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“शेयर बाजार में गिरावट का दौर जारी? इस हफ्ते के ये 9 फैक्टर्स बदल सकते हैं किस्मत”

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ईरान-इजराइल वॉर, गिरता रुपया, लगातार FII का बाहर जाना और फ्यूल सप्लाई की चिंताओं के चलते घरेलू बाजारों पर इस महीने में काफी दबाव देखने को मिला. खास बात तो ये है कि इस प्रेशर की वजह से पिछल हफ्ते शेयर बाजार में 5.3 फीसदी की गिरावट देखने को मिली.

जब सोमवार को ट्रेडिंग फिर से शुरू होगी, तो इस हफ्ते होने वाले कई अहम इवेंट्स का निवेशकों के मूड पर असर पड़ने की संभावना है. वैसे शुक्रवार को 50 शेयरों वाला निफ्टी 488.05 अंक, या 2.06 फीसदी गिरकर 23,151.10 पर बंद हुआ था.

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे ईटी की रिपोर्ट में कहा कि जैसे-जैसे बिकवाली बढ़ी, इंडेक्स 200-DMA से और दूर चला गया. उन्होंने आगे कहा कि RSI ओवरसोल्ड ज़ोन में चला गया है और ट्रेंड कमजोर बना हुआ है. RSI के गहरे ओवरसोल्ड दायरे में बने रहने के कारण उन्हें और गिरावट की उम्मीद है.

डे ने कहा कि कम समय के लिए, ट्रेंड कमजोर बना रह सकता है, और किसी भी बढ़त पर बिकवाली होने की संभावना है. नीचे की तरफ, इंडेक्स 23,000-22,800 की ओर गिर सकता है, जबकि रेजिस्टेंस 23,400 पर है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर वो कौन से 9 बड़े फैक्टर्स हैं, जो शेयर बाजार की दशा और दिशा तय करने वाले हैं?

ईरान-इजराइल वॉर

जब सोमवार को ग्लोबल बाजारों में ट्रेडिंग शुरू होगी, तब तक ईरान-इजराइल वॉर अपने 17वें दिन में प्रवेश कर चुका होगा. जब तक यह संघर्ष जारी रहेगा, बाजारों में घबराहट बने रहने की उम्मीद है. युद्धरत पक्षों के बीच किसी भी तरह की सुलह के संकेत दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे हैं. AFP ने बताया कि ईरान ने कसम खाई है कि वह अमेरिका और इजराइल में अपने दुश्मनों को बड़ा सबक सिखाएगा, जिसे वह कभी नहीं भूल पाएंगे.

AFP ने ईरानी राजनयिक इस्माइल बाकाई के हवाले से कहा कि हम यह स्वीकार नहीं कर सकते कि वे कभी-कभार बातचीत और सीजफायर की बात करें, और उसके बाद हमें उन्हीं अपराधों और युद्ध की पुनरावृत्ति का सामना करना पड़े. हमारी सेना दुश्मन को कड़ा और कभी न भूलने वाला सबक सिखाने के लिए पूरी तरह से दृढ़ है.

फेड मीटिंग

इस हफ्ते US फेडरल रिजर्व की पॉलिसी मीटिंग पर सबकी नजर रहेगी, क्योंकि इस बात की चिंता है कि अगर मौजूदा संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इससे महंगाई के समीकरण बिगड़ सकते हैं. रेट तय करने वाली कमेटी मंगलवार, 17 मार्च को अपनी दो-दिवसीय बैठक शुरू करेगी और बुधवार, 18 मार्च को अपने पॉलिसी फैसले की घोषणा करेगी.

केंद्रीय बैंक से व्यापक रूप से यह उम्मीद की जा रही है कि वह दरों को स्थिर रखेगा, क्योंकि US में महंगाई फेड के 2 फीसदी के टारगेट से ऊपर बनी हुई है. ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स के ताजा डेटा के मुताबिक, फरवरी में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स साल-दर-साल आधार पर 2.4 फीसदी बढ़ा.

अमेरिकी बाजार

घरेलू बाजार भी वॉल स्ट्रीट से संकेत लेंगे. शुक्रवार को US के प्रमुख इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए. डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 119.38 अंक, या 0.26 फीसदी गिरकर 46,558.50 पर बंद हुआ. नैस्डैक कंपोजिट 206.62 अंक, या 0.93 फीसदी गिरकर 22,105.40 पर आ गया, जबकि S&P 500 0.61 फीसदी या लगभग 40 अंक गिरकर 6,632.19 पर बंद हुआ.

कच्चे तेल के दाम

सभी की नजरें कच्चे तेल की कीमतों पर होंगी. बेंचमार्क ब्रेंट और US WTI क्रूड पिछले सत्र में 3 फीसदी से ज़्यादा उछले थे, और जब ट्रेडिंग फिर से शुरू होगी तो इनमें और बढ़त देखने को मिल सकती है. US WTI क्रूड वायदा 99.31 डॉलर प्रति बैरल पर सेटल हुआ, जिसमें 3.58 या 3.74 फीसदी की बढ़त देखने को मिली. जबकि ब्रेंट क्रूड 3.43 फीसदी या 3.41 डॉलर चढ़कर 103.14 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ.

FII/DII की मुनाफावसूली

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने शुक्रवार को 10,716.64 करोड़ रुपए के भारतीय शेयर बेचे. वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) 9,977.42 करोड़ रुपए के शुद्ध खरीदार रहे. FIIs ने मार्च के पहले पखवाड़े में 52,704 करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं, जिसमें शुक्रवार को 2026 का अब तक का सबसे बड़ा एक-दिवसीय आउटफ्लो दर्ज किया गया. साल-दर-तारीख आधार पर, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने 66,051 करोड़ रुपए के भारतीय शेयर बेचे हैं.

सेक्टर पर नजर

ईरान-इजराइल/US संघर्ष कई सेक्टरों पर असर डाल रहा है. अगर कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो तेल विपणन कंपनियां (OMCs) दबाव में आ सकती हैं, क्योंकि इनपुट कॉस्ट बढ़ने से उनके मार्जिन पर असर पड़ सकता है. दूसरी ओर, ONGC और Oil India जैसी Upstream Exploration Companies तेल की बढ़ती कीमतों से फायदा उठा सकती हैं.

पेंट और टायर कंपनियां, जो कच्चे तेल से बने प्रोडक्ट्स को कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल करती हैं, उन्हें भी दबाव का सामना करना पड़ सकता है. जब बाजार दोबारा खुलेंगे, तो एयरलाइन और टूरिज्म कंपनियों के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है. LPG की कमी पहले से ही रेस्टोरेंट पर असर डाल रही है, ऐसे में क्विक-सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) के शेयरों में और गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

टेक्नीकल इंडीकेटर्स

निफ्टी चार्ट का विश्लेषण करते हुए, मास्टर कैपिटल सर्विसेज के चीफ रिसर्च ऑफिसर, डॉ. रवि सिंह ने कहा कि इंडेक्स ने अपने अहम 23,800 के सपोर्ट लेवल को निर्णायक रूप से तोड़ दिया है और अब यह पिछले 10 महीनों के सबसे निचले स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो बाजार पर बिकवाली के मजबूत दबाव का संकेत है.

आने वाले हफ्ते के लिए, 23,000 का मनोवैज्ञानिक स्तर बेहद अहम होगा. उन्होंने कहा कि अगर इंडेक्स इस स्तर से नीचे गिरता है, तो यह 22,800 और यहां तक कि 22,500 के स्तर तक भी पहुंच सकता है. उन्होंने आगे कहा कि ऊपरी स्तर पर, 23,800 और 24,050 अब मजबूत रुकावट (resistance) के तौर पर काम करेंगे.

जब तक इंडेक्स निर्णायक रूप से 24,000 के स्तर को दोबारा हासिल नहीं कर लेता, तब तक हमारी रणनीति तेजी आने पर बेचने (sell on rise) की ही रहेगी. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच बाजार अभी भी अपने निचले स्तर (bottom) की तलाश में है, इसलिए बाज़ार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की उम्मीद है.

रुपया बनाम डॉलर

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपए की चाल पर भी बारीकी से नजर रखी जाएगी. शुक्रवार को भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिर गया. इसकी वजह यह चिंता थी कि ईरान वॉर के कारण तेल की कीमतों में आई तेजी भारत की ग्रोथ-महंगाई की गतिशीलता को बिगाड़ सकती है और पूंजी प्रवाह को नुकसान पहुंचा सकती है.

रुपया कमजोर होकर 92.4750 प्रति डॉलर पर आ गया, जो गुरुवार को बने अपने पिछले रिकॉर्ड निचले स्तर 92.3575 से भी नीचे था. आखिरकार यह 92.4550 पर बंद हुआ, जो इस हफ्ते 0.7 फीसदी की गिरावट दिखाता है. 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले शुरू करने के बाद से बेंचमार्क निफ्टी 50 ‘करेक्शन ज़ोन’ में फिसल गया है; शुक्रवार को इंडेक्स में लगभग 2 फीसदी की गिरावट आई.

विश्लेषकों ने रॉयटर्स को बताया कि मध्य पूर्व में लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष रुपए के भविष्य को काफी हद तक खराब कर सकता है, और लगातार ऊंची बनी हुई ऊर्जा कीमतें रुपए को 95 प्रति डॉलर के स्तर से भी नीचे धकेल सकती हैं.

IPO पर नजर

प्राइमरी मार्केट में गतिविधियां मजबूत रहने की उम्मीद है; इस हफ्ते तीन IPO सब्सक्रिप्शन के लिए खुल रहे हैं और तीन कंपनियों की लिस्टिंग होनी है. GSP Crop Science और Central Mine Planning and Design Institute (CMPDI) के मेनबोर्ड IPO पर खास नजर रहेगी.

एग्रोकेमिकल निर्माता GSP Crop Science अपने पब्लिक ऑफरिंग के जरिए 400 करोड़ रुपए जुटाने की योजना बना रही है.

यह IPO 16 मार्च को खुलेगा. 18 मार्च को बंद होगा. इसका प्राइस बैंड 304320 रुपए प्रति शेयर तय किया गया है. Coal India की कंसल्टेंसी शाखा CMPDI का IPO 20 मार्च को खुलेगा और 24 मार्च को बंद होगा. इसका ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) फिलहाल लगभग 24 रुपए है.

इस बीच, Novus Loyalty का SME IPO 17 मार्च को खुलेगा और 20 मार्च को बंद होगा. इसका प्राइस बैंड 139146 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है, और कंपनी का लक्ष्य लगभग 60.15 करोड़ रुपए जुटाना है. Rajputana Stainless, Apsis Aerocom और Raajmarg Infra Investment Trust के शेयर भी इस हफ्ते स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट होने वाले हैं.

ममता बनर्जी ने पुजारियों और मुअज़्ज़िनों के मानदेय में 500 रुपये की वृद्धि की घोषणा की…

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने पुजारियों और मुअज़्ज़िनों के मासिक मानदेय में 500 रुपये की वृद्धि करने का ऐलान किया है।

यह निर्णय चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस से कुछ समय पहले आया है, जो राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह घोषणा आदर्श आचार संहिता के लागू होने से पहले की गई है, जो चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ प्रभावी हो जाती है।

चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग, जिसमें अन्य चुनाव आयुक्त भी शामिल हैं, आज शाम 4 बजे नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करेगा। इस दौरान तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, असम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा की जाएगी।

ममता बनर्जी का बयान

ममता बनर्जी ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि राज्य सरकार ने पुजारियों और मुअज़्ज़िनों के मासिक मानदेय में 500 रुपये की वृद्धि का निर्णय लिया है।

उन्होंने कहा, “मुझे अपने पुरोहितों और मुअज़्ज़िनों को दिए जाने वाले मासिक मानदेय में 500 रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है, जिनकी सेवा हमारे समुदायों के आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन को बनाए रखती है।”

मानदेय में वृद्धि का प्रभाव

इस संशोधन के बाद, दोनों समूहों के लिए मासिक भुगतान 2,000 रुपये हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि मानदेय के लिए सभी नए आवेदनों को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है।

उन्होंने कहा, “साथ ही, पुरोहितों और मुअज़्ज़िनों द्वारा विधिवत जमा किए गए सभी नए आवेदनों को भी राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है।”

सरकार की प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यह कदम समाज में धार्मिक पदाधिकारियों की भूमिका को मान्यता देने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने लिखा, “हमें ऐसे माहौल को बढ़ावा देने पर गर्व है जहाँ हर समुदाय और हर परंपरा को महत्व दिया जाता है और उसे मजबूती प्रदान की जाती है,” और यह भी जोड़ा कि सरकार का प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि राज्य की आध्यात्मिक परंपराओं की रक्षा करने वालों को उचित मान्यता और समर्थन मिले।

आचार संहिता का प्रभाव

यह घोषणा चुनाव आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा किए जाने की उम्मीद से कुछ समय पहले की गई थी; इसके बाद आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी, जो सरकारों को मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से नई नीतियों या वित्तीय प्रतिबद्धताओं की घोषणा करने से रोक देगी।

इसलिए, मानदेय में बढ़ोतरी और नए आवेदनों की मंजूरी चुनाव आचार संहिता के लागू होने से ठीक पहले की गई है।

“गुवाहाटी में युवा शक्ति समारोह में अमित शाह का संबोधन”

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रविवार को खानापारा के पशु चिकित्सा महाविद्यालय के मैदान में भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) द्वारा आयोजित युवा शक्ति समारोह में युवा समर्थकों की भारी भीड़ जुटी।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल सहित कई प्रमुख नेता शामिल हुए। यह आयोजन असम में विधानसभा चुनावों की तैयारी के तहत किया गया, जहां चुनाव आयोग द्वारा मतदान कार्यक्रम की घोषणा की उम्मीद थी।

अमित शाह का विश्वास

शाह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा सरमा के नेतृत्व में असम में सत्ता में लौटेगी और इसे पार्टी के ‘सबसे बड़े जनादेश’ के रूप में वर्णित किया।

उन्होंने मतदाताओं से भाजपा का समर्थन करने की अपील की और अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर पार्टी के रुख को दोहराया।

शाह ने कहा, “कांग्रेस ने घुसपैठ को वैध किया, लेकिन भाजपा हर एक को मतदाता सूची से हटाएगी। राहुल बाबू को आश्वस्त रहना चाहिए कि न केवल उनके नाम हटाए जाएंगे, बल्कि उन्हें बाहर भी निकाला जाएगा।”

कांग्रेस पर आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासन में असम में हिंसा की छवि बनी और कई युवाओं की जान गई। शाह ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व अपने परिवारों के हितों के लिए अधिक चिंतित था।

विकास की दिशा में कदम

सरमा ने हाल के विकासों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कई शांति समझौतों ने 10,000 से अधिक युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने में मदद की है।

उन्होंने कई प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का भी जिक्र किया, जैसे धोला-सदिया पुल, बोगीबील पुल, और अन्य।

भविष्य की योजनाएँ

सरमा ने कहा कि असम 25 मेडिकल कॉलेजों की ओर बढ़ रहा है और नए विश्वविद्यालयों के माध्यम से छात्रों के लिए अवसर बढ़ रहे हैं।

उन्होंने युवा उद्यमियों को वित्तीय सहायता देने की बात भी की। “हमने एक लाख युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 2 लाख रुपये की सहायता दी है,” उन्होंने कहा।

चुनावों की तैयारी

आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में, सरमा ने कहा कि यदि भाजपा तीसरी बार सत्ता में आती है, तो वे रोजगार और वित्तीय सहायता कार्यक्रमों का विस्तार करेंगे।

हम दो लाख और सरकारी नौकरियों का निर्माण करने का वादा करते हैं,” उन्होंने कहा।

अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई

सरमा ने सरकार द्वारा अतिक्रमण के खिलाफ की गई कार्रवाई का भी उल्लेख किया। “हमने पहले ही 1.5 लाख बिघा भूमि को अतिक्रमण से मुक्त किया है,” उन्होंने कहा।

खतरे में 350 करोड़ Chrome यूजर्स, Google ने जारी किया इमरजेंसी अपडेट, तुरंत करें ये काम…

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दुनिया के सबसे लोकप्रिय वेब ब्राउजर में से एक Google Chrome को लेकर एक गंभीर सुरक्षा चेतावनी सामने आई है. गूगल ने पुष्टि की है कि Chrome में दो खतरनाक Zero-Day कमजोरियां पाई गई हैं जिनका हैकर्स पहले से फायदा उठा रहे हैं.

ये सुरक्षा खामी इतनी गंभीर मानी जा रही है कि कंपनी को इमरजेंसी सिक्योरिटी अपडेट जारी करना पड़ा. अनुमान है कि करीब 3.5 अरब क्रोम यूजर्स इस खतरे से प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए सभी यूजर्स को तुरंत ब्राउजर अपडेट करने की सलाह दी गई है.

Chrome में मिली Zero-Day खामियां

फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार, गूगल ने बताया कि क्रोम में CVE-2026-3909 और CVE-2026-3910 नाम की दो गंभीर सुरक्षा खामियां मिली हैं. इन दोनों को Zero-Day Vulnerability कहा जाता है, जिसका मतलब है कि हैकर्स इन कमजोरियों का इस्तेमाल तब भी कर सकते हैं जब कंपनी को इनके बारे में पूरी जानकारी न हो. इन खामियों को हाई सीवेरिटी कैटेगरी में रखा गया है क्योंकि ये ब्राउजर के मुख्य सिस्टम कंपोनेंट्स को प्रभावित करती हैं. खास बात यह है कि इनका इस्तेमाल करके हमलावर किसी यूजर के सिस्टम में कोड चला सकते हैं या डेटा तक पहुंच बना सकते हैं.

हैकर्स कैसे कर सकते हैं हमला?

रिपोर्ट के मुताबिक CVE-2026-3909 Chrome के ग्राफिक्स लाइब्रेरी सिस्टम Skia से जुड़ी कमजोरी है. इस खामी का फायदा उठाकर हमलावर किसी यूजर को एक खतरनाक वेबसाइट पर भेज सकते हैं और वहां से सिस्टम में मेलिसियस (Malicious) कोड चला सकते हैं. वहीं CVE-2026-3910 Chrome के JavaScript इंजन V8 में पाई गई कमजोरी है. यह खामी किसी खास HTML पेज के जरिए हमलावर को ब्राउजर के अंदर कोड चलाने की अनुमति दे सकती है. इसका मतलब है कि सिर्फ एक संदिग्ध वेबसाइट खोलना भी जोखिम भरा हो सकता है.

Google देता है करोड़ों का इनाम

गूगल ने सुरक्षा खामियों को खोजने के लिए एक Vulnerability Reward Program भी चला रखा है. इस प्रोग्राम के तहत सिक्योरिटी रिसर्चर्स को कमजोरियां खोजने पर इनाम दिया जाता है. कंपनी के अनुसार पिछले 15 वर्षों में इस प्रोग्राम के तहत करीब 81.6 मिलियन डॉलर का भुगतान किया जा चुका है. केवल 2025 में ही 17 मिलियन डॉलर से ज्यादा का इनाम दिया गया. क्रोम की सुरक्षा मजबूत रखने में दुनिया भर के रिसर्चर्स की बड़ी भूमिका मानी जाती है.

क्रोम यूजर्स को अभी क्या करना चाहिए?

गूगल ने इस खतरे से बचने के लिए नया सिक्योरिटी अपडेट जारी करना शुरू कर दिया है. हालांकि यह अपडेट सभी यूजर्स तक पहुंचने में कुछ दिन या हफ्ते लग सकते हैं. इसलिए यूजर्स को खुद भी अपडेट चेक करना जरूरी है. इसके लिए Chrome के तीन डॉट मेन्यू में जाकर Help और फिर About Google Chrome विकल्प चुनना होगा. अगर नया अपडेट उपलब्ध होगा तो ब्राउजर उसे डाउनलोड करके इंस्टॉल कर देगा. अपडेट के बाद ब्राउजर को रीस्टार्ट करना जरूरी है ताकि नई सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सक्रिय हो सके.

‘BJP के नफरत वाले बीज पंजाब में कभी नहीं उगेंगे’- मुख्यमंत्री मान ने शाह के दौरे को बताया फ्लॉप शो…

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे के दौरान राज्य के मुख्य मुद्दों का कोई हल न करने के लिए कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि लोगों को एमएसपी, किसान कर्ज माफी और खास पैकेज की उम्मीद थी, लेकिन लोगों के हाथ सिर्फ निराशा ही लगी.

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पंजाब के साथ लगातार पक्षपात कर रही है, राज्य के हकदार फंड रोक रही है, किसानों की मांगों को नजरअंदाज कर रही है और राज्य के बाहर जब्त की गई नशे की बड़ी खेपों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही, बल्कि पंजाब को बदनाम कर रही है.

उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद पंजाब सरकार नशे पर काबू पाने, अर्थव्यवस्था मजबूत करने और निवेश आकर्षित करने के लिए उचित कदम उठा रही है. उन्होंने बताया कि प्रोग्रेसिव पंजाब निवेशक सम्मेलन को उद्योग जगत से बड़ा समर्थन मिल रहा है और निवेशक राज्य में नए कारोबारी अवसरों की तलाश कर रहे हैं.

पंजाबियों को भला-बुरा कहकर चले गए शाह- सीएम मान

प्रगतिशील पंजाब निवेशक सम्मेलन के अवसर पर मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब के किसानों और नागरिकों को उम्मीद थी कि उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए ठोस फैसले लिए जाएंगे. उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद थी कि अमित शाह पंजाब के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, कर्ज माफी या विशेष पैकेज के बारे में बात करेंगे, लेकिन वह सिर्फ पंजाबियों को भला-बुरा कहकर चले गए.” उन्होंने आगे कहा कि पंजाब के लोग फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी, कृषि ऋणों की माफी और किसानों के लिए अन्य उपायों जैसे बड़े एलानों की उम्मीद कर रहे थे.

मुख्यमंत्री ने केंद्र द्वारा पंजाब के वैध फंडों को रोके जाने की भी आलोचना की. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मोदी सरकार ने पंजाब के आरडीएफ और जीएसटी फंड रोक दिए हैं और अभी तक 1,600 करोड़ रुपये की बाढ़ राहत राशि भी जारी नहीं की है.” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 1,600 करोड़ रुपये बाढ़ राहत के बारे में किए गए बड़े-बड़े दावों के बावजूद, पंजाब को उनके एलान से 16 रुपये भी नहीं मिले. उन्होंने आगे कहा कि विनाशकारी बाढ़ के दौरान केंद्र के नेता पंजाब सिर्फ “पर्यटन” के लिए आए और तस्वीरें खिंचवाकर चले गए.

गैंगस्टरवाद एक राष्ट्रीय मुद्दा, विफल है केंद्र- सीएम मान

गैंगस्टरवाद का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर इस समस्या को हल करने में विफल रही है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब के गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को बीजेपी सरकार ने गुजरात जेल में शरण दे रखी है और उसे पंजाब लाने की इजाजत भी नहीं दी जा रही है.” उन्होंने गैंगस्टरवाद को एक राष्ट्रीय मुद्दा बताया, जो देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा है और इसे रोकने में विफल रहने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की.

नशों के मुद्दे पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से तस्करी को रोकना मुख्य रूप से केंद्र की जिम्मेदारी है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “सीमा पार से नशों की तस्करी रोकना केंद्र की जिम्मेदारी है, फिर भी हमारी सरकार इसे रोकने के लिए अपने फंडों से एंटी-ड्रोन सिस्टम स्थापित कर रही है.” उन्होंने आगे कहा कि पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार से कोई समर्थन न मिलने के बावजूद सीमा पार से तस्करी रोकने के लिए सीमा पर 550 किलोमीटर लंबी एंटी-ड्रोन तकनीक स्थापित की है.

गुजरात में नशे के कारोबारियों पर नहीं होती कार्रवाई- सीएम मान

उन्होंने पंजाब के बाहर नशीले पदार्थों की बड़ी जब्ती के खिलाफ कार्रवाई न होने पर भी सवाल उठाया. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “गुजरात में लाखों टन नशीले पदार्थ जब्त किए जा रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जाती, जबकि पंजाब ने नशों के खिलाफ देश का सबसे बड़ा अभियान शुरू किया है.” उन्होंने कहा कि पूरा देश जानता है कि गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर लगभग 3,000 किलो नशीला पदार्थ जब्त किया गया था, लेकिन दोषियों के खिलाफ कोई सार्थक कार्रवाई नहीं की गई है.

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब में फूट डालने वाली राजनीति कभी भी सफल नहीं होगी. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब की मिट्टी उपजाऊ है, लेकिन बीजेपी के धर्म और नफरत की राजनीति के बीज यहां कभी नहीं उगेंगे.”

राज्य में बीजेपी की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर व्यंग्य करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने टिप्पणी की, “पंजाब में बीजेपी ‘स्कूटर पार्टी’ तक सीमित है, जो 2027 में कांग्रेस की मदद से सत्ता पर काबिज होने का सपना देख रही है.” उन्होंने यह भी कहा कि अमित शाह का पंजाब दौरा लोगों के सामने आ रहे वास्तविक मुद्दों को हल करने में विफल रहा है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “अमित शाह सिर्फ हमारे बारे में बुरा-भला कहने के लिए पंजाब आए थे और बिना कुछ किए चले गए.”

चुनाव लड़ने के लिए बीजेपी के पास नेता नहीं- सीएम मान

आगामी विधानसभा चुनावों के संबंध में बीजेपी के दावों पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पार्टी के पास अकेले चुनाव लड़ने के लिए संगठनात्मक ताकत की कमी है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “बीजेपी पंजाब में अकेले चुनाव लड़ने के लिए 117 उम्मीदवार कहां से लाएगी?” उन्होंने आगे कहा कि चूंकि बीजेपी के पास राज्य में नेता नहीं हैं, इसलिए संभावना है कि वह चुनाव लड़ने के लिए दूसरी पार्टियों के नेताओं को शामिल करने की कोशिश करेगी.

नशों का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पूछा, “गुजरात के एक बंदरगाह पर 3,000 किलो नशीला पदार्थ जब्त किया गया था, वहां कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?” उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार इतनी बड़ी जब्ती के बावजूद नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में विफल रही है.

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पंजाब के लोग बीजेपी की राजनीतिक फितरत से अच्छी तरह वाकिफ हैं. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब, बीजेपी को अच्छी तरह जानता है; पंजाब में नफरत की राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है.” उन्होंने याद दिलाया कि कैसे कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के दौरान पंजाब के किसानों को अपमानित किया गया था और उस संघर्ष के दौरान 700 से अधिक किसान शहीद हुए थे.

बीजेपी का दो करोड़ नौकरियां देने का वादा अभी भी अधूरा- सीएम मान

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब सरकार की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला और कहा कि उसने पहले ही राज्य के युवाओं को 65,000 से अधिक सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं, जबकि बीजेपी का दो करोड़ नौकरियां देने का वादा अभी भी अधूरा है. उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि वादे के मुताबिक 15 लाख रुपये कभी भी आम नागरिकों के बैंक खातों में नहीं आए.

केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि केंद्र सरकार ने आरडीएफ, जीएसटी, एनएचएम और अन्य फंडों में पंजाब के वैध हिस्से को रोक लिया है, जिससे राज्य के विकास पर असर पड़ रहा है. उन्होंने इसे पंजाब की प्रगति, शांति और खुशहाली को पटरी से उतारने की कोशिश बताया.

उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब सरकार ने किसानों के हित के लिए स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की बार-बार सिफारिश की है, लेकिन केंद्र ने उस पर कार्रवाई नहीं की है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे चेतावनी दी कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका समझौता किसानों पर बुरा प्रभाव डाल सकता है.

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पंजाब भी उन्हीं स्रोतों से फंड उधार लेता है, जिनसे बीजेपी शासित राज्य लेते हैं और इस उत्पादक ऋण का उपयोग लोगों को सेवाएं और सुविधाएं देने के लिए किया जाता है. उन्होंने टिप्पणी की कि पंजाब सरकार की लोक-कल्याणकारी नीतियों को बीजेपी हजम नहीं कर पा रही है.

केंद्र के पास विदेश नीति का अभाव- सीएम मान

केंद्र सरकार के बारे में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश ऐसी स्थिति का सामना कर रहा है, जहां केंद्र सरकार के पास राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए स्पष्ट विदेश नीति का अभाव दिखता है.

इस बीच प्रोग्रेसिव पंजाब निवेशक सम्मेलन के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आयोजन को उद्योगपतियों और निवेशकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “प्रोग्रेसिव पंजाब निवेशक सम्मेलन को भारी समर्थन मिला है.” उन्होंने आगे कहा कि इस सम्मेलन ने सहयोग और निवेश के लिए एक मजबूत मंच तैयार किया है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “निवेशक एक दूसरे के साथ पंजाब में व्यापारिक अवसरों पर चर्चा कर रहे हैं.”

Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि में पहला और अष्टमी व्रत है बहुत महत्वपूर्ण, लेकिन रखें इन बातों का ध्यान…

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Chaitra Navratri 2026: हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो जाती है. इस साल चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू हो रही है. इसका समापन 27 मार्च को होगा.

मान्यता है कि चैत्र नवरात्रि के समय देवी दुर्गा धरती पर आती हैं औऱ अपने भक्तों के कष्ट हरती हैं. नवरात्रि के समय में भक्तों द्वारा देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों का पूजन किया जाता है. साथ ही व्रत किया जाता है.

नवरात्रि में बहुत से लोग पूरे नौ दिनों तक उपवास रखते हैं, तो वहीं कई श्रद्धालु ऐसे भी हैं जो सिर्फ पहला और अष्टमी का व्रत रखते हैं. शास्त्रों में इन दोनों व्रतों का विशेष महत्व हैं, क्योंकि पहला दिन संकल्प का माना जाता है और अष्टमी पूर्णता का प्रतीक होता है. अगर आप इस साल ये दो व्रत रखने वाले हैं, तो इनसे जुड़े सही नियमों को जानना आपके लिए आवश्यक है. नियमों के सही पालन से पूजा सफल होती है.

पहले व्रत का संकल्प और कलश स्थापना

नवरात्रि के पहले दिन का व्रत मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का संकल्प लेना माना जाता है. इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. फिर साफ वस्त्र धारण करें. इसके बाद पूजा स्थल पर कलश स्थापना करें. फिर व्रत की शुरुआत करें. पहला व्रत रखने वालों को पूरे दिन अपने विचारों में शुद्धता रखनी चाहिए. यह दिन अपनी बड़ी इच्छाएं मां के सामने रखने का होता है. पूजा के समय जो अखंड ज्योत जलाई जाती है वो घर में सकारात्मकता लेकर आती है.

अष्टमी व्रत और कन्या पूजन

अष्टमी को महाष्टमी कहा जाता है. ये नवरात्रि के महत्वपूर्ण दिनों में से एक है. पहले दिन का व्रत रखने वालों के अष्टमी का दिन संकल्प पूरा करने का समय होता है. इस दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है. माता पवित्रता और शांति की देवी मानी जाती है. अष्टमी व्रत के दौरान कन्या पूजन किया जाता है. कन्या पूजन का विशेष महत्व है. इसमें छोटी बच्चियों को मां का रूप मानकर भोग लगया जाता है. मान्यता है कि नवरात्रि में बिना कन्या पूजन के इसका पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है.

व्रत का खानपान

व्रत के दौरान सिर्फ फलाहार ही लें और अनाज या भारी भोजन से पूरी तरह दूर रहें.

साबूदाना, कुट्टू का आटा या फल खाएं.

इस समय बहुत ज्यादा नमक या मसालों का प्रयोग न करें.

देवी ने आपको भक्ति मार्ग पर चलने की शक्ति दी है, इसलिए उनका आभार व्यक्त करें.

Android में बड़ा बदलाव करने जा रहा Google! आपका स्मार्टफोन होगा पहले से तेज और चलेगा ज्यादा समय…

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स्मार्टफोन की स्पीड और बैटरी लाइफ को बेहतर बनाने के लिए

Google अब Android सिस्टम में एक अहम बदलाव करने की तैयारी कर रहा है. कंपनी ने Android के कोर सिस्टम यानी कर्नेल को ऑप्टिमाइज़ करने के लिए एक नई तकनीक पेश की है जिसे Automatic Feedback-Directed Optimisation (AutoFDO) कहा जाता है.

इस नई तकनीक का उद्देश्य Android फोन की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाना, ऐप्स को जल्दी खोलना और बैटरी की खपत को कम करना है.

Android Kernel में सुधार पर Google का फोकस

दरअसल Android का कर्नेल स्मार्टफोन के हार्डवेयर, प्रोसेसर और ऐप्स के बीच एक कड़ी की तरह काम करता है. यही सिस्टम यह तय करता है कि फोन का प्रोसेसर किस काम में कितना इस्तेमाल होगा. जानकारी के मुताबिक किसी भी Android फोन के कुल CPU समय का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा कर्नेल मैनेज करता है. ऐसे में अगर इसमें थोड़ा भी सुधार किया जाए तो फोन की कुल स्पीड और स्मूदनेस पर बड़ा असर पड़ सकता है. इसी वजह से Google अब इस हिस्से को ज्यादा स्मार्ट तरीके से ऑप्टिमाइज़ करने पर काम कर रहा है.

असली इस्तेमाल के डेटा से होगा ऑप्टिमाइजेशन

नई AutoFDO तकनीक की खासियत यह है कि यह केवल अनुमान के आधार पर काम नहीं करती. इसके लिए लैब में ऐसे टेस्ट किए जाते हैं जिनमें लोकप्रिय Android ऐप्स का इस्तेमाल बिल्कुल उसी तरह किया जाता है जैसे लोग रोजमर्रा में करते हैं. इन टेस्ट के दौरान खास टूल्स यह रिकॉर्ड करते हैं कि सिस्टम के कौन-कौन से हिस्से सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहे हैं. टेक्निकल भाषा में इन्हें हॉट कोड पाथ कहा जाता है. बाद में यही जानकारी कर्नेल को दोबारा तैयार करते समय इस्तेमाल की जाती है ताकि सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले हिस्सों को पहले ऑप्टिमाइज किया जा सके.

पुराने तरीके से कैसे अलग है नई तकनीक

पारंपरिक तरीके से कर्नेल तैयार करते समय डेवलपर्स आमतौर पर यह मानकर चलते हैं कि सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किस तरह होगा. लेकिन AutoFDO इस अनुमान को खत्म कर देता है और असली उपयोग के आंकड़ों के आधार पर कोड को व्यवस्थित करता है. इससे कंपाइलर बेहतर फैसले ले पाता है और सिस्टम के सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले हिस्से ज्यादा तेज और कुशल तरीके से काम करने लगते हैं.

शुरुआती टेस्ट में दिखा बेहतर प्रदर्शन

Google के शुरुआती परीक्षणों में इस तकनीक से सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं. कंपनी के मुताबिक स्मार्टफोन के बूट होने का समय करीब 2.1 प्रतिशत तक कम हुआ है. वहीं फोन में पहली बार ऐप खोलने की स्पीड यानी कोल्ड ऐप लॉन्च में लगभग 4.3 प्रतिशत तक सुधार देखा गया है. इसके अलावा सिस्टम की कुल परफॉर्मेंस से जुड़े कई अन्य पैमानों में भी बेहतर परिणाम मिले हैं.

आने वाले Android वर्ज़न में मिलेगा फायदा

Google इस नई तकनीक को Android के नए कर्नेल वर्ज़न में लागू कर रहा है, जिनमें android16-6.12 और android15-6.6 जैसी ब्रांच शामिल हैं. आगे चलकर इसे आने वाले वर्जन जैसे android17-6.18 में भी शामिल करने की योजना है. कर्नेल स्तर पर किए जा रहे इस बदलाव की वजह से आने वाले समय में Android स्मार्टफोन में ऐप्स पहले से ज्यादा तेजी से खुलेंगे, मल्टीटास्किंग स्मूद होगी और फोन की कुल परफॉर्मेंस ज्यादा रिस्पॉन्सिव महसूस होगी.

दुनिया भर में चमकी भारत की ‘ज्वैलरी’! फरवरी में रत्न और आभूषण निर्यात 3.86% बढ़ा, 2.68 अरब डॉलर तक पहुंचा कारोबार…

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जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के अनुसार, फरवरी में भारत के जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट में साल-दर-साल 3.86 फीसदी की वृद्धि हुई, जो बढ़कर 2,680.79 मिलियन USD (24,340.05 करोड़ रुपए) हो गया.

यह ग्रोथ इंडस्ट्रीज की ओर से दूसरे बाजारों में अपने विस्तार (Diversification) के कारण हुई. GJEPC के आंकड़ों के अनुसार, 2025 के इसी महीने में कुल एक्सपोर्ट 2,581.08 मिलियन डॉलर (22,460.13 करोड़ रुपए) रहा था. अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक, कुल जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट लगभग स्थिर रहा. यह पिछले वर्ष की इसी अवधि के 25,915.81 मिलियन डॉलर (2,18,737.62 करोड़ रुपए) की तुलना में 25,933.72 मिलियन डॉलर (2,28,230.06 करोड़ रुपए) रहा.

कैसे बढ़ा एक्सपोर्ट?

GJEPC के चेयरमैन किरित भंसाली ने कहा कि पिछला साल ग्लोबल जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट इंडस्ट्रीज के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है. इस पर अमेरिका की बदलती टैरिफ पॉलिसीज, जियो पॉलिटिकल अनिश्चितताओं और प्रमुख बाजारों में कंज्यूमर्स की बदलती पसंद का असर पड़ा है. इन मुश्किलों के बावजूद, भारतीय जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर ने जबरदस्त लचीलापन दिखाया है.

उन्होंने आगे कहा कि एक्सपोर्टर्स ने अपने एक्सपोर्ट मार्केट्स का सक्रिय रूप से विस्तार किया है. उन्होंने UAE और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में अपनी मौजूदगी मजबूत की है, जहां फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (Free Trade Agreements) ने अहम भूमिका निभाई है. वहीं, हांगकांग जैसे बाजारों से भी लगातार मज़बूत समर्थन मिलता रहा है.

भंसाली ने बताया कि अमेरिका के टैरिफ फ्रेमवर्क में हाल के बदलावों से जड़े हुए आभूषणों (Studded Jewellery) के सेगमेंट को कुछ राहत मिली है. हालांकि, उद्योग अभी भी प्राकृतिक हीरों और कुछ खास तरह के खुले पत्थरों (Loose Stones) पर लगने वाले अंतिम टैरिफ को लेकर और ज्यादा स्पष्टता का इंतजार कर रहा है. मौजूदा अमेरिकी कार्यकारी आदेश के तहत, इन पर अभी 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगता है.

GJEPC की ओर से जारी हुए ये आंकड़े

GJEPC के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में कटे और तराशे हुए हीरों के निर्यात में मामूली गिरावट (0.84 प्रतिशत) दर्ज की गई. यह एक साल पहले के 1,362.67 मिलियन USD (11,860.71 करोड़ रुपए) की तुलना में घटकर 1,351.17 मिलियन USD (12,268.05 करोड़ रुपए) रह गया.

पिछले महीने, पॉलिश किए हुए लैब-ग्रोन हीरों का एक्सपोर्ट 1.85 प्रतिशत बढ़कर 111.68 मिलियन USD (972.04 करोड़ रुपए) से 113.74 मिलियन USD (1,033.03 करोड़ रुपए) हो गया.

पिछले महीने, सोने के गहनों के कुल एक्सपोर्ट में 3.23 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई, जो एक साल पहले के 899.82 मिलियन USD (7,828.05 करोड़ रुपए) की तुलना में बढ़कर 928.85 मिलियन USD (8,432.16 करोड़ रुपए) हो गया.

फरवरी में, चांदी के गहनों का एक्सपोर्ट 123.77 प्रतिशत बढ़कर 116.37 मिलियन USD (1,056.30 करोड़ रुपए) हो गया, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह 52.01 मिलियन USD (452.39 करोड़ रुपए) था.

एक्सपोर्टर रख रहे बारीकी से नजर

पश्चिम एशिया क्षेत्र में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के बारे में बात करते हुए, भंसाली ने कहा कि जैसे-जैसे हम वित्त वर्ष के अंतिम चरण की ओर बढ़ रहे हैं, उद्योग बदलती भू-राजनीतिक घटनाओं और वैश्विक व्यापार स्थितियों पर बारीकी से नजर रखे हुए है. उन्होंने आगे कहा कि एक्सपोर्टर स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं और शिपमेंट तथा सप्लाई चेन की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए अपने व्यापारिक साझेदारों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं.

FASTag का एनुअल पास ले चुके लोगों को भी देनी होगी बढ़ी हुई फीस, जानें नया नियम…

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Fastag Annual Pass: अगर आप अक्सर हाईवे पर गाड़ी चलाते हैं और टोल से बचने के लिए FASTag का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके काम की है. सरकार ने प्राइवेट गाड़ी मालिकों के लिए मिलने वाले खास एनुअल पास की कीमत में हल्का इजाफा करने का फैसला किया है.

यानी जिन लोगों ने यह पास लिया है या लेने की सोच रहे हैं, उन्हें अब थोड़ा ज्यादा भुगतान करना पड़ सकता है.

हालांकि राहत की बात यह है कि अगर आप 31 मार्च से पहले पास खरीद लेते हैं या रिन्यू कर लेते हैं. तो आपको पुरानी कीमत पर ही इसका फायदा मिल सकता है. हाईवे पर बार बार सफर करने वालों के लिए यह पास काफी फायदेमंद माना जाता है. क्योंकि इससे हर बार टोल देने की झंझट कम हो जाती है. लेकिन अब नए नियम लागू होने के बाद इसकी कीमत में बदलाव किया जा रहा है. जिसे लेकर कई लोगों के मन में सवाल भी उठ रहे हैं.

कितना बढ़ेगा एनुअल पास का चार्ज?

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के नियमों के मुताबिक हर साल टोल दरों में बदलाव होता है और उसी फॉर्मूले के आधार पर पास की कीमत भी अपडेट की जाती है. फिलहाल जो FASTag एनुअल पास 3000 रुपये में मिलता है. उसकी कीमत 1 अप्रैल से बढ़ाकर 3075 रुपये कर दी जाएगी. यानी कुल 75 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. जो करीब 2.5 प्रतिशत के बराबर है. इस बदलाव से देशभर के लाखों वाहन मालिक प्रभावित होंगे. अनुमान है कि करीब 52 लाख लोग इस बदलाव से प्रभावित होंगे.

ध्यान रखने वाली बातें:

  • अभी की कीमत 3000 रुपये है.
  • 1 अप्रैल से कीमत 3075 रुपये हो जाएगी.
  • यानी कुल 75 रुपये की बढ़ोतरी की गई है.
  • करीब 52 लाख वाहन मालिकों पर इसका असर पड़ेगा.

कैसे काम करता है FASTag एनुअल पास?

यह एनुअल पास खासतौर पर उन लोगों के लिए बनाया गया है. जो नेशनल हाईवे पर बार बार सफर करते हैं. पिछले साल 15 अगस्त को इसे शुरू किया गया था और तब से यह काफी पाॅपुलर हो गया है. इस में एक बार पेमेंट करने के बाद पास पूरे एक साल या 200 ट्रिप तक वैलिड रहता है. इनमें से जो भी पहले पूरा हो जाए.

इस योजना में दो तरह के ऑप्शन मिलते हैं;’

3000 रुपये का वार्षिक पास जिसमें एक साल तक हाईवे इस्तेमाल किया जा सकता है.

30000 रुपये का लाइफटाइम पास जिसमें लंबे समय तक टोल से राहत मिलती है.

कुछ जरूरी बातें भी ध्यान में रखना जरूरी है

यह पास सिर्फ नेशनल हाईवे पर ही मान्य होता है.

राज्य सरकार के टोल प्लाजा पर सामान्य शुल्क कटेगा.

पास के लिए दिया गया पैसा नॉन रिफंडेबल होता है.

कहां से खरीद सकते हैं यह पास?

इस पास को खरीदना काफी आसान रखा गया है और इसके लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ती. वाहन मालिक इसे घर बैठे मोबाइल से भी खरीद सकते हैं. इसके लिए Rajmarg Yatra App का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट से भी पास लिया जा सकता है. पेमेंट करने के करीब दो घंटे के भीतर पास एक्टिव हो जाता है और मोबाइल पर कन्फर्मेशन मैसेज भी मिल जाता है.

पास खरीदने के आसान तरीके

राजमार्ग यात्रा ऐप के जरिए ऑनलाइन खरीद सकते हैं.

NHAI की वेबसाइट से भी आवेदन किया जा सकता है.

पेमेंट के करीब 2 घंटे में पास एक्टिव हो जाता है.

मोबाइल पर कन्फर्मेशन मैसेज भी मिल जाता है.

इस कंपनी की कारों पर मिल रहा ₹50,000 तक का डिस्काउंट; 31 मार्च तक है मौका…

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मार्च 2026 में Kia अपनी कई कारों पर भारत में ₹50,000 तक का डिस्काउंट दे रही है. Kia Sonet और Seltos जैसे मॉडल पर ये ऑफर्स खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद हैं जो फाइनेंशियल ईयर खत्म होने से पहले कार खरीदना चाहते हैं.इन ऑफर्स के तहत खरीदारों को कैश डिस्काउंट, एक्सचेंज बोनस और कॉर्पोरेट बेनिफिट्स का फायदा मिलता है, जिससे ऑन-रोड कीमत कम हो जाती है.

इसके अलावा Syros, Carens Clavis और Carens Clavis EV जैसे अन्य मॉडल भी डीलरशिप पर मिलने वाले इंसेंटिव के साथ उपलब्ध हैं.

किआ सोनेट और सेल्टोस पर डिस्काउंट ऑफर

मार्च 2026 में Kia Sonet पर कुल मिलाकर 30,000 रुपये का डिस्काउंट मिल रहा है. इस ऑफर में 10,000 रुपये की नकद छूट, 10,000 रुपये का एक्सचेंज बोनस और 10,000 रुपये के कॉर्पोरेट लाभ शामिल हैं. ये कॉम्पैक्ट एसयूवी लाइनअप में सबसे किफायती मॉडलों में से एक है और Tata Nexon, Hyundai Venue और Maruti Suzuki Brezza जैसे अन्य लोकप्रिय मॉडलों को टक्कर देती है.किआ सेल्टोस मिड-साइज सेगमेंट की एक और एसयूवी है और खरीदार 20,000 रुपये के एक्सचेंज बोनस और एक्सटेंडेड वारंटी पैकेज का लाभ उठा सकते हैं. ये एसयूवी हुंडई क्रेटा, होंडा एलिवेट और स्कोडा कुशाक जैसे लोकप्रिय मॉडलों को टक्कर देती है.

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साइरोस, कैरेंस क्लैविस और कैरेंस क्लैविस ईवी पर छूट

Kia Syros पर 40,000 रुपये या उससे ज्यादा तक का डिस्काउंट मिल रहा है. इनमें 10,000 रुपये की नकद छूट, 20,000 रुपये का एक्सचेंज बोनस और 10,000 रुपये का कॉर्पोरेट ऑफर शामिल है.Kia Carens Clavis में भी वही फायदे मिलते हैं, जिनमें 10,000 रुपये की नकद छूट, 20,000 रुपये का एक्सचेंज बोनस और 10,000 रुपये का कॉर्पोरेट ऑफर शामिल है. वहीं, Kia Carens Clavis EV में 20,000 रुपये तक की नकद छूट, 20,000 रुपये का एक्सचेंज बोनस और 10,000 रुपये का कॉर्पोरेट ऑफर मिलता है. इस तरह कुल फायदे 50,000 रुपये या उससे भी ज्यादा हो जाते हैं.

मौजूदा Kia मालिकों के लिए डिस्काउंट

Kia अपनी कारों के मौजूदा मालिकों के लिए भी एक खास बोनस स्कीम पेश कर रही है. ये स्कीम चुनिंदा मॉडल्स पर लागू होती है और खरीदार को मिलने वाले कुल डिस्काउंट में और बढ़ोतरी करती है.

मार्च में मिलने वाले डिस्काउंट क्यों खास हैं

मार्च आमतौर पर ऑटो इंडस्ट्री में ज्यादा डिस्काउंट का महीना होता है, क्योंकि निर्माता फाइनेंशियल ईयर खत्म होने से पहले अपनी इन्वेंट्री क्लियर करना चाहते हैं. Kia की SUVs और MPVs खरीदने वाले संभावित ग्राहकों के लिए ये डिस्काउंट और अधिक फायदा पहुंचाते हैं, जिसमें एक्सचेंज और कॉर्पोरेट बेनिफिट्स भी शामिल हैं.