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छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कांकेर जिले के नरहरपुर में आदिवासी समाज से आयोजित ठाकुर जोहारनी कार्यक्रम में शामिल हुए…

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नरहरपुर में ठाकुर जोहारनी कार्यक्रम में भाग लेकर विकास कार्यों की घोषणाएं कीं. अर्जुन मुंडा व जनप्रतिनिधियों संग आदिवासी परंपराओं और शिक्षा पर बल दिया.

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 14 सितम्बर 2025 को कांकेर जिले के नरहरपुर में आदिवासी समाज से आयोजित ठाकुर जोहारनी कार्यक्रम में शामिल हुए. इस अवसर पर उनके साथ झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा भी उपस्थित थे.

मुख्यमंत्री साय ने ठाकुर जोहारनी कार्यक्रम में आदिवासी समाज के इष्ट आराध्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की.  उन्होंने कहा कि नई उद्योग नीति में आदिवासी विकास को प्राथमिकता देते हुए, बस्तर सहित सरगुजा को विशेष तौर पर फोकस किया गया है.

आदिवासी परंपरा और शिक्षा पर मुख्यमंत्री का जोर

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ब्लॉक मुख्यालय नरहरपुर के उन्मुक्त खेल मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में, मुख्यमंत्री साय ने आदिवासी समाज के इष्ट देवी-देवताओं का जयघोष करते हुए उपस्थित लोगों को ठाकुर जोहारनी और नवाखाई की बधाई दी.

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की यह अनूठी परंपरा आगे भी जीवित रहनी चाहिए और समाज की एकजुटता हमेशा बनी रहनी चाहिए. छत्तीसगढ़ के युवा आगे बढ़ें और सुशिक्षित बनें, इसके लिए पूरे प्रदेश में नई शिक्षा नीति लागू की गई है.

शिक्षा विकास के साथ माओवाद समाप्ति का वादा

मुख्यमंत्री ने बताया कि IIT, IIM, ट्रिपल IIT जैसी राष्ट्रीय स्तर की उच्च शिक्षण संस्थान प्रदेश में संचालित हैं, जिससे गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध हो सके. इसी तरह, प्रयास और एकलव्य जैसे श्रेष्ठ संस्थानों के माध्यम से भी लगातार सुधार के प्रयास हो रहे हैं.

उन्होंने कहा कि दिल्ली में ट्राइबल यूथ हॉस्टल संचालित है और प्रदेशभर में नालंदा परिसर स्थापित किए जा रहे हैं. सुरक्षा बलों को माओवाद के विरुद्ध अभियान में लगातार बड़ी सफलताएं मिल रही हैं. उन्होंने 31 मार्च 2026 तक माओवाद के खात्मे का संकल्प दोहराया.

ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता के लिए डिजिटल पहल

मुख्यमंत्री साय ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशानुरूप, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के सहयोग से पशुपालन और मुर्गीपालन जैसी रोजगारमूलक गतिविधियों से लोगों को जोड़ने का कार्य प्रदेश सरकार कर रही है.

उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहकों के पारिश्रमिक में वृद्धि, चरणपादुका वितरण, रामलला दर्शन योजना सहित ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता और सुगमता लाने के लिए अटल डिजिटल सेवा केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं.

जल, जंगल, जमीन और लोकसंस्कृति की रक्षा

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार की पीएम जनमन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से आदिवासियों के सतत और समग्र विकास को अमलीजामा पहनाया जा रहा है. विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह हमारा उत्सव का कार्यक्रम है.

उन्होंने कहा कि जल, जंगल, जमीन और अपनी परंपराओं, लोकनृत्य, गीत, मांदर और मृदंग के साथ जीने वाले आदिवासियों की अपनी विशिष्ट पहचान है. अपनी जड़ों को मजबूत करते हुए, स्वास्थ्य, शिक्षा और अधिकारों के प्रति सजग रहना नितांत आवश्यक है.

नरहरपुर में कई विकास योजनाएं घोषित

कार्यक्रम को सांसद भोजराज नाग, कांकेर विधायक आशाराम नेताम और केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम सहित गोंडवाना समाज के संभागीय अध्यक्ष सुमेर सिंह नाग, जिला अध्यक्ष राजेश भास्कर और राजाराम तोड़ेम ने भी संबोधित किया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने नरहरपुर क्षेत्र के लिए अनेक घोषणाएं भी की.

इनमें 30 करोड़ रुपये की लागत से बागोड़ एनीकट का निर्माण, नरहरपुर में 132 केवी विद्युत सब-स्टेशन स्थापना हेतु 30 करोड़ रुपये, नरहरपुर में मावा मोदोल लाइब्रेरी के लिए 20 लाख रुपये, ग्राम ढोढ़रापहार में गोंडवाना सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 20 लाख रुपये, नरहरपुर में मोबाइल टॉवर की स्थापना करने की घोषणा शामिल हैं.

इंग्लिश मीडियम स्कूल हेतु आवश्यक सहयोग की घोषणा 

साथ ही, नरहरपुर में सर्वसुविधायुक्त विश्राम गृह निर्माण के लिए 80 लाख रुपये और नरहरपुर विकासखंड के गोंडवाना समाज के सभी 12 मुड़ा क्षेत्रों में 12 टीन शेड निर्माण हेतु 10–10 लाख रुपये के मान से कुल 1 करोड़ 20 लाख रुपये स्वीकृत करने की घोषणा शामिल हैं.

इसके अतिरिक्त ग्राम धनेसरा में गोंडवाना समाज से संचालित जंगोरायतार इंग्लिश मीडियम स्कूल हेतु आवश्यक सहयोग की घोषणा भी की गई. कार्यक्रम में वन मंत्री केदार कश्यप, कांकेर लोकसभा क्षेत्र के सांसद भोजराज नाग, कांकेर विधायक आशाराम नेता, अंतागढ़ विधायक विक्रम उसेंडी, केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम, प्रदेश मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष भरत मटियारा, नगरपालिका परिषद कांकेर के अध्यक्ष अरुण कौशिक, कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, जिला पंचायत के सीईओ हरेश मंडावी और समाज के प्रमुखजन सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे.

 

CG; असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए 600 से अधिक पदों पर भर्ती, वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने दिया बड़ा अपडेट…

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Assistant Professor Vacancy in Chhattisgarh 2025 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा उच्च शिक्षा में विभिन्न रिक्त पदों पर भर्ती हेतु बड़ा निर्णय लिया गया है जिससे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी और शासकीय महाविद्यालयों में रिक्त पदों की कमी को दूर किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार तथा उच्च शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर वित्त विभाग ने 700 पदों पर भर्ती की अनुमति प्रदान की है। यह आदेश प्रदेश के युवाओं के लिए आशा और अवसर की नई किरण लेकर आया है।

625 सहायक प्राध्यापक पदों पर भर्ती

Assistant Professor Vacancy in Chhattisgarh 2025 भर्ती हेतु स्वीकृत पदों में सहायक प्राध्यापक के 625 पद शामिल किए गए हैं। इन पदों पर भर्ती होने से महाविद्यालयों में पढ़ाई की गुणवत्ता और शोध कार्यों में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा।

क्रीड़ा अधिकारी के 25 पदों पर भर्ती

इसी क्रम में क्रीड़ा अधिकारी के 25 पदों पर भर्ती की स्वीकृति दी गई है। इन पदों की नियुक्ति से महाविद्यालयों में खेलकूद और शारीरिक शिक्षा की गतिविधियों को और अधिक सशक्त बनाया जा सकेगा।

ग्रंथपाल के 50 पदों पर भर्ती

इसके अतिरिक्त ग्रंथपाल के 50 पदों पर भी भर्ती की स्वीकृति दी गई है। ग्रंथपालों की नियुक्ति से पुस्तकालयों का बेहतर संचालन होगा और विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री अधिक व्यवस्थित रूप से उपलब्ध हो सकेगी।

यह निर्णय प्रदेश के युवाओं को रोज़गार के नए अवसर प्रदान करेगा। साथ ही, उच्च शिक्षा संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों और अधिकारियों की संख्या बढ़ने से विद्यार्थियों को बेहतर मार्गदर्शन प्राप्त होगा। प्रदेश सरकार का यह कदम महाविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण निर्मित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे शिक्षण-अध्यापन का स्तर उन्नत होगा और संकायों की मजबूती सुनिश्चित होगी। इस पहल से विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और सीखने के अवसर प्राप्त होंगे। बेहतर संसाधनों और शिक्षकों की उपलब्धता से विद्यार्थियों की अकादमिक क्षमता और भी निखरेगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह निर्णय प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण वातावरण निर्मित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। महाविद्यालयों में रिक्त 700 पदों पर भर्ती होने से न केवल महाविद्यालयों में शैक्षणिक स्तर सुदृढ़ होगा, बल्कि विद्यार्थियों को बेहतर मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और सीखने के अवसर भी प्राप्त होंगे। यह पहल आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सशक्त बनाने के साथ शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार करेगी।

वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा को प्राथमिकता दे रही है। शासकीय महाविद्यालयों में 700 पदों पर भर्ती की स्वीकृति इसी दिशा में एक बड़ा निर्णय है। इस पहल से एक ओर जहाँ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे, वहीं दूसरी ओर प्रदेश की उच्च शिक्षा प्रणाली को नई मजबूती मिलेगी। वित्त विभाग द्वारा दी गई यह अनुमति भविष्य की पीढ़ी को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने में सहायक सिद्ध होगी।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार लगातार विभिन्न विभागों में भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। प्रदेश सरकार द्वारा विगत 21 माह में महिला एवं बाल विकास विभाग में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका, स्वास्थ्य विभाग में विशेषज्ञ चिकित्सकों और चिकित्सा अधिकारियों, आदिम जाति विकास विभाग में छात्रावास अधीक्षक सहित अन्य विभिन्न विभागों के अनेक पदों पर भर्ती की जा चुकी है। इसी प्रकार मुख्यमंत्री साय की घोषणा के अनुरूप शिक्षकों के 5000 पदों सहित अन्य पदों पर भर्ती की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, तकनीक और प्रशासनिक सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं को बड़े पैमाने पर अवसर उपलब्ध कराए जाएं। इन सतत प्रयासों से छत्तीसगढ़ की युवा शक्ति का बेहतर उपयोग होगा और प्रदेश विकास की नई ऊँचाइयों तक पहुँचेगा।

 

CG Crime News: निजी फार्म में चल रही थी नशे की पार्टी, पुलिस ने दो लोगों को किया गिरफ्तार…

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”रायपुर पुलिस ने नाईट पार्टी के खिलाफ बड़ा एक्शन, तेलीबांधा पुलिस ने देर रात एक निजी फार्म में छापा, पुलिस ने फार्म से दो आरोपियों को गिरफ्तार”

छत्तीसगढ़ पुलिस अवैध नशे और रात के समय में फार्म हॉउस में होने वाली नाईट पार्टियों को लेकर सख्त रुख अपना रही है। इसी कड़ी में एक बार फिर रायपुर पुलिस ने नाईट पार्टी के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। रायपुर की तेलीबांधा पुलिस ने देर रात एक निजी फार्म में छापेमार कार्रवाई की है। यहां पुलिस को बड़ी मात्रा में हुक्का पॉट और विदेशी शराब की बोतलें मिली है।

निजी फार्म में चल रही थी नशे की पार्टी

मिली जानकारी के अनुसार, तेलीबांधा पुलिस को सूचना मिली की वीआईपी रोड स्थित एक निजी फार्म में नशे की पार्टी हो रही है। इसके बाद पुलिस की टीम फार्म में पहुंची। इस दौरान पुलिस ने देखा कि, फार्म में खुलेआम नशे की पार्टी हो रही है और इस पार्टी में छत्तीसगढ़ के साथ-साथ दूसरे राज्य के लोग भी शामिल थे।

पुलिस ने दो लोगों को किया गिरफ्तार

पुलिस ने देर रात छापेमार कार्रवाई करते हुए आरोपी रविन्द्र सिंह चावला समेत एक अन्य को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान फ़ार्म में मौजूद लोगों ने पुलिस के साथ बदतमीजी भी की। तेलीबांधा पुलिस ने इस पार्टी में चरस और चिट्टा के उपयोग की जानें की आशंका जताई है। पुलिस की टीम ने फार्म से बड़ी मात्रा में हुक्का पॉट और विदेशी शराब की बोतलें जब्त की है। पुलिस ने इस मामले में आगे की जांच शुरू कर दी है और आरोपियों से पूछताछ कर रही है। ऐसा माना जा रहा है कि, पूछताछ में बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

 

“अगले महीने आ सकता है ला नीना. भारत में पड़ेगी कड़ाके की ठंड, पहाड़ों पर होगी भारी बर्फबारी, IMD ने दी चेतावनी”

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भारत के कई राज्यों में इस बार औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की जा रही है. मौसम विभाग की ओर से सितंबर महीने में भी औसत से ज्यादा बारिश होने की चेतावनी दी गई थी, जिसका असर सितंबर की शुरुआत में देखने को भी मिला.

कई राज्यों में बारिश आफत बनकर बरसी. अब मौसम विज्ञानियों ने चेतावनी दी है कि इस साल के आखिर में ला नीना की स्थिति फिर से लौट सकती है, जिससे भारत में सामान्य से ज्यादा सर्दियां पड़ सकती हैं. यानी इस साल भारत में काड़के की ठंड पड़ सकती है.

अमेरिका के जलवायु पूर्वानुमान केंद्र ने कहा कि अक्टूबर-दिसंबर में ला नीना आने की 71 प्रतिशत संभावना है. इस साल की शुरुआत में थोड़े समय के लिए आए ला नीना की तरह, इसके फरवरी 2026 तक खत्म होने की संभावना है. ला नीना, प्रशांत महासागर में समुद्र के पानी के ठंडा होने की स्थिति है, जिसकी वजह से उत्तरी भारत में सामान्य से ज्यादा सर्दियां होती हैं.

मानसून के दौरान बनी रहेगी तटस्थ स्थिति ला नीना, एल नीनोसदर्न ऑसिलेशन (ENSO) का ठंडा रूप है. इसमें प्रशांत महासागर का पानी ठंडा हो जाता है और इसका असर दुनिया के मौसम पर पड़ता है. भारत में इसे ज्यादा ठंडी सर्दियों से जोड़कर देखा जाता है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अभी प्रशांत महासागर में न तो एल नीनो है और न ही ला नीना है. IMD के पूर्वानुमानों के मुताबिक मानसून के दौरान यही तटस्थ स्थिति बनी रहेगी.

ला नीना बनने की 50प्रतिशत संभावना हालांकि, आईएमडी ने मानसून के बाद के महीनों में ला नीना के उभरने की संभावना का अनुमान लगाया है. आईएमडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस साल अक्टूबर दिसंबर के बीच ला नीना बनने की 50प्रतिशत से ज्यादा संभावना है. भारत में ला नीना आमतौर पर ज्यादा ठंडी सर्दियों से जुड़ा होता है. ऐसे में इस साल भारत में कड़ाके की सर्दी पड़ सकती है. जलवायु परिवर्तन की वजह से गर्मी का असर कुछ हद तक इसे कम कर सकता है, लेकिन ला नीना वाले सालों में सर्दियां सामान्य से ज्यादा ठंडी होती हैं. इसलिए यह साल सबसे गर्म सालों में नहीं गिना जाएगा. क्योंकि मानसून की बारिश ने पहले ही तापमान को कम किया हुआ है.

स्काइमेट वेदर के अध्यक्ष जीपी शर्मा ने कहा कि प्रशांत महासागर पहले से ही सामान्य से ठंडा है, लेकिन अभी ला नीना की सीमा तक नहीं पहुंचा है. अगर समुद्र की सतह का तापमान 0.5°C से नीचे चला जाए और यह लगातार तीन तिमाहियों तक बना रहे. तभी इसे ला नीना माना जाएगा. ऐसी ही स्थिति 2024 के आखिर में भी बनी थी. जब नवंबर से जनवरी तक थोड़े समय के लिए ला नीना जैसी स्थिति आई थी और फिर दोबारा तटस्थ ( न एल नीनो और न ला नीना) हो गई थी.

पहाड़ी राज्यों में हो सकती है भारी बर्फबारी जीपी शर्मा ने बताया कि प्रशांत महासागर में जारी ठंडक वैश्विक मौसम को प्रभावित कर सकती है. अगर ला नीना आता है तो अमेरिका पहले से ही सूखी सर्दियों (ड्राई विंटर) के लिए अलर्ट पर है. जबकि भारत में इसका असर खासतौर पर उत्तर भारत और हिमालयी इलाकों में पड़ेगा. ये कड़ाके की ठंड और पहाड़ी राज्यों में भारी बर्फबारी ला सकता है.

भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER), मोहाली और ब्राज़ील के राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान की एक स्टडी में पता चला कि 2024 में ला नीना ने उत्तर भारत में तेज शीत लहरें लाने में अहम भूमिका निभाई. स्टडी के अनुसार, ला नीना के समय निचले स्तर की हवाओं में बदलाव ठंडी हवा को ऊपरी इलाकों से भारत की ओर लाता है. इसी कारण शीत लहरें और उनकी अवधि, एल नीनो और सामान्य सालों की तुलना में, ला नीना वाले सालों में ज्यादा होती हैं.

 

“पूर्णिया के सहारे सीमांचल को साधने का प्लान, समझें पीएम मोदी के आज के बिहार के दौरे के मायने?”

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विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बिहार का सियासी माहौल गरमाया हुआ है. राजनीतिक पार्टियां मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए हर संभव कोशिश में जुटी हुई हैं. जहां एक ओर एनडीए फिर से सत्ता पर काबिज होने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए है, वहीं दूसरी ओर महागठबंधन चुनावी अखाड़े में जमकर पसीना बहा रहा है.

इस बीच सियासी दलों का सबसे ज्यादा फोकस सूबे के सीमांचल इलाके पर दिखाई दे रहा है. इसी इलाके में आज यानी 15 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दौरा कर रहे हैं, जहां आमजन को कई सौगातें देने वाले हैं.

पीएम मोदी पूर्णिया में 36,000 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का ऐलान करने वाले हैं, जिसमें पूर्णिया हवाई अड्डे के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन, राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की भी शुरुआत समेत अन्य विकास कार्य शामिल हैं. वह बिहार में इस साल सातवीं बार पहुंच रहे हैं, जहां उन्होंने सीमांचल पर फोकस किया है. ये वही इलाका है, जो तेजी से राजनीतिक रणक्षेत्र के रूप में उभरा है. यहां प्रशांत किशोर की जन सुराज और असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के मैदान में उतरने से मुकाबला और भी जटिल हो गया है. आइए जानते हैं कि सीमांचल में किस तरह से सियासी समीकरण बदल रहे हैं और मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण की संभावना बढ़ने से सियासी लड़ाई दिलचस्प हुई है…

महागठबंधन ने दिया एकजुटता का मैसेज सीमांचल में एनडीए ने विकास पर अपना दांव लगाया है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में कटिहार का दौरा किया था, जहां उन्होंने किसानों को सहायता का आश्वासन दिया और मखाना बोर्ड के गठन की घोषणा की थी. अब पीएम मोदी का दौरा है. साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी दौरा कर चुके हैं. वहीं, विपक्षी मोर्चे पर कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने अपनी वोटर अधिकार यात्रा के जरिए समर्थन जुटाने की कोशिश की है. ये यात्रा सीमांचल के 8 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरी.

वोटर यात्रा के दौरान उन्होंने महागठबंधन के भीतर एकजुटता का मैसेज दिया क्योंकि पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने कांग्रेस से टिकट न मिलने के बाद निर्दलीय आरजेडी के खिलाफ चुनाव लड़ा था और लालू प्रसाद यादव के परिवार से रिश्ते बिगड़ गए थे. वोटर अधिकार के यात्रा पूर्णिया पहुंचने पर पप्पू यादव और तेजस्वी यादव के बीच आपसी रिश्ते फिर से जुड़ने जैसा मैसेज दिया गया. राहुल गांधी ने अपने संबोधनों के दौरान बेरोजगारी, कृषि और शिक्षा के मुद्दों पर राज्य और केंद्र दोनों सरकारों पर हमला बोला था.

ओवैसी की एंट्री से किसको नुकसान? इन सब के अलावा सीमांचल में एआईएमआईएम और जन सुराज की मौजूदगी ने सियासी ड्रामे को और भी रोचक बना दिया है. एआईएमआईएम ने 2020 के विधानसभा चुनावों में सीमांचल में पांच विधानसभा सीटें हासिल की थीं, लेकिन इनमें से बाद में 4 विधायक आरजेडी में शामिल हो गए थे. अभी अमौर से उसका एकमात्र विधायक बचा है. यहां ओवैसी ने कांग्रेस और आरजेडी का समीकरण बिगाड़कर रख दिया है क्योंकि मुस्लिम वोट का ध्रुवीकरण हुआ है. पार्टी फिर से वापसी करने और इस क्षेत्र में अपना प्रभाव स्थापित करने के लिए ताबड़तोड़ मेहनत कर रही है.

इधर, राजनीतिक रणनीतिकार से कार्यकर्ता बने प्रशांत किशोर भी अपने जन सुराज आंदोलन के जरिए सीमांचल में काफी समय खर्च कर रहे हैं. वो लगातार दावा कर रहे हैं कि ओवैसी, लालू और नीतीश कुमार ने मुसलमानों का भला नहीं किया है. अब वे विकास के जरिए उनकी स्थिति बदलने वाले है. वे रूपौली, कस्बा, बनमनखी और बैसी जैसे विधानसभा क्षेत्रों में अपना फोकस किए हुए हैं. राजनीति के जानकारों का मानना है कि प्रशांत किशोर की एंट्री से सीमांचल में मुसलमानों का वोट बंटेगा, जिससे महागठबंधन को नुकसान हो सकता है और एनडीए गठबंधन को फायदा पहुंच सकता है.

सीमांचल में कितने फीसदी मुसलमान? बिहार के सीमांचल में किशनगंज, अररिया, कटिहार और पूर्णिया जिले आते हैं और ये इलाका पश्चिम बंगाल और असम से सटा हुआ है. इन जिलों में 24 विधानसभा सीटें आती हैं. अररिया जिले में 6, किशनगंज में 4, पूर्णिया 7 और कटिहार में 7 विधानसभा सीटें हैं, जो चुनावी समीकरण को बनाने और बिगाड़ने का काम करती हैं. यहां खासबात ये है कि मुस्लिम आबादी ज्यादा है, जिसके चलते राजनीतिक दल अपने दांव-पेंच से उन्हें अपने पाले में करने में जुटे रहते हैं.

साल 2011 की जनगणना के मुताबिक, सीमांचल में औसतन 46 फीसदी मुसलमान हैं. अररिया में 43 फीसदी, किशनगंज में 68 फीसदी, पूर्णिया में 38 फीसदी, कटिहार में 44 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं. इसके अलावा यादवों और अति पिछड़े वर्गों (ईबीसी) की अच्छी-खासी उपस्थिति है, जिसके चलते राजनीतिक समीकरण निर्णायक बन जाता है.

2015 और 2020 चुनाव के आंकड़े अगर पिछले चुनावों की बात करें तो सीमांचल में कांग्रेस और आरजेडी की दबदबा रहा है, लेकिन ओवैसी के अकेले दम पर साल 2020 का चुनाव लड़ने से आरजेडी और कांग्रेस का समीकरण गड़बड़ा गया था. इलाके की 24 सीटों में से कांग्रेस ने 5, आरजेडी और लेफ्ट ने एक-एक सीट पर जीत दर्ज की थी, जबकि एआईएमआईएम ने पांच सीटों पर विजय पताका फहराई थी. इस लड़ाई में बीजेपी को फायदा पहुंचा और उसने सबसे ज्यादा 8 सीटें हासिल कर लीं और जेडीयू के खाते में 4 सीटें गईं. सबसे ज्यादा नुकसान आरजेडी को हुआ था. वहीं, 2015 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 5, जेडीयू ने 5, कांग्रेस ने 5 सीटों पर विजय पताका फहराई थी. इसके अलावा आरजेडी ने सबसे ज्यादा 9 सीटें जीती थीं.

SIR में सबसे ज्यादा वोट पूर्णिया और किशनगंज से हटाए अभी हाल ही में हुए वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भी जमकर सियासत देखी गई. एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि मुस्लिम बहुल सीमांचल क्षेत्र के चार जिलों में से दो जिले ऐसे हैं जहां सबसे ज्यादा वोट काटे गए हैं. हालांकि यूपी से सटे गोपालगंज पहला जिला था जहां सबसे अधिक 15.1 फीसदी मतदाता सूची हटाए गए. इसके बाद सीमांचल के पूर्णिया और किशनगंज जिलों का नंबर देखने को मिला. दोनों जिलों में क्रमशः 12.08 फीसदी और 11.82 फीसदी वोट हटाए गए, कटिहार में 8.27 फीसदी और अररिया में 7.59 फीसदी वोटों को हटाया गया.

“पीएम के दौरे पर तेजस्वी यादव ने किस मंत्री को बरखास्त करने की मांग की, पूछा- क्या मंत्री के खिलाफ FIR होगी?”

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बिहार में सियासी हलचल तेज है. इस बीच आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस मौके पर उन्होंने नीतीश सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने मंत्री जिबेश मिश्रा पर आरोप लगाए.

तेजस्वी यादव ने कहा, आपके सामने बिहार के नगर विकास एवं आवास मंत्री जिबेश मिश्रा की करतूतों को पेश करना चाहता हूं. वो एक फर्जी ड्रग मामले में भी दोषी पाए गए हैं. तेजस्वी यादव ने आगे कहा, मंत्री रहते हुए उन्होंने एक गंभीर अपराध किया है, जिसका वीडियो मैं आपके सामने पेश कर रहा हूं. जब मंत्री जी अपने निर्वाचन क्षेत्र के दौरे पर थे, तो एक पिछड़े समुदाय से आने वाले पत्रकार ने उनसे सड़कों के बारे में सवाल पूछा. सवाल पूछे जाने पर मंत्री जी ने उनके साथ मारपीट की और गाली-गलौज की.

पीएम के दौरे पर क्या मांग की? इस वीडियो को दिखाने के बाद तेजस्वी यादव ने कहा, बिहार में पूरी तरह अराजकता है. क्या इस सीएम को पता है कि मंत्री को फर्जी ड्रग मामले में दोषी ठहराया गया है? पीएम आज यहां आ रहे हैं. क्या इस पत्रकार की मां नहीं है? क्या उसे न्याय मिलेगा?. आप (पीएम) अपने बारे में बोलेंगे, लेकिन क्या आप इस पत्रकार को न्याय दिलाएंगे और मंत्री को बर्खास्त करेंगे? क्या मंत्री के खिलाफ एफआईआर होगी? क्या उन्हें सजा मिलेगी? तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर हमला करते हुए कहा, सरकार और सरकार में बैठे लोग सब अपराधी हैं. सम्राट और विजय अपराधी हो गए हैं. साथ ही उन्होंने कहा, सिर्फ एफआईआर नहीं बल्कि कार्यवाही हो.

पीएम के दौरे पर पूछे सवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बिहार की यात्रा करेंगे. इस दौरान वो राज्य को कई बड़ी सौगात दे सकते हैं. पीएम के दौरे के मौके पर तेजस्वी यादव ने निशाना साधा. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर के कहा, पीएम मोदी, आज पूर्णिया में जुमलों की बारिश करने से पूर्व कृपया अपने सभा स्थल से 2-3 किलोमीटर के दायरे में अवस्थित जर्जर ग्रामीण सड़क, स्कूल, बदहाल स्वास्थ्य केंद्र और महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी-पलायन से परेशान महिलाओं और युवाओं की जनसमस्या आपको जाननी चाहिए. पूर्णिया के मेडिकल कॉलेज की बदहाल स्थिति कल आपने जरूर ही देखी होगी.

तेजस्वी यादव ने आगे कहा, आपकी एक रैली से बिहार जैसे गरीब राज्य पर 100 करोड़ का भारी-भरकम वित्तीय बोझ पड़ता है. आप बिहार में कई रैलियां कर चुके हैं. हजारों करोड़ की इतनी बड़ी धनराशि से तो बिहार के स्कूलों की चारदीवारी, खेल के मैदान और लड़कियों के लिए स्कूल में अलग से शौचालय का निर्माण हो सकता था.

ऐसे ही झूठ और जुमले बेचने आ रहे हैं तेजस्वी यादव ने पीएम के पुराने वादे याद दिलाते हुए कहा, पीएम, क्या आपको याद है आपने 11.5 वर्ष पूर्व इसी पूर्णिया जिला से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने का वादा किया था? क्या हुआ आपकी उस जुबान का? क्या आप फिर चुनाव पूर्व बिहारवासियों को ऐसे ही झूठ और जुमले बेचने आ रहे हैं? प्रधानमंत्री जी, आप 11 वर्षों की अपनी केंद्र और 20 सालों की NDA सरकार की विफलताएं देख जोर-जोर से जंगलराज-जंगलराज कहिए ताकि आपकी असफलताएं और जनहित के मुद्दे इस काल्पनिक शोर में दब जाएं. लेकिन बिहार और बिहारवासी आपके बनावटीपन से अब अच्छे से अवगत हो चुके हैं इसलिए बिहार में अब फिर झूठ नहीं चलेगा.

“पाकिस्तान, तुर्की, सऊदी और कतर.57 मुस्लिम देशों से भी क्यों नहीं डरता इजराइल”

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आज कतर की राजधानी दोहा में अरब-इस्लामी समिट होने वाली है. इसमें अरब लीग और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के 57 मुस्लिम देश भी शामिल हो रहे हैं. इजराइल ने 9 सितंबर के हमास के नेताओं को निशाना बनाकर कतर पर हवाई हमले किए थे.

जिसके बाद कतर ने इमरजेंसी समिट बुलाई है. अब तक इजराइल के खिलाफ OIC की कई बैठकें हो चुकी है. पिछले एक साल में ही 3 बैठक हुई है, लेकिन बात निंदा से आगे बढ़ ही नहीं पाई. सवाल उठ रहा है कि इजराइल इन देशों से क्यों नहीं डरता है.

इसकी वजह है कई मुस्लिम देशों के साथ उसके समझौते.

अजरबैजान-इजराइल के बीच तेल समझौता अजरबैजान, इजराइल की जरूरत का 60% तेल सप्लाई करता है. यह देश इजराइल का सबसे बड़ा तेल सप्लायर है. मार्च 2025 में दोनों देशों ने एक गैस एक्सप्लोरेशन एग्रीमेंट पर दस्तखत किए थे, जिसके तहत अजरबैजान की राष्ट्रीय तेल कंपनी SOCAR को इजराइली क्षेत्रों में गैस खोजने का लाइसेंस मिला. अक्टूबर 2023 में जब हमास-इजराइल युद्ध के कारण अशदोद और हाइफा बंदरगाह बंद हुए थे, तब अजरबैजान ने इजराइल की ऊर्जा जरूरतें पूरी करने में अहम भूमिका निभाई.

यूएई और इजराइल के बीच अब्राहम समझौता सितंबर 2020 में दोनों देशों के बीच अब्राहम समझौता हुआ था. इसके तहत UAE, इजराइल को मान्यता देने वाला पहला अरब राष्ट्र बना. बाद में बहरीन, मोरक्को और सूडान भी इसमें शामिल हुए. 2024 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में इजाफा देखा गया. इजराइल, UAE से अपनी जरूरत के 10% पेट्रोलियम उत्पाद खरीदता है. UAE और इजराइल के बीच पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और सुरक्षा के क्षेत्रों में व्यापक सहयोग शुरू हुआ है. हालांकि, गाजा युद्ध के बाद UAE ने चेतावनी दी है कि वेस्ट बैंक के कब्जे की योजनाओं के कारण अब्राहम समझौता खतरे में पड़ सकता है.

और इजराइल के बीच गैस समझौता मिस्र और इजराइल के बीच प्राकृतिक गैस समझौता दोनों देशों की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम है. इजराइल की लेवियाथन और तामार गैस फील्ड्स से निकली गैस मिस्र के LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) टर्मिनलों के जरिए यूरोप तक पहुंचाई जाती है. 2018 में हुए डेल्फिन समझौते के तहत इजराइल को मिस्र से नेचुरल गैस की सप्लाई मिलती है. मिस्र के साथ गैस व्यापार से इजराइल को हर साल अरबों डॉलर की कमाई होती है. गैस पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से दोनों देश इलाके में ऊर्जा हब बनने की दिशा में काम कर रहे हैं.

सऊदी हूती से परेशान, इजराइल न हो तो मुश्किलें बढ़ेगी सऊदी अरब हूती विद्रोहियों की वजह से परेशान है. हूती विद्रोही 2014 से यमन में सक्रिय है और सऊदी अरब पर रॉकेट और ड्रोन हमले करते रहते हैं. अगर इस क्षेत्र में इजराइल कमजोर पड़ता है, तो ईरान की शक्ति और बढ़ेगी, जिससे हूती समूह और मजबूती हो जाएंगे. सऊदी अरब समझता है कि इजराइल की मौजूदगी से ईरानी विस्तारवाद पर रोक लगती है. हूती विद्रोहियों ने सऊदी में तेल डिपो पर कई बार हमले किए हैं, जिससे तेल का वैश्विक बाजार भी प्रभावित हुआ. वहीं इजराइल, यमन में हूती विद्रोहियों पर लगातार हमले करता है. इजराइल के न होने से सऊदी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

तुर्की पर्दे के पीछे से व्यापार कर रहा मई 2024 में गाजा युद्ध के कारण तुर्की ने इजराइल के साथ व्यापारिक संबंध तोड़ दिए, लेकिन तुर्की का दूतावास अभी भी तेल अवीव में सक्रिय है. दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे से व्यापार जारी है. NATO सदस्य के रूप में तुर्की के इजराइल के साथ दशकों पुराने रक्षा संबंध हैं. तुर्की की कंपनियां तीसरे देशों जैसे कि जॉर्जिया और आर्मेनिया के माध्यम से इजराइल के साथ व्यापार कर रही हैं. 2024 में यह व्यापार $1.2 बिलियन तक पहुंचा है. तुर्की में 26,000 की यहूदी आबादी भी है. एर्दोगन सरकार सार्वजनिक रूप से फिलिस्तीन के समर्थन में बयान देती है, लेकिन व्यावसायिक हितों की वजह से इजराइल से संबंध बनाए हुए है.

पाकिस्तान और अमेरिकी दबाव पाकिस्तान और इजराइल के बीच संबंध स्थापना में अमेरिका की भूमिका जटिल है. अमेरिका चाहता है कि अधिक से अधिक मुस्लिम देश इजराइल को मान्यता दें, लेकिन पाकिस्तान में जनता का बड़ा हिस्सा फिलिस्तीनी समर्थक है. अमेरिकी आर्थिक और सैन्य सहायता के मजे लूट रहा पाकिस्तान दुविधा में है. IMF से लोन और अमेरिकी सहायता के लिए पाकिस्तान को अमेरिकी दबाव का सामना करना पड़ता है. चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) की वजह से अमेरिका पाकिस्तान पर और दबाव बना रहा है. अगर पाकिस्तान ने इजराइल को मान्यता दी तो घर में ही विरोध का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए पाकिस्तान अब तक कोई फैसला नहीं ले पाया है.

“चरमरा गई है चीन की अर्थव्यवस्था, मंदी से पूरे देश में मचा हाहाकार, पैसा खर्च करने से कतरा रहे हैं लोग!”

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चीन की विकास दर अब धीमी हो रही है. अगस्त महीने में औद्योगिक उत्पादन और खुदरा बिक्री दोनों ही उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए. नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (NBS) के अनुसार, अगस्त में औद्योगिक उत्पादन 5.2% बढ़ा, जबकि जुलाई में यह 5.7% था.

बाजार की उम्मीदें भी 5.7% की थीं, इसलिए यह संख्या निराशाजनक रही. यह पिछले साल के अगस्त के बाद सबसे धीमी वृद्धि है. चीन में इस साल सबसे तेज गर्मी और सबसे लंबा मानसून भी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए चुनौती बना.

उपभोक्ता खर्च में कमी खुदरा बिक्री के आंकड़े भी बहुत खास नहीं रहे. अगस्त में यह 3.4% बढ़ी, जो जुलाई के 3.7% से कम है और विशेषज्ञों की 3.9% की उम्मीदों से पीछे रही. उपभोक्ता खर्च में गिरावट की बड़ी वजह प्रॉपर्टी सेक्टर की मंदी और नौकरी बाजार की सुस्ती बताई जा रही है. प्रॉपर्टी की कीमतों में लगातार गिरावट और रोजगार के अवसरों की कमी ने लोगों की खर्च करने की क्षमता और इच्छा दोनों को प्रभावित किया है. इसके अलावा, कारोबारियों का भरोसा भी कम हुआ है, जो आर्थिक वृद्धि को और धीमा कर रहा है. प्रॉपर्टी निवेश जनवरी से अगस्त के बीच पिछले साल की तुलना में 12.9% कम हुआ, जबकि नए घरों की बिक्री में भी 4.7% की गिरावट दर्ज की गई है.

आर्थिक जोखिम बरकरार चीन की सरकार ने हालात को लेकर सतर्कता जाहिर की है. नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के अधिकारियों ने माना है कि अर्थव्यवस्था अभी स्थिर जरूर है, लेकिन कई अनिश्चित और अस्थिर कारक मौजूद हैं. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, प्रवक्ता फू लिंगहुई ने स्पष्ट किया कि वर्तमान आर्थिक माहौल में कई जोखिम और चुनौतियां हैं. उन्होंने नीति निर्माताओं को चेतावनी दी कि मैक्रोइकोनॉमिक नीतियों को मजबूती से लागू करना जरूरी है. साथ ही, नौकरी, व्यापार, बाजार और उपभोक्ता उम्मीदों को स्थिर बनाए रखना प्राथमिकता होनी चाहिए.

बेरोजगारी दर में भी बढ़ोतरी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में शहरी बेरोजगारी दर बढ़कर 5.3% हो गई, जो जुलाई के 5.2% से बढ़ी है. यह संकेत देता है कि रोजगार के अवसर अभी भी सीमित हैं. प्रॉपर्टी क्षेत्र की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है, जहां नए घरों की कीमतें महीने-दर-महीने 0.3% और साल-दर-साल 2.5% गिर गई हैं. निवेश में गिरावट और बिक्री में कमी इस क्षेत्र की कमजोरी को दर्शाती है, जो पूरे आर्थिक ढांचे पर असर डाल रही है.

“GST 2.0 ने मचाया धमाल, शेयर बाजार में आया 6 लाख करोड़ का उछाल”

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“GST 2.0 ने मचाया धमाल, शेयर बाजार में आया 6 लाख करोड़ का उछाल”

भारतीय बाजार में सुस्ती के कारण पिछले कुछ समय से निवेशकों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था. लेकिन 14 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा GST को आसान और किफायती बनाने की घोषणा के बाद, ऑटो और कंजम्प्शन से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी आई है.

इस तेजी के चलते एक महीने के भीतर शेयर बाजार में करीब 6 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज हुई है.

निफ्टी ऑटो इंडेक्स ने पिछले महीने 11% से ज्यादा की बढ़त हासिल की है. ET की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस बीच ऑटो कंपनियों की टोटल मार्केट वैल्यू अब 5.13 लाख करोड़ रुपये के पार चला गया है. खास बात यह है कि रॉयल एनफील्ड बनाने वाली आयशर मोटर्स के शेयर 19% तक बढ़े, जबकि भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी के शेयरों में 18% की तेजी देखी गई.

ऑटो सेक्टर पर GST रिफॉर्म का असर सरकार ने 22 सितंबर से लागू होने वाले नए GST नियमों के तहत छोटी कारों पर टैक्स दर को 28-31% से घटाकर 18% कर दिया है. वहीं बड़ी एसयूवी पर भी GST की दर को घटाकर लगभग 40% किया गया है. इसी तरह 350 cc से कम क्षमता वाले दोपहिया वाहनों पर GST दर 28% से घटाकर 18% की गई है. इस बदलाव से वाहनों की कीमतों में कमी आएगी जिससे खरीदारों को फायदा होगा और बिक्री में इजाफा होगा.

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स प्रोडक्ट्स में भी बढ़ी मांग ET की एक रिपोर्ट के अनुसार, GST कटौती का असर सिर्फ ऑटो सेक्टर तक सीमित नहीं रहा. कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर ने भी जबरदस्त प्रदर्शन किया है. निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में 5.6% की बढ़ोतरी हुई है, जिससे इस सेक्टर का मार्केट वैल्यू 78,000 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया. फुटवियर कंपनी बाटा इंडिया के शेयरों में 20% तक की बढ़त आई है. सरकार ने 2500 रुपये से कम कीमत वाले फुटवियर पर GST को 12% से घटाकर 5% कर दिया है.

भारत के कंसम्पशन सेक्टर में यह बदलाव एक बड़े पैमाने पर रिस्ट्रकचरिंग का संकेत देता है. स्वतंत्रता दिवस पर GST सुधार के ऐलान ने कंज्यूमर मार्केट में जबरदस्त तेजी ला दी है, जिससे निवेशकों और कंपनियों दोनों को लाभ हो रहा है. माना दा रहा है कि अगले कुछ महीनों में इस तेजी का असर और भी स्पष्ट होगा, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है.

PM मोदी का दिवाली तोहफा: एसी, फ्रिज, टीवी, कार समेत ये चीजें सस्ती!”

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दिवाली की खुशियाँ इस बार केंद्र सरकार ने पहले ही शुरू कर दी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को बड़ी सौगात देते हुए 175 से अधिक उत्पादों पर GST दरों में कटौती की घोषणा की है।

यह निर्णय 56वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में लिया गया, जिसमें सभी राज्यों के वित्त मंत्री भी शामिल हुए। यह बदलाव 22 सितंबर से प्रभावी होंगे।

रोजमर्रा की जरूरतों पर बड़ा फायदा इस फैसले का सीधा लाभ आम जनता को होगा, क्योंकि घरेलू उपयोग की कई आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में कमी आएगी। खासतौर पर खाद्य पदार्थ, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरणों की GST दरें कम की गई हैं, जिससे इन वस्तुओं की उपलब्धता सस्ती हो जाएगी।

महत्वपूर्ण कटौती के उदाहरण: घी, मक्खन, पनीर, चीज़, डेयरी स्प्रेड्स पर GST दर 12% से घटाकर 5% कर दी गई है। नमकीन, भुजिया, मिक्सचर (पैक्ड) पर 12% से 5% किया गया। बर्तन (Utensils) पर अब 12% की जगह 5% GST लगेगा। हेयर ऑयल, शैम्पू, टूथपेस्ट, टॉयलेट सोप, टूथब्रश, शेविंग क्रीम पर GST दर 18% से घटकर 5% हो गई है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और वाहन भी सस्ते होंगे मूल्य में कटौती केवल घरेलू सामान तक सीमित नहीं है। बड़े उपकरण और वाहन भी अब किफायती हो जाएंगे। एसी (Air Conditioners) पर GST दर 28% से घटाकर 18% कर दी गई है। टीवी (32 इंच से बड़े LED और LCD) पर 28% से 18% किया गया। मॉनिटर्स और प्रोजेक्टर पर भी अब 18% GST के दायरे में आएंगे। डिशवॉशिंग मशीन पर GST दर घटाकर 18% की गई। सिलाई मशीन व उसके पुर्ज़े पर 12% से घटाकर 5% किया गया।

दिवाली से पहले ऑटोमोबाइल्स भी सस्ते पेट्रोल/डीजल हाइब्रिड, LPG, CNG छोटी कारें पर GST 28% से 18%, डीज़ल/हाइब्रिड कारें (1500cc, 4000mm तक) पर 28% से 18%, तीन पहिया वाहन पर 28% से 18%, मोटरसाइकिल (350cc तक) 28% से 18%, मालवाहक वाहन पर GST 28% से 18% हो गया हैं।

GST दरों में यह कटौती से क्या होगा असर? GST दरों में यह कटौती महंगाई पर रोक लगाने और उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति बढ़ाने में मददगार साबित होगी। घरेलू उपकरणों, खाद्य पदार्थों और इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतों में कमी आने से बाजार में मांग बढ़ेगी और उद्योगों को भी फायदा होगा। इसके साथ ही दिवाली के त्योहार पर उपभोक्ताओं को सस्ती चीजें खरीदने का सुनहरा मौका मिलेगा।