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झमाझम बारिश आ गई, ओले और बिजली भी कड़केगी! बसंत पंचमी पर मौसम विभाग..

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बसंत ऋतु का आगमन बारिश की बूंदों से हुआ है.

सुबह-सुबह 6 बजे उत्तर भारत के कई इलाकों में लोगों ने आंखें ही खोली थीं तभी बारिश की आवाज ने मन प्रसन्न कर दिया. 8 बजते-बजते कई राज्यों में झमाझम बारिश हुई. दो महीने से जो प्रदूषण धूल बनकर छत पर जमा था, वह बहने लगा.

सड़कों पर गाड़ी में दौड़ रहे लोगों को विंडशील्ड साफ करनी पड़ी. पेड़ों की पत्तियां धुलकर हरी हो गईं. प्रयागराज में उसी समय संगम किनारे श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा रहे थे और इधर राजधानी दिल्ली, नोएडा, यूपी, हरियाणा के कुछ हिस्सों में टप-टप बरसी बूंदों ने माहौल को खुशनुमा बना दिया. हालांकि ठंड फिर से लौट आई है. दो दिन से ऐसा लग रहा था जैसे ठंड की विदाई शुरू हो गई है. शुक्रवार तड़के से ही हवा चलने लगी. मौसम विभाग ने आंधी के साथ आगे बारिश का अलर्ट दिया है.

जी हां, एक दो नहीं, कुल 9 राज्यों में बारिश और तूफान का अलर्ट है. पश्चिमी विक्षोभ के चलते मौसम ने यह अचानक करवट ली है. IMD के साइंटिस्ट डॉ. सुप्रित कुमार ने बताया है कि तीव्र पश्चिमी विक्षोभ के कारण आज यानी 23 जनवरी को पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में कुछ जगहों पर भारी वर्षा, बर्फबारी के साथ ओलावृष्टि, बिजली कड़कने और तेज हवाएं चलने की संभावना है. इसी दौरान उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में भी कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है.

सुबह-सुबह कश्मीर और हिमाचल में बर्फबारी

वेस्टर्न डिस्टरबेंस की दस्तक से मनाली में सीजन की पहली भारी बर्फबारी हुई है. कश्मीर में भी बर्फबारी हो रही है. सुबह-सुबह शुरू हुई बर्फबारी के चलते मनाली और आसपास के क्षेत्र सफेद चादर में लिपट गए हैं. लंबे इंतजार के बाद हुई इस बर्फबारी से किसानों, बागवानों और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों में राहत की उम्मीद जगी है.

26 जनवरी पर भी बारिश!

मौसम विभाग का कहना है कि एक और पश्चिमी विक्षोभ 26 से 28 जनवरी तक उत्तर पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है.

ठंड बढ़ेगी या नहीं?

IMD के साइंटिस्ट सुप्रित कुमार ने बताया है कि उत्तर पश्चिम भारत में न्यूनतम तापमान अगले दो दिनों में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस घट सकता है. उसके बाद अगले चार दिनों में 2-4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होने की संभावना है. मध्य भारत में अगले दो दिनों में धीरे-धीरे 3-4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट और उसके बाद अगले दो दिनों में 2-3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हो सकती है. महाराष्ट्र और गुजरात में कुछ ऐसा ही रहने वाला है.

मौसम हुआ बसंती

बसंत पंचमी की महत्ता बताते हुए सेवानिवृत कार्यक्रम अधिकारी आकाशवाणी, लेखक एवं सनातन संस्कृति संपोषक पार्थसारथि थपलियाल कहते हैं कि बसंत पंचमी ऐसा पर्व है जब प्रकृति, विद्या, लोक और संस्कार चारों का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है. इसे यूं ही नहीं कहा गया कि “ऋतुनाम कूष्माकर”, ऋतुओं में बसंत सृजन, उल्लास और नवजीवन का कारण है. शिशिर की कठोरता टूटती है, धरती पीले रंग में सजती है और मनुष्य के भीतर भी नई ऊर्जा का संचार होता है. बसंत पंचमी केवल मंदिरों और विद्यालयों तक सीमित पर्व नहीं, यह लोक उत्सव है. गांवों में खेतों में लहलहाती सरसों, आम की मंजरियां और पीले फूल बसंत के आगमन की घोषणा करते हैं. किसान के लिए यह आशा का पर्व है. नई फसल की उम्मीद, प्रकृति की अनुकूलता और परिश्रम के फल का संकेत. पीले वस्त्र, पीले पकवान, पतंगबाजी और सामूहिक उल्लास ये सब लोक-जीवन में बसंत की पहचान हैं. यह पर्व प्रकृति और मनुष्य के बीच सहजीवन का उत्सव है, जहां मनुष्य प्रकृति का उपभोक्ता नहीं, सहभागी बनता है.

पाकिस्तान पैदा कर रहा दरार…बांग्लादेश की मांग पर खफा हुईं उद्धव गुट

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टी20 विश्वकप को लेकर घमासान मचा हुआ है. बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने (ICC) आईसीसी के बाहर करने के अल्टीमेटम के बाद भी टी20 वर्ल्ड कप 2026 का बहिष्कार करने का फैसला किया है.

इसे लेकर शिवसेना (UBT) की MP प्रियंका चतुर्वेदी ने बांग्लादेश की जमकर आलोचना की है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान दरार पैदा करने के लिए पड़ोसी देश का ‘इस्तेमाल’ कर रहा है.

पाकिस्तान कर रहा इस्तेमाल

सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने आगे कहा कि ICC ने पहले ही इस रिक्वेस्ट को मना कर दिया है, लेकिन सिर्फ पाकिस्तान ही इस मामले पर बांग्लादेश के रुख का समर्थन करने के लिए आगे आया है. बोर्ड में मौजूद सभी कमिटी मेंबर्स में से सिर्फ पाकिस्तान ने उनका समर्थन किया है, किसी और ने नहीं, यह साफ दिख रहा है कि पाकिस्तान बांग्लादेश का इस्तेमाल कर रहा है. बांग्लादेश में माइनॉरिटी हिंदुओं पर लगातार ज़ुल्म हो रहा है, उस पर जवाब देने के बजाय, वे क्रिकेट की बात कर रहे हैं.

नहीं चाहिए बांग्लादेश टीम

इसके अलावा कहा कि हमें ICC से कहना चाहिए था कि जब तक ये लोग अपनी हरकतें बंद नहीं करते, हमें न तो पाकिस्तान की टीम चाहिए और न ही बांग्लादेश की टीम, इस समय, ICC ने जो भी कहा है, बांग्लादेश को उसे मानना ​​होगा. इसके अलावा पूर्व भारतीय क्रिकेटर मनोज तिवारी ने बांग्लादेश के भारत में अपने T20 वर्ल्ड कप मैच न खेलने के फैसले की आलोचना की और देश के क्रिकेट बोर्ड में राजनीतिक दखल का आरोप लगाया.

पूर्व क्रिकेटर ने भी घेरा

उन्होंने सुरक्षा चिंताओं पर सवाल उठाया, यह देखते हुए कि बांग्लादेश की पूर्व PM शेख हसीना भारत में सुरक्षित रह रही हैं और पूछा कि खिलाड़ी सुरक्षित क्यों नहीं होंगे. मनोज तिवारी ने कहा, “यह बोर्ड की तरफ से नहीं था. आज, अगर आपने प्रेस कॉन्फ्रेंस देखी, तो खेल मंत्री ने मीडिया को एक बयान दिया, जिसमें कहा गया कि सुरक्षा का खतरा है, लेकिन बोर्ड प्रेसिडेंट उनके ठीक बगल में खड़े थे. आम तौर पर, दूसरे देशों में, क्रिकेट बोर्ड एक ऑटोनॉमस बॉडी है, और राजनीतिक और मंत्री का दखल सिर्फ इवेंट्स को ऑर्गनाइज़ करने तक ही सीमित है लेकिन उनके देश में, राजनीति आ गई है, और राजनीतिक हस्तियां बोर्ड में बहुत ज़्यादा शामिल हो गई हैं, और इस तरह के फैसले सामने आ रहे हैं.

वह यहां सेफ हैं ना?

आगे कहा कि अगर सेफ्टी की बात करें, तो शेख हसीना भी वहां हुए प्रोटेस्ट के बाद हमारे देश आई थीं और वह यहां सेफ हैं, है ना? हमारे देश की सेंट्रल गवर्नमेंट ने उन्हें अच्छी सिक्योरिटी दी है और यहां पनाह दी है तो, अगर किसी देश का प्राइम मिनिस्टर यहां आकर सेफ रह सकता है, तो प्लेयर्स को भी सेफ्टी जरूर मिलेगी. अभी के शेड्यूल के हिसाब से, बांग्लादेश 7 फरवरी को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में दो बार की चैंपियन वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने T20 वर्ल्ड कप 2026 कैंपेन की शुरुआत करने वाला है. लिटन दास की लीडरशिप वाली टीम फिर 9 फरवरी को उसी जगह पर इटली से भिड़ेगी, जिसके बाद कोलकाता में फिर से इंग्लैंड से भिड़ेगी, इंग्लैंड से मुकाबला करने के बाद, बांग्लादेश मुंबई जाएगी और वानखेड़े स्टेडियम में नेपाल से खेलेगी.

‘प्लेन में बम है…’, अचानक हवा में फैली दहशत, इंडिगो फ्लाइट को 5 दिन

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अक्सर देखा जाता है कि लोग लंबी दूरी तय करने के लिए फ्लाइट का सहारा लेते हैं, इसी बीच दिल्ली से पुणे जा रही इंडिगो की फ्लाइट को धमकी भरा पत्र मिला है. जिसके बाद हड़कंप मच गया, हालांकि पुणे में विमान की लैंडिंग हुई और फिर यात्रियों को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला गया.

इंडिगो के प्रवक्ता ने इसकी जानकारी दी है.

इंडिगो की तरफ से बताया गया कि 22 जनवरी को दिल्ली से पुणे जा रही इंडिगो फ्लाइट 6ई 2608 में उतरते ही सुरक्षा खतरे की जानकारी मिली. तय प्रोटोकॉल के अनुसार, हमने तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित किया और स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर के अनुसार पूरी तरह सहयोग किया. फ्लाइट के सभी यात्री और क्रू सुरक्षित बाहर उतर गए. हम अपने ग्राहकों, क्रू, और विमान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

इंडिगो की फ्लाइट को धमकी भरा नोट मिला. हालांकि, विमान पुणे हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतर गया और सभी यात्री सुरक्षित रूप से विमान से उतर गए. इसके बाद विमान की जांच की गई.बता दें कि इससे पहले इंडिगो एयरलाइंस के एक विमान में रविवार को बम होने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया था. यह मामला दिल्ली से बागडोगरा जा रही इंडिगो फ्लाइट संख्या 6ई-6650 से जुड़ा था, लखनऊ कमिश्नरेट पुलिस ने आधिकारिक बयान जारी कर इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी थी.

पुलिस के अनुसार, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) के माध्यम से सूचना मिली कि उड़ान के दौरान विमान में बम होने की धमकी मिली है. सूचना मिलते ही सभी सुरक्षा मानकों और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करते हुए संबंधित विमान की लखनऊ एयरपोर्ट पर आपातकालीन लैंडिंग कराई गई. विमान ने सुबह 9:17 बजे सुरक्षित रूप से लखनऊ एयरपोर्ट पर लैंडिंग की. इसके बाद विमान को आइसोलेशन बे में पार्क कराया गया.

पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच के दौरान विमान के अंदर से टिशू पेपर पर हाथ से लिखा हुआ एक नोट बरामद हुआ, जिस पर लिखा था, ‘प्लेन में बम. इसी नोट के आधार पर सुरक्षा एजेंसियों ने जांच को और अधिक गंभीरता से आगे बढ़ाया. पुलिस ने बताया कि फ्लाइट में कुल 222 यात्री और 8 शिशु सवार थे. इसके अलावा विमान में 2 पायलट और 5 क्रू मेंबर मौजूद थे. सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी यात्रियों और क्रू मेंबर्स को विमान से बाहर निकाल लिया गया. हालांकि सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि विमान में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला, जल्द ही झूठी सूचना देने वाले को गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

ट्रंप के टैरिफ वॉर से दुनिया रही त्रस्त, PM मोदी ने सूझबूझ से भारत

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जबसे डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के दूसरी बार राष्ट्रपति बने तबसे उन्होंने पूरी दुनिया में टैरिफ के नाम पर हाहाकार मचाया हुआ है. दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को हिला कर रख दिया है.

अमेरिका की आक्रामक ट्रेड पॉलिसी से सिर्फ कोई एक ही देश नहीं प्रभावित हुआ है जबकि यूरोप से लेकर एशिया तक हर कोई न कोई देश परेशान रहे हैं. लेकिन इसी मुश्किल दौर में भारत ने अलग रास्ता चुना. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दबाव में झुकने के बजाय सूझबूझ और रणनीति से ऐसा कदम उठाया कि भारत की अर्थव्यवस्था ने रफ्तार पकड़ ली. ये हम नहीं कह रहे हैं, यह दावा है The Economist मैगजीन की एक हालिया रिपोर्ट का तो समझते हैं पूरी रिपोर्ट.

विदेशी दबाव, लेकिन भारत ने नहीं बदला रास्ता

The Economist के मुताबिक, अमेरिका की ओर से लगाए गए भारी टैरिफ के बावजूद भारत ने घबराकर कोई जल्दबाज़ी वाला फैसला नहीं किया. रिपोर्ट में लिखा गया कि भारत ने साफ संकेत दिया कि वह किसी दबाव में आकर ऐसे समझौते नहीं करेगा, जिनका नुकसान आगे चलकर देश को उठाना पड़े. इससे अमेरिका के दबाव की धार भी कमजोर हुई.

चीन और यूरोप के साथ रिश्तों में सुधार

रिपोर्ट में यह भी याद दिलाया गया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में चीन के साथ जमे रिश्तों में सुधार हुआ. निवेश पर लगी कुछ पाबंदियां हटाई गईं और व्यापार को लेकर बातचीत आगे बढ़ी. वहीं, यूरोपीय यूनियन के साथ एक बड़े ट्रेड डील की उम्मीद भी जताई गई है, जिसे भारत की कूटनीतिक जीत माना जा रहा है.

घरेलू सुधारों से बदली तस्वीर

विदेशी दबाव को मोदी सरकार ने घरेलू सुधारों का हथियार बना लिया. टैक्स सिस्टम को आसान किया गया, रोजगार कानूनों में बदलाव हुए ताकि कंपनियां बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग कर सकें. बिजली सेक्टर और न्यूक्लियर इंडस्ट्री को प्राइवेट और विदेशी निवेश के लिए खोला गया. The Economist ने खास तौर पर लिखा कि लेबर रिफॉर्म जैसे बड़े फैसलों पर भी अपेक्षा से कम विरोध देखने को मिला, जो अपने आप में चौंकाने वाला रहा.

चुनौतियां भी आईं, पर हौसला नहीं टूटा

रिपोर्ट यह भी मानती है कि मोदी के दूसरे कार्यकाल का एक बड़ा हिस्सा कृषि कानूनों के विरोध की भेंट चढ़ गया. इसके बावजूद सरकार ने आर्थिक सुधारों की दिशा नहीं छोड़ी. मैगज़ीन का कहना है कि अगर यूरोपीय नेता भारत से कुछ सीख सकते हैं, तो वह यह कि संकट के बीच भी अवसर निकाला जा सकता है.

‘Rising Giant’ बनता भारत

The Economist ने भारत को “Rising Giant” बताया है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के 50% तक के टैरिफ, विदेशी निवेश की सुस्ती और रुपये की कमजोरी के बावजूद भारत की GDP तीसरी तिमाही में 8.2% बढ़ी. सरकार ने 2026 के लिए ग्रोथ अनुमान भी बढ़ाकर 7.4% कर दिया है. यानी कुलमिलाकर रिपोर्ट का निष्कर्ष साफ है जब दुनिया टैरिफ वॉर से त्रस्त है, भारत मोदी की स्मार्ट स्ट्रैटेजी से आगे बढ़ रहा है. यूरोपियन लीडर्स अब मोदी को स्टार मान रहे हैं.

“बारिश और बर्फबारी बनी मुसीबत, सफेद चादर से लिपटा त्रिकुटा पर्वत, कटरा “

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श्री माता वैष्णो देवी भवन की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षा कारणों के चलते कटरा में ही रोक दिया गया है. जम्मू-कश्मीर में बीती रात से लगातार बारिश का सिलसिला जारी है, जबकि ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी भी हो रही है.

खराब मौसम के चलते भूस्खलन, फिसलन और रास्तों पर जोखिम बढ़ने की आशंका को देखते हुए Shri Mata Vaishno Devi Shrine Board प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए अगले आदेश तक यात्रा को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है.

मौसम विभाग के अनुसार, क्षेत्र में तेज बारिश के साथ ठंड में भी इजाफा हुआ है, पहाड़ी इलाकों में बर्फ जमने से ट्रैक पर फिसलन बढ़ गई है, जिससे पैदल यात्रियों, घोड़ा-खच्चर सेवाओं और बैटरी कार संचालन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए बोर्ड प्रशासन ने एहतियातन यात्रा रोकने का निर्णय लिया. कटरा में बनाए गए होल्डिंग एरिया में यात्रियों को ठहराया गया है.

प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं को मौसम की ताजा जानकारी दी जा रही है और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. सुरक्षा बलों और आपदा प्रबंधन टीमों को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके. बोर्ड प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें. मौसम में सुधार होते ही और मार्ग पूरी तरह सुरक्षित पाए जाने पर यात्रा को पुनः शुरू करने का निर्णय लिया जाएगा. फिलहाल, मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.

उधर, कटरा और आसपास के क्षेत्रों में बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है. स्थानीय प्रशासन ने भी लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है. श्रद्धालुओं का कहना है कि यात्रा स्थगन का निर्णय उनकी सुरक्षा के हित में है और वे प्रशासन के निर्देशों का पालन कर रहे हैं. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अगले आदेश तक यात्रा कटरा से आगे नहीं बढ़ेगी. जैसे ही मौसम सामान्य होगा, यात्रा बहाल करने को लेकर नई सूचना जारी की जाएगी. श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि वे धैर्य बनाए रखें और सुरक्षित रहें.

केरल को गुजरात वाले फॉर्मूले से जीतेगी BJP! जानें PM मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (शुक्रवार को) केरल के दौरे पर है। इस दौरान, PM मोदी ने केरल में इनोवेशन और Entrepreneurship हब का शिलान्यास किया। साथ ही, पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड भी लॉन्च किया, जिससे रेहड़ी-पटरी वालों को फायदा मिलेगा।

पीएम मोदी ने तिरुवनंतपुरम में 3 नई अमृत भारत ट्रेनों, नागरकोइल-मंगलुरु, तिरुवनंतपुरम-तांबरम, तिरुवनंतपुरम-चार्लापल्ली और त्रिशूर और गुरुवयूर के बीच एक नई यात्री ट्रेन को हरी झंडी दिखाई।

केरल में चलेगा गुजरात का फॉर्मूला?

PM मोदी ने कहा कि केरल में मौजूद वामपंथी गुट शायद मुझे पसंद ना करें। फिर भी, मुझे फैक्ट बताने दीजिए। 1987 से पहले, गुजरात में BJP एक हाशिए की पार्टी थी। 1987 में, BJP ने पहली बार अहमदाबाद नगर निगम पर कंट्रोल हासिल किया। ठीक उसी प्रकार जैसे पार्टी ने हाल ही में तिरुवनंतपुरम में जीत पाई है। तब से, गुजरात की पब्लिक ने हमें सेवा करने के मौके दिए हैं, और हम दशकों से ऐसा करते आ रहे हैं। हमारा सफर गुजरात के एक शहर से शुरू हुआ, और इसी प्रकार, केरल में भी हमारी शुरुआत एक शहर से हुई है। मैं मानना हूं कि यह दर्शाता है कि केरल की जनता बीजेपी पर भरोसा करने लगी है, और उसी प्रकार हमसे जुड़ रही है जैसे कभी गुजरात की जनता जुड़ी थी।

तिरुवनंतपुरम को Startup Hub बनाने की पहल

तिरुवनंतपुरम में PM मोदी ने कहा, ‘आज केरल के विकास के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों को नई गति मिली है। आज से केरल में Rail Connectivity और सशक्त हुई है। तिरुवनंतपुरम को देश का बड़ा Startup Hub बनाने के लिए पहल हुई है। आज केरल से, पूरे देश के लिए गरीब कल्याण से जुड़ी एक बड़ी शुरुआत भी हो रही है। आज पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड, लॉन्च किया गया है। इससे देशभर के रेहड़ी-ठेले, फुटपाथ पर काम करने वाले साथियों को लाभ होगा।’

विकसित भारत के लिए पूरा देश कर रहा काम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘विकसित भारत के निर्माण के लिए पूरा देश मिलकर काम कर रहा है। इस डेवलपमेंट में हमारे शहरों ने अहम रोल निभाया है। पिछले 11 साल से हमारी सरकार ने शहरी बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण निवेश किया है।’

LDF-UDF से मुक्ति चाहता है केरल- PM मोदी

PM मोदी ने पोस्ट किया, ‘आज तिरुवनंतपुरम में BJP-NDA की जनसभा को संबोधित करने के लिए उत्सुक हूं। हाल ही में संपन्न हुए नगर निगम चुनावों में इस शहर ने हमें जीत दिलाकर इतिहास रच दिया है। यह साफ है कि केरल एलडीएफ और यूडीएफ के बीच चल रहे धांधली से मुक्त होना चाहता है।’

PM मोदी 4 नई ट्रेनों को दिखाएंगे हरी झंडी

साथ ही, रेल कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री ने 4 नई ट्रेन सेवाओं को हरी झंडी दिखाई, जिनमें 3 अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें शामिल हैं। एक ऑफिशियल बयान के मुताबिक, इससे आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना के बीच क्षेत्रीय संपर्क मजबूत होगा। नई ट्रेनें यात्रियों के लिए सफर को ज्यादा किफायती और सुरक्षित बनाएंगी। साथ ही इलाके में टूरिज्म, बिजनेस, शिक्षा, रोजगार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी बढ़ेगा।

रेहड़ी-पटरी वालों के फायदे की बात

पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड, जो यूपीआई लिंक्ड ब्याज-मुक्त रिवॉल्विंग क्रेडिट फैसिलटी है, रेहड़ी-पटरी वालों को उससे तुरंत पैसे मिल जाएंगे। इससे डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा। औपचारिक क्रेडिट इतिहास बनाने में भी उनको मदद मिलेगी।

विज्ञान और इनोवेशन के सेक्टर में आएगा बूम

प्रधानमंत्री मोदी केरल के रेहड़ी-पटरी वालों समेत 1 लाख लाभार्थियों को पीएम स्वनिधि लोन भी बांटेंगे। विज्ञान और इनोवेशन के सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने तिरुवनंतपुरम में CSIR-NIIST इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और उद्यमिता हब की आधारशिला रखी।

CG: आबकारी उप निरीक्षक के 80 पदों पर जारी नियुक्ति आदेश रद्द, विभाग ने कही यह बात…

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राज्य सेवा परीक्षा-2024 के माध्यम से आबकारी उप निरीक्षक के 80 पदों पर जारी नियुक्ति आदेश को तकनीकी (टंकण) त्रुटि के कारण रद्द कर दिया गया है। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की चयन सूची के आधार पर 85 में से 80 पदों पर 21 जनवरी 2026 को नियुक्ति आदेश जारी हुआ था।

राज्य सेवा परीक्षा-2024 के माध्यम से आबकारी उप निरीक्षक के 80 पदों पर जारी नियुक्ति आदेश को तकनीकी (टंकण) त्रुटि के कारण रद्द कर दिया गया है।

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की चयन सूची के आधार पर 85 में से 80 पदों पर 21 जनवरी 2026 को नियुक्ति आदेश जारी हुआ था।

लेकिन आदेश में गलती पाए जाने पर उसी दिन नया आदेश जारी कर पुराने आदेश को निरस्त कर दिया गया। विभाग ने स्पष्ट किया है कि त्रुटि में सुधार कर जल्द ही पुनः नया नियुक्ति आदेश जारी किया जाएगा।

CG: मेडिकल कॉलेजों में खत्म नहीं होंगे जूनियर डॉक्टर के पद, सामने आई यह बड़ी वजह…

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प्रदेश के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पहले से स्वीकृत जूनियर रेसीडेंट (जेआर) के पद खत्म नहीं होंगे। ये पद अस्तित्व में रहेंगे। इन पदों पर एमबीबीएस डिग्रीधारी डॉक्टरों की भर्ती रहेगी। सालभर पहले रायगढ़ मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के जेआर को सरेंडर करने संबंधी पत्र कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन को लिखा था।

प्रदेश के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पहले से स्वीकृत जूनियर रेसीडेंट (जेआर) के पद खत्म नहीं होंगे। ये पद अस्तित्व में रहेंगे। इन पदों पर एमबीबीएस डिग्रीधारी डॉक्टरों की भर्ती रहेगी। सालभर पहले रायगढ़ मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के जेआर को सरेंडर करने संबंधी पत्र कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन को लिखा था। इसके बाद विवाद खड़ा हो गया था। पत्र में जेआर को अस्पताल व कॉलेज में गैरजरूरी बताते हुए पद खत्म करने की मांग की गई थी। जानकारों ने इस पर सवाल भी उठाए थे।

डीन ने सीएमई को लिखे पत्र में कहा था कि कॉलेज में पीजी की सीटें हैं इसलिए जेआर की जरूरत नहीं है। हालांकि नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) कॉलेज के निरीक्षण के दौरान मान्यता के लिए जेआर की गिनती करता है। मतलब साफ है कि सभी मेडिकल कॉलेजों के सेटअप में फैकल्टी में सीनियर रेसीडेंट (एसआर) व जेआर के पद भी शामिल है।

डीन के पत्र पर शासन ने कोई ध्यान नहीं दिया। इसका मतलब साफ है कि ये पद पहले की तरह बना रहेगा। पत्रिका को चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया है कि ये पद खत्म नहीं किया जाएगा। एक पद स्वीकृत कराने के लिए काफी समय लग जाता है। ऐसे में पहले से सेटअप में मंजूर पद यथावत रहेंगे। इस तरह का सुझाव सही नहीं है।

रायगढ़ में 55 जेआर दे रहे थे सेवाएं

रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में जेआर के 55 पद स्वीकृत हैं। जब डीन ने सीएमई को पत्र लिखा, तब वहां 52 सेवाएं दे रहे थे। इनमें रेगुलर के अलावा संविदा व बांडेड जेआर शामिल हैं। वहीं कॉलेज के 10 विभागाें में 26 पीजी की सीटें थीं, जो अब बढ़कर 40 पहुंच गई हैं। प्रबंधन ने कहा था कि एनएमसी पीजी छात्रों को जेआर मानती है इसलिए कॉलेज में स्वीकृत नियमित पदों की जरूरत नहीं है।

इसलिए इन पदों को सरेंडर करना उचित होगा। यही नहीं नियमित जेआर को नए कॉलेजों में भेजा जाना उचित होगा, जहां पीजी कोर्स नहीं चल रहा है। या स्वास्थ्य विभाग के सेटअप में जिला या अन्य अस्पतालों में भेजा जाना उचित होगा। इससे जेआर को दिए जाने वाले वेत्तन व भत्ते की बचत होगी। साथ ही बचे पैसे को पीजी छात्रों को स्टाइपेंड के रूप में दिया जा सकेगा। कार्यरत जेआर को दूसरे कॉलेजों व स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों में ट्रांसफर करने का भी अनुरोध किया गया था।

1000 से ज्यादा पद

प्रदेश के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में जेआर के करीब एक हजार पद मंजूर है। जेआर के लिए वैसे तो शैक्षणिक योग्यता एमबीबीएस है, लेकिन कुछ सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमडी मेडिसिन करने के बाद भी जेआर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। वहीं कुछ जिला अस्पतालों में एमडी मेडिसिन या रेडियो डायग्नोसिस, सर्जरी विषय में पीजी करने के बाद जेआर या मेडिकल अफसर बने हुए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे में जेआर के पदों को विलोपित किया जाना सही नहीं होगा। एमबीबीएस के बाद छात्रों को दो साल के लिए बांड पर रखा जाता है। उन्हें मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पतालों व सीएचसी में जेआर बनाया जाता है। जब पद ही विलाेपित हो जाएंगे तो उन्हें कहां पदस्थ किया जाएगा? छोटे मेडिकल कॉलेजों में जहां, पीजी की सीटें कम हो, वहां जेआर इलाज भी करते हैं। हालांकि नेहरू मेडिकल जैसे बड़े कॉलेज में जेआर दवा की पर्ची बनाते हैं।

मेडिकल कॉलेजों के सेटअप में जेआर का पद सेंक्शन है। एनएमसी भी मान्यता के लिए निरीक्षण के दौरान फैकल्टी के अलावा एसआर व जेआर भी देखा जाता है। ऐसे में पद खत्म करने की जरूरत नहीं है। एनएमसी के नाम्सZ में जेआर का पद है। जेआर रहने से विभाग को भी फायदा है।

CG: 6 मजदूरों की मौत के बाद सरकार ने लिया कड़ा एक्शन…

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बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम धौराभाठा  में हुई घटना के मामले में कई खामियां उजागर हुई हैं. हादसे के बाद सरकार ने कड़ा एक्शन लिया है. 

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम धौराभाठा स्थित मेसर्स रियल इस्पात एण्ड एनर्जी प्रा. लि. के कारखाना परिसर में घटित भीषण औद्योगिक दुर्घटना के मामले में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर सख्त कदम उठाया गया है. दुर्घटना की प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन पाए जाने पर कारखाना अधिनियम के तहत किल्न क्रमांक-01 के संचालन और मेंटेनेंस सहित समस्त कार्यों पर तत्काल प्रतिबंध लगाए जाने का आदेश जारी किया गया है.

कार्यालय सहायक संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, बलौदाबाजार-भाटापारा द्वारा जारी आदेश के अनुसार  22 जनवरी 2026 को सुबह लगभग 9.40 बजे किल्न क्रमांक-01 के डस्ट सेटलिंग चेंबर के द्वितीय तल में कार्य के दौरान अचानक विस्फोट एवं गर्म ऐश की बौछार होने से 6 श्रमिकों की मौके पर ही मृत्यु हो गई, जबकि 5 श्रमिक गंभीर रूप से घायल हो गए.

कई लापरवाहियां हुईं उजागर

घटना के समय डस्ट सेटलिंग चेंबर के भीतर लगभग 850 से 900 डिग्री सेल्सियस तापमान की गर्म ऐश को पोकिंग के माध्यम से नीचे गिराया जा रहा था. घटना की गंभीरता को देखते हुए सहायक संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा ने उप संचालकों एवं अधिकारियों की संयुक्त टीम के साथ कारखाने का निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान दुर्घटनास्थल की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की गई. इस दौरान कारखाना प्रबंधन के प्रतिनिधि उपस्थित रहे.

प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कारखाना प्रबंधन द्वारा  एसओपी का पालन नहीं किया गया. किल्न का शटडाउन किए बिना श्रमिकों से अत्यंत जोखिमपूर्ण स्थिति में कार्य कराया गया. डस्ट सेटलिंग चेंबर के हाईड्रोलिक स्लाइड गेट को बंद नहीं किया गया, उचित वर्क परमिट जारी नहीं किया गया, नियमित रखरखाव का अभाव रहा और श्रमिकों को आवश्यक सुरक्षा प्रशिक्षण, पर्यवेक्षण और हीट रेसिस्टेंट एप्रन, सुरक्षा जूते, हेलमेट जैसे अनिवार्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए.

किल्न क्रमांक-01 में विनिर्माण प्रक्रिया एवं मेंटेनेंस कार्य इमिनेंट डेंजर की स्थिति में थे. जिसके चलते कारखाना अधिनियम, 1948 की धारा 40(2) के अंतर्गत किल्न क्रमांक-01 के संचालन एवं समस्त मेंटेनेंस कार्यों पर प्रतिबंध लगाया गया है. यह प्रतिबंध तब तक प्रभावशील रहेगा, जब तक कारखाना प्रबंधन द्वारा सभी आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाते.

कार्रवाई जारी रहेगी

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंधात्मक अवधि के दौरान कारखाने में नियोजित समस्त श्रमिकों को देय वेतन और अन्य भत्तों का भुगतान निर्धारित तिथि में अनिवार्य रूप से किया जाए. अफसरों का कहना है कि  औद्योगिक प्रतिष्ठानों में श्रमिकों की सुरक्षा शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है. सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी.

CG: गणतंत्र दिवस पर छत्तीसगढ़ की झांकी में दिखेगा देश का पहला आदिवासी डिजिटल म्यूजियम…

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गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ की झांकी दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह झांकी भारत के पहले आदिवासी डिजिटल म्यूजियम पर आधारित है, जो आदिवासी वीर नेताओं के संघर्ष, समर्पण और बलिदान को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है।

स्वतंत्रता का मंत्रवंदे मातरम्थीम पर आधारित झांकी

‘स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्’ थीम वाली यह झांकी गुरुवार को रक्षा मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय मीडिया के सामने आरआर कैंप में आयोजित प्रेस पूर्वावलोकन के दौरान प्रदर्शित की गई। झांकी में आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को आधुनिक डिजिटल माध्यमों के जरिए प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया है।

अमर आदिवासी नायकों को श्रद्धांजलि

छत्तीसगढ़ की यह झांकी उन अमर आदिवासी नायकों को श्रद्धांजलि देती है, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के अन्यायपूर्ण कानूनों का साहसपूर्वक विरोध किया और देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। झांकी आदिवासी समाज के शौर्य, स्वाभिमान और देशभक्ति को सशक्त रूप से सामने रखती है।

नवा रायपुर में स्थापित पहला आदिवासी डिजिटल म्यूजियम

इन शहीदों की स्मृति में नवा रायपुर अटल नगर में देश का पहला आदिवासी डिजिटल म्यूजियम स्थापित किया गया है। इस म्यूजियम में 14 प्रमुख आदिवासी स्वतंत्रता संघर्षों को आधुनिक डिजिटल तकनीकों के माध्यम से संरक्षित किया गया है। इस म्यूजियम का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर किया था।

अंतिम रूप देने में जुटे कलाकार और अधिकारी

विशेषज्ञ समिति से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद सार्वजनिक संबंध विभाग के अधिकारी और कलाकार पिछले एक महीने से झांकी को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इस वर्ष कुल 17 राज्य झांकियों को कर्तव्य पथ पर परेड में शामिल होने का गौरव प्राप्त हुआ है।

वीर गुंडाधुर और भूमकाल विद्रोह की झलक

झांकी में वर्ष 1910 के भूमकाल विद्रोह के नायक वीर गुंडाधुर को विशेष रूप से दर्शाया गया है। धरवा समुदाय के इस वीर योद्धा ने अन्याय के खिलाफ समाज को संगठित किया था। भूमकाल विद्रोह के प्रतीक आम की टहनियां और सूखी मिर्च भी झांकी में दिखाई गई हैं। विद्रोह की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अंग्रेजों को नागपुर से सैनिक बुलाने पड़े, फिर भी वे वीर गुंडाधुर को पकड़ नहीं सके।

वीर नारायण सिंह की शौर्यगाथा

झांकी में छत्तीसगढ़ के पहले शहीद वीर नारायण सिंह को घोड़े पर तलवार हाथ में लिए दर्शाया गया है। उन्होंने अकाल के समय गरीबों के हितों के लिए संघर्ष किया और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह प्रस्तुति आदिवासी समुदाय के अडिग साहस, देशभक्ति और स्वतंत्रता के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को प्रभावी ढंग से दर्शाती है।