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मुफ्त में बंट रहे टमाटर. बोरियां भर-भरकर ले गए लोग, हैरान कर देगी वजह…

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टमाटर की गिरती कीमतों ने किसानों को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है. जहां खुदरा बाजार में टमाटर 15 से 20 रुपये प्रति किलो बिक रहा है, वहीं मंडियों में किसानों को 2 रुपये प्रति किलो का भाव भी नसीब नहीं हो रहा.

इस बेबसी और आर्थिक तंगी से परेशान होकर तेलंगाना के जंगांव और महबूबबाद जिलों के किसानों ने अपनी पूरी फसल मुफ्त में बांटकर अनोखा विरोध प्रदर्शन शुरू किया है.

आमतौर पर टमाटर के दाम 100 रुपये पार होने पर चर्चा होती है, लेकिन आज स्थिति इसके उलट है. महबूबबाद के साप्ताहिक बाजार में तीन किसान, सरय्या, मोहन और सुरेंद्रअपनी ट्रॉली भरकर टमाटर लाए थे. जब उन्हें पता चला कि 20 किलो टमाटर के बदले उन्हें 40 रुपये भी नहीं मिल रहे, तो उन्होंने हार मानकर फसल मुफ्त में बांटने का फैसला किया.

यही हाल जंगांव जिले के तारिगोप्पुला मंडल में दिखा, जहां किसान सदाय्या ने अपनी ट्रॉली खाली करने के लिए ग्राहकों को मुफ्त में टमाटर ले जाने को कह दिया.

क्यों बेबस है किसान?

किसानों की इस दयनीय स्थिति के पीछे कई प्रमुख कारण हैं. किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है. व्यापारी किसानों से 2 रुपये में खरीदकर उपभोक्ताओं को 20 रुपये तक बेच रहे हैं. सही भाव न मिलने के कारण फसल खेतों में सड़ रही है, जिससे परिवहन का खर्च भी नहीं निकल पा रहा.

किसानों की आंखों में आंसू

जैसे ही किसानों ने मुफ्त में टमाटर बांटने का ऐलान किया, बाजार में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. लोग बोरियों और टोकरियों में भरकर टमाटर ले गए. एक तरफ जहां उपभोक्ता मुफ्त फसल पाकर खुश थे, वहीं दूसरी तरफ अपनी मेहनत की बर्बादी देखकर किसानों की आंखों में आंसू थे.

किसानों का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द ही न्यूनतम लाभकारी मूल्य सुनिश्चित नहीं किया, तो वे पूरी तरह कर्ज के बोझ तले दब जाएंगे. ये आंदोलन केवल मुफ्त वितरण नहीं, बल्कि सिस्टम के खिलाफ एक हताश किसान की चीख है.

छत्तीसगढ़ का बजट राज्य के सर्वांगीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम…

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रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2026-27 का बजट राज्य के सर्वांगीण और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं दूरदर्शी पहल के रूप में देखा जा रहा है।

प्रदेश के वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने विधानसभा में संकल्प-आधारित यह बजट प्रस्तुत करते हुए सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

नीति, न्याय, निवेश, निर्माण और नवाचार के पंचतत्त्वों पर आधारित यह बजट विकसित छत्तीसगढ़ के विजन डॉक्यूमेंट ‘छत्तीसगढ़ अंजोर-2047’ के लक्ष्यों को साकार करने की दिशा में ठोस एवं परिणाममुखी कदम माना जा रहा है। इस बजट में जशपुर जिले को भी विशेष प्राथमिकता प्रदान की गई है, जिससे जिले के सर्वांगीण विकास को नई गति मिलने की अपेक्षा है।

जिले में आधारभूत संरचना, कृषि, सिंचाई, खेल, शिक्षा एवं धार्मिक पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए प्रावधान किए गए हैं। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी, बल्कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के संतुलित विकास को भी बल मिलेगा। सड़क एवं पुल निर्माण कार्यों को गति देने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिससे दूरस्थ अंचलों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और आवागमन सुगम बनेगा।

कुनकुरी निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट श्री बिनीत जिंदल ने राज्य सरकार के बजट 2026-27 की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच के अनुरूप जिले में खेल सुविधाओं के विस्तार के लिए नए स्टेडियम निर्माण का प्रस्ताव युवाओं के लिए प्रेरणादायक कदम है।

इसके साथ ही पंपशाला एनिकट में किसानों के हित में लिफ्ट इरिगेशन योजना से सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा, जिससे कृषकों को सीधा लाभ मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी।

उन्होंने कहा कि जिले में विभिन्न सड़कों एवं पुलों के निर्माण से दूरी कम होगी, संपर्क बढ़ेगा और व्यापारिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। धार्मिक पर्यटन, शिक्षा तथा माटी शिल्प कला के संवर्धन हेतु विशेष प्रावधान जिले की सांस्कृतिक एवं आर्थिक उन्नति में सहायक सिद्ध होंगे।

इसी क्रम में युवा श्री राजकुमार ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह बजट गरीब, किसान, युवा और महिलाओं के सशक्तिकरण को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन से जशपुर जिला ही नहीं, बल्कि पूरा प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

ग्राम बोगी निवासी व्यवसायी श्री घनश्याम यादव ने भी बजट का स्वागत करते हुए कहा कि वे पिछले 10-15 वर्षों से स्थानीय स्तर पर व्यापार कर रहे हैं। इस बजट में आजीविका और निवेश को विशेष प्राथमिकता दिए जाने से छोटे व्यवसायियों को संबल मिलेगा। स्थानीय उद्योग-व्यवसाय को बढ़ावा मिलने से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2026-27 का यह बजट विकास, विश्वास और अवसरों का संतुलित दस्तावेज है, जो ग्रामीण अंचलों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक व्यापक परिवर्तन की आधारशिला रखता है। जशपुर जिले के लिए किए गए प्रावधान आने वाले समय में शिक्षा, खेल, कृषि, पर्यटन एवं लघु उद्योग के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव का मार्ग प्रशस्त करेंगे। प्रदेश सरकार द्वारा जनभावनाओं के अनुरूप तैयार यह बजट छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

CG: इस बार प्राकृतिक रंगों से रंगीन होगी होली, स्व सहायता समूह की महिलाएं कर रही है प्राकृतिक गुलाल का निर्माण…

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रायपुर: रंगों के त्योहार होली को स्वसहायता समूह की महिलाएं इस बार और खास बना रही है। होली के त्योहार को प्राकृतिक रंगों से मनाने के लिए महिलाएं हर्बल गुलाल बना रही है।

गरियाबंद जिले के ग्राम सढ़ौली की राखी महिला ग्राम संगठन की 10 सक्रिय महिलाएँ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के तहत हर्बल गुलाल का निर्माण कर आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन की मिसाल पेश कर रही हैं।

समूह की महिलाएं पलाश से पीला, चुंकदर से लाल और पालक के पत्तों से हरा रंग निकालकर मक्के की सूखी डंठल से प्राप्त अरारोट पाउडर में मिलाकर प्राकृतिक गुलाल का निर्माण कर रही है। इसमें हानिकारक रसायनिक तत्वों का बिल्कुल भी उपयोग नहीं किया जाता।

जिससे हर्बल गुलाल त्वचा एवं सेहत के लिए सुरक्षित रहता है। राखी महिला ग्राम संगठन की ये महिलाएँ न केवल होली के त्योहार को प्राकृतिक और सुरक्षित बना रही हैं, बल्कि अपनी आजीविका को भी मजबूत कर रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाएँ आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन की नई कहानी लिख रही हैं। यह पहल प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो रही है।

कलेक्टर एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने इन महिलाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज महिलाएं स्वरोजगार सृजित कर आत्मनिर्भर बन रही है और समाज में अपनी अलग पहचान बना रही है।

पीआरपी मीना साहू ने बताया कि पिछले वर्ष भी बिहान समुह के दीदियों द्वारा कुल 30 हजार रूपये से अधिक की बिक्री कर लगभग 10 हजार रूपये से अधिक की शुद्ध मुनाफा अर्जित की थी।

समूह की महिलाओं से चर्चा के फलस्वरूप पारंपरिक तरीकों से बनाए गए प्राकृतिक गुलाल से न केवल सेहत स्वस्थ रहेगा, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी अनुकूल रहेगा।

साथ ही महिलाओं के लिए आमदनी का नया स्रोत भी बन रहा है। पिछले वर्ष हर्बल गुलाल की मांग अधिक रही, जिसे देखते हुए इस बार महिलाओं ने रंग बनाना शुरू कर दिया है।

महिलाओं ने बताया कि गुलाल बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह प्राकृतिक है। इसे तैयार करने में फूलों और पत्तियों का उपयोग किया जाता है, जिससे यह त्वचा के लिए सुरक्षित होता है।

विभिन्न रंग बनाने के लिए प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग किया जाता है गुलाबी रंग के लिए चुकंदर और गुलाब की पंखुड़ियां, पीला रंग के लिए हल्दी और गेंदे के फूल, हरा रंग के लिए पालक व मेंहदी के पत्ते, नीला रंग के लिए अपराजिता के फूल और लाल रंग के लिए टेसू के फूलों का इस्तेमाल कर रही है।

CG: राज्यपाल श्री डेका ने वीर विनायक दामोदर सावरकर को श्रद्धांजलि दी…

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रायपुर: राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज महान सेनानी, विचारक और क्रांतिकारी विनायक दामोदर सावरकर  “वीर सावरकर” जी  की पुण्यतिथि पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।

उन्होंने राष्ट्रनिर्माण में उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि वीर सावरकर भारत माता के उन वीर सपूतों में से एक हैं जिनकी बौद्धिक क्षमता, क्रांतिकारी उत्साह और भारत के भविष्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता अतुलनीय रही। वीर सावरकर जी महज एक क्रांतिकारी से कहीं अधिक थे, वे एक गहन विचारक थे जिनके बौद्धिक योगदान को देश भूल नहीं सकता।

इस अवसर पर राज्यपाल के विधिक सलाहकार श्री भीष्म प्रसाद पाण्डेय, उप सचिव सुश्री निधि साहू एवं अधिकारियों-कर्मचारियों ने भी सावरकर जी के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

CG: वीर सावरकर की पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अर्पित की श्रद्धांजलि…

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रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में महान क्रांतिकारी, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक एवं स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर की पुण्यतिथि पर उनके छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धापूर्वक नमन किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वीर सावरकर केवल एक स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी विचारक, समाज सुधारक, ओजस्वी लेखक-कवि और प्रखर इतिहासकार भी थे। उन्होंने भारतीय स्वाधीनता संग्राम को नई वैचारिक ऊर्जा प्रदान की तथा राष्ट्रभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए सावरकर जी का त्याग, संघर्ष और अदम्य साहस भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। कालापानी की अमानवीय यातनाओं के बावजूद उनका राष्ट्र के प्रति समर्पण अडिग रहा। उनका संपूर्ण जीवन देशसेवा, आत्मबल और राष्ट्र गौरव का प्रेरणास्रोत है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वीर सावरकर के विचार आज भी युवाओं को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं। हमें उनके आदर्शों को आत्मसात करते हुए एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री सौरभ सिंह, छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री भूपेंद्र सवन्नी,  मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी श्री आलोक सिंह, श्री राम गर्ग सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

CG: किसान मोर्चा ने की अपने मंडल पदाधिकारियों की घोषणा…

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भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री किरण सिंह देव एवं प्रदेश महामंत्री (संगठन) श्री पवन साय के मार्गदर्शन तथा प्रदेश किसान मोर्चा अध्यक्ष श्री आलोक सिंह ठाकुर के निर्देशानुसार भारतीय जनता पार्टी जिला राजनांदगांव जिलाध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत की अनुशंसा से किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष दादू राम सोनकर ने जिले के सभी 16 मंडलों के अध्यक्ष एवं महामंत्रियों की घोषणा की है।

जारी सूची के अनुसार निम्नानुसार नियुक्यिां की गई हैं.

राज. उत्तर मंडल अध्यक्ष खेमलाल साहू, राज. दक्षिण मंडल अध्यक्ष फागुराम साहू, महामंत्री परशुराम प्रजापति महामंत्री चंदू साहू राज. ग्रामीण पूर्व मंडल अध्यक्ष हेमंत साहू महामंत्री दुगेश साहू महामंत्री जितेंद्र साहू राज. ग्रामीण पश्चिम मंडल अध्यक्ष तेजराम देवांगन महामंत्री गोपाल साहू महामंत्री संतोष साहू डोंगरगढ़ शहर मंडल अध्यक्ष राम कुमार डडसेना, महामंत्री अजय शर्मा, अजय दुबे डोंगरगढ़ ग्रामीण मंडल अध्यक्ष हरदेव वर्मा महामंत्री हुम्मन शर्मा, उदय सिन्हा, तिलई मंडल अध्यक्ष निलाभ यदु महामंत्री पुणम देवांगन, संतोष साहू, घुमका मंडल अध्यक्ष राकेश साहू, महामंत्री परस साहू, नूनकण वर्मा, डोंगरगांव मंडल अध्यक्ष खेमुदास साहू महामंत्री यदुराम नायक, श्रवण निषाद, मुसरा-मुरमंदा मंडल अध्यक्ष भीखम राम साहू महामंत्री डिसेन सिन्हा, दिनेश कुमार साहू, तुमडीबोड मंडल अध्यक्ष जितेन्द्र वर्मा महामंत्री कमलेश साहू, छगन पटेल, लाल बहादुर नगर मंडल अध्यक्ष योगेश सोनी महामंत्री गुरूदास साहू, सुखनंदन मंडावी, अर्जुनी मंडल अध्यक्ष प्रीतम साहू, छुरिया मंडल अध्यक्ष टीकम साहू महामंत्री प्रीतम साहू, केदार यादव, गैंदाटोला मंडल अध्यक्ष खेमचंद साहू महामंत्री भरत पटेल, रामपाल साहू, कुमर्दा मंडल अध्यक्ष ओमप्रकाश साहू महामंत्री दीपक कलामे, गणपत साहू की घोषण की है।

जिलाध्यक्ष दादूराम सोनकर ने सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि किसान मोर्चा संगठन को और अधिक मजबूत करते हुए किसानों की समस्याओं के समाधान एवं सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएगा।

उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि सभी पदाधिकारी संगठन की रीति-नीति एवं अनुशासन का पालन करते हुए किसान हितों के लिए समर्पित भाव से कार्य करेंगे तथा पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाएंगे।

अंत में सभी कार्यकर्ताओं ने नवनियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए संगठन की मजबूती के लिए संकल्प लिया। तथा उन्होंने निर्देशित किया की मंडल अध्यक्ष अपनी पदाधिकारियों की नियुक्ति कर जिला कार्यालय में सुची देवंे।

CG: बस्तर से वैश्विक मंच तक छत्तीसगढ़ पर्यटन की नई उड़ान…

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अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ किर्सी ह्यवैरिनेन के प्रवास से छत्तीसगढ़ पर्यटन को नई दिशा

सामुदायिक पर्यटन मॉडल एवं यूएन बेस्ट टूरिज्म विलेज मानकों की दिशा में बढ़ते कदम

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में इन दिनों पर्यटन विकास की एक नई और सकारात्मक इबारत लिखी जा रही है। संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और हिवा कोचिंग एंड कंसल्टिंग की संस्थापक सुश्री किर्सी ह्यवैरिनेन के छह दिवसीय प्रवास ने राज्य के पर्यटन क्षेत्र को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण गति प्रदान की है। उनका यह दौरा केवल औपचारिक भ्रमण नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय आधारित सतत पर्यटन मॉडल को वैश्विक मानकों से जोड़ने की ठोस रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

दौरे के दूसरे दिन सुश्री किर्सी बस्तर जिले के ग्राम धुड़मारास पहुंचीं, जहां धुरवा डेरा होमस्टे में उनका पारंपरिक ढंग से स्वागत किया गया। सिहाड़ी और महुए की माला पहनाकर तथा धुरवा नृत्य और स्वागत गीतों के माध्यम से ग्रामीणों ने अपनी संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत की। आत्मीय स्वागत से अभिभूत सुश्री किर्सी ने कहा कि इस प्रकार का अनुभव उनके लिए अत्यंत विशेष और अविस्मरणीय है। यह स्वागत केवल सांस्कृतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि बस्तर की सामाजिक एकजुटता और आत्मीयता का सशक्त परिचय था।

प्रवास के दौरान उन्होंने बस्तर के पारंपरिक एवं जैविक व्यंजनों का स्वाद भी लिया। कलम भाजी, सेमी और बोदई की सब्जी, केले की सब्जी, उड़द दाल, इमली की चटनी, कोसरा भात तथा मंडिया पेज जैसे स्थानीय व्यंजनों से सजी थाली ने उन्हें यहां की जीवनशैली और खाद्य परंपरा से परिचित कराया। वैश्विक पर्यटन परिदृश्य में स्थानीय खान-पान एक प्रमुख आकर्षण बन चुका है और बस्तर की जैव विविधता आधारित खाद्य संस्कृति विदेशी पर्यटकों के लिए विशिष्ट पहचान बना सकती है।

यह प्रवास विशेष रूप से यूनाइटेड नेशन से जुड़े ‘बेस्ट टूरिज्म विलेज अपग्रेड प्रोग्राम’ के मानकों के अनुरूप धुड़मारास और आसपास के क्षेत्रों को विकसित करने पर केंद्रित है। सुश्री किर्सी धुरवा डेरा होमस्टे में रहकर स्थानीय समुदाय, स्वयं सहायता समूहों, युवाओं और पर्यटन हितधारकों से संवाद कर सेवा गुणवत्ता, स्वच्छता प्रबंधन, डिजिटल प्रचार, ब्रांडिंग और होमस्टे संचालन के अंतरराष्ट्रीय मानकों पर मार्गदर्शन दे रही हैं। यह भ्रमण जिला प्रशासन तथा छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के समन्वय से आयोजित किया गया है।

प्रवास के दौरान उन्होंने विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात में नौका विहार कर वहां की पर्यटन संभावनाओं का अवलोकन किया और मेंदरी घूमर क्षेत्र में स्थानीय हितग्राहियों के साथ पर्यटन गतिविधियों को विस्तार देने पर चर्चा की। चित्रकोट जलप्रपात पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखता है, किंतु अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ की उपस्थिति इसे वैश्विक प्रचार अभियानों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर सकती है।

सुश्री किर्सी ह्यवैरिनेन के छह दिवसीय प्रवास का प्रभाव बहुआयामी होगा। एक ओर यह बस्तर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने में सहायक सिद्ध हो सकता है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार के स्थायी अवसर भी सृजित करेगा। सामुदायिक पर्यटन को संस्थागत आधार मिलने से आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होगी और सतत विकास की अवधारणा को बल मिलेगा।

कभी नक्सल प्रभाव की पहचान से जुड़े रहे बस्तर की छवि अब प्रकृति, संस्कृति और सामुदायिक समृद्धि के मॉडल के रूप में उभर रही है। यदि धुड़मारास ‘यूएन बेस्ट टूरिज्म विलेज’ मानकों पर सफलतापूर्वक आगे बढ़ता है, तो यह मॉडल देश के अन्य ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। सुश्री किर्सी ह्यवैरिनेन का यह प्रवास छत्तीसगढ़ के पर्यटन इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होने की संभावना रखता है, जो राज्य की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की दिशा में निर्णायक कदम साबित होगा।

CG: हर्बल गुलाल से और भी रंगीली होगी होली…

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विभिन्न रंगों और आकर्षक पैकेजिंग के साथ समूह द्वारा निर्मित हर्बल गुलाल

हर्बल गुलाल से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

रायपुर: छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़ी कबीरधाम ज़िले की महिला स्व-सहायता समूह महिला सशक्तीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है। जनपद पंचायत बोडला के ग्राम राजा नवागांव की जय गंगा मैया स्व-सहायता समूह से जुड़ी दीदियों ने रंगोत्सव त्योहार होली के लिए हर्बल गुलाल का निर्माण किया है। महिला समूह ने हर्बल गुलाल के व्यवसाय से जुड़कर आजीविका के नए रास्ते खोले है। इस गतिविधि में 10 महिलाओं की प्रत्यक्ष भागीदारी है, जो उनके आय का अच्छा स्रोत है। लाल, गुलाबी, पीले सहित अन्य रंगों और प्रकृति खुशबू से भरपूर हर्बल गुलाल बाजार में आने के लिए उपलब्ध है।

कलेक्टर कबीरधाम श्री गोपाल वर्मा ने बताया कि प्रत्येक वर्ष होली के अवसर पर जिले की विभिन्न महिला समूह द्वारा हर्बल गुलाल का निर्माण किया जाता है। कलेक्टोरेट, सभी जनपद पंचायत कार्यालय एवं अन्य स्थानों पर उनके द्वारा स्टॉल लगाकर हर्बल गुलाल की बिक्री की जाती है। समूह की दीदियों द्वारा बनाए गए गुलाल पूरी तरह से प्राकृतिक होने के साथ-साथ बाजार में मिलने वाले अन्य रंगों की तुलना में सस्ता होता है। हर्बल गुलाल की पैकेजिंग बहुत आकर्षक है और यह उपहार देने के भी बहुत अच्छा है। हर्बल गुलाल अनेक रंगो के साथ अलग-अलग मात्रा में पैकेजिंग सहित उपलब्ध है। गतवर्ष भी हमने देखा है कि समूह की दीदियों द्वारा बनाए गए हर्बल गुलाब को क्षेत्रवासियों ने बहुत पसंद किया है और इस व्यवसाय से जुड़कर हमारी ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही है।

जिला पंचायत सीईओ ने बताया कि प्रत्येक वर्ष बहुत से समूह इसका निर्माण करते है। प्रत्येक समूह को इस व्यवसाय द्वारा 50 से 60 हजार रुपए का लाभ हो जाता है। हर्बल गुलाल की अच्छी गुणवत्ता और आकर्षक पैकिंग सभी को पसंद आती है। योजना से जुड़े मैदानी कर्मचारियों द्वारा समूह को मौसमी व्यवसाय करने के लिए प्रेरित करते हुए हर्बल गुलाल का निर्माण करने प्रोत्साहित किया जाता है। इसके निर्माण में उपयोग होने वाले कच्चे माल की उपलब्धता के लिए समूह को सहायता प्रदान की जाती है।

हर्बल गुलाल के कई फायदे

हर्बल गुलाल प्राकृतिक सामग्री जैसे फूल-पत्तियों आदि से बनाए जाते हैं और त्वचा के लिए यह पूरी तरह से सुरक्षित होते हैं। इसके साथ हर्बल गुलाल के और भी कई फायदे हैं। हर्बल गुलाल में प्राकृतिक रंग होता हैं और इसके निर्माण में कोई अतिरिक्त मिलावट नही की जाती। हर्बल गुलाल पर्यावरण अनुकूल होता हैं। अन्य रंगों की तरह इसे छुड़ाने में मेहनत नहीं लगती बल्कि पानी द्वारा आसानी से धो कर साफ किया जा सकता है। इससे पानी की बचत भी होती है। हर्बल गुलाल में हानिकारक रसायन नहीं होते और यह त्वाचा के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। हर्बल गुलाल का निर्माण प्राकृतिक सामग्रियों से होने के कारण शरीर पर एलर्जी नहीं होती। हर्बल गुलाल में प्राकृतिक सुगंध होता है। खुशबू के लिए कोई केमिकल का उपयोग नहीं होने के कारण यह पूरा तरह सुरक्षित है।

CG: एक एकड़ में सवा लाख रुपए का मुनाफा देने वाला पाम ऑयल की खेती…

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किसान मुकेश कमा रहे हैं एक पेड़ से 3 हजार रुपए वार्षिक आय

एक पेड़ से 35 साल तक आय अर्जित किया जा सकेगा

पाम ऑयल उत्पादन में किसानों को आत्मनिर्भर बनाने, आयात पर निर्भरता कम करने तथा किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से संचालित नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल – ऑयल पाम योजना महासमुंद जिले के किसानों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है। इस योजना के माध्यम से किसान अपनी बंजर भूमि को उपजाऊ बनाकर लाखों रुपये की वार्षिक आय अर्जित कर रहे हैं और अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रहे हैं। जिले में इस योजना तहत लगभग 400 किसान लगभग 450 हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम की खेती कर रहे हैं।

इसी क्रम में सरायपाली भलेसर गांव के उन्नत किसान श्री मुकेश चंद्राकर, जिन्होंने वर्षों से बंजर पड़ी अपनी 33 एकड़ भूमि पर वर्ष 2016 में ऑयल पाम की खेती प्रारंभ की। वे शासन की योजना से पाम खेती के लिए प्रेरित हुए और अपनी पूरी भूमि पर लगभग 1900 पौधे लगाए। योजना के अंतर्गत उन्हें पौध प्रदाय, फेंसिंग, रखरखाव तथा ड्रिप सिंचाई जैसी सुविधाएं अनुदान पर मिला। तीन से चार वर्षों में उत्पादन प्रारंभ हुआ, जो लगभग 35 वर्षों तक लगातार फल देता रहेगा। वर्तमान में श्री चंद्राकर एक पौधे से औसतन 3000 रुपये वार्षिक आय अर्जित कर रहे हैं। प्रति एकड़ लगभग 1 लाख 25 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने पाम पौधों के बीच अंतरवर्तीय फसल के रूप में पहले केले की खेती की, जिससे उन्हें लगभग डेढ़ लाख रुपए का लाभ हुआ। वर्तमान में वे कोको की खेती कर निजी कंपनियों को उत्पाद विक्रय कर रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। श्री चंद्राकर बताते है कि कम पानी, कम खाद एवं कम कीटनाशक में अधिक उत्पादन और बेहतर लाभ मिलने के कारण किसानों को पाम की खेती अपनानी चाहिए। श्री चंद्राकर न केवल आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि अपने खेतों में दो दर्जन से अधिक लोगों को स्थायी रोजगार भी प्रदान कर रहे हैं। स्थानीय मजदूरों के अनुसार, पहले रोजगार के लिए भटकना पड़ता था, जबकि अब वर्षभर यहीं नियमित कार्य उपलब्ध हो रहा है।

सहायक संचालक उद्यानिकी विभाग श्रीमती पायल साव ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य पाम ऑयल उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके अंतर्गत किसानों को अनुदान, तकनीकी मार्गदर्शन एवं विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे उन्हें उत्पादन एवं विक्रय में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। जिले में पाम ऑयल की खेती को बढ़ावा देने के लिए कार्यशाला का आयोजन भी किया गया। यहां किसानों के रूझान और भूमि की प्रकार को देखते हुए कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह ने भी किसानों से अधिकाधिक संख्या में पाम की खेती करने अपील की है।

गौरतलब है कि खाद्य पदार्थों, साबुन, शैम्पू, सौंदर्य प्रसाधन तथा औषधि निर्माण में इसका व्यापक उपयोग होता है। ऐसे में जिले में कम लागत, कम श्रम, कम पानी एवं अधिक आय देने वाली पाम खेती किसानों की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक परिवर्तन ला रही है। यह पहल फसल चक्र परिवर्तन को बढ़ावा देने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सशक्त कदम सिद्ध हो रही है।

CG: स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग प्रतिबद्ध – श्री अरुण साव…

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उप मुख्यमंत्री ने केमिस्ट के पद पर चयनितों को सौंपे नियुक्ति पत्र

प्रयोगशालाओं की कार्यप्रणाली को आधुनिक एवं परिणाममुखी बनाया जाएगा

रायपुर: उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में केमिस्ट के पद पर चयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। उन्होंने आज नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ विधानसभा परिसर स्थित अपने कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में 10 चयनितों को नियुक्ति पत्र सौंपा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री मोहम्मद कैसर अब्दुलहक और प्रमुख अभियंता श्री ओंकेश चंद्रवंशी भी इस दौरान मौजूद थे।

उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्री अरुण साव ने नव नियुक्त केमिस्टों को संबोधित करते हुए कहा कि केमिस्टों की संख्या बढ़ने से विभागीय जल परीक्षण प्रयोगशालाएं और अधिक सुदृढ़ होंगी तथा मैदानी स्तर पर जल की गुणवत्ता की जांच में सहूलियत होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों को शुद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिकता और प्रतिबद्धता है। इन नियुक्तियों से विभाग में तकनीकी रूप से दक्ष मानव संसाधन की संख्या बढ़ी है।

श्री साव ने कहा कि पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया से प्रदेश के युवाओं में विश्वास और उत्साह बढ़ा है। युवाओं को उनकी मेहनत और प्रतिभा का उचित प्रतिफल मिल रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नवनियुक्त सभी केमिस्ट पूर्ण निष्ठा, अनुशासन और सेवा-भाव के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे तथा विभागीय लक्ष्यों की प्राप्ति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कहा कि जल गुणवत्ता की निगरानी में किसी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रयोगशालाओं की कार्यप्रणाली को आधुनिक एवं परिणाममुखी बनाया जाएगा।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख अभियंता श्री ओंकेश चंद्रवंशी ने बताया कि विभाग द्वारा स्वीकृत केमिस्ट के 12 पदों पर व्यापम के माध्यम से चयन प्रक्रिया संपन्न की गई थी। दस्तावेज परीक्षण में 11 अभ्यर्थी पात्र पाए गए, जबकि एक अभ्यर्थी अनुपस्थित रहा। चयनित 11 अभ्यर्थियों में 2 महिला एवं 9 पुरुष अभ्यर्थी शामिल हैं।