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देश में बजा हरियाणा का डंका! टैक्स वसूली में छोड़ा सबको पीछे, बना डाला बड़ा रिकॉर्ड…

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हरियाणा के एक्साइज और टैक्सेशन कमिश्नर विनय प्रताप सिंह के अनुसार केंद्रीय फाइनेंस मिनिस्ट्री के जारी लेटेस्ट डेटा के मुताबिक, राज्य का ग्रॉस SGST कलेक्शन 2025-26 में पिछले फाइनेंशियल ईयर के मुकाबले रिकॉर्ड 22 परसेंट की दर से बढ़ रहा है.

उन्होंने कहा कि मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के लिए हरियाणा का ग्रॉस SGST कलेक्शन (सेटलमेंट के बाद) 44,460 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर में फरवरी तक के कलेक्शन से 7,918 करोड़ रुपए ज़्यादा है, इस तरह 22 परसेंट की ग्रोथ रेट दर्ज की गई है. उन्होंने कहा कि यह देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे ज़्यादा है.

देश में सबसे ज्यादा ग्रोथ

एक ऑफिशियल बयान के मुताबिक, उन्होंने आगे कहा कि फाइनेंस मिनिस्ट्री के जारी डेटा के मुताबिक, मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का ग्रॉस SGST कलेक्शन नेशनल एवरेज 6 परसेंट की दर से बढ़ा है. फरवरी महीने में, हरियाणा का ग्रॉस SGST ग्रोथ रेट पिछले फाइनेंशियल ईयर के फरवरी महीने के मुकाबले 23 परसेंट ग्रोथ के साथ ज़्यादा बना हुआ है. सितंबर 2025 में GST काउंसिल द्वारा GST रेट रैशनलाइजेशन किए जाने के बाद के महीनों में भी, हरियाणा SGST कलेक्शन में लगातार ग्रोथ दिखा रहा है, जो न केवल कुशल टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन बल्कि राज्य की इकोनॉमी की अच्छी हालत को भी दिखाता है.

हरियाणा के सभी जिलों में GST सुविधा केंद्र खोले गए

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सितंबर 2025 में हुई GST काउंसिल मीटिंग में GST रेट रैशनलाइजेशन रिफॉर्म्स का स्वागत और समर्थन किया था और प्रधानमंत्री और केंद्रीय वित्त मंत्री को धन्यवाद दिया था. एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर ने कहा कि हरियाणा में कुल 6,22,478 GST टैक्सपेयर्स हैं, और GST कानून के तहत रजिस्ट्रेशन की सुविधा के लिए हरियाणा के सभी जिलों में GST सुविधा केंद्र खोले गए हैं. उन्होंने कहा कि राज्य में टैक्स कम्प्लायंस में सुधार के कारण GST में अच्छी ग्रोथ हो रही है, जिसका मुख्य कारण पिछले कुछ सालों में GST सिस्टम में किए गए कई सुधार और हरियाणा के एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट के अधिकारियों द्वारा अपनाए गए बेहतर टैक्स एनालिसिस सिस्टम हैं.

लखनऊ में बड़ा इमामबाड़ा बंद, मेन गेट पर लगाए गए अयातुल्ला खामेनेई के पोस्टर और काले झंडे…

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ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद यूपी की राजधानी लखनऊ में शोक की लहर फैल गई. शनिवार को शहर के प्रमुख धार्मिक नेता मौलाना कल्बे जवाद ने तीन दिन के शोक का ऐलान करते हुए सभी इमामबारगाहों, घरों और धार्मिक स्थलों पर काले परचम लगाने की अपील की थी.

इस दौरान शहर में विभिन्न शोक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए थे. वहीं, आज मौलाना कल्बे जवाद की अपील का असर देखने को मिला.

ईरान में अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद जहां देश के अलग-अलग शहरों में शिया समुदाय के लोग मातम बना रहे हैं. शोक सभाएं आयोजित कर रहे हैं, वहीं आज पुराने लखनऊ में शोक का माहौल देखने को मिला. यहां आज बड़ा-छोटा इमामबाड़ा, भूल भुलैया पूरी तरह से बंद हैं. इसके अलावा, पुराने लखनऊ के बाजार भी पूरी तरह से बंद हैं. धार्मिक भावनाओं और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ये निर्णय लिया गया है. वहीं 3 मार्च के बाद पर्यटकों के लिए इमामबाड़े खुलेंगे.

शोक में डूबा शिया समुदाय

लखनऊ में शिया समुदाय के लोगों ने बड़े इमामबाड़े से छोटे इमामबाड़े तक दुकानों को बंद कर रखा है. इसके असावा शिया समुदाय ने तीन दिन तक शोक का ऐलान किया है. बड़ा इमामबाड़ा और छोटा इमामबाड़ा पर्यटकों के लिए भी बंद रहेगा. प्रशासन ने यह एहतियातन फैसला लिया है. इसके अलावा खामेनेई के बड़े-बड़े पोस्टर इमारतों पर लगाए गए. शिया समुदाय के लोग अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत का विरोध कर रहे हैं.

मौलाना कल्बे जवाद की अपील

मौलाना कल्बे जवाद की अपील की अनुसार, लखनऊ के ऐतिहासिक छोटे इमामबाड़े में शाम को विशेष शोकसभा का आयोजन होगा. शोकसभा में धार्मिक विद्वान, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होंगे. इस दौरान कुरआनखानी, दुआ और श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी, जिसमें आयतुल्ला खामेनेई के योगदान को याद किया जाएगा. इसके अलावा कैंडल मार्च भी निकाला जाएगा.

Holika Dahan 2026: सावधान, अशुभ मुहूर्त में होलिका दहन बन सकता है संकट की वजह!

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हिंदू धर्म में किसी भी पूजा या अनुष्ठान के लिए मुहूर्त का विशेष महत्व होता है. होली के पर्व पर होलिका दहन केवल लकड़ियों को जलाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह नकारात्मकता को समाप्त करने वाली एक विशेष पूजा है.

साल 2026 में होलिका दहन 2 मार्च को किया जाएगा. शास्त्रों के अनुसार, यदि कोई भी धार्मिक कार्य उसके निर्धारित समय पर न किया जाए, तो उससे मिलने वाले फलों में कमी आने की आशंका बनी रहती है. यदि बिना सही गणना के गलत समय पर अग्नि जलाई जाए, तो इसका असर परिवार की सुख-शांति और वातावरण पर पड़ सकता है. इस लेख में हम जानेंगे कि गलत मुहूर्त में होलिका दहन करने से किस प्रकार की परेशानियां आ सकती हैं.

आध्यात्मिक और मानसिक शांति पर पड़ने वाला नकारात्मक प्रभाव

शास्त्रों के अनुसार, होलिका दहन के लिए प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है. यदि अग्नि को गलत नक्षत्र या अशुभ समय में जलाया जाता है, तो घर के सदस्यों के बीच कलह और मानसिक अशांति का कारण बन सकता है. मान्यता है कि अग्नि देव की पूजा यदि अनुचित काल में हो, तो इससे घर की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित होती है. ऐसे समय में लोगों के मन में अनावश्यक डर और भ्रम पैदा हो सकता है, जिससे उनकी सहजता कम हो जाती है. यह समय आत्म-शुद्धि का होता है, परंतु गलत मुहूर्त के कारण व्यक्ति को वह आध्यात्मिक लाभ नहीं मिल पाता जिसकी वह कामना करता है. इसलिए हमारे बुजुर्ग हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करने की सलाह देते थे.

सामाजिक और आर्थिक जीवन में आने वाली संभावित बाधाएं

ज्योतिष शास्त्र में भद्रा काल को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. यदि भद्रा के समय होलिका दहन किया जाता है, तो ऐसी मान्यता है कि इससे समाज और राष्ट्र में विघ्न आने की आशंका रहती है. व्यक्ति के निजी जीवन की बात करें तो गलत मुहूर्त में किए गए इस अनुष्ठान से आर्थिक कार्यों में रुकावटें आ सकती हैं. नए व्यवसाय के संचालन में बाधाएं आ सकती हैं या बनते हुए काम बिगड़ सकते हैं. यदि नियमों की अनदेखी की जाए, तो धन की हानि और परिवार के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ने की आशंका बढ़ जाती है. सही समय पर किया गया पूजन ही मां लक्ष्मी की कृपा दिलाने और जीवन में समृद्धि लाने की संभावना को बढ़ाता है.

ग्रहों की उग्रता और भविष्य की सुरक्षा के सूत्र

होलिका दहन के समय ग्रहों की स्थिति बहुत संवेदनशील होती है. यदि गलत समय पर पूजा की जाए तो ग्रहों की उग्रता के कारण लिए गए फैसले भविष्य में गलत साबित होने की आशंका रहती है. ज्योतिषियों का मानना है कि शुभ मुहूर्त एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है, जो हमें ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव से बचाता है. गलत मुहूर्त में अग्नि का स्पर्श करने से पिता की संपत्ति से जुड़े विवाद या पारिवारिक संबंधों में तनाव को बढ़ा सकता है. अपनी सुरक्षा और बेहतरी के लिए हमेशा पंचांग के अनुसार ही कार्य करना चाहिए. होलिका दहन के समय ईश्वर का ध्यान करना एक बढ़िया विकल्प है, जो आने वाले समय को सुखद बनाने में मदद करता है.

बिहार में बड़ा बदलाव, राज्य के सभी प्राइवेट एजुकेशन इंस्टीट्यूट की फीस अब प्रदेश सरकार तय करेगी…

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बिहार के एजुकेशन सिस्टम में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. इसका सीधा फायदा बिहार के स्टूडेंट्स और उनके अभिभावकों को होने जा रहा है. असल में अब बिहार में संचालित प्राइवेट एजुकेशन इंस्टीट्यूट मनमानी फीस नहीं वसूल सकेंगे.

इसको लेकर बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने तैयारियां कर ली हैं, जिसके तहत बिहार सरकार ने बीते दिनों विधानसभा में बिहार निजी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थान (नामांकन विनियमन एवं शुल्क निर्धारण) बिल 2026 पारित किया है. इस बिल के कानून बन जाने के बाद राज्य में संचालित सभी प्राइवेट एजुकेशन इंस्टीट्यूट में फीस प्रदेश सरकार तय करेगी.

आइए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है? जानेंगे कि बिहार सरकार की तरफ से विधानसभा में पारित बिहार निजी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थान (नामांकन विनियमन एवं शुल्क निर्धारण) बिल 2026 क्या है और ये कैसे काम करेगा?

फीस तय करने के लिए बनेगी कमेटी

बिहार सरकार राज्य में संचालित सभी प्राइवेट एजुकेशन इंस्टीट्यूट की फीस तय करेगी. इस संबंध में राज्य सरकार की तरफ से विधानसभा में बिहार निजी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थान (नामांकन विनियमन एवं शुल्क निर्धारण) बिल 2026 पारित किया गया है.

इस बिल में प्रावधान किया गया है कि राज्य के सभी प्राइवेट एजुकेशन इंंस्टीट्यूट की फीस तय करने की जिम्मेदारी एक उच्च स्तरीय कमेटी की होगी. इस कमेटी का गठन बिहार सरकार की तरफ से किया जाएगा, जिसका अध्यक्ष प्रख्यात शिक्षाविद् या सेवानिवृत पदाधिकारी (प्रधान सचिव से जूनियर नहीं होना चाहिए) को बनाया जाएगा. ये कमेटी प्राइवेट एजुकेशन इंस्टीट्यूट की एडमिशन से लेकर परीक्षा तक की फीस तय करेगी.

अधिक फीस वसूली तो कार्रवाई

बिहार सरकार राज्य में प्राइवेट एजुकेशन इंस्टीट्यूट की तरफ से वसूली जा रही मनमाफिक फीस पर रोकथाम के लिए बिहार निजी व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थान (नामांकन विनियमन एवं शुल्क निर्धारण) बिल 2026 लेकर आई है, जिसे विधानसभा में पारित कर दिया गया है, जो अब राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद कानून बन जाएगा.

इस बिल में जहां फीस तय करने की जिम्मेदारी एक उच्च स्तरीय कमेटी को दी गई है. वहीं दूसरी तरफ अधिक फीस वसूले जाने पर कार्रवाई का प्रावधान भी किया गया है. मसलन, अगर कोई एजुकेशन इंस्टीट्यूट अधिक फीस लेता है तो उसे अधिक वसूली गई फीस वापिस करनी हाेगी, तो उस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

मिडिल ईस्ट में इतना है मेड-इन-इंडिया कारों का एक्सपोर्ट, युद्ध से इतना होगा असर…

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अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण भारत के ऑटोमोबाइल निर्यात पर असर की चिंता जताई जा रही है. इस बीच देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने कहा है कि उसके कुल निर्यात का केवल करीब 12.5% हिस्सा ही मध्य पूर्व (मिडिल-ईस्ट) से जुड़ा है.

इससे कंपनी पर सीधा असर सीमित माना जा रहा है.

मारुति सुजुकी की मासिक सेल्स कॉल के दौरान कॉरपोरेट अफेयर्स के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती ने कहा कि इस साल कंपनी के कुल निर्यात में मध्य पूर्व की हिस्सेदारी लगभग 12.5% है. उन्होंने कहा, हम स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन निर्यात के क्षेत्र के रूप में मध्य पूर्व में हमारी हिस्सेदारी बहुत ज्यादा नहीं है. इस साल यह करीब 12.5% है.

अलग-अलग देशों में निर्यात

मारुति सुजुकी करीब 100 देशों में कारें निर्यात करती है. इससे उसका निर्यात लैटिन अमेरिका, अफ्रीका, एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में फैला हुआ है. राहुल भारती ने कहा कि इतने ज्यादा देशों में निर्यात होने से कंपनी का पोर्टफोलियो संतुलित है और जोखिम कम है. कंपनी सिर्फ निर्यात बढ़ा ही नहीं रही, बल्कि अलग-अलग बाजारों में विस्तार भी कर रही है, जिससे जोखिम कम बना रहे.

निर्यात में मजबूत बढ़त

अप्रैल से फरवरी FY26 के दौरान कंपनी का निर्यात साल-दर-साल 33.75% बढ़कर 4,00,734 यूनिट हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 2,99,617 यूनिट था. अगर 12.5% हिस्सेदारी के हिसाब से देखें, तो इस अवधि में करीब 50,000 गाड़ियां मध्य पूर्व भेजी गईं. राहुल भारती ने बताया कि कंपनी ने FY26 के लिए 4 लाख यूनिट निर्यात का सालाना लक्ष्य पहले 11 महीनों में ही पूरा कर लिया है और मार्च का निर्यात अतिरिक्त होगा. मारुति सुजुकी की पहली इलेक्ट्रिक कार e Vitara का निर्यात 21,000 यूनिट से ज्यादा हो चुका है. यह कार अब 39 देशों में निर्यात की जा रही है. इसके प्रमुख बाजार यूके, नॉर्वे, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्जरलैंड हैं.

उद्योग की स्थिति

मध्य पूर्व भारतीय यात्री वाहन निर्यातकों के लिए एक बड़ा बाजार रहा है, खासकर छोटी और मध्यम आकार की कारों के लिए, लेकिन लंबे समय तक चलने वाला भू-राजनीतिक तनाव शिपिंग रूट, माल भाड़ा, बीमा खर्च, तेल की कीमत और ग्राहकों की मांग पर असर डाल सकता है. उद्योग के जानकारों के मुताबिक, हुंडई मोटर इंडिया और निसान मोटर इंडिया जैसी अन्य बड़ी कंपनियों के निर्यात में भी मध्य पूर्व की हिस्सेदारी आमतौर पर कम दो अंकों (लगभग 10-15%) में रहती है. हुंडई भारत से 80 से ज्यादा देशों में कारें निर्यात करती है, जबकि निसान करीब 65 देशों में वाहन भेजती है.

ईरान युद्ध से बंद हुआ समंदर का रास्ता, अडानी को हो सकता है बड़ा नुकसान, गैस-पेट्रोल होंगे महंगे!

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अमेरिका और इजराइलकी संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया है. इसके साथ ही लाल सागर के दक्षिणी छोर पर स्थित बाब अल-मंडेब (Bab el-Mandab) में भी व्यापारिक आवाजाही पूरी तरह से ठप होने की खबरें हैं.

ये दोनों रास्ते दुनिया के तेल और कार्गो व्यापार की लाइफलाइन माने जाते हैं. इनके बंद होने से न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजार में खलबली मची है, बल्कि भारत के आयात-निर्यात तंत्र पर भी एक गहरा संकट मंडरा रहा है. जेएम फाइनेंशियल (JM Financial) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस बिगड़ते हालात का सबसे बुरा असर अडानी पोर्ट्स, जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर और जीएमआर एयरपोर्ट्स जैसी दिग्गज भारतीय कंपनियों पर देखने को मिल सकता है.

समुद्री रास्तों पर नाकेबंदी, बढ़ रही है मालभाड़े की टेंशन

फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला होर्मुज और लाल सागर का बाब अल-मंडेब, दोनों ही एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के व्यापार के लिए बेहद अहम हैं. भारत का एक बड़ा व्यापारिक हिस्सा इन्हीं समुद्री रास्तों से होकर गुजरता है. रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025 तक भारत के कुल आयात-निर्यात (EXIM) का करीब 31 प्रतिशत हिस्सा मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका (MENA) से जुड़ा हुआ था.

अब इन रास्तों के बंद होने से व्यापारिक जहाजों को अफ्रीका के ‘केप ऑफ गुड होप’ से होकर लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है. इस लंबी दूरी का सीधा मतलब है ज्यादा ईंधन की खपत, बीमा के बढ़ते प्रीमियम और सामान पहुंचने में भारी देरी. जाहिर है, जब माल ढुलाई का खर्च बढ़ेगा और जहाजों के फेरे कम होंगे, तो इसका असर बाजार में मिलने वाले हर छोटे-बड़े सामान की कीमत पर भी पड़ेगा. इससे भारतीय निर्यातकों की वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा भी कमजोर हो सकती है.

अडानी से लेकर JSW तक इन दिग्गजों की अटकी सांसें

इस भू-राजनीतिक संकट ने भारतीय लॉजिस्टिक और पोर्ट सेक्टर के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं. अगर जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर (JSW Infra) की बात करें, तो संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फुजैरा में उनका एक महत्वपूर्ण लिक्विड स्टोरेज टर्मिनल है. पिछले वित्तीय वर्ष में कंपनी के कुल मुनाफे (Ebitda) में इस टर्मिनल की करीब 13 प्रतिशत हिस्सेदारी थी. वहां काम प्रभावित होने से कंपनी की कमाई में सेंध लग सकती है. इसके अलावा, ओमान में कंपनी के प्रस्तावित विस्तार पर भी इस अस्थिरता के कारण ग्रहण लग सकता है.

वहीं, देश के सबसे बड़े प्राइवेट पोर्ट ऑपरेटर ‘अडानी पोर्ट्स’ (APSEZ) के लिए भी यह समय काफी चुनौतीपूर्ण है. भारत के कुल कार्गो में 27 प्रतिशत की बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले अडानी समूह को फारस की खाड़ी से आने वाले तेल, एलएनजी (LNG) और कंटेनरों की कमी का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, इजराइलके हाइफा पोर्ट से उनका मुनाफा (1.5 प्रतिशत) अपेक्षाकृत कम है और तंजानिया व ऑस्ट्रेलिया जैसी जगहों पर उनके निवेश सुरक्षित हैं, लेकिन पूरे खाड़ी क्षेत्र में मची इस उथल-पुथल से समुद्री परिवहन के कारोबार पर नकारात्मक असर पड़ना तय है. इसके अलावा, गुजरात पीपावाव पोर्ट पर भी लाल सागर के रास्ते होने वाले व्यापार में रुकावट के चलते दबाव बढ़ सकता है और मालभाड़े में अस्थिरता आ सकती है.

आम आदमी की जेब पर पड़ेगा बोझ

यह संकट सिर्फ समुद्री बंदरगाहों तक सीमित नहीं रहने वाला. जीएमआर एयरपोर्ट्स (GMR Airports) के लिए भी यह एक चिंताजनक स्थिति है. मध्य पूर्व के लिए उड़ानों में कमी आने से दिल्ली जैसे बड़े हवाई अड्डों पर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या घट सकती है. ट्रांजिट यात्रियों की कमी से एयरपोर्ट की उन गैर-विमानन कमाई (दुकानें, लाउंज आदि) पर सीधा असर पड़ेगा, जहां से उन्हें सबसे ज्यादा मुनाफा होता है.

आम आदमी के लिए सबसे बड़ी चिंता रसोई गैस यानी एलपीजी (LPG) को लेकर है. भारत अपनी कुल खपत का करीब 65 फीसदी एलपीजी आयात करता है, जिसमें से 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा मध्य पूर्व से आता है. एजिस लॉजिस्टिक्स (Aegis Logistics) जैसी गैस हैंडलिंग कंपनियों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा. सऊदी अरब ने पहले ही प्रोपेन गैस के दाम 50 डॉलर प्रति टन तक बढ़ा दिए हैं. अगर यह युद्ध लंबा खिंचा, तो जहाजों की कमी और महंगे किराए के कारण गैस की कीमतें आसमान छू सकती हैं.

‘भारत शांति और स्थिरता का पक्षधर’, मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग पर बोले PM मोदी…

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मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शांति और संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की है. उन्होंने कहा कि हालात बेहद चिंताजनक है. मौजूदा संकट का समाधान केवल बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों से ही संभव है.

इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है.

पीएम मोदी ने कहा कि विश्व में तनाव चल रहा है. भारत शांति और स्थिरता का पक्षधर है और भारतीयों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. भारत सभी देशों के साथ मिल काम करेगा. भारत बातचीत, कूटनीति से समाधान के पक्ष में है. पीएम मोदी ने कहा कि जब दो डेमोक्रेसी एक साथ खड़ी होती हैं, तो शांति की आवाज और भी मजबूत हो जाती है. वेस्ट एशिया में मौजूदा हालात हमारे लिए गहरी चिंता की बात है. भारत बातचीत और डिप्लोमेसी के जरिए सभी विवादों को सुलझाने का समर्थन करता है.

कनाडाई प्रधानमंत्री कार्नी के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद पीएम मोदी ने ये बात कही है. इस दौरान भारत और कनाडा ने यूरेनियम पर एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. इसके अलावा, नागरिक परमाणु सहयोग को आगे बढ़ाते हुए दोनों देश छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों पर एक साथ मिलकर काम करेंगे.

नेतन्याहू से भी फोन पर की बात

इससे पहले सोमवार को आधी रात को पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने अपने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मौजूदा इलाके के हालात पर बात करने के लिए फोन पर बात की और उन्होंने “दुश्मनी को जल्द खत्म करने” की जरूरत पर जोर दिया. वहीं केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने सोमवार को कहा कि केंद्र सरकार खाड़ी देशों में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित लाने के लिए पूरी तरह तैयार है और इस संबंध में विदेशों में भारतीय मिशनों के संपर्क में है.

चिंतित परिवारों को दिया आश्वासन

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि जब भी कन्नड़िगा और अन्य भारतीय दुनिया में कहीं भी संकट में होते हैं, केंद्र सरकार उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करती है. इससे पहले हमने यूक्रेन में फंसे नागरिकों को भी लाया. जहां भी भारतीय हैं, उनकी सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है. उन्होंने चिंतित परिवारों को आश्वासन देते हुए कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है और सरकार सभी भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध है.

Holika Dahan 2026: उपले की माला, फूल, कुमकुम… यह रही होलिका दहन के लिए जरूरी पूजा सामग्री, देखें लिस्ट…

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Holika Dahan Puja Samagri List: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलिका दहन पर पूजा करने से जीवन की परेशानियां, संकट और सभी तरह की बाधाएं दूर हो जाती हैं. साथ ही मान्यता है कि, होलिका दहन की अग्नि में नई फसल की बालियां अर्पित करने से घर में कभी भी अन्न और धन की कमी नहीं होती और सुख-समृद्धि बनी रहती है.

हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर होलिका दहन किया जाता है. यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. इस साल होलिका दहन आज यानी 2 मार्च को किया जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन होलिका की पूजा के बाद अग्नि में कुछ चीजें अर्पित करने से जीवन की तमाम परेशानियां और कष्ट दूर हो जाते हैं. इसी कड़ी में आज हम आपको बताने जा रहे हैं, कि होलिका दहन की पूजा के लिए क्या-क्या पूजा सामग्री चाहिए होती है. आइए जानते हैं पूरी लिस्ट…

होलिका दहन पूजा के लिए जरूरी सामग्री

उपले की माला, माला, फूल, कुमकुम, कच्चा सूत (मौली) , चावल, हल्दी, धूप, दीपक, कपूर, गुड़, बताशे, पानी वाला नारियल, गुलाल, मिट्टी का दीपक, कलावा, घी, सरसों के दाने, लाल रंग का वस्त्र, जल से भरा कलश, 7 तरह के पकवान, मिठाई, गुजिया

होलिका पूजन का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलिका दहन पर पूजा करने से जीवन की परेशानियां, संकट और सभी तरह की बाधाएं दूर हो जाती हैं. साथ ही मान्यता है कि, होलिका दहन की अग्नि में नई फसल की बालियां अर्पित करने से घर में कभी भी अन्न और धन की कमी नहीं होती और सुख-समृद्धि बनी रहती है. इसके अलावा होलिका की राख को बेहद शुभ और रोगनाशक माना जाता है, जिस वजह से कई लोग इसका तिलक भी लगाते हैं.

होलिका दहन की अग्नि में क्याक्या अर्पित करें?

गाय के गोबर के उपले, अनाज, नमक, पीली सरसों, कपूर और हरि इलायची, लौंग और गुड़

कल लगने जा रहा है साल का पहला चंद्र ग्रहण

साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को दोपहर को 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होगा और 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि सूतक काल ग्रहण लगने से 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है और ऐसे में 3 मार्च को सूतक काल 6 बजकर 20 मिनट से शुरू होगा.

फाल्गुन पूर्णिमा का कैसे रखें व्रत? जानें पूरी विधि, मंत्र और महाउपाय, फाल्गुन पूर्णिमा व्रत के नियम…

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सनातन परंपरा में जिस फाल्गुन मास की पूर्णिमा को वसंत पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, उस पावन तिथि पर आखिर किस पूजा से भगवान विष्णु संग माता लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है, विस्तार से जानने के लिए पढ़ें ये लेख.

सनातन परंपरा में फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होली पूर्णिमा और वसंत पूर्णिमा आदि के नाम से जाना जाता है. ​हिंदू कैलेंडर के अनुसार यह साल की आखिरी पूर्णिमा होती है. इस पावन तिथि पर जगत के पालनहार माने जाने वाले भगवान विष्णु और उनके अवतार नृसिंह देवता, धन की देवी माता लक्ष्मी और राधा-कृष्ण की विशेष पूजा, जप, तप, व्रत का विधान है. फाल्गुन पूर्णिमा जिसे छोटी होली के नाम से भी जानते हैं, उस दिन श्री लक्ष्मीनारायण भगवान की विधि-विधान से पूजा करने पर साधक को सभी सुख प्राप्त होते हैं. आइए जानते हैं कि आज फाल्गुन पूर्णिमा व्रत को आखिर किस विधि से करने पर श्रीहरि संग माता लक्ष्मी की कृपा बरसती है.

फाल्गुन पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त 

पंचांग के अनुसार आज 02 मार्च 2026 को फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि सायंकाल 5:55 बजे प्रारंभ होकर अगले दिन 3 मार्च 2026 को सायंकाल 5:07 बजे तक रहेगी. चूंकि कल 03 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण लगेगा और सूतक लगने के कारण कल विधि-विधान से पूजा -अर्चना नहीं की जा सकेगी, इसलिए यह व्रत आज किया जाएगा. चूंकि आज पूर्णिमा तिथि चंद्रोदय के समय लग रही है, इसलिए आज 02 मार्च 2026 को यह व्रत रखना उचित रहेगा.

फाल्गुन पूर्णिमा व्रत की विधि 

फाल्गुन पूर्णिमा व्रत का पुण्यफल पाने के लिए साधक को यदि संभव हो तो आज गंगा आदि पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए. यदि ऐसा न कर पाएं तो घर में नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर अमृतवाहिनी गंगा जी का ध्यान करते हुए स्नान करें. तन और मन से पवित्र होने के बाद अपने पूजा घर में या फिर घर के ईशान कोण में एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र को रखें. इसके बाद उन्हें गंगा जल या शुद्ध जल अर्पित करें.

इसके बाद लक्ष्मीनारायण को पीले पुष्प, पीला चंदन, पीले वस्त्र, पीली मिठाई, केसर, तुलसी, धूप, दीप आदि अर्पित करने के बाद पूर्णिमा व्रत की कथा कहें या फिर किसी के माध्यम से सुनें. इसके बाद भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए उनके मंत्र ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम’ का जप करें तथा इसी मंत्र से हवन करें. फाल्गुन पूर्णिमा व्रत की पूजा के अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करना न भूलें. आज के दिन भगवान विष्णु के साथ राधा-कृष्ण, नृसिंह भगवान और माता लक्ष्मी की भी विशेष पूजा करनी चाहिए.

फाल्गुन पूर्णिमा का महाउपाय 

फाल्गुन पूर्णिमा की शाम को जब चंद्रोदय हो तो चंद्र देवता को दूध और जल से अर्घ्य दें. इसके बाद चंद्रमा के मंत्र ‘ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः’ का अधिक से अधिक जप करें. फाल्गुन पूर्णिमा व्रत का पुण्यफल पाने के लिए अपने सामर्थ्य के अनुसार किसी जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र और धन आदि का दान करें. फाल्गुन पूर्णिमा के दान से श्री हरि के साधक के सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है.

फाल्गुन पूर्णिमा व्रत के नियम

  • फाल्गुन पूर्णिमा व्रत वाले दिन नियम, संयम और ब्रह्मचर्य का पालन करें.
  • फाल्गुन पूर्णिमा का व्रत यदि शरीर साथ दे तभी करें और इस दिन अन्न का सेवन न करें, बल्कि इसकी जगह फलाहार करें.
  • फाल्गुन पूर्णिमा व्रत वाले दिन भगवान विष्णु के मंत्र का अधिक से अधिक जप करें अथवा श्री विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें.
  • फाल्गुन पूर्णिमा व्रत की पूजा में पूर्णिमा व्रत की कथा अवश्य कहें अथवा सुनें.
  • फाल्गुन पूर्णिमा व्रत का अगले दिन स्नान-ध्यान करने के बाद विधि-विधान से परायण करें.

Chandra Grahan 2026: साल के पहले चंद्र ग्रहण से जुड़ी 10 बड़ी बातें!

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Top 10 Lunar Eclipse Facts: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर कल 03 मार्च 2026, मंगलवार को लगने जा रहा है. ऐसे में चंद्र ग्रहण के सूतक से लेकर इसकी शुरुआत और समाप्त होने का समय, नियम और देश-दुनिया समेत 12 राशियों पर प्रभाव आदि को जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख.

ग्रहण एक खगोलीय घटना है और यह हर साल न्यूनतम चार और अधिकतम सात बार लगता है. इस साल सूर्य ग्रहण के महज 15 दिनों के भीतर फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. जिसमें सूर्य चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में होंगे. ज्योतिष के अनुसार पृथ्वी की छाया जब चंद्रमा पर पड़ेगी तो चंद्र ग्रहण की घटना घटेगी. आइए जानते हैं कि कल 03 मार्च 2026, मंगलवार को चंद्र ग्रहण कितने बजे से शुरू और कितने बजे खत्म होगा? कहां-कहां नजर आएगा और कब लगेगा चंद्र ग्रहण का सूतक काल? आइए चंद्र ग्रहण से जुड़े नियम और प्रभाव समेत सभी 10 महत्वपूर्ण बातों को जाने-माने ज्योतिषविद् पं. कृष्ण गोपाल मिश्र से विस्तार से जानते हैं.

1. कब शुरू और कब खत्म होगा चंद्र ग्रहण?

पंचांग के अनुसार चंद्रग्रहण की शुरुआत 03 मार्च 2026 को दोपहर 3:21 मिनट पर होगी और यह शाम 6:46 पर समाप्त हो जाएगा. इस तरह यह चंद्रग्रहण तकरीबन साढ़े तीन घंटे तक रहेगा, जिसका सूतक काल सुबह 6:20 मिनट से लग जाएगा और इस दौरान पूजा-पाठ और शुभ कार्य आदि नहीं किए जा सकेंगे.

2. कहांकहां दिखेगा चंद्र ग्रहण?

यह चंद्र ग्रहण भारत, एशिया, ऑस्ट्रेलिया एवं अफ्रीका में दिखाई देगा. यह ग्रहण अधिकांश उत्तर एवं दक्षिण अमेरिका तथा प्रशांत महासागर में नहीं दिखाई देगा. जिन स्थानों पर चंद्र ग्रहण नहीं दिखाई देगा वहां पर सूतक मान्य नहीं होगा.

3. सूतक के नियम क्या होते हैं?

गरुड़ पुराण, स्कन्द पुराण तथा धर्मसिन्धु में ग्रहण से जुड़े नियम बताए गये हैं. जिसे के अनुसार  इसमें भोजन करना, भोजन पकाना, सोना, शुभ कार्य करना, देव प्रतिमा का स्पर्श करना, तेल-मालिश करना, बाल-नाखून काटना, शारीरिक संबंध बनाने जैसे कार्य वर्जित हैं.

4. ग्रहण के समय क्या करना चाहिए?

हिंदू धर्म से जुड़े शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के दौरान मंत्र का जप अत्यंत ही शुभ माना गया है. ऐसे में इस दौरान व्यक्ति को गायत्री, महामृत्युंजय मंत्र, भगवान विष्णु या भगवान शिव के मंत्र अथवा अपने आराध्य देवी-देवता का ध्यान करते हुए उनका स्मरण और उनके मंत्र का जप करना चाहिए. मान्यता है कि ग्रहण में जप और दान करने से उसका करोड़ गुना फल मिलता है.

5. चंद्र ग्रहण के समय भोजन को लेकर क्या नियम है?

हिंदू मान्यता के अनुसार चंद्र ग्रहण के दौरान न तो भोजन बनाना चाहिए और न ही खाना चाहिए. चंद्र ग्रहण से पहले यदि कुछ भोजन बना हो तो उसमें तुलसी का पत्ता डाल देना चाहिए. ग्रहण के दौरान बच्चे, वृद्ध, रोगी आदि को भोजन करने की छूट होती है.

6. चंद्र ग्रहण खत्म होने के बाद क्या करें?

चंद्र ग्रहण के खत्म होने के बाद व्यक्ति को स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनने चाहिए और पूरे घर में गंगाजल छिड़कना चाहिए. इसके बाद देवी-देवताओं को स्नान आदि कराने के ​बाद उनका विधि-विधान से पूजा करना चाहिए. साथ ही साथ यथा संभव अन्न और धन आदि का दान करना चाहिए.

7.चंद्र ग्रहण का क्या देशदुनिया पर क्या पड़ेगा असर

गोचर के आधार पर ज्योतिषी दृष्टि से यह ग्रहण प्रतिकूल प्रभाव राजनीति एवं शासन सत्ता में देखने को मिलेगा. कई जगह पर शासन व्यवस्था में परिवर्तन की आवाज उठेगी. साथ ही  कई तरह के आंदोलन के संकेत भी हैं. ग्रहण कल के ग्रहों की दृष्टि पर नजर डालें यह चंद्र ग्रहण के समय कर्क लग्न उदित हो रहा है. जिसमें अष्टम भाव में बुध सूर्य राहु और मंगल एक साथ बैठे हुए हैं द्वादश स्थान पर वक्री बृहस्पति विराजमान है. नवम् स्थान पर उच्च के शुक्र के साथ शनि विराजमान है.

कर्क लग्न के अनुसार शनि और शुक्र का असंतुलित होकर के मजबूत होना. द्वादश के बृहस्पति का अष्टम भाव में राहु मंगल सूर्य बुध के साथ मूल त्रिकोण का संबंध बनाना. निश्चित तौर पर बाजार क्या संतुलन एवं आर्थिक संकट के संकेत देता है. साथ ही साथ एक बड़े समूह का न्याय के लिए आंदोलन का सूचक बन रहा है. क्योंकि अष्टम भाव में मंगल राहु और सूर्य बुध विद्रोह, खून खराबा एवं राजनीतिक अस्थिरता के संकेत देते हैं. और कहीं ना कहीं विश्व राजनीति में भी खराब संकेत दे रहा है.

मुख्य रूप से 13 अप्रैल 2026 से 1 मई 2026 के बीच में, 1 जून 2020 से  4 अक्टूबर 2026 के बीच में बहुत राजनीतिक उठा-पटक, सियासी घटनाएं उन्मादी रूप से एक नया विध्वंसक रूप लेते हुए दिखाई देंगे. जो आगे के लिए अच्छा नहीं होगा. विश्व राजनीति में भी मिडिल ईस्ट ओर दक्षिणी एशियाई देशों में भी तनाव की स्थितियां उत्पन्न होती हुई दिखाई दे रही है. विश्व स्तर पर शेयर बाजार में काफी असंतुलन देखने को मिलेगा. उपरोक्त समय में कुछ आपका आतंकी घटनाएं भी घट सकती है. रेल हवाई जहाज दुर्घटनाओं की भी संकेत है. प्रकृति में कुछ उथल-पुथल अथवा भूकंप या प्राकृतिक संतुलन जैसे तूफान आदि देखने को मिल सकता है. उपरोक्त समय में मुख्य रूप से किसी बड़े तूफान की आशंका है.

8. चंद्र ग्रहण किन राशियों के लिए अशुभ?

राशिफल के दृष्टिकोण से अगर देखा जाए तो मुख्य रूप से मेष राशि, कर्क राशि, सिंह राशि, कुंभ राशि एवं मीन राशि के लोगों को थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है. कर्क राशि वालों को स्वास्थ्य विशेष ध्यान देना चाहिए तथा कुछ संबंधों में तनाव भी हो सकता है आर्थिक चिंताएं परेशान कर सकती हैं. भगवान विष्णु की आराधना करें.

सिंह राशि वालों को जीवनसाथी से तनाव अथवा जीवनसाथी को लेकर के स्वास्थ्य की चिंता हो सकती है. किसी प्रेम संबंध में भी तनाव के संकेत है. राजनीतकियों के लिए प्रयासरत क्षेत्रों में आरक्षणों का सामना करना पड़ेगा. हनुमान जी की आराधना करें. मंगल के बीज मंत्र का जाप करें.

मेष राशि वालों के लिए आर्थिक कठिनाइयों को लेकर परेशान हो सकते हैं. रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमजोर होने से भी थोड़ा स्वास्थ्य की दिक्कत हो सकती है. संबंधों में थोड़ा मृदभाषा का प्रयोग करें. भगवान विष्णु की आराधना करें. बृहस्पति के बीज मंत्र का जापकरें.

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वृश्चिक राशि वालों के लिए भी थोड़ा सा स्वास्थ्य पर सतर्क रहने की जरूरत है. दांपत्य जीवन में तनाव हो सकता है. किसी विपरीत लिंग की संबंधों में तनाव की आशंका है. कुछ भविष्य की चिंताएं परेशान करेंगे या किसी बड़ी जिम्मेदारी को लेकर के आप तनाव ग्रस्त हो सकते हैं. भगवान शंकर की आराधना करें. महामृत्युंजय की जाप करें.

धनु राशि में थोड़ा सा अपने वाणी पर संयम रखें. निरर्थक दूसरों की आलोचना न करें. आर्थिक दृष्टिकोण से या कार्यक्षेत्र में थोड़ा कठिनाइयों का सामना जरूर करना पड़ेगा परंतु आपका वर्चस्व बना है. यदि आप  मृदुभाषी बन जाए तो इस समय मैं अच्छी सफलता अर्जित कर सकतेहैं. भगवान सूर्य की आराधना करें. नित्य सूर्य उपासना करें.

9. चंद्र ग्रहण से किन राशियों की चमकेगी किस्मत?

तुला राशि के व्यक्तियों के लिए अच्छा समय कहा जाएगा भाग्य का पूरा सहयोग मिलेगा कोई महत्वपूर्ण कार्य होगा. संबंधों का सुख भी प्राप्त होगा. आए नए स्रोत बनेंगे. भगवान गणेश की आराधना करें बाद ही लाभ कर होगा आपके लिए.

कन्या राशि के लोगों के लिए बड़ा ही सुखद समय है भाग्य के नए रास्ते खुल रहे हैं. जीवनसाथी का सहयोग प्राप्त होगा. कुछ गुप्त रूप से ईर्ष्यालु लोगों से सतर्क रहें. डेढ़ वर्ष की अवस्था के बाद से आपके भाग्य उदय का समय कहा जाएगा. मां दुर्गा की आराधना करें बाद ही लाभदायक होगा.

वृषभ राशि के लोगों के लिए अच्छा समय दिखाई दे रहा है भाग्य का पूरा सहयोगहोगा. प्रॉपर्टी खरीदने के लिए सबसे उत्तम समय दिखाई दे रहा है. आर्थिक क्षेत्र में प्रयास करने के लिए भी बहुत अच्छा समय है. नए व्यवसाय में कदम बढ़ाने के लिए बहुत अच्छा समय है. शनि के बीज मंत्र का जाप करें निश्चित लाभ होगा.

मिथुन राशि वालों के लिए बड़ा ही सुखद समय संबंधों का सहयोग प्राप्त होगा किसी उच्च स्तरीय व्यक्तियों द्वारा लाभ के रास्ते बनेंगे. लेकिन कुछ शत्रु भी आपके साथ हमेशा बने रहते हैं. प्रारंभिक अभी से 2 महीने तक थोड़ा सा सतर्क रहने की चेष्टा करें. हर संबंध में सरल और मिलनसार बनने की चेष्टाकरें. हर छोटी बात को दिल पर ना लें. भगवान शंकर की आराधना करें निश्चित तौर पर लाभहोगा. महामृत्युंजय का जाप करें.

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मकर राशि वालों के लिए बहुत ही अच्छा समय है व्यवसाय को बड़ा करने के लिए आपका प्रयास सराहनी है. आर्थिक दृष्टिकोण से प्रगति का पूरा मजबूत समय चल रहा है. आपका आत्मविश्वास भी काफी बढ़ा है. अविवाहितों के विवाह तय होने की भी मजबूत योग चल रहेहैं. भगवान गणेश का आराधना करें आपके लिए बड़ा ही लाभदायक होगा.

10. चंद्र ग्रहण का उपाय 

चंद्र ग्रहण के दुष्प्रभाव से बचने के लिए व्यक्ति को सूतक काल शुरू होने से पहले भोजन कर लेना चाहिए और इस दौरान विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए. चंद्र ग्रहण के समय अपने आराध्य देवता अथवा चंद्रमा समेत नवग्रह का मंत्र जपें अथवा किसी धार्मिक ग्रंथ का पाठ करें. मान्यता है ​कि ऐसा करने पर ग्रहण की नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है और सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है.