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सुशासन तिहार 2026: टेम्पू में 30 मई को आयोजित होगा जनसमस्या निवारण शिविर…

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13 गांवों के ग्रामीणों को मिलेगा समस्याओं के समाधान का अवसर’

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार जशपुर जिले में “सुशासन तिहार 2026” के अंतर्गत जनसमस्या निवारण शिविरों का आयोजन लगातार जारी है। सुशासन तिहार के माध्यम से शासन की योजनाओं और सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाते हुए आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जा रहा है।

इसी क्रम में 30 मई 2026 को जशपुर जिले के जनपद पंचायत मनोरा अंतर्गत ग्राम पंचायत टेम्पू में जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित किया जाएगा। इस शिविर में 13 गांवों के ग्रामीण शामिल होकर अपनी मांगों एवं समस्याओं से संबंधित आवेदन प्रस्तुत कर सकेंगे।

शिविर में सुरजूला, रजला, खुटापानी, घाघरा, करदना, टेम्पू, मुटू, पोड़ीपटकोना, चडि़या, सोगड़ा, मनोरा, खोगा एवं डुमरटोली के ग्रामीणों को विभिन्न विभागों की योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ भी प्रदान किया जाएगा।

सुशासन तिहार के अंतर्गत नागरिक लिखित रूप में अपने आवेदन प्रस्तुत करेंगे, जिनका मौके पर ही निराकरण करने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही प्राप्त आवेदनों के शीघ्र समाधान के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे।

जिला प्रशासन ने क्षेत्र के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे निर्धारित तिथि पर शिविर में पहुंचकर शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाएं तथा अपनी समस्याओं और मांगों से संबंधित आवेदन प्रस्तुत करें।

कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने शिविरों के सफल एवं सुचारू संचालन के लिए नोडल अधिकारियों एवं विभागीय अधिकारियों को सौंपे गए दायित्वों का गंभीरता एवं निष्ठापूर्वक निर्वहन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

खरीफ 2026 की तैयारी तेज: किसानों को समय पर मिल रहा खाद-बीज….

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सहकारी समितियों के माध्यम से मांग अनुसार वितरण जारी, प्रशासन कर रहा सतत मॉनिटरिंग’

खरीफ सीजन 2026 को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा किसानों को समय पर खाद और बीज उपलब्ध कराने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। प्रदेशभर की सहकारी समितियों में खाद-बीज का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया गया है तथा किसानों की मांग के अनुरूप लगातार वितरण किया जा रहा है। शासन-प्रशासन द्वारा खेती के कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए आपूर्ति व्यवस्था पर सतत निगरानी रखी जा रही है।

बलरामपुर जिले में भी किसानों को खाद-बीज उपलब्ध कराने की दिशा में प्रशासन गंभीरता से कार्य कर रहा है। कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के निर्देशानुसार सहकारी समितियों में खाद-बीज की सतत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है तथा अधिकारियों को वितरण व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखने कहा गया है। किसान प्रतिदिन समितियों में पहुंचकर अपनी आवश्यकता अनुसार खाद और बीज प्राप्त कर रहे हैं।

कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार बलरामपुर जिले में अब तक 9254 मीट्रिक टन खाद का भंडारण किया जा चुका है, जिसमें से 1311 मीट्रिक टन खाद किसानों को वितरित किया गया है। वहीं खरीफ 2026 के लिए 2000 क्विंटल बीज वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके विरुद्ध 1734 क्विंटल बीज का भंडारण कर सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है।

राज्य सरकार का उद्देश्य किसानों को समय पर कृषि सामग्री उपलब्ध कराकर खेती को सुगम बनाना तथा उत्पादन बढ़ाने में सहयोग प्रदान करना है। किसानों ने भी समितियों में खाद-बीज की उपलब्धता पर संतोष व्यक्त करते हुए शासन और प्रशासन की पहल की सराहना की है।

छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजिटल प्रशासन का नया अध्याय

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सेवा सेतु: जनता के द्वार डिजिटल सरकार’

लोक सेवा केंद्रों का उन्नयन, अबसेवा सेतु केंद्रके रूप में मिलेंगी 442 डिजिटल सेवाएं’

‘जनता के द्वार डिजिटल सरकार’ का अर्थ है सरकारी योजनाओं और सेवाओं को नागरिकों के घर तक पहुँचाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करना। यह प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता और आम जनता तक सीधी पहुँच सुनिश्चित करने की एक व्यापक पहल है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप प्रदेश में सुशासन और डिजिटल प्रशासन को मजबूत बनाने की दिशा में राज्य शासन ने महत्वपूर्ण पहल की है। इसी क्रम में बीजापुर जिले में लोक सेवा केंद्रों का उन्नयन कर उन्हें अब ‘सेवा सेतु केंद्र’ के रूप में संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य नागरिकों को शासकीय सेवाएं सरल, सुलभ और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराना है।

डिजिटल सेवाओं से प्रशासन हुआ और अधिक नागरिक केंद्रि

‘सेवा सेतु’ व्यवस्था से प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक व्यवस्थित, जवाबदेह और नागरिक हितैषी बनी हैं। इसका सबसे अधिक लाभ ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मिल रहा है। अब लोक सेवा केंद्र ‘सेवा सेतु केंद्र’ और उनके ऑपरेटर ‘सेवा सेतु प्रबंधक’ कहलाएंगे। जिले के सभी विकासखंडों के सचिवों को इसके संचालन के लिए प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

73 से बढ़कर अब 442 सेवाएं उपलब्ध

पहले लोक सेवा केंद्रों के माध्यम से 73 सेवाएं उपलब्ध थीं, जबकि अब सेवा सेतु केंद्रों के जरिए 442 डिजिटल सेवाएं नागरिकों को एक ही मंच पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल्स के जरिए अब लोग अपने स्मार्टफोन से ही जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, पेंशन योजना, और बिजली बिल भुगतान जैसी सेवाओं का लाभ घर बैठे उठा सकते हैं।

अब नहीं लगाने होंगे दफ्तरों के चक्कर

नई व्यवस्था के तहत नागरिकों को अब अलग-अलग सेवाओं के लिए राजस्व कार्यालय, जनपद पंचायत, नगर पालिका या अन्य विभागों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। एक ही पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना, दस्तावेज अपलोड करना, आवेदन की स्थिति देखना और निर्धारित समय-सीमा में सेवा प्राप्त करना संभव हो गया है।

गांव के पास ही मिलेगी डिजिटल सुविधा

ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को छोटे-छोटे कार्यों और प्रमाण-पत्रों के लिए अब तहसील या जिला मुख्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी। उन्हें उनके गांव के नजदीक ही डिजिटल सेवाएं उपलब्ध होंगी। इससे समय और यात्रा खर्च दोनों की बचत होगी। सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने की मजबूरी को खत्म करके, नौकरशाही की दूरी को कम करती है और आम आदमी को सशक्त बनाती है।

व्हाट्सएप से भी मिलेगी सुविधा

तकनीक के बढ़ते उपयोग को देखते हुए सेवा सेतु सेवाओं को व्हाट्सएप से भी जोड़ा गया है। अब नागरिक घर बैठे व्हाट्सएप के माध्यम से सेवाओं की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और आवेदन की स्थिति भी जान सकते हैं।

अनेक महत्वपूर्ण सेवाएं एक ही मंच पर

सेवा सेतु केंद्रों के माध्यम से जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, विवाह प्रमाण पत्र, राजस्व प्रकरण, नाम परिवर्तन के लिए राजपत्र प्रकाशन तथा सामाजिक सुरक्षा पेंशन सहित कई महत्वपूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

समयबद्ध और पारदर्शी सेवा वितरण

प्रत्येक सेवा के लिए समय-सीमा निर्धारित होने से कार्यों के निराकरण में तेजी आई है। इससे सेवा वितरण अधिक पारदर्शी और प्रभावी हुआ है। यह पहल मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सुशासन मॉडल को मजबूत करते हुए डिजिटल छत्तीसगढ़ की दिशा में बड़ा कदम साबित हो रही है। सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने की मजबूरी को खत्म करके, नौकरशाही की दूरी को कम करती है और आम आदमी को सशक्त बनाती है

छत्तीसगढ़ रेल कॉर्पोरेशन की बैठक सम्पन्न…

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छत्तीसगढ़ रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की बैठक आज मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।

बैठक में कटघोरा- डोंगरगढ़ रेल लाइन सहित प्रदेश में चल रही अन्य रेल परियोजनाओं की प्रगति और बोर्ड के कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। अधिकारियों ने निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति, तकनीकी पहलुओं और समयसीमा पर चर्चा की।

बैठक में सचिव वाणिज्य एवं उद्योग विभाग एवं रेल परियोजनाएं श्री रजत कुमार, विशेष सचिव मुख्यमंत्री सचिवालय एवं आयुक्त जनसंपर्क तथा संचालक खनिज विकास निगम श्री रजत बंसल सहित वित्त विभाग एवं रेलवे कॉर्पोरेशन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

SC’ एशियन गेम्स के ट्रायल में शामिल होने की विनेश फोगाट को मिली इजाजत…

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सुप्रीम कोर्ट ने विनेश फोगाट की अपील पर उनसे कहा कि 14 दिसंबर 2024 को आपने ब्रेक लिया, फिर मां बनीं, आपने डोपिंग टेस्ट में हिस्सा नहीं लिया. आप कहां हैं इसकी जानकारी भी नहीं दी.

इंडियन फ्रीस्टाइल रेसलर विनेश फोगाट को एशियाई खेलों के लिए 30 और 31 मई को होने वाले चयन ट्रायल में शामिल होने की अनुमति मिल गई है. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है और कुश्ती संघ (WFI) की याचिका पर नोटिस जारी किया है. अब 1 जून को आगे की सुनवाई होगी. हालांकि, कोर्ट ने विनेश फोगाट की मांग पर कई सवाल भी खड़े किए हैं. कोर्ट ने कहा कि विनेश फोगाट कोई साधारण एथलीट नहीं हैं, उन्होंने कई उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन देश पहले है.

सुप्रीम कोर्ट ने विनेश फोगाट को ट्रायल में शामिल होने की इजाजत देते हुए कहा, ‘चूंकि, ट्रायल कल ही है, इसलिए हम आपको रोकना नहीं चाह रहे. हालांकि, हाईकोर्ट के आदेश को लेकर हमारे पास कई सवाल हैं. आपको उनका जवाब देना होगा.’

दिल्ली हाईकोर्ट ने विनेश फोगाट को एशियाई खेल 2026 के सेलेक्शन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति दे दी थी, लेकिन रेस्लिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी. शुक्रवार (29 मई, 2026) को डब्ल्यूएफआई की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने विनेश फोगाट से कहा, ‘आप साधारण एथलीट नहीं हैं, लेकिन हमारे सामने कुछ सवाल हैं.’

विनेश फोगाट की वकील ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध करते हुए कहा, ‘मैं सिर्फ ट्रायल में हिस्सा लेने की मांग कर रही हूं. सालभर पहले मां बनी एक महिला सिर्फ कोर्ट से यही मांग रही है कि उसे ट्रायल में हिस्सा लेने दिया जाए.’ सुप्रीम कोर्ट ने इस अपील पर उनसे कहा कि 14 दिसंबर 2024 को आपने ब्रेक लिया, फिर मां बनीं, आपने डोपिंग टेस्ट में हिस्सा नहीं लिया. आप कहां हैं इसकी जानकारी भी नहीं दी. जज ने कहा कि आपने बाद में बताया कि आप विधानसभा की कार्यवाही में व्यस्त थीं, पर आपका स्पष्टीकरण स्वीकार नहीं किया गया.

सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि फरवरी, 2026 में एशियन गेम्स से जुड़ी प्रक्रिया शुरू हो गई, उसके लिए चार खेलों में भाग लेना था, जो आपने नहीं किया. आपने मई में सक्रियता दिखाते हुए याचिका दाखिल की. जज ने आगे कहा,  ‘हमें ध्यान रखना होगा कि भारतीय खेल, विश्व खेल से जुड़ा है. हाईकोर्ट ने खेल संघ के नियम को एक्सक्लूजनरी कह दिया, यह अजीब था. नियम काफी समय से हैं और सबके लिए हैं. आपने खेल में बहुत उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन देश पहले है.’

Brahmos Missile Export: पाकिस्तान को जिसने किया तबाह, भारत की उस ब्रह्मोस के दीवाने हुए मुस्लिम देश, ये रही पूरी लिस्ट..

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फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया, मलेशिया भी ब्रह्मोस खरीदने की दौड़ में शामिल हैं. दक्षिण चीन सागर में चीन के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए ये देश अपनी सैन्य ताकत बढ़ाना चाहते हैं.

भारत की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस आज सिर्फ देश की सैन्य ताकत का प्रतीक नहीं रही, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भी उसकी मांग तेजी से बढ़ रही है. जिस मिसाइल को हालिया भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान भारत की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत के रूप में देखा गया, उसी ब्रह्मोस को अब कई मुस्लिम देश अपनी सुरक्षा का भरोसेमंद हथियार मान रहे हैं. दक्षिण चीन सागर से लेकर फारस की खाड़ी तक कई देश इस मिसाइल को खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं, जिससे भारत की रक्षा निर्यात क्षमता को नई पहचान मिल रही है.

दक्षिण चीन सागर से खाड़ी देशों तक बढ़ी मांग
दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों से चिंतित कई दक्षिण-पूर्व एशियाई देश अपनी समुद्री सुरक्षा मजबूत करने के लिए ब्रह्मोस को एक प्रभावी विकल्प मान रहे हैं. भारत का पहला विदेशी ग्राहक फिलीपींस पहले ही इस मिसाइल प्रणाली को अपने रक्षा बेड़े में शामिल कर चुका है. वर्ष 2022 में दोनों देशों के बीच 375 मिलियन डॉलर का समझौता हुआ था, जिसके तहत ब्रह्मोस की तीन तटीय एंटी-शिप बैटरियों की आपूर्ति की जा रही है.

फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया और मलेशिया भी ब्रह्मोस खरीदने की दौड़ में शामिल हैं. रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिण चीन सागर में चीन के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए ये देश अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करना चाहते हैं. मलेशिया ने अपने Su-30MKM लड़ाकू विमानों के लिए ब्रह्मोस के एयर-लॉन्च संस्करण में भी रुचि दिखाई है.

वियतनाम के साथ बड़े समझौते की संभावना
वियतनाम भी ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली खरीदने के लिए गंभीरता से बातचीत कर रहा है. संभावित सौदे का आकार 450 से 700 मिलियन डॉलर के बीच बताया जा रहा है. इस समझौते में सेना और नौसेना दोनों के लिए मिसाइल प्रणालियां शामिल हो सकती हैं. दक्षिण चीन सागर में चीन के साथ बढ़ते तनाव के कारण वियतनाम अपनी रक्षा तैयारियों को और मजबूत करना चाहता है.

खाड़ी देशों की भी बढ़ी दिलचस्पी
मध्य पूर्व के कई देश भी ब्रह्मोस को अपनी सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बनाना चाहते हैं. संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब ने इस मिसाइल प्रणाली में विशेष रुचि दिखाई है. क्षेत्रीय तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को देखते हुए ब्रह्मोस को एक प्रभावी विकल्प माना जा रहा है. इसके अलावा कतर, ओमान और मिस्र भी इस मिसाइल प्रणाली को खरीदने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रह्मोस की लंबी दूरी और तेज गति इसे खाड़ी देशों के लिए आकर्षक बनाती है.

ब्रह्मोस की ताकत क्या है?
ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज परिचालन सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में शामिल है. यह ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तेज, यानी मैक 2.8 से मैक 3.0 की रफ्तार से उड़ान भर सकती है. इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता है, जिससे दुश्मन के रडार इसे देर से पहचान पाते हैं. इसके अलावा इसे जमीन, समुद्र, हवा और पनडुब्बी जैसे विभिन्न प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ा भरोसा
रक्षा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, हाल के सैन्य अभियानों और परीक्षणों में ब्रह्मोस के प्रदर्शन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी विश्वसनीयता को और मजबूत किया है. इसकी सटीकता और तेज प्रतिक्रिया क्षमता ने कई देशों का ध्यान आकर्षित किया है, जिसके बाद विभिन्न देशों की रुचि और बढ़ी है.

चीन और पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ीं
ब्रह्मोस की बढ़ती लोकप्रियता को चीन और पाकिस्तान के लिए एक रणनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि भारत की इस मिसाइल प्रणाली को लेकर दोनों देशों की ओर से समय-समय पर सवाल उठाए गए, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रह्मोस को लगातार सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है.

भारत के रक्षा निर्यात को मिल रही नई पहचान
फिलीपींस के साथ सफल रक्षा समझौते के बाद ब्रह्मोस भारत के रक्षा निर्यात का प्रमुख चेहरा बनकर उभरी है. दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और अन्य क्षेत्रों में बढ़ती मांग यह संकेत देती है कि भारत वैश्विक रक्षा बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

US Iran War: इतने खतरे के बावजूद कैसे भारतीय जहाज पार कर रहा होर्मुज? भारत सरकार ने बताई ‘सीक्रेट’ डिटेल्स…

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शिपिंग मंत्रालय ने बताया कि मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला क्रूड ऑयल टैंकर जिसका नाम निसोस केरोस है, वो 25-26 मई की रात को सुरक्षित होर्मुज स्ट्रेट को पार कर गया.

ईरान और अमेरिका के बीच जंग के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही लगभग पूरी तरह से बंद है. इस रास्ते से दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और सप्लाई का सप्लाई होता, जिस पर मौजूदा समय में संकट छा गया है. इस ऊर्जा संकट के बीच भारत कई जहाजों को इस खतरनाक रास्ते से सुरक्षित निकालने में कामयाब रहा है. शिपिंग मंत्रालय के डायरेक्टर ओपेश कुमार शर्मा ने बताया कि मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला क्रूड ऑयल टैंकर जिसका नाम निसोस केरोस है, वो 25-26 मई की रात को सुरक्षित होर्मुज स्ट्रेट को पार कर गया.

भारतीय कैसे पार कर रहे होर्मजु?

ओपेश कुमार शर्मा ने बताया, ‘यह जहाज लगभग 2,70,000 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर आ रहा है और इसके 3 जून 2026 को विशाखापत्तनम पहुंचने की उम्मीद है.  इस जहाज के सभी क्रू मेंबर्स विदेशी हैं.’ जहाजों के मूवमेंट से जुड़े सवाल पर शिपिंग मंत्रालय ने कहा,  सुरक्षा कारणों से वे यह तो नहीं बता सकते कि ईरान के साथ तालमेल कैसे बिठाया जा रहा है, लेकिन यह पूरा काम विदेश मंत्रालय (MEA) के जरिए हो रहा है. कौन सा जहाज पहले निकलेगा, इसका फैसला पेट्रोलियम मंत्रालय और उर्वरक (fertilizer) मंत्रालय के साथ मिलकर तय किया जाता है.

शिप ट्रैकिंग डेटा के सार्वजनिक होने पर उन्होंने कहा, ‘ये कमर्शियल ऐप्स हैं जिन्हें कोई भी देख सकता है. कोई इसका क्या इस्तेमाल करता है यह उसकी नीयत पर निर्भर करता है, लेकिन फिलहाल यह डेटा जहाजों को ट्रैक करने में हमारी मदद कर रहा है. इस क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं. भारतीय या विदेशी झंडे वाले किसी भी व्यापारिक जहाज पर किसी भारतीय नाविक के साथ कोई अप्रिय घटना होने की खबर नहीं है.’

भारतीय जहाजों ने होर्मुज पर किया: MEA

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘हमारी जानकारी के अनुसार 11 भारतीय जहाज अभी भी फारसी खाड़ी क्षेत्र में हैं और 14 जहाज वापस आ चुके हैं. मेरा मतलब है कि वे फारसी खाड़ी में थे, लेकिन वे होर्मुज स्ट्रेट को पार करने में सफल रहे और भारत पहुंच गए हैं.’

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बताया कि पिछले 24 घंटों के भीतर 24 जहाजों ने ईरानी अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार किया है. इससे पहले बीते कल भी IRGC ने बताया था कि 24 घंटों के दौरान 26 व्यापारिक जहाजों ने होर्मुज स्ट्रेट को पार किया था.

India Monsoon 2026 Update: उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, झारखंड…गर्मी के कहर…

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India Monsoon 2026 Update: IMD की तरफ से जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल भारत में मॉनसून सामान्य से कम रह सकता है. इस बीच देश के कई राज्यों में कम बारिश होगी और ज्यादा हीट वेव असर देखने को मिलेगा.

मौसम विभाग (IMD) ने शुक्रवार (29 मई 2026) को जारी नए अनुमान में कहा है कि इस साल देश में मॉनसून की बारिश सामान्य से कम रह सकती है. विभाग के मुताबिक, पूरे देश में इस बार मॉनसून की बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का करीब 90 प्रतिशत रहने की संभावना है. इससे पहले अप्रैल में IMD ने 92 प्रतिशत बारिश का अनुमान जताया था, लेकिन अब इसे और कम कर दिया गया है.

IMD ने बताया कि जून महीने से एल नीनो की कमजोर स्थिति बनने की संभावना है, जो मॉनसून सीजन के दूसरे हिस्से में और मजबूत हो सकती है. एल नीनो का असर आमतौर पर भारत में मॉनसून को कमजोर करने वाला माना जाता है. मौसम विभाग ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि पूरे देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की बारिश LPA के 90 प्रतिशत रहने का अनुमान है. इसमें मॉडल एरर प्लस माइनस 4 प्रतिशत रखा गया है. इसका मतलब है कि इस साल सामान्य से कम या कम बारिश होने की संभावना ज्यादा है. नॉर्थ-ईस्ट भारत में सामान्य बारिश हो सकती है. वहीं उत्तर-पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान लगाया गया है.

कई राज्यों में सामान्य से ज्यादा हीट वेव– IMD

मौसम विभाग ने यह भी कहा है कि इस साल कई राज्यों में सामान्य से ज्यादा हीट वेव यानी लू वाले दिन देखने को मिल सकते हैं. जून 2026 के दौरान उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में तेज गर्मी पड़ने की संभावना है. इसके अलावा महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ इलाकों में भी सामान्य से ज्यादा गर्मी रह सकती है.

सामान्य से कम बारिश होने की आशंका

अप्रैल में जारी पहले अनुमान में IMD ने कहा था कि इस साल मॉनसून सामान्य से कम रह सकता है और बारिश LPA के 92 प्रतिशत तक रहने की उम्मीद थी. भारत में 1971 से 2020 के बीच पूरे मॉनसून सीजन की औसत बारिश 87 सेंटीमीटर मानी जाती है. IMD के अनुसार देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है. हालांकि नॉर्थ-ईस्ट, उत्तर-पश्चिम और दक्षिण भारत के कुछ इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है.

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए काफी अहम

मॉनसून का यह नया अनुमान भारत की अर्थव्यवस्था के लिए काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि देश की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है. कृषि मंत्रालय के मुताबिक, भारत की लगभग 51 प्रतिशत खेती बारिश पर निर्भर करती है और इससे कुल कृषि उत्पादन का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा आता है. देश की लगभग 47 प्रतिशत आबादी अपनी रोजी-रोटी के लिए खेती पर निर्भर है. अगर मॉनसून कमजोर रहता है तो इसका असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. इससे खेती की लागत बढ़ सकती है, फसल उत्पादन कम हो सकता है और खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण ऊर्जा और खाद की सप्लाई पर भी असर पड़ने की आशंका बनी हुई है.

एल नीनो की स्थिति कब मजबूत हो सकती?

भारत में पिछली बार 2023 में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई थी. उस समय भी एल नीनो का असर था और पूरे मॉनसून सीजन में देश में LPA का 94 प्रतिशत बारिश हुई थी. मॉनसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम के अनुसार जुलाई, अगस्त और सितंबर के दौरान एल नीनो की स्थिति और मजबूत हो सकती है.

सुनवाई पूरी होने के बाद तीन महीने के अंदर सुनाना होगा फैसला’, मुकदमों में देरी पर SC का हाईकोर्ट्स को निर्देश…

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सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट्स को निर्देश दिया है कि जमानत का आदेश अगले दिन देने का प्रयास किया जाए. आदेश की जानकारी उसी दिन जेल अधिकारियों को दी जानी चाहिए.

देशभर की हाईकोर्ट्स में मुकदमों के फैसले सुनाए जाने में देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं. शुक्रवार (29 मई, 2026) को कोर्ट ने कहा कि किसी भी मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद तीन महीनों के अंदर फैसला सुना दिया जाना चाहिए और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मामले में यह समयसीमा और भी ज्यादा कम है.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी होने के बाद आदेश सुनाए जाने में होने वाली देरी के समाधान के लिए कुछ दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं.

  • सुरक्षित रखा गया फैसला तीन महीने के भीतर सुनाया जाए.
  • जमानत का आदेश अगले दिन देने का प्रयास किया जाए. आदेश की जानकारी उसी दिन जेल अधिकारियों को दी जानी चाहिए.
  • विचाराधीन कैदियों को उसी दिन या अगले दिन रिहा किया जाना चाहिए.
  • फैसले का मुख्य हिस्सा अदालत में सुनाया जाए. कारण बताते हुए विस्तृत आदेश सात दिनों के भीतर अपलोड किया जाए.
  • फैसला सुरक्षित रखे जाने की तारीख हाईकोर्ट की वेबसाइट पर दिखनी चाहिए.
  • अगर कोई बेंच इन दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करती, तो मामला दूसरी बेंच को सौंपा जाएगा.
  • अगर 30 दिनों के भीतर फैसले के कारण अपलोड नहीं किए जाते, तो भी मामला नई बेंच को सौंपा जा सकता है.

कोर्ट ने हाईकोर्ट्स के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया हैं कि वह इन दिशा-निर्देशों को अपनी हाईकोर्ट्स के चीफ जस्टिस के सामने रखें. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि ये दिशा-निर्देश किसी विशेष जज या अदालत के लिए नहीं हैं. सुप्रीम कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें एक हाईकोर्ट की ओर से फैसला सुनाने में देरी की शिकायत की गई थी.

शिकायत में कहा गया था कि दिसंबर, 2025 को झारखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था, लेकिन अभी तक कोर्ट की वेबसाइट पर उसे अपलोड नहीं किया गया है और न ही शिकायतकर्ता के वकील को आदेश जारी किया गया.

सुप्रीम कोर्ट ने पहले सुनवाई के दौरान सख्त लहजे में कहा था कि फैसला सुनाने में देरी जैसी प्रैक्टिस बंद होनी चाहिए, साथ ही इस समस्या से निपटने के लिए गाइडलाइंस जारी करने के लिए भी कहा था. कोर्ट ने कहा था कि न्याय की कीमत पर ऐसी देरी जारी रखने की इजाजत नहीं दे सकते हैं.

Siddaramaiah Met Rahul Gandhi:  इस्तीफे के बाद दिल्ली पहुंचते ही सिद्धारमैया ने राहुल गांधी को सौंप दी ख्वाहिशों की लिस्ट, बेटे के लिए मांगा बड़ा पद…

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सिद्धारमैया ने दिल्ली में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की.यह मुलाकात कर्नाटक की नई सरकार के गठन और सत्ता संतुलन के लिहाज से अहम मानी जा रही है.

Siddaramaiah Met Rahul Gandhi: कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के एक दिन बाद ही सिद्धारमैया शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की. इस बैठक में सिद्धारमैया ने पार्टी हाईकमान के सामने अपनी कई मांगें रखीं, जिनमें बेटे यतींद्र सिद्धारमैया के लिए नए मंत्रिमंडल में अहम मंत्रालयों की मांग भी शामिल बताई जा रही है.

हाईकमान को सौंपी नामों की सूची

सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया ने कांग्रेस नेतृत्व को राज्यसभा और विधान परिषद (एमएलसी) नियुक्तियों के लिए पसंदीदा नेताओं की सूची सौंपी. इसके साथ ही उन्होंने नए मंत्रिमंडल में मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर भी अपनी राय रखी. बताया जा रहा है कि सिद्धारमैया ने अपने करीबी नेताओं और समर्थकों को नई सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने की मांग की है.

बेटे यतींद्र के लिए मांगे अहम मंत्रालय

सूत्रों के अनुसार, सिद्धारमैया ने अपने बेटे यतींद्र सिद्धारमैया के लिए नए डीके शिवकुमार नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में बड़े मंत्रालयों की मांग की है. इनमें चिकित्सा शिक्षा, पिछड़ा वर्ग कल्याण, उद्योग और जल संसाधन जैसे अहम विभाग शामिल बताए जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि सिद्धारमैया चाहते हैं कि उनके बेटे को सरकार में मजबूत भूमिका मिले.

डीके शिवकुमार के नेतृत्व में बन सकती है नई सरकार

कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के बाद अब डीके शिवकुमार के अगले मुख्यमंत्री बनने की संभावना सबसे ज्यादा मानी जा रही है. हालांकि कांग्रेस की ओर से अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. इसी बीच सिद्धारमैया की दिल्ली यात्रा और हाईकमान से मुलाकात को कर्नाटक की नई सरकार के गठन और सत्ता संतुलन के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है.

कांग्रेस में जारी है शक्ति संतुलन की राजनीति

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों ही कर्नाटक कांग्रेस के बड़े चेहरे हैं. ऐसे में नई सरकार में मंत्रालयों और पदों को लेकर दोनों गुटों के बीच संतुलन बनाना कांग्रेस नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती होगी. फिलहाल दिल्ली में लगातार बैठकों का दौर जारी है और माना जा रहा है कि जल्द ही कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल को लेकर आधिकारिक तस्वीर साफ हो सकती है.