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CG: भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए कर्मचारी चयन मंडल का गठन…

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भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाना हमारी प्राथमिकतामुख्यमंत्री’

युवाओं को निष्पक्ष और विश्वसनीय भर्ती प्रणाली देना सरकार का लक्ष्यमुख्यमंत्री’

अब नियमित और सुव्यवस्थित होगी भर्ती प्रक्रियामुख्यमंत्री श्री साय’

छत्तीसगढ़ विधानसभा में  आज छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल विधेयक, 2026 को पारित किया गया। इस कानून के माध्यम से राज्य में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती प्रक्रिया को एकीकृत, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल की स्थापना की जाएगी।

विधानसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य के युवाओं को निष्पक्ष, पारदर्शी और सुव्यवस्थित भर्ती प्रणाली उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए भर्ती प्रक्रियाओं को सरल और विश्वसनीय बनाना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में विभिन्न विभागों में 32 हजार से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है और इसे अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए संस्थागत सुधार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत भर्ती परीक्षाओं को नियमित रूप से आयोजित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि कर्मचारी चयन मंडल के गठन के बाद राज्य में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी की भर्तियों के लिए नियमित परीक्षा कैलेंडर जारी किया जाएगा, जिससे अभ्यर्थियों को समयबद्ध तैयारी में सुविधा होगी। साथ ही, सभी प्रमुख परीक्षाओं को निर्धारित समय सीमा में संपन्न कराने का प्रयास किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में विभिन्न विभागों द्वारा अलग-अलग समय पर भर्तियां निकालने से अभ्यर्थियों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। समान योग्यता वाले पदों के लिए अलग-अलग आवेदन और चयन प्रक्रियाओं के कारण समय, संसाधन और प्रयास की अधिक आवश्यकता होती है। नई व्यवस्था से इन समस्याओं का समाधान होगा और प्रक्रिया अधिक सरल व सुव्यवस्थित बनेगी।

उन्होंने कहा कि कर्मचारी चयन मंडल विभिन्न विभागों, वैधानिक निकायों, मंडलों, प्राधिकरणों एवं अन्य संस्थानों के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर सीधी भर्ती की चयन प्रक्रिया आयोजित करेगा। साथ ही, आवश्यकता अनुसार संयुक्त चयन परीक्षा आयोजित करने का प्रावधान भी रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मंडल के माध्यम से परीक्षा प्रक्रिया में एकरूपता आएगी और अभ्यर्थियों को एक समान चयन प्रणाली के आधार पर तैयारी करने का अवसर मिलेगा। इससे परीक्षा प्रबंधन में भी दक्षता बढ़ेगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।

मंडल में एक अध्यक्ष और अधिकतम तीन सदस्य होंगे। इसके अतिरिक्त सचिव, परीक्षा नियंत्रक एवं अन्य अधिकारी-कर्मचारी भी नियुक्त किए जाएंगे। मंडल को यह अधिकार होगा कि वह चयन प्रक्रिया के संचालन के लिए आवश्यकतानुसार एजेंसियों की सेवाएं ले सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस व्यवस्था से भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और भरोसेमंद बनेगी तथा योग्य अभ्यर्थियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर अवसर प्राप्त हो सकेंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह कानून राज्य में एक सुदृढ़ और प्रभावी भर्ती प्रणाली स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगा।

CG: नेशनल डिफेंस कॉलेज के प्रशिक्षु सैन्य और गैर सैन्य अधिकारियों ने की मुख्यमंत्री से मुलाकात…

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  • नेशनल डिफेंस कॉलेज के प्रशिक्षु सैन्य और गैर सैन्य अधिकारियों ने की मुख्यमंत्री से मुलाकात’
  • प्रदेश के विकास में सबसे बड़ी बाधा नक्सलवाद को डबल इंजन की सरकार ने किया दूर’
  • विदेशी मेहमानों ने कहाअद्भुत है छत्तीसगढ़, सुंदर स्मृतियों के साथ पूरी हुई यात्रा’
  • राज्य की भौगोलिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक विशेषताओं की हुई सराहना’
  • नेशनल डिफेंस कॉलेज का 15 सदस्यीय अध्ययन दल 05 दिवसीय यात्रा पर पहुंचा है छत्तीसगढ़’

छत्तीसगढ़ की हमारी धरती सघन वन, प्राकृतिक संसाधन, खनिज संपदा के विपुल भंडार, लोक संस्कृति की अमूल्य विरासत और नैसर्गिक सौन्दर्य का अद्भुत संगम है। इस सुंदर धरती के विकास की सबसे बड़ी बाधा नक्सलवाद को हमारे डबल इंजन की सरकार ने अब दूर कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास कार्यालय में नेशनल डिफेंस कॉलेज के सैन्य एवं सिविल सेवा अधिकारियों के अध्ययन दल से मुलाकात कर आत्मीय संवाद किया। इस दौरान उन्होंने देश-विदेश से आए अधिकारियों का स्वागत करते हुए शाल एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। अध्ययन दल का नेतृत्व कर रहे एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी ने छत्तीसगढ़ प्रवास के अनुभव साझा करते हुए राज्य की भौगोलिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक विशेषताओं की सराहना की। उन्होंने मुख्यमंत्री को सैन्य स्मृति चिन्ह भी भेंट किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ सघन वनों, खनिज संपदा, समृद्ध लोक संस्कृति और नैसर्गिक सौंदर्य का अद्वितीय संगम है। उन्होंने बताया कि राज्य का लगभग 46 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है, जिसमें “एक पेड़ मां के नाम” अभियान और कैम्पा योजना का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। श्री साय ने कहा कि राज्य खनिज संसाधनों से परिपूर्ण है—कोयले से लेकर हीरे तक यहां उपलब्ध हैं। छत्तीसगढ़ वर्तमान में विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में सरप्लस राज्य है, जहां लगभग 30 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए है, जिससे आने वाले समय में इतनी ही अतिरिक्त उत्पादन क्षमता विकसित होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से अब नक्सल समस्या समाप्ति की ओर है। इससे प्रदेश में शांति और विकास की गति और तेज होगी। कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को “धान का कटोरा” कहा जाता है और यहां किसानों के लिए प्रभावी धान खरीदी नीति लागू है। प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में ‘महतारी वंदन योजना’ का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि इसके तहत 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं को प्रदान की जा चुकी है। इसके अलावा 05 लाख 30 हजार से अधिक भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति, खान पान, रीति रिवाज परंपरा पर खुलकर बातें की और अपने राजनीतिक और सामाजिक अनुभव भी उनके साथ साझा किए।

विदेशी मेहमानों ने कहाअद्भुत है छत्तीसगढ़, सुंदर स्मृतियों के साथ पूरी हुई यात्रा

अध्ययन दल में शामिल विदेश के सैन्य अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ प्रवास को “अद्भुत और यादगार” बताते हुए कहा कि राज्य भौगोलिक विविधताओं और उर्वर भूमि से समृद्ध है। उन्होंने विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र की जनजातीय संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य की प्रशंसा की।
एयर कमोडोर अजय कुमार चौधरी ने कहा कि स्पष्ट नेतृत्व और सशक्त नीति के कारण प्रदेश में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों का मनोबल बढ़ा है जिससे नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी कार्य हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं—जैसे महिला सशक्तिकरण और आवास योजनाओं—का जमीनी स्तर पर सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के समग्र विकास को कुशल नेतृत्व का परिणाम बताया।

इस दौरान मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, आईजी श्री ओ पी पाल, अध्ययन दल में आईपीएस श्री अमनदीप सिंह कपूर, म्यांमार कर्नल लू जॉ आंग, ब्रिगेडियर मोहम्मद शाहिद अहमद, जापान के कर्नल उचीनो तोमोफुमी, ब्रिगेडियर कुंवर मान विजय सिंह राणा, सुश्री सुप्रिया घाघ, ब्रिगेडियर शिशिर थमैय्या, बांग्लादेश के ब्रिगेडियर जनरल फिरदौस आरिफ अहमद, ब्रिगेडियर केतन अरुण मोहिते, ब्रिगेडियर अनिरुद्ध चौहान, एयर कमोडोर श्री अजय कुमार चौधरी, एयर कमोडोर श्री मूलनाथ गिरीश, डॉ. राजेश कुमार अस्थाना, भूटान के कर्नल समतेन चेनोर, ग्रीस के कर्नल कॉन्सटेंटिनॉस नीरस शामिल है।

उल्लेखनीय है कि नेशनल डिफेंस कॉलेज द्वारा प्रतिवर्ष एक साल का कोर्स आयोजित किया जाता है। इस वर्ष 66वाँ प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है, जिसमें 120 सैन्य तथा गैर सैन्य अधिकारियों का दल प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 15 अधिकारियों का दल आर्थिक सुरक्षा और रणनीति विषय पर अध्ययन के लिए छत्तीसगढ़ पहुँचा, जिसमें 05 विदेशी सैन्य अधिकारी भी शामिल है। प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों ने बताया कि सबसे पहले उन्होंने नया रायपुर में शहर की व्यवस्था और प्लान, कृषि और वन विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा, कांकेर के जंगल वारफेयर कॉलेज और कृषि विज्ञान केंद्र का अवलोकन किया। इसके साथ ही बस्तर में सुरक्षा संबंधी विषयों से जुड़ी विशेष चर्चा, सुरक्षाबलों के साहसिक कार्य, पर्यटन स्थल, विभिन्न शासकीय आयोजनों में बस्तर की कला-संस्कृति, चित्रकोट जलप्रपात, कोंडागांव में शिल्पग्राम का भ्रमण किया। अगले दिन उन्होंने भिलाई स्टील प्लांट और भिलाई के पुलिस थाना का भ्रमण कर कानून व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त की।

 

छत्तीसगढ़ में जल क्रांति का नया अध्याय: जल जीवन मिशन 2.0 पर ऐतिहासिक एमओयू…

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ग्रामीण जल व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम

मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज छत्तीसगढ़ विधानसभा में जल जीवन मिशन 2.0 के तहत केन्द्र और राज्य के बीच एमओयू कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल की वर्चुअल मौजूदगी में अधिकारियों ने एमओयू पर हस्ताक्षर कर एक्सचेंज किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य की ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में यह पहल ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि “हर घर जल” के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए जल जीवन मिशन 2.0 के तहत हुये एमओयू से इन कार्यों में गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 10 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन के विस्तारित चरण, जल जीवन मिशन 2.0 को मंजूरी दी है। इस चरण में जल सेवा वितरण प्रणाली को मजबूत करने के साथ-साथ जनभागीदारी को भी सुनिश्चित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में अब तक 41 लाख 30 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों, यानी लगभग 82.66 प्रतिशत घरों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराया जा चुका है। श्री साय ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत दूरस्थ, वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों तक शुद्ध पेयजल पहुंचने से महिलाओं को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें पहले पानी के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता था।

उन्होंने कहा कि मिशन 2.0 के तहत ग्राम स्तर पर जल प्रबंधन में समुदाय की भागीदारी बढ़ाने और जल स्रोतों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही जल संवर्धन, पुनर्भरण तथा योजनाओं के संचालन और रखरखाव को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि इस एमओयू के माध्यम से पारदर्शी और तकनीक आधारित जल सेवा प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल वितरण और अधिक व्यवस्थित एवं सुदृढ़ होगा।

मुख्यमंत्री ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल सुविधा को और बेहतर बनाने के लिए केंद्रीय मंत्री से 1300 करोड़ रुपये की विशेष स्वीकृति का आग्रह भी किया। इस स्वीकृति से 70 समूह जल प्रदाय योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के 3 हजार से अधिक गांवों तक पेयजल पहुंचाने में मदद मिलेगी। अंत में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री मोदी का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि सभी के सहयोग से छत्तीसगढ़ न केवल “हर घर जल” का लक्ष्य हासिल करेगा, बल्कि सतत जल प्रबंधन और ग्रामीण जल शासन में भी नए मानक स्थापित करेगा।

केंद्रीय जलशक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल ने कहा कि आज का दिन अत्यधिक महत्वपूर्ण है और इस एमओयू के बाद छत्तीसगढ़ में पाइप लाइन एवं संरचनाओं के माध्यम से प्रत्येक घर में पानी की पहुँच सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों को इसके तहत सशक्त अधिकार प्राप्त होंगे और इन संरचनाओं के रख रखाव के लिए वे जिम्मेदार होंगे। श्री पाटिल ने कहा कि जिला प्रशासन के जरिये पंचायत के कार्यों पर निगरानी रखी जाएगी एवं आवश्यकता होने पर सहायता भी करेंगे। उन्होंने बताया कि आज का यह एमओयू जल शक्ति मंत्रालय और छत्तीसगढ़ शासन का साझा प्रयास का परिणाम है। इससे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के हर घर स्वच्छ एवं निर्बाध पानी की पहुँच का सपना साकार होगा।

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री अरुण साव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, सचिव श्री राहुल भगत, जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश टोप्पो सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

CG: सभी के सहयोग से सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ विधानसभा बजट सत्र ,लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती के साथ अनेक महत्वपूर्ण विधेयक हुए पारित -…

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सभी के सहयोग से सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ विधानसभा बजट सत्र’

लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती के साथ अनेक महत्वपूर्ण विधेयक हुए पारित’

: मुख्यमंत्री ने सभी सदस्यों और अधिकारियों को दिया धन्यवाद’

विधानसभा के बजट सत्र के सफल समापन पर मंत्रीगण एवं विधायकगण ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से विधानसभा स्थित उनके कार्यालय में भेंट कर उन्हें बधाई दी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर सभी जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया और सफल सत्र के लिए सभी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी के समन्वय और सहयोग से ही यह सत्र सार्थक और सफल बन पाया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का पावन मंदिर है और लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त बनाना ही इसका मूल दायित्व है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस बजट सत्र के दौरान लगभग 585 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने विधानसभा की कार्यवाही का अवलोकन किया जो एक अत्यंत प्रेरणादायक पहल है। इससे यह संदेश गया है कि राज्य सरकार भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है, जिसका सीधा संबंध राज्य की आंतरिक सुरक्षा, शांति और समृद्धि से है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बजट सत्र में कुल 15 बैठकें आयोजित हुईं और यह सत्र अत्यंत महत्वपूर्ण एवं परिणामकारी रहा। सत्र के दौरान माननीय राज्यपाल के अभिभाषण पर सदन द्वारा कृतज्ञता व्यक्त की गई तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पारित किया गया। इसके साथ ही कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य भी सम्पन्न हुए।

उन्होंने कहा कि इस सत्र में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026, छत्तीसगढ़ नगर एवं ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक-2026 तथा छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल (संशोधन) विधेयक-2026 जैसे महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए। साथ ही भर्ती परीक्षाओं में नकल रोकने संबंधी विधेयक तथा छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल विधेयक भी सर्वसम्मति से पारित हुए, जो युवाओं के भविष्य और पारदर्शी भर्ती प्रणाली के लिए मील का पत्थर साबित होंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सत्र के दौरान सदन के सदस्यों ने अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की, प्रश्न पूछे और अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाया, जो लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण है।

उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि वे भले ही अस्वस्थता के कारण सदन में उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने लगातार डिजिटल माध्यम से सदन की कार्यवाही पर नजर रखी।मुख्यमंत्री ने उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने सत्र के सफल संचालन के लिए नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप, मंत्रिपरिषद के सदस्यों, सभी विधायकगण, विधानसभा सचिव श्री दिनेश शर्मा, सुरक्षा कर्मियों एवं समस्त अधिकारियों-कर्मचारियों को विशेष धन्यवाद दिया।

उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि आप सभी ने सदन की महत्वपूर्ण कार्यवाही और जनहित के मुद्दों को जनता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अंत में मुख्यमंत्री श्री साय ने चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए प्रदेश में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

राहुल गांधी ने केरल विधानसभा चुनाव में बदलाव की अपील की… केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की रणनीति…

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केरल विधानसभा चुनावों की घोषणा के साथ ही राज्य में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। इसी संदर्भ में, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि केरल के लोग अब बदलाव के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

उन्होंने यूडीएफ (UDF) की सरकार बनाने का समर्थन किया। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ‘टीम यूडीएफ ही टीम केरलम है।’

उन्होंने अपने पोस्ट में बताया कि हर उम्मीदवार केरलम के लोगों की आवाज, उनकी उम्मीदों और उनके भरोसे का प्रतीक है। इस टीम में अनुभवी नेताओं के साथ-साथ युवा परिवर्तनकारी चेहरे भी शामिल हैं। यह एक मजबूत समूह है, जो अपने निर्वाचन क्षेत्रों की जटिलताओं और समस्याओं को भली-भांति समझता है।

वायनाड के पूर्व सांसद राहुल गांधी ने केरल के प्रति अपने विशेष लगाव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनके लिए केरलम एक घर की तरह है और वहां के लोग उनके परिवार के समान हैं। केरल के लोगों से मिली शिक्षा और प्यार के लिए वे आभारी हैं। उन्होंने वादा किया कि वे हमेशा उनके साथ रहेंगे।’

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि केरलम से स्पष्ट संदेश है कि जनता अब बदलाव चाहती है। वे एक ऐसी सरकार की तलाश में हैं जो उनकी समस्याओं को समझे और ईमानदारी से काम करे। उन्होंने आश्वासन दिया कि आने वाली यूडीएफ (UDF) सरकार के साथ मिलकर वे इस खूबसूरत राज्य के उज्ज्वल भविष्य के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

राहुल गांधी का यह बयान कांग्रेस द्वारा 92 उम्मीदवारों की सूची जारी करने के एक दिन बाद आया है। केरल में विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल को होने हैं। सत्ताधारी एलडीएफ (LDF) को चुनौती देने के लिए कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी ने इस बार किसी सांसद को विधानसभा चुनाव में नहीं उतारने का निर्णय लिया है।

कांग्रेस ने आंतरिक दबाव के बावजूद अपने राज्य स्तर के नेतृत्व पर भरोसा जताया है। पार्टी कुल 92 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि अन्य सीटें यूडीएफ (UDF) के सहयोगी दलों और कुछ निर्दलीयों के लिए छोड़ी गई हैं। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस पिछले एक दशक से केरल की सत्ता से बाहर है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर की बांग्लादेश के उच्चायुक्त से मुलाकात, घरेलू जरूरतों के संतुलन के साथ भारत देता रहेगा ऊर्जा सहायता…

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को नई दिल्ली में भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हामिदुल्लाह से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच भारत-बांग्लादेश के आपसी संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।

जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि उनकी बातचीत का मुख्य फोकस द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करना था।

इससे एक दिन पहले भारत ने कहा था कि वह बांग्लादेश और दूसरे पड़ोसी देशों की ऊर्जा जरूरतों में मदद जारी रखे हुए है। हालांकि भारत यह काम अपनी घरेलू जरूरतों, रिफाइनिंग क्षमता और डीजल की उपलब्धता को ध्यान में रखकर कर रहा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारत को बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव और कुछ अन्य पड़ोसी देशों से ऊर्जा आपूर्ति के अनुरोध मिले हैं। उन्होंने बताया कि भारत 2007 से अलग-अलग माध्यमों से बांग्लादेश को डीजल की आपूर्ति करता रहा है और यह मदद अभी जारी है।

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की वजह से ऊर्जा आपूर्ति के समुद्री रास्ते प्रभावित हुए हैं। इस कारण एलपीजी की सप्लाई चिंता का विषय बनी हुई है।

जायसवाल ने कहा कि भारत फिलहाल सबसे पहले अपनी घरेलू खपत और उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दे रहा है। पहले देश के लोगों की जरूरतें पूरी की जाएंगी, उसके बाद यह तय किया जाएगा कि व्यावसायिक संस्थानों के लिए एलपीजी आपूर्ति कैसे संभाली जाए।

इस महीने की शुरुआत में बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने वहां की नई सरकार के मंत्रियों से कई मुलाकात की थीं। इन बैठकों में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा हुई थी।

भारतीय उच्चायोग के मुताबिक, प्रणय वर्मा ने बांग्लादेश के स्थानीय शासन, ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्री मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर से भी मुलाकात की। दोनों पक्षों ने स्थानीय प्रशासन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि सहकारिता और जमीनी स्तर पर आर्थिक सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

भारतीय उच्चायोग ने कहा कि भारत-बांग्लादेश संबंध लोगों के बीच मजबूत रिश्तों पर आधारित हैं और भारत आपसी हित तथा आपसी लाभ के आधार पर सकारात्मक और रचनात्मक तरीके से सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है।

प्रणय वर्मा ने बांग्लादेश के मुक्ति युद्ध मामलों के मंत्री हाफिज उद्दीन अहमद से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम से जुड़े ऐतिहासिक संबंधों को फिर से रेखांकित किया गया।

दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि आपसी सम्मान और विश्वास के आधार पर मिलकर काम करके दोनों देशों के लोगों के बीच रिश्तों को और मजबूत किया जा सकता है।

सरकार ने अवैध ऑनलाइन जुए और सट्टेबाजी पर कसा शिकंजा… अवैध जुए और सट्टेबाजी पर कार्रवाई…

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सरकार ने अवैध ऑनलाइन जुए और सट्टेबाजी प्लेटफार्मों के खिलाफ अपनी कार्रवाई को तेज कर दिया है, जिसमें लगभग 300 वेबसाइटों और मोबाइल एप्लिकेशनों को ब्लॉक किया गया है।

यह कार्रवाई उन प्लेटफार्मों पर केंद्रित है जो ऑनलाइन खेल सट्टेबाजी, कैसीनो-शैली के गेमिंग और पीयर-टू-पीयर सट्टेबाजी जैसे अवैध गतिविधियों में संलग्न हैं।

सरकारी बयान के अनुसार, इस कार्रवाई में विभिन्न प्रकार के अवैध प्लेटफार्मों को निशाना बनाया गया, जिसमें ऑनलाइन खेल सट्टेबाजी वेबसाइटें, वर्चुअल कैसीनो जो स्लॉट, रूले और लाइव डीलर टेबल जैसे गेम प्रदान करते हैं, और पीयर-टू-पीयर मार्केटप्लेस के रूप में काम करने वाले सट्टेबाजी एक्सचेंज शामिल हैं। इसके साथ ही, सट्टा और मटका जुए के नेटवर्क, साथ ही वास्तविक पैसे के कार्ड और कैसीनो गेमिंग एप्लिकेशन के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।

यह हालिया कार्रवाई अवैध ऑनलाइन गेमिंग गतिविधियों को रोकने और उपयोगकर्ताओं को वित्तीय धोखाधड़ी और लत के खतरों से बचाने के लिए एक व्यापक प्रयास का हिस्सा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सरकार अब तक लगभग 8,400 ऐसी वेबसाइटों और एप्लिकेशनों को ब्लॉक कर चुकी है। इनमें से लगभग 4,900 प्लेटफार्मों को ऑनलाइन गेमिंग अधिनियम के लागू होने के बाद हटाया गया, जिसने डिजिटल गेमिंग और सट्टेबाजी गतिविधियों को विनियमित करने के लिए कानूनी ढांचे को मजबूत किया।

यह कार्रवाई जारी रहेगी, और अधिकारी ऑनलाइन प्लेटफार्मों की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं और उल्लंघनों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई कर रहे हैं। सरकार ने उपयोगकर्ताओं से भी सावधानी बरतने और अनधिकृत सट्टेबाजी और जुए की सेवाओं से दूर रहने की अपील की है। जनवरी में, सरकार ने 242 अवैध सट्टेबाजी और जुए की वेबसाइटों के लिंक भी ब्लॉक किए थे।

एनसीईआरटी किताब विवाद: सरकार ने बनाई तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी…

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राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की कक्षा 8 की किताब में न्यायपालिका से जुड़े चेप्टर को फिर से लिखने के लिए तीन सदस्यों वाली एक विशेषज्ञ समिति का गठन हुआ है।

शुक्रवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह जानकारी दी।

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया कि तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। इसमें पूर्व अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल, जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​और जस्टिस अनिरुद्ध बोस को शामिल किया गया है।

सरकार ने ये फैसला एनसीईआरटी की किताब के उस हिस्से पर हुए विवाद के बाद उठाया है, जिसमें ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ का जिक्र था। कमेटी के गठन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपनी तरफ से शुरू की गई सुनवाई को खत्म कर दिया।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने हाल ही में कक्षा 8 के लिए सामाजिक विज्ञान की पुस्तक “एक्सप्लोरिंग सोसाइटीः इंडिया एंड बियॉन्ड” (भाग-2) प्रकाशित की थी। इस पुस्तक में “हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका” शीर्षक से एक पाठ शामिल था। इसमें न्याय व्यवस्था पर विवादित पाठ्य सामग्री थी। यही कारण रहा कि इस अध्याय को लेकर विभिन्न पक्षों से आपत्तियां सामने आईं। स्वयं सुप्रीम कोर्ट ने इस पर आपत्ति जताई थी।

सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान लेने के बाद एनसीईआरटी ने गलती मानते हुए चैप्टर को वापस ले लिया था। एनसीईआरटी के निदेशक और परिषद के सदस्यों ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि इस अध्याय के कारण उत्पन्न स्थिति के लिए वे बिना किसी शर्त और बिना किसी स्पष्टीकरण के सार्वजनिक रूप से क्षमा चाहते हैं। एनसीईआरटी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि विवादित अध्याय वाली पूरी पुस्तक को वापस ले लिया गया है। यह पुस्तक कहीं भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। परिषद ने कहा कि अध्याय के कारण उत्पन्न असुविधा के लिए उन्हें खेद है और वे सभी संबंधित पक्षों की समझदारी की सराहना करते हैं।

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि दोबारा लिखा गया चैप्टर तब तक प्रकाशित नहीं किया जाएगा, जब तक डोमेन एक्सपर्ट कमेटी इसकी समीक्षा नहीं कर लेती। इसके बाद, कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार को डोमेन एक्सपर्ट कमेटी के गठन का आदेश दिया था।

केंद्र ने आयकर नियम 2026 के लिए अधिसूचना जारी की, रिटर्न फाइल करना आसान हुआ…

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केंद्र सरकार ने शुक्रवार को आयकर नियम, 2026 के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। इससे नए आयकर अधिनियम 2025 के लिए मंच तैयार होगा, जो कि 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाला है, जिसमें पारदर्शिता, अधिक सख्त डिस्क्लोजर और बेहतर अनुपालन पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने ई-राजपत्र में आयकर नियम, 2026 प्रकाशित किए हैं, जो पूर्ववर्ती प्रावधानों का स्थान लेते हैं और आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एक विस्तृत ढांचा निर्धारित करते हैं।

नए नियमों का उद्देश्य प्रोसेस को आसान करना और कैपिटल गेन, स्टॉक मार्केट लेनदेन और एनआरआई टैक्स से जुड़े रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड को सख्त करना है।

ये नियम इस साल की शुरुआत में जारी किए गए मसौदा प्रस्तावों के बाद आए हैं और भारत की कर प्रणाली को आधुनिक बनाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा हैं।

आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, “इन बदलावों से कोई नया कर लागू नहीं होता, बल्कि बेहतर निगरानी और पारदर्शिता पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, जिसके लिए अधिक डिस्क्लोजर और डिजिटल ट्रैकिंग की आवश्यकता होगी।”

आयकर नियम, 2026 में सबसे बड़ी हाईलाइट हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) है। नए नियम के तहत अब बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद के लोग भी सैलरी के 50 प्रतिशत हिस्से पर एचआरए क्लेम कर सकते हैं, पहले यह लिमिट केवल मुंबई, दिल्ली, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में रहने वाले लोगों के लिए थी।

हालांकि, बाकी के अन्य शहरों के लिए यह लिमिट अभी भी 40 प्रतिशत बनी हुई है।

अब करदाताओं को एक निर्दिष्ट प्रपत्र में मकान मालिक के साथ अपने संबंधों का खुलासा करना भी आवश्यक होगा, जिससे पारदर्शिता में और सुधार होगा।

इन नियमों में स्टॉक एक्सचेंजों के लिए डेरिवेटिव ट्रेडिंग के मान्यता प्राप्त प्लेटफॉर्म के रूप में मान्यता प्राप्त करने हेतु सख्त शर्तें भी निर्धारित की गई हैं।

एक्सचेंजों को सेबी से अनुमोदन प्राप्त करना होगा और पैन और विशिष्ट आईडी जैसे ग्राहक-स्तरीय डेटा सहित सभी लेन-देन का विस्तृत रिकॉर्ड रखना होगा।

उन्हें सात वर्षों तक ऑडिट ट्रेल रखना होगा और ट्रेडिंग गतिविधियों पर कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए कर विभाग को मासिक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

इसके अतिरिक्त, सरकार ने नए आयकर नियम 2026 में यह स्पष्ट किया है कि पूंजीगत लाभ अल्पकालिक है या दीर्घकालिक, यह निर्धारित करने के लिए परिसंपत्तियों की होल्डिंग अवधि की गणना कैसे की जाएगी।

आय घोषणा योजना, 2016 के तहत घोषित परिसंपत्तियों के लिए, परिसंपत्ति के प्रकार के आधार पर अलग-अलग नियम लागू होंगे।

ये नियम कुछ संस्थाओं के लिए पूंजीगत लाभ पर कराधान को भी स्पष्ट करते हैं। अल्पकालिक परिसंपत्तियों या स्व-निर्मित परिसंपत्तियों से जुड़े लाभों को अल्पकालिक माना जाएगा, जबकि अन्य को अंतर्निहित परिसंपत्ति की प्रकृति के आधार पर दीर्घकालिक के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।

“पेट्रोल की कीमतों में इजाफा: दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और पूरे भारत में बदल गए दाम, देखें अपने शहर का अपडेट”

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पेट्रोल की कीमतों में इजाफा: दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और पूरे भारत में बदल गए दाम, देखें अपने शहर का अपडेट

ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालात के बीच-जिससे पहले ही LPG का संकट पैदा हो चुका है-दूसरी ओर, तेल कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल की कीमतें बढ़ा दी हैं। 20 मार्च, 2026 को, प्रीमियम पेट्रोल के वेरिएंट्स-जैसे BPCL का ‘Speed’, HPCL का ‘Power’, और IOCL का ‘XP95’-की कीमतों में ₹2.09 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई।

इससे पहले, प्रीमियम पेट्रोल की कीमत ₹111.68 प्रति लीटर थी; अब यह बढ़कर ₹113.77 प्रति लीटर हो गई है। इस बढ़ोतरी के बाद, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पेट्रोल की कीमत ₹103.92 प्रति लीटर तक पहुँच गई है, जबकि पुणे में प्रीमियम पेट्रोल ₹113.17 प्रति लीटर बिक रहा है।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

घरेलू प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल का आँकड़ा पार कर चुकी हैं। इस बीच, LPG का संकट अभी भी बना हुआ है। इन परिस्थितियों में, कच्चे तेल की कीमतों में इस उछाल का आम नागरिकों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा और इससे महँगाई का दबाव और बढ़ सकता है।