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पूरे G7 को भारत के पीछे लगाने की तैयारी में डोनाल्ड ट्रंप, बनाया बहुत बड़ी चोट देने का प्लान, मीटिंग आज…

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भारत के खिलाफ अमेरिका का टैरिफ वॉर फिलहाल खत्म होने के आसार नहीं हैं। खबर है कि अब राष्ट्रपति ट्रंप कई देशों को भारत के खिलाफ ज्यादा टैरिफ लगाने के लिए उकसा रहे हैं। हालांकि, इसे लेकर अमेरिकी सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।

संभावनाएं जताई जा रही हैं कि इस संबंध में G7 देशों के नेताओं के साथ बैठक कर सकते हैं। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका G7 देशों से भारत और चीन पर ज्यादा टैरिफ लगाने की अपील करने की तैयारी कर रहा है। कहा जा रहा है कि ये टैरिफ दरें 50 और 100 प्रतिशत के बीच हो सकती हैं। शुक्रवार को कनाडा, फ्रांस, अमेरिका, जापान, इटली, ब्रिटेन और जर्मनी के वित्त मंत्री शुक्रवार को वीडियो कॉल के जरिए बैठक करने जा रहे हैं।

EU से बात कर चुके ट्रंप कुछ दिन पहले ही रॉयटर्स की रिपोर्ट में एक अमेरिकी और एक ईयू अधिकारी के हवाले से बताया गया था कि ट्रंप ने ईयू अधिकारियों से चीन पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की अपील की है, ताकि इसके जरिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव डाला जा सके। एजेंसी को एक अधिकारी ने बताया कि ट्रंप ने ईयू से भारत पर भी ऐसे ही टैरिफ लगाने के लिए कहा है।

फाइनेंशियल टाइम्स से बातचीत में अमेरिकी अधिकारी ने कहा, ‘चीन और भारत की तरफ से रूसी तेल की खरीदी पुतिन की वॉर मशीन की मदद कर रही है और बेकार की यूक्रेनी लोगों की हत्या को बढ़ा रही हैं। इस हफ्ते हमने हमारे ईयू सहयोगियों से कह दिया है कि अगर वह युद्ध खत्म करने के लिए गंभीर हैं, तो उन्हें हमारे साथ मिलकर टैरिफ लगाने होंगे, जिन्हें युद्ध खत्म होते ही वापस ले लिया जाएगा।

ट्रंप का भारत पर टैरिफ अटैक ट्रंप ने शुरुआत में भारत पर 25 प्रतिशत शुल्क और रूसी तेल की खरीद के लिए जुर्माना लगाया था। इसके बाद उन्होंने अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ की घोषणा कर दी थी। जबकि, भारत की तरफ से साफ किया गया था कि अमेरिका और यूरोपीय संघ दोनों भी रूस के साथ व्यापार करते हैं।

खास बात है कि चीन भी रूसी तेल के सबसे बड़े खरीददारों में से एक है, लेकिन अमेरिका की तरफ से उसपर 30 फीसदी टैरिफ लगाया गया है। जबकि, भारत पर जुर्माने के अलावा 50 फीसदी शुल्क लगाया है और प्रतिबंध की धमकियां दी जा रही हैं।

बिना खून बहाए, भ्रष्ट शासन का खात्मा नहीं नेपाल से सीखें बंगाल के युवा, BJP नेता की अपील पर विवाद…

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पश्चिम बंगाल में विपक्षी भाजपा के एक नेता ने राज्य भर के युवाओं से पड़ोसी देश नेपाल में हुए जेन जेड आंदोलन से सीख लेने की अपील की है। भाजपा नेता और पूर्व सांसद अर्जुन सिंह ने गुरुवार को कहा कि ‘बिना खून बहाए, भ्रष्ट शासन का खात्मा नहीं हो सकता’।

उनके इस बयान पर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा नेता पर राज्य में हिंसा भड़काने और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। टीएमसी ने राज्य भर में भाजपा नेता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की चेतावनी दी है।

नेपाल में चल रहे उठापटक और संकट पर गुरुवार को मीडियाकर्मियों से बात करते हुए, भाजपा नेता ने कहा, “बंगाल के युवा राज्य की इस भ्रष्ट सरकार से कब निपटेंगे? हम इंतज़ार कर रहे हैं। बिना खून बहाए, भ्रष्ट शासन का खात्मा नहीं होता। कई लोगों ने कहा कि (महात्मा) गांधीजी ने गीत गाकर देश को आज़ाद कराया। मैं व्यक्तिगत रूप से इसमें विश्वास नहीं करता।

जाग जाएं बंगाल के युवा: भाजपा नेता इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा नेता आगे कहा, “बेरोजगार युवाओं को नेपाल से सीख लेनी चाहिए। वहाँ 18 से 30 साल के युवाओं ने अपनी ताकत दिखाई है। बंगाल में भी इसकी जरूरत है। जिस दिन बंगाल के युवा जागेंगे, हम जैसे लोग आगे बढ़कर नेतृत्व करने को तैयार हैं।

जब अनपढ़ बोलते हैं, तो ऐसे ही बोलते हैं: भौमिक भाजपा नेता की इस टिप्पणी पर बैरकपुर से टीएमसी के सांसद पार्थ भौमिक ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि वह और उनकी पार्टी के लोग मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जान से मारने की धमकी देने के आरोप में राज्य भर पुलिस थानों में सिंह के खिलाफ केस दर्ज कराएँगे। भौमिक ने कहा, “जब अनपढ़ बोलते हैं, तो ऐसे ही बोलते हैं। बांग्लादेश एक देश है। नेपाल भी एक देश है। और पश्चिम बंगाल एक राज्य है। वह (सिंह) भारत के युवाओं को भारत सरकार के खिलाफ ऐसा करने के लिए कह रहे हैं क्योंकि देश और भाजपा शासित राज्यों में भ्रष्टाचार है। फिर भी, हम कभी नहीं कहेंगे कि भारत नेपाल जैसा देश है क्योंकि हम लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं। उन्होंने मूल रूप से मुख्यमंत्री को जान से मारने की धमकी दी है।

FIR से नहीं डरते, बोले भाजपा नेता भौमिक की टिप्पणी के बाद, भाजपा नेता ने कहा कि वह अपने खिलाफ पुलिस मामलों से नहीं डरते। सिंह ने कहा, “मैं उनकी धमकियों से नहीं डरता। वे मेरे खिलाफ जितनी चाहें उतनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। लेकिन, मैं अपना रुख नहीं बदलूँगा।”बता दें कि पिछले लोकसभा चुनाव में, भौमिक ने बैरकपुर में सिंह को हराया था।

इस्तीफे के बाद पहली बार नजर आए जगदीप धनखड़, नए VP राधाकृष्णन की शपथ में पहुंचे…

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देश के नए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का आज शपथ समारोह था। उन्होंने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। इस मौके पर उनसे पहले उपराष्ट्रपति रहे जगदीप धनखड़ भी पहुंचे, जिनके 22 जुलाई को अचानक इस्तीफा देने के बाद पद खाली हुआ था और फिर 9 सितंबर को चुनाव हुआ।

यह पहला मौका था, जब इस्तीफे के बाद जगदीप धनखड़ सार्वजनिक तौर पर नजर आए। उनके अलावा पूर्व राष्ट्रपति वेंकैया नायडू और हामिद अंसारी भी शपथ समारोह में पहुंचे। इस्तीफे के बाद से ही जगदीप धनखड़ देखे नहीं गए थे और विपक्ष की ओर से लगातार सवाल दागे जा रहे थे कि आखिर वह कहां हैं और कैसे हैं।

उनकी मौजूदगी ने ऐसे सभी कयासों का अंत किया है। शपथ समारोह में वह मेहमान की तरह पहुंचे और खुद से भी पहले राष्ट्रपति रहे वेंकैया नायडू एवं हामिद अंसारी के बगल में बैठे नजर आए। इस मौके पर एमपी से सीएम मोहन यादव, हरियाणा के नायब सिंह सैनी और उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी समेत कई सीनियर नेता पहुंचे। पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और अन्य केंद्रीय मंत्री भी इस समारोह का हिस्सा बने।

एनडीए सूत्रों का कहना है कि मुहूर्त देखकर राधाकृष्णन का शपथ समारोह आयोजित कराया गया है। ओडिशा के सीएम मोहन माझी, कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, झारखंड के संतोष गंगवार, चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया भी इस मौके पर नजर आए। राधाकृष्णन देश के 15वें उपराष्ट्रपति बने हैं। उन्हें 9 सितंबर को हुए चुनाव में कुल 452 वोट मिले थे, जबकि विपक्ष के कैंडिडेट बी. सुदर्शन रेड्डी के खाते में 300 वोट ही आ सके।

उपराष्ट्रपति बनने से पहले सीपी राधाकृष्णन महाराष्ट्र में राज्यपाल के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। अब महाराष्ट्र के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार गुजरात के गवर्नर आचार्य देवव्रत को दिया गया है। राधाकृष्णन की तमिलनाडु के मोदी के तौर पर ख्याति रही है। उन्होंने कोयंबटूर सीट से लोकसभा चुनाव में दो बार जीत हासिल की थी। इसके अलावा वह तमिलनाडु के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं।

सीपी राधाकृष्णन ने ली उपराष्ट्रपति पद की शपथ, PM मोदी समेत कई दिग्गज नेता रहे मौजूद…

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भारतीय राजनीति में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ले ली है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें राष्ट्रपति भवन में एक भव्य समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह शपथ ग्रहण समारोह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राधाकृष्णन की जीत ने न सिर्फ एनडीए की ताकत को दिखाया है, बल्कि विपक्ष की एकजुटता पर भी बड़े सवाल खड़े किए हैं।

उपराष्ट्रपति चुनाव में मिली ‘ऐतिहासिक’ जीत सीपी राधाकृष्णन ने मंगलवार को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी को भारी मतों के अंतर से हराया। यह चुनाव पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे के बाद आयोजित किया गया था।

एनडीए उम्मीदवार राधाकृष्णन को 452 मत प्राप्त हुए, जबकि विपक्षी उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी को केवल 300 मत मिले। राज्यसभा के महासचिव और निर्वाचन अधिकारी पीसी मोदी ने परिणाम घोषित करते हुए बताया कि कुल 781 सांसदों में से 767 ने मतदान किया। इस चुनाव में 98.2 प्रतिशत मतदान हुआ, जो एक रिकॉर्ड है। चुनाव के बाद यह भी साफ हो गया कि एनडीए के पास अपने सहयोगियों के अलावा भी अन्य दलों का समर्थन था, जिससे विपक्ष के भीतर क्रॉस-वोटिंग की बहस शुरू हो गई।

पीएम मोदी ने दी बधाई उपराष्ट्रपति चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीपी राधाकृष्णन को बधाई दी। पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि नए उपराष्ट्रपति भारत के संवैधानिक मूल्यों को और मजबूत करेंगे और संसदीय संवाद में एक सकारात्मक योगदान देंगे।

शपथ के बाद ‘पहली’ बड़ी बैठक शपथ ग्रहण के बाद, अब राधाकृष्णन अपने नए कार्यकाल की शुरुआत करने जा रहे हैं और इसका पहला कदम आज ही उठाया जाएगा। उपराष्ट्रपति कार्यालय ने घोषणा की है कि शपथ ग्रहण के बाद, राधाकृष्णन राज्यसभा के सभी नेताओं के साथ दोपहर 12:30 बजे एक महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। यह बैठक उनके कार्यकाल की पहली बड़ी पहल होगी। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य राज्यसभा के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करना और पक्ष-विपक्ष के बीच संवाद को बढ़ावा देना है।

महाराष्ट्र में खाली हुआ राज्यपाल का पद सीपी राधाकृष्णन इससे पहले महाराष्ट्र के राज्यपाल थे। उनके उपराष्ट्रपति बनने के बाद, महाराष्ट्र में राज्यपाल का पद खाली हो गया है। राष्ट्रपति ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी है। अब गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को नए राज्यपाल की नियुक्ति तक महाराष्ट्र के राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। राधाकृष्णन का उपराष्ट्रपति बनना न सिर्फ उनकी राजनीतिक यात्रा में एक बड़ा मील का पत्थर है, बल्कि यह भी दिखाता है कि एनडीए गठबंधन कितनी मजबूती से एक साथ खड़ा है। वहीं, यह विपक्ष के लिए एक बड़ा सबक है कि चुनावों में एकजुटता सिर्फ कहने भर से नहीं होती।

नक्सलियों के खिलाफ मिली बड़ी सफलता पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि ये सफलताएं नक्सलियों की झूठी विचारधारा के अंत का प्रमाण हैं। 

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गरियाबंद जिले में हुई एक मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने 10 नक्सलियों को ढेर कर दिया। मारे गए नक्सलियों में केंद्रीय समिति सदस्य और 1 करोड़ रूपये के इनामी मोडेम बालकृष्णा उर्फ मनोज भी शामिल है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गरियाबंद और नारायणपुर जिलों में नक्सलियों के खिलाफ मिली बड़ी सफलता पर सीआरपीएफ की कोबरा कमांडो, छत्तीसगढ़ पुलिस और डीआरजी के जवानों को बधाई दी है।

इन अभियानों ने नक्सल उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति दर्शाई है।

मुख्यमंत्री ने इसे शांति और विकास की दिशा में एक नई शुरुआत करार दिया है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में मार्च 2026 तक ‘नक्सलमुक्त भारत’ का लक्ष्य हासिल हो जाएगा।

गरियाबंद जिले में हुई एक मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने 10 नक्सलियों को ढेर कर दिया। मारे गए नक्सलियों में केंद्रीय समिति सदस्य और 1 करोड़ रूपये के इनामी मोडेम बालकृष्णा उर्फ मनोज भी शामिल है।

यह मुठभेड़ नक्सल उन्मूलन अभियान में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है। इस कार्रवाई ने नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की प्रभावशीलता को और मजबूत किया है। नारायणपुर जिले में भी नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण का मार्ग चुना है। जनताना सरकार सदस्य, पंचायत मिलिशिया डिप्टी कमांडर, पंचायत सरकार सदस्य और न्याय शाखा अध्यक्ष सहित कुल 16 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का संकल्प लिया। यह घटना नक्सलियों की कमजोर पड़ती विचारधारा का स्पष्ट संकेत है। मुख्यमंत्री ने इसे छत्तीसगढ़ में शांति और विश्वास की नई सुबह का प्रतीक बताया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ये सफलताएं नक्सलियों की झूठी विचारधारा के अंत का प्रमाण हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि छत्तीसगढ़ में विश्वास, विकास और शांति की नई शुरुआत हो रही है। केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई तेज हो रही है, और जल्द ही यह क्षेत्र पूरी तरह नक्सलमुक्त होगा।

प्रदेश में आने वाले तीन दिनों तक भारी बारिश हो सकती है, प्रदेश के कई जिलों में जमकर बारिश होने की संभावना…

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छत्तीसगढ़ में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में गुरूवार की रात जमकर बारिश हुई। इसके साथ ही मौसम में ठंडक भी आ गई है। गुरूवार को हुई बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। गुरूवार को हुई बारिश के बाद मौसम विभाग ने शुक्रवार को भी प्रदेश के कई जिलों में जमकर बारिश होने की संभावना जताई है।

मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, पूरे प्रदेश में आने वाले तीन दिनों तक भारी बारिश हो सकती है। खासकर बस्तर और सरगुजा संभाग के जिलों में तेज बारिश की संभावना है। वहीं रायपुर, बिलासपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, जशपुर, कोरिया, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी, सूरजपुर, सरगुजा, कोरबा, बलरामपुर, रायगढ़, जशपुर, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिले में भारी बारिश होने का येलो अलर्ट जारी किया है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, छत्तीसगढ़ में अब तक औसतन 994 मिमी वर्षा दर्ज की जा चुकी है जो इस वर्ष के मानसून का लगभग 87 प्रतिशत है। बलरामपुर जिला सर्वाधिक वर्षा वाला जिला रहा है जहाँ अब तक 1344.5 मिमी बारिश हो चुकी है यह सामान्य से 54% अधिक है। वहीं बेमेतरा जिला सबसे कम वर्षा वाला क्षेत्र है, जहाँ मात्र 472 मिमी बारिश दर्ज की गई है जो औसत से करीब 50% कम है।

इस दिन शुरू हो रही है शारदीय नवरात्रि, जानिए सभी 9 दिनों के शुभ रंग और उन रंगों की महिमा…

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नवरात्रि यानी दुर्गा पूजा हिन्दू धर्म का प्रमुख त्योहारों में से एक हैं। पंचांग के अनुसार, नौ दिवसीय शारदीय नवरात्रि का आरंभ इस साल 22 सितंबर से होने जा रही हैं।

देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों में हर दिन का अपना एक विशेष रंग होता है, जो देवी के गुणों और आशीर्वाद को दर्शाता है। इन शुभ रंगों के अनुसार वस्त्र धारण करने से भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा और देवी की कृपा प्राप्त होती है।

ऐसे में आइए जानते हैं, नवरात्रि 2025 के हर दिन का रंग और उसका महत्व –

नवरात्रि के 9 शुभ रंग और उनका महत्व: नवरात्रि के पहले दिन- सफेद नवरात्रि के पहले दिन का रंग सफेद है, जो शांति, पवित्रता और सादगी का प्रतीक है। यह रंग मन को शांत और निर्मल बनाए रखने का संदेश देता है।

नवरात्रि के दूसरे दिन- लाल नवरात्रि के दूसरे दिन लाल रंग का होता है, जो शक्ति, ऊर्जा और जोश को दर्शाता है। यह रंग देवी दुर्गा की शक्ति और उत्साह का प्रतीक है।

नवरात्रि के तीसरे दिन- रॉयल ब्लू नवरात्रि के तीसरे दिन का रंग रॉयल ब्लू है, जो शांति, गंभीरता और समृद्धि का प्रतीक है। यह रंग जीवन में स्थिरता और गहराई लाने का संकेत देता है।

नवरात्रि के चौथे दिन- पीला नवरात्रि के चौथे दिन पीला रंग पहना जाता है, जो खुशी, उमंग और आशा का प्रतीक है। यह रंग सकारात्मकता और जीवन में नई उम्मीदें जगाता है।

नवरात्रि के पांचवें दिन- हरा नवरात्रि के पांचवें दिन का रंग हरा है, जो प्रकृति, समृद्धि और संतुलन को दर्शाता है। यह जीवन में ताजगी और सकारात्मक बदलाव लाने का प्रतीक है।

नवरात्रि के छठे दिन- ग्रे यानी भूरा नवरात्रि के छठे दिन का रंग ग्रे यानी भूरा होता है, जो अक्सर सादगी और संतुलन का प्रतीक माना जाता है। यह रंग दर्शाता है कि जीवन में हर परिस्थिति को स्वीकार करना चाहिए।

नवरात्रि के सातवां दिन- नारंगी नवरात्रि के सातवां दिन नारंगी रंग का होता है, जो उत्साह, जोश और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। यह रंग जीवन में जोश और उमंग भरता है।

नवरात्रि के आठवें दिन- मोर-परी हरा आठवें दिन मोर-परी हरा रंग पहना जाता है। यह नीला और हरे रंग का एक सुंदर मिश्रण है, जो जीवन में ताजगी, खुशहाली और सकारात्मकता का प्रतीक है।

नवरात्रि के नौवें दिन- नवरात्रि के नौवें यानी आखिरी दिन का शुभ रंग गुलाबी है, जो प्रेम, दया और करुणा का प्रतीक है। यह रंग रिश्तों में प्रेम और सद्भाव बनाए रखने का संदेश देता है।

बड़े सार्वजनिक निवेशों के साथ-साथ लगभग ₹1,000 करोड़ का निजी निवेश भी सेवा क्षेत्र और एमएसएमई: लगभग ₹52,000 करोड़ की प्रतिबद्धताओं के साथ बस्तर औद्योगिक और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का बन रहा नया केंद्र

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बस्तर के विकास को गति देने के लिए सरकार ने ₹5,200 करोड़ की रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें रावघाट–जगदलपुर नई रेल लाइन (₹3,513.11 करोड़) और केके रेल लाइन (कोत्तवलसा–किरंदुल) के दोहरीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। ये परियोजनाएँ न केवल बस्तर में यात्रा, पर्यटन और व्यापार को नई दिशा देंगी, बल्कि युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोज़गार और औद्योगिक अवसर भी सृजित करेंगी। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से नक्सलवाद उन्मूलन के प्रयास और मजबूत होंगे तथा बस्तर विश्वसनीय निवेश और समावेशी विकास का केंद्र बनकर उभरेगा।

इसके साथ ही, बस्तर में ₹2300 करोड़ की सड़क विकास परियोजनाएँ भी स्वीकृत की गई हैं। कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाने वाला यह संभाग अब छत्तीसगढ़ के सबसे विकसित और समृद्ध क्षेत्रों में से एक बनने की राह पर है। राज्य और केंद्र सरकार मिलकर धमतरी–कांकेर–कोंडागांव–जगदलपुर मार्ग का एक वैकल्पिक रास्ता बना रही हैं, जो कांकेर, अंतागढ़, नारायणपुर के अबूझमाड़ होते हुए दंतेवाड़ा के बारसूर और आगे बीजापुर तक पहुँचेगा। इन परियोजनाओं से बस्तर के सभी जिलों तक पहुँचने के लिए कई रास्ते उपलब्ध होंगे, जिससे दूरियाँ कम होंगी और योजनाओं व विकास कार्यों की पहुँच और अधिक प्रभावी होगी। यह आधुनिक सड़क नेटवर्क न केवल आवागमन की सुविधा बढ़ा रहा है, बल्कि सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक प्रगति के नए द्वार भी खोल रहा है। इस प्रकार, बस्तर अब संघर्ष की भूमि से आगे बढ़कर संपर्क, समृद्धि और सुरक्षा का प्रतीक बन रहा है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति: बस्तर को मिला पहला 350 बेड का निजी अस्पताल

जगदलपुर में पहली बार 350 बेड का मल्टी-स्पेशियलिटी निजी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज स्थापित होने जा रहा है। इसके लिए रायपुर स्टोन क्लिनिक प्रा. लि. को “इनविटेशन टू इन्वेस्ट” पत्र जारी किया गया है। 550 करोड़ रुपये के निवेश और 200 रोजगार अवसरों के साथ यह परियोजना बस्तर की स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊँचाई देगी और इसे मेडिकल शिक्षा का केंद्र बनाएगी।

इसके अतिरिक्त, जगदलपुर में 33 करोड़ रुपये के निवेश से एक और मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल तथा नवभारत इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज द्वारा 85 करोड़ रुपये के निवेश से 200 बेड का मल्टी-सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित किया जाएगा। ये पहल न केवल आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करेंगी, बल्कि सैकड़ों युवाओं को रोजगार भी प्रदान करेंगी।

कृत्रिम पैर मिलने से दिव्यांगों को मिली जीने की नई राह

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शासन की एक छोटी सी मदद से दिव्यांगों के जीने की राह आसान हो गई है। इससे दैनिक कार्यों के संपादन में उन्हें बड़ी सहूलियत हो सकेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज जगदलपुर प्रवास के दौरान ऐसे ही दिव्यांगजनों से मिलकर उनका दर्द साझा किया।
समाज कल्याण विभाग और श्री महावीर विकलांग सहायता समिति के संयुक्त तत्वावधान में ग्राम आड़ावाल में सहायक उपकरण वितरण समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री श्री साय ने दिव्यांगों को जयपुर कृत्रिम पैर एवं हाथ, ट्रायसिकल और अन्य सहायक उपकरण वितरित किए गए। इस दौरान ग्राम साडगुड़ से कक्षा 6वीं की छात्रा कु. पुलम बघेल जो पैर से दिव्यांग है, को जयपुर कृत्रिम पैर वितरित किया गया। कु. पुलम के पिता श्रीधर बघेल ने बताया कि 5 साल की आयु में बेटी का बायां पैर साइकल में फंस जाने के कारण उसमें सेप्टिक हो गया। यहां तक कि बच्ची का पैर कटवाना पड़ गया। उन्होंने बताया कि आज मुख्यमंत्री के समक्ष कृत्रिम पैर मिलने से बिटिया का जीवन आसान हो जाएगा। कृत्रिम पैर मिलने से उसे चलने फिरने, कहीं आने जाने में दिक्कत नहीं होगी। साथ ही वह खुद से अपने कामों को निष्पादित करने में सक्षम होगी।
इसी तरह तोकापाल ब्लॉक के ग्राम कुरेंगा से आई 23 वर्षीया कु. कलावती मंडावी ने बताया कि जब वह कक्षा आठवीं में अध्ययनरत थीं, तभी उनका बायां पैर करेंट की चपेट में आ गया था और इस घटना से उन्हें अपना पैर खोना पड़ा। मजदूरी करके जीवन चलाने वाली मां देवती बाई के लिए यह दोहरी मार थी। आज कलावती से मिलकर मुख्यमंत्री ने चर्चा की तथा हालचाल जाना। दिव्यांग कलावती ने बताया कि कृत्रिम पैर मिलने से अब उनका जीवन बेहद सुगम और सुविधापूर्ण हो जाएगा।

यहां पहुंचे श्री राजू नाग के 07 वर्षीय बेटे देवा को भी समाज कल्याण विभाग और समिति के द्वारा कृत्रिम पैर प्रदान किया गया। श्री राजू ने बताया कि जब उनकी पत्नी गर्भवती थी तो शारीरिक कमजोरी के चलते सात माह में ही देवा का जन्म हो गया। इसके चलते वह पैदाइशी दिव्यांग हो गया। उन्होंने बताया कि देवा को कृत्रिम पैर मिलने से उसका रोजाना का क्रियाकलाप काफी आसान हो जाएगा। इसी तरह श्री प्रभु सहाय, सुशील कश्यप, अर्खित रॉय ने भी अलग अलग दुर्घटनाओं में अपने हाथ और पैर खो दिए थे, जिन्हें आज मुख्यमंत्री की उपस्थिति में निःशुल्क कृत्रिम पैर और हाथ प्रदान किए गए। इन सभी के जीवन में उम्मीद की नई किरण आलोकित हुई है।

बस्तर की समृद्धि प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य की गाथा लिखेगी– मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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हमारी नई औद्योगिक नीति के केंद्र में बस्तर है। खनिज संसाधनों और प्रचुर प्राकृतिक संपदा से भरा यह इलाका विकास की विपुल संभावनाएँ अपने भीतर समेटे हुए है। माओवाद बस्तर के विकास की राह में कांटे की तरह चुभ रहा था और नक्सलवादी आतंक ने बस्तर के विकास को जकड़ कर रखा था। हमने संकल्प लिया कि बस्तर को मुख्यधारा में लाएँगे और इसे विकसित छत्तीसगढ़ की केंद्रीय धुरी बनाएंगे। हमारे बहादुर जवानों और बस्तरवासियों ने साहस और दृढ़ संकल्प से माओवाद का मुकाबला किया और आज बस्तर माओवाद के काले इतिहास को मिटाकर निवेश का स्वर्णिम अध्याय लिखने की राह पर आगे बढ़ रहा है। मार्च 2026 तक माओवाद की बची-खुची निशानियाँ भी समाप्त हो जाएंगी और नक्सलमुक्त बस्तर और भी तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ेगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज जगदलपुर में छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जापान के टोक्यो, ओसाका और दक्षिण कोरिया के सियोल के बाद इंवेस्टर्स कनेक्ट कार्यक्रम की अगली श्रृंखला के लिए हमने बस्तर संभाग का चुनाव किया और हमें खुशी है कि इतनी जल्दी यह आयोजन हम कर सके। यह बुलेट ट्रेन की रफ्तार का दौर है और इस रफ्तार से कदमताल करते हुए विकसित भारत–विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करने हमने नई औद्योगिक नीति का निर्माण किया है। हमारी यह नीति यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा दिखाए गए सुशासन के परफार्म, रिफार्म और ट्रांसफार्म के मंत्र पर तैयार की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की बुनियाद तेजी से विकसित होते उद्योगों के आधार पर रखी जाएगी। इसे ध्यान में रखते हुए नई औद्योगिक नीति में राज्य में निवेश के लिए अनुदान प्रावधान और प्रोत्साहन रखे गए हैं तथा इज ऑफ डूइंग बिज़नेस और स्पीड आफ डूइंग बिज़नेस के संकल्प के अनुरूप साढ़े तीन सौ से अधिक रिफार्म किए गए हैं। हमने जापान और दक्षिण कोरिया के अलावा मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु तथा नवा रायपुर में भी इंवेस्टमेंट समिट किए हैं। नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद अब तक हमारे पास लगभग 6 लाख 65 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आ चुके हैं। नई नीति में कोर सेक्टर के साथ आईटी, एआई, फार्मा, टेक्सटाइल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा ग्रीन एनर्जी से जुड़े माध्यमों पर विशेष अनुदान प्रावधान रखे गए हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आकर्षक अनुदान प्रावधानों के साथ ही हम ऐसी अधोसंरचना भी उद्यमियों को दे रहे हैं ताकि सिंगल विंडो सिस्टम से निवेश प्रस्ताव स्वीकृत होते ही वे औद्योगिक क्षेत्र में अपना उद्यम लगा सकें। नवा रायपुर इसका उदाहरण है, जहाँ भारत का पहला एआई डाटा सेंटर पार्क बनाया गया है। यहाँ फार्मास्युटिकल पार्क, मेडिसिटी और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर भी बनाए जा रहे हैं। अब बस्तर में औद्योगिक अधोसंरचना की स्थिति पर बात करें तो सभी जिलों और विकासखंडों में नये लघु औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना की जा रही है। जगदलपुर के ग्राम फ्रेजरपुर और गीदम रोड में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित हैं। नगरनार के निकट नियानार में 118 एकड़ क्षेत्र में नवीन औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया गया है। कांकेर के ग्राम लखनपुरी, दंतेवाड़ा के टेकनार और नारायणपुर में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित हैं। हमारी सरकार द्वारा सुकमा के साथ ग्राम पाकेला, फंदीगुड़ा, कोंडागांव के ग्राम अड़का-छेपड़ा और बीजापुर के ग्राम कोडोली में भी औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना की जा रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व का सर्वाधिक लाभ बस्तर के इंफ्रास्ट्रक्चर को मिला है। यहाँ से विशाखापट्टनम के लिए एक्सप्रेसवे गुजर रही है। रावघाट-जगदलपुर रेलमार्ग का कार्य हो रहा है और तेलंगाना से किरंदुल को जोड़ने वाली रेल रूट का सर्वे किया जा रहा है। उड़ान परियोजना से माँ दंतेश्वरी एयरपोर्ट जगदलपुर को उन्नत बनाया गया है। बोधघाट परियोजना पर शीघ्र कार्य शुरू होगा। कनेक्टिविटी के इस दौर में आगे रहने के लिए बस्तर में नये मोबाइल टावर लगाए जा रहे हैं। अधोसंरचना की इन बड़ी परियोजनाओं से बस्तर का औद्योगिक माहौल काफी उन्नत होगा।

उन्होंने कहा कि यूँ तो पूरे प्रदेश में नये निवेश पर अनुदान प्रावधान हैं लेकिन बस्तर के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। नई औद्योगिक नीति में बस्तर के 88 प्रतिशत ब्लॉक ग्रुप-3 में चिन्हांकित किए गए हैं। यहाँ निवेश करने पर उद्यमियों को सर्वाधिक लाभ मिलेगा। हमारी सरकार समावेशी विकास पर काम करती है और प्राथमिकता यह है कि पीछे रह गए वर्गों को उद्यम के सबसे पहले अवसर मिलें। इसलिए एससी-एसटी वर्ग के उद्यमियों के लिए 10 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी का प्रावधान भी किया गया है। उद्योगों की स्थापना के पीछे उद्देश्य केवल अर्थव्यवस्था को रफ्तार देना ही नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन भी है। इस रोजगार में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 1,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश या 1,000 से ज्यादा लोगों को रोजगार देने वाली इकाइयों को अतिरिक्त अनुदान का प्रावधान रखा गया है। आत्मसमर्पित नक्सलियों को रोजगार देने पर उद्यमियों को पाँच वर्षों तक 40 प्रतिशत सैलरी सब्सिडी दी जाएगी, जिसकी सीमा पाँच लाख रुपये सालाना होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर भारत का स्वर्ग है और इसे देखने बड़े पैमाने पर लोग आएँ, इसके लिए पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है। जो उद्यमी बस्तर में पर्यटन क्षेत्र में निवेश करेंगे, उन्हें 45 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी। इससे होटल इंडस्ट्री, इको-टूरिज्म, वेलनेस, एडवेंचर स्पोर्ट्स आदि क्षेत्रों में निवेश के स्वर्णिम अवसर बनेंगे। होम स्टे पर विशेष अनुदान से स्थानीय उद्यमशील लोगों को भी पर्यटन क्षेत्र में अवसर मिल रहे हैं। बस्तर में वनोपज प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं और इनके प्रसंस्करण से जुड़ी यूनिट लगाने पर विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसी तरह एग्रो इंडस्ट्री पर भी विशेष फोकस है। सबसे खास बात यह है कि बस्तर में स्किल डेवलपमेंट पर सबसे अधिक जोर दिया जा रहा है। कोर इंडस्ट्री और नये दौर के उद्योगों के अनुरूप बस्तर के सभी 32 ब्लॉकों में स्किल डेवलपमेंट सेंटर बनाए जा रहे हैं। बस्तर के युवा मेहनती और प्रतिभाशाली हैं, निश्चित ही उद्योगों को स्किल्ड मानव संसाधन की कमी नहीं होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के उद्यमशील युवाओं को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से पूंजी, स्किल और काउंसलिंग दी जा रही है। इसके चलते नया उद्यमी वर्ग तेजी से उभर रहा है। बस्तर में पर्याप्त संसाधन हैं। उद्योग लगाने पर कच्चे माल की लागत कम होगी। पोर्ट सिटी से कनेक्टिविटी है, निर्यात में भी कोई कठिनाई नहीं होगी। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि औद्योगिक नीति में जो विपुल प्रोत्साहन हैं उनका लाभ उठाने का यह स्वर्णिम अवसर है। बस्तर ने निवेश के लिए रेड कारपेट बिछा दिया है और विकास के लिए टेकऑफ करने वाला है। आप सभी बस्तर की सफलता की इस उड़ान में शामिल हों। बस्तर में निवेश करें, यहाँ निवेश का भविष्य बेहद उज्ज्वल है।