन्य सहयोगी पिछले चुनावों में नहीं जीत पाए थे। साथ ही, ऐसा भी नहीं होना चाहिए कि एक ही पार्टी को वे सभी सीटें मिल जाएँ जहाँ सामाजिक समीकरण महागठबंधन के पक्ष में हों।

“नरेंद्र मोदी और पप्पू यादव के ठहाके से खलबली; पूर्णिया के सांसद ने खुद बताया- क्या बात हुई थी?”

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के बीच पूर्णिया में मंच पर बातचीत और ठहाके ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। मोदी सोमवार को पूर्णिया में एयरपोर्ट का उद्घाटन करने बिहार आए थे।

हवाई सेवा की शुरुआत के बाद उन्होंने एक सरकारी कार्यक्रम में लगभग 40 हजार करोड़ की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान मंच पर स्थानीय सांसद होने के नाते पप्पू यादव को भी जगह मिली थी। उन्हें पीएम के पीछे कम दूरी पर बिठाया गया था। पीएम के ठीक दाहिनी तरफ बैठे गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान और उनके दाहिने बैठे केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी के बीच में पीछे पप्पू को जगह मिली थी।

पीएम मोदी के जनसभा मंच पर आगमन के बाद पप्पू यादव उनकी तरफ बढ़ते हुए कुछ कहते हैं, लेकिन उस समय पीएम अपनी बाईं तरफ बैठे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से कुछ बात कर रहे थे। नीतीश से बहुत संक्षिप्त बातचीत के बाद पीएम मोदी दाहिनी तरफ पीछे मुड़कर पप्पू यादव को देखते हैं तो पप्पू उनके पास जाते हैं और नजदीक से कुछ बात करते हैं। लगभग 20 सेकंड के इस संवाद के दौरान पीएम मोदी पप्पू की बातों पर ठहाके लगाते हैं तो पप्पू भी हाथ जोड़कर मुस्कुराते हुए नजर आते हैं। इस बात को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ लोग राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की यात्रा के दौरान पप्पू यादव की बेकद्री को याद कर रहे हैं।

पप्पू यादव ने ठहाके वाली बात पूछने पर कहा कि पीएम ने उनसे पूछा था कि अब क्या बच गया तो उन्होंने कुछ मांगें रख दी, जिस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि आपका मन नहीं भरा, पेट नहीं भरा और ठहाका लग गया। पप्पू ने बताया- “उन्होंने कहा कि अभी भी आपको चाहिए ही पूर्णिया के लिए, पेट नहीं भरा। अभी भी चाहिए ही, मन नहीं भरा। और कितना चाहिए। इस पर ही ठहाका हुआ था। और कितना चाहिए, मन नहीं भरा।”

पप्पू ने बताया कि पीएम मोदी से बातचीत में उन्होंने सीमांचल, कोशी और मिथिलांचल के लिए विशेष पैकेज, हाईडैम की जरूरत और मखाना व तिलकुट पर से 18 परसेंट जीएसटी हटाने की मांग की थी। उन्होंने बताया कि वो मोदी के आने से पहले अपने भाषण में पूर्णिया में हाईकोर्ट की बेंच और एक वर्ल्ड क्लास स्टेडियम की मांग भी उठा चुके थे। पप्पू यादव ने कहा कि मंच पर वो विपक्ष से अकेले नेता थे, जबकि एनडीए के दर्जनों मंत्री, सांसद और विधायक वहां मौजूद थे।

बिहार भाजपा के मीडिया पैनलिस्ट नीरज कुमार ने पीएम के सरकारी कार्यक्रम में पप्पू यादव की मौजूदगी पर कांग्रेस और राजद को याद दिलाया है कि किस तरह वो पूर्णिया के सांसद का अपमान करती रही। नीरज ने ट्वीट किया है- “जिन पप्पू यादव को कांग्रेस और राजद ने लगातार बेइज्जत किया, गाड़ी पर से धक्का दिलवा दिया, पूर्णिया रोड शो में भी पास फटकने नहीं दिया, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में लोकतंत्र का सम्मान किया गया, स्थानीय सांसद होने के नाते पप्पू यादव को मंच पर चढ़ने दिया गया। मतलब कतई नहीं कि पप्पू पर डोरे डाले गए। संदेश था कि पक्ष हो अथवा विपक्ष, एनडीए लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपरा में विश्वास करता है।”