Home Blog Page 794

₹5000, ₹10000 और ₹20000 की मंथली SIP से कितने समय में बन जाएंगे करोड़पति? ये है पूरा कैलकुलेशन

0

हर किसी का सपना करोड़पति बनने का होता है. अगर सही रणनीति के साथ रेगुलर निवेश किया जाए, तो फिर हर महीने छोटी सी बचत भी आपके करोड़पति बनने का सपना पूरा कर सकती है. हम बात कर रहे हैं म्यूचुअल फंड के सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) की, जिसमें कंपाउंडिंग की पावर की वजह से हर महीने छोटी बचत करके भी आप करोड़पति बन सकते हैं. हालांकि इसकी 2 शर्ते हैं- पहला, आपको लंबी अवधि तक निवेश करते रहना होगा. दूसरा, आपको निवेश में अनुशासन बरतना होगा. इसका मतलब यह है कि आपको बीच में अपना एसआईपी कभी बंद नहीं करना होगा.

₹5000 से करोड़पति बनने का गणित
आइए जानते हैं कि आखिर कैसे एसआईपी निवेश के जरिए महज 5,000 रुपये की बचत कर आप करोड़पति बनने का सपना पूरा कर सकते हैं. आपको हर महीने में 5000 रुपये जमाकर 27 साल तक इसकी नियमित एसआईपी करनी होगी. अब मान लीजिए आपको सिर्फ 12 फीसदी का ही रिटर्न हासिल होता है, तो आपका कुल निवेश 16,20,000 रुपये होगा और कंपाउंडिंग के साथ आपको मिलने वाला रिटर्न इस अवधि में 91,91,565 रुपये होगा. कुल मिलाकर देखें, तो आपका फंड बढ़कर 1,08,11,565 रुपये हो जाएगा.

₹10000 से करोड़पति बनने का गणित
इसी तरह आपको हर महीने में 10000 रुपये जमाकर 21 साल तक इसकी नियमित एसआईपी करनी होगी. आपका कुल इन्वेस्टमेंट 25,20,000 रुपये होगा. 12 फीसदी की दर से रिटर्न इस अवधि में 79,10,067 रुपये होगा. कुल मिलाकर देखें, तो आपका फंड बढ़कर 1,04,30,067 रुपये हो जाएगा

दिल्ली में बैठकर ही रच रहा साजिश, जानिए कैसे पाकिस्तान हाई कमीशन बन गया है ISI का ठिकाना

0

दिल्ली में पाकिस्तानी हाई कमीशन आईएसआई के ठिकाने के रूप में काम करता है. ज्योति मल्होत्रा जासूसी कांड से यह बात सच साबित होती है. CNN-News18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, टॉप इंटेलिजेंस सूत्रों का दावा है कि नई दिल्ली में पाकिस्तानी हाई कमीशन यानी पाकिस्तानी उच्चायोग आईएसआई यानी इंटर- सर्विसेज इंटेलिजेंस के लिए एक कॉवर्ट बेस यानी गुप्त अड्डे के रूप में काम कर रहा है.

सूत्रों ने कहा कि बड़े पैमाने पर एंबेसी यानी दूतावास में भर्ती संभवतः भविष्य में फिदायीन हमलों के लिए निशाना बनाने के लिए की जा रही है. उन्होंने कहा कि इसका मकसद एंट्री पॉइंट, एक्जिट, गेट की मजबूती और गार्डिंग पैटर्न की जानकारी हासिल करना है.

पिछले कुछ दिनों में जासूसी कांड में कई गिरफ्तारियां हुई हैं. इसमें हरियाणा की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा ​​भी शामिल है. उसे पाकिस्तान के साथ संवेदनशील जानकारी साझा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. उस पर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने का आरोप है. सूत्रों ने खुलासा किया कि ज्योति जैसे कई लोग संवेदनशील इलाकों से वीडियो बनाकर ओवरऑल गार्डिंग पैटर्न यानी सुरक्षा-निगरानी के पूरे तरीके की जानकारी पहुंचाते थे.

सूत्रों ने CNN-News18 को बताया कि आईएसआई उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों को निशाना बनाता है और ऐसे लोगों की तलाश करता है जो गरीबी या अन्याय की भावना से परेशान हों ताकि उन्हें खुफिया मकसदों के लिए इस्तेमाल किया जा सके. उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान में आईएसआई के अफसरों ने स्थानीय कर्मचारियों से कहा है कि वे ऐसे हर समूह की भर्ती करें जो भारत के खिलाफ आवाज उठा सके. पाकिस्तानी हाई कमीशन के अधिकारी एजेंटों की भर्ती और जासूसी में मदद करने के लिए अपने राजनयिक संरक्षण का इस्तेमाल करते हैं.’

आईएसआई भारत में अपना नेटवर्क कैसे बनाता है?

छत्तीसगढ़ में मेदांता अस्पताल और वरुण बेवरेजेस संयंत्र की स्थापना का प्रस्ताव, मुख्यमंत्री से निवेशकों ने की मुलाकात

0

छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य और उद्योग क्षेत्र में बड़े निवेश की दिशा में अहम कदम बढ़ते हुए आज नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सदन में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से दो प्रमुख उद्योग समूहों ने मुलाकात की।

मेदांता अस्पताल के संस्थापक और प्रख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेश त्रेहन ने रायपुर में एक अत्याधुनिक मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित करने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने बताया कि वे इस परियोजना में लगभग 500 करोड़ रुपये का निवेश करना चाहते हैं। यह अस्पताल उन्नत चिकित्सा तकनीक, विशेषज्ञ डॉक्टरों, रिसर्च और प्रशिक्षण सुविधाओं से लैस होगा।

वहीं, वरुण बेवरेजेस लिमिटेड के चेयरमैन श्री रवि जयपुरिया ने रायपुर में कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक्स और फ्रूट जूस आधारित संयंत्र लगाने का प्रस्ताव दिया, जिसमें 250 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा। यह परियोजना राज्य में औद्योगिक विकास के साथ-साथ रोज़गार सृजन को गति देगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दोनों प्रस्तावों का स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार स्वास्थ्य और उद्योग जैसे क्षेत्रों में ऐसे गुणवत्तापूर्ण निवेश के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि ये दोनों परियोजनाओं पर राज्य शासन विचार कर इसे हर संभव मदद देगी, इस प्रकार की परियोजनाओं से जनता को लाभ और युवाओं को रोज़गार के नए अवसर भी सुलभ होंगे।

नीति आयोग की बैठक में दिखी आत्मीयता: जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का थामा हाथ और कहा – छत्तीसगढ़ की बात अभी बाकी है

0

नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक के दौरान एक आत्मीय क्षण सामने आया, जिसने सबका ध्यान खींचा। लंच ब्रेक के समय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का हाथ थामते हुए मुस्कराकर कहा कि “छत्तीसगढ़ की बात अभी बाकी है।” इस एक वाक्य में प्रधानमंत्री का स्नेह, विश्वास और राज्य के प्रति विशेष रुचि झलक रही थी। उस क्षण, आसपास उपस्थित आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री श्री एम.के. स्टालिन भी मुस्कराते हुए इस संवाद के साक्षी बने।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों में हो रहे सकारात्मक बदलाव, औद्योगिक निवेश, और ‘आत्मनिर्भर बस्तर’ की दिशा में राज्य सरकार द्वारा उठाए गए ठोस कदमों की सराहना की। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि कैसे बस्तर अब संघर्ष नहीं, संभावना का प्रतीक बन रहा है – जहाँ कभी बंदूकें चलती थीं, वहाँ अब मशीनें, लैपटॉप और स्टार्टअप की चर्चा हो रही है। नवा रायपुर में देश की पहली सेमीकंडक्टर यूनिट और एआई डेटा सेंटर की स्थापना से लेकर लिथियम ब्लॉक की नीलामी तक – छत्तीसगढ़ अब न केवल संसाधनों का राज्य है, बल्कि भविष्य के भारत की प्रयोगशाला बन रहा है।

यह क्षण किसी औपचारिक संवाद का नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के द्वारा छत्तीसगढ़ के विकास के लिए प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री श्री साय के प्रयासों की सहज स्वीकृति और सराहना का था। नीति आयोग की बैठक में जहां देशभर के राज्यों ने अपने विकास मॉडल प्रस्तुत किए, वहीं छत्तीसगढ़ की प्रस्तुति ने प्रधानमंत्री की विशेष रुचि और सराहना प्राप्त की। यह स्पष्ट संकेत है कि छत्तीसगढ़ अब केवल एक उभरता हुआ राज्य नहीं, बल्कि देश के समग्र विकास में एक निर्णायक भूमिका निभाने वाला राज्य बन चुका है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के समक्ष मुख्यमंत्री साय का आत्मनिर्भर बस्तर विजन

0

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ का दूरदर्शी विकास मॉडल प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि कभी नक्सल हिंसा के लिए पहचाना जाने वाला बस्तर अब देश को विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया मॉडल देने जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने नीति आयोग के मंच पर छत्तीसगढ़ के लिए 75 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था का दीर्घकालिक लक्ष्य रखा और इसके केंद्र में ‘3T मॉडल’ (Technology, Transparency, Transformation) को बताया। उन्होंने कहा कि राज्य प्रशासन अब तकनीक आधारित, पारदर्शी और तेज़ गति से निर्णय लेने वाला बन रहा है। हर योजना को डिजिटली ट्रैक किया जा रहा है, ताकि आम जनता को समय पर और सटीक सेवाएं मिल सकें। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह मॉडल न केवल छत्तीसगढ़ को विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने में सहायक होगा, बल्कि भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य में भी राज्य की अहम भूमिका सुनिश्चित करेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2047 तक के लिए एक विस्तृत रणनीति तैयार की है, जिसके तहत राज्य की अर्थव्यवस्था को 6 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 75 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस दौरान प्रति व्यक्ति आय में 10 गुना वृद्धि का अनुमान है। इस रणनीति को ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन डॉक्यूमेंट’ नाम दिया गया है, जिसमें राज्य के आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय विकास की समग्र योजना निहित है।

उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु शिक्षा, स्वास्थ्य, अधोसंरचना, कृषि, आईटी, पर्यटन और कौशल विकास जैसे 13 प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। इन सभी क्षेत्रों के बेहतर क्रियान्वयन हेतु 10 विशिष्ट मिशन प्रारंभ किए गए हैं।

बस्तर अब संघर्ष नहीं, संभावना का प्रतीक

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर अब संघर्ष का नहीं, बल्कि संभावनाओं का क्षेत्र बन गया है। बस्तर और उसके आसपास के 32 ब्लॉकों में स्किल डेवलपमेंट सेंटर खोले गए हैं, जहां युवाओं को कंप्यूटर, स्वास्थ्य सेवा, फूड प्रोसेसिंग और तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। अब यहां के बच्चे जंगल में लकड़ी चुनने के बजाय लैपटॉप और मशीनें चला रहे हैं।

उन्होंने बताया कि बस्तर में अब बड़े निवेश आ रहे हैं। नवा रायपुर में स्थापित की जा रही देश की पहली सेमीकंडक्टर यूनिट और एआई डेटा सेंटर से बस्तर एवं समूचे राज्य में रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे। अब बस्तर ‘मेक इन इंडिया’ का उपयुक्त स्थल बन रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि सरकार द्वारा मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को नक्सलमुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए पुनर्वास, प्रशिक्षण और स्वरोजगार योजनाएं तैयार की गई हैं। अब बस्तर में आदिवासियों को स्वरोजगार, प्रशिक्षण और बाज़ार की सुविधाएं मिल रही हैं। स्थानीय उत्पादों की बिक्री से रोजगार के नए द्वार खुल रहे हैं। बस्तर का धुड़मारास गांव संयुक्त राष्ट्र द्वारा ‘सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव’ की सूची में शामिल किया गया है।

भौगोलिक और औद्योगिक अधोसंरचना में ऐतिहासिक निवेश

मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि छत्तीसगढ़ में रेल नेटवर्क को 1100 किलोमीटर से बढ़ाकर 2200 किलोमीटर तक ले जाने का कार्य प्रगति पर है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर 21 हजार करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। रायपुर एयरपोर्ट से अब कार्गो सेवा भी प्रारंभ हो चुकी है, जिससे राज्य एक प्रमुख लॉजिस्टिक हब के रूप में उभर रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में प्रचुर मात्रा में खनिज संपदा उपलब्ध है। विशेषकर स्टील, कोयला, डोलोमाइट और लिथियम जैसे संसाधनों की उपलब्धता के चलते छत्तीसगढ़ औद्योगिक दृष्टि से अग्रणी राज्य बनता जा रहा है। स्टील उत्पादन क्षमता को 28 मिलियन टन से बढ़ाकर 45 मिलियन टन और बिजली उत्पादन को 2030 तक देश में शीर्ष स्थान तक ले जाने का लक्ष्य है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जहां लिथियम ब्लॉक की सफल नीलामी हुई है। यह उपलब्धि ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक सिद्ध होगी।

प्रशासनिक नवाचार और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन

मुख्यमंत्री श्री साय ने राज्य सरकार द्वारा किए गए 350 से अधिक नीतिगत सुधारों की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि जमीन पंजीकरण जैसे कार्य अब केवल 500 रुपये में घर बैठे संभव हो गए हैं। नई औद्योगिक नीति के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में प्ले स्कूल, हॉस्पिटल और कॉलेज खोलने वालों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

नीति आयोग में छत्तीसगढ़ के 2047 रोडमैप की प्रमुख बातें

1. छत्तीसगढ़ – ऊर्जा और उद्योग की रीढ़: मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि छत्तीसगढ़ बिजली, कोयला, स्टील और सीमेंट जैसे संसाधनों के माध्यम से भारत की औद्योगिक नींव को सुदृढ़ करता है। छत्तीसगढ़ की यह विशिष्टता देश के आर्थिक विकास को मजबूत आधार प्रदान करती है।

2. खेती और जंगल – ग्रामीण समृद्धि का आधार: कृषि, मछलीपालन और वनोपज आधारित आजीविका से ग्रामीणों और आदिवासियों की आय और आत्मनिर्भरता बढ़ी है जो आदिवासी और ग्रामीण जीवन की दिशा में सकारात्मक परिवर्तन को परिलक्षित करता है।

3. आदिवासी अधिकारों में नई क्रांति: आदिवासी परिवारों को जमीन का अधिकार पाने की प्रक्रिया सरल होने से आदिवासियों का सुरक्षा और सम्मान बढ़ेगा, जो सामाजिक न्याय और अधिकारों की दिशा में क्रांतिकारी पहल है।

4. HHH मॉडल से पर्यटन को नया विस्तार: HHH मॉडल के माध्यम से हॉस्पिटैलिटी, हाउसिंग और हैंडीक्राफ्ट के जरिए स्थानीय महिलाओं और कारीगरों को रोजगार मिलने के साथ ही छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान मिलेगी।

5. डिजिटल बदलाव से प्रशासन में पारदर्शिता और गति : अब सरकारी कामों में तकनीक का ज़्यादा इस्तेमाल हो रहा है। छत्तीसगढ़ ने “3T” मॉडल अपनाया है – टेक्नोलॉजी, ट्रांसपेरेंसी और ट्रांसफॉर्मेशन। इसका मतलब है कि सरकारी काम अब साफ-सुथरे और जल्दी होंगे। ऑनलाइन फॉर्म, समय पर सेवाएं और आसान प्रक्रिया से जनता का भरोसा बढ़ेगा। यह भ्रष्टाचार को घटाकर जनता के विश्वास को मजबूत करता है।

6. नीतिगत नेतृत्व में अग्रणी राज्य: मुख्यमंत्री ने बताया कि अब छत्तीसगढ़ सिर्फ संसाधन बहुल राज्य नहीं, बल्कि नीति और प्रशासन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बन रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” के विचार को छत्तीसगढ़ पूरी लगन से लागू कर रहा है। अब तक 350 से ज्यादा सरकारी सुधार किए गए हैं।

7. सड़क परिवहन और हवाई सुविधाओं की बढ़ी रफ्तार: 11 साल में 21,380 करोड़ से नई सड़कें बनीं। अब जगदलपुर, बिलासपुर और अंबिकापुर एयरपोर्ट का सीधा सम्पर्क देश के विभिन्न क्षेत्रों से बन चुका है।

8. रेल सुविधाओं का विस्तार: राज्य में 161 साल में 1100 किमी रेल लाइन बनी थी। अब 2030 तक ये दोगुनी होकर 2200 किमी होगी जो कनेक्टिविटी को बढ़ाने में अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।

शिक्षा का उद्देश्य संस्कार और सेवा होना चाहिए – राज्यपाल श्री रमेन डेका

0

विप्र पब्लिक स्कूल, रायपुर के नव-निर्मित भवन का लोकार्पण जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज के करकमलों से संपन्न हुआ। इस अवसर पर राज्यपाल श्री रमेन डेका मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि केवल डिग्री प्राप्त करना ही शिक्षा नहीं है, बल्कि यह हमारे व्यक्तित्व को संवारने और समाज के प्रति जिम्मेदार बनाने की प्रक्रिया है।

अपने उद्बोधन में राज्यपाल श्री डेका ने विप्र शिक्षा समिति और विप्र कॉलेज के 30 वर्षों की शिक्षायात्रा को गौरवपूर्ण बताते हुए सभी पदाधिकारियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह संस्थान न केवल शिक्षा का केंद्र है, बल्कि यह ज्ञान, सेवा और संस्कृति का संगम है।
राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि “आज जब पूरा विश्व डिजिटल क्रांति और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब ऐसी शिक्षा की जरूरत है जो आधुनिकता के साथ-साथ हमें हमारी जड़ों और भारतीय जीवन मूल्यों से भी जोड़े रखे।

राज्यपाल ने श्री डेका कहा कि भवन कैसा है यह न देख हुए वहां कैसी शिक्षा मिल रही है यह देखा जाए। हमे ऐसी शिक्षा देना है जो स्थानीय भाषाओं और सांस्कृतिक समझ के साथ-साथ विज्ञान, गणित और तकनीकी शिक्षा को समन्वित करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नव-निर्मित भवन आने वाले वर्षों में शिक्षा की गुणवत्ता का प्रतीक बनेगा।
श्री डेका ने कहा कि देश में गुरूकुल परंपरा को स्थापित करने में ब्राह्यण समाज का बहुत बड़ा योगदान है। ब्राह्यण समाज ने सदैव शिक्षा और नैतिकता तथा सामाजिक मार्गदर्शन को अपना कर्त्तव्य माना है।

इस अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज ने अपना आर्शीवचन दिया। कार्यक्रम में सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, विधायकगण श्री राजेश मूणत, श्री पुरंदर मिश्रा, श्री अनुज शर्मा, रायपुर की महापौर श्रीमती मीनल चौबे, पूर्व मंत्री श्री रवींद्र चौबे ने भी अपना संबोधन दिया।

इस अवसर पर संतगण सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, अभिभावक, विद्यार्थी और विप्र समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

सुशासन तिहार 2025 : दंतेवाड़ा के नकुलनार पंचायत में आयोजित समाधान शिविर में विविध कार्यक्रमों का हुआ आयोजन

0

महिला एवं बाल विकास विभाग, दंतेवाड़ा के अंतर्गत एकीकृत बाल विकास परियोजना (आईसीडीएस) कुआकोंडा द्वारा आज नकुलनार पंचायत में सुशासन तिहार समाधान शिविर 2025 का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान के अंतर्गत जागरूकता रैली का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं ग्रामीण महिलाएं उपस्थित रहीं।

समाज में बालिका शिक्षा के महत्व को उजागर करना और बेटियों को शिक्षा के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में परियोजना अधिकारी श्री अनिल कुमार लोनिया ने बेटियों के अधिकार, शिक्षा और सशक्तिकरण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” केवल एक नारा नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है। समाधान शिविर के दौरान किशोरी बालिकाओं के हीमोग्लोबिन जांच एवं बॉडी मास इंडेक्स मापन भी किया गया। यह कार्य स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से किया गया, जिसमें किशोरियों में एनीमिया की पहचान की जा सके। इस पहल से न केवल किशोरियों के स्वास्थ्य की स्थिति स्पष्ट होगी, बल्कि उनके लिए पोषण और चिकित्सा पर उचित मार्गदर्शन भी सुनिश्चित किया जाएगा।

समाधान शिविर में 13 गर्भवती माताओं की गोद भराई की रस्म भी संपन्न की गई। इस अवसर पर उपस्थित सरपंच द्वारा माताओं को उचित पोषण, स्वास्थ्य जांच और नवजात की देखभाल के संबंध में मार्गदर्शन दिया गया। इसके साथ ही 7 बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार भी संपन्न किया गया, जो विभाग की “कुपोषण मुक्त दंतेवाड़ा” की दिशा में एक अहम कदम है। यह कार्यक्रम “सही पोषण-देश रोशन” के उद्देश्य को साकार करने की एक प्रभावी पहल रही। इस समाधान शिविर के माध्यम से क्षेत्र की 6 पंचायतों से प्राप्त कुल 46 मांगों, आवेदनों को महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा त्वरित रूप से निराकृत किया गया। इस अवसर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी, दंतेवाड़ा, सभी पर्यवेक्षकगण एवं आईसीडीएस कुआकोंडा की पूरी टीम सक्रिय रूप से उपस्थित रही। आयोजन की सराहना करते हुए स्थानीय ग्रामीणों ने ऐसे शिविरों को नियमित रूप से आयोजित करने की मांग भी की।

सुदर्शन-अर्शदीप की एंट्री, करुण नायर-शार्दुल ठाकुर का कमबैक… भारतीय टीम के सेलेक्शन की 5 बड़ी बातें

0

इंग्लैंड के खिलाफ भारतीय टीम को पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेलनी है. बीसीसीआई ने इस दौरे के लिए 18 खिलाड़ियों को टीम में जगह दी है. टीम की कप्तानी शुभम…

इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान 24 मई (शनिवार) को कर दिया गया. भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) ने इस दौरे कके लिए 18 खिलाड़ियों को टीम में जगह दी है. टीम की कप्तानी शुभमन गिल को सौंपी गई है. शुभमन गिल ने बतौर कप्तान रोहित शर्मा की जगह ली है, जिन्होंने हाल हही टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया था.

ऋषभ पंत को उप-कप्तानी: विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत को टीम का उप-कप्तान बनाया गया है. हालिया ऑस्ट्रेलिया दौरे पर जसप्रीत बुमराह टीम के उप-कप्तान थे और उन्होंने उस दौरे पर दो टेस्ट मैचों में भारतीय टीम की कप्तानी भी की थी, लेकिन उन्हें अब इस रोल से मुक्त कर दिया गया है.

सरफराज खान ड्रॉप: ऑस्ट्रेलिया दौरे पर टीम का हिस्सा मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज सरफराज खान भी थे, जिन्हें अब टीम से ड्रॉप कर दिया गया है. करुण नायर को सरफराजखान पर तवज्जो मिली है. चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर ने कहा कि ये फैसला टीम मैनेजमेंट का था, यह हमेशा किसी के लिए अनुचित होता है लेकिन आपको विकल्प चुनने होत

टीम में तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को शामिल नहीं किया गया है. ऐसा माना जा रहा था कि शमी टेस्ट टीम में वापसी कर सकते हैं. लेकिन अब वो पूरी तरह फिट नहीं हो…

के चलते स्क्वॉड में जगह नहीं बना सके. अजीत अगरकर के मुताबिक मेडिकल टीम ने उन्हें बताया था कि शमी फिलहाल फिट नहीं

के चलते स्क्वॉड में जगह नहीं बना सके. अजीत अगरकर के मुताबिक मेडिकल टीम ने उन्हें बताया था कि शमी फिलहाल फिट नहीं हैं.

इंग्लैंड दौरे के लिए 18 सदस्यीय शुभमन गिल (कप्तान), यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल, साई सुदर्शन, ऋषभ पंत (उप-कप्तान/विकेटकीपर), नीतीश कुमार रेड्डी, रवींद्र जडेजा, ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर)अभिमन्यु ईश्वरन, शार्दुल ठाकुर, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, करुण नायर, वॉशिंगटन सुंदर, आकाश दीप, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव.

पतंजलि ई-साइकिल लॉन्च करेगी, 80 किलोमीटर की रेंज देगी

0

तंजलि का नवीनतम आविष्कार ऐसे देश में ताज़ी हवा का झोंका है, जहां पर्यावरण संबंधी चिंताएं दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं और परिवहन लागत लगातार बढ़ रही है।

महज 5,000 रुपये की कीमत पर, घरेलू स्वास्थ्य दिग्गज ने भारत में सबसे किफायती इलेक्ट्रिक साइकिल का खुलासा किया है, जो एक बार चार्ज करने पर 80 किलोमीटर की प्रभावशाली रेंज प्रदान करती है।

पिछले हफ़्ते हरिद्वार में एक खचाखच भरे प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पतंजलि के चेहरे बाबा रामदेव ने इलेक्ट्रिक साइकिल दिखाई । उन्होंने घोषणा की कि ” परिवहन उतना ही सुलभ होना चाहिए जितना कि बुनियादी पोषण ,” उन्होंने आगे कहा कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में कंपनी का प्रवेश उसी सिद्धांत पर आधारित है जिस पर उपभोक्ता वस्तुओं में उनका प्रवेश हुआ: ज़रूरत की चीज़ों को औसत व्यक्ति की पहुँच में लाना।

फ्रेम का अनूठा एल्युमीनियम मिश्र धातु निर्माण स्थायित्व से समझौता किए बिना वजन को कम करता है। प्रीमियम नियोडिमियम मैग्नेट और कॉपर वाइंडिंग के उपयोग के कारण मोटर की दक्षता लगभग 15% बढ़ जाती है, जिसका घनत्व पारंपरिक मोटरों में पाए जाने वाले से अधिक होता है।

हालाँकि, साइकिल की चतुर पावर मैनेजमेंट प्रणाली सबसे अधिक योगदान देती है। पतंजलि का दृष्टिकोण इलाके, सवार के इनपुट और बैटरी की स्थिति के आधार पर पावर आउटपुट को गतिशील रूप से संशोधित करता है, पारंपरिक इलेक्ट्रिक साइकिलों के विपरीत जो निरंतर बिजली देते हैं। इस गतिशील बिजली आपूर्ति का परिणाम बहुत बेहतर ऊर्जा उपयोग है।

डॉ. शर्मा ने आगे कहा, ” समय के साथ, सिस्टम सवार के पैटर्न को सीखता है। ” ” साइकिल शक्ति वितरण को अनुकूलित करेगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आपको ढलान पर पर्याप्त सहायता मिले, जबकि सपाट सतहों पर ऊर्जा का संरक्षण हो, उदाहरण के लिए, यदि आप अक्सर ऐसे मार्ग पर यात्रा करते हैं जिसमें एक खड़ी चढ़ाई के बाद एक सपाट खंड है। “

फ्रेम का अनूठा एल्युमीनियम मिश्र धातु निर्माण स्थायित्व से समझौता किए बिना वजन को कम करता है। प्रीमियम नियोडिमियम मैग्नेट और कॉपर वाइंडिंग के उपयोग के कारण मोटर की दक्षता लगभग 15% बढ़ जाती है, जिसका घनत्व पारंपरिक मोटरों में पाए जाने वाले से अधिक होता है।

हालाँकि, साइकिल की चतुर पावर मैनेजमेंट प्रणाली सबसे अधिक योगदान देती है। पतंजलि का दृष्टिकोण इलाके, सवार के इनपुट और बैटरी की स्थिति के आधार पर पावर आउटपुट को गतिशील रूप से संशोधित करता है, पारंपरिक इलेक्ट्रिक साइकिलों के विपरीत जो निरंतर बिजली देते हैं। इस गतिशील बिजली आपूर्ति का परिणाम बहुत बेहतर ऊर्जा उपयोग है।

 

 

उत्कृष्ट विशेषताओं का विश्लेषण

यह बाइक न केवल अपनी कीमत के कारण बल्कि अपनी तकनीकी विशेषताओं के कारण भी अद्वितीय है, जो इससे पांच गुना महंगी वस्तुओं से प्रतिस्पर्धा करती है:

भारतीय कानून के अनुसार, जो इस गति सीमा से कम की कारों को पंजीकरण और लाइसेंसिंग दायित्वों से छूट देता है, 250W ब्रशलेस डीसी मोटर 25 किमी/घंटा तक की सहज गति प्रदान करता है। अपनी छोटी 8.8Ah/36V क्षमता के बावजूद, लिथियम-आयन बैटरी पैक को मालिकाना ऊर्जा प्रबंधन एल्गोरिदम का उपयोग करके अधिकतम सीमा निकालने के लिए अनुकूलित किया गया है।

इसके अलावा, व्यवसाय इसे एक सख्त व्यावसायिक प्रयास से ज़्यादा एक सामाजिक परियोजना के रूप में देख रहा है, जो शुरुआती 100,000 यूनिट उत्पादन के लिए कम लाभ मार्जिन पर काम कर रहा है। बालकृष्ण ने आगे कहा, ” परिवहन खर्च को कम करके, साइकिल कुछ ही महीनों में अपने खर्च की भरपाई कर लेती है। “

80 किलोमीटर की माइलेज के पीछे की तकनीकी यात्रा

80 किलोमीटर की बताई गई रेंज एक उल्लेखनीय तकनीकी उपलब्धि है। तुलना के लिए, यहां तक ​​कि 30,000 से 40,000 रुपये की कीमत वाली इलेक्ट्रिक बाइक भी आमतौर पर 40 से 60 किलोमीटर की रेंज रखती है।

परियोजना के मुख्य इंजीनियर, डॉ. प्रदीप शर्मा ने उन प्रगतियों का वर्णन किया जिनके कारण यह संभव हो सका: ” हमने तीन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया: उन्नत ऊर्जा प्रबंधन को लागू करना, मोटर दक्षता में सुधार करना, और संरचनात्मक अखंडता का त्याग किए बिना वजन कम करना ।”

बाजार के लिए निहितार्थ: शहरी गतिशीलता परिदृश्य में बदलाव

भारत में शहरी गतिशीलता परिदृश्य पर एक सस्ती इलेक्ट्रिक साइकिल के लॉन्च से बहुत अधिक प्रभाव पड़ सकता है। यह एक आकर्षक विकल्प प्रस्तुत करता है जो पैदल चलने से अधिक तेज़ है, दोनों से अधिक लचीला है, और अंततः सार्वजनिक परिवहन की तुलना में कम खर्चीला है, क्योंकि लाखों लोग इस पर निर्भर हैं या लंबी दूरी पैदल चलते हैं।

कम दूरी के यात्रियों के लिए आर्थिक तर्क मजबूत हो जाता है जो वर्तमान में मोटरसाइकिल या स्कूटर चलाते हैं। पारंपरिक दोपहिया वाहनों को चलाने में लगभग ₹3 प्रति किलोमीटर का खर्च आता है, जबकि पेट्रोल की औसत कीमत लगभग ₹100 प्रति लीटर है। दूसरी ओर, पतंजलि इलेक्ट्रिक साइकिल की बिजली लागत 95% कम यानी लगभग ₹0.15 प्रति किलोमीटर है।

इससे दोपहिया वाहन बाजार में भारी बदलाव आ सकता है, विशेष रूप से 50,000 रुपये से कम कीमत वाले वाहनों में, जिससे प्रसिद्ध निर्माताओं को अपनी मूल्य निर्धारण नीतियों और उत्पाद लाइनों का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

सुगम्यता और सामाजिक प्रभाव

इस लॉन्च का संभावित सामाजिक प्रभाव यकीनन इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है। मोटर चालित वाहन का मालिक होना कई कम आय वाले परिवारों के लिए एक अप्राप्य लक्ष्य बना हुआ है। लाखों भारतीय अब इलेक्ट्रिक साइकिल की बदौलत मोटर चालित गतिशीलता का खर्च उठा सकते हैं, जिसकी कीमत ₹5,000 है, जो कि अधिकांश भारतीय राज्यों में न्यूनतम वेतन से भी कम है।

यह न केवल एक उत्पाद है, बल्कि एक जीवन-परिवर्तनकारी उपकरण है, जो दैनिक आवागमन के घंटों को बचा सकता है तथा कारखानों और निर्माण स्थलों पर आने-जाने वाले श्रमिकों, स्कूलों और कॉलेजों में जाने वाले छात्रों तथा स्थानीय बाजारों में सामान पहुंचाने वाले छोटे विक्रेताओं के लिए परिवहन संबंधी बाधाओं के कारण पहले से सीमित रोजगार के अवसर खोल सकता है।

साइकिल को और भी ज़्यादा किफ़ायती बनाने के लिए, पतंजलि ने ₹100 जितनी कम साप्ताहिक किस्तों के साथ किस्त विकल्प उपलब्ध कराने का इरादा किया है। व्यवसाय द्वारा शुरू किए गए अभियान के अनुसार, ग्राहक अपनी पारंपरिक साइकिल को इलेक्ट्रिक मॉडल से बदल सकते हैं और ₹1,000 की छूट पा सकते हैं।

चुनौतियाँ और संशय

इसमें अभी भी संदेह है कि क्या पतंजलि लॉन्च के समय की गई चर्चा के अनुरूप काम कर पाएगी, खासकर जब गुणवत्ता और बिक्री के बाद सहायता की बात आती है।

उद्योग विश्लेषकों द्वारा इस मूल्य सीमा पर घटकों की स्थायित्व पर सवाल उठाए गए हैं। एक शीर्ष ऑटोमोटिव कंसल्टेंसी फर्म के वरिष्ठ विशेषज्ञ राकेश शर्मा ने कहा , ” महत्वपूर्ण शॉर्टकट अपनाए बिना ₹5,000 में उच्च गुणवत्ता वाली इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्रदान करना शारीरिक रूप से असंभव है। ” ” रखरखाव और प्रतिस्थापन शायद वे स्थान हैं जहाँ वास्तविक लागतें पाई जाएंगी ।”

बताई गई उत्पादन क्षमता को लेकर भी चिंताएं जताई गई हैं। 100,000 उपकरणों के उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की आवश्यकता है, और पतंजलि के पास बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रोमैकेनिकल आइटम बनाने की बहुत कम विशेषज्ञता है।

एक अन्य आलोचना जाने-माने ई.वी. उत्पादकों की ओर से आई है, जिनका तर्क है कि यदि उत्पाद उम्मीदों से कमतर साबित होते हैं, तो सस्ते दामों के कारण उपभोक्ताओं की इलेक्ट्रिक वाहन संबंधी धारणा को नुकसान पहुंच सकता है और ई.वी. को अपनाने में देरी हो सकती है।

भविष्य की ओर: आगे का रास्ता

अपने मोबिलिटी सेगमेंट के लिए पतंजलि ने एक साहसिक योजना पेश की है। कंपनी 40,000 रुपये से कम कीमत वाला इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च करने के बाद 18 महीने के भीतर व्यावसायिक उपयोग के लिए चार पहिया इलेक्ट्रिक वाहन लॉन्च करने का इरादा रखती है।

रखरखाव और मरम्मत से जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिए, कंपनी पूरे भारत में लगभग 500 सर्विस सेंटर भी स्थापित कर रही है जो विशेष रूप से इसके मोबिलिटी सामानों के लिए हैं। इनमें से पहले 100 चार्जिंग स्टेशन शहरी क्षेत्रों में स्थित होंगे और वे केंद्र के रूप में भी काम करेंगे।

सबसे रोमांचक घोषणा शायद पतंजलि की आगामी इलेक्ट्रिक बाइक के लिए बैटरी स्वैपिंग तकनीक की जांच करने की मंशा है। इससे उपयोगकर्ताओं को कुछ स्टेशनों पर अपनी इस्तेमाल की गई बैटरी को पूरी तरह से चार्ज की गई बैटरी से बदलने में सक्षम बनाकर चार्जिंग समय की आवश्यकता को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा।

सिर्फ एक उत्पाद नहीं

यह स्पष्ट है कि पतंजलि की इलेक्ट्रिक साइकिल ग्राहकों के बीच काफी लोकप्रिय हो गई है, क्योंकि इसके लॉन्च होने के एक सप्ताह के भीतर ही इसके प्री-ऑर्डर 50,000 से अधिक हो गए हैं। यह देखना अभी बाकी है कि क्या कंपनी गुणवत्ता से समझौता किए बिना इन ऑर्डर को पूरा कर पाती है, लेकिन इस अभियान का प्रभाव वास्तविक उत्पाद से कहीं आगे तक जाएगा।

पतंजलि ने ऑटोमोबाइल क्षेत्र में स्वीकृत ज्ञान पर सवाल उठाया है और यह साबित करके कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को उचित मूल्य पर प्राप्त किया जा सकता है, उसने भारत में पर्यावरण अनुकूल परिवहन की ओर कदम बढ़ाने में तेजी ला दी है।

यह मामूली इलेक्ट्रिक साइकिल वायु प्रदूषण, ट्रैफिक जाम और आर्थिक असमानता से जूझ रहे देश के लिए परिवहन के एक साधन से कहीं अधिक हो सकती है; यह अधिक टिकाऊ और न्यायपूर्ण भविष्य की दिशा में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

” पहली बार मुझे लग रहा है कि तकनीक वास्तव में मेरे जैसे लोगों के लिए काम कर रही है, न कि केवल उन लोगों के लिए जिनके पास पहले से ही बहुत कुछ है ,” मेरठ के एक 45 वर्षीय सब्जी विक्रेता ने कहा, जो शुरुआती परीक्षणकर्ताओं में से एक था।

पतंजलि की 5,000 रुपये की इलेक्ट्रिक साइकिल, जो अपनी प्रभावशाली 80 किमी रेंज के साथ है, समय रहते याद दिलाती है कि सच्चा नवाचार सिर्फ उन्नत सुविधाओं में नहीं है, बल्कि इस दुनिया में हर किसी के लिए प्रौद्योगिकी को सुलभ बनाने में है, जहां तकनीकी प्रगति अक्सर धनी और शक्तिशाली लोगों को लाभ पहुंचाती है।

सलमान खान के को-स्टार मुकुल देव ने 53 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा, ‘जय हो’ में आए थे नजर

0

सलमान खान, संजय दत्त और शाहिद कपूर के साथ फिल्मों में नजर आ चुके मुकुल देव ने 53 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया है. पिछले कुछ वक्त से वो बीमारी से जूझ रहे थे.

बॉलीवुड इंडस्ट्री में एक बार फिर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, हाल ही में सलमान खान और अजय देवगन के साथ फिल्मों में नजर आने वाले एक्टर मुकुल देव ने दुनिया को अलविदा कह दिया है. मुकुल सन ऑफ सरदार’, ‘आर..राजकुमार’, ‘जय हो’ जैसी कई फिल्मों में नजर चुके हैं. फिल्मी दुनिया का इतना फेमस चेहरा यूं अचानक से अलविदा बोल गया कि लोग अभी तक शॉक में हैं. मुकुल की डेथ 23 मई की रात को हुई है.