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छत्तीसगढ़ में कैबिनेट विस्तार जल्द, 30 जुलाई को दिल्ली जाएंगे CM साय, गृह मंत्री से मुलाकात के बाद लगेगी मुहर

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छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल विस्तार पिछले काफी समय सेअटका पड़ा है. छत्तीसगढ़ सीएम विष्णुदेव साय एक बार दिल्ली के दौरे पर जा रहे हैं और अटकलें हैं कि इस बार सीएम साय दिल्ली एक सूत्रीय एजेंडे यानी कैबिनेट मंत्रिंडल विस्तार को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे.

आगामी 30 जुलाई को सीएम विष्णुदेव साय दिल्ली रवाना होंगे. दो दिवसीय दिल्ली प्रवास के दौरान सीएम साय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा से मुलाकात कर सकते हैं. छत्तीसगढ़ सीएम इस दौरा अन्य केंद्रीय मंत्रियों से भी मुलाकात कर सकते हैं.

दिल्ली दौरे में सीएम छत्तीसगढ़ सांसदों के साथ करेंगे रात्रि भोज

रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ सीएम विष्णुदेव साय दो दिवसीय दिल्ली दौरे पर छत्तीसगढ़ के सांसदों से मुलाकात कर सकते हैं. सीएम साय दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सदन में सभी सांसदों के साथ रात्रि भोज में शामिल हो सकते हैं. छत्तीसगढ़ से जीतकर आए 10 बीजेपी सांसदों में एक सांसद तोखन साहू मोदी सरकार 3.0 में मंत्री हैं.

दिल्ली दौरे से छत्तीसगढ़ कैबिनेट विस्तार की अटकलें हुई तेज

छत्तीसगढ़ सीएम के दिल्ली दौरे से छत्तीसगढ़ में कैबिनेट विस्तार को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं. माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह करेंगे. माना जा रहा है कि सीएम साय दो दिवसीय दिल्ली दौरे में प्रधानमंत्री से भी सी मुलाकात कर सकते हैं.

माना जा रहा है दिल्ली के दो दिनों के प्रवास के दौरान छत्तीसगढ़ सीएम विष्णुदेव साय बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह के साथ छत्तीसगढ़ प्रदेश कार्यकारिणी के गठन और संगठनात्मक नियुक्तियों पर भी चर्चा कर सकते हैं.

छत्तीसगढ़ बीजेपी संगठन में बदलाव पर चर्चा की है संभावना

राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माने जा रहे दिल्ली दौरे पर सीएम साय छत्तीसगढ़ बीजेपी संगठन में बदलाव को लेकर चर्चा किए जाने की संभावना है. इनमें बीजेपी नड्डा के साथ राज्य में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार,निगम-मंडलों और आयोगों में शेष पदों की नियुक्ति सहित प्रदेश संगठन में बदलाव को लेकर चर्चा अहम हैं.

प्रधानमंत्री के साथ भी हो सकती है सीएम साय की मुलाकात

मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे की अंतिम रूपरेखा अभी तय नहीं हुई है, लेकिन अटकलें हैं कि दो दिवसीय दिल्ली प्रवास के दौरान सीएम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात कर सकते हैं. सीएम साय प्रधानमंत्री मोदी से भेंट के दौरान छत्तीसगढ़ के विकास, केंद्र-राज्य समन्वय और नक्सल समस्या से निपटने के लिए रणनीति पर चर्चा कर सकते हैं.

अब 100 करोड़ की फर्जी रजिस्ट्री के खुलासे से मचा हड़कंप, 20 संदिग्ध रजिस्ट्रियों की जांच शुरू

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मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की आर्थिक राजधानी इंदौर में करोड़ों की संपत्तियों की फर्जी रजिस्ट्री का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. कलेक्टर आशीष सिंह की पहल पर गठित जांच समिति ने करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 20 संदिग्ध रजिस्ट्रियों की जांच की, जिसमें गंभीर हेराफेरी और दस्तावेजों की छेड़छाड़ उजागर हुई.

जांच समिति की रिपोर्ट के बाद FIR दर्ज

मामले की जांच कर रही समिति की रिपोर्ट के बाद पंढरीनाथ थाना में 18 और खजराना में एक एफआईआर दर्ज कराई गई है. कलेक्टर आशीष सिंह की पहल पर गठित जांच समिति ने करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 20 संदिग्ध रजिस्ट्रियों की जांच कराई गई, जिसमें गंभीर हेराफेरी और दस्तावेजों की छेड़छाड़ उजागर हुई. इस मामले में कलेक्टर के निर्देश पर एक दर्जन से ज्यादा एफआईआर दर्ज की गई है, जिसमें रजिस्ट्रार कार्यालय के अधिकारियों की भी लिप्तता नजर आ रही है.

ऐसे खुला मामला

मामला उस समय सामने आया, जब मुंबई निवासी हस्तीमल चौकसे ने शिकायत की कि उनके नाम से फर्जी तरीके से एक संपत्ति की रजिस्ट्री की गई है. इस पर कलेक्टर ने वरिष्ठ पंजीयक को जांच सौंपी, जहां पांच सदस्यीय दल ने जांच पड़ताल की, तो यह बड़ा घोटाला उजागर हुआ. जांच में सामने आया कि पंजीयन कार्यालय के रिकॉर्ड रूम में मौजूद असली दस्तावेजों को हटाकर फर्जी दस्तावेजों से रजिस्ट्री की गई.

विभागीय कर्मचारियों और बाहरी दलालों की मिलीभगत

आरोप है कि विभागीय कर्मचारियों और बाहरी दलालों की मिलीभगत से इस घोटाले को अंजाम दिया गया. इस पूरे मामले इंदौर के एडिशनल पुलिस कमिश्नर अमित सिंह ने बताया कि पंढरीनाथ थाना पुलिस ने एक दर्जन से ज्यादा एफआईआर दस्तावेजों में हेरफेर करने वाले अज्ञात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में FIR दर्ज कर ली गई है. इसके साथ ही प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए एक रिकॉर्ड रूम प्रभारी को पहले ही निलंबित कर दिया गया है. बाकी दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जा रही है.
यह घोटाला न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि आम लोगों की जमीन-संपत्ति की सुरक्षा को लेकर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है. सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर लोगों में आक्रोश है और वे दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट, कैसे पहली बार हो सकते हैं 14 सदस्य?

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छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर फिर से सुगबुगाहट शुरू हो गई है. चर्चा है कि छत्तीसगढ़ में मंत्रियों की संख्या को लेकर हरियाणा का फार्मूला लागू किया जा सकता है. अगर ऐसा हुआ तो राज्य में मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री समेत 13 नहीं बल्कि 14 सदस्य होंगे. ये चर्चा इसलिए भी तेज हो गई है क्योंकि सरकार के मुखिया विष्णुदेव साय का दिल्ली दौरा होने जा रहा है. चर्चा है कि सीएम इस बार मंत्रिमंडल विस्तार पर आलाकमान से चर्चा करने जा रहे हैं. हालांकि खुद मुख्यमंत्री ने ऐसी किसी बात से इनकार किया है. उनका कहना है कि वे हर महीने एक-दो बार दिल्ली जाते रहते हैं. जहां वो छत्तीसगढ़ की जरूरतों और विकास कार्यों की जानकारी प्रधानमंत्री को देते हैं, साथ ही विभागीय मंत्रियों से भी मुलाकात कर प्रदेश के लिए जरूरी मुद्दों पर चर्चा करते हैं.

दरअसल इस चर्चा को तब बल मिला जब राज्य के उप मुख्यमंत्री अरुण साव का बयान सामने आया. उन्होंने कहा- मंत्रिमंडल विस्तार मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है. जल्द ही इस पर निर्णय किया जा सकता है.

सभी की सहमति के आधार पर इस पर फैसला जल्द होने की संभावना है. अब आगे बढ़ने से पहले ये जान लेते हैं कि छत्तीसगढ़ में जिस हरियाणा फार्मूले की चर्चा हो रही है वो है क्या? 8520/

एक महीने में दें मुआवजा राशि, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकार और रेलवे को दी कड़ी प्रतिक्रिया

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एंबुलेंस सेवा की लापरवाही से हुई दो मौतों पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और रेलवे की खासी खिंचाई की है. कोर्ट ने गरीब आदिवासी की मौत पर राज्य को दो लाख रुपये और ट्रेन में कैंसर पीड़िता की मौत पर रेलवे को एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है. हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि एंबुलेंस समय पर नहीं आना और शव वाहन के लिए घंटों इंतजार कराना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है.

रेलवे ने दी ये दलील

मामले को लेकर रेलवे ने दावा किया कि पीड़ित परिवार की जानकारी नहीं मिल रही, जिस पर कोर्ट ने सख्त निर्देश देते हुए एक महीने में परिवार को खोजकर राशि देने या शासकीय कैंसर अस्पताल में जमा करने का आदेश सुनाया. कोर्ट ने कहा कि हर व्यक्ति को मृत्यु के बाद सम्मानजनक विदाई का अधिकार है और अगर राज्य व रेलवे यह भी सुनिश्चित नहीं कर सकते तो आम जनता से और क्या उम्मीद की जा सकती है?

हलफनामे को बताया लापरवाही

हाईकोर्ट ने राज्य के हलफनामे को लापरवाह और जिम्मेदारी से बचने की कोशिश बताया. कोर्ट ने दो टूक कहा कि सिर्फ सेवा प्रदाता पर जुर्माना लगाना काफी नहीं, राज्य और रेलवे दोनों को अपनी असफलताओं की कीमत चुकानी होगी. बता दें कि अगली सुनवाई 28 अगस्त को होगी.

छत्तीसगढ़ एक्टर मनोज राजपूत पर FIR, गलत तरीक से पासपोर्ट बनाने का आरोप; बोले- ये साजिश है

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छत्तीसगढ़ी एक्टर मनोज राजपूत एक बार फिर कानूनी कार्रवाई में फंसे हैं. मनोज जो दुर्ग जिले के चर्चित बिल्डर भी हैं उनके खिलाफ सुपेला थाने में गंभीर धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है. आरोप है कि उन्होंने अपने आपराधिक मामलों को छिपाकर पासपोर्ट बनाया है. हालांकि एक्टर मनोज राजपूत ने कहा कि, मेरी छवि को धूमिल करने की कोशिश है.

क्या है पूरा मामला: मनोज राजपूत के खिलाफ पुलिस ने धोखाधड़ी और पासपोर्ट अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है. बताया जा रहा है कि, गलत जानकारी के आधार पर पहले शपथ पत्र तैयार कराया गया और फिर पासपोर्ट बनवाया गया. सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी के बताया कि मनोज राजपूत ने केवल सुपेला थाना से चरित्र सत्यापन कराकर पासपोर्ट के लिए आवेदन किया. जबकि उन पर अन्य थानों में भी आपराधिक प्रकरण दर्ज थे.

नियम क्या है?: नियमों के अनुसार, पासपोर्ट जारी करने से पहले आवेदक का पूरा आपराधिक रिकॉर्ड पुलिस वेरिफिकेशन के जरिए जांचा जाता है, लेकिन मनोज राजपूत के खिलाफ पहले से दर्ज प्रकरणों के बावजूद पासपोर्ट जारी होना भी सवाल खड़े करता है. यह भी जांच का विषय है कि आखिर पुलिस सत्यापन के दौरान इन प्रकरणों को कैसे ध्यान नहीं दिया गया.

पासपोर्ट सरेंडर करने का दावा: खुद मनोज राजपूत ने खुद इस पर सफाई दी है. उनका कहना है कि, इस मामले में जानबूझकर फंसाया जा रहा है. दावा किया कि उन्होंने पासपोर्ट वापस रायपुर कार्यालय में सरेंडर कर दिया है और 22 जुलाई को जमानत भी ले चुके हैं. कहा कि, मुझे न्यायपालिका पर विश्वास है.

मेरे खिलाफ बिना जांच के ही पुलिस ने FIR कर ली. जिस पुलिस अधिकारी ने पासपोर्ट बनाने में मदद की थी वो ही अब मेरे खिलाफ शिकायत कर रहे हैं. ये साजिश है और मेरी छवि को धूमिल किया जा रहा है- अभिनेता मनोज राजपूत

पहले भी फंस चुके हैं मनोज राजपूत: पासपोर्ट मामले से पहले भी मनोज राजपूत पर दुष्कर्म का आरोप लग चुका है. शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप एक युवती ने लगाया था जिस पर उन्हें जेल भी हुई थी. इसके अलावा मारपीट का भी केस हो चुका है.

सुप्रीम कोर्ट ने IIT खड़गपुर में छात्रों की आत्महत्या पर चिंता जताई, पूछा- वहां क्या गड़बड़ है

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सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), खड़गपुर में छात्रों की आत्महत्या पर चिंता व्यक्त की और पूछा, “आईआईटी खड़गपुर में क्या गड़बड़ है? छात्र आत्महत्या क्यों कर रहे हैं?”

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ के समक्ष सोमवार को यह मामला आया. पीठ ने आईआईटी खड़गपुर और शारदा विश्वविद्यालय में छात्रों की आत्महत्या के मामलों का स्वतः संज्ञान लिया है. शीर्ष अदालत ने इस महीने की शुरुआत में इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था और वरिष्ठ अधिवक्ता अपर्णा भट्ट को न्यायमित्र नियुक्त किया था और उनसे मामले में विस्तृत जानकारी देने को कहा था.

25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की एक अलग पीठ ने कहा था कि जीवन के अधिकार का मतलब केवल प्राणी का अस्तित्व नहीं है, बल्कि सम्मान, स्वायत्तता और कल्याण का जीवन है और इस दृष्टिकोण में मानसिक स्वास्थ्य को प्रमुख स्थान दिया गया है. साथ ही अदालत ने शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के बीच आत्महत्या और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों में वृद्धि से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर दिशा-निर्देश जारी किए थे.

सोमवार को सुनवाई के दौरान दोनों संस्थानों के वकीलों ने पीठ को बताया कि दोनों घटनाओं के संबंध में एफआईआर दर्ज कर ली गई है.

पीठ ने कहा, “आईआईटी खड़गपुर में क्या गड़बड़ है? छात्र आत्महत्या क्यों कर रहे हैं?” पीठ ने संस्थानों से पूछा कि क्या उन्होंने इस मुद्दे पर विचार किया है.

आईआईटी खड़गपुर की ओर से एक वकील ने पीठ के समक्ष दलील दी कि इस मुद्दे की जांच के लिए 10 सदस्यीय समिति गठित की गई है और बताया कि वहां एक परामर्श केंद्र भी है. वकील ने बताया कि एक फोन नंबर भी उपलब्ध कराया गया है, जिस पर कभी भी कॉल किया जा सकता है. पीठ को बताया गया कि संबंधित अधिकारी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे छात्रों की पहचान कर रहे हैं.

पीठ ने कहा, “हमें सूचित किया गया है कि जहां तक शारदा विश्वविद्यालय में हुई घटना का सवाल है, मृतक के पिता द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराई गई है और जांच प्रगति पर है, इसे कानून के अनुसार आगे बढ़ने दें…”

आईआईटी खड़गपुर की घटना के संबंध में, पीठ ने कहा कि उसे बताया गया है कि आत्महत्या की सूचना मिलने के 30 मिनट के भीतर ही प्रबंधन ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करा दी. पीठ ने कहा, “इस संबंध में जांच भी जारी है. जांच सही दिशा में जारी रहे.” पीठ ने मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद तय की है.

एक वकील ने पीठ को बताया कि 4 जून को आईआईटी दिल्ली में एक छात्र ने आत्महत्या कर ली, लेकिन अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है. पीठ ने न्यायमित्र से मामले की जांच कर कार्रवाई करने को कहा.

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा विश्वविद्यालय के छात्रावास में बीडीएस द्वितीय वर्ष की छात्रा ज्योति शर्मा ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी. पुलिस के आने से पहले ही विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने उसका शव हटा दिया था. न्यायमित्र ने अदालत को बताया कि पुलिस अधिकारियों का दावा है कि अपराध स्थल से छेड़छाड़ की गई, क्योंकि कई लोगों के उंगलियों के निशान थे.

आईआईटी खड़गपुर की मैकेनिकल इंजीनियरिंग की चौथे वर्ष की छात्रा रीतम मंडल ने 18 जुलाई को कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी. वह कोलकाता की रहने वाली थी और पांच साल के दोहरी डिग्री कार्यक्रम में अध्ययन कर रही थी. इस साल जनवरी से आईआईटी खड़गपुर परिसर में आत्महत्या का यह चौथा मामला था. आईआईटी खड़गपुर मामले में, रजिस्ट्रार ने न्याय मित्र को सूचित किया कि हालांकि पोस्टमार्टम हो चुका है, लेकिन अभी तक विस्तृत जानकारी नहीं मिली है.

टेबल गिरने की बात पर छात्र को डंडे से पीटा, घटना के तीन दिन बाद टीचर पर केस दर्ज

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मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक छात्र को पीटने के आरोप में मिशनरी स्कूल के टीचर के खिलाफ पुलिस ने रविवार को केस दर्ज किया है. घटना तीन दिन पुरानी है और पुलिस ने शिकायत होने पर जांच के बाद यह कार्रवाई की है.

शहर से करीब 55 km दूर बड़नगर के पीर झालर मार्ग पर स्थित सेंट मार्टिन स्कूल है. यहां गुरूवार को 7 साल के छात्र से टेबल गिर गई. इस पर फादर रामू बंडोद उर्फ रफाली ने उसे डंडे से इतना पीटा की उसकी पूरी पीठ पर डंडे के निशान उभर आए. बाद में टीचर ने उसे रोककर बर्फ की सिकाई कर निशान मिटाने का प्रयास किया. देरी से घर पहुंचने पर परिजनों ने कारण पूछा तो बच्चे ने घटना बता दी.

जानकारी पर उसे पिता थाने लेकर पहुंचे और फादर रफाली के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा दी. बड़नगर अशोक पाटीदार ने बताया कि सैंट मार्टिन विद्यालय के एक टीचर के खिलाफ छात्र को पीटने की शिकायत उसके परिजनों ने की थी. जांच के बाद आज केस दर्ज किया है.

हिंदूवादी संगठनों ने किया थाने का घेराव
सेंट मार्टिन स्कूल में छात्र की पिटाई का रविवार पता चलते ही हिंदूवादी संगठनों के नेता थाने पहुंच गए. उन्होंने जमकर नारेबाजी कर स्कूल संचालक के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने की मांग की. मामले में एसडीओपी महेन्द्रसिंह परमार ने जांच कर स्कूल संचालक के खिलाफ केस दर्ज करने के निर्देश दिए.

शिक्षा विभाग ने दिए जांच के आदेश
स्कूल के प्रिंसिपल एंथनी जॉर्ज सेंट ने कहा कि मैं स्कूल में नहीं था. स्कूल पहुंचा तो पनिशमेंट देने वाले शिक्षक को विद्यालय से निष्कासित कर दिया है. हमारे विद्यालय में बच्चों को पीटा नहीं जाता है. इधर बड़नगर बीआरसी रामप्रसाद राठौर ने कहा कि तुरंत ही एक जांच दल गठित कर विद्यालय की जांच कर पीड़ित छात्र से भी मिलकर उसके बयान ले कर अधिकारियों को सूचित किया जाएगा.

पहले भी विवादों में रहा स्कूल
मार्च 2021 में विद्यालय के एक फादर द्वारा फिजिक्स के प्रैक्टिकल में नंबर बढ़ाने को लेकर विद्यालय की एक छात्रा को प्रताड़ित किया था. मामले में परिजनों पालक द्वारा शिक्षक और स्कूल संचालक के खिलाफ थाने में शिकायती की गई थी. वहीं मई 2021 में इस स्कूल पर हिंदू प्रतीक चिन्ह के अपमान का आरोप लगने पर कई हिंदू संगठनों में प्रशासन को विद्यालय की मान्यता खतम करने का आवेदन दिया था. विगत वर्षों में सावन सोमवार का बच्चों द्वारा व्रत करने पर भी प्रबंधन द्वारा तुड़वा दिया था. EDC

ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में चर्चा के बीच, सुरक्षा बलों ने पहलगाम हमले के आरोपी सुलेमान शाह को मार गिराया

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संसद में आज ऑपरेशन सिंदूर के मुद्दे पर बहस चल रही है. इस बीच जम्मू कश्मीर में ऑपरेशन महादेव के तहत कार्रवाई करते हुए सुरक्षाबलों ने पहलगाम हमले के आरोपी सुलेमान शाह को मार गिराया है. जानकारी के अनुसार इस कार्रवाई में आतंकी अबू हमजा और यासिर भी मारा गया. इन आतंकियों की लंबे समय से सुरक्षाबलों को तलाश थी. सरकार ने सुलेमान शाह पर 20 लाख रुपये का इनाम रखा था.

ऑपरेशन के संबंध में सेना की चिनार कॉर्प्स ने अपने एक्स हैंडल पर जानकारी साझा की. सेना के अधिकारियों के अनुसार, खुफिया सूचना के आधार पर लिडवास इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया था. इस दौरान सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई, जो कई घंटों तक चली. मुठभेड़ में तीन आतंकियों को मार गिराने में सुरक्षाबलों को सफलता मिली. इलाके में फिलहाल सर्च ऑपरेशन जारी है.

‘ऑपरेशन महादेव’ को हाल के समय में घाटी में आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है. यह ऑपरेशन इस बात का संकेत है कि सेना और अन्य सुरक्षाबल आतंकवाद को जड़ से समाप्त करने के लिए पूरी मुस्तैदी और सटीक रणनीति के साथ जुटे हुए हैं.

22 अप्रैल को पहलगाम के बैसरन मैदान में पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों द्वारा किए गए आतंकवादी हमले, जिसमें 26 लोग मारे गए थे, के बाद से आतंकवाद-रोधी अभियान आतंकवादियों के नापाक मंसूबों को विफल करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक और मानव खुफिया जानकारी का उपयोग कर रहे हैं.

छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के जमीन पर कब्जे की होड़, 9 लाख दावों में से 4 लाख खारिज

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छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में गैर-आदिवासी व्यापारियों द्वारा जंगल की जमीन पर कब्जा जमाने की होड़ मची हुई है। ये कब्जे आमतौर पर लीज़ के बहाने किए जा रहे हैं, जहां आदिवासियों से उनकी जमीन खरीदने के एवज में मामूली रकम देकर स्थायी ढांचे खड़े किए जा रहे हैं।

इसके बाद फॉरेस्ट राइट एक्ट (Forest Rights Act) के तहत भूमि अधिकार के दावे किए जाते हैं। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ पूरे देश में सबसे अधिक वन भूमि अधिकार दावे दर्ज कराने वाला राज्य बन गया है।

गैर-आदिवासी भी कर रहे आदिवासी नाम से दावे
हालांकि कानूनन आदिवासी भूमि केवल किसी अन्य आदिवासी द्वारा ही खरीदी जा सकती है, फिर भी कई गैर-आदिवासी व्यापारी और लोग फर्जीवाड़े के जरिए आदिवासी नाम पर जमीन खरीदने और कब्जा करने में लगे हैं। जब ये दावे जिला प्रशासन के पास पहुंचते हैं, तो जांच के बाद बड़ी संख्या में इन्हें खारिज भी किया जा रहा है।

आधे से ज्यादा दावे खारिज
वन भूमि अधिकार के तहत अब तक छत्तीसगढ़ में कुल 9 लाख 47 हजार 479 दावे किए जा चुके हैं। इनमें से अब तक 4 लाख 4 हजार 129 लोगों के दावे खारिज कर दिए गए हैं। इसके साथ ही 3 हजार 658 संगठनों के दावे भी अमान्य करार दिए गए हैं।

देश भर में 31 मई 2025 तक कुल 36.3% दावों को खारिज किया गया है, जबकि अकेले छत्तीसगढ़ में खारिजी दर इससे कहीं अधिक रही है।

ग्रामसभा के माध्यम से होते हैं दावे
वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत आदिवासी समुदाय और मान्यता प्राप्त संगठनों को जंगल की जमीन पर अधिकार देने की व्यवस्था है। इसके लिए ग्रामसभाएं दावे करती हैं, जिनका सत्यापन जिला प्रशासन द्वारा किया जाता है। जांच के बाद ही पट्टे जारी किए जाते हैं।

संसद में पेश हुई रिपोर्ट से खुलासा
संसद में भूमि अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन पर पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में कुल दावे 9,47,479 थे जिनमें 4,04,129+ खारिज हो गए. ओडिशा में 7,36,172 दावे थे जिनमें 1,40,000 खारिज हो गए और मध्य प्रदेश में 6,27,513 दावे थे जिनमें खारिज होने वाले दावे अभी स्पष्ट नहीं हैं.

साय से केंद्रीय संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चन्द्रशेखर पेम्मासानी ने की सौजन्य मुलाक़ात

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मुख्यमंत्री साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में भारत सरकार के केंद्रीय संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चन्द्रशेखर पेम्मासानी ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच ग्रामीण विकास, केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन, आदिवासी अंचलों में संचार सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री के विकासोन्मुखी दृष्टिकोण को धरातल पर साकार करने हेतु राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हमारी सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में 18 लाख पक्के मकानों की स्वीकृति दी जा चुकी है, जिससे प्रदेश के गरीब परिवारों के आवास का सपना पूरा हो रहा है। उन्होंने कहा कि बैंकिंग सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए 1,460 ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र आरंभ किए गए हैं, जिससे ग्रामीण जनसंख्या को सहज और सुलभ बैंकिंग सुविधा मिल रही है।

मुख्यमंत्री साय ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदमों की चर्चा करते हुए बताया कि राज्य सरकार द्वारा कौशल विकास एवं नवाचार को प्रोत्साहित किया जा रहा है। ग्रामीण अंचलों में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा किए जा रहे कार्यों ने आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है।

केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. चन्द्रशेखर पेम्मासानी ने मुख्यमंत्री श्री साय को अपने नारायणपुर तथा मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिलों के दौरे की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में केंद्र सरकार की योजनाएं प्रभावी ढंग से क्रियान्वित हो रही हैं और स्थानीय जनता को इनका सीधा लाभ मिल रहा है। डॉ. पेम्मासानी ने माओवादी क्षेत्रों में तीव्र गति से हो रहे सकारात्मक बदलाव की सराहना करते हुए इसे छत्तीसगढ़ के उज्ज्वल भविष्य का संकेत बताया। उन्होंने ‘बिहान’ योजना के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूहों की ओर से आयोजित प्रदर्शनी का उल्लेख करते हुए कहा कि समूह की दीदियों द्वारा तैयार किए गए बेलमेटल, मिलेट्स और घरेलू उत्पादों की गुणवत्ता अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि इन समूहों की महिलाएँ 15 से 20 हजार रुपये मासिक आय अर्जित कर रही हैं, जो ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।

डॉ. पेम्मासानी ने जनजातीय समुदाय के पारंपरिक स्वागत का स्मरण करते हुए कहा कि उनके साथ नृत्य करना और स्थानीय संस्कृति से आत्मिक रूप से जुड़ने का अनुभव अविस्मरणीय रहा। उन्होंने परीयना दिव्यांग आवासीय विद्यालय के दौरे का भी विशेष उल्लेख किया और वहाँ बच्चों से हुई आत्मीय बातचीत को अत्यंत भावुक क्षण बताया। उन्होंने शासन द्वारा दिव्यांग बच्चों के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद उपस्थित थे।