Home Blog Page 597

“दूर हो गई BJP की सबसे बड़ी बाधा? कभी भी हो सकता है राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान, रेस में 4 मंत्रियों के नाम”

0

भारतीय जनता पार्टी (BJP) कई महीनों से राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को टालती आ रही है। इसका सबसे बड़ा कारण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ शीर्ष भाजपा नेतृत्व के तल्ख रिश्ते को माना जा रहा है।

हालांकि, बीते कुछ महीनों से दोनों ही तरफ से संबंधों को सामान्य करने और दिखाने की कोशिशें की जा रही हैं। आरएसएस और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने ही इसकी जिम्मेदारी संभाली है। इसके बाद अब इस बात की संभावना जताई जा रही है कि भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम का ऐलान पार्टी कभी भी कर सकती है।

2014 के लोकसभा चुनाव से पहले जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आरएसएस की जरूरत को लेकर बयान दिया तो हर कोई अचरज में पड़ गया। सूत्रों का कहना है कि आरएसएस को भी यह बात नागवार गुजरी। इसका खामियाजा भगवा पार्टी को लोकसभा चुनाव में देखने को मिला, जब भाजपा 240 सीटों पर सिमट कर रह गई, जबकि उसने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान ‘अबकी बार 400 पार’ का नारा दिया था। कहा जाता है कि संघ के कार्यकर्ताओं ने इस चुनाव में अनमने ढंग से भाजपा का साथ दिया था। आपको बता दें कि नड्डा ने कहा था कि भाजपा को अब संघ की जरूरत नहीं रह गई है।

15 अगस्त को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किला से देश को संबोधित कर रहे थे, तब उन्होंने आरएसएस की तारीफ करते हुआ इसे दुनिया का सबसे बड़ा एनजीओ बताया। इसके बाद मोहन भागवत ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आरएसएस के एक कार्यक्रम में साफ शब्दों में कहा था कि राजनीति हो या समाज सेवा इसमें रिटायरमेंट की कोई उम्र नहीं होती है। इससे पहले संघ प्रमुख ने ही कहा था कि 75 साल की उम्र में लोगों को खुद से रिटायर हो जाना चाहिए। आपको बता दें कि इसी साल प्रधानमंत्री 75 साल के होने वाले हैं।

आरएसएस की प्रशंसा करने वालों में प्रधानमंत्री मोदी ही अकेले नहीं हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमिता शाह ने भी हाल ही में कई मौकों पर आरएसएस की सराहना की है। उन्होंने साफ-साफ कहा है कि उन्हें स्वयंसेवक होने पर गर्व है। आरएसएस का कार्यकर्ता होना किसी भी कीमत पर निगेटिव पॉइंट नहीं हो सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि किसी भी स्वयंसेवक को तब तक नहीं रुकना है जब तक कि भारत फिर से महान नहीं बन जाता है।

भाजपा के दोनों दिग्गज नेताओं और आरएसएस चीफ के बयान से भाजपा और संघ के बीच रिश्ते सामान्य होने के संकेत मिल रहे हैं। अब इस बात की प्रबल संभावना है कि दोनों ही संगठन मिलकर जल्द ही भाजपा के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम पर अंतिम मुहर लगा सकते हैं। हालांकि संघ न कई मौकों पर कहा है कि सरकार या भाजपा के कार्यों में आरएसएस का हस्तक्षेप नहीं होता है।

आरएसएस और भाजपा के बीच सामान्य हुए रिश्तों में कई दावेदारों के नाम की चर्चा होने लगी है। उनमें सबसे पहला नाम शिवराज सिंह चौहान का आता है, जो कि वर्तमान केंद्र सरकार में मंत्री हैं। वहीं, नितिन गडकरी के नाम पर भी अंदरखाने चर्चा होने लगी है। इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और घर्मेंद्र प्रधान का नाम भी रेस में शामिल होने की चर्चा है। भाजपा अक्सर अपने फैसलों से सियासी पंडितों को चौंकाती रही है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन बनता है।

भविष्य की राजनीति तय करेंगे बिहार विधानसभा के चुनाव, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पांच बार चुनाव जीता, परंतु यह निर्णायक चुनाव होगा…

0

बिहार में होने वाला चुनाव सिर्फ एक लोकतांत्रिक कवायद नहीं है, इसमें तीन दिग्गजों- नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव और राहुल गांधी की राजनीति दांव पर लगी है. दो दल- जदयू और लोजपा अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं, जबकि शक्तिशाली भाजपा और इंडिया का भंगुर गठबंधन सबसे कठिन लड़ाई में जूझने जा रहे हैं.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पांच बार चुनाव जीता है, परंतु यह उनका निर्णायक चुनाव होगा. उनकी पार्टी का वोट प्रतिशत 2010 के 22.6 फीसदी से घटकर 2020 में 15.7 प्रतिशत रह गया. ढांचागत सुधार, विद्युतीकरण में वृद्धि तथा कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहतर करने जैसी उनकी उपलब्धियां निर्विवाद हैं, लेकिन अब उन पर थकान भारी पड़ रही है. बेरोजगारी बिहार की आत्मा से जुड़ी है, और 75 लाख लोग बिहार से बाहर मेहनत कर जीविका चला रहे हैं.

विस्थापन एक ऐसा घाव है, जो भरना ही नहीं चाहता. नीतीश कुमार को अपने दम पर बहुमत लाना होगा, ताकि एनडीए में अपनी पार्टी की प्रासंगिकता बनाए रखें, जिसने उन्हें मुख्यमंत्री प्रस्तावित किया है. इससे कुछ स्थानीय भाजपा नेता परेशान हैं, जो बड़ी भूमिका चाहते हैं. बिहार की राजनीति में बड़ी भूमिका इन दिनों तेजस्वी यादव निभा रहे हैं.

इस चुनाव में उन्हें लालू के बेटे से अलग पहचान साबित करनी होगी. इंडिया गठबंधन का नेतृत्व कर रहे तेजस्वी अपने मुस्लिम-यादव जनाधार पर निर्भर हैं, जिसके बूते 2020 के चुनाव में 75 सीटें जीत राजद राज्य का सबसे बड़ा दल बनकर उभरा है. एनडीए के मजबूत जातिगत समीकरण को चुनौती देने के लिए तेजस्वी को अब ओबीसी, दलितों और कमजोर तबकों तक पहुंच बनानी होगी.

तेजस्वी के तेज, युवा केंद्रित और तकनीकी दक्षता से लैस चुनाव अभियान का दायरा बढ़ रहा है. एक ओपीनियन पोल के मुताबिक, मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी 36.9 प्रतिशत रेटिंग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की 18.4 फीसदी रेटिंग से बहुत आगे है. इसके बावजूद तेजस्वी पर लालू यादव के दौर के जंगल राज का ठप्पा लगा हुआ है. बिहार के रण में राहुल गांधी भी अपनी योग्यता साबित करना चाहते हैं.

वर्ष 2020 में 19 सीटें जीतने वाली कांग्रेस गठबंधन में जूनियर पार्टनर है, फिर भी चुनाव में कांग्रेस की भूमिका बड़ी है. यह चुनाव न केवल इस प्रांत में कांग्रेस की संभावनाओं की परीक्षा है, बल्कि इसमें कांग्रेस का प्रदर्शन इंडिया गठबंधन के संभावित प्रधानमंत्री के रूप में राहुल की नियति भी तय करेगा.

तेजस्वी और कन्हैया कुमार के साथ राज्य पदयात्रा में उन्होंने उन मुद्दों को उभारा, जो युवाओं के मुद्दे हैं. यानी बेरोजगारी, विस्थापन और आर्थिक महत्वाकांक्षा. कांग्रेस का ‘पलायन रोको, नौकरी दो’ नारा बिहार की हकीकत से जुड़ गया है, जहां के 51.2 फीसदी मतदाताओं ने रोजगार को अपनी प्रमुख प्राथमिकता बताई है. भाजपा के एजेंडे में आदर्शवाद कहीं नहीं है.

एनडीए की चुनावी गाड़ी बिहार में एक असामान्य बाधा का सामना कर रही है : राज्य में एक भी करिश्माई स्थानीय नेता नहीं है. ऐसे में, भाजपा नरेंद्र मोदी की व्यापक लोकप्रियता व चुंबकीय व्यक्तित्व तथा अमित शाह के रणनीतिक कौशल के सहारे आगे बढ़ेगी. वर्ष 2020 के 74 सीटों से आगे बढ़ने के लिए पार्टी मोदी के विकासवादी विमर्श के साथ राजद के दौर में कानून-व्यवस्था की विफलता को याद दिलाएगी.

चुनाव विश्लेषक एनडीए के पक्ष में 48.9 प्रतिशत तथा इंडिया गठबंधन के पक्ष में 35.8 फीसदी समर्थन का आंकड़ा दे रहे हैं. परंतु एनडीए सहयोगियों में सब कुछ ठीक नहीं दिखता. सीटों के मामले में चिराग पासवान की लोजपा और जदयू के बीच मतभेद हैं. चिराग पासवान 20-25 सीट मांग रहे हैं, पर जदयू इतनी सीटें देना नहीं चाहता.

चिराग पासवान बिहार चुनाव में सबसे अप्रत्याशित चेहरे के रूप में सामने हैं. अगर चुनाव में भाजपा और जदयू में से किसी को निर्णायक बहुमत नहीं मिलता तो मुख्यमंत्री के चयन में चिराग की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है. बिहार की राजनीति अब भी जातिगत समीकरणों पर निर्भर है. सभी 243 सीटों पर लड़ रही जन सुराज पार्टी जातिगत समीकरणों को महत्व नहीं दे रही.

पर इसके नेता प्रशांत किशोर की मुख्यमंत्री के रूप में रेटिंग मात्र 16.4 फीसदी है. बिहार का चुनाव एनडीए और इंडिया गठबंधन, दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. राज्य के मतदाता सिर्फ अगले मुख्यमंत्री का ही चयन नहीं करेंगे, वे भारत के राजनीतिक भविष्य की भी नींव रखेंगे.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मणिपुर का दौरा, विभिन्न विकास योजनाओं के शिलान्यास के साथ ही जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

0

मई 2023 में नस्लीय हिंसा भड़कने के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मणिपुर का दौरा करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री मैतेयी बहुल इंफाल के साथ-साथ कुकी बहुल चुड़ा चांदपुर में विभिन्न विकास योजनाओं के शिलान्यास के साथ ही जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

दोनों समुदायों को साधने की करेंगे कोशिश पीएम माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री का यह दौरा लंबे समय से नस्लीय हिंसाका शिकार रहे मणिपुर में स्थायी शांति की राह को आसान बनाने का काम करेगा। विपक्ष लंबे समय से प्रधानमंत्री के मणिपुर नहीं जाने को मुद्दा बनाता रहा है। मणिपुर के बाद प्रधानमंत्री का असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।

दरअसल मणिपुर हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद तीन मई 2023 को कुकी और मैतेयी समुदायों के बीच हिंसा शुरू हो गई थी। उसके बाद कुकी समुदायों द्वारा असम से जोड़ने वाले एनएच-दो समेत अन्य सड़क मार्गों को बंद कर दिया गया था।

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू हिंसा पर काबू करने के बाद विश्वास बहाली के लिए इस साल फरवरी में मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया। इसके बाद दोनों समुदायों के साथ अलग-अलग और फिर एक साथ बैठकर शांति की कोशिश पिछले महीने रंग लाई।

दिल्ली में कुकी उग्रवादी गुटों ने संस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन पर हस्ताक्षर पर अपनी शिविरों को मैतेयी बहुल इलाकों से दूर करने पर सहमति दे दी। कुकी-जो संगठन ने भी एनएच-दो समेत सभी राजमार्गों को आवाजाही के लिए खोलने पर सहमति दे दी।

प्रधानमंत्री का दौरा का अहम शांति की दिशा में इन प्रयासों के बाद अब प्रधानमंत्री का दौरा इसे स्थायित्व देने के लिहाज से अहम है। प्रधानमंत्री मोदी का कार्यक्रम कुकी बहुल चुड़ा चांदपुर और मैतेयी बहुल इंफाल दोनों को चुनकर यह संदेश दिया गया है कि सरकार दोनों को समान रूप से अहमियत दे रही है। किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा।

चुड़ा चांदपुर में वे 7300 करोड़ तो. इंफाल में 3600 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की पीएम आधारशिला रखेगे। साथ ही 2500 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय राजमार्ग की पांच परियोजनाओं, मणिपुर इंफोटेक डेवलपमेंट प्रोजेक्ट और नौ स्थानों पर वर्किंग वुमेन होस्टल का भी शिलान्यास करेंगे।

पीएम मोदी असम, पश्चिम बंगाल और बिहार का दौरा भी करेंगे मणिपुर के बाद प्रधानमंत्री मोदी अगले कुछ महीने में होने वाले विधानसभा चुनावों वाले राज्य असम, पश्चिम बंगाल और बिहार जाएगा। असम में 13 सितंबर को भारत रत्न भूपेन हजारिका के जन्म शताब्दी समारोह में हिस्सा लेने के बाद 14 सितंबर को 18500 करोड़ की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलायांस करेंगे।

15 सितंबर को कोलकाता में 16वीं संयुक्त कमांडर कांफ्रेंस का उद्घाटन करने के बाद बिहार के पूर्णिया जाएंगे। पूर्णिया में हवाई अड्डे के नए टर्मिनल का उद्घाटन के साथ-साथ नव गठित राष्ट्रीय मखाना बोर्ड को लांच करेंगे।

पूर्णिया में हवाई अड्डे के नए टर्मिनल का उद्घाटन साथ ही लगभग 3600 करोड़ रुपये की विभिन्न योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे, जिनमें भागलपुर के पीरपैंती में 2400 मेगावाट की थर्मल पावर प्लांट, कोशी-मेची नदी को जोड़ने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट शामिल हैं।

“‘शांति के लिए प्रतिबद्ध है भारत’, नेपाल में अंतरिम सरकार के गठन पर पीएम मोदी ने दी बधाई”

0

नेपाल में जेन-जी आंदोलन के बाद अब अंतरिम सरकार का गठन किया जा चुका है। पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की के अंतरिम प्रधानमंत्री बनने पर पीएम मोदी ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में पीएम मोदी ने सुशीला कार्की को बधाई दी है।

दरअसल, पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा कि नेपाल की अंतरिम सरकार की पीएम के रूप में पद ग्रहण पर माननीय सुशीला कार्की जी को शुभकामनाएं। उन्होंने आगे लिखा कि नेपाल के भाई-बहनों की शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए भारत पूरी तरीके से प्रतिबद्ध है।

विदेश मंत्रालय ने भी जारी किया बयान बता दें कि शुक्रवार रात के करीब 9 बजे सुशील कार्की ने नेपाल के अंतरिम पीएम के रूप में शपथ ली। नेपाल के राष्ट्रपति ने उन्हें ये शपथ दिलाई। भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि एक करीबी पड़ोसी, एक लोकतांत्रिक देश और दीर्घकालिक विकास के साझेदार के रूप में भारत, दोनों देशों के लोगों और उनकी खुशहाली के लिए नेपाल के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा।

नेपाल में मार्च 2026 में होंगे आम चुनाव नेपाल में आम चुनाव 5 मार्च, 2026 को होंगे। इस चुनाव के बाद अंतरिम सरकार की जगह नेपाल को एक नई सरकार मिलेगी। बता दें कि नेपाल के अंतरिम पीएम के रूप में शपथ लेने के बाद वह देश की पहली महिला मुखिया के रूप में उभरी हैं। माना जा रहा है कि सुशीला कार्की के आने से भ्रष्टाचार-मुक्त की चाह रखने वाली जनता के लिए आशा की किरण के रूप में उभरी हैं।

“PM Modi ने मिजोरम को दी करोड़ों की सौगात, पहली बार भारतीय रेल नेटवर्क से जुड़ा आइजोल”

0

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल समेत उत्तर पूर्वी राज्यों के दौरे पर हैं। पीएम मोदी का यह दौरा 13 सितंबर से 15 सितंबर तक चलेगा। इस तीन दिवसीय दौरे में पीएम मोदी 5 राज्यों – मिजोरम, मणिपुर, असम, पश्चिम बंगाल और बिहार का रुख करेंगे। पीएम मोदी के दौरे का पहला पड़ाव मिजोरम है। मिजोरम पहुंचे पीएम मोदी ने राज्य को करोड़ों की नई सौगातें दी हैं। इनमें 8070 करोड़ रुपये की बैराबी सैरांग रेल लाइन भी शामिल है। इसी के साथ मिजोरम पहली बार भारतीय रेल नेटवर्क से जुड़ गया है। पीएम मोदी ने 3 ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाई है। पीएम मोदी ने मिजोरम की राजधानी आइजोल में 9000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास किया है। आइजोल बाईपास समेत थेनजोल-सियालसुक और खानकाउन-रोंगूरा में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया है।

पीएम मोदी ने क्या कहा? मिजोरम में परियोजनाओं का उद्घाटन करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “मैं मिजोरम के लेंगपुई एयरपोर्ट पर हूं। दुर्भाग्य से मौसम खराब होने के कारण मैं आइजोल के लोगों से नहीं मिल सका। मगर, मैं यहां से भी आपके प्यार और स्नेह को महसूस कर सकता हूं।”

पीएम मोदी ने कहा- आज मिजोरम देश के विकास में एक अहम रोल निभा रहा है। यह न सिर्फ देश बल्कि मिजोरम के लोगों के लिए भी ऐतिहासित दिन है। आज आइजोल भारत के रेलवे नक्शे में शामिल हो गया है। कई चुनौतियों का सामना करने के बाद बैराबी-सैरांग रेल लाइन को हकीकत में तब्दील किया गया है।

पीएम मोदी ने कहा, “हमारे दिल सीधे एक-दूसरे से जुड़ते हैं। अब पहली बार सोरांग राजधानी एक्सप्रेस के जरिए दिल्ली से जुड़ चुका है। यह महज रेलवे कनेक्शन नहीं है, यह ट्रांसफोर्मेशन की लाइफलाइन है। यह मिजोरम के लोगों के लिए नई क्रांति साबित होगी। अब यहां के लोग पूरे भारत से जुड़ सकेगें।”

पीएम मोदी ने विपक्ष पर साधा निशाना पीएम मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, “काफी लंबे समय से हमारे देश की राजनीतिक पार्टियों ने वोट बैंक पॉलिटिक्स के लिए पूरे उत्तर पूर्वी राज्यों को नजरअंदाज किया। मगर, हमारा नजरिया पूरी तरह से अलग है। जिन्हें पहले नजरअंदाज किया गया अब वो हमारी पहली प्राथमिकता हैं।”

उत्तर पूर्वी राज्यों में बेहतर हुई कनेक्टिविटी पीएम मोदी के अनुसार, “पिछले 11 सालों से हम नॉर्थ ईस्ट के विकास के लिए काम कर रहे हैं। यह क्षेत्र देश के लिए ग्रोथ इंजन बनकर उभरा है। पिछले कुछ सालों में उत्तर पूर्व के ज्यादातर राज्य रेल नेटवर्क से जुड़े। ग्रामीण सड़कें, हाईवे, मोबाइल कनेक्टिविटी, इंटरनेट कनेक्शन, पानी और बिजली का कनेक्शन मजबूत हुआ है। मिजोरम को उड़ान स्कीम का भी लाभ मिला है। बहुत जल्द यहां हेलीकॉप्टर सेवा भी शुरू हो जाएगी।”

“यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़… नेपाल में जेन-ज़ी प्रोटेस्ट के बाद फंसे कई भारतीय नागरिक, लगाई मदद की गुहार”

0

नेपाल में जारी जेन-जी आंदोलन का असर अब भारत के कई हिस्सों पर भी दिखाई दे रहा है. बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के कई भारतीय नागरिक नेपाल में फंसे हुए हैं और अपने देश लौटने की अपील कर रहे हैं.

इस आंदोलन ने नेपाल में जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है, जिससे कर्फ्यू, आगजनी और हिंसक प्रदर्शनों का माहौल बना हुआ है. बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के रहने वाले संतोष कुमार शर्मा और उनके परिवार के सदस्य काठमांडू में फंसे हुए हैं. उन्होंने बताया कि कर्फ्यू के कारण वे अपने किराए के मकान में कैद हैं और केवल दो घंटे की छूट मिलती है, उसी दौरान वे खाने-पीने का सामान खरीद पाते हैं.

इसी तरह, छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से पांच युवक भी नेपाल में फंसे हैं. उनके परिजनों ने छत्तीसगढ़ सरकार से संपर्क किया है, जिसके बाद सरकार ने उन्हें सुरक्षित वापस लाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं.

पर्यटकों और ड्राइवरों की परेशानी… उत्तर प्रदेश के महाराजगंज में सोनौली बॉर्डर पर पहुंचे पर्यटकों ने नेपाल में हुई हिंसा की कहानियां बताईं. अहमदाबाद से आए एक पर्यटक दल ने कहा कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने गाड़ियों को जलते हुए देखा, जिससे वे डर गए. इसके अलावा, भारत-नेपाल सीमा पर कई ट्रक ड्राइवर भी फंसे हैं, क्योंकि भैरहवा में कस्टम कार्यालय में आगजनी के कारण ट्रकों की आवाजाही बाधित हो गई है. कर्फ्यू के कारण ड्राइवरों को खाने-पीने की भी समस्या हो रही है.

भारतीयों की मौत और सुरक्षा के प्रयास नेपाल की राजधानी काठमांडू में हुई हिंसा में गाजियाबाद के ट्रांसपोर्टर रामवीर सिंह गोला की पत्नी राजेश गोला की दर्दनाक मौत हो गई. आग लगने के बाद जान बचाने के लिए वह रस्सी के सहारे उतर रही थीं, तभी उनका हाथ छूट गया और नीचे गिरने से उनकी मौत हो गई. इस बीच, भारत ने अपनी सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ा दी है. श्रावस्ती में पुलिस बल और सशस्त्र सीमा बल के साथ एरिया डोमिनेशन किया जा रहा है और ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है.

नेपाल के नेताओं की प्रतिक्रिया… नेपाल में चल रहे आंदोलन पर भारत के कई राजनेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है. बीजेपी नेता विनय कटियार ने कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) नेताओं के बयानों को ‘दोगला’ कहा. सांसद साक्षी महाराज ने नेपाल के लोगों के लिए प्रार्थना की है. वहीं, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने नेपाल में राजतंत्र की वापसी का समर्थन किया है, क्योंकि उनका मानना है कि हिंदू शासन व्यवस्था राजतंत्र ही है.

नेपाल में जेल ब्रेक की घटना नेपाल के रौतहट जिले के गौर कारागार से 227 कैदी जेल तोड़कर भागने में सफल रहे. इस घटना के बाद एसएसबी और पुलिस ने सीमा पर चौकसी बढ़ा दी. भारत में प्रवेश करने के दौरान 13 कैदी पकड़े गए, जिनमें से एक को सीतामढ़ी न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

पेट्रोल की किल्लत नेपाल के धनगढ़ी में कर्फ्यू की वजह से नागरिकों को पेट्रोल मिलने में काफी दिक्कत हो रही है. निजी पेट्रोल पंप बंद हैं, और केवल पुलिस कोष से बने सरकारी पेट्रोल पंप पर ही पेट्रोल मिल रहा है, जहां एक किलोमीटर लंबी लाइनें लगी हुई हैं.

गुजरात के जामनगर में रहने वाले करीब 21 हजार नेपाली नागरिकों ने नेपाल के मौजूदा हालात पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भ्रष्ट नेताओं का पर्दाफाश होना एक पॉजिटिव बात है, लेकिन हिंसा की वजह से निर्दोष लोगों की मौत और सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचना देश के लिए चिंताजनक है.

सुशीला कार्की और भारत का संबंध नेपाल में जेन-ज़ी आंदोलनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट की पूर्व मुख्य जज सुशीला कार्की के नाम का प्रस्ताव किया है. उनका भारत से गहरा नाता रहा है. उन्होंने 1975 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की थी. सुप्रीम कोर्ट में उनके कई फैसले महत्वपूर्ण रहे हैं.

“देश में भारी मॉनसूनी बारिश के बावजूद फसलें सुरक्षित, कृषि उत्पादन पर नहीं असर! जानिए क्या कहते हैं आंकड़े”

0

मॉनसूनी बारिश से भारत के कई राज्यों में तबाही देखने को मिली है. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के हफ्तों में उत्तर भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश, बाढ़ और बादल फटने की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें कई लोगों की मौत हुई है.

वहीं, दस लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं. इस मौसम के चलते खेतों में किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंचा है. हालांकि, ताजा बुवाई के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत के कुल कृषि उत्पादन पर इन मॉनसूनी चुनौतियों का नकारात्मक असर पड़ने की संभावना नहीं है.

अगस्त में हुई भारी बारिश अगस्त कई सालों में सबसे ज्यादा बारिश वाला महीना रहा है और सितंबर में भी भारत के कुछ हिस्सों में अब तक सामान्य से अधिक बारिश हो चुकी है. अगस्त के आखिरी हफ्ते और सितंबर के पहले हफ्ते में हुई भारी बारिश ने पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में बाढ़ के हालात पैदा किए हैं जिससे लोगों को नुकसान हुआ है.

बारिश से फसलों को कितना नुकसान? भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस साल के मॉनसून सीजन में भारत में अब तक औसत के मुकाबले 7.6 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है. पंजाब और हरियाणा जैसे दो बड़े खरीफ राज्यों में फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचने की खबरें भी सामने आई हैं. दूसरी तरफ, बिहार और असम जैसे राज्यों में मॉनसून की कमी 30 प्रतिशत से ज्यादा रही है, जिससे वहां खरीफ की बुवाई पर असर पड़ने की संभावना है.

हालांकि, पिछले पांच सालों के आंकड़े बताते हैं कि गेहूं, मक्का और मोटे अनाज जैसी फसलों के मामले में बुवाई क्षेत्र और उत्पादन के बीच लगभग वन-टू-वन का संबंध रहा है, यानी जब बुवाई का क्षेत्र बढ़ता है, तो उत्पादन भी आमतौर पर बढ़ता है. उदाहरण के तौर पर, चावल की बात करें तो 2020-21 से लेकर अब तक (केवल 2022-23 को छोड़कर) हर साल बुवाई का क्षेत्रफल बढ़ा है, इसी तरह चावल का उत्पादन भी 2022-23 को छोड़कर, हर साल थोड़ा-थोड़ा बढ़ा है.

क्या कहते हैं आंकड़े? लेटेस्ट सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल खरीफ धान की बुवाई का कुल क्षेत्र 4.7 प्रतिशत बढ़ा है. सात प्रमुख खरीफ फसलों में से चार की बुवाई का क्षेत्र बढ़ा है, जबकि तिलहन, जूट और कपास में मामूली गिरावट देखी गई है. मोटे अनाजों में सबसे ज्यादा बढ़त देखने को मिली है, इनमें बुवाई का क्षेत्र 6.7 प्रतिशत बढ़ा है.

लगातार चार साल की गिरावट के बाद इस साल दालों की बुवाई का क्षेत्र भी बढ़ा है, यह बात उत्साहजनक है कि हाल के सालों में बुवाई का क्षेत्र कम होने के बावजूद 2024-25 में दालों का उत्पादन करीब 7.5 प्रतिशत बढ़ा है. मजबूत फसल उत्पादन, महंगाई को काबू करने में मदद करता है.

मंजूर नहीं पुरानी रिपोर्ट, नवरात्र में नई जातीय गणना के आदेश; सिद्धारमैया का महीने भर में ये तीसरा दांव…

0

कांग्रेस शासित कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को ऐलान किया कि राज्य में 22 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच दशहरा की छुट्टियों के दौरान एक नया सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक सर्वेक्षण कराया जाएगा।

उन्होंने कहा कि 2015 में की गई जाति जनगणना को सरकार ने नामंजूर कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछली जनगणना के आंकड़े एक दशक पुराने हो चुके हैं, इसलिए समाज की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए नई जाति जनगणना जरूरी हो गई है।

मुख्यमंत्री ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “समाज में कई धर्म और जातियाँ हैं। विविधता और असमानता भी है। संविधान कहता है कि सभी के साथ समान व्यवहार होने चाहिए और सामाजिक न्याय होना चाहिए।” उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि नया सर्वेक्षण असमानताओं को दूर करने और लोकतंत्र की मज़बूत नींव रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

2 करोड़ परिवारों को किया जाएगा शामिल कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा किए जाने वाले इस सर्वे में राज्य के लगभग 2 करोड़ परिवारों के तहत आनेवाली करीब 7 करोड़ पूरी आबादी को शामिल किए जाने की उम्मीद है। इस सर्वे के दौरान हरेक परिवार को एक विशिष्ट घरेलू पहचान पत्र (UID) स्टिकर दिया जाएगा। इनमें से अब तक 1.55 करोड़ घरों पर ये स्टिकर चिपकाए जा चुके हैं। परिवारों की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और शैक्षिक स्थिति का विवरण एकत्र करने के लिए 60 प्रश्नों वाली एक प्रश्नावली भी तैयार की गई है।

हरेक को 20,000 रुपये तक का मानदेय इंडिया टुडे की रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्वेक्षण के लिए दशहरा की छुट्टियों के दौरान 1.85 लाख सरकारी शिक्षकों को तैनात किया जाएगा। इस काम के लिए हरेक को 20,000 रुपये तक का मानदेय मिलेगा, जिससे शिक्षकों के पारिश्रमिक के लिए कुल आवंटन 325 करोड़ रुपये हो जाएगा। राज्य ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए 420 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं, जो 2015 की जाति जनगणना के दौरान खर्च किए गए 165 करोड़ रुपये से ढाई गुना से भी ज़्यादा है।

बिजली मीटर के नंबरों की होगी जियो-टैगिंग रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्वे के दौरान हरेक घर को बिजली मीटर के नंबरों से जियो-टैग किया जाएगा, और मोबाइ नंबों को राशन कार्ड और आधार से जोड़े जाएँगे। जो लोग सर्वे कर्मियों को अपनी जाति का विवरण नहीं देना चाहते, उनके लिए एक समर्पित हेल्पलाइन (8050770004) पर कॉल करके या ऑनलाइन जानकारी देने के विकल्प भी उपलब्ध कराए गए हैं।

दिसंबर 2025 तक आएगी रिपोर्ट मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने नागरिकों से पूर्ण सहयोग देने का आग्रह किया। मधुसूदन नाइक की अध्यक्षता वाले आयोग को वैज्ञानिक और समावेशी तरीके से सर्वेक्षण करने का काम सौंपा गया है। उम्मीद है कि आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट दिसंबर 2025 तक सौंप देगा। बता दें कि इससे पहले कर्नाटक पिछड़ा वर्ग आयोग ने सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक सर्वेक्षण 2015 रिपोर्ट तैयार की थी। इसे 17 अप्रैल को सिद्धारमैया कैबिनेट में पेश किया जाना था। लेकिन उससे पहले ही यह लीक हो गई थी, जिस पर विवाद मच गया था और रिपोर्ट पेश नहीं हो पाई।

पिछली जातीय गणना पर उठे थे सवाल राज्य के सबसे प्रभावशाली वोक्कालिगा और वीरशैव-लिंगायत समुदाय ने भी उस सर्वे पर सवाल उठाते हुए सिद्धारमैया सरकार को कठघरे में खड़ा किया था। आयोग ने बताया था कि उसने राज्य की 6.35 करोड़ आबादी में से 5.98 करोड़ लोगों के बीच सर्वे कर ये रिपोर्ट बनाई है। इन दोनों समुदायों ने आरोप लगाया था कि उनकी आबादी घटाकर बताई गई है।

कांग्रेस सरकार का महीने भर में तीसरा दांव दरअसल, कर्नाटक में अगले कुछ महीनों में स्थानीय निकाय चुनाव होने हैं। उससे पहले इस सर्वे को सिद्धारमैया सरकार का एक दांव माना जा रहा है। एक तरफ इस सर्वे से वह वोक्कालिगा और वीरशैव-लिंगायत समुदाय की नाराजगी दूर करने जा रहे हैं तो दूसरी तरफ राज्य के अन्य ओबीसी, SC/ST वर्ग को भी साधने की कोशिशों में जुटे हैं।

इससे पहले वह इसी महीने अल्पसंख्यक महिलाओं के लैंगिक सर्वेक्षण का भी आदेश दे चुके हैं। इसी महीने वह स्थानीय चुनाव बैलेट पेपर से कराने की घोषणा कर चुके हैं, जिसे राज्य चुनाव आयोग ने माना लिया है। इस तरह महीने भर में यह उनका तीसरा दांव है। बड़ी बात यह है कि कांग्रेस शासित राज्य में ये कवायद बिहार चुनाव से पहले कराई जा रही है। कांग्रेस इसके जरिए बिहार चुनावों में भी सियासी संदेश देने की कोशिश कर रही है।

“मुंबई की ईओडब्ल्यू ने 1,000 करोड़ के कॉर्पोरेट घोटाले का किया भंडाफोड़, 2 निदेशक गिरफ्तार” 

0

मुंबई की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने एक बड़े कॉर्पोरेट घोटाले का पर्दाफाश करते हुए दो निदेशकों को गिरफ्तार किया है. यह घोटाला लगभग 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की कंपनी संपत्तियों के अवैध ट्रांसफर और नकली शेयर प्रमाण पत्र बनाने से जुड़ा है.

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मंगेश कदम और ममता सिंह के रूप में हुई है. दोनों को गुरुवार को मुंबई कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 16 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया.

ईओडब्ल्यू के मुताबिक, यह FIR बिजनेसमैन रजत झुनझुनवाला की शिकायत पर दर्ज की गई. आरोपियों ने शाहाजस डिवेलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और उसकी सहायक कंपनी जेएलएस रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड के फर्जी शेयर होल्डिंग सर्टिफिकेट और MGE-7 फॉर्म तैयार किए. इन दस्तावेजों के आधार पर झुनझुनवाला की हिस्सेदारी जबरन ट्रांसफर कर उन्हें कंपनियों से बाहर कर दिया गया.

39 लाख शेयरों को शेल कंपनियों में ट्रांसफर किया गया जांच से पता चला है कि ये जाली दस्तावेज रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में भी फाइल किए गए थे. इसके बाद करीब 39 लाख शेयरों को अवैध रूप से डीमैट कर कई शेल कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि गवाहों के बयानों से यह भी सामने आया कि आरोपियों ने फर्जी हस्ताक्षर और जाली मॉर्टगेज डीड्स के जरिए आईडीबीआई ट्रस्टीशिप सर्विसेज के साथ शेयरों को गिरवी रखा था. इससे अन्य संस्थाओं की मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है.

सरकार को लगभग 40 करोड़ से अधिक का नुकसान ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने कहा कि इस धोखाधड़ी से न केवल शिकायतकर्ता को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है, बल्कि सरकार को भी लगभग 40 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व नुकसान उठाना पड़ा, क्योंकि संपत्ति ट्रांसफर के दस्तावेजों का मूल्यांकन जानबूझकर कम दिखाया गया था. पुलिस को शक है कि इस पूरे घोटाले में और भी कई लोग शामिल हो सकते हैं. फिलहाल मामले में जांच जारी है.

India’s Real Estate Sector – भारत में तेजी से उभर रहा रियल एस्टेट मार्केट, 2047 तक 10 ट्रिलियन डॉलर पहुंचने का अनुमान; रिपोर्ट…

0

India’s Real Estate Sector: एक लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2047 तक मांग में वृद्धि, बढ़ते संस्थागतकरण और मजबूत आर्थिक विकास की संभावनाओं के चलते कुल ऑफिस स्टॉक 2 अरब वर्ग फुट से अधिक होने की संभावना है।

साथ ही, रियल एस्टेट सेक्टर बाजार के 2047 तक 10 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। कोलियर्स ने कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) के सहयोग से एक रिपोर्ट में ये आंकड़े दिए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में ‘ग्रेड ए’ ऑफिस स्टॉक 2010 से तीन गुना बढ़कर वर्तमान में 80 करोड़ वर्ग फुट से अधिक हो गया है। यह वृद्धि टेक्नोलॉजी, बीएफएसआई, इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) और घरेलू कंपनियों की बढ़ती मांग के कारण हुई है।

2047 तक दोगुनी होगी सालाना घर बिक्री औद्योगिक और वेयरहाउसिंग के क्षेत्र में, ग्रेड ए स्टॉक का स्तर 2025 में 250 मिलियन वर्ग फुट के आंकड़े को पार कर गया, जो मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास, निजी क्षेत्र की भागीदारी और उपभोक्ता मांग के साथ-साथ वेयरहाउसिंग आवश्यकताओं में वृद्धि के कारण 2010 के स्तर की तुलना में कई गुना बढ़ गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इनकम लेवल में अनुमानित वृद्धि और प्रगतिशील आवास नीतियों के समर्थन से, 2047 तक वार्षिक आवास बिक्री दोगुनी होकर 10 लाख यूनिट हो सकती है।

भारत में तेजी से हो रहा शहरीकरण भारतीय शहरों का तेजी से शहरीकरण हो रहा है। 2050 तक कुल जनसंख्या का 53 प्रतिशत हिस्सा शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोग होंगे, जो कि वर्तमान में 37 प्रतिशत है। कोलियर्स इंडिया के नेशनल डायरेक्टर और रिसर्च हेड विमल नादर ने कहा, “भारत न केवल अपने इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार कर रहा है; बल्कि शहरी जीवन के भविष्य की पुनर्कल्पना भी कर रहा है।

भारत का रियल एस्टेट क्षेत्र सभी परिसंपत्ति वर्गों में तेज गति से बहुआयामी विकास के लिए तैयार है। निरंतर सरकारी प्रोत्साहन और कई निजी व सार्वजनिक हितधारकों से भारत 2030 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। इसके अलावा, भारतीय अर्थव्यवस्था 2047 तक 35-40 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है।

सकल घरेलू उत्पाद में योगदान लगातार बढ़ना है, जो कि 2000 के दशक की शुरुआत में 5 प्रतिशत से बढ़कर आज 6-8 प्रतिशत हो गया है और इसके 14-20 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। क्रेडाई के प्रेसिडेंट शेखर पटेल ने कहा, “2047 तक, भारतीय रियल एस्टेट को केवल वर्ग फुट या संपत्ति के मूल्य में नहीं मापा जाएगा बल्कि यह लाखों नागरिकों के लिए हमारे द्वारा निर्मित जीवन की गुणवत्ता से परिभाषित होगा।