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आज शाम 4 बजे नीतीश मंत्रिमंडल का विस्तार, ये 7 नए मंत्री लेंगे शपथ!, जातीय समीकरण का रखा गया ध्यान, दिलीप जायसवाल ने दिया इस्तीफा

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बिहार के सियासी गलियारे से बड़ी ख़बर आ रही है कि चुनावी साल में बिहार में नीतीश मंत्रिमंडल का विस्तार होने जा रहा है। जी हां, बुधवार की शाम 4 बजे नीतीश मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। इसे लेकर राजभवन को आधिकारिक पत्र भेजा गया है।

शाम 4 बजे नीतीश मंत्रिमंडल का विस्तार

सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक इस विस्तार में कुल 7 विधायक मंत्री पद की शपथ लेंगे, जिनमें 5 भाजपा और 2 जदयू कोटे से होंगे। इधर, बिहार बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा में “एक व्यक्ति, एक पद” का सिद्धांत लागू है इसलिए उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपना इस्तीफा सौंप दिया।

सूत्रों के मुताबिक बीजेपी से पूर्व मंत्री जीवेश मिश्रा या अनिल शर्मा में से किसी एक को मौका मिल सकता है। पिछड़े समुदाय से नवल किशोर यादव के नाम पर चर्चा है, वहीं एक महिला मंत्री बनाए जाने की भी संभावना है, जिसमें कविता देवी का नाम सामने आ रहा है। इसके अलावा संजय सरावगी या विजय खेमका को भी कैबिनेट में जगह मिल सकती है। इसके साथ ही नीतीश मंत्रिमंडल में गोपालगंज के बरौली के रामप्रवेश राय और रीगा विधायक मोतीलाल प्रसाद को भी जगह मिल सकती है।

जातीय समीकरण का रखा गया ध्यान

इस कैबिनेट विस्तार में 2025 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए जातीय समीकरण को साधने की पूरी कोशिश की गई है। अगड़ी जाति, पिछड़ा वर्ग और अति पिछड़ा समाज के संतुलन का खास ध्यान रखा गया है।

गौरतलब है कि मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा की कोर कमेटी बैठक में इस विस्तार को हरी झंडी मिली। कैबिनेट में शामिल किए जाने वाले चेहरों को लेकर भाजपा और जदयू ने अंतिम निर्णय ले लिया है। अब सबकी नजरें शाम 4 बजे होने वाले शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हैं।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस को विष पीने वाला शिव चाहिए – वैभव बेमेतरिहा

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छत्तीसगढ़ कांग्रेस में आज बिखराव की स्थिति है. पार्टी के अंदर आंतरिक कलह उफान पर है. कार्यकर्ताओं से लेकर बड़े नेता और पदाधिकारियों के बयानों से अंदर की बातें भी अब खुलकर बाहर आने लगी है.

बस्तर से लेकर सरगुजा तक नेताओं के बीच सामंजस्य की कमी है. पार्टी की लाइन से अलग जाकर कहीं-कहीं नई लाइन खींचने की कोशिशें भी दिखती है. कहीं-कहीं से खुला विद्रोह दिख रहा है, तो कहीं-कहीं से गंभीर आरोपों के साथ अपने ही नेताओं की हाईकमान से शिकायतें तक भी. टिकट खरीदने-बेचने, पैसे लेने-देने, घात-भीतरघात, नेता फूलछाप जैसे अनगिनत आरोप लग रहे हैं, लगाए जा रहे हैं. कहीं-कहीं से ऐसी बातें गुटों में एक-दूसरे से कहलवाए जा रहे हैं. और ऐसी बातें चुनाव दर-दर चुनाव होती हार के बाद से लगातार पार्टी के अंदर हो रही है.

2023 विधानसभा चुनाव में हुई करारी हार के बाद से पार्टी के अंदर आंतरिक विवाद और गुटबाजी हावी है. इसका असर लोकसभा में दिखा, उपचुनाव में भी और निकाय-पंचायत चुनाव भी. हर चुनाव में कांग्रेस पूरी तरह से बिखरी हुई नजर आई. परिणाम आज पार्टी संगठन में व्यापक बदलाव की हवा है. अध्यक्ष को बदलने की मांग उठ रही है. बड़े नेता एक-दूसरे के विरुद्ध बोल रहे हैं. अभी से 2028 चुनाव में नेतृत्व को लेकर चर्चाएं हो रही हैं. वो सबकुछ वो रहा है, जिसे देख कर लगता है कि पीसीसी में सब जहर ही उगल रहे हैं.

वैसे पीसीसी संगठन की नींव 2018 विधानसभा चुनाव में मिली ऐतिहासिक जीत के बाद से कमजोर होने लगी थी. 2019 के बाद से धीरे-धीरे सत्ता और संगठन के बीच खाई बढ़ती गई. ढाई-ढाई साल वाले कथित फार्मूले से बंटवारे का भंयकर विवाद उपजा. और यह विवाद 23 के चुनाव आते-आते और बढ़ गया. परिणाम पार्टी सत्ता बाहर तो हुई ही, संगठन की सामूहिक एकता भी तार-तार हो गई. इसके बाद से पार्टी चाहकर भी संभल नहीं पाई, नेता एक नहीं हो पाए और बदलने-बदलवाने, हटने-हटवाने जैसी बातें होने लगी.

पीसीसी की स्थिति आज ऐसी है कि अध्यक्ष को कहना पड़ रहा है कि निकाय में टिकट तो बड़े नेताओं और विधायकों के हिसाब से बंटे थे. अर्थात निकाय में हार के लिए मैं अकेले जिम्मेदार नहीं, सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है. फिर मुझे क्यों निशाना बनाया जा रहा है ? अब ये पार्टी के नेता बेहतर जानते हैं कि पार्टी के अंदर कौन, किसे और कैसे निशाना बना रहे हैं. लेकिन पार्टी की स्थिति को देखकर लगता है कि कांग्रेस सत्ताधारी दल की जगह अपनों से ही ज्यादा लड़ रही है!

देश की सबसे सस्ती ई-कार का ब्लैक एडिशन लॉन्च, जानिए कितनी रखी कीमत

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कंपनी ने नए ब्लैकस्ट्रोम वैरिएंट की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 7.80 लाख रुपए रखी है। बैटरी रेंटल के साथ इसकी कीमत 2.5 रुपए प्रति किलोमीटर तय की गई है। ग्राहक इसे 11,000 रुपए का टोकन अमाउंट देकर बुक कर सकते हैं। कंपनी ने ब्लैकस्ट्रोम को सिर्फ टॉप वैरिएंट में पेश किया है।

JSW MG मोटर इंडिया के सेल्स हेड राकेश सेन ने कहा, ‘आधुनिक समय के भारतीय कार खरीदार ऐसे ऑप्शन चाहते हैं जो यूनिक हों और उनके व्यक्तित्व का प्रतिनिधित्व करते हों। वे बोल्ड कलर ऑप्शन की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जो उन्हें अलग बनाते हैं और उनकी पसंद को अलग बनाते हैं। हमें कॉमेट ब्लैकस्ट्रोम लॉन्च करते हुए बेहद खुशी हो रही है, जो स्टाइल और परिष्कार के साथ रोजमर्रा की यात्रा को बेहतर बनाने का वादा करता है।”

माइल्ड-हाइब्रिड इंजन के साथ आएगी नई स्विफ्ट, 2026 तक होगी लॉन्च; कंपनी ने काम शुरू किया

MG कॉमेट ब्लैकस्ट्रोम का लुक
MG कॉमेट ब्लैकस्ट्रोम अपने ‘स्टाररी ब्लैक’ एक्सटीरियर से स्टाइल को दिखाता है। इससे पूरी कार के का लुक भी बढ़ जाता है। कॉमेट EV नेमप्लेट को गहरे क्रोम में उकेरा गया है। वहीं, INTERNET INSIDE का लोगो ब्लैक कलर रंग में तैयार किया गया है, जो देखने वालों का ध्यान आकर्षित करता है। इंटीरियर में ब्लैक थीम को बरकरार रखा गया है, जिसमें लेदरेट सीटों पर रेड कलर में ‘ब्लैकस्टॉर्म’ शब्द लिखा हुआ है, जो प्रीमियम एक्सपीरियंस को बढ़ाता है।

इस SUV को अब तक 20000 से ज्यादा बुकिंग मिल चुकीं, ग्राहकों को ये कलर आ रहा पसंद

MG कॉमेट ब्लैकस्ट्रोम की रेंज
कंपनी ने म्यूजिक लवर्स का भी इस कार में खास ध्यान रखा है। इसमें अब 4 स्पीकर मिलते हैं। हुड के नीचे यह नया वर्जन 17.4 kWh की बैटरी से लैस है जो फास्ट-चार्जिंग को सपोर्ट करती है। ये सिंगल चार्ज पर 230Km की सर्टिफाइट रेंज देती है। ग्राहक अपने ब्लैकस्ट्रोम को एक विशेष एक्सेसरी पैक के साथ और भी इंटीग्रेटेड कर सकते हैं, जिसमें एक अनूठा बैज, व्हील कवर और हुड ब्रांडिंग और स्किड प्लेट जैसे ऑप्शनल स्टाइलिंग एलिमेंट शामिल हैं।

मकान मालिकों को अंतिम चेतावनी, नहीं तो होगी FIR

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कोरबा। बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए पुलिस ने नया आदेश जारी किया है। मकान मालिकों को अब किरायेदारों की पूरी जानकारी पुलिस को देनी होगी। कोरबा सीएसपी भूषण एक्का के मुताबिक, औद्योगिक नगरी होने के कारण बाहर से आने वाले मजदूरों की संख्या अधिक है। मकान मालिकों को किरायेदारों का आधार कार्ड, पैन कार्ड, फोटो और स्थाई पता थाना में जमा करना होगा। इसके लिए एक विशेष प्रारूप तैयार किया गया है। पुलिस किसी भी समय, दिन या रात में, थाना क्षेत्र में पूछताछ कर सकती है।

जांच में अगर किरायेदारों की जानकारी नहीं मिली तो मकान मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह नियम होटल, लॉज और रैन बसेरा संचालकों पर भी लागू होगा। उन्हें भी अपने यहां ठहरने वाले लोगों की जानकारी देनी होगी। लापरवाही बरतने पर उन पर भी कार्रवाई होगी। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर यह कदम उठाया गया है। इससे अपराध पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और किसी घटना की जांच में भी सहायता मिलेगी।

 

प्रेमानंद महाराज के दरबार में अचानक पहुंचे अमिताभ बच्चन? महाराज ने देखते ही दे दिया ये आदेश

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प्रेमानंद महाराज को कौन नहीं जानता है…अपनी सादगी और धर्म के प्रचार के लिए उन्हें पूरी दुनिया में पहचाना जाता है. प्रेमानंद महाराज से मिलने आए दिन देश की बड़ी बड़ी हस्तियां आती रहती हैं!

खुद भारतीय टीम के क्रिकेटर विराट कोहली अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा के साथ कई बार प्रेमानंद महाराज से मिल चुके हैं. अब ऐसे में प्रेमानंद महाराज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें डुप्लिकेट अमिताभ बच्चन उनसे खिताब करते दिखाई दे रहे हैं. जिसे देखने के बाद महाराज भी खिलखिला कर हंस पड़ते हैं. वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स भी तरह तरह के रिएक्शन दे रहे हैं.

प्रेमानंद महाराज के दरबार में पहुंचे अमिताभ बच्चन के डुप्लीकेट

वायरल वीडियो में शशिकांत पेडवाल जो कि हूबहू बॉलीवुड सुपरस्टार अमिताभ बच्चन जैसे दिखाई देते हैं और उनकी आवाज भी सदी के महानायक की तरह है, महाराज से खिताब कर रहे हैं. वो प्रेमानंद महाराज को बताते हैं कि वह बीमार लोगों को जल्दी ठीक होने के लिए मोटिवेट करते हैं. इसके अलावा उन्होंने बताया कि मैं कोविड के वक्त लोगों से अमिताभ बच्चन बनकर मिला और उन्हें मोटिवेट किया, जिससे लोगों को मन की खुशी मिली जिसके बाद वो जल्दी ठीक होकर घर चले गए. इसके बाद मुझे प्रशासन ने कहा कि मैं जो कर रहा हूं अच्छा कर रहा हूं, लिहाजा इसे जारी रखें. अब मैं कैंसर के मरीजों के पास भी जाता हूं और उन्हें मोटिवेट करके जल्दी ठीक होने की शुभकामनाएं देता हूं !

महाराज जी ने दे डाला आदेश

डुप्लिकेट अमिताभ बच्चन ने अपनी बात रखने के बाद प्रेमानंद महाराज से अपने लिए आदेश पूछा, जिसके बाद प्रेमानंद महाराज ने उन्हें लोगों से मिलते हुए भगवान के नाम का जाप कराने की सलाह भी दी. प्रेमानंद महाराज ने कहा कि लोगों के मन को भगवान नाम की तसल्ली देने से बड़ा और कोई काम नहीं है. करीब 4 मिनट से ज्यादा के इस वीडियो ने लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला दी और अब यूजर्स इस वीडियो को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं कर रहे हैं !

यूजर्स ने दिए रिएक्शन

वीडियो को सोशल मीडिया पर जमकर शेयर किया जा रहा है जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है तो वहीं कई लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है. ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स वीडियो को लेकर तरह तरह के रिएक्शन दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा…नकली अमिताभ बच्चन तो आ गए, अब असली अमिताभ बच्चन को भी महाराज के दरबार में आना चाहिए. एक और यूजर ने लिखा….अगर ये शख्स अपनी असलियत ना बताए तो लोग इन्हें ही अमिताभ बच्चन मान लें. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा…महाराज ही सच्चे साधु हैं, बाकी तो सब राजनीति के भूखे हैं !

महाकुंभ में एक रहस्यमयी नाग साधु के पास था जादूई त्रिशूल, वह महाशिवरात्रि पर इसे छिपाकर घाट की तरफ लेकर जा रहा था, तभी

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महाकुंभ में स्नान की भीड़ अपने चरम पर थी। महाशिवरात्रि के मौके पर स्नान न कर पाने की चिंता लोगों को परेशान कर रही थी। इसलिए किसी भी तरह लोग घाट तक पहुंचना चाहते थे। संगम तट तक जाने का रास्ता खचाखच भरा था, लेकिन दूर से यह नजारा देखने वाला एक साधु चिंतित दिख रहा था।

लंबे, घने बाल और लंबी दाढ़ी वाला वह साधु रहस्यमयी प्रतीत हो रहा था। कुछ पल भीड़ को देखने के बाद, उसने अपने हाथ में थामे प्राचीन त्रिशूल को सतरंगी कपड़े से ढक लिया और गंभीर भाव से भीड़ में प्रवेश करने लगा।

जैसे ही वह आगे बढ़ा, उसने त्रिशूल को कसकर पकड़ लिया, ताकि भीड़ में उसके हाथों से यह छूट न जाए। लेकिन भीड़ में प्रवेश करते ही त्रिशूल से दिव्य आभा निकलने लगी। मानो उसमें से कोई रोशनी निकल रही है जो कपड़े के ऊपर चमक रही है।तभी एक छोटे बच्चे की नजर भी में उस त्रिशूल पर पड़ गई। वह त्रिशूल को छूना चाहता था, लेकिन भीड़ की वजह से बार बार वह दूर हो जा रहा था। उसने अपने पिता से कहा, “पापा, देखो! उस बाबा के हाथ में क्या है? उसमें से रोशनी निकल रही है!” पिता ने साधु की ओर देखा। लंबे बाल, लंबी दाढ़ी और बड़े नाखूनों वाले उस साधु के शरीर पर कई गहरे निशान थे, मानो किसी ने उसे बुरी तरह घायल किया हो। ऐसा लग था, जैसे उसे किसी ने बहुत बुरी तरह कौड़ियां से मारा है। पिता ने बच्चे को गोद में उठा लिया। भीड़ आगे बढ़ रही थी। लेकिन पिता की नजर जैसे ही साधु पर पड़ी, साधु वहीं रुक गया। ऐसा लग रहा था जैसे साधु को पीछे से भी पता चल गया था कि किसी की नजर उसपर पड़ी है।

बच्चे के पिता ने फौरन नजरे चुराई और भीड़ में दूसरी तरफ चलने लगा। उनके जाते ही साधु और तेज तेज भीड़ में चलने लगा। उसके त्रिशूल को रोशनी अब बढ़ती जा रही थी, ऐसा लग था मानों साधु नहीं चाहता कि कोई उसे देखे। वहीं दूसरी तरफ बच्चे के पिता के मन में यही बात घूम रही थी कि आखिर ऐसा साधु उसने आज से पहले कभी नहीं देखा। साधु के हाथ में कोई चीज थी जो चमक रही थी, लेकिन वो चीज क्या थी, उसे पता लगाना था। बच्चे के पिता, नरेंद्र, जो पेशे से पत्रकार थे, को उस साधु का व्यवहार संदिग्ध लगा। उन्होंने अपनी पत्नी को बच्चे का ध्यान रखने के लिए कहा और खुद साधु का पीछा करने लगे।

क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि? जानें इससे जुड़ी कथाएं, महूर्त, विधि…

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क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि? जानें इससे जुड़ी कथाएं, महूर्त, विधि…

पौराणिक कथा के अनुसार, देवों के देव महादेव और मां पार्वती का विवाह फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को हुआ था। इसी वजह से हर साल फाल्गुन माह में महाशिवरात्रि के पर्व को बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस विशेष अवसर पर शिव भक्त भगवान शिव की बारात निकालते हैं। साथ ही भगवान भोलेनाथ और मां पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। साथ ही व्रत करते हैं। कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से वे जल्द प्रसन्न होते हैं

मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से साधक को वैवाहिक जीवन से संबंधित सभी परेशानियों से छुटकारा मिलता है। साथ ही दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।

महाशिवरात्रि शिव और शक्ति के अभिसरण का विशेष पर्व है। फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि के नाम से जाना जाता है।

अमांत पञ्चाङ्ग के अनुसार माघ माह की शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहते हैं। परन्तु पुर्णिमांत पञ्चाङ्ग के अनुसार फाल्गुन माह की मासिक शिवरात्रि को महा शिवरात्रि कहते हैं। दोनों पञ्चाङ्गों में यह चन्द्र मास की नामाकरण प्रथा है जो इसे अलग-अलग करती है। हालाँकि दोनों, पूर्णिमांत और अमांत पञ्चाङ्ग एक ही दिन महा शिवरात्रि के साथ सभी शिवरात्रियों को मानते हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो गए। उनके क्रोध की ज्वाला से समस्त संसार जलकर भस्म होने वाला था किन्तु माता पार्वती ने महादेव का क्रोध शांत कर उन्हें प्रसन्न किया इसलिए हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भोलेनाथ ही उपासना की जाती है और इस दिन को मासिक शिवरात्रि कहा जाता है।

माना जाता है कि महाशिवरात्रि के बाद अगर प्रत्येक माह शिवरात्रि पर भी मोक्ष प्राप्ति के चार संकल्पों भगवान शिव की पूजा, रुद्रमंत्र का जप, शिवमंदिर में उपवास तथा काशी में देहत्याग का नियम से पालन किया जाए तो मोक्ष अवश्य ही प्राप्त होता है। इस पावन अवसर पर शिवलिंग की विधि पूर्वक पूजा और अभिषेक करने से मनवांछित फल प्राप्त होता है।

अन्य भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन मध्य रात्रि में भगवान शिव लिङ्ग के रूप में प्रकट हुए थे। पहली बार शिव लिङ्ग की पूजा भगवान विष्णु और ब्रह्माजी द्वारा की गयी थी। इसीलिए महा शिवरात्रि को भगवान शिव के जन्मदिन के रूप में जाना जाता है और श्रद्धालु लोग शिवरात्रि के दिन शिव लिङ्ग की पूजा करते हैं। शिवरात्रि व्रत प्राचीन काल से प्रचलित है। हिन्दु पुराणों में हमें शिवरात्रि व्रत का उल्लेख मिलता हैं। शास्त्रों के अनुसार देवी लक्ष्मी, इन्द्राणी, सरस्वती, गायत्री, सावित्री, सीता, पार्वती और रति ने भी शिवरात्रि का व्रत किया था जो श्रद्धालु मासिक शिवरात्रि का व्रत करना चाहते है, वह इसे महा शिवरात्रि से आरम्भ कर सकते हैं और एक साल तक कायम रख सकते हैं। यह माना जाता है कि मासिक शिवरात्रि के व्रत को करने से भगवान शिव की कृपा द्वारा कोई भी मुश्किल और असम्भव कार्य पूरे किये जा सकते हैं। श्रद्धालुओं को शिवरात्रि के दौरान जागी रहना चाहिए और रात्रि के दौरान भगवान शिव की पूजा करना चाहिए। अविवाहित महिलाएँ इस व्रत को विवाहित होने हेतु एवं विवाहित महिलाएँ अपने विवाहित जीवन में सुख और शान्ति बनाये रखने के लिए इस व्रत को करती है।

महाशिवरात्रि अगर शनिवार के दिन पड़ती है तो वह बहुत ही शुभ होती है। शिवरात्रि पूजन मध्य रात्रि के दौरान किया जाता है। मध्य रात्रि को निशिता काल के नाम से जाना जाता है और यह दो घटी के लिए प्रबल होती है।

महाशिवरात्रि पूजा विधि

इस दिन सुबह सूर्योंदय से पहले उठकर स्नान आदि कार्यों से निवृत हो जाएं। अपने पास के मंदिर में जाकर भगवान शिव परिवार की धूप, दीप, नेवैद्य, फल और फूलों आदि से पूजा करनी चाहिए। सच्चे भाव से पूरा दिन उपवास करना चाहिए। इस दिन शिवलिंग पर बेलपत्र जरूर चढ़ाने चाहिए और रुद्राभिषेक करना चाहिए। इस दिन शिव जी रुद्राभिषेक से बहुत ही जयादा खुश हो जाते हैं. शिवलिंग के अभिषेक में जल, दूध, दही, शुद्ध घी, शहद, शक्कर या चीनी इत्यादि का उपयोग किया जाता है। शाम के समय आप मीठा भोजन कर सकते हैं, वहीं अगले दिन भगवान शिव के पूजा के बाद दान आदि कर के ही अपने व्रत का पारण करें। अपने किए गए संकल्प के अनुसार व्रत करके ही उसका विधिवत तरीके से उद्यापन करना चाहिए। शिवरात्रि पूजन मध्य रात्रि के दौरान किया जाता है। रात को चार पहाड़ जागकर यदि संभव ना हो तो कम से कम रात्रि 12 बजें के बाद थोड़ी देर जाग कर भगवान शिव की आराधना करें और श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें, इससे आर्थिक परेशानी दूर होती हैं। इस दिन सफेद वस्तुओं के दान की अधिक महिमा होती है, इससे कभी भी आपके घर में धन की कमी नहीं होगी। अगर आप सच्चे मन से मासिक शिवरात्रि का व्रत रखते हैं तो आपका कोई भी मुश्किल कार्य आसानी से हो जायेगा. इस दिन शिव पार्वती की पूजा करने से सभी कर्जों से मुक्ति मिलने की भी मान्यता हैं।

शिवरात्रि पर रात्रि जागरण और पूजन का महत्त्व

माना जाता है कि आध्यात्मिक साधना के लिए उपवास करना अति आवश्यक है। इस दिन रात्रि को जागरण कर शिवपुराण का पाठ सुनना हर एक उपवास रखने वाले का धर्म माना गया है। इस अवसर पर रात्रि जागरण करने वाले भक्तों को शिव नाम, पंचाक्षर मंत्र अथवा शिव स्रोत का आश्रय लेकर अपने जागरण को सफल करना चाहिए।

उपवास के साथ रात्रि जागरण के महत्व पर संतों का कहना है कि पांचों इंद्रियों द्वारा आत्मा पर जो विकार छा गया है उसके प्रति जाग्रत हो जाना ही जागरण है। यही नहीं रात्रि प्रिय महादेव से भेंट करने का सबसे उपयुक्त समय भी यही होता है। इसी कारण भक्त उपवास के साथ रात्रि में जागकर भोलेनाथ की पूजा करते है।

शास्त्रों में शिवरात्रि के पूजन को बहुत ही महत्वपूर्ण बताया गया है। कहते हैं महाशिवरात्रि के बाद शिव जी को प्रसन्न करने के लिए हर मासिक शिवरात्रि पर विधिपूर्वक व्रत और पूजा करनी चाहिए। माना जाता है कि इस दिन महादेव की आराधना करने से मनुष्य के जीवन से सभी कष्ट दूर होते हैं। साथ ही उसे आर्थिक परेशनियों से भी छुटकारा मिलता है। अगर आप पुराने कर्ज़ों से परेशान हैं तो इस दिन भोलेनाथ की उपासना कर आप अपनी समस्या से निजात पा सकते हैं। इसके अलावा भोलेनाथ की कृपा से कोई भी कार्य बिना किसी बाधा के पूर्ण हो जाता है।

शिवपुराण कथा में छः वस्तुओं का महत्व

बेलपत्र से शिवलिंग पर पानी छिड़कने का अर्थ है कि महादेव की क्रोध की ज्वाला को शान्त करने के लिए उन्हें ठंडे जल से स्नान कराया जाता है।

शिवलिंग पर चन्दन का टीका लगाना शुभ जाग्रत करने का प्रतीक है। फल, फूल चढ़ाना इसका अर्थ है भगवान का धन्यवाद करना।

धूप जलाना, इसका अर्थ है सारे कष्ट और दुःख दूर रहे।

दिया जलाना इसका अर्थ है कि भगवान अज्ञानता के अंधेरे को मिटा कर हमें शिक्षा की रौशनी प्रदान करें जिससे हम अपने जीवन में उन्नति कर सकें।

पान का पत्ता, इसका अर्थ है कि आपने हमें जो दिया जितना दिया हम उसमें संतुष्ट है और आपके आभारी हैं।

समुद्र मंथन की कथा

समुद्र मंथन अमर अमृत का उत्पादन करने के लिए निश्चित थी, लेकिन इसके साथ ही हलाहल नामक विष भी पैदा हुआ था। हलाहल विष में ब्रह्मांड को नष्ट करने की क्षमता थी और इसलिए केवल भगवान शिव इसे नष्ट कर सकते थे।भगवान शिव ने हलाहल नामक विष को अपने कंठ में रख लिया था। जहर इतना शक्तिशाली था कि भगवान शिव बहुत दर्द से पीड़ित थे और उनका गला बहुत नीला हो गया था। इस कारण से भगवान शिव ‘नीलकंठ’ के नाम से प्रसिद्ध हैं। उपचार के लिए, चिकित्सकों ने देवताओं को भगवान शिव को रात भर जागते रहने की सलाह दी। इस प्रकार, भगवान भगवान शिव के चिंतन में एक सतर्कता रखी। शिव का आनंद लेने और जागने के लिए, देवताओं ने अलग-अलग नृत्य और संगीत बजाने लगे। जैसे सुबह  हुई, उनकी भक्ति से प्रसन्न भगवान शिव ने उन सभी को आशीर्वाद दिया। शिवरात्रि इस घटना का उत्सव है, जिससे शिव ने दुनिया को बचाया। तब से इस दिन, भक्त उपवास करते है

क्या आप भगवान शिव के दशावतार के विषय में जानते हैं..

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क्या आप भगवान शिव के दशावतार के विषय में जानते हैं..??

हम सभी ने भगवान विष्णु के प्रसिद्ध दशावतारों के विषय में जानते हैं किन्तु क्या आपको महादेव के दशावतार के विषय में पता है? आम तौर पर जब भी महादेव के अवतरण की बात होती है तो उनके विषय में द्वादश ज्योतिर्लिंग, 11 रुद्रावतार एवं उनके 19 अवतारों के बारे में जानकारी मिलती है। किन्तु श्रीहरि की भांति ही महादेव के भी दशावतार हैं। महादेव के ये दस अवतार मूलतः तंत्र विद्या से सम्बंधित हैं और इन्हे ही तंत्र शास्त्र का जनक माना गया है।

इससे पहले हमने माता सती के दस रूप, जिन्हे दस महाविद्या कहा जाता है, उनके विषय में एक लेख प्रकाशित किया था। यही दस महाविद्या महादेव के इन दस अवतारों की पत्नियां हैं। दस महाविद्या के विषय में आप विस्तार से यहाँ जान जान सकते हैं। तो आइये महादेव के दशावतारों के विषय में संक्षेप में जानते हैं।

1. महाकाल: महादेव के दशावतारों में प्रथम स्थान भगवान महाकाल का है। ये महादेव के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग से सम्बंधित हैं। इनकी पत्नी का नाम महाकाली है। एक कथा के अनुसार दूषण नामक एक राक्षस था जिसने घोर तप कर ब्रह्मा जी को प्रसन्न कर अतुल बल का वरदान प्राप्त कर लिया। उस वरदान के मद में उसने ब्राह्मणों पर अत्याचार करना आरम्भ किया। उसके अत्याचारों से तंग आकर ऋषियों ने ब्रह्माजी से प्रार्थना की। ब्रह्मा जी ने स्वयं उसे वरदान दिया था इसीलिए उन्होंने महादेव से उस राक्षस का वध करने का अनुरोध किया। ब्रह्माजी के अनुरोध पर महादेव ने दूषण को चेतावनी दी किन्तु फिर भी उसका अत्याचार नहीं रुका। उसने उज्जैन जाकर ब्राह्मणों का वध करना आरम्भ किया। तब सभी ने एक स्वर में महादेव को पुकारा। तब महादेव महाकाल अवतार लेकर उज्जैन में प्रकट हुए और उन्होंने अपनी एक ही हुंकार में दूषण का वध कर दिया। बाद में भक्तों की प्रार्थना पर महादेव वहां महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में भी स्थित हुए।

2. तारकेश्वर: भगवान शिव के दशावतार में दूसरा स्थान है तारकेश्वर महादेव का। उनके इस अवतार में उनकी शक्ति हैं माता तारा। ये अवतार तारकासुर से जुड़ा है। जब तारकासुर को ये वरदान मिला कि उसका वध केवल महादेव के पुत्र के हांथों ही हो सकता है तो स्वयं को अमर मान कर उसने अत्याचार की सारी सीमाओं को लाँघ दिया। अंततः कालांतर में शिवपुत्र कार्तिकेय के द्वारा उसका वध किया गया। जब वो मरणासन्न अवस्था में था और अपनी अंतिम सांसें ले रहा था तो उसे अपने कृत्यों पर बड़ा पश्चाताप हुआ। अपने अंत समय में उसे महादेव के दर्शनों की अभिलाषा जागी। तब भोलेनाथ ने तारकेश्वर अवतार के रूप में उसे दर्शन दिए और ये वरदान भी दिया कि कालांतर में उसके नाम से लोग उनकी पूजा करेंगे। आज तारकेश्वर महादेव का मंदिर उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में है।

3. बाल भुवनेश: दशावतार में तीसरा स्थान है भगवान भुवनेश का। इस अवतार में महादेव अपने बाल रूप में प्रकट हुए थे इसी कारण इन्हे बाल भुवनेश भी कहा जाता है। इनकी शक्ति है माता बाल भुवनेश्वरी। एक कथा के अनुसार अपने इस अवतार में महादेव ने भुवनेश नामक एक भील का उद्धार किया था। अपने इस अवतार में महादेव 14 भुवनों की रक्षा और पालन करते हैं। उत्तराखंड के कोटद्वार में भगवान भुवनेश्वर का मंदिर है। ऐसी मान्यता है कि उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर का नाम भी महादेव के इसी अवतार पर पड़ा है।

4. षोडश विद्येश: शिव दशावतार में चौथा स्थान है भगवान षोडश विद्येश का। इनकी शक्ति षोडशा विद्येशा हैं जिन्हे त्रिपुरसुन्दरी के नाम से भी जाना जाता है। ये तो हम सभी जानते हैं कि कलाएं 16 प्रकार की होती हैं। इस अवतार में भगवान शिव अपनी सभी १६ कलाओं से युक्त होते हैं इसीलिए इन्हे षोडशा विद्येश कहा जाता है। अपने इस अवतार में महादेव मनुष्य को सुख, समृद्धि एवं मोक्ष प्रदान करते हैं।

5. भैरवनाथ: दशावतार में पांचवां स्थान है भगवान भैरव का। ये महादेव का सर्वाधिक प्रसिद्ध अवतार है। इनकी शक्ति माता भैरवी हैं। ये अवतार देखने में बहुत ही भयानक हैं और इसीलिए इन्हे भैरव कहा जाता है। भैरव का अर्थ होता है जो देखने में बहुत भयानक हो और भक्तों की भय से रक्षा करें। वैसे तो भैरव कई हैं किन्तु अष्ट भैरव सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं। उनमें भी काल भैरव सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं। इन्होने ही परमपिता ब्रह्मा के पांचवें सर, जो महादेव की निंदा करता था, उसे काट डाला था। भैरव को माता का गण भी माना जाता है। जब श्रीहरि ने अपने सुदर्शन से माता सती के पार्थिव शरीर के 51 टुकड़े किये जो शक्तिपीठ कहलाये तब महादेव ने अपने शरीर से कई भैरवों को उत्पन्न किया और उन्हें उन सभी शक्तिपीठ का रक्षक बनाया।

6. छिन्नमस्तक: महादेव के छठे दशावतार हैं श्री छिन्नमस्तक। इनकी शक्ति माता छिन्नमस्तिका हैं। महादेव का ये अति प्रचंड अवतार शीशहीन है और ऐसी ही इनकी पत्नी भी हैं। इनका कटा सर ये अपने ही हाथ में पकडे रहते हैं और अपने दूसरे हाथ में त्रिशूल को धारण करते हैं। ऐसी कथा है कि जब माता सती ने छिन्नमस्तिका अवतार में असुरों का संहार किया तो उनकी सेना रक्तपान से तृप्त नहीं हुई। इस पर उन्होंने स्वयं अपना मस्तक काट लिया जिससे उनकी सेना तृप्त हो गयी। तब महादेव ने भी छिन्नमस्तक अवतार लेकर अपना सर अपने ही त्रिशूल से काट लिया। इन दोनों की पूजा विशेष रूप से अघोरियों और तांत्रिकों के लिए अनिवार्य होती है।

7. धूम्रवान: महादेव के सातवें दशावतार हैं श्री धूम्रवान। इन्हे द्यूमवान भी कहा जाता है। इनकी शक्ति माता धूमावती हैं जो मृत्यु एवं विधवाओं की अधिष्ठात्री हैं। ये माता लक्ष्मी की बहन हैं और इनका एक नाम अलक्ष्मी भी है। अपने इस स्वरुप में महादेव धुंए के समान माने गए हैं इसीलिए उनका ये नाम पड़ा है। भगवान धूम्रवान का रूप भी विकट बताया गया है, किन्तु इस रूप में भी वे कल्याणकारी हैं और अपने भक्तों के भय को दूर करने वाले हैं।

8. बगलामुख: दशावतार में आठवां स्थान है भगवान बगलामुख का। इनकी शक्ति माता बगलामुखी हैं। ये महादेव का अति उग्र रूप माना जाता है किन्तु अपने भक्तों को ये आनंद प्रदान करने वाला है। इनका रूप पीला है और अपने इस अवतार में भगवान शिव अपने सभी भक्तों को उनके कर्मों के अनुसार उसका फल देते हैं। इनकी पत्नी माता बगलामुखी के तीन प्रमुख मंदिर हैं, जिनमें से कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) के मंदिर की सर्वाधिक मान्यता है। देव बगलाबमुख भी उन्ही मंदिरों में उनके साथ निवास करते हैं।

9. मातंग: दशावतार में नवां स्थान है भगवान मातंग का। इनकी शक्ति है माता मातंगी। इनका रंग हरा है। मृत्यु को भी जीत लेने के कारण इनका एक नाम मृत्युंजय भी है। रामायण के अनुसार ऐसी मान्यता है कि महादेव ने अपना ये स्वरुप महर्षि मातंग की तपस्या से प्रसन्न होकर लिया था। मध्यप्रदेश के खुजराहों मंदिर में मतंगेश्वर महादेव का शिवलिंग स्थापित है। ये एकमात्र जीवित शिवलिंग माना जाता है जो हर वर्ष ऊपर और नीचे की ओर एक अंगुल बढ़ रहा है। ऐसी मान्यता है कि जब ये शिवलिंग पाताल तक पहुँच जाएगा, उसी समय कलियुग का अंत हो जाएगा।

10. कमल: महादेव का दसवां और अंतिम अवतार कमल अवतार है। इनकी शक्ति माता कमला है जो माता लक्ष्मी के गुणों से युक्त हैं। अपने इस अवतार में महादेव सभी ६४ विद्याओं से युक्त होते हैं। कहा जाता है कि दिव्य और पूर्ण कमल के पुष्प में भी कुल 64 पंखुड़ियां होती है इसलिए महादेव के इस अवतार को कमल के नाम से जाना जाता है। जिस प्रकार माता कमला में माता लक्ष्मी के गुण भी हैं, उसी प्रकार भगवान कमल भी नारायण के गुणों से युक्त होते हैं।

प्रयागराज महाकुंभ से सृजित हुआ 3 लाख करोड़ का कारोबार, 56.25 करोड़ श्रद्धालु लगा चुके हैं डुबकी

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कुंभ मेला विशेष

प्रयागराज महाकुंभ से सृजित हुआ 3 लाख करोड़ का कारोबार, 56.25 करोड़ श्रद्धालु लगा चुके हैं डुबकी: व्यापार और आस्था-संस्कृति का नया बेंचमार्क स्थापित…

प्रयागराज महाकुंभ अपने अवसान पर है। दुनिया का सबसे बड़ा समागम कुंभ सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक केंद्र बनकर भी उभरा है। कुंभ के लगभग 40 दिनों में लगभग 3 लाख करोड़ रुपए (360 अरब अमेरिकी डॉलर) का कारोबार होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसकी जानकारी अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (CAIT) ने दी है।

CAIT के महासचिव और चाँदनी चौक के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि कुंभ ने आस्था और अर्थव्यवस्था के बीच संबंध स्थापित कर दिया है। उन्होंने कहा कि महाकुंभ के कारण स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिल रहा है, क्योंकि महाकुंभ थीम पर आधारित उत्पादों जैसे डायरी, कैलेंडर, जूट बैग और स्टेशनरी की माँग में भारी वृद्धि हुई है। सावधानीपूर्वक ब्रांडिंग के कारण बिक्री में वृद्धि हुई है।

खंडेलवाल ने कहा कि महाकुंभ के शुरुआत होने से पहले प्रारंभिक अनुमानों में 40 करोड़ लोगों के आने और लगभग 2 लाख करोड़ रुपए का कारोबार होने का अनुमान लगाया गया था। हालाँकि, 40 दिनों में महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 18 फरवरी तक 56 करोड़ पहुँच चुकी है। महाकुंभ 26 फवरी तक है। ऐसे में यह आँकड़ा कम से कम 60 करोड़ पहुँचने का अनुमान है।

श्रद्धालुओं की इस आँकड़े के साथ ही कारोबार भी 3 से अधिक होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसके कारण उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में जबरदस्त वृद्धि हुई है और रोजगार के नए साधन भी पैदा हुए हैं। खंडेलवाल ने कहा कि महाकुंभ के कारण कई व्यावसायिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर आर्थिक गतिविधियाँ देखी गई हैं, जिनमें आतिथ्य और आवास, खाद्य और पेय क्षेत्र, परिवहन और रसद प्रमुख हैं।

इसके अलावा, धार्मिक पोशाक, पूजा सामग्री, हस्तशिल्प, वस्त्र, अन्य उपभोक्ता सामान, स्वास्थ्य देखभाल एवं कल्याण सेवाएँ, मीडिया, विज्ञापन एवं मनोरंजन, नागरिक सेवाएँ, दूरसंचार, मोबाइल, एआई-आधारित तकनीक, सीसीटीवी कैमरे और अन्य उपकरण आदि से संबंधित व्यवसायिक क्षेत्रों के कारोबार में भारी उछाल देखने को मिला है।

खंडेलवाल ने कहा कि महाकुंभ से संबंधित आर्थिक फायदा सिर्फ प्रयागराज तक ही सीमित नहीं है। इसका असर प्रयागराज के 150 किलोमीटर क्षेत्र की परिधि में देखने को मिला है। इसके अलावा, अयोध्या, काशी, मथुरा, विंध्याचल में श्रद्धालुओं के जाने के कारण इन शहरों एवं उसके आसपास के इलाकों में भी भारी आर्थिक गतिविधियाँ हुई हैं, जिसका फायदा लोगों और सरकार को हुआ है।

खंडेलवाल के अनुसार, महाकुंभ ने भारत में व्यापार, वाणिज्य, कारोबार, सांस्कृतिक क्षेत्र में एक नया बेंचमार्क स्थापित किया है। बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने महाकुंभ को लेकर प्रयागराज में फ्लाईओवर, सड़कों और अंडरपास के सुधार के लिए 7500 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इनमें से 1,500 करोड़ रुपए महाकुंभ व्यवस्था के लिए निर्धारित किए गए थे।

महाकुंभ को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 19 फरवरी को 2 बजे तक 56.25 करोड़ लोग आस्था की डुबकी लगा चुके हैं। उन्होंने कहा, “जब हम सनातन धर्म, मां गंगा, भारत या महाकुंभ के खिलाफ कोई निराधार आरोप या फर्जी वीडियो बनाते हैं तो यह इन 56 करोड़ लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ है।”

सीएम योगी ने कहा, “यह आयोजन किसी पार्टी या संगठन विशेष का नहीं, यह आयोजन समाज का है। सरकार अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए सेवक के रूप में है। यह हमारा सौभाग्य है कि हमारी सरकार को इस सदी के महाकुंभ से जुड़ने का अवसर मिला। देश और दुनिया ने इस आयोजन में भाग लिया है और तमाम झूठे अभियानों को दरकिनार करते हुए इसे सफलता की नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है।”

 

भक्ति, सेवा और समर्पण: महाशिवरात्रि पर नगर पालिका अध्यक्ष व पार्षदों ने भूतेश्वरनाथ में नवाया शीश, जलाभिषेक कर मांगी नगर की खुशहाली,भंडारे में की आत्मीय सेवा

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महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर नगर पालिका के नवनियुक्त अध्यक्ष रिखी राम यादव सहित पार्षदों ने भूतेश्वर नाथ महादेव मंदिर में जलाभिषेक कर नगर की समृद्धि और जनता के कल्याण की प्रार्थना की। सुबह सबसे पहले भोलेनाथ के दरबार में हाजिरी लगाकर विधिवत पूजा-अर्चना और जलाभिषेक किया गया। इसके पश्चात सभी जनप्रतिनिधियों ने महाप्रसाद भंडारे में पहुंचकर सेवा कार्यों में अपना योगदान दिया।

श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था

अध्यक्ष रिखी राम यादव ने बताया कि महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। पार्किंग से लेकर भंडारे तक की व्यवस्था को सुव्यवस्थित किया गया, ताकि शिवभक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, जिससे यह स्पष्ट है कि शिव की महिमा अपरंपार है। खासकर सावन सोमवार और महाशिवरात्रि के समय यह स्थान गहरी भक्ति और आस्था का केंद्र बन जाता है।

निशुल्क भंडारे के लिए रोहरा परिवार को धन्यवाद

इस अवसर पर रिखी राम यादव ने रोहरा परिवार का विशेष धन्यवाद किया, जो पिछले 25 वर्षों से निःशुल्क भंडारे का आयोजन कर रहा है। उन्होंने कहा कि सेवा भाव ही सच्ची शिवभक्ति है, और रोहरा परिवार से समाज को प्रेरणा मिलती है।