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’विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल श्री डेका ने लगाए पौधे’

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विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज यहां रायपुर स्थित लोकभवन परिसर और निर्माणाधीन लोकभवन परिसर नवा रायपुर में पौधे लगाए। उन्होंने सभी से अपील की कि ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएं और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में योगदान करे। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना भी उपस्थित थे।

 

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कैंसर पीड़ित महिला के उपचार हेतु स्वीकृत की 21.69 लाख रुपये की सहायता…

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मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना से मिलेगी नई उम्मीद, रायपुर में होगा उपचार

मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया बना जरूरतमंदों के लिए राहत और भरोसे का केंद्र

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कोरबा जिले की 66 वर्षीय कैंसर पीड़ित महिला श्रीमती उमातिन बाई के उपचार के लिए मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत 21 लाख 69 हजार 344 रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की है। इस सहायता से उनका उपचार रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय (मेकाहारा) में कराया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, फेफड़े के कैंसर से पीड़ित उमातिन बाई के परिजनों ने आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण इलाज के लिए सहायता की मांग करते हुए बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदन प्राप्त होते ही मामले पर त्वरित संज्ञान लिया गया और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत उपचार हेतु 21.69 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई।

मुख्यमंत्री की इस संवेदनशील पहल से मरीज और उसके परिजनों को बड़ी राहत मिली है। परिजनों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इतनी बड़ी आर्थिक सहायता मिलने से अब बेहतर और समय पर उपचार संभव हो सकेगा। उन्होंने कहा कि यह सहयोग उनके परिवार के लिए संबल और नई उम्मीद लेकर आया है।

मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया से मिल रही त्वरित राहत

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के गृह ग्राम बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। यहां प्राप्त आवेदनों पर शीघ्र कार्रवाई कर जरूरतमंदों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा तथा अन्य जनकल्याणकारी मामलों में लोगों को त्वरित राहत मिल रही है, जिससे शासन के प्रति आमजन का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।

संवेदनशील प्रशासन और जनसेवा की भावना के साथ संचालित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया आज जरूरतमंदों के लिए आशा, विश्वास और सहारे का सशक्त केंद्र बन गया है।

विकसित छत्तीसगढ़ का नया विजन: पारंपरिक डिग्रियों से ‘ग्लोबल करियर’ की ओर बढ़ते युवाओं के कदम…

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छत्तीसगढ़, जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, घने वनों और खनिज संपदा के लिए जाना जाता है, आज एक नई पहचान के साथ उभर रहा है,एक ज्ञान-आधारित, प्रगतिशील राज्य। 21वीं सदी की वैश्विक अर्थव्यवस्था में वह समाज सफल होगा जिसके पास अत्याधुनिक ज्ञान, तकनीकी कौशल और नवाचार की शक्ति हो। इसी सोच के साथ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने ‘उत्कृष्टता केंद्र (Center of Excellence) योजना’ शुरू की है। यह पहल पारंपरिक उच्च शिक्षा मॉडल को बदलकर कॉलेजों को युवाओं के लिए आधुनिक लॉन्चपैड बनाने की महत्वाकांक्षा रखती है।

कौशल और रोजगार के बीच की खाई

छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा अक्सर सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित रही है। परिणामस्वरूप, युवाओं को डिग्रियाँ मिलती रहीं पर उद्योग की बदलती तकनीकी मांगों—जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल स्किलिंग और डेटा एनालिटिक्स—और वास्तविक कौशल के बीच एक गहरी खाई बन गई। खासकर वनांचल और ग्रामीण इलाकों के मेधावी छात्र आधुनिक संसाधनों, प्रयोगशालाओं और वैश्विक मार्गदर्शन के अभाव में पिछड़ जाते थे। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 की दिशानिर्देशों को अपनाते हुए, सरकार ने इसी खाई को पाटने और बहुसांस्कृतिक, अनुसंधान-उन्मुख संस्थान स्थापित करने का निर्णय लिया है।

यह योजना दावे भर नहीं है—इसके पीछे ठोस बजटीय प्रावधान और चरणबद्ध रोडमैप मौजूद है। राज्य के 36 प्रमुख महाविद्यालयों जिनमें 3,000 से अधिक नामांकन हैं,उसे ‘उत्कृष्टता केंद्र’ के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। प्रारम्भिक चरण में 25 कॉलेजों के लिए प्रति कॉलेज 3 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं और अगले चरण में प्रमुख कॉलेजों के लिए 15 करोड़ रुपए तक का विशेष वित्तीय प्रावधान रखा गया है। साथ ही ‘राज्य रिसर्च एवं इनोवेशन योजना’ जैसी पहलें प्राध्यापकों और छात्रों को वैश्विक मानक के अनुसंधान के लिए वित्तीय व प्रशासनिक सहायता देंगी।

फाइवपिलर आर्किटेक्चर: शिक्षा के पाँच स्तंभ

ये उत्कृष्टता केंद्र सिर्फ भौतिक सुविधाएँ नहीं होंगे; इनके कार्य-तत्व पांच मुख्य स्तंभों पर आधारित होंगे, जो छात्रों को विश्वस्तरीय अवसर प्रदान करेंगे।

अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ

विज्ञान, कंप्यूटर साइंस, तकनीकी और कृषि विषयों में अंतरराष्ट्रीय मानक की लैब सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे थ्योरी के साथ ‘करके सीखना’ सुनिश्चित होगा।डिजिटल लर्निंग सेंटर: हाई-स्पीड इंटरनेट, स्मार्ट क्लासरूम और ई‑लाइब्रेरी के जरिए दूरस्थ और वनांचल के छात्र भी वैश्विक ज्ञान स्रोतों से जुड़ सकेंगे। रिसर्च एवं इनोवेशन लैब: स्थानीय कृषि, जनजातीय कला, हर्बल चिकित्सा और माइनिंग जैसे क्षेत्रीय चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए शोध को प्रेरित किया जाएगा, ताकि ‘लोकल’ शोध को ‘ग्लोबल’ पहचान मिल सके।

रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण

कोडिंग, आईटी कौशल, उद्यमिता और स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेल्स के माध्यम से छात्रों को मार्केट-रेडी बनाया जाएगा।

करियर एवं प्लेसमेंट गाइडेंस

इन‑हाउस काउंसलिंग, कैंपस प्लेसमेंट और प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UPSC, CGPSC, बैंकिंग) की तैयारी के लिए संरचित मार्गदर्शन उपलब्ध होगा।

जमीनी असर: लाभ किस तरह पहुंचेगा?

यह योजना व्यक्तिगत छात्रवृत्ति या लोन नहीं, बल्कि संस्थागत सशक्तिकरण पर आधारित है। चयनित उत्कृष्टता केंद्रों के नियमित छात्र बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के इन सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। कौशल विकास, रिसर्च और इनक्यूबेशन प्रोग्राम्स के लिए विस्तृत परवर्ती पंजीकरण की व्यवस्था रहेगी, जो सरल और पारदर्शी रखी गई है ताकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के छात्र कागजी बाधाओं में न फ़ँसें।

बौद्धिक पलायन पर अंकुश और आर्थिक सशक्तिकरण

जब राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएँ और वैश्विक मानक का शिक्षण वातावरण छात्रों के अपने जिलों में उपलब्ध होगा तो दूर के महानगरों की ओर पलायन कम होगा। यह युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही नई उद्यमी गतिविधियाँ आरम्भ करने और नये रोजगार सृजित करने के लिए प्रेरित करेगा, जिससे छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था ‘लोकल से ग्लोबल’ की दिशा में जीतेगी।

मुख्यमंत्री का विजन: रोजगार मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें युवा

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संदेश स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ के युवा प्रतिभाशाली हैं; उन्हें सही अवसर और आधुनिक संसाधन मिले तो वे न केवल नौकरी पाएँगे बल्कि नये उद्यम भी खोलकर रोजगार के अवसर पैदा करेंगे। यही इस योजना की आत्मा है।युवाओं को रोजगार संचयित करने की बजाय रोजगार सृजन के लिये सक्षम बनाना है।

‘उत्कृष्टता केंद्र योजना’ छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक इतिहास में एक निर्णायक मील का पत्थर है। यह राज्य को परंपरागत ‘उपभोक्ता’ पहचान से उठाकर एक ‘नॉलेज स्टेट’ में बदलने की दिशा में एक ठोस कदम है। आने वाले वर्षों में इन केंद्रों से निकले प्रशिक्षित युवा केवल कागजी प्रमाणपत्र नहीं लेकर बाहर जाएंगे; उनके पास आधुनिक कौशल, नवाचार की चाह और आत्मनिर्भरता की भावना होगी। यह पहल निःसंदेह छत्तीसगढ़ को समृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धा दोनों में मजबूती देगी।

विश्व पर्यावरण दिवस पर रायपुर में बनेगी मानव श्रृंखला, पर्यावरण संरक्षण का संदेश…

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विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर “फ्यूचर ऑफ इंडिया (भारत का भविष्य) अभियान” रायपुर में पर्यावरण संरक्षण के समर्थन में मानव श्रृंखला का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का आयोजन छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा एवं विभिन्न शैक्षणिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों के संयुक्त प्रयास से किया जा रहा है।

मानव श्रृंखला के माध्यम से जंगलों की रक्षा, जल संरक्षण, स्वच्छ वायु और अधिक से अधिक वृक्षारोपण का संदेश दिया जाएगा। साथ ही लोगों को जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) के बढ़ते दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाएगा। कार्यक्रम में विज्ञान कार्यकर्ता, शिक्षक, डॉक्टर, प्रोफेसर, किसान, मजदूर, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा शासकीय अधिकारी-कर्मचारी भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करेंगे।

छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा की रायपुर इकाई की सचिव एवं शिक्षाविद् डॉ. अंजू मेश्राम ने बताया कि अभियान का उद्देश्य रायपुर सहित प्रदेश के अन्य शहरों को बढ़ते तापमान और पर्यावरणीय चुनौतियों से बचाने के लिए जनजागरूकता बढ़ाना है। कार्यक्रम के दौरान वृक्षों के संरक्षण, जल बचाने और हरियाली बढ़ाने के संदेश पर आधारित गीत भी प्रस्तुत किए जाएंगे।

इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा, कृषि संकट, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता, वायु प्रदूषण नियंत्रण और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा होगी। वर्ष 2047 तक एक हरित, स्वच्छ और पर्यावरण-सुरक्षित भारत के निर्माण के संकल्प के साथ संतुलित एवं सतत विकास की अवधारणा पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा ने सभी नागरिकों से इस जनजागरूकता कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर पर्यावरण संरक्षण के अभियान को मजबूत बनाने की अपील की है।

Insurance Claim: जरूरत के समय धोखा दे सकता है आपका कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस, जानिए क्यों रिजेक्ट हो रहे हैं क्लेम…

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Health Insurance: कैशलेस बीमा से अस्पताल में भर्ती होना आसान हो सकता है, लेकिन मंज़ूरी हमेशा अपने आप नहीं मिलती. प्रतीक्षा अवधि, दस्तावेज़ों में कमियां सभी कैशलेस क्लेम को प्रभावित कर सकते हैं.

अक्सर स्वास्थ्य बीमा कार्ड होना मन को तसल्ली देती है. कई पॉलिसीधारकों का मानना ​​है कि एक बार स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीद लेने के बाद, जब भी उन्हें इलाज की जरूरत होगी, अस्पताल के बिल का भुगतान कैशलेस सुविधा के माध्यम से स्वतः ही हो जाएगा. लेकिन यह बात भी ध्यान में रखना होगी कि मंज़ूरी हमेशा अपने आप नहीं मिलती. कई कारक यह निर्धारित करते हैं कि क्लेम आसानी से मंजूर होगा या उसमें बाधाएं आएंगी.

लेकिन कभी हालात इससे बहुत अलग हो सकते है.  हर साल, कई पॉलिसीधारकों को ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ता है जहां अस्पताल में भर्ती होने के दौरान उनका कैशलेस क्लेम रिजेक्ट, आंशिक रूप से स्वीकृत या यहां तक ​​कि रिजेक्ट हो जाता है. कई मामलों में, पॉलिसी सक्रिय होती है और प्रीमियम समय पर चुकाया गया होता है. फिर भी, मरीज़ और उनके परिवार अचानक खुद को ऐसे समय में पैसे की इंतेजाम करते हुए पाते हैं जब उनका ध्यान पूरा तरिके से इलाज और स्वस्थ होने पर होना चाहिए. इसकी वजह एक दम साफ है कि केवल सक्रिय स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी होने से ही कैशलेस क्लेम की सफलता की गारंटी नहीं मिलती.

कैशलेस क्लेम में दिक्कतें क्यों सकती हैं?

सबसे दिलचस्प बात यह है कि कैशलेस स्वास्थ्य बीमा का मकसद अस्पताल में भर्ती होने की संचालन को बेहतर और आर्थिक रूप से कम तनावपूर्ण बनाना है, लेकिन कुछ ऐसी स्थितियां भी होती हैं जहां संचालन उम्मीद के मुताबिक नहीं चलती.

पॉलिसीबाजार डॉट कॉम के स्वास्थ्य बीमा व्यवसाय प्रमुख सिद्धार्थ सिंघल के अनुसार, ‘कैशलेस स्वास्थ्य बीमा का मकसद अस्पताल में भर्ती होने की तरिका को बेहतर और आर्थिक रूप से कम तनावपूर्ण बनाना है, लेकिन कुछ ऐसी स्थितियां भी होती हैं जहाँ पॉलिसी सक्रिय होने के बावजूद कैशलेस क्लेम में देरी, आंशिक मंजूरी या नामंजूर हो सकती है. ज्यादातर मामलों में, यह फैसले पॉलिसी की स्थिति के बजाय पॉलिसी की शर्तों, दस्तावेज़ीकरण से जुड़ी जरूरतों पर तय की जाती है’. साथ ही कहा क्लेम संबंधी समस्याओं का एक खास वजह ठहराव की पाबंदियां है.

हर इलाज का खर्च बीमा में शामिल नहीं होता

मिली जानकारी के मुताबिक, कई उपभोक्ता यह मान लेते हैं कि स्वास्थ्य बीमा होने पर अस्पताल का हर खर्च अपने आप कवर हो जाएगा. लेकिन ऐसा ज़रूरी नहीं है.

सिंघल के अनुसार, ‘कुछ मामलों में, उपचार या प्रक्रिया बीमा के दायरे से बाहर हो सकती है. हर पॉलिसी में कुछ शर्तें और शिकायत होते हैं. कुछ प्रक्रियाएं, इलाज या मेडिकल खर्च पॉलिसी के दायरे में नहीं आते. इसीलिए विशेषज्ञ पॉलिसीधारकों को सलाह देते हैं कि वे केवल बीमा राशि और प्रीमियम पर ध्यान देने के बजाय पॉलिसी के शब्दों को ध्यान से पढ़ें.

Paddy Crops Tips: धान की फसल बोने से पहले सावधान हो जाएं किसान…

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धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचाने वाले खैरा रोग से बचाव के लिए किसानों को बुवाई से पहले ही अलर्ट होना पड़ेगा. इन तरीकों से इस इस बीमारी को सही समय पर रोका जा सकता है.

धान की खेती करने वाले किसानों के लिए यह सीजन बेहद महत्वपूर्ण है. लेकिन बुवाई से पहले एक ऐसी खतरनाक बीमारी के बारे में जान लेना जरूरी है, जो आपकी पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती है. अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो यह रोग आपकी धान की पैदावार को सीधे आधा यानी 50% तक कम कर सकता है.

धान में लगने वाले खैरा रोग धान के पौधों को अंदर से खोखला और कमजोर बना देता है. शुरुआत में किसान इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन धीरे-धीरे यह पूरे खेत में फैल जाती है. सही समय पर पहचान न होने से पूरी फसल बर्बाद होने की नौबत आ जाती है.

इस रोग के लक्षणों की बात करें तो धान की पत्तियां हल्की पीली पड़ने लगती हैं. कुछ समय बाद इन पत्तियों पर कत्थई या लाल-भूरे रंग के छोटे-छोटे धब्बे साफ दिखाई देने लगते हैं. पौधा एकदम से बौना रह जाता है, उसका विकास पूरी तरह रुक जाता है और जड़ें भी ठीक से नहीं फैल पाती हैं.

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक धान में खैरा रोग लगने की सबसे बड़ी वजह मिट्टी में जिंक यानी जस्ते की भारी कमी होना है. जब खेत की मिट्टी में जिंक का लेवल कम हो जाता है, तो पौधे जरूरी पोषक तत्व नहीं ले पाते. नर्सरी तैयार करते समय या रोपाई के तुरंत बाद यह समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिलती है.

इस घातक बीमारी से अपनी फसल को बचाने का सबसे सही समय रोपाई से ठीक पहले का होता है. किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने खेत की मिट्टी की जांच जरूर करवाएं. अगर मिट्टी में जिंक की कमी पाई जाती है. तो बुवाई और रोपाई की तैयारी करते समय ही इसका परमानेंट इलाज कर लेना चाहिए.

खैरा रोग को रोकने के लिए जिंक सल्फेट का इस्तेमाल सबसे अचूक और रामबाण उपाय माना जाता है. खेत की आखिरी जुताई के समय प्रति एकड़ के हिसाब से सही मात्रा में जिंक सल्फेट मिट्टी में मिला देना चाहिए. ऐसा करने से पौधों को शुरुआती स्टेज से ही पूरा पोषण मिलता है और बीमारी का खतरा टल जाता है

अगर रोपाई के बाद खड़ी फसल में इस बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत जिंक सल्फेट और बुझे हुए चूने का घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए. बुवाई से पहले की गई थोड़ी सी सावधानी और सही मात्रा में जिंक का इस्तेमाल किसानों को भारी नुकसान से बचा सकता है और बंपर पैदावार दे सकता है.

UP Politics: यूपी विधानसभा चुनाव से पहले चंद्रशेखर आजाद का बड़ा ऐलान…

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चंद्रशेखर आजाद ने कहा है कि आज 4 जून से हम लोग सत्ता परिवर्तन यात्रा शुरू कर रहे हैं, यह यात्रा बिजनौर शुरू होकर मेरठ, शामली और अगले फेज में पूरे प्रदेश में जाएगी.

उत्तर प्रदेश की नगीना सीट से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने कहा है कि आजाद पार्टी की कोर कमेटी ने तय किया है कि आज 4 जून को दो साल पहले लोकसभा चुनाव के परिणाम आए थे और इस दिन को व्यवस्था परिवर्तन दिवस के रूप में मनाएंगे.

चंद्रशेखर आजाद ने कहा है कि आज के दिन ही हमारे आंदोलन को मजबूती मिली थी. उन्होंने कहा कि जिस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात मॉडल लेकर आए थे, उसी तरह आजाद समाज पार्टी पूरे उत्तर प्रदेश और देश में नगीना मॉडल लेकर जाएंगे. अगर कमजोर वर्ग के लोग इकट्ठा हो जाए, तो सत्ता को उखाड़ फेंकना कोई बड़ी बात नहीं है.

आसपा 4 जून से शुरू कर रही सत्ता परिवर्तन यात्रा

चंद्रशेखर आजाद ने कहा है कि आज 4 जून से हम लोग सत्ता परिवर्तन यात्रा शुरू कर रहे हैं, यह यात्रा बिजनौर शुरू होकर मेरठ, शामली और अगले फेज में पूरे प्रदेश में जाएगी. उन्होंने यह भी बताया है कि नगीना की जनता के आशीर्वाद सभा इंदिरा भवन में रखी गई है.

हाउस अरेस्ट किए जाने पर कहानिकालेंगे संवैधानिक रास्ता

चंद्रशेखर आजाद ने खुद को पुलिस द्वारा हाउस अरेस्ट किए जाने पर कहा कि हम लोग संवैधानिक लोग हैं, अगर कोई ऐसी स्थिति होगी तो उसका संवैधानिक रास्ता निकालेंगे. उन्होंने कहा कि, पुलिस जनता की सुरक्षा के लिए है, अगर पुलिस सरकार के इशारे पर धमकाने का काम करेगी तो इसका हल भी बात कर निकालेंगे.

सत्ता परिवर्तन यात्रा को परमिशन मिलने पर भड़के

सत्ता परिवर्तन यात्रा के परमिशन को लेकर उन्होंने कहा है कि हम मुख्यालय जा रहे हैं, अधिकारियों से बैठकर बातचीत करेंगे. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि हमने सत्ता परिवर्तन यात्रा के लिए परमिशन मांगी है लेकिन अभी नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि अगर सरकार मुझे मेरे लोगों के बीच जाने नहीं देगी और हमे अपनी बात नहीं रखने देगी तो हम लोकतंत्र की हत्या को बर्दाश्त नहीं करेंगे. उन्होंने यात्रा को परमिशन नहीं दिए जाने पर सरकार पर निशाना साधा है.

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि अगर लोकसभा चुनाव की तरह उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में बिजनौर की कमजोर वर्ग की जनता ने अगर समझदारी दिखाई तो परिणाम यह होंगे कि भारतीय जनता पार्टी एक भी सीटें जिले में नहीं जीत पाएगी. उन्होने दाा किया सभी 8 सीटों पर आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के विधायक होंगे.

उन्होंने कहा कि, मैं अकेले इस क्षेत्र की जनता के लिए पार्लियामेंट में आवाज उठाता हूं कि यहां उद्योग धंधे लग जाएं जिससे यहां लाखों नौजावानों को रोजगार मिल सके. उन्होने आरोप लगाया है कि सत्ता में बैठे लोग नहीं चाहते हैं कि मेरे क्षेत्र के लोगों की पीड़ा दूर हो. उन्होंने कहा कि, बिजली पानी और सड़क से बढ़कर भी बहुत सारी जरूरते हैं.

सरकार लगाया भेदभाव का आरोप

उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता अपने विधायकों और सांसदों को 5 करोड़ रुपये देती है लेकिन 1 करोड़ की बात करते हैं. यह जो भेदभाव किया जा रहा है जनता सब देख रही है. उन्होंने कहा कि मैं लोगों को न्याय दिलाने के लिए जाता हूं तो पुलिस मुझे रोक लेती है. हालांकि, उन्होंने कहा कि इसमें पुलिस का कोई दोष नहीं है, पुलिस सरकार के इशारों पर काम रही है.

World Famous Rivers: जिंदगी क्या है एक सफर… इन 7 नदियों के किनारे बसती है दुनिया, सैर करके आ जाएगा मजा…

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Religious Tourism: कई नदियां सिर्फ पानी का बहाव नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, इतिहास और रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं. चलिए आपको उनको बारे में बताते हैं.

Most Culturally Important Rivers In The World:

दुनिया की कई बड़ी सभ्यताएं नदियों के किनारे बसकर विकसित हुईं. धर्म, व्यापार, खानपान, संस्कृति और साम्राज्यों की नींव इन नदियों ने ही रखी. आज भी कई नदियां सिर्फ पानी का बहाव नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, इतिहास और रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं. इन नदियों के किनारे होने वाले त्योहार, पूजा-पाठ, संगीत, खानपान और परंपराएं यात्रियों को किसी किताब से ज्यादा गहराई से संस्कृति को समझने का मौका देती हैं. यही वजह है कि दुनिया की ये मशहूर नदियां आज भी ट्रैवलर्स को अपनी तरफ खींचती हैं.

गंगा नदी

गंगा नदी की कहानी और महत्व

गंगा नदी को भारत की आध्यात्मिक जीवनरेखा कहा जाता है. हिंदू धर्म में इसका बेहद खास महत्व है और उत्तर भारत के लाखों लोगों की जिंदगी इससे जुड़ी हुई है. लोग यहां पवित्र स्नान करने, अंतिम संस्कार करने और शाम की आरती देखने दूर-दूर से आते हैं. वाराणसी, हरिद्वार और ऋषिकेश गंगा को अलग-अलग रूप में महसूस करवाते हैं. वाराणसी अपनी सदियों पुरानी गलियों और घाटों के लिए मशहूर है, हरिद्वार धार्मिक अनुष्ठानों का केंद्र माना जाता है, जबकि ऋषिकेश योग, अध्यात्म और एडवेंचर टूरिज्म का अनोखा मेल दिखाता है.

नील नदी

नील नदी जलक्षेत्र का मानचित्र - व्हाइटक्लाउड्स

नील नदी को प्राचीन मिस्र सभ्यता की रीढ़ माना जाता है. इसको लेकर कहा जाता है कि अगर नील नदी ना होती तो मिस्र जैसी महान सभ्यता शायद कभी विकसित ही नहीं हो पाती. हजारों सालों तक इस नदी ने खेती, व्यापार और परिवहन को सहारा दिया. आज भी नील नदी के किनारे मंदिर, मकबरे और ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं, जिन्हें देखने दुनियाभर से लोग पहुंचते हैं. यहां क्रूज यात्रा के दौरान इतिहास और वर्तमान दोनों एक साथ दिखाई देते हैं.

मेकॉन्ग नदी

मेकांग नदी, लाओस - टाइम्सट्रैवलमेकॉन्ग नदी दक्षिण-पूर्व एशिया की सांस्कृतिक धड़कन मानी जाती है. चीन, लाओस, थाईलैंड, कंबोडिया और वियतनाम से गुजरने वाली यह नदी अलग-अलग संस्कृतियों को जोड़ती है. कहीं शांत बौद्ध गांव दिखाई देते हैं तो कहीं तैरते बाजार और पानी पर बसे गांव. वियतनाम का डेल्टा इलाका धान के खेतों, नहरों और फलों के बागानों के लिए जाना जाता है. यह नदी आज भी लाखों लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बनी हुई है.

डेन्यूब नदी

Danube River: The Most International River In The World Flows Through 10  Countries | IFLScience

डेन्यूब नदी को यूरोप के साम्राज्यों की नदी कहा जाता है.  यह कई देशों से होकर गुजरती है और सदियों से संस्कृतियों को जोड़ने का काम करती रही है. वियना, बुडापेस्ट और बेलग्रेड जैसे शहर इसी नदी के किनारे विकसित हुए. यहां यात्रा करने पर हर शहर की भाषा, खाना और संस्कृति बदलती नजर आती है.

अमेजन नदी

अमेज़न नदी का वर्षावन: पेरू घूमने के लिए सबसे अच्छा देश क्यों है? | एक्वा  एक्सपेडिशन्स

अमेजन नदी दुनिया की सबसे विशाल नदी सिस्टम में से एक है. इसकी खासियत यह है कि यहां आज भी प्रकृति इंसानी निर्माण पर भारी पड़ती है. पेरू, ब्राजील और कोलंबिया के घने जंगलों से गुजरती यह नदी जंगली जीवन, गुलाबी डॉल्फिन, आदिवासी संस्कृतियों और दूर-दराज गांवों की झलक दिखाती है.

यांग्त्जी नदी

Yangtze River | Location, Map, Flood, & Facts | Britannica

यांग्त्जी नदी चीन की सबसे लंबी नदी है और इसे देश की तरक्की का प्रतीक माना जाता है. सदियों से यह व्यापार, खेती और उद्योग का आधार रही है. यहां पुराने नदी किनारे बसे शहरों के साथ आधुनिक इमारतें, विशाल पुल और बड़े जलविद्युत प्रोजेक्ट एक साथ दिखाई देते हैं.

मिसिसिपी नदी

Mississippi River Gorge | Friends of the Mississippi River

मिसिसिपी नदी अमेरिका की संगीत और प्रवास संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है. ब्लूज़ म्यूजिक, साहित्य और व्यापारिक इतिहास में इसका बड़ा योगदान माना जाता है. न्यू ऑरलियन्स जैसे शहर इस नदी की वजह से ही अपनी खास पहचान रखते हैं. यहां की यात्रा कई अलग-अलग अमेरिकी संस्कृतियों को एक साथ देखने जैसा अनुभव देती है.

गृह मंत्रालय को लेकर भड़काऊ टिप्पणी करने पर ममता बनर्जी की बढ़ी मुश्किल, एफआईआर दर्ज…

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शिकायत के अनुसार 2 जून को एक सभा में ममता बनर्जी ने बांग्लादेशी नागरिक उस्मान हादी की हत्या का जिक्र किया था और केंद्रीय गृह मंत्रालय और गृह मंत्री अमित शाह को फंसाने वाले बयान दिए थे.

गृह मंत्रालय को लेकर भड़काऊ बयान देने के मामले में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. गुरुवार (4 जून, 2026) को पुलिस ने बताया कि सिलीगुड़ी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एक वकील की शिकायत के आधार पर यह केस दर्ज किया गया है.

यह शिकायत 2 जून को कोलकाता में रानी राशमोनी रोड पर एक विरोध सभा के दौरान ममता बनर्जी की टिप्पणियों से संबंधित है, जिसमें उन्होंने बांग्लादेशी नागरिक उस्मान हादी की हत्या का जिक्र किया था और इसमें केंद्रीय गृह मंत्रालय और गृह मंत्री अमित शाह को फंसाने वाले बयान दिए थे.

वकील रिंकी सेन चटर्जी ने ममता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. उन्होंने आरोप लगाया कि उस्मान हादी की हत्या पिछले दिसंबर में बांग्लादेश में हुई थी. हादी के हत्यारे मेघालय की सीमा पार करके जनवरी में पश्चिम बंगाल आए थे और राज्य की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने उन दोनों को गिरफ्तार कर लिया था. ममता बनर्जी ने 2 जून को एक सभा को संबोधित करते हुए इस मुद्दे को उठाया और संकेत दिया कि भले ही हत्या किसी दूसरे देश में हुई हो, लेकिन उन्हें पता है कि इसमें कौन शामिल था. उन्होंने गृह मंत्रालय पर आरोप लगाया.

गृह मंत्रालय को लेकर भड़काऊ बयान देने के मामले में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. गुरुवार (4 जून, 2026) को पुलिस ने बताया कि सिलीगुड़ी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एक वकील की शिकायत के आधार पर यह केस दर्ज किया गया है.

यह शिकायत 2 जून को कोलकाता में रानी राशमोनी रोड पर एक विरोध सभा के दौरान ममता बनर्जी की टिप्पणियों से संबंधित है, जिसमें उन्होंने बांग्लादेशी नागरिक उस्मान हादी की हत्या का जिक्र किया था और इसमें केंद्रीय गृह मंत्रालय और गृह मंत्री अमित शाह को फंसाने वाले बयान दिए थे.

वकील रिंकी सेन चटर्जी ने ममता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. उन्होंने आरोप लगाया कि उस्मान हादी की हत्या पिछले दिसंबर में बांग्लादेश में हुई थी. हादी के हत्यारे मेघालय की सीमा पार करके जनवरी में पश्चिम बंगाल आए थे और राज्य की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने उन दोनों को गिरफ्तार कर लिया था. ममता बनर्जी ने 2 जून को एक सभा को संबोधित करते हुए इस मुद्दे को उठाया और संकेत दिया कि भले ही हत्या किसी दूसरे देश में हुई हो, लेकिन उन्हें पता है कि इसमें कौन शामिल था. उन्होंने गृह मंत्रालय पर आरोप लगाया.

रिंकी सेन ने कहा कि जब वह मुख्यमंत्री थीं, तो वह इस मामले को सीधे गृह मंत्रालय के साथ उठा सकती थीं. सेन की ओर से कहा गया कि लेकिन अब वह दावा कर रही हैं कि बांग्लादेश में हुई एक हत्या, गृह मंत्रालय के आदेश पर की गई एक सुनियोजित हत्या थी. इस तरह के आरोप लगाकर, वह भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव भड़का रही हैं और वैश्विक स्तर पर देश की छवि खराब कर रही हैं. उनकी टिप्पणियों ने बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है. सेन ने आगे कहा कि ममता बनर्जी ने सीएम पद पर रहते हुए देश की गोपनीयता बनाए रखने की शपथ ली थी, लेकिन पद छोड़ने के बाद उन्होंने कट्टरपंथी तत्वों को उकसाया.

ममता बनर्जी ने 2 जून को एक सभा के दौरान कहा कि एसटीएफ ने बांग्लादेश से एक आरोपी को गिरफ्तार किया, जिससे वहां एक बड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया. मैं दूसरे देशों की बात नहीं कर रही हूं, लेकिन मुद्दा यह है कि ऐसे लोग मेघालय के रास्ते बंगाल में प्रवेश करते हैं. यहां पहुंचने के बाद एसटीएफ उन्हें गिरफ्तार कर लेती है. खुद गृह मंत्री ने यह बात कही है. मैंने लंबे समय तक यह बात नहीं कही थी, लेकिन आज मैं यह बात कह रही हूं.

DRDO Recruitment 2026: डीआरडीओ में नौकरी करने का कैंडिडेट्स के पास शानदार मौका..

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DRDO Recruitment 2026: डीआरडीओ में नौकरी करने का कैंडिडेट्स के पास शानदार मौका है. कैंडिडेट्स आधिकारिक साइट पर जाकर 19 जून से पहले आवेदन कर सकते हैं.

DRDO Recruitment 2026: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) में साइंटिस्ट बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है. डीआरडीओ के रिक्रूटमेंट एंड असेसमेंट सेंटर (RAC) ने साइंटिस्ट C, साइंटिस्ट D और साइंटिस्ट E के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं. इस भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल 33 रिक्त पदों को भरा जाएगा. इच्छुक और योग्य उम्मीदवार ऑनलाइन तरीके से अप्लाई कर सकते हैं.

इस भर्ती अभियान के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 19 जून 2026 तक आवेदन जमा कर सकते हैं. आवेदन केवल ऑनलाइन मोड में स्वीकार किए जाएंगे. अभ्यर्थी डीआरडीओ आरएसी की आधिकारिक वेबसाइट rac.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.

कुल कितने पदों पर होगी भर्ती?

डीआरडीओ की इस भर्ती के माध्यम से कुल 33 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी. इनमें साइंटिस्ट E के 2 पद, साइंटिस्ट D के 11 पद और साइंटिस्ट C के 20 पद शामिल हैं. चयनित उम्मीदवारों को रक्षा अनुसंधान और तकनीकी विकास से जुड़े महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अवसर मिलेगा.

क्या है जरूरी शैक्षणिक योग्यता?

भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से इंजीनियरिंग या टेक्नोलॉजी की डिग्री होनी चाहिए. संबंधित पदों के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग सहित निर्धारित विषयों में प्रथम श्रेणी से डिग्री प्राप्त होना जरूरी है. इसके अलावा उम्मीदवारों के पास पद के अनुसार निर्धारित कार्य अनुभव भी होना चाहिए. अलग-अलग पदों के लिए अनुभव की अवधि और योग्यता अलग हो सकती है.

आयु सीमा

डीआरडीओ भर्ती में आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की अधिकतम आयु पद के अनुसार निर्धारित की गई है. साइंटिस्ट C, D और E पदों के लिए अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष से 45 वर्ष के बीच रखी गई है. वहीं आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी.

आवेदन शुल्क कितना देना होगा?

सामान्य (General), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क के रूप में 100 रुपये का भुगतान करना होगा. वहीं अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और दिव्यांग (PH) वर्ग के उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क से पूरी तरह छूट दी गई है.

ऐसे करें आवेदन

उम्मीदवार सबसे पहले डीआरडीओ आरएसी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं. इसके बाद नए उम्मीदवारों को रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करनी होगी. रजिस्ट्रेशन के बाद लॉगिन करके आवेदन पत्र में मांगी गई सभी जानकारी दर्ज करें. इसके बाद आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें और यदि शुल्क लागू हो तो उसका भुगतान करें. आवेदन पत्र जमा करने के बाद उसका प्रिंटआउट निकालकर सुरक्षित रख लें.