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क्या बीच में बंद कर सकते हैं अपनी LIC पॉलिसी? कितना होगा नुकसान…

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जीवन बीमा यानी लाइफ इंश्योरेंस हम सभी अपने और अपने परिवार के सुरक्षित भविष्य के लिए खरीदते हैं. लेकिन जीवन में कई बार ऐसे आर्थिक हालात पैदा हो जाते हैं, जब प्रीमियम का बोझ उठाना भारी पड़ने लगता है.

ऐसे में पॉलिसी को बीच में ही बंद करने या सरेंडर करने का ख्याल आना बहुत स्वाभाविक है. अगर आप भी अपनी एलआईसी पॉलिसी को मैच्योरिटी से पहले बंद करने का मन बना रहे हैं, तो रुकिए. पॉलिसी सरेंडर करने से न सिर्फ आपकी सुरक्षा खत्म होती है, बल्कि आपकी जमा पूंजी का एक बड़ा हिस्सा भी नुकसान में जा सकता है. इस पूरी प्रक्रिया और इसके नफा-नुकसान को समझना बेहद जरूरी है.

क्या होता है पॉलिसी सरेंडर

इंश्योरेंस की दुनिया में जब आप पॉलिसी को उसकी तय अवधि पूरी होने से पहले ही बंद कर देते हैं और बीमा कंपनी से अपना पैसा वापस मांगते हैं, तो इस प्रक्रिया को ‘पॉलिसी सरेंडर’ कहा जाता है. आम तौर पर लोगों को लगता है कि उन्होंने जितना पैसा प्रीमियम के तौर पर भरा है, वह उन्हें वापस मिल जाएगा. लेकिन हकीकत इससे अलग होती है. कंपनी आपको जो रकम वापस करती है, उसे ‘सरेंडर वैल्यू’ कहते हैं. यह रकम आपके द्वारा जमा किए गए कुल प्रीमियम से काफी कम हो सकती है. पॉलिसी के दस्तावेजों में सरेंडर चार्ज और अन्य कटौतियों का जिक्र होता है, जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं. नतीजा यह होता है कि बुरे वक्त में मदद के लिए जमा किया गया पैसा उम्मीद से कम वापस मिलता है.

सिर्फ पैसे ही नहीं, सुरक्षा कवच का भी होता है अंत

पॉलिसी सरेंडर करने का सबसे बड़ा और गंभीर नुकसान आर्थिक नहीं, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से होता है. जैसे ही आप पॉलिसी सरेंडर करते हैं, आपका जीवन बीमा कवरेज तत्काल प्रभाव से खत्म हो जाता है. इसका सीधा मतलब यह है कि अगर भविष्य में पॉलिसीधारक के साथ कोई अनहोनी हो जाती है, तो उसके परिवार या नॉमिनी को कोई भी डेथ बेनिफिट (मृत्यु दावा राशि) नहीं मिलेगा. जिस उद्देश्य से आपने सालों पहले यह पॉलिसी ली थी, वह उद्देश्य ही अधूरा रह जाता है. टर्म इंश्योरेंस के मामले में तो स्थिति और भी अलग होती है. टर्म प्लान में कोई सेविंग कंपोनेंट नहीं होता, इसलिए इसे बीच में छोड़ने पर न तो कवरेज बचता है और न ही कोई पैसा वापस मिलता है.

क्यों काटा जाता है आपकी जमा पूंजी का बड़ा हिस्सा?

अक्सर पॉलिसीधारक यह सवाल पूछते हैं कि उनका पूरा पैसा वापस क्यों नहीं मिलता? इसके पीछे बीमा का गणित काम करता है. पॉलिसी के शुरुआती वर्षों में आप जो प्रीमियम भरते हैं, उसका एक बड़ा हिस्सा एजेंट के कमीशन, पॉलिसी जारी करने के प्रशासनिक खर्च और अंडरराइटिंग चार्जेज में चला जाता है. यही कारण है कि अगर कोई व्यक्ति पॉलिसी शुरू होने के शुरुआती 2 से 4 सालों के भीतर उसे बंद करता है, तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ता है. एंडोमेंट या मनी-बैक पॉलिसी में मिलने वाले बोनस और लॉयल्टी एडिशन जैसे फायदे भी पॉलिसी सरेंडर करते ही शून्य हो जाते हैं. यानी लंबे समय तक निवेश बनाए रखने का जो लाभ आपको मिल सकता था, वह एक झटके में खत्म हो जाता है.

पॉलिसी बंद करने के बजाय क्या है बेहतर विकल्प?

अगर आप आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं और प्रीमियम भरना मुश्किल है, तो पॉलिसी बंद करना ही एकमात्र रास्ता नहीं है. आप अपनी पॉलिसी को ‘पेड-अप’ (Paid-Up) करवा सकते हैं. यह एक तरह का बीच का रास्ता है. इसमें आप आगे का प्रीमियम देना बंद कर देते हैं, लेकिन पॉलिसी बंद नहीं होती. वह कम बीमा राशि के साथ मैच्योरिटी तक चलती रहती है. हालांकि इसमें मिलने वाले फायदे कम हो जाते हैं, लेकिन आपका कवरेज पूरी तरह खत्म नहीं होता. इसके अलावा, बीमा नियामक IRDAI ने हाल ही में नियमों में कुछ बदलाव किए हैं, जिससे कुछ विशेष परिस्थितियों में पॉलिसीधारकों को पहले की तुलना में थोड़ी बेहतर सरेंडर वैल्यू मिल सकती है. इसलिए अंतिम फैसला लेने से पहले अपनी बीमा कंपनी से ‘सरेंडर वैल्यू’ और ‘पेड-अप वैल्यू’ दोनों का हिसाब जरूर मांग लें.

भारत-अमेरिका के बीच कब होगी ट्रेड डील? आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में सरकार ने बताया…

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संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि भारत के लिए मौजूदा वित्त वर्ष में सबसे अहम सकारात्मक कारक अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते का पूरा होना हो सकता है।

सर्वेक्षण के अनुसार, भारत-अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं के इस साल निष्कर्ष तक पहुंचने की संभावना है, जिससे वैश्विक व्यापार में व्याप्त अनिश्चितता कुछ हद तक कम होगी और निर्यात, निवेश व कारोबारी भरोसे को राहत मिलेगी। ऐसे समय में जब दुनिया व्यापार युद्धों और ऊंचे टैरिफ से जूझ रही है। यह समझौता भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना गया है। हाल ही में भारत ने न्यूजीलैंड, यूरोपीय संघ के साथ किया एफटीए किया है।

वैश्विक मोर्चे पर चुनौतीपूर्ण रहा ये साल

आर्थिक सर्वेक्षण बताता है कि चालू वित्त वर्ष 2026 वैश्विक मोर्चे पर भारत के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बढ़ती अनिश्चितता, दंडात्मक शुल्क और भू-राजनीतिक तनावों ने खासकर निर्यातक उद्योगों पर दबाव डाला। इससे मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र और कारोबारी माहौल को लेकर विश्वास पर उल्टा असर हुआ है। हालांकि सरकार ने इस संकट को सुधारों को आगे बढ़ाने के अवसर के रूप में इस्तेमाल किया। जीएसटी का युक्तिकरण, विनियमन सुधारों में तेजी और विभिन्न क्षेत्रों में अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाने जैसे कदम इसी दिशा में उठाए गए।

इन सुधारों के चलते अगले वित्त वर्ष को सर्वेक्षण ने “समायोजन का वर्ष” बताया है यानी जो नियम लागू किये हैं उसका असर दिखाई देगा। साथ ही यह संकेत है कि सरकार अभी तक जिन सुधारवादी फैसले किये हैं, उनको जमीन पर लागू करने की कोशिश रहोगी। इसमें कंपनियां और उपभोक्ता नई नीतियों के अनुरूप खुद को ढालेंगे और इसका सकारात्मक असर घरेलू मांग व निवेश पर दिखेगा। सर्वेक्षण यह भी स्वीकार करता है कि वैश्विक माहौल अब भी अनिश्चित बना हुआ है, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियाद पहले से ज्यादा मजबूत है।

वैश्विक परिदृश्य पर नजर डालें तो सर्वेक्षण का आकलन अपेक्षाकृत सतर्क है।

मध्यम अवधि में वैश्विक वृद्धि कमजोर रहने की आशंका जताई गई है।

महंगाई में कमी आने से कई देशों में मौद्रिक नीति नरम हो सकती है, जिससे फंड प्रवाह बढ़ेगा।

ज्यादा फंड मिलने से विकास को गति मिलेगी।

कुछ अलग किस्म के जोखिम बने हुए हैं। एआई आधारित तेज उत्पादकता वृद्धि अगर उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी, तो वित्तीय बाजारों में सुधार (करेक्शन) और व्यापक अस्थिरता का खतरा है। वहीं, व्यापार संघर्षों का लंबा खिंचना निवेश और वैश्विक विकास को और कमजोर कर सकता है।

इन वैश्विक जोखिमों का भारत पर असर फिलहाल सीमित और प्रबंधनीय बताया गया है। सर्वेक्षण के अनुसार, यह तत्काल किसी बड़े मैक्रोइकॉनॉमिक संकट के बजाय बाहरी अनिश्चितताओं के रूप में सामने आ सकता है। प्रमुख व्यापारिक साझेदारों की धीमी वृद्धि, व्यापार बाधाएं और पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव समय-समय पर निर्यात और निवेश भावना को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में अमेरिका के साथ संभावित व्यापार समझौता भारत के लिए एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा गया है। दोनों देशों में कई महीनों से इस बारे में वार्ता हो रही है जिसके जल्द ही पूरा होने की संभावना है।

घरेलू मोर्चे पर सर्वेक्षण की तस्वीर काफी आश्वस्त करने वाली है। महंगाई ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर बनी हुई है, हालांकि आगे इसमें कुछ बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया गया है। बैंकों, कंपनियों और परिवारों की बैलेंस शीट मजबूत हुई हैं। सार्वजनिक पूंजीगत व्यय अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहा है, उपभोग मांग लचीली बनी हुई है और निजी निवेश के संकेत भी बेहतर हो रहे हैं। आने वाले समय में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआइ) का नया आधार वर्ष महंगाई के आकलन में कुछ बदलाव आ सकते हैं, जिस पर सतर्क नजर रखने की जरूरत बताई गई है।

आर्थिक सर्वेक्षण का आकलन है कि बीते वर्षों में किए गए संरचनात्मक और नीतिगत सुधारों के संयुक्त प्रभाव से भारत की मध्यम अवधि की विकास क्षमता करीब 7 प्रतिशत तक पहुंच गई है। घरेलू मांग और निवेश के मजबूत रहने तथा घरेलू इकोनॉमी की स्थिति की व जह से विकास को लेकर सकारात्मक असर बना हुआ है। इन्हीं आधारों पर वित्त वर्ष 2027 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान जताया गया है।

सर्वेक्षण यह संदेश देता है कि भारत को अपनी आर्थिक दिशा को आत्मविश्वास रखना चाहिए लेकिन साथ ही सतर्कता भी रहनी चाहिए। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद घरेलू मजबूती, सुधारों की निरंतरता और अमेरिका जैसे प्रमुख साझेदार के साथ संभावित व्यापार समझौते के सहारे भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर और संतुलित विकास की राह पर आगे बढ़ती दिख रही है।

खालिस्तानी तत्वों की गतिविधियों पर नजर: पंजाब में बढ़ती चुनौतियाँ…

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पंजाब में खालिस्तानी गतिविधियों का बढ़ता खतरा

पंजाब में खालिस्तानी तत्वों की गतिविधियाँ फिर से बढ़ रही हैं, जो आने वाले समय का संकेत हो सकता है। विदेश से भारत में हमलों की योजना बनाने के बाद, ये आतंकवादी समूह अब अपनी गतिविधियों को तेज करना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें एहसास हुआ है कि उनका आंदोलन पंजाब में ज्यादा प्रभाव नहीं डाल रहा है।

हाल ही में, 26 जनवरी को स्वर्ण मंदिर में खालिस्तानी झंडे का एक मामला सामने आया। एक खुफिया ब्यूरो के अधिकारी ने बताया कि ये प्रयास राज्य को उकसाने के लिए किए जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे घटनाक्रम पंजाब में बहुत छोटे पैमाने पर होंगे।

ये ऑपरेशन आर्थिक रूप से प्रभावी हैं और पकड़े जाने की संभावना कम होती है। खालिस्तानी पहले इन घटनाओं को एकल घटनाओं के रूप में पेश करने की कोशिश करेंगे। इसके बाद वे यह जानने की कोशिश करेंगे कि युवाओं की इस पर क्या प्रतिक्रिया है, और यदि यह कुछ समर्थन प्राप्त करता है, तो भर्ती अभियान शुरू किया जाएगा।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और पंजाब पुलिस ने इन तत्वों पर कड़ी कार्रवाई की है। यही कारण है कि खालिस्तानी आंदोलन पंजाब में अपनी जड़ें नहीं जमा पा रहा है। पुलिस अधिकारियों ने उन बुजुर्गों का भी आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने उस समय को देखा जब पंजाब में खालिस्तानी मुद्दे के कारण हिंसा का माहौल था। उन्होंने युवाओं को इस रास्ते से दूर रहने की सलाह दी है।

इसके अलावा, विदेश में सक्रिय खालिस्तानी आतंकवादी अपने कैडरों और ISI के दबाव में हैं। अक्सर यह सवाल उठता है कि पंजाब में उनके ऑपरेशन क्यों नहीं बढ़ रहे हैं।

एक खुफिया अधिकारी ने कहा कि कड़ी निगरानी के अलावा, ऑपरेशनों के न बढ़ने का एक कारण धन की कमी भी है। जबकि ISI ने ड्रग्स, हथियारों और गोला-बारूद की बिक्री के माध्यम से धन जुटाया है, पैसे मानवाधिकारों के नाम पर कानूनी सहायता के जरिए भी इकट्ठा किए जाते हैं।

अधिकारी ने बताया कि इस आंदोलन में शामिल कई लोग भ्रष्ट हैं और उन्होंने पैसे को अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल किया है। उदाहरण के लिए, गुरपतवंत सिंह पन्नुन, जो ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ के प्रमुख हैं, केवल ऑनलाइन धमकियाँ देते हैं और वास्तव में एक भव्य जीवन जीते हैं।

इन सभी कारणों से खालिस्तानी आंदोलन पंजाब में सफल नहीं हो पा रहा है। हालांकि, खुफिया एजेंसियों का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियों को इस नरम दबाव के प्रति सतर्क रहना चाहिए।

एक अधिकारी ने कहा कि इन घटनाओं को केवल एकल घटनाओं या मामूली वंदलिज्म के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए क्योंकि इन तत्वों की गतिविधियों के बारे में कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी है।

खालिस्तानी जो वर्षों से विदेश में फल-फूल रहे थे, अब दबाव में हैं। भारत ने कनाडा और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों को इन तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मनाने में सफलता पाई है।

हालांकि, वहां की एजेंसियाँ इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही थीं, लेकिन सरकार की नीतियाँ नरम थीं। भारत ने उन्हें यह समझाने में सफलता पाई कि खालिस्तानी अपनी स्वतंत्रता की बातों का उपयोग अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कर रहे हैं।

अब, धन संग्रह में कमी और विदेश से आ रही नकारात्मकता के कारण, पंजाब में फिर से दबाव बनाया जाएगा। भारतीय सुरक्षा अधिकारी इस समस्या का सामना करने में सक्षम हैं। हालांकि, इस नरम दबाव को रोकना आवश्यक है, क्योंकि यदि यह युवाओं में लोकप्रिय हो जाता है, तो यह एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।

Gold-Silver Rate Today: सोने और चांदी के रेट ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, जानिए आज कहां पहुंची कीमत…

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वायदा कारोबार में चांदी की कीमत गुरुवार (29 जनवरी 2026) को चार लाख रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गई, जबकि सोने का भाव 1.8 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।

निवेशकों की मजबूत मांग तेजी की प्रमुख वजह रही।

एमसीएक्स पर चांदी में जोरदार उछाल

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर चांदी के मार्च में आपूर्ति वाले अनुबंधों का वायदा भाव 22,090 रुपये या 5.73 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,07,456 रुपये प्रति किलोग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।

सोने के वायदा भाव ने भी तोड़ा रिकॉर्ड

सोने के वायदा भाव में भी तेजी रही। एमसीएक्स पर फरवरी में आपूर्ति वाले अनुबंधों की कीमत 14,586 रुपये या 8.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1,80,501 रुपये प्रति 10 ग्राम के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना पहली बार इस स्तर के पार

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स बाजार पर सोने के वायदा भाव ने पहली बार 5,600 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस का आंकड़ा पार कर दिया। अप्रैल में आपूर्ति वाले सोने का भाव 286.6 डॉलर या 5.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 5,626.8 डॉलर प्रति औंस के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

चांदी ने ग्लोबल मार्केट में भी दिखाई मजबूती

कॉमेक्स बाजार में चांदी के वायदा भाव में भी तेजी रही और यह 119.51 डॉलर प्रति औंस के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

चांदी को क्यों मिल रहा ज्यादा सपोर्ट

विश्लेषकों का कहना है कि चांदी की औद्योगिक मांग में तेजी और कमजोर अमेरिकी डॉलर ने चांदी को और अधिक समर्थन दिया जो हाल के सत्रों में सोने से बेहतर प्रदर्शन कर रही है।

सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग से सोने में तेजी बरकरार

उन्होंने कहा कि आर्थिक अनिश्चितताओं और बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच व्यापारियों द्वारा लगातार सुरक्षित निवेश के रूप में की जा रही खरीदारी से सोने की कीमतों में तेजी जारी रही।

Weather Update: मौसम फिर लेगा करवट, दिल्ली, यूपी, बिहार और उत्तराखंड समेत इन राज्यों के लिए IMD का अलर्ट…

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देश के कई हिस्सों में ठंड का असर थोड़ा कम होने के बाद अब मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 31 जनवरी से उत्तर भारत और पहाड़ी राज्यों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना जताई है।

मौसम विभाग के मुताबिक, इस बदलाव के चलते सुबह और रात के तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आ सकती है, जिससे ठंड और गलन फिर से बढ़ने के आसार हैं।

राजस्थान से लेकर पहाड़ों तक बारिश-बर्फबारी की चेतावनी

मौसम विभाग के अनुसार, राजस्थान में 31 जनवरी और 1 फरवरी को कुछ स्थानों पर हल्की बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना है। वहीं हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 1 फरवरी को कई इलाकों में भारी बारिश और बर्फबारी का अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जिससे ठंड का असर और बढ़ेगा।

उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा में शीतलहर का खतरा

उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा के लिए मौसम विभाग ने शीतलहर की चेतावनी जारी की है। इन राज्यों में तापमान सामान्य से नीचे रह सकता है और सुबह-शाम ठिठुरन महसूस की जाएगी। खासकर खुले इलाकों और खेतों में काम करने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

दिल्ली में शीतलहर और हल्की बूंदाबांदी के आसार

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गुरुवार (29 जनवरी) की सुबह शीतलहर का असर देखने को मिला है। मौसम विभाग के मुताबिक, शीतलहर के दौरान 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवाएं चलेंगी। शुक्रवार को दिल्ली में आसमान में बादल छाए रह सकते हैं और हल्की बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है। राजधानी में अधिकतम तापमान करीब 19 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।

यूपी में पश्चिमी विक्षोभ का असर, कोहरा और गलन बरकरार

उत्तर प्रदेश में इस समय पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) का प्रभाव बना हुआ है। 28 जनवरी को प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश हुई, जिसके बाद पछुआ हवाओं के चलते गलन बढ़ गई। मौसम विभाग के अनुसार, आज भी इसका असर महसूस किया जाएगा। सुबह और रात के समय कई जिलों में घना कोहरा छा सकता है।

मौसम विभाग ने बताया है कि प्रदेश के कुछ इलाकों में शीतलहर जैसे हालात बन सकते हैं, क्योंकि तापमान सामान्य से नीचे बना रहेगा। मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश में हल्की धूप के बावजूद ठंड बनी रह सकती है, जबकि रात में तापमान और गिर सकता है। न्यूनतम तापमान 6 से 9 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है।

बिहार में घना कोहरा, तापमान में गिरावट

बिहार की बात करें तो मौसम विभाग, पटना के अनुसार, आज राज्य के 5 से ज्यादा जिलों में घना कोहरा छाया रह सकता है। जिन जिलों में कोहरे की चेतावनी जारी की गई है, उनमें पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सारण, सिवान और गोपालगंज शामिल हैं। हालांकि इस सप्ताह बिहार में बारिश की कोई संभावना नहीं है, लेकिन तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जा सकती है।

सतर्क रहने की सलाह

मौसम विभाग ने लोगों को बदलते मौसम के मद्देनजर सतर्क रहने की सलाह दी है। खासकर सुबह और रात के समय यात्रा करने वाले लोगों को कोहरे और ठंडी हवाओं से सावधान रहने को कहा गया है।

50 दिनों का औसत जादुई तरीके से 125 दिन कैसे हो जाएगा? रोजगार गारंटी पर चिदंबरम का मोदी सरकार से सवाल…

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कांग्रेस नेता और पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम ने संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन के बाद नरेन्द्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र द्वारा तैयार किया गया भाषण नीरस और खोखले वादों से भरा था।

पी चिदंबरम ने गुरुवार को मोदी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि 125 दिन क्यों, आप तो आप साल में 365 दिन की गारंटी भी दे सकते हैं। उन्होंने मोदी सरकार के वादे को खोखला वादा बताया।

मनरेगा को लेकर संसद में विरोध, जयराम रमेश बोले- बहाली के लिए लोकतांत्रिक तरीकों का इस्तेमाल करेगा विपक्ष

गलत, प्रेसिडेंट मैडम!

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘प्रेसिडेंट द्रौपदी मुर्मू ने अपने भाषण में कहा कि “विकसित भारत-ग्रामीण विकास कानून लागू हो गया है। इस सुधार से गांवों में 125 दिन के रोजगार की गारंटी होगी।” गलत, प्रेसिडेंट मैडम!’

कांग्रेस नेता ने बताया कि क्यों हाल के सालों में एक परिवार को सिर्फ 50 दिन ही रोजगार दिए गए। उन्होंने कहा, ‘हाल के सालों में मनरेगा के तहत एक परिवार को मिलने वाले रोजगार के दिनों की औसत संख्या 50 दिन थी। मांग की कमी की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए कि पर्याप्त फंड नहीं दिए गए थे।’

राष्ट्रपति का अभिभाषण नीरस और खोखले वादों से भरा था: कांग्रेस

50 दिनों का औसत जादुई तरीके से 125 दिन कैसे हो जाएगा?

पी चिंदबरम ने सरकार से सवाल किया, ’50 दिनों का औसत जादुई तरीके से 125 दिन कैसे हो जाएगा? क्या सरकार 2024-25 और 2025-26 में दिए गए पैसे का 2.5 गुना पैसा देगी?’

कांग्रेस नेता ने कहा कि ‘125 दिन’ कोई गारंटी नहीं है। यह एक भ्रम है। पी चिदंबरम ने मोदी सरकार पर तंज कसते हुए कहा, ‘125 दिनों पर क्यों रुकें? आप साल में 365 दिन की गारंटी भी दे सकते हैं।’

उन्होंने इसे एक खोखला वादा बताया।

बारामती: पंचतत्व में विलीन हुए अजित पवार, राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार, दोनों बेटों ने दी मुखाग्नि…

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महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजीत पवार का अंतिम संस्कार गुरुवार को बारामती में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। पवार के अंतिम संस्कार में उनका पूरा परिवार मौजूद रहा।

पवार के दोनों बेटों ने उन्हें मुखाग्नि दी।

इससे पहले, अजित पवार की अंतिम यात्रा में भारी संख्या में लोग शामिल हुए। पवार की अंतिम यात्रा के दौरान सड़कों पर जाम की स्थिति देखने को मिली।

बता दें, कि गुरुवार सुबह अजित पवार के पार्थिव शरीर को काटेवाड़ी स्थित उनके आवास लाया गया था। बुधवार सुबह 8.45 बजे एक प्लेन क्रैश में पवार का निधन हुआ था। इस हादसे में पवार के सुरक्षाकर्मी, दो पायलट और एक महिला क्रू समेत 5 लोगों की मौत हुई। उनके निधन पर महाराष्ट्र में 3 दिन का राजकीय शोक रखा गया है। इस दौरान राज्यभर की सभी सरकारी इमारतों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा।

पुलिस ने प्लेन क्रैश के सिलसिले में एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (एडीआर) दर्ज की है। इसके अलावा, एयरक्राफ्ट दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने जांच अपने हाथ में ले ली है। वीटी-एसएसके रजिस्ट्रेशन नंबर वाला यह विमान वीएसआर वेंचर्स द्वारा ऑपरेट किया जा रहा था।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा दी गई पूरी जानकारी के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त विमान लीयरजेट 45 था जिसका रजिस्ट्रेशन वीटी-एसएसके था और इसे ऑपरेटर वीएसआर वेंचर्स मैनेज कर रहा था। फ्लाइट क्रू द्वारा पहले लैंडिंग के शुरुआती सीक्वेंस को रद्द करने का फैसला करने के बाद फ्लाइट को ठीक 8:43 बजे रनवे 11 पर उतरने की अनुमति दी गई थी।

दिल्ली में कई स्कूलों को मिली बम की धमकी, जांच में जुटी पुलिस…

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देश की राजधानी दिल्ली में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब कई नामी स्कूलों को बम धमाके की धमकी भरा ईमेल मिला। यह ईमेल तड़के करीब 1 बजकर 42 मिनट पर भेजा गया था, जिसमें दावा किया गया कि तीन से चार स्कूलों में विस्फोट किए जाएंगे।

धमकी में दिल्ली के साथ-साथ चंडीगढ़ स्थित कुछ स्कूलों का भी जिक्र किया गया था।

ईमेल मिलते ही पुलिस को दी गई सूचना

जैसे ही स्कूल प्रशासन को इस ईमेल की जानकारी मिली, उन्होंने बिना देर किए दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया। हालात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए संबंधित स्कूल परिसरों में तलाशी अभियान शुरू किया।

बम निरोधक दस्तों की तैनाती

सुरक्षा जांच के लिए K9 डॉग स्क्वॉड, बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल टीम और अन्य विशेष सुरक्षा इकाइयों को स्कूल परिसरों में भेजा गया। टीमों ने कक्षाओं, गलियारों, मैदानों और अन्य संवेदनशील स्थानों की बारीकी से जांच की, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सके।

इन स्कूलों को मिली धमकी

बताया जा रहा है कि जिन स्कूलों को धमकी भरा ईमेल मिला है, उनमें डीपीएस (DPS), मॉडर्न स्कूल और संस्कृति स्कूल जैसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान शामिल हैं। एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।

ईमेल भेजने वाले की तलाश में जुटी पुलिस

दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। साइबर सेल की मदद से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि धमकी भरा ईमेल कहां से और किसने भेजा। फिलहाल किसी भी तरह की संदिग्ध वस्तु बरामद होने की पुष्टि नहीं हुई है।

एक दिन पहले द्वारका कोर्ट को भी मिली थी धमकी

एक दिन पहले द्वारका कोर्ट को भी बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। हालांकि बाद में वह धमकी फर्जी निकली थी। इसी वजह से इस ताजा मामले को भी बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है।

आर्थिक सर्वेक्षण 2026 संसद में पेश, बजट सत्र में सरकार का आर्थिक रोडमैप आया सामने…

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2026 पेश किया। यह दस्तावेज बताता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और अमेरिका के टैरिफ (शुल्क) के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में बनी हुई है।

आर्थिक सर्वेक्षण में चालू वित्त वर्ष 2025-26 और आने वाले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की अनुमानित आर्थिक विकास दर (जीडीपी ग्रोथ) की जानकारी दी जाएगी। यह बजट से पहले आने वाला एक अहम दस्तावेज है, जो देश की सालभर की आर्थिक स्थिति का सार बताता है और आने वाले समय की संभावनाओं को दिखाता है।

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन बाद में आर्थिक सर्वेक्षण 2026 में बताए गए नीतिगत सुधारों के प्रमुख निष्कर्षों को समझाएंगे। इसमें रुपए की कीमत में गिरावट, दुनिया में बढ़ता राजनीतिक तनाव और ऐसे ही कई अहम मुद्दे शामिल होंगे।

इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश करने वाली देश की पहली महिला वित्त मंत्री बन गई हैं। उन्होंने इसे देश के संसदीय इतिहास का एक ऐतिहासिक और गर्व का क्षण बताया।

संसद में 2026 के बजट सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह उपलब्धि देश के संसदीय इतिहास में दर्ज हो गई है और यह सभी के लिए गर्व की बात है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार का 15वां केंद्रीय बजट पेश करेंगी। यह 2024 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के लगातार तीसरी बार सत्ता में आने के बाद दूसरा पूर्ण बजट होगा।

संसद का बजट सत्र कुल 65 दिनों में 30 बैठकों के साथ चलेगा। यह सत्र 13 फरवरी को स्थगित होगा और 9 मार्च से दोबारा शुरू होगा, ताकि संसदीय समितियां अलग-अलग मंत्रालयों के खर्च प्रस्तावों की जांच कर सकें।

संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू हुआ है और यह दो चरणों में आयोजित किया जाएगा। पहला चरण 13 फरवरी तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण 9 मार्च से 2 अप्रैल तक निर्धारित है।

राज्यसभा में उठा सोने-चांदी की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि का मुद्दा, कांग्रेस सांसद बोले- महिलाओं और विवाह…

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राज्यसभा में बृहस्पतिवार को कांगेस के एक सदस्य ने सोने-चांदी की कीमतों में हाल में बेतहाशा वृद्धि पर चिंता जताई और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की।

उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान कांग्रेस सदस्य नीरज डांगी ने यह मुद्दा उठाया और कहा कि देश में सोने एवं चांदी की बेकाबू कीमतों ने ग्रामीण भारत विशेषकर महिलाओं और विवाह वाले परिवारों की कमर तोड़ कर रख दी है।

उन्होंने कहा कि पिछले 13 महीनों में यानी दिसंबर 2024 से जनवरी 2026 के बीच भारत में चांदी की कीमतों में करीब 306 प्रतिशत और सोने की कीमतों में 111 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि भारत में सोना-चांदी नारी की सुरक्षा, आत्मसम्मान और पारिवारिक भविष्य से जुड़ा है और ऐसे देश में इनकी कीमतों में इस कदर बेलगाम वृद्धि सरकार की गंभीर नीतिगत और आर्थिक असफलता को दर्शाता है।

डांगी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवार शादी के मौके पर न्यूनतम आभूषण भी नहीं खरीद पा रहे हैं, कई मध्यमवर्गीय परिवारों ने विवाह को टाल दिया है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक ओर सरकार महिला सशक्तीकरण की बात कर रही है, दूसरी ओर उच्च आयात शुल्क, भारी जीएसटी, सट्टेबाजों और जमाखोरों पर लगाम नहीं लगाकर महिलाओं की बचत को लगातार मूल्यहीन बना रही है।

उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान नीतियों में आम महिलाओं को सजा मिल रही है वहीं जमाखोरों को संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने मांग की कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए सरकार तुरंत हस्तक्षेप करे और सट्टेबाजों एवं जमाखोरों के खिलाफ कार्रवाई करे।

देश में सोने और चांदी की कीमतें बेकाबू हो चुकी हैं। ग्रामीण भारत – विशेष रूप से महिलाओं और विवाह योग्य परिवारों की कमर टूट चुकी है।

पिछले 13 महीनों में चांदी की कीमतों में 306% और सोने की कीमतों में 111% की वृद्धि देखने को मिली है।

जिस देश में सोना-चांदी नारी की सुरक्षा,…

शून्यकाल में ही सीपीएम सदस्य वी शिवदासन ने देश में शिक्षा क्षेत्र को बढ़ावा देने की मांग की वहीं उनकी ही पार्टी के जॉन ब्रिटास ने हवाई किरायों को नियंत्रित करने तथा हवाई यात्रा को सुरक्षित बनाने की मांग की। उन्होंने हवाई यात्रियों के हितों की रक्षा किए जाने की मांग करते हुए कहा कि देश के हवाई यातायात क्षेत्र में कुछ कंपनियों का एकाधिकार है।