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भारत-पाक सैन्य संघर्ष और अब टैरिफ के मुद्दे पर ट्रंप…

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भारत-पाक सैन्य संघर्ष और अब टैरिफ के मुद्दे पर ट्रंप… सुलिवन ने ट्रंप के बारे में क्या कहा? 

डोनाल्ड ट्रंप ने बीते कुछ समय में लगातार ऐसे फैसले लिए हैं, जिससे भारत-अमेरिका के संबंधों में गिरावट आई है। दूसरी ओर पाकिस्तान पर ट्रंप महरबान दिखाई दे रहे हैं। भारत-पाक सैन्य संघर्ष और अब टैरिफ के मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन स्पष्टतौर पर इस्लामाबाद की ओर झुका दिखा है।

ट्रंप के इस रवैये से अमेरिका के कई पूर्व अधिकारी चिंता में हैं। इनमें अमेरिका पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) जेक सुलिवन का भी नाम है। जेक का कहना है कि पाकिस्तान में अपने बेटों के व्यापारिक हितों को बचाने के लिए ट्रंप ने भारत के साथ रिश्तों की बलि चढ़ा दी है।

बाइडेन प्रशासन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे जेक सुलिवन ने कहा कि परिजनों के पाकिस्तान में व्यापारिक सौदे करने की इच्छा के चलते ट्रंप ने भारत के साथ संबंधों को दरकिनार किया है। यह अमेरिका के लिए एक बड़ा रणनीतिक झटका है। उन्होंने कहा कि इससे नई दिल्ली को वॉशिंगटन के करीब लाने की वर्षों की मेहनत पर पानी फिर गया है और भारत वापस चीन के बीजिंग के करीब चला जाएगा।

सुलिवन ने ट्रंप के बारे में क्या कहा? सुलिवन ने द बुलवार्क पॉडकास्ट पर टिम मिलर से कहा, ‘हम भारत के साथ एक गहरे और टिकाऊ संबंध बनाने की कोशिश कर रहे थे और इसमें चीन की चुनौती बड़ी थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत के खिलाफ एक बड़ा व्यापारिक अभियान चला दिया है। भारतीय कह रहे हैं कि उन्हें बीजिंग जाकर चीनियों के साथ बैठना चाहिए। भारतीय इसे ही अमेरिका के खिलाफ बचाव का रास्ता मान रहे हैं।’

सुलिवन ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की ट्रंप परिवार के साथ व्यापारिक सौदे करने की इच्छा है। इसी के चलते ट्रंप ने भारत के साथ साझेदारी को दरकिनार किया है। ट्रंप परिवार के पाकिस्तान के साथ बिटकॉइन कारोबार के सवाल पर सुलिवन ने ये कहा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में व्यापार के लिए भारतसे मुंह मोड़ा अपने आप में एक बहुत बड़ा रणनीतिक नुकसान है।

ट्रंप के पाकिस्तान से व्यावसायिक संबंध? डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका ही नहीं दुनिया के बड़े व्यवसायियों में गिने जाते हैं। उनके अंदर का कारोबारी राष्ट्रपति बनने के बाद भी जिंदा है। व्यावसायिक सोच ही ट्रंप को पाकिस्तान के करीब ले गई है। इस साल अप्रैल मेंपाकिस्तान ने ब्लॉकचेन तकनीक को बढ़ावा देने के लिए वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस कंपनी का 60 प्रतिशत स्वामित्व ट्रंप परिवार के पास है। यह समझौता पहलगाम हमले के कुछ दिन बाद हुआ।

वर्ल्ड लिबर्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस्लामाबाद पहुंचकर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ असीम मुनीर से मुलाकात की थी।वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल ने ट्रंप को ‘चीफ क्रिप्टो एडवोकेट’ बताया है। इस कंपनी में अमेरिकी राष्ट्रपति के बेटे एरिक और डोनाल्ड जूनियर ‘वेब3 एम्बेसडर’ हैं। बैरन ट्रंप डेफी विजनरी हैं। यानी ट्रंप का पूरा परिवार इस कंपनी से जुड़ा है। इसने ट्रंप के हितों के टकराव को लेकर संदेह पैदा किया है।

पाकिस्तान में तेल भंडार! डोनाल्ड ट्रंप के पाकिस्तान के साथ व्यावसायिक संबंधों का किस्सा इससे भी आगे है। जाने-माने अमेरिकी व्यवसायी जेंट्री थॉमस बीच इस्लामाबाद में व्यापारिक सौदों के लिए प्रयासरत रहे हैं। बीत के ट्रंप परिवार के साथ घनिष्ठ संबंध हैं। इस साल जनवरी में बीच ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सहित वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारियों और व्यापारिक नेताओं से मुलाकात की थी।

डोनाल्ड ट्रंप ने खुद हाल ही में घोषणा की है कि अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ उसके ‘विशाल तेल भंडार’ खोजने और विकसित करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। ट्रंप ने कहा, ‘हमने पाकिस्तान के साथ एक समझौता किया है। इसके तहत पाकिस्तान और अमेरिका अपने विशाल तेल भंडार को विकसित करने के लिए मिलकर काम करेंगे।

भारत से बढ़ाया टकराव डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान से नजदीकी तो भारत से तनाव काफी ज्यादा बढ़ा लिया है। सुलिवन के अलावा भी कई अमेरिकी अधिकारी इससे चिंतित हैं। बराक ओबामा के समय में विदेश मंत्री रहे जॉन केरी ने ट्रंप की नीतियों पर कहा है, ‘बिना कूटनीतिक प्रयास के हर समय अल्टीमेटम देकर आप महान नहीं बन सकते।’

अमेरिकी विदेश नीति विशेषज्ञ क्रिस्टोफर पैडिला ने हाल ही में ट्रंप के रवैये को लेकर चेतावनी दी है। पैडिला का कहना है कि ट्रंप के टैरिफ अमेरिका की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं। शीर्ष अमेरिकी अर्थशास्त्री जेफरी सैक्स ने भारत के खिलाफ टैरिफ लगाने को अमेरिकी विदेश नीति का मूर्खतापूर्ण कदम कहा है।

”चंद्रयान-3 के डेटा का विश्लेषण? ISRO ने मांगे प्रस्ताव”

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”चंद्रयान-3 के डेटा का विश्लेषण? ISRO ने मांगे प्रस्ताव”

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने चंद्रयान-3 लैंडर और रोवर के सभी प्रयोगों से मिले आंकड़ों के वैज्ञानिक विश्लेषण और उपयोग के लिए मौके का ऐलान किया है। बता दें कि चंद्रयान-3 मिशन ने 23 अगस्त, 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी उच्च अक्षांशों पर ऐतिहासिक सॉफ्ट लैंडिंग की थी, जिससे भारत चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्र पर उतरने वाला पहला देश बन गया।

इसरो ने कहा है कि चंद्रयान-3 मिशन के वैज्ञानिक परिणामों को बढ़ाने के लिए, इसरो इस एओ के माध्यम से राष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय (ISRO/अंतरिक्ष विभाग के बाहर) से चंद्रयान-3 लैंडर और रोवर के सभी उपयोगों से हासिल आंकड़ों के वैज्ञानिक विश्लेषण और उपयोग के लिए प्रस्ताव मांग रहा है।

इन लोगों के पास है मौका बताया जा रहा है कि यह मौका भारत के मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और सरकारी संगठनों के सभी संकायों और शोधकर्ताओं के लिए खुला है। ISRO ने कहा कि प्रस्ताव विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, राष्ट्रीय संस्थानों, इसरो/अंतरिक्ष विभाग के बाहर के वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के किसी व्यक्ति या समूह द्वारा प्रस्तुत किए जा सकते हैं।

कौन कर सकेगा नेतृत्व हालांकि, इस स्कीम के तहत वे प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर (PI) ही प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर सकेंगे, जिनकी रिटायरमेंट से पहले कम से कम 4 साल की सेवा बची हो। प्रस्ताव में कई सह-PI हो सकते हैं, हालांकि, प्रस्ताव से संबंधित सभी संचारों का केंद्रबिंदु प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर ही होगा।

3 साल के अंदर पूरा होगा प्रोजेक्ट बताया जा रहा है कि सभी प्रपोजल का मूल्यांकन एक समीक्षा समिति करेगी, जिसके बाद प्रस्ताव जमा करने की आखिरी तिथि 21 अक्टूबर तय की गई है। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि यह परियोजना 3 सालों के भीतर पूरी हो जाएगी। वैज्ञानिक परिणामों और समीक्षा समिति की सिफारिशों के आधार पर परियोजना को एक साल के लिए और बढ़ाया जा सकता है। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि ISRO की सभी परियोजनाओं की सलाना प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

“जीएसटी में बड़े सुधारों की तैयारी, कौन से आइटम होंगे सस्ते और किन पर देना होगा भारी टैक्स?”

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“जीएसटी में बड़े सुधारों की तैयारी, कौन से आइटम होंगे सस्ते और किन पर देना होगा भारी टैक्स?”

सरकारी जीएसटी में बड़े बदलाव की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले के प्राचीर से इसकी घोषणा की थी। जीएसटी काउंसिल की 3 और 4 सितंबर को बैठक होने जा रही है।

इसमें जीएसटी सुधारों पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। माना जा रहा है कि 12% और 28% वाले स्लैब्स को खत्म किया जा सकता है। 12% फीसदी वाले अधिकांश आइटम 5% स्लैब में आ सकते हैं। इसी तरह 28% वाले कुछ आइटम 18% में आ सकते हैं।

जानिए अभी किस चीज पर कितना है जीएसटी और बदलाव के बाद क्या हो सकती है स्थिति…

5% वाले आइटम “1” आइटम मौजूदा जीएसटी सुधार के बाद जीएसटी< शुगर 5% पैक्ड पनीर 5% चाय 5% कोयला 5% खाद्य तेल 5% किशमिश 5% घरेलू एलपीजी 5% रोस्टेड कॉफी बीन्स 5% पीडीएस केरोसीन 5%< स्किम्ड मिल्क पाउडर 5% काजू 5% फुटवियर (₹500 से सस्ते) 5% बेबी मिल्क फूड 5%< कपड़े (₹1000 से कम) 5% फैब्रिक 5% अगरबत्ती 5% मिठाई 5% जीवन रक्षक दवाएं 5%

12% वाले आइटम “1” आइटम मौजूदा जीएसटी सुधार के बाद जीएसटी बटर 12% घी 12% प्रोसेस्ड फूड 12% बादाम 12% मोबाइल्स 12% फ्रूट जूस 12% फ्रूट्स 12% नट्स 12% चटनी 12% जैम 12% जैली 12% पैक्ड कोकोनट वॉटर 12% छाता 12%

18% वाले आइटम आइटम मौजूदा जीएसटी सुधार के बाद जीएसटी हेयर ऑयल 18% कैपिटल गुड्स 18% टूथपेस्ट 18% इंडस्ट्रियल इंटरमीडिएटरीज 18% साबुन 18% आइसक्रीम 18% पास्ता 18% कॉर्न 18% फ्लेक्स 18% सूप 18% प्रिंटर्स 18% कंप्यूटर 18%

28% वाले आइटम आइटम मौजूदा जीएसटी सुधार के बाद जीएसटी छोटी कार (साथ में 1 या 3% सेस) 28% महंगी मोटरसाइकिल (साथ में 15% सेस) 28% एसी/फ्रिज 28% लग्जरी एंड सिन आइटम्स 28% सिगरेट और एरेटेड ड्रिंक्स (साथ में 15% सेस) 28%

“चुनाव से पहले बिहार को बड़ी सौगात देंगे PM मोदी, करोड़ों रुपए की परियोजनाओं का करेंगे शिलान्यास और शुभारंभ”

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“चुनाव से पहले बिहार को बड़ी सौगात देंगे PM मोदी, करोड़ों रुपए की परियोजनाओं का करेंगे शिलान्यास और शुभारंभ”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) से ठीक पहले बिहार को करोड़ों रुपये की परियोजनाओं की सौगात देने वाले हैं, जिसमें ‘जीविका निधि योजना’ का शुभारंभ भी शामिल है।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मंगलवार को प्रधानमंत्री रेलवे, सड़क और अन्य बुनियादी ढांचागत सुविधाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिए करोड़ों रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास और शुभारंभ भी करेंगे और मोदी वर्चुअल माध्यम से बिहार के लोगों को संबोधित भी करेंगे। श्री मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बिहार राज्य जीविका निधि साख सहकारी संघ लिमिटेड का शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर, प्रधानमंत्री संस्था के बैंक खाते में 105 करोड़ रुपये भी हस्तांतरित करेंगे। सूत्रों ने बताया, ‘जीविका निधि की स्थापना का उद्देश्य जीविका से जुड़े समुदाय के सदस्यों को किफायती ब्याज दरों पर आसानी से धनराशि उपलब्ध कराना है।

जीविका के सभी पंजीकृत क्लस्टर-स्तरीय संघ इस संस्था के सदस्य बनेंगे। इस संस्था के संचालन के लिए बिहार सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार भी धनराशि प्रदान करेगी।’ सूत्रों ने बताया, ‘जीविका के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं में उद्यमिता का विकास हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों में कई छोटे उद्यम और उत्पादक कंपनियां स्थापित हुई हैं, लेकिन महिला उद्यमियों को अक्सर 18 से 24 प्रतिशत की ऊंची ब्याज दर वाली माइक्रो फाइनेंस संस्थान (एमएफआई) पर निर्भर रहना पड़ता है। जीविका निधि की परिकल्पना एक वैकल्पिक वित्तीय प्रणाली के रूप में की गई है ताकि एमएफआई पर निर्भरता कम हो और कम ब्याज दरों पर बड़ी ऋण राशि की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।’

सूत्रों ने बताया, ‘यह प्रणाली पूरी तरह से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करेगी, जिससे जीविका दीदियों के बैंक खातों में सीधे तेज और पारदर्शी धनराशि का हस्तांतरण सुनिश्चित होगा। इसे सुगम बनाने के लिए, 12,000 सामुदायिक कार्यकर्ताओं को टैबलेट से लैस किया जा रहा है।’ सूत्रों ने बताया, ‘इस पहल से ग्रामीण महिलाओं में उद्यमिता विकास को मज़बूती मिलेगी और सामुदायिक उद्यमों के विकास में तेज़ी आएगी। बिहार राज्य से लगभग 20 लाख महिलाएँ इस कार्यक्रम की साक्षी बनेंगी।’

सोना महंगा क्यों हुआ? ये हैं 3 प्रमुख कारण… घरेलू और वैश्विक बाजार में सोने की चाल?

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सोना महंगा क्यों हुआ? ये हैं 3 प्रमुख कारण… घरेलू और वैश्विक बाजार में सोने की चाल?

भारत समेत पूरी दुनिया में इस वक्त सोने की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल देखा जा रहा है। घरेलू बाजार से लेकर इंटरनेशनल मार्केट तक, गोल्ड की चमक इस समय अपने चरम पर है। एमसीएक्स पर 24 कैरेट सोना 1,05,000 रुपये के पार चला गया है, वहीं ग्लोबल मार्केट में इसका भाव 3500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच चुका है- जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है।

घरेलू और वैश्विक बाजार में सोने की चाल: MCX (भारत): 3 अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना ₹1,05,937/10 ग्राम के हाई पर पहुंच गया। IBJA (इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन): ₹1,04,493/10 ग्राम तक दर्ज हुआ भाव। अंतरराष्ट्रीय बाजार: गोल्ड की कीमत $3,500/ounce, जो एक ऑल-टाइम हाई है।

सोना महंगा क्यों हुआ? ये हैं 3 प्रमुख कारण:

अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक आर्थिक तनाव: अमेरिका और अन्य देशों के बीच चल रहे टैरिफ युद्धों ने बाजार में अनिश्चितता फैला दी है। निवेशकों ने शेयर या करेंसी के बजाय गोल्ड को ‘सुरक्षित ठिकाना’ मानना शुरू कर दिया है।

फेडरल रिजर्व की ब्याज दर में कटौती की संभावना: ब्याज दरों में संभावित गिरावट से डॉलर कमजोर हुआ है, जिससे गोल्ड की मांग बढ़ी है।

भारतीय रुपया लगातार कमजोर: डॉलर के मुकाबले रुपया गिरने से भारत में इम्पोर्टेड गोल्ड महंगा हो गया है, जिसका सीधा असर रिटेल मार्केट पर पड़ा है।

क्या निवेश करना है सही समय?वित्तीय सलाहकारों की राय है कि चूंकि सोना अपने शिखर पर पहुंच चुका है, इसलिए इस वक्त भारी-भरकम खरीदारी से बचना चाहिए। बेहतर होगा कि निवेशक छोटे-छोटे हिस्सों में Gold ETFs, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स (SGB) जैसे विकल्प चुनें।

विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं? जतीन त्रिवेदी, वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी एंड करेंसी, एलकेपी सिक्योरिटीज) के अनुसार: टैरिफ तनाव और रुपये की गिरावट जैसे कारक फिलहाल सोने को और महंगा बनाए रख सकते हैं। निकट भविष्य में गोल्ड ₹1,00,000 से ₹1,05,000 के दायरे में बना रह सकता है।

“टैरिफ के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, पीएम मोदी ने कहा जल्द बनेगा तीसरी बड़ी इकोनॉमी”

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“टैरिफ के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, पीएम मोदी ने कहा जल्द बनेगा तीसरी बड़ी इकोनॉमी”

भारत ने साल 2025 की पहली तिमाही में 7.8% की आर्थिक बढ़त हासिल की है, जो दुनिया में चल रही आर्थिक मंदी और कई चुनौतियों के बावजूद बहुत बड़ी सफलता मानी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के दौरान इस बढ़त को देश की ताकत बताया और कहा कि जब कई बड़े देश आर्थिक मुश्किलों से जूझ रहे हैं, तब भारत ने अपने दम पर अच्छा प्रदर्शन किया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह सफलता तब और भी खास है जब भारत को दूसरे देशों के “आर्थिक स्वार्थ” से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। उनका मतलब उन फैसलों से था जो कुछ देशों ने सिर्फ अपने फायदे के लिए लिए हैं, जैसे कि अमेरिका ने भारत से आने वाले सामान पर भारी टैक्स (टैरिफ) लगा दिए हैं। इससे भारत के व्यापार पर असर पड़ा है, लेकिन फिर भी देश ने अच्छा प्रदर्शन किया है।अमेरिका का भारी टैरिफ और व्यापार तनाव हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आने वाले सामान पर 50% तक का भारी टैक्स (टैरिफ) लगा दिया है, जो भारत और ब्राजील पर सबसे ज्यादा है। इसके बाद 27 अगस्त से एक और 25% का टैक्स लगाया गया है, जो खास तौर पर भारत के रूस से तेल खरीदने पर निशाना साधता है। अमेरिका का कहना है कि रूस से तेल खरीदकर भारत यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद कर रहा है। इन फैसलों की वजह से भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर तनाव बढ़ गया है।

भारत की बड़ी योजनाएं क्या हैं? प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अगर भारत इसी रफ्तार से आगे बढ़ता रहा, तो जल्द ही यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। उन्होंने समझाया कि पहले के समय में दुनिया की ताकत तेल पर टिकी थी, लेकिन आज के दौर में असली ताकत एक छोटी सी चिप में है, जो तकनीक से जुड़ी होती है और दुनिया की तरक्की को तेज करती है। इसलिए भारत सेमीकॉन इंडिया जैसे कार्यक्रमों के ज़रिए तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ने पर ज़ोर दे रहा है।

भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के कारण भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के पीछे कई कारण हैं। देश में लोगों की खरीदारी बढ़ी है, जिससे कारोबार अच्छा चल रहा है। सरकार ने कई अच्छे कदम उठाए हैं, जिससे पैसे लगाना आसान हुआ है। डिजिटल इंडिया और नई तकनीक ने भी मदद की है। भारत ने अपने सामान को विदेशों में बेचने के लिए नए बाजार ढूंढ़े हैं और खेती और फैक्ट्री के कामों में भी सुधार किया है। इन सब वजहों से भारत ने मुश्किल हालात में भी अच्छा विकास किया है।

वैश्विक परिदृश्य में भारत की स्थिति कैसी है? दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं कोरोना महामारी, युद्ध और व्यापार विवादों के कारण कमजोर हुई हैं। अमेरिका-चीन के बीच बढ़ते तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध ने वैश्विक बाजार को प्रभावित किया है। ऐसे में भारत का स्थिर और तेज़ विकास देश की आर्थिक साख को मजबूत करता है।

हेल्थ सेक्टर पर बड़ा झटका – विदेशी दवाओं पर संभावित 200% तक के टैरिफ, केवल भारत जैसे देशों को आर्थिक संकट…

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हेल्थ सेक्टर पर बड़ा झटका – विदेशी दवाओं पर संभावित 200% तक के टैरिफ, केवल भारत जैसे देशों को आर्थिक संकट…

अमेरिका में हेल्थ सेक्टर को एक बड़े झटके का सामना करना पड़ सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से विदेशी दवाओं पर संभावित 200% तक के टैरिफ की योजना सामने आई है, जिससे न केवल भारत जैसे देशों को आर्थिक झटका लग सकता है।

अमेरिका में विदेशी टैक्स जितना ऊंचा, दवाएं उतनी महंगी-और इसका सबसे बड़ा असर पड़ेगा अमेरिकियों की जेब पर। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यह फैसला लागू हुआ, तो दवाइयों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी और सप्लाई में रुकावट देखने को मिल सकती है।

ट्रंप की नीति: टैक्स लगाओ, जनता परेशान हो पहले तो विदेश से आई दवाओं पर 200% तक का टैक्स लगाने की बात चल रही थी-यानि साधारण दवाई का दो से तीन गुना महंगा हो जाना निश्चित है। हाल ही में यूरोप के साथ एक ट्रेड समझौते के तहत, अमेरिका ने यूरोपीय दवाओं एवं सामानों पर 15% टैक्स लगाया है। ट्रंप ने कई फार्मा कंपनियों से कहकर ‘अमेरिका को सबसे सस्ती दवा दें’ की अपील भी की है। लेकिन क्रूर पेल- ये टैक्स -सीधे आम नागरिकों को भारी पड़ेगा।

तीन असर: कीमतों में झटका  – ING हेल्थ इकॉनॉमिक्स के अनुसार, केवल 25% टैक्स से भी दवाओं की क़ीमतें 10-14% तक बढ़ सकती हैं।

इंश्योरेंस महंगा –  दवाओं की क़ीमतें बढ़ने से स्वास्थ्य इंश्योरेंस की लागत भी बढ़ने लगती है। लॉजिस्टिक और सप्लाई संकट – विदेश से आने वाली दवाइयों में कटौती से वितरण ढांचा बाधित हो सकता है, जिससे “दवा की कमी” जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

ट्रंप का सच: क्या यह सस्ता करना था? उनका वादा था कि वह अमेरिका में दवाओं को सस्ता करेंगे। लेकिन इस भारी-भरकम टैक्स नीति से उल्टा ही नतीजा निकलेगा। आईबीएफसी ने सुझाव दिया है कि अगर यह टैक्स 2026 बाद लागू होता है, तो तक़रीबन 2027-28 में वास्तविक असर दिखने लगेगा, क्योंकि कंपनियां पहले से स्टॉक कर सकती हैं। वहीं अमेरिकी कंपनियों को लाभ की चाबी ही दी जा रही है-लेकिन क्या आम जनता की बीमारी और तंगी का कोई हल निकालेगा?

CG: ‘महानदी जल विवाद’ छत्तीसगढ़ और ओडिशा के अधिकारियों की नई दिल्ली में बैठक, दोनों राज्यों ने मिलकर समस्या का समाधान निकालने पर सहमति जताई…

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CG: ‘महानदी जल विवाद’ छत्तीसगढ़ और ओडिशा के अधिकारियों की नई दिल्ली में बैठक, दोनों राज्यों ने मिलकर समस्या का समाधान निकालने पर सहमति जताई…

महानदी जल विवाद सुलझाने के लिए छत्तीसगढ़ और ओडिशा के अधिकारियों की नई दिल्ली में बैठक हुई. दोनों राज्यों ने मिलकर समस्या का समाधान निकालने पर सहमति जताई.

भारत की एक प्रमुख नदी, महानदी, जो छत्तीसगढ़ से निकलकर ओडिशा होकर बंगाल की खाड़ी तक जाती है, लंबे समय से विवाद का कारण बनी हुई है. इस लंबे विवाद को बातचीत से हल करने के लिए 30 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में एक अहम बैठक हुई.

इसमें छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्य सचिवों और जल संसाधन विभाग के सचिवों ने हिस्सा लिया. बैठक में दोनों राज्यों ने माना कि यह समस्या बहुत पुरानी और कठिन है, लेकिन लोगों और दोनों राज्यों के भले के लिए इसका समाधान मिल-बैठकर निकालना ही होगा.

बैठक में यह भी तय हुआ कि सितंबर 2025 से दोनों राज्यों की तकनीकी समितियां, जिनमें इंजीनियर और विशेषज्ञ होंगे, हर हफ़्ते बैठक करेंगी. ये समितियां मुख्य मुद्दों को पहचानेंगी और उनका हल निकालने की कोशिश करेंगी. साथ ही, वे यह भी देखेंगी कि कैसे दोनों राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है.

दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री भी कर सकते हैं मुलाकात

अक्टूबर 2025 में दोनों राज्यों के मुख्य सचिव एक और बैठक करेंगे. इसमें जल संसाधन सचिव भी शामिल होंगे. अगर सब कुछ ठीक रहा, तो दिसंबर तक दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री भी मुलाकत कर सकते हैं और आगे की दिशा तय करेंगे. अंत में दोनों राज्यों ने यह वादा किया कि वे ईमानदारी और खुले मन से बातचीत करेंगे, ताकि महानदी जल विवाद का हल ऐसा निकले जो सबके लिए लाभकारी हो.

पूरे देश के लिए होगी मिसाल’

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह पहल सफल रही, तो यह न सिर्फ ओडिशा और छत्तीसगढ़ के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल होगी कि बड़े और पुराने विवाद भी आपसी बातचीत और सहयोग से सुलझाए जा सकते हैं.

CG: एनएचएम के हड़ताली कर्मचारियों के लिए डेडलाइन तय, सरकार ने विरोध प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों को बर्खास्तगी की चेतावनी जारी …

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CG: एनएचएम के हड़ताली कर्मचारियों के लिए डेडलाइन तय, सरकार ने विरोध प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों को बर्खास्तगी की चेतावनी जारी …

NHM Employees Dismissal Order: छत्तीसगढ़ में एनएचएम कर्मचारियों का लगातार विरोध प्रदर्शन चल रहा है। बिलासपुर में एनएचएम कर्मियों की हड़ताल 14वें दिन भी जारी रही। कर्मियों ने एक अनोखे तरीके से अपना विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने उपमुख्यमंत्री अरुण साव, स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल और वित्त मंत्री ओपी चौधरी का मुखौटा पहनकर ‘क्या हुआ तेरा वादा’ गाना बजाया।

इस बीच सरकार ने एनएचएम के हड़ताली कर्मचारियों के लिए डेडलाइन तय कर दी है। सरकार ने विरोध प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों को बर्खास्तगी की चेतावनी जारी करते हुए आज शाम तक काम पर लौटने को कहा है। इससे पहले कल एनएचएम संघ के अध्यक्ष दिलीप मिरी को ज्वाइंट हेल्थ डाइरेक्टर की तरफ से नोटिस जारी किया गया था।

‘काम पर लौटे अन्यथा…”

NHM Employees Dismissal Order: इस बीच नेशनल हेल्थ मिशन के संयुक्त संचालक की तरफ से एनएचएम के इस पूरे आंदोलन की अगुवाई कर रहे संघ के अध्यक्ष दिलीप मिरि को अल्टीमेटम भेजा गया है। इस नोटिस में उन्हें 24 घंटे के भीतर कार्यस्थल पर लौटें के निर्देश दिए गए है।

नोटिस में उल्लेख है कि, “मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से प्राप्त जानकारी अनुसार छत्तीसगढ़ प्रदेश एन. एच. एम. कर्मचारी संघ के अहह्वान पर आप दिनांक 18 अगस्त 2025 से अपनी 10 सूत्रीय मांगो को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। संघ के मांगों के संदर्भ में दिनांक 13.08.2025 को राज्य स्वास्थ्य समिति की कार्यकारिणी समिति की बैठक के माध्यम से सक्षम स्तर पर निर्णय लिया जा चुका है तथा उक्त निर्णय के तारतम्य में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यालय छत्तीसगढ़ द्वारा आवश्यक निर्देश भी प्रभारित किये जा चुके है।”

नोटिस में आगे लिखा गया है कि, “जिला स्तर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के द्वारा आपको हड़ताल से अपने कर्तव्य पर उपस्थित होने हेतु नोटिस जारी किये गये हैं जिसमें समयावधि में उपस्थित नहीं होने की दशा में नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी जिसके अंतर्गत सेवा से पृथक किया जा सकता है, जिसके जिम्मेदार आप स्वयं होंगे। किन्तु आपके द्वारा आज दिनांक तक उपस्थिति नहीं दी गई है, जो कि लोकहित के विरूद्ध एवं पूर्णतः अनुचित है।”

संयुक्त संचालक की तरफ से आखिर में यह कहा गया है कि, “अतः आपको निर्देशित किया जाता है कि इस अंतिम पत्र जारी होने के 24 घंटे के भीतर अपने कार्यस्थल पर उपस्थित होना सुनिश्चित करें अन्यथा आपके विरूद्ध संविदा शर्तो अनुरूप सेवा समाप्ति की कार्यवाही की जावेगी।”

जंतर-मंतर पर होगा प्रदर्शन” दूसरी तरफ सरकार के इस चेतावनी से एनएचएम संघ भड़क गया है। बर्खास्तगी का अल्टीमेटम दिए जाने के बाद हड़ताली एनएचएम कर्मियों ने सरकार के आदेश की प्रतियां जलने की बात कही है ,.उन्होंने कहा है कि, वे इस धमकी से डरने वाले नहीं। वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। संघ ने कहा है कि, राज्य में बात नहीं सुनी गई तो जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया जाएगा।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल का मिला साथ” बात करें राजधानी रायपुर में जारी एनएचएम कर्मियों के आंदोलन की तो यहाँ हड़ताली कर्मचारियों ने रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल से भेंट कर खुद के साथ न्याय की मांग की है। उन्होंने सांसद को अपनी सभी मांगो से भी अवगत कराया है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि, एनएचएम कर्मचारियों की जायज़ मांगों का हर स्तर पर समर्थन होगा। उन्होंने इस मामले पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और प्रदेश के मुखिया विष्णुदेव साय से चर्चा की बात कही है। सोमवार को हड़ताली कर्मचारियों ने रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल से भेंट कर खुद के साथ न्याय की मांग की है। उन्होंने सांसद को अपनी सभी मांगो से भी अवगत कराया है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि, एनएचएम कर्मचारियों की जायज़ मांगों का हर स्तर पर समर्थन होगा। उन्होंने इस मामले पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और प्रदेश के मुखिया विष्णुदेव साय से चर्चा की बात कही है।

पूर्व स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा खुलासा, बताई अपनी हार की वजह” इससे अलग प्रदेश के पूर्व डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव महासमुंद में जारी एनएचएम कर्मियों के हड़ताल में शामिल हुए। उन्होंने सरकार से कर्मचारियों की मांग पूरी करने की मांग की। इस दौरान उन्होंने बड़ा खुलासा भी किया। टीएस सिंहदेव ने बताया कि, उनकी सरकार ने एनएचएम कर्मियों से किया वादा पूरा नहीं किया था, यही वजह है कि, उन्हें चुनाव में हार मिली और सरकार भी चली गई। सिंहदेव ने कहा कि, जो सरकारें जनता काम नहीं करती, वो हारती है। हम लोग भी हारे, क्योंकि हम मांग पूरी नहीं कर पाए।

”छत्तीसगढ़ में CBSE के छात्रों के लिए खुशखबरी! विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ, दूसरे राज्यों का नहीं लगाना पड़ेगा चक्कर”

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”छत्तीसगढ़ में CBSE के छात्रों के लिए खुशखबरी! विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ, दूसरे राज्यों का नहीं लगाना पड़ेगा चक्कर”

छत्तीसगढ़ के सीबीएसई के छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। अब छात्रों को अपना काम कराने के लिए दूसरे राज्य का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। राजधानी में ही काम हो जाएगा।
रायपुर में CBSE के क्षेत्रीय कार्यालय की शुरुआत हो गई है। अब छात्रों को अंकसूची में सुधार के लिए ओडिशा नहीं जाना पड़ेगा। स्कूलों को भी मान्यता के लिए दूसरे राज्य नहीं जाना पड़ेगा। यह नया कार्यालय रिंग रोड स्थित उद्योग भवन टॉवर में 22 अगस्त से शुरू हो जाएगा। छत्तीसगढ़ के सभी CBSE स्कूल अब रायपुर के क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत आएंगे।
”बीजेपी नेता बृजमोहन अग्रवाल ने ट्वीट कर यह जानकारी दी है। उन्होंने लिखा है कि छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि! एक बार फिर जनता की सेवा के लिए किए गए प्रयासों का सुखद परिणाम सामने आया है।”
विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ” अग्रवाल ने लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के सहयोग से आज छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों की बड़ी मांग पूरी हुई है। रायपुर में CBSE का क्षेत्रीय कार्यालय प्रारंभ हो गया है। अब CBSE से संबंधित कार्यों के लिए छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों और स्कूल संचालकों को भुवनेश्वर की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। मंत्री ने आगे लिखा कि यह कदम राज्य के लाखों विद्यार्थियों और सैकड़ों स्कूलों को त्वरित सुविधा और राहत प्रदान करेगा तथा छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा और गति देगा। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हृदय से धन्यवाद दिया है।
दूसरे राज्यों का नहीं लगाना पड़ेगा चक्कर” निजी स्कूल संघ के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया कि छत्तीसगढ़ में 600 से ज्यादा CBSE स्कूल हैं। इनमें 6 लाख से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं। अब इन सभी को राहत मिलेगी। CBSE के नए कार्यालय खुलने से छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों को बहुत फायदा होगा। उन्हें अपने काम करवाने के लिए दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। इससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी। साथ ही, काम भी जल्दी हो जाएगा।