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एक साथ चुनाव की राह में रोड़ा? पूर्व चीफ जस्टिस ने पकड़ ली खामी, बताया ‘बिल में ग्रे एरिया’ कहां

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पूर्व चीफ जस्‍ट‍िस ने बिल की खामियां बताईं.
हाइलाइट्स
पूर्व CJIs ने ONOE बिल की धारा 82A(5) में चुनाव आयोग को मिले अधिकारों पर सवाल उठाए.
विधेयक में आपातकाल और विधानसभा के शेष कार्यकाल जैसे मामलों पर स्पष्टता की कमी बताई गई.
दोनों न्यायाधीशों ने कहा–बिल संविधान की मूल संरचना के खिलाफ नहीं है, सुधार जरूरी
‘एक देश, एक चुनाव’ के सपने को लेकर केंद्र सरकार ने भले ही कमर कस ली हो, लेकिन पूर्व चीफ जस्‍ट‍िस डीवाई चंद्रचूड़ और जे. एस खेहर ने इसकी बड़ी खामी पकड़ ली है. दोनों ने ज्‍वाइंट पार्लियामेंटरी कमेटी के सामने बिल में कहां ग्रे एर‍िया है, उसे बताया. हालांक‍ि, दोनों जजों ने साफ क‍िया क‍ि एक साथ चुनाव कराना आसान है. इसमें कोई संवैधान‍िक बाध्‍यता नहीं आने वाली.
दोनों पूर्व सीजेआई ने बिल में उस धारा 82A(5) पर आपत्‍त‍ि जताई है, जिसमें चुनाव आयोग को यह अधिकार दिया गया है कि वह विधानसभा चुनावों को लोकसभा चुनाव से अलग कराने की सिफारिश कर सके. खेहर तीसरे ऐसे पूर्व प्रधान न्यायाधीश हैं, जिन्होंने इस धारा पर सवाल खड़े किए हैं. उनसे पहले रंजन गोगोई और चंद्रचूड़ भी इसे लेकर आपत्ति जता चुके हैं.
क्‍या है आपत्‍त‍ि
सूत्रों के मुताबिक, खेहर ने सुझाव दिया कि चुनाव की तारीखों के निर्णय में संसद या केंद्रीय मंत्रिमंडल की भूमिका भी होनी चाहिए. केवल चुनाव आयोग के विवेक पर सब कुछ छोड़ना संविधान की भावना के अनुकूल नहीं है. वहीं, चंद्रचूड़ ने भी विधेयक को लेकर अपने लिखित सुझाव समिति को पहले ही सौंप दिए थे. हालांकि, दोनों पूर्व मुख्य न्यायाधीशों ने यह स्पष्ट किया कि यह विधेयक संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन नहीं करता, जैसा कि विपक्ष का आरोप है. चंद्रचूड़ ने साफ शब्दों में कहा, यह संविधान की मूल भावना को नुकसान नहीं पहुंचाता.

इमरजेंसी में क्‍या होगा
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा सहित विपक्षी सांसदों ने यह सवाल उठाया कि क्या विधानसभाओं को बीच में भंग कर लोकसभा के साथ चुनाव कराना संविधान सम्मत होगा. इसके अलावा यह भी सवाल उठा कि अगर किसी विधानसभा का कार्यकाल कुछ ही महीने शेष हो, तो क्या इतने कम समय के लिए भी चुनाव कराना व्यावहारिक और लोकतांत्रिक रूप से सही होगा? साथ ही, आपातकाल जैसी असाधारण परिस्थितियों में चुनाव प्रक्रिया कैसे संचालित होगी, इस पर भी विधेयक में स्पष्टता नहीं है.
सरकार बोली-सुधार करेंगे
संसदीय समिति के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद पी. पी. चौधरी ने कहा कि समिति सभी पक्षों के विचारों का स्वागत करती है और विधेयक में सुधार के लिए हर सुझाव पर विचार किया जाएगा. उन्होंने कहा, यह राष्ट्र निर्माण का एक ऐतिहासिक अवसर है और हमें इसे पूरी गंभीरता से लेना चाहिए. अब तक चार पूर्व प्रधान न्यायाधीश इस समिति के सामने अपनी राय रख चुके हैं. वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व सांसद ई. एम. सुधर्शन नचियप्पन ने भी अपने सुझाव समिति को सौंपे हैं. समिति की यह आठवीं बैठक थी.

फिर डोली दिल्ली, NCR में भी महसूस किए गए भूकंप के झटके, इस हफ्ते दूसरी बार जलजला

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शुक्रवार, 11 जुलाई की शाम करीब 7:49 बजे दिल्ली-एनसीआर समेत हरियाणा के कई शहरों में भूकंप के झटके महसूस किए गए. भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.7 मापी गई और इसका केंद्र हरियाणा के झज्जर जिले में रहा. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, भूकंप ज़मीन के अंदर 10 किलोमीटर गहराई में आया था. इसका स्थान हरियाणा के झज्जर इलाके में था, जो उत्तर दिशा में 28.68 डिग्री और पूर्व दिशा में 76.72 डिग्री पर स्थित है.
यह इस हफ्ते दूसरी बार है जब राजधानी दिल्ली और इसके आस-पास के इलाकों में ज़मीन हिलती महसूस की गई. इससे पहले गुरुवार सुबह 9:04 बजे भी झज्जर के पास रिक्टर स्केल पर 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसका प्रभाव दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, रोहतक, हिसार, पानीपत और मेरठ तक महसूस किया गया था. गुरुवार का भूकंप झज्जर से उत्तर-पूर्व की ओर 3 किमी दूर और दिल्ली से 51 किमी पश्चिम में आया था.

सोशल मीडिया पर लोगों ने शेयर किया अपना डर
भले ही इन दोनों घटनाओं में किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है, लेकिन लगातार दो दिनों तक धरती के हिलने से लोगों में चिंता बढ़ गई है. सोशल मीडिया पर कई यूज़र्स ने अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा, “फिर से हिल गई जमीन”, “क्या आप लोगों ने भी महसूस किया?” कुछ लोगों ने अपने घर और ऑफिस से बाहर निकलने की भी बात कही.
भूकंप की घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या दिल्ली-एनसीआर बड़े भूकंप की दिशा में बढ़ रहा है? विशेषज्ञों की मानें तो यह इलाका भूकंपीय जोन IV में आता है जो मध्यम से उच्च खतरे वाला ज़ोन माना जाता है. दिल्ली की घनी आबादी और पुरानी इमारतें इसे और भी संवेदनशील बना देती हैं.
आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से अफवाहों से बचने और सतर्क रहने की अपील की है. उन्होंने कहा है कि झटकों के समय घबराएं नहीं, खुले स्थानों में जाएं और जरूरत पड़ने पर आपातकालीन नंबरों से संपर्क करें.
भूकंप में कैसे करें बचाव
भूकंप के दौरान सबसे जरूरी है – घबराहट से बचना और सही समय पर सही कदम उठाना. जैसे ही झटके महसूस हों, तुरंत किसी मजबूत टेबल या बेड के नीचे शरण लें और अपने सिर को हाथों से ढक लें. खिड़की, शीशे या भारी सामान से दूर रहें. अगर आप ऊंची इमारत में हैं तो लिफ्ट का इस्तेमाल न करें और जब तक झटके बंद न हो जाएं वहीं रुके रहें. बाहर हों तो बिजली के खंभों, पेड़ों और इमारतों से दूर खुले मैदान में चले जाएं. वाहन में हों तो धीरे-धीरे रोककर वहीं रुक जाएं जब तक सबकुछ सामान्य न हो जाए. भूकंप के बाद गैस, बिजली और पानी की लाइनों की जांच करें और जरूरत पड़ने पर आपदा राहत नंबरों पर संपर्क करें.

बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों पर हाईकोर्ट की सख्ती, छात्र-छात्राओं के प्रवेश पर लगाई रोक; एक स्कूल पर लगा 50000 का जुर्माना

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों (Unrecognized Schools) में नए सत्र में छात्रों के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्देश दिया है. मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायाधीश रविन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए कहा कि जो छात्र पहले से पढ़ रहे हैं, उन्हें नहीं हटाया जाएगा. कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को व्यक्तिगत शपथ पत्र के साथ जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है.

सुनवाई के दौरान बताया गया कि 28 स्कूलों में मान्यता व ऑडिट में गड़बड़ी पाई गई है. एक स्कूल पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. याचिकाकर्ता के वकील ने यह भी बताया कि निजी स्कूल महंगी किताबों का दबाव बना रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है. कोर्ट ने यह मुद्दा भी याचिका में शामिल कर अगली सुनवाई 5 अगस्त तय की है.

युक्तियुक्तकरण के विरोध में AAP ने सीएम के लिए सौंपा ज्ञापन
वहीं, छत्तीसगढ़ में युक्तियुक्तकरण को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के द्वारा विरोध जताते हुए धरना प्रदर्शन कर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंच मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया है और युक्तियुक्तकरण को लेकर विरोध जताते हुए प्रदर्शन का नारेबाजी की गई है और युक्तियुक्तकरण से शिक्षा व्यवस्था बदहाल होगी इसकी बात कही गई है और युक्तियुक्तकरण रद्द करने की मांग आम आदमी पार्टी के द्वारा की गई है।

CM साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक,लिए गए ये महत्वपूर्ण फैसले

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में शुक्रवार को छत्तीसगढ़ सरकार की कैबिनेट बैठक आयोजित की गई, इस दौरान मंत्रालय महानदी भवन में कई बड़े फैसले लिए गए.

मंत्रिपरिषद ने राज्य पुलिस सेवा संवर्ग के अधिकारियों के लिए वरिष्ठ ग्रेड वेतनमान प्रदान करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. इस निर्णय के तहत, वर्ष 2005 से 2009 बैच के उन अधिकारियों को वरिष्ठ ग्रेड वेतनमान दिया जाएगा, जिन्होंने अर्हकारी सेवा अवधि पूरी कर ली है। इसके लिए 30 गैर-संख्यात्मक पदों का सृजन किया जाएगा.
मंत्रिपरिषद द्वारा जनजातीय समूहों एवं अन्य वंचित वर्गों के गरीब युवा, महिलाओं एवं तृतीय लिंग के लोगों के संस्थागत विकास के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए छत्तीसगढ़ शासन एवं पैन आईआईटी एलुमनी रीच फॉर इंडिया फाउंडेशन (PanIIT) के मध्य एक गैर-लाभकारी संयुक्त उद्यम कंपनी के गठन को मंजूरी प्रदान की गई.
इस ज्वाइंट वेंचर कंपनी के माध्यम से अनुसूचित जनजाति एवं अन्य वंचित समुदायों के गरीब युवाओं, महिलाओं एवं तृतीय लिंग के लोगों को संस्थागत व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं ग्रामीण उद्यमिता के माध्यम से सशक्त एवं विकसित किया जाएगा. साथ ही आदिवासी उपयोजना, अनुसूचित जाति उपयोजना आदि के अप्रयुक्त फंड का अभिसरण कर आजीविका एवं सामाजिक आर्थिक बदलाव के लिए काम किया जाएगा.

पुराने वाहनों से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और वायु प्रदूषण को नियंत्रण करने के लिए छत्तीसगढ़ मोटरयान कराधान अधिनियम-1991 में संशोधन विधेयक के ड्राफ्ट को मंजूरी दी गई.
छत्तीसगढ़ मोटरयान नियम-1994 के नियम, 55 में संशोधन को मंजूरी. इसके तहत वाहन मालिक अपने पुराने वाहन के फैंसी या च्वाइस नंबर को नए या किसी अन्य राज्य से लाए गए उसी श्रेणी के वाहन में उपयोग किय जा सकेगा. इसके लिए फीस देनी पड़ेगी. अगर पुराना नंबर सामान्य नंबर था तो छत्तीसगढ़ मोटरयान नियम 1994 के नियम 55(2)(ग) के अनुसार आवश्यक शुल्क भरने के बाद इसका उपयोग संभव होगा.
यह सुविधा केवल नए वाहन के पंजीकर या अन्य राज्य से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर आए वाहनों पर लागू होगी, पहले से राज्य में पंजीकृत वाहनों पर नहीं. सरकारी वाहनों के लिए भी यह सुविधा मिलेगी, इसके लिए उन्हें कोई शुल्क नहीं देना होगा.
छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) (संशोधन) विधेयक, 2025 के ड्राफ्ट को मंजूरी.
युवाओं को सशक्त बनाने के लिए छात्र स्टार्ट-अप और नवाचार नीति लागू करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. इस नीति का लक्ष्य है राज्य के 100 तकनीकी संस्थानों के 50 हजार छात्रों तक पहुंच बनाना, 500 प्रोटोटाइप्स का समर्थन करना, 500 बौद्धिक संपदा अधिकार फाइल करना और 150 स्टार्टअप्स को इन्क्यूबेट करना. इससे युवाओं को नई सोच और तकनीक विकसित करने में मदद मिलेगी.
छत्तीसगढ़ कृषि उपज मंडी (संशोधन) विधेयक, 2025 के ड्राफ्ट को मंजूरी.
राजधानी क्षेत्र की तर्ज पर छत्तीसगढ़ राजधानी क्षेत्र (State Capital Region) के विकास के लिए संबंधित प्राधिकरण की स्थापना हेतु विधेयक के ड्राफ्ट को मंजूरी दी गई.
रायपुर, दुर्ग-भिलाई और नया रायपुर अटल नगर में तेजी से बढ़ती आबादी और शहरीकरण को देखते हुए इस क्षेत्र के सुव्यवस्थित और योजनाबद्ध विकास के लिए यह प्राधिकरण कार्य करेगा. यह प्राधिकरण राजधानी क्षेत्र के लिए योजना बनाना, निवेश को बढ़ावा देना, विभिन्न सरकारी और निजी संगठनों के बीच समन्वय तथा शहर के विस्तार को सही ढंग से नियंत्रित करने का काम करेगा.

2031 तक इस क्षेत्र में लगभग 50 लाख लोगों के रहने की संभावना है, इसलिए भूमि का प्रभावी उपयोग और पर्यावरण की रक्षा करते हुए शहरी विकास सुनिश्चित करना जरूरी है.
छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2025 के ड्राफ्ट को मंजूरी.
राज्य के छोटे और मध्यम व्यापारियों को प्रोत्साहित करने के साथ ही कोर्ट में लंबित कर संबंधी मामलों का जल्दी से निपटाने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया, जिसमें छत्तीसगढ़ बकाया कर, ब्याज एवं शास्ति के निपटान (संशोधन) विधेयक, 2025 के ड्राफ्ट को मंजूरी दी गई.
छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता संशोधन विधेयक 2025 के ड्राफ्ट को मंजूरी.
इससे नक्शा बंटवारे और अभिलेखों के अद्यतनीकरण में सहूलियत होगी अवैध प्लाटिंग पर रोक लगेगी, जियो-रेफरेंस मैप से भविष्य में कानूनी विवाद कम होंगे। नामांतरण की प्रक्रिया आसान होगी। भूमि धारक की मृत्यु पर संयुक्त खाताधारकों और वारिसों को नामांतरण में सहूलियत होगी। भवन या भूखंड का हस्तांतरण भूमि के अनुपात में हो सकेगा। औद्योगिक नीति, आवास योजना और नगरीय विकास की प्रक्रियाएं सरल होंगी।

छत्तीसगढ़ कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय अधिनियम, 2004 में संशोधन विधेयक के ड्राफ्ट को मंजूरी.

लूज फास्टैग वाले सावधान! एनएचएआई ब्लैकलिस्ट कर रहा है “टैग-इन-हैंड”

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सुचारू टोल संचालन सुनिश्चित करने और ‘लूज फास्टैग’ की रिपोर्टिंग को मजबूत करने के लिए, एनएचएआई ने शुक्रवार को कहा कि उसने टोल संग्रह एजेंसियों और रियायतकर्ताओं के लिए ‘लूज फास्टैग’ की तुरंत रिपोर्ट करने और ब्लैकलिस्ट करने के लिए अपनी नीति को और सुव्यवस्थित किया है. लूज फास्टैग को आमतौर पर “टैग-इन-हैंड” भी कहा जाता है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बयान में कहा कि वार्षिक पास प्रणाली और मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) टोलिंग जैसी आगामी पहलों को देखते हुए, फास्टैग की प्रामाणिकता और प्रणाली की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए इस मुद्दे का समाधान करना आवश्यक है.

ये दिक्कतें आती हैं : सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बयान में आगे कहा गया कि कभी-कभी वाहन मालिक जानबूझकर वाहन के विंडस्क्रीन पर फास्टैग नहीं लगाते. इससे परिचालन सम्बंधी चुनौतियां पैदा होती हैं, जिससे लेन में भीड़भाड़, झूठे चार्जबैक, बंद टोल प्रणाली में दुरुपयोग, इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह व्यवस्था में बाधा आती है, जिसके परिणामस्वरूप टोल प्लाजा पर अनावश्यक देरी होती है और राष्ट्रीय राजमार्ग के अन्य उपयोगकर्ताओं को असुविधा होती है.

समय पर सुधारात्मक उपाय सुनिश्चित करने के लिए, एनएचएआई ने एक समर्पित ईमेल आईडी उपलब्ध कराई है और टोल संग्रह एजेंसियों और रियायतधारकों को ऐसे फास्टैग की तुरंत सूचना देने का निर्देश दिया है. प्राप्त रिपोर्टों के आधार पर, एनएचएआई रिपोर्ट किए गए फास्टैग को ब्लैकलिस्ट/हॉटलिस्ट करने के लिए तुरंत कार्रवाई करेगा.
मंत्रालय ने आगे कहा कि 98 प्रतिशत से अधिक की व्यापक पहुंच के साथ, फास्टैग ने देश में इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली में क्रांति ला दी है. लूज फास्टैग या “हाथ में टैग” इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह कार्यों की दक्षता के लिए एक चुनौती है. यह पहल टोल संचालन को और अधिक कुशल बनाने में मदद करेगी, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग उपयोगकर्ताओं के लिए निर्बाध और सहज यात्रा सुनिश्चित होगी.

इस महीने की शुरुआत में, सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों के कुछ हिस्सों, जिनमें सुरंगें, पुल, फ्लाईओवर और एलिवेटेड सड़कें शामिल हैं, पर टोल दरों में 50 प्रतिशत तक की कमी की. इस कदम का उद्देश्य यात्रा की लागत कम करना और सड़क यात्रा को आम जनता के लिए अधिक किफायती बनाना है.

न्यू जनरेशन की IIT भिलाई को क्यों मिली 5 Star Rating, यहां बीटेक की 300 से ज्यादा है सीटें

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देशभर के शीर्ष शिक्षण संस्थानों में सत्र 2025-26 में दाखिले की प्रक्रियाएं शुरू हो गई हैं. IIT में एडमिशन के लिए भी JEE काउंसलिंग की प्रक्रिया चल रही है. ऐसे में हमने जानना चाहा कि छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में संचालित नई जनरेशन की IIT भिलाई में दाखिला लेना स्टूडेंट्स के लिए कितना फायदेमंद हो सकता है? कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा और JEE का कठिन टेस्ट पास कर विद्यार्थी अब दाखिले की प्रक्रिया में जुट गए हैं. एडमिशन के लिए बेहतर विकल्प तलाशे जा रहे हैं. ऐसे में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए ये कॉलेज एक बेहतर ऑप्शन हो सकता है.

छात्रों ने बताई सच्चाई
छत्तीसगढ़ की शिक्षाधानी कहे जाने वाले भिलाई में संचालित आईआईटी कैंपस में विद्यार्थियों से हमने बातचीत की. जिस संस्थान में जो पढ़ाई कर रहा है, वो बेहतर बता सकता है कि उस संस्थान में कोई और दाखिला ले या न ले. आईआईटी में रिसर्च स्कॉलर निशी केसरी कहती हैं कि अगर एकैडमिक की बात करें तो आईआईटी भिलाई सबसे बेहतर ऑप्शन हो सकता है. क्योंकि नई जनरेशन की आईआईटी है, इसलिए बच्चे कम हैं और स्टूडेंट-टीचर रेसियो यहां अच्छा है. कम बच्चे होने के कारण टीचर्स-प्रोफेसर्स का फोकस सभी स्टूडेंट्स पर बराबर रहता है. रिसर्च के लिए यहां सबसे लेटेस्ट इक्यूपमेंट हैं. सभी संसाधन यहां उपलब्ध हैं.

कैसा है यहां माहौल?
भिलाई आईआईटी में बीटेक की पढ़ाई कर रहे मोहित ठाकरे कहते हैं कि हमारे कैंपस में सीनियर और जूनियर के बीच फ्रेंडली माहौल है. नए बच्चों में एक डर होता है कि क्या सीनियर रैंगिग करेंगे, तो इसका जवाब है कि हमारे कैंपस में रैगिंग के लिए कोई जगह नहीं है. यहां एसआईपी का इनेसेटिव है, जहां सीनियर एक मेंटर की तरह मदद करते हैं. चारों तरफ हरियाली है. ग्रीनरी के लिए ग्रीन हाउस संस्था द्वारा भिलाई आईआईटी को फाइव स्टार रैंकिंग भी दी गई है.

जबलपुर से भिलाई आईआईटी में पढ़ने आईं मानसी कहती हैं कि मैं अपने शहर से ज्यादा सुरक्षित खुद को यहां पाती हूं. यहां सिक्योरिटी के रीजन से हर गेट पर अंदर-बाहर आने-जाने वालों की एंट्री होती है. पूरी डिटेल नोट की जाती है. कैंपस के बाहर भी किसी तरह की असुविधा नहीं होती. मूलत: हरियाणा के रहने वाले नमन शर्मा कहते हैं कि यहां पढ़ाई के अलावा अदर्स एक्टिविटी पर भी फोकस किया जाता है.

मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत के स्पेस रेगुलेटर से मंजूरी मिली, जल्द शुरू होगी सेवाएं

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भारत में सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सर्विस शुरू करने के लिए एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को बुधवार को देश के स्पेस रेगुलेटर भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) से मंजूरी मिल गई है.

इन-स्पेस की वेबसाइट पर उपलब्ध ऑथराइजेशन लिस्ट के अनुसार, इस मंजूरी के बाद स्टारलिंक के लिए देश में कमर्शियल सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सर्विस शुरू करने के लिए अंतिम विनियामक बाधा दूर हो गई है.

सरकार से हासिल करना होगा स्पेक्ट्रम
स्टारलिंक को अब सरकार से स्पेक्ट्रम हासिल करना होगा और अपनी सेवाओं के लिए जमीनी इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा. दूरसंचार विभाग (डीओटी) सुरक्षा अनुपालन को पूरा करने के लिए अमेरिकी अंतरिक्ष कंपनी को ट्रायल स्पेक्ट्रम देने के लिए तैयार है. इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद स्टारलिंक देश में कुछ महीनों में ही सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सर्विस शुरू कर सकती है.

कंपनियों से हो चुके हैं समझौते
स्टारलिंक ने भारत में वीसैट प्रोवाइडर्स के साथ पहले ही व्यावसायिक समझौते पर हस्ताक्षर कर लिए हैं. वीसैट (वेरी स्मॉल अपर्चर टर्मिनल) सेवा प्रदाता उपग्रह-आधारित इंटरनेट और संचार समाधान प्रदान करते हैं, खासकर उन स्थानों के लिए जहां स्थलीय कनेक्टिविटी सीमित या बिल्कुल नहीं है.

केंद्रीय संचार मंत्री ने दिया ये बयान
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पिछले हफ्ते कहा था कि स्पेसएक्स की स्टारलिंक सेवा के भारत में प्रवेश के लिए उनकी ओर से सभी आवश्यक जांच-पड़ताल पूरी कर ली गई है, और स्पेस रेगुलेटर से आवश्यक नियामक और लाइसेंसिंग मंजूरी मिलने के बाद, वे जब चाहें देश में यह सेवा शुरू कर सकते हैं. मंजूरी देने से पहले स्पेस रेगुलेटर ने स्टारलिंक को एक लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) जारी किया था.

स्टारलिंक पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले सैटेलाइट के एक नेटवर्क के माध्यम से इंटरनेट प्रदान करता है. कंपनी वर्तमान में दुनिया के सबसे बड़े सैटेलाइट नेटवर्क का संचालन करती है, जिनके 6,750 से अधिक सैटेलाइट कक्षा में स्थापित हैं. स्टारलिंक इंटरनेट सेवाएं मंगोलिया, जापान, फिलीपींस, मलेशिया, इंडोनेशिया, जॉर्डन, यमन, अजरबैजान और श्रीलंका सहित कई देशों में पहले से ही उपलब्ध हैं.

ट्रेन सुरक्षा बढ़ाने के लिए रेलवे करेगा AI का इस्तेमाल, DFCCIL के साथ किया समझौता

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भारतीय रेलवे ने मशीन विजन बेस्ड इंस्पेक्शन सिस्टम (एमवीआईएस) की स्थापना के लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के साथ एक समझौता किया है. रेलवे की सेवा दक्षता में सुधार करने और रोलिंग स्टॉक के रखरखाव को स्वचालित करने के लिए ये फैसला लिया गया है. इतना ही नहीं भारतीय रेलवे इस वित्त वर्ष के अंत तक 50,000 से अधिक नौकरियां देने के लिए भी तेजी से काम कर रहा है.

एमओयू पर औपचारिक रूप से रेलवे बोर्ड के निदेशक (परियोजना एवं विकास) सुमित कुमार और डीएफसीसीआईएल के जीजीएम (मैकेनिकल) जवाहर लाल ने रेल भवन नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए.

एमवीआईएस एक आधुनिक, एआई/एमएल-आधारित टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन है जो चलती ट्रेनों के अंडर-गियर की हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरों को कैप्चर करता है और स्वचालित रूप से किसी भी लटके हुए, ढीले या लापता घटकों का पता लगाता है. यह सिस्टम खराबी का पता लगाने पर त्वरित प्रतिक्रिया और कार्रवाई के लिए रियल टाइम के अलर्ट भेजता है.

एमओयू के अंतर्गत डीएफसीसीआईएल चार एमवीआई इकाइयों की खरीद, आपूर्ति, स्थापना, परीक्षण और कमीशन के लिए जिम्मेदार होगा. यह प्रणाली भारतीय रेलवे में पहली है. टेक्नोलॉजी के उपयोग से ट्रेन संचालन की सुरक्षा को बढ़ाने, मैनुअल निरीक्षण प्रयासों को कम करने और संभावित दुर्घटनाओं/सेवा व्यवधानों से बचने में मदद करने की उम्मीद है.

रेल मंत्रालय ने कहा कि यह पहल रेलवे इकोसिस्टम के लिए आधुनिक और इंटेलिजेंट सिस्टम को पेश करने के आईआर के व्यापक उद्देश्य के साथ भी संरेखित है. इस एमओयू पर हस्ताक्षर भविष्य के लिए तैयार रेल इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में रेल सुरक्षा में डिजिटल परिवर्तन के लिए नई राह खोलेगी.

इसके अलावा भारतीय रेलवे इस वित्त वर्ष के अंत तक 50,000 से अधिक नौकरियां देने के लिए भी तेजी से काम कर रहा है. वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में रेलवे द्वारा 9,000 से अधिक नियुक्ति पत्र वितरित किए गए हैं.

रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) विभिन्न पदों को भरने के लिए बड़े पैमाने पर भर्ती अभियान सक्रिय रूप से चला रहा है. नवंबर 2024 से आरआरबी ने सात विभिन्न भर्ती अधिसूचनाओं के लिए देश भर में 1.86 करोड़ से अधिक उम्मीदवारों के लिए कंप्यूटर-आधारित परीक्षा (सीबीटी) आयोजित की है.

छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग में बड़े स्तर पर अधिकारियों का तबादला, DEO से लेकर BEO तक 183 का हुआ Transfer

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छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग ने गुरुवार की देर शाम एक जरूरी आदेश जारी किया है. विभाग ने पूरे प्रदेश के कुल 183 शिक्षा अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी कर दिया है. इसके तहत जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) और कर्मचारियों का ट्रांस्फर किया गया है. इसके तहत, रायपुर जिले के नए डीईओ हिमांशु भारती होंगे.

इन अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) सहित छत्तीसगढ़ के कुल 183 शिक्षा अधिकारियों और कर्मचारियों का तबादला किया गया है. रायपुर जिले के नए DEO हिमांशु भारती बनाए गए हैं. दूसरी तरफ, राकेश पांडेय को बस्तर जिला शिक्षा अधिकारी बनाया गया है. इसी तरह, कई जिलों के लिए नई नियुक्ति का लिस्ट जारी किया गया है.

प्रशासनिक फेरबदल का भी आदेश
इससे पहले छत्तीसगढ़ में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल भी देखने को मिला. प्रदेश में आबकारी विभाग में एक बड़ी कार्रवाई हुई. यहां 22 अधिकारियों को एक साथ सस्पेंड कर दिया गया है. जिला आबकारी अधिकारी रहते हुए इन अफसरों पर शराब घोटाला में कमीशन खोरी का आरोप है.

अस्पताल भी, मरीज भी, लेकिन डॉक्टर नहीं… बस्तर संभाग में 355 में सिर्फ 45 विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद

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छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) का बस्तर संभाग प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध तो है, लेकिन दूसरी तरफ, स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर बेहद गरीब है. यहां इलाज कराना एक लंबी लड़ाई लड़ने जैसा है. संभाग में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 355 स्वीकृत पद हैं और हकीकत ये है कि सिर्फ 45 डॉक्टर ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं. यानी, लगभग 310 पद आज के समय तक भी खाली पड़े हुए हैं. ये खाली पद सिर्फ़ आंकड़े नहीं हैं, ये वो खाली कुर्सियां हैं जिन पर किसी की जान बच सकती थी. हर अस्पताल में डॉक्टरों का इंतज़ार हो रहा है.

बस्तर के हर जिले में डॉक्टरों की स्थिति दयनीय
हर मरीज अस्पताल की ओर देख रहा है. लेकिन, डॉक्टरों की मौजूदगी सिर्फ़ पोस्टर या योजनाओं तक सिमटी है. विशेषज्ञ डॉक्टरों की भूमिका साधारण नहीं होती. ये वे लोग होते हैं, जिनके पास किसी महिला की सुरक्षित डिलीवरी से लेकर किसी वृद्ध के हार्ट अटैक तक का इलाज होता है. जिनकी मौजूदगी से एक छोटा सीएचसी भी बड़ा जीवनदाता बन सकता है. लेकिन, बस्तर के हर जिले की तस्वीर अलग नहीं, बल्कि एक जैसी दयनीय है.

इन जिलों में हैं इतने विशेषज्ञ डॉक्टरों की स्वीकृति
बस्तर – 67 पद स्वीकृत, 12 डॉक्टर कार्यरत
कांकेर – 68 पद में से 14 डॉक्टर कार्यरत
कोंडागांव – 51 पद में 7 डॉक्टर कार्यरत
नारायणपुर – 31 पद में 5 डॉक्टर कार्यरत
दंतेवाड़ा – 44 पद में 4 डॉक्टर कार्यरत
बीजापुर – 62 पद में 3 डॉक्टर कार्यरत
सुकमा – 32 पद लेकिन एक भी विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं
मरीजों की संख्या बहुत
बस्तर संभाग का ये हाल तब है, जब इन जिलों में नक्सल, सड़क हादसे, प्रसव जटिलताएं और वायरल बीमारियों की भरमार है. जब छोटे अस्पतालों में इलाज नहीं होता तो दबाव सीधे ज़िला अस्पतालों पर आता है. जगदलपुर, कांकेर, दंतेवाड़ा जैसे प्रमुख संस्थानों पर रोज़ाना सैकड़ों मरीज पहुंचते हैं. कई गंभीर केस हैं, लेकिन डॉक्टर कम है. ओपीडी में भीड़, ऑपरेशन थिएटर में प्रतीक्षा, और वार्डों में इलाज की बजाय उम्मीदें पड़ी होती हैं.

डॉक्टरों के लिए भी बड़ी परेशानी
सिर्फ मेडिकल संसाधन नहीं, मानसिक थकावट भी डॉक्टरों के अंदर दिखने लगी है. एक विशेषज्ञ डॉक्टर एक साथ तीन विभाग संभाल रहा है. जांच, परामर्श और ऑपरेशन. क्या ये किसी भी इंसान के लिए संभव है? मरीजों की मजबूरी उन्हें रायपुर, विशाखापट्टनम या हैदराबाद ले जाती है. सैकड़ों किलोमीटर की दूरी, हजारों का खर्च और कई बार वक्त की देरी जान पर भारी पड़ती है. इसी बीच एक और हैरान करने वाली सच्चाई सामने आती है सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, जो जगदलपुर में केंद्र सरकार की योजना से बनकर तैयार हो गया है, आज तक शुरू नहीं हुई है.

आज भी शुरू नहीं हुआ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल
भवन तैयार है, मशीनें लग चुकी हैं, लेकिन डॉक्टर नहीं हैं. इस वजह से जगदलपुर में बना सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल आज भी शुरू नहीं हो सका है. यानि एक और इमारत, एक और इनागरेशन, लेकिन मरीजों के लिए कोई उपयोग नहीं… इन नियुक्तियों में सबसे बड़ी रुकावट है फंडिंग और प्राथमिकता. जिला खनिज न्यास निधि (DMF) जैसे फंड मौजूद हैं, जिनका उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं में हो सकता है, लेकिन अधिकतर जिलों में यह फंड अन्य योजनाओं या कागजी योजनाओं में ही खप गया.