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टी20 विश्व कप: टीम इंडिया के चैंपियन बनने के सफर में ‘टर्निंग प्वाइंट’ साबित हुआ ये मैच…

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भारतीय क्रिकेट टीम ने टी20 विश्व कप 2026 का खिताब जीत लिया है। टीम इंडिया ने लगातार दूसरी बार और कुल तीसरी बार खिताब जीतकर इतिहास रचा है। भारतीय टीम के लिए विश्व चैंपियन बनने का सफर आसान नहीं रहा, लेकिन पहले मैच से लेकर फाइनल के बीच में एक ऐसा मैच आया जिसने टीम इंडिया को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर किया।

बदली रणनीति के साथ टीम और मजबूत और चैंपियन बनकर उभरी।

भारतीय टीम ग्रुप स्टेज में यूएसए, पाकिस्तान, नामीबिया और नीदरलैंड के खिलाफ जीती और ग्रुप में पहले स्थान पर रहते हुए सुपर-8 के लिए क्वालीफाई किया। टीम इंडिया सुपर-8 में आ तो गई थी, लेकिन टीम में कई कमियां थीं, जिसपर प्रबंधन का ध्यान नहीं जा रहा था। प्लेइंग इलेवन में बाएं हाथ के बल्लेबाजों की अधिकता, अभिषेक का शीर्ष में फ्लॉप रहना। मीडिल ऑर्डर में सूर्या और तिलक का धीमा खेलना, निचले क्रम में रिंकू की लगातार असफलता भारतीय टीम की बड़ी कमी के रूप में उभरी थी। अक्षर पटेल पर वाशिंगटन सुंदर को प्राथमिकता देना भी एक गलत निर्णय साबित हो रहा था।

इन कमियों के साथ ही सुपर-8 के पहले मैच में भारतीय टीम दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उतरी थी। दक्षिण अफ्रीका शानदार फॉर्म में थी, और भारत को 76 रन से हार का सामना करना पड़ा। इस हार ने टीम इंडिया को अपनी कमियों को दूर करने की रणनीति बनाने के लिए मजबूर किया। भारतीय टीम ने रणनीति बनाई और प्लेइंग इलेवन में बदलाव किया। टीम में संजू सैमसन की वापसी हुई और वह अभिषेक शर्मा के साथ पारी की शुरुआत करने लगे। इससे दाएं और बाएं हाथ का मजबूत कंबिनेशन बना। तीसरे नंबर पर ईशान किशन आने लगे। रिंकू सिंह को बाहर कर तिलक वर्मा को नीचे भेजा गया। सुंदर की जगह अक्षर लौट आए।

सैमसन की वापसी ओपनिंग मजबूत हुई। सैमसन 321 रन बनाकर प्लेयर ऑफ द सीरीज रहे। तिलक नीचे बल्लेबाजी करते हुए तेज खेलने लगे। अक्षर ने सेमीफाइनल और फाइनल में अपनी गेंदबाजी और फील्डिंग से कमाल किया। बदली रणनीति के साथ उतरी भारतीय टीम पहले ज्यादा मजबूत नजर आई और फिर दक्षिण अफ्रीका वाले मैच के बाद बिना कोई मैच गंवाए विश्व कप जीत लिया।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव इस बार कई चरणों के बजाय केवल एक चरण में आयोजित किए जाएं…

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माकपा की पश्चिम बंगाल इकाई के तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार सुबह चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात की।

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य और राज्य सचिव मोहम्मद सलीम कर रहे थे। यह बैठक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में हुई, जो पश्चिम बंगाल के दो दिवसीय दौरे पर हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त पश्चिम बंगाल में ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के रूप में पहचाने गए मतदाताओं के दस्तावेजों से जुड़े मामलों की न्यायिक प्रक्रिया की समीक्षा करने और विधानसभा चुनावों की तैयारियों का जायजा लेने आए हैं। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि उनकी पार्टी ने इस बार एक चरण में मतदान कराने की मांग की है या अधिकतम दो चरणों में लेकिन इससे अधिक चरणों में मतदान नहीं कराया जाए।

उन्होंने कहा, “हमने आयोग से पूछा कि उसने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) इतने अव्यवस्थित तरीके से करके आम मतदाताओं को अपना दुश्मन क्यों बना लिया। इस पुनरीक्षण प्रक्रिया के जरिए आयोग ने आम लोगों के खिलाफ जैसे युद्ध छेड़ दिया हो। चुनाव आयोग ‘टॉर्चर कमीशन’ क्यों बन गया है? एक संवैधानिक संस्था के रूप में ईसीआई को अपनी गरिमा बनाए रखनी चाहिए।”

सोमवार सुबह कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई के प्रतिनिधिमंडल ने भी चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात की।

बैठक के बाद कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा कि उनकी पार्टी ने चुनाव कितने चरणों में होंगे, इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है लेकिन आयोग से स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की मांग की है।

उन्होंने कहा, “चुनाव एक चरण, दो चरण या तीन चरण में हो, यह हमारा मुद्दा नहीं है। हमने आयोग से कहा है कि इस बार चुनाव पूरी तरह सुरक्षा व्यवस्था के तहत कराए जाएं, ताकि हिंसा, धांधली और मतदाताओं तथा विपक्षी दलों के एजेंटों को डराने-धमकाने की पुरानी घटनाएं दोहराई न जाएं। उन्होंने कहा कि अगर मतदान एक ही चरण में हो तो हमें खुशी होगी लेकिन हमारी प्राथमिकता सुरक्षा है और हमने यह बात चुनाव आयोग को स्पष्ट कर दी है।”

पीएम मोदी की पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर करीब से नजर, भारतीयों की सुरक्षा मुख्य चिंता…

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गल्फ देशों में भारी संख्या में भारतीय नागरिक रहते हैं। ताजा हालात को देखते हुए भारतीय नागरिकों को सुरक्षित भारत लाने का ऑपरेशन तेजी से जारी है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं, इसलिए यह लड़ाई भारत के लिए खास चिंता की बात है।

राज्यसभा में सत्र शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के दौरान भारतीय नागरिकों की मौत के मुद्दे को उठाने की कोशिश की, जिस पर विरोध शुरू हो गया। इसके बाद अध्यक्ष सी.पी. राधाकृष्णन ने खड़गे से अपने हस्तक्षेप को समाप्त करने का आग्रह किया और विदेश मंत्री को सदन में अपना बयान देने के लिए आमंत्रित किया। सदन में जोरदार नारेबाजी के बीच विदेश मंत्री जयशंकर ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद शुरू हुआ, जिसके परिणामस्वरूप व्यापक विनाश और इस्लामी शासन के कई वरिष्ठ नेताओं की मौत हुई और तब से हालात और खराब हो गए हैं।

उन्होंने बताया कि यह तनाव कई देशों में फैल गया है। सरकार ने 28 फरवरी को एक बयान जारी कर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की थी और सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव बढ़ने से बचने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया था। हमारा मानना ​​था और तनाव कम करने और अंदरूनी मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी अपनाई जानी चाहिए। यह भी जरूरी है कि इस क्षेत्र के सभी देशों की संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता का सम्मान किया जाए।

डॉ. जयशंकर ने बताया, “हालात की गंभीरता को देखते हुए 1 मार्च को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट सुरक्षा समिति (सीसीएस) की मीटिंग हुई। इसमें ईरान में हुए एयरस्ट्राइक और उसके बाद कई खाड़ी देशों में हुए हमलों के बारे में जानकारी दी गई। सीसीएस इस इलाके में भारतीय समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंतित थी। इसने इलाके की सुरक्षा और आर्थिक और कमर्शियल गतिविधियों पर पड़ने वाले असर पर भी ध्यान दिया।”

उन्होंने कहा कि कमेटी को इस इलाके में आने-जाने वाले भारतीय यात्रियों और इन देशों में तय परीक्षाओं में बैठने वाले छात्रों को होने वाली मुश्किलों के बारे में बताया गया। इसने सभी संबंधित मंत्रालयों और विभागों को इन समस्याओं से निपटने के लिए सही कदम उठाने का निर्देश दिया। प्रधानमंत्री नए डेवलपमेंट पर करीब से नजर रख रहे हैं और संबंधित मंत्रालय असरदार जवाब देने के लिए सहयोग कर रहे हैं।

भारत के विदेश मंत्री ने कहा, “लड़ाई लगातार बढ़ रही है और इलाके में सुरक्षा की हालत काफी खराब हो गई है। हमने देखा है कि असल में, लड़ाई दूसरे देशों में भी फैल गई है और तबाही और मौतें बढ़ रही हैं। पूरे इलाके में सामान्य जीवन और आर्थिक गतिविधियों पर साफ असर पड़ा है और कुछ मामलों में तो रुक भी गई हैं।

इसलिए, हमने 3 मार्च को बातचीत और डिप्लोमेसी की अपनी अपील दोहराई और लड़ाई को जल्द खत्म करने की बात कही। मुझे यकीन है कि पूरा सदन भी जानमाल के नुकसान पर दुख जताने में मेरे साथ है।”

भारतीय टीम की T20 वर्ल्ड कप जीत के बाद पीएम मोदी का मोटिवेशनल संदेश वायरल, जानें कौन सा है वो सफलता का मंत्र…

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भारत ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। अहमदाबाद में T20 क्रिकेट वर्ल्ड कप के फाइनल में भारत ने न्यूज़ीलैंड को हराकर तीसरी बार T20 वर्ल्ड कप जीत लिया। PM नरेंद्र मोदी ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक मोटिवेशनल कोट पोस्ट किया, जो वायरल हो रहा है।

अभिप्साम स्वात्मानो रक्षऽविरतं सुस्थिरं तया।
यत्नामातिष्ठ धैर्येन ततः सिद्धिर्भवेद ध्रुवम्।

इसका मतलब है: इंसान को अपने जीवन और आत्मा की रक्षा की इच्छा रखते हुए लगातार और पक्के इरादे से कोशिश करनी चाहिए। अगर वह सब्र के साथ लगातार कोशिश करता है, तो उसे सफलता ज़रूर मिलेगी। PM ने लिखा कि यह जीत हमें यह भी सिखाती है कि सही दिशा में कड़ी मेहनत से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

कड़ी मेहनत से सफलता मिलती है

यह श्लोक हमें कभी हार न मानने की प्रेरणा देता है, चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों। अक्सर, मैच के शुरुआती ओवर खराब जाते हैं, विकेट जल्दी गिर जाते हैं, या दूसरी टीम मज़बूत स्थिति में आ जाती है, लेकिन जो खिलाड़ी सब्र रखते हैं और अपनी कोशिशों में लगे रहते हैं, वही मैच का रुख बदल देते हैं। ज़िंदगी में कोई भी बड़ी कामयाबी अचानक नहीं मिलती; यह लगातार मेहनत, सब्र और पक्के इरादे की ताकत है। मुश्किलें हर रास्ते में आती हैं, लेकिन जो लोग हिम्मत नहीं हारते, वही आखिर में कामयाबी की ऊंचाइयों तक पहुंचते हैं। सफलता का रास्ता सब्र, अनुशासन और लगातार कोशिश से बनता है। अगर कोई इंसान हार मानने के बजाय शांत मन से लगे रहे, तो नामुमकिन लगने वाले लक्ष्य भी मुमकिन हो जाते हैं। ज़िंदगी में लक्ष्य तय करें, सब्र रखें और कोशिश करते रहें – क्योंकि सच्ची कामयाबी उन्हीं को मिलती है जो कभी हार नहीं मानते।

उद्यम पोर्टल पर फरवरी 2026 तक पंजीकृत हुए 3.07 करोड़ से अधिक महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्योग…

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उद्यम पोर्टल पर फरवरी 2026 तक 3.07 करोड़ से अधिक महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्योग पंजीकृत हैं। यह जानकारी सरकार की ओर से सोमवार को संसद में दी गई।

राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न का उत्तर देते हुए, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि सरकार महिला उद्यमियों को समर्थन देने और लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए कई योजनाएं लागू कर रही है।

करंदलाजे ने कहा, “उद्यम पंजीकरण पोर्टल (यूआरपी) और उद्यम सहायता प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी, 2026 तक पंजीकृत महिला नेतृत्व वाले उद्यमों की कुल संख्या 3,07,42,621 है।” प्रमुख पहलों में से एक सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी योजना है, जिसे सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी ट्रस्ट के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है। इस योजना के अंतर्गत, बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा दिए गए ऋणों की गारंटी बिना कुछ गिरवी रखे या तृतीय-पक्ष गारंटी के दी जा सकती है।

महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को अन्य उद्यमों के 75 प्रतिशत की तुलना में 90 प्रतिशत तक की बढ़ी हुई ऋण गारंटी कवरेज प्राप्त होती है। उन्हें गारंटी शुल्क में 10 प्रतिशत की छूट भी मिलती है। सरकार प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के माध्यम से कौशल और उद्यमिता सहायता भी प्रदान कर रही है। यह कार्यक्रम कारीगरों और शिल्पकारों को छात्रवृत्ति सहायता के साथ-साथ बुनियादी और उन्नत कौशल प्रशिक्षण प्रदान करता है। प्रशिक्षण में उद्यमिता, वित्तीय साक्षरता और डिजिटल साक्षरता पर पाठ शामिल हैं।

लाभार्थियों को उनके व्यवसाय से संबंधित आधुनिक उपकरणों और औजारों के उपयोग के बारे में भी मार्गदर्शन दिया जाता है। यह योजना कारीगरों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर अपने उत्पादों को सूचीबद्ध करने और ब्रांडिंग एवं प्रचार में सुधार करने में सहायता करके विपणन को भी बढ़ावा देती है। पारंपरिक उद्योगों के पुनरुद्धार हेतु निधि योजना (एसएफयूआरटीआई) के तहत क्षमता निर्माण और डिजिटल मार्केटिंग प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाता है। यह क्लस्टर-आधारित कार्यक्रम मूल्य श्रृंखला में कौशल विकास, जागरूकता सत्र और तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करता है। यह उत्पाद डिजाइन एवं विकास, एक्सपोजर विजिट, सेमिनार और कार्यशालाओं में भागीदारी तथा प्रौद्योगिकी उन्नयन जैसी गतिविधियों को भी समर्थन देता है।

कोच्चि बंदरगाह पर ईरानी युद्धपोत के डॉकिंग के लिए ईरान ने भारत का किया धन्यवाद…

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पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच भारत ने ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस लवन को कोच्चि बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमति दी। इसे लेकर ईरान ने भारत के प्रति आभार व्यक्त किया है।

ईरान ने भारत के इस कदम को “मानवीय” बताया। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान इसकी जानकारी दी।

पश्चिम एशिया संघर्ष में बदलते हालात पर राज्यसभा में जयशंकर ने कहा कि मौजूदा हालात में ईरान के साथ उच्च स्तरीय संपर्क बनाए रखना मुश्किल रहा है, हालांकि मौजूद चैनलों के जरिए डिप्लोमैटिक बातचीत जारी है।

विदेश मंत्री ने कहा, “हालांकि कोशिशें की गई हैं, लेकिन इस समय नेतृत्व के स्तर पर ईरान के साथ संपर्क करना साफ तौर पर मुश्किल है। हालांकि, मैंने 20 फरवरी, 2026 और 5 मार्च, 2026 को विदेश मंत्री अराघची से बात की है। हम आने वाले दिनों में ये उच्च स्तरीय बातचीत जारी रखेंगे।”

इस दौरान उन्होंने कोच्चि में अभी डॉक किए गए ईरानी नेवी के जहाज का भी जिक्र किया। विदेश मंत्री ने उन हालातों के बारे में बताया जिनके तहत भारत ने जहाज को भारतीय पोर्ट में आने की इजाजत दी थी।

बता दें, यह तब हुआ जब श्रीलंका के पास ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना के डूबने की घटना घटी। लगभग उसी समय, एक और ईरानी नौसेना का जहाज इस इलाके में काम करते समय तकनीकी दिक्कतों का सामना करने के बाद मदद मांगने के लिए भारत से संपर्क कर चुका था।

ईएएम जयशंकर ने कहा, “ईरानी पक्ष ने 20 फरवरी, 2026 को इस इलाके के तीन जहाजों को हमारे पोर्ट पर डॉक करने की इजाजत मांगी थी। यह 1 मार्च, 2026 को मिल गई। आईआरआईएस लवन असल में 4 मार्च, 2026 को कोच्चि में डॉक हुआ। क्रू अभी भारतीय नौसेना फैसिलिटी में है। हमारा मानना ​​है कि यह करना सही है। ईरानी विदेश मंत्री ने इस इंसानियत भरे काम के लिए हमारे देश का शुक्रिया अदा किया है।”

विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया में चल रही अस्थिरता के बीच भारत की एनर्जी सिक्योरिटी से जुड़ी चिंताओं पर भी बात की और कहा कि हालात को मैनेज करते हुए, सरकार ने भारतीय कंज्यूमर्स के हितों को “सबसे जरूरी प्राथमिकता” के तौर पर रखा है।

उन्होंने कहा, “सबसे पहले, भारत शांति के पक्ष में है और बातचीत और डिप्लोमेसी पर लौटने की अपील करता है। हम तनाव कम करने, संयम बरतने और आम लोगों की सुरक्षा पक्का करने की वकालत करते हैं। दूसरी बात, इस इलाके में भारतीय समुदाय की भलाई और सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। हम इस दिशा में इलाके की सरकारों के साथ काम करते रहेंगे।”

राज्यसभा में अपने संबोधन के आखिर में ईएएम जयशंकर ने कहा, “आखिर में, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार सहित हमारा राष्ट्रीय हित हमेशा सबसे ऊपर रहेगा।”

बढ़ती कीमतों के बीच आपातकालीन तेल भंडार जारी करने पर चर्चा करेंगे जी-7 देशों के मंत्री…

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जी-7 देशों के वित्त मंत्री सोमवार को एक बैठक में आपातकालीन पेट्रोलियम भंडार की समन्वित रिहाई पर चर्चा करेंगे क्योंकि गल्फ क्षेत्र में संघर्ष के बाद तेल की कीमतों में तेजी आई है।

एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त मंत्रियों से उम्मीद की जा रही है कि वे सोमवार को आपातकालीन चर्चा करेंगे। इस बैठक में इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल भी शामिल होंगे।

बैठक का मुख्य विषय ईरान से जुड़े युद्ध का वैश्विक ऊर्जा बाजार पर प्रभाव होगा। अब तक अमेरिका समेत तीन जी-7 देशों ने रणनीतिक भंडार से तेल जारी करने के प्रस्ताव का समर्थन किया है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कुछ अमेरिकी नीति निर्माताओं का मानना है कि लगभग 300-400 मिलियन बैरल का समन्वित तेल जारी करना उपयुक्त हो सकता है।

फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक यह मात्रा आईईए सदस्य देशों के पास मौजूदा 1.2 बिलियन बैरल के रणनीतिक भंडार का लगभग 25-30 प्रतिशत होगी।

आपातकालीन पेट्रोलियम भंडार 1974 में आईईए के गठन के बाद स्थापित किए गए थे, जब अरब तेल इंबार्गो के कारण वैश्विक ईंधन की कमी और कीमतों में तेज़ी आई थी।

आईईए के सदस्य देशों को यह रणनीतिक भंडार बनाए रखना अनिवार्य है जिससे तेल आपूर्ति में गंभीर व्यवधान होने पर सामूहिक रूप से प्रतिक्रिया दी जा सके।

आईईए के गठन के बाद अब तक सदस्य देशों ने पाँच बार समन्वित आपातकालीन तेल भंडार रिलीज़ की है। सबसे हालिया कार्रवाई 2022 में हुई थी, जब रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के कारण ऊर्जा कीमतों में तेजी आई।

रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार की बैठक से पहले आईईए ने पिछले सप्ताह आपूर्ति संकट से निपटने के लिए आपातकालीन चर्चा भी आयोजित की थी। बैठक के लिए तैयार दस्तावेज़ में कहा गया कि आईईए “तेल बाजार की स्थिरता बनाए रखने के लिए कार्रवाई करने के लिए तैयार है।”

“पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर भाजपा ने आयोग को दिया सुझाव, एक से दो चरणों में चुनाव कराने की मांग”

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भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई ने राज्य में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) की पूर्ण पीठ के समक्ष विस्तृत प्रस्तुति दी।

पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव आयोग के सामने रखे।

भाजपा ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक चलने वाली चुनाव प्रक्रिया से हिंसा और प्रशासनिक दखल की आशंका बढ़ जाती है। पार्टी ने आयोग से मांग की कि छह सप्ताह तक 7-8 चरणों में मतदान कराने के बजाय कम समय में अधिकतम एक या दो चरणों में मतदान कराया जाए। साथ ही, पिछले तीन चुनावों 2019 व 2024 के लोकसभा चुनाव और 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग के आदेश से स्थानांतरित किए गए सभी अधिकारियों को फिर से ट्रांसफर करने की मांग की।

भाजपा ने “संवेदनशील बूथ” के बारे में बताते हुए कहा कि जहां पिछले तीन चुनावों के दौरान मतदान के समय या उसके बाद हिंसा हुई हो, या जहां 85 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ है और अशांति फैलाई जा सकती है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भाजपा ने पश्चिम बंगाल पुलिस पर निर्भरता कम करने की बात कही।

पार्टी ने मांग की कि पर्याप्त संख्या में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की अग्रिम तैनाती की जाए और उनके लिए क्षेत्र से परिचित कराने हेतु हैंडबुक उपलब्ध कराई जाए। साथ ही सीएपीएफ के नोडल अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि बल की तैनाती व आवाजाही पूरी तरह पारदर्शी हो और जवान स्थानीय लोगों से किसी प्रकार की मेहमाननवाजी स्वीकार न करें।

भाजपा ने यह भी सुझाव दिया कि सामान्य पर्यवेक्षकों और पुलिस पर्यवेक्षकों को काफी पहले से तैनात किया जाए ताकि वे स्वतंत्र आकलन कर सकें। वहीं, सीएपीएफ की ओर से एरिया डॉमिनेशन, रूट मार्च और कॉन्फिडेंस बिल्डिंग उपाय स्थानीय पुलिस के बजाय ऑब्जर्वरों की पहचान के आधार पर किए जाएं।

भाजपा ने वोटरों की पहचान के लिए दो चरणों की व्यवस्था, हर पोलिंग स्टेशन पर वेबकैम और राज्य व केंद्र सरकार के अधिकारियों की 50-50 फीसदी भागीदारी की भी मांग की। पार्टी का कहना है कि इन उपायों से चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बन सकेगी।

T20 World Cup: भारत तीसरी बार बना टी-20 वर्ल्ड कप चैंपियन, छत्तीसगढ़ में जीत का जश्न, आतिशबाजी…

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T20 World Cup: भारत तीसरी बार बना टी-20 वर्ल्ड कप चैंपियन, छत्तीसगढ़ में जीत का जश्न, आतिशबाजी…

T20 World Cup: भारत ने तीसरी बार टी20 विश्व कप का खिताब जीत लिया है। रविवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए खिताबी मुकाबले में भारत ने संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा और ईशान किशन की अर्धशतकीय पारियों की मदद से 20 ओवर में पांच विकेट पर 255 रन बनाए।

T20 World Cup: भारत तीसरी बार बना टी-20 वर्ल्ड कप चैंपियन

जवाब में न्यूजीलैंड की टीम 19 ओवर में सिर्फ 159 रन ही बना सकी और भारत ने 96 रन से मैच जीत लिया। इसी के साथ टीम इंडिया तीन टी20 विश्व कप खिताब जीतने वाली पहली टीम बन गई। इस जीत का जश्न कबीरधाम जिले में दिखा है। कवर्धा शहर के भारत माता चौक पर लाइव मैच देखने व्यवस्था की गई थी।

T20 World Cup: छत्तीसगढ़ में जीत का जश्न, आतिशबाजी…

जैसे ही भारतीय टीम ने जीत दर्ज कराई तो खेल प्रेमियों में उत्साह दिखाई दिया। लोगों ने एक दूसरे को जीत की बधाई दी। इसके अलावा जिले के बोड़ला, पंडरिया, पांडातराई समेत अन्य कस्बों में भी लाइव मैच को देखा गया। यहां पर भी भारतीय टीम की जीत के बाद लोगो ने पटाखें फोड़कर जश्न मनाया।

छत्तीसगढ़ में अरबों का गबन, 2181 के मामले, 330 मामलों में FIR दर्ज, पुराने मामले अब तक अधूरे…

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Corruption Cases: छत्तीसगढ़ में सरकारी अधिकारियों पर चोरी, गबन और वित्तीय अनियमितताओं के 2181 मामले दर्ज हैं, जिनमें अरबों रुपए के आरोप शामिल हैं. इनमें से कुछ मामले 25 साल पुराने हैं. अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों में हेरफेर और प्रशासनिक उदासीनता के कारण मामले निपट नहीं पाए, जबकि सिर्फ 330 मामलों में एफआईआर दर्ज हुई.

छत्तीसगढ़ में सरकारी अधिकारियों द्वारा पारदर्शिता और ईमानदारी का दावा किया जाता है, लेकिन विभागों में चोरी, गबन और वित्तीय अनियमितताओं के मामले इन दावों की पोल खोलकर रख देते है. सरकारी रिपोर्ट के अनुसार अलग-अलग विभागों में अब तक 2181 ऐसे मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें अरबों रुपए की अनियमितताओं के आरोप अधिकारियों पर हैं. इन मामलों में से 690 मामले तो 25 साल से भी पुराने हैं, जिनका निपटारा आज तक नहीं हो पाया है. आर्थिक अपराधों को दबाने के लिए अधिकारियों ने सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर की, जिससे 70% से अधिक मामले फाइलों में ही दब गए. कुल मिलाकर 330 मामलों में FIR दर्ज हुई, लेकिन ज्यादातर मामलों में प्रशासनिक कमी के कारण कोई कार्रवाई नहीं हो पाई.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार भ्रष्टाचार के मामले विभागवार इस तरह हैं:

’18 विभागों में सरकारी संपत्ति में सेंधमारी और वित्तीय अनियमितताएं-1998 से अधिक मामले, 20 विभागों में चोरी के 119+ मामले, 15 विभागों में गबन के 64+ मामले’ पीडब्ल्यूडी, वन विभाग, शिक्षा, स्वास्थ्य और राजस्व जैसे कई विभाग भ्रष्टाचार के बड़े प्रकरणों में शामिल पाए गए हैं. वित्तीय अपराधों और सरकारी संपत्तियों में अनियमितताओं के बढ़ते मामलों पर शासन ने चिंता जताई है. अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि भ्रष्टाचार के मामलों के निस्तारण में तेजी लाएं और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करें. विश्लेषकों का कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था में लगे अधिकारी अपने पद का गलत इस्तेमाल कर निजी लाभ उठा रहे हैं. इसका सीधा असर सरकारी सिस्टम और सेवाओं पर पड़ रहा है. इसके बावजूद अब तक कोई वसूली नहीं हुई और जिम्मेदार तय नहीं हो सके हैं.

इस स्थिति ने यह साबित कर दिया है कि सरकारी दावों और वास्तविक स्थिति के बीच गहरी खाई है. ऐसे में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है, ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जा सके और सरकारी संसाधनों का सही इस्तेमाल सही से हो सके.