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इस दिन रहेगा ईद उल-अज़हा पर्व पर अवकाश, सामान्य प्रशासन विभाग का आदेश जारी…

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मुस्लिम समाज के प्रमुख त्यौहारों में शामिल ईद उल-अज़हा को लेकर सरकार ने आदेश जारी किया है। आदेश के मुताबिक़ ईद की छुट्टी पहले 27 मई को तय थी जिसमे बदलाव किया गया है। अब 28 मई यानी गुरुवार को यह अवकाश मिल सकेगा। इस संबंध में छत्तीसगढ़ सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी कर दिया है।

क्या लिखा है आदेश में?

जीएडी की तरफ से जारी आदेश के अनुसार विभाग की अधिसूचना क्रमांक-1001/86/2025-GAD-5, दिनांक 06 नवम्बर, 2025 द्वारा वर्ष 2026 के लिए अवकाश घोषित किए गए हैं, जिसमें सार्वजनिक एवं सामान्य अवकाश की सूची में “ईद-उल-जुहा (बकरीद)” हेतु दिनांक-27 मई, 2026, दिन-बुधवार को अवकाश घोषित है।

राज्य शासन एतद्द्वारा पूर्व में जारी उक्त अधिसूचना में आंशिक संशोधन करते हुए, “ईद-उल-जुहा (बकरीद)” के पर्व हेतु पूर्व में घोषित अवकाश दिनांक-27 मई, 2026, दिन-बुधवार के स्थान पर दिनांक 28 मई, 2026, दिन-गुरुवार को सार्वजनिक एवं सामान्य अवकाश घोषित करता है।

छग वक्फ बोर्ड ने जारी किया दिशा-निर्देश

मुस्लिम समुदाय का अहम पर्व ईद उल अजहा (बकरीद) इस साल 28 मई को मनाया जाना है। लिहाजा शांति व्यवस्था को देखते हुए छग राज्य वक़्फ़ बोर्ड ने भी जरूरी दिशा-निर्देश जारी किये है। 5 बिन्दुओ वाले एडवाइजरी में निर्देशित किया गया है कि, ईद-उल-अज़हा के मौके पर खुले में या सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी बिल्कुल न करें। प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी न करें, कुर्बानी की फोटो या वीडियो सोशल मीडिया में
वायरल न करें।

वक़्फ़ बोर्ड के निर्देश के अनुसार कुर्बानी का खून नालियों में न बहाएं, अपशिष्ट पदार्थ व खून गड्ढा खोदकर दफनाएं। खुले में नमाज़ अदा न करें जिससे यातायात या अन्य किसी प्रकार की समस्या हो। जमात ज्यादा होने पर शिफ्टों में ईद की नमाज़ की व्यवस्था करें। समाज में साम्प्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारा कायम रख कर सभी समाज की आस्था का आदर करते हुए ईद-उल-अज़हा के त्योहार को मनाएं।

काव्य कुंभ में गूंजेगी मामे खान की सूफियाना आवाज, रायपुर में इस दिन होगा भव्य आयोजन…

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राजधानी रायपुर में 6 जून को आयोजित होने जा रहे “काव्य कुंभ सीजन-2” को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। आयोजन में कविता, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। प्रदेशभर के साहित्य प्रेमियों और युवाओं में कार्यक्रम को लेकर विशेष उत्साह है। इस बार आयोजन में राजस्थान के प्रसिद्ध फोक सिंगर मामे खान अपनी प्रस्तुति देंगे।

आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम की टिकटें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म BookMyShow पर उपलब्ध हैं। आप भी अपना टिकट बुक कराकर इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।

बता दें कि राजस्थान के जैसलमेर निवासी मामे खान मंगणियार समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। यह समुदाय अपनी पारंपरिक लोक संगीत विरासत के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। मामे खान ने बेहद कम उम्र में ही संगीत की दुनिया में कदम रख दिया था। बताया जाता है कि उन्होंने मात्र 12 वर्ष की उम्र में अपने गायन करियर की शुरुआत की थी। उनकी पहली बड़ी प्रस्तुति पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के सामने हुई थी। कई वर्षों के संघर्ष और लगातार मेहनत के बाद मामे खान को साल 1999 में बॉलीवुड में पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने अपनी दमदार आवाज और लोक शैली से लाखों लोगों के दिलों में खास जगह बनाई। “केसरिया बालम”, “बावरे” सहित कई लोकप्रिय गीतों ने उन्हें देशभर में प्रसिद्धि दिलाई। उनकी गायकी में राजस्थान की मिट्टी, लोक संस्कृति और सूफी संगीत की अनूठी झलक देखने को मिलती है।

प्रदेश के इन 8 शहरों में ऑडिशन

छत्तीसगढ़ में साहित्य, कविता और मंचीय अभिव्यक्ति को नई पहचान देने वाला “काव्य कुंभ” इस बार अपने दूसरे अध्याय के साथ और भी बड़े स्वरूप में लौट रहा है। प्रदेशभर में युवाओं और साहित्य प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हो चुके इस आयोजन का विस्तार इस बार 8 शहरों तक किया गया है। रायपुर, कोरबा, बस्तर, भिलाई, अंबिकापुर, जशपुर, बिलासपुर और राजनांदगांव में एक से पांच जून तक ऑडिशन लिया जाएगा। यहां से चयनित प्रतिभागियों को प्रदेश स्तरीय मंच में प्रस्तुति देने का मौका मिलेगा। प्रदेश स्तर पर विजेताओं को एक लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

Sai Cabinet: साय कैबिनेट की बैठक हुई खत्म, इन अहम मुद्दों पर चर्चा के बाद लगी मुहर….

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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज साय कैबिनेट की अहम बैठक आयोजित हुई। छत्तीसगढ़ कैबिनेट की ये अहम बैठक महानदी भवन मंत्रालय में हुई। सीएम विष्णुदेव साय ने कैबिनेट की इस बैठक की अध्यक्षता की। राज्य में चल रहे सुशासन तिहार के बीच होने वाली यह कैबिनेट बैठक काफी अहम मानी जा रही थी। आज हुई साय कैबिनेट की बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। साय कैबिनेट की इस बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी प्रदेश के डिप्टी सीएम अरुण साव ने दी।

कैबिनेट की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए –

मंत्रिपरिषद ने राज्य के विभिन्न विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों, मंडलों और स्थानीय निकायों में जमा स्क्रैप और अनुपयोगी सामग्रियों के पारदर्शी एवं व्यवस्थित निस्तारण के लिए भारत सरकार के उपक्रम मेटल स्क्रैप ट्रेडिंग कॉर्पाेरेशन लिमिटेड (MSTC) के साथ सेलिंग एजेंसी अनुबंध की अवधि को आगामी तीन वर्षों के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया है।

यह अनुबंध नवंबर 2019 से प्रभावी है तथा 31 मई 2026 को समाप्त हो रहा था। MSTC के अत्याधुनिक ई-नीलामी प्लेटफॉर्म के माध्यम से देशभर के खरीदार प्रतिस्पर्धी बोली लगाकर स्क्रैप सामग्री खरीद सकते हैं, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होती है और राज्य को बेहतर मूल्य प्राप्त होता है।

इस व्यवस्था से राज्य में स्क्रैप निस्तारण की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित, तकनीक आधारित और राजस्वोन्मुख हुई है। इस निर्णय से विभागों को अलग-अलग निविदा और विज्ञापन प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होगी, प्रशासनिक समय और संसाधनों की बचत होगी, साथ ही कार्यालय परिसरों में स्वच्छता और स्थान प्रबंधन भी बेहतर होगा।

मंत्रिपरिषद् की बैठक में छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मण्डल को सामान्य प्रशासन विभाग के अधीन लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके लिए “छत्तीसगढ़ शासन कार्य (आवंटन) नियम” में संशोधन किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि “छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मण्डल अधिनियम, 2026” लागू होने के बाद पूर्व के छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मण्डल का विलय नए कर्मचारी चयन मण्डल में हो चुका है। साथ ही उसकी सभी परिसंपत्तियां एवं देनदारियां भी नए मण्डल में शामिल हो गई हैं।

राज्य मंत्रिपरिषद ने सड़क निर्माण कार्यों में 01 अप्रैल 2026 के पश्चात बिटुमिन (डामर) की कीमतों में हुई असाधारण और अप्रत्याशित वृद्धि को देखते हुए, राज्य के हित और निर्माण कार्यों में निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से 01 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 की अवधि के लिए अनुबंधित ठेकेदारों को सीमित एवं आंशिक मूल्य राहत (क्षतिपूर्ति) प्रदान करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

यह राहत केवल बिटुमिन मूल्य में हुई असाधारण वृद्धि के प्रभाव को कम करने हेतु निर्धारित फार्मूले के आधार पर दी जाएगी तथा अन्य निर्माण घटकों पर अनुबंध में पूर्व से प्रावधानित एस्केलेशन नियम यथावत लागू रहेंगे। वैश्विक परिस्थितियों और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि के कारण डामरीकरण कार्य प्रभावित होने लगे थे, जिससे सड़क निर्माण और संधारण कार्यों की गति बाधित होने की आशंका थी। भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा भी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं हेतु इसी प्रकार की राहत के निर्देश जारी किए गए हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सड़क निर्माण कार्य प्रभावित न हों और विकास कार्यों की गति बनी रहे, जिससे जनता को निर्धारित समय पर सड़क निर्माण कार्यों का लाभ मिल सके।

कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष पर FIR, भाजपा नेता की शिकायत पर पुलिस का बड़ा एक्शन…

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छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के बिश्रामपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत शिवनंदनपुर इलाके में चुनावी चर्चा के दौरान हुए विवाद के बाद कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष नरेंद्र जैन के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए गाली-गलौज की और हथियार दिखाकर धमकी दी।

जानकारी के अनुसार नगर पंचायत शिवनंदनपुर में आगामी 1 जून को चुनाव होना है। चुनावी माहौल के बीच राजनीतिक चर्चाओं को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बन गई। भाजपा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि विवाद के दौरान नरेंद्र जैन ने न केवल अपशब्दों का प्रयोग किया, बल्कि हथियार लेकर डराने-धमकाने की कोशिश भी की।
मामले को गंभीर मानते हुए भाजपा जिला अध्यक्ष ने बिश्रामपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने कांग्रेस नेता नरेंद्र जैन के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। घटना के बाद इलाके में राजनीतिक माहौल गरमा गया है और दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है।

बता दें कि नगर पंचायत चुनाव से पहले सामने आए इस विवाद ने स्थानीय राजनीति को और अधिक गर्मा दिया है। राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, जबकि प्रशासन चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने की तैयारी में जुटा हुआ है।

 

वन विभाग में वित्तीय हेराफेरी, cg में लाखों का गोबर खाद घोटाला, बड़ी कार्रवाई..

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​वन विभाग में वित्तीय हेराफेरी के बड़े मामले में बिलासपुर वृत्त के मुख्य वन संरक्षक (CCF) मनोज कुमार पाण्डेय ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने सहायक ग्रेड-2 और कैंपा (CAMPA) शाखा प्रभारी भूपेंद्र कुमार साहू को वित्तीय अनियमितता और कूट रचित दस्तावेजों के सहारे लाखों गबन करने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। ​यह पूरी कार्रवाई प्रधान मुख्य वन संरक्षक की जांच रिपोर्ट के बाद की गई है। जांच में सामने आया कि वर्ष 2022 में वृक्षारोपण कार्य के लिए की गई गोबर खाद खरीदी में व्यापक फर्जीवाड़ा हुआ था।

कैसे चलता था फर्जीवाड़े का खेल?

आरोपी कर्मचारी ने फर्जी प्रमाण-पत्रों और कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर 14.77 लाख रुपये का अवैध लेखा समायोजन किया था। इसके अलावा समिति सचिवों पर अनैतिक दबाव बनाकर शासकीय राशि आहरित करने की शिकायत भी सच पाई गई। ​आदेश के मुताबिक, भूपेंद्र साहू ने वरिष्ठ अधिकारियों को अंधेरे में रखकर गलत तरीके से एल.ओ.सी. तैयार करवाई और जांच के दौरान भी गुमराह करने वाले बयान दिए। विभाग ने इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन और घोर वित्तीय कदाचार मानते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया है।

निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय बिलासपुर तय किया गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ नरवा विकास और ग्रीन क्रेडिट जैसी अन्य योजनाओं में भी गड़बड़ी की शिकायतें हैं, जिनकी जांच तेज कर दी गई है।

‘लाल किला मैदान से गूंजा आदिम गौरव का स्वर, जनजातीय संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है छत्तीसगढ़ की पहचान… सीएम साय’

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देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में रविवार को जनजातीय अस्मिता, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक चेतना का विराट संगम देखने को मिला, जब भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में देशभर से हजारों जनजातीय प्रतिनिधि, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता तथा पारंपरिक समुदायों के लोग एक मंच पर एकत्र हुए। जनजाति सुरक्षा मंच एवं जनजाति जागृति समिति द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। मुख्यमंत्री साय के साथ छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री केदार कश्यप एवं रामविचार नेताम भी उपस्थित थे।

सीएम साय ने रेखा गुप्ता से की मुलाकत

कार्यक्रम स्थल पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सौजन्य भेंट की। लाल किले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्ययंत्रों और जनजातीय संस्कृति के विविध रंगों से सजा यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की मूल सांस्कृतिक चेतना और जनजातीय पहचान के संरक्षण का राष्ट्रीय संदेश बनकर उभरा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम में देशभर से आए जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों और लोगों से आत्मीय मुलाकात की तथा अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय समाज केवल प्रकृति का रक्षक नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सबसे प्राचीन और जीवंत स्वरूप है। उन्होंने कहा कि सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा करते हुए जनजातीय समाज ने प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने का कार्य किया है। आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण संकट और असंतुलित विकास की चुनौतियों से जूझ रही है, तब जनजातीय जीवन दर्शन मानवता को टिकाऊ और प्रकृति-सम्मत विकास का रास्ता दिखा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज सदियों से प्रकृति के साथ सहअस्तित्व और संतुलन का जीवन जीता आया है तथा उनकी संस्कृति और परंपराएं भारत की अमूल्य धरोहर हैं।

जनजातीय संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है छत्तीसगढ़ की पहचान

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है। छत्तीसगढ़ में लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है, जो केवल प्राकृतिक संपदा का प्रतीक नहीं, बल्कि जनजातीय जीवन, संस्कृति और परंपरा का जीवंत आधार भी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर राष्ट्र निर्माण तक जनजातीय समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। भगवान बिरसा मुंडा तथा छत्तीसगढ़ के अमर शहीद वीर नारायण सिंह जैसे महानायकों ने अपनी संस्कृति, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष, साहस और बलिदान का अद्वितीय इतिहास रचा है, जो नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उनकी सरकार जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि ‘आदि परब’, बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय प्रतिभा, परंपरा, खेलकौशल और पहचान को राष्ट्रीय मंच देने का सशक्त प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से जनजातीय समाज की सांस्कृतिक शक्ति, सामूहिकता और प्रतिभा को नई पहचान मिल रही है तथा युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा भी प्राप्त हो रही है।

भाषा से जीवित रहती है समाज की संस्कृति

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसी भी समाज की संस्कृति उसकी भाषा से जीवित रहती है, इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार जनजातीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि गोंडी, हल्बी और सादरी जैसी जनजातीय भाषाओं में बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा देने की दिशा में विशेष पहल की जा रही है, ताकि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा, सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक ज्ञान से जुड़ी रह सके। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह किसी समाज की पहचान, इतिहास और सामूहिक स्मृति का आधार भी होती है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आगे कहा कि बस्तर से सरगुजा तक देवगुड़ी जैसे पारंपरिक आस्था केंद्रों के संरक्षण और विकास का कार्य तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना केवल परंपरा को बचाने का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने और उनकी पहचान को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। राज्य सरकार इस दिशा में संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

कलाकारों ने दी प्रस्तुति

कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत की। लाल किला मैदान मांदर, ढोल, पारंपरिक लोकधुनों और सांस्कृतिक उत्साह से गूंजता रहा। विविध जनजातीय परंपराओं, रंगों, वेशभूषाओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों से सजा यह आयोजन देश की विविधता में एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रभावशाली प्रतीक बनकर सामने आया।

भारत के भविष्य की महत्वपूर्ण शक्ति है जनजातीय समाज

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जनजातीय समाज केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की भी महत्वपूर्ण शक्ति है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज का जीवन दर्शन, प्रकृति के प्रति सम्मान, सामुदायिक जीवन की भावना और सांस्कृतिक अनुशासन आधुनिक विकास मॉडल को मानवीय और संतुलित दिशा दे सकते हैं। लाल किला मैदान में आयोजित यह राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम केवल एक आयोजन बनकर सीमित नहीं रहा, बल्कि जनजातीय समाज की एकता, स्वाभिमान, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और प्रकृति-सम्मत विकास के राष्ट्रीय संकल्प का सशक्त घोष बनकर उभरा।

ग्लोबल मार्केट में अमेरिकी डॉलर के सामने जहां रुपया लगातार कमजोर हो रहा है, वहीं चीन का युआन उच्चतम स्तर… आइए जानें…

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ग्लोबल मार्केट में अमेरिकी डॉलर के सामने जहां रुपया लगातार कमजोर हो रहा है, वहीं चीन का युआन मजबूती के साथ तीन साल के उच्चतम स्तर पर है. आइए जानें कि चीन खुद को इतना मजबूत कैसे बना रहा है.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में इन दिनों भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है, जिसका सीधा असर एशियाई देशों की करेंसी पर पड़ रहा है. एक तरफ जहां भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार गोते लगाते हुए अपने रिकॉर्ड निचले स्तर की तरफ बढ़ रहा है, वहीं पड़ोसी देश चीन की मुद्रा युआन बिल्कुल अलग राह पर है. डॉलर की आंधी के बीच भी चीनी युआन मजबूती के साथ इतिहास रच रहा है. इस विपरीत स्थिति ने दुनिया भर के आर्थिक जानकारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है कि आखिर भारत और चीन की मुद्राओं में इतना बड़ा अंतर क्यों दिख रहा है.

भारतीय रुपये की ऐतिहासिक गिरावट 

वैश्विक बाजार के दबाव के चलते भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है और अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है. रुपये की इस तेज गिरावट को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक अब कई कड़े और बड़े कदम उठाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया बाजार में डॉलर की कमी को पूरा करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने, करेंसी स्वैप के दायरे को बढ़ाने और विदेशी निवेशकों के जरिए भारी मात्रा में डॉलर जुटाने जैसे रणनीतिक विकल्पों पर काम कर रहा है ताकि रुपये की साख को बचाया जा सके.

डॉलर के सामने चीनी युआन की दहाड़

रुपये के पूरी तरह विपरीत चलते हुए चीन की करेंसी युआन इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने पिछले 3 साल के सबसे उच्चतम स्तर पर कारोबार कर रही है. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले चीन के युआन यानी रेनमिनबी की विनिमय दर इस समय लगभग 6.84 से 6.86 युआन प्रति अमेरिकी डॉलर के मजबूत स्तर पर टिकी हुई है. इसका सीधा मतलब यह है कि वर्तमान में महज 1 चीनी युआन की अंतरराष्ट्रीय कीमत लगभग 0.14 अमेरिकी डॉलर के बराबर बैठती है, जो उसकी आर्थिक स्थिरता को दर्शाती है.

डॉलर और युआन के बीच विनिमय दर

वैश्विक करेंसी बाजार के ताजा आंकड़ों को देखें तो वर्तमान में 1 अमेरिकी डॉलर हासिल करने के लिए लगभग 6.80 से 6.90 चीनी युआन की ही जरूरत पड़ती है. अगर हाल के महीनों से इसकी तुलना की जाए तो युआन ने डॉलर के मुकाबले अपनी स्थिति में बहुत बड़ा सुधार किया है. इससे पहले के समय में यह विनिमय दर 7 युआन प्रति डॉलर के पार बनी हुई थी. इस तरह युआन ने मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करते हुए खुद को अमेरिकी डॉलर के सामने एक बेहद मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर लिया है.

भारतीय मुद्रा के मुकाबले चीनी युआन की कीमत

अगर चीनी युआन की ताकत का अंदाजा भारतीय रुपये के नजरिए से लगाया जाए, तो दोनों के बीच का अंतर काफी बड़ा नजर आता है. मौजूदा विदेशी मुद्रा विनिमय दरों के अनुसार, यदि आप चीनी युआन की तुलना सीधे भारतीय रुपये से करते हैं, तो भारत के बाजार में 1 चीनी युआन की कीमत लगभग 14.15 रुपये के स्तर पर पहुंच जाती है. युआन का रुपये के मुकाबले इतना महंगा होना यह साफ दिखाता है कि चीन की अर्थव्यवस्था और उसका मुद्रा प्रबंधन इस वैश्विक संकट में भारत से बेहतर स्थिति में है.

वैश्विक व्यापार से अमेरिकी डॉलर को हटाने की मुहिम

चीनी युआन की इस अप्रत्याशित मजबूती के पीछे सिर्फ बाजार के नियम नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे चीन सरकार की एक बहुत बड़ी आर्थिक रणनीति काम कर रही है. चीन की कम्युनिस्ट सरकार और वहां का केंद्रीय बैंक यानी ‘पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना’ मिलकर एक खास योजना पर काम कर रहे हैं. चीन का मुख्य लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मंच से अमेरिकी डॉलर के एकछत्र वर्चस्व को पूरी तरह खत्म करना या उसे सीधी चुनौती देना है, जिसे आर्थिक दुनिया में डि-डॉलरीकरण की मुहिम कहा जाता है.

स्मार्टनेस से खुद को मजबूत कर रहा चीन

चीन अपने पास मौजूद दुनिया के सबसे विशाल और मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल बेहद आक्रामक तरीके से कर रहा है. वह इस भारी-भरकम पूंजी के दम पर दुनिया भर के विकासशील और विकसित देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार में डॉलर के बजाय सीधे युआन में लेनदेन करने को बढ़ावा दे रहा है. चीन की कोशिश है कि युआन को दुनिया की सबसे भरोसेमंद और प्रमुख आरक्षित मुद्रा (रिजर्व करेंसी) के रूप में स्थापित किया जाए, ताकि वैश्विक वित्तीय प्रणाली पर अमेरिकी नियंत्रण को कमजोर किया जा सके.

SAIL Recruitment 2026: प्रोफेशनल पदों पर भर्ती, उम्मीदवारों को हर महीने 1.40 लाख रुपये सैलरी….

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कंपनी ने यंग प्रोफेशनल के पदों पर भर्ती शुरू की है, जिसमें चयन होने वाले उम्मीदवारों को हर महीने 1.40 लाख रुपये तक की सैलरी दी जाएगी.

अगर आपने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर ली है और किसी बड़ी सरकारी कंपनी में शानदार सैलरी वाली नौकरी का सपना देख रहे हैं, तो आपके लिए बड़ी अपडेट सामने आई है. देश की मशहूर महारत्न कंपनी Steel Authority of India Limited यानी SAIL ने युवाओं के लिए बंपर भर्ती निकाली है. कंपनी ने यंग प्रोफेशनल के पदों पर भर्ती शुरू की है, जिसमें चयन होने वाले उम्मीदवारों को हर महीने 1.40 लाख रुपये तक की सैलरी दी जाएगी.

यह भर्ती खास तौर पर पश्चिम बंगाल में स्थित SAIL के बड़े स्टील प्लांट्स के लिए की जा रही है. सरकारी नौकरी के साथ शानदार सैलरी, बड़े संस्थान में काम करने का मौका और बेहतर करियर ग्रोथ की वजह से यह भर्ती इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स के लिए काफी खास मानी जा रही है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस भर्ती में कौन आवेदन कर सकता है, कितनी वैकेंसी हैं, चयन कैसे होगा और आवेदन करने का तरीका क्या है.

किन पदों पर हो रही भर्ती?

SAIL ने यह भर्ती यंग प्रोफेशनल के पदों के लिए निकाली है. इस भर्ती अभियान के तहत कुल 48 पद भरे जाएंगे.ये पद पश्चिम बंगाल में स्थित SAIL के तीन बड़े प्लांट्स के लिए हैं.  जिसमें दुर्गापुर स्टील प्लांट (DSP), आईआईएससीओ स्टील प्लांट (IISCO) और अलॉय स्टील प्लांट (ASP) शामिल है.

कितनी मिलेगी सैलरी?

इस भर्ती की सबसे बड़ी खासियत इसकी शानदार सैलरी है. चयनित उम्मीदवारों को हर महीने अधिकतम 1.40 लाख रुपये तक का वेतन दिया जाएगा. इसके अलावा कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों को कई अन्य सुविधाएं भी मिल सकती हैं.

कौन कर सकता है आवेदन?

उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त कॉलेज या यूनिवर्सिटी से फुल टाइम B.E. या B.Tech की डिग्री होनी चाहिए. साथ ही ग्रेजुएशन में कम से कम 65 प्रतिशत अंक होना जरूरी है. यह भर्ती मुख्य रूप से इन इंजीनियरिंग ब्रांच के उम्मीदवारों के लिए है. जिसमें मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांच के छात्र आवेदन कर सकते हैं. वहीं जिन उम्मीदवारों के पास B.E./B.Tech के अलावा M.Tech, M.E. या MBA जैसी अतिरिक्त डिग्री होगी, उन्हें चयन प्रक्रिया में फायदा मिल सकता है.

चयन प्रक्रिया कैसे होगी?

SAIL इस भर्ती के लिए कई चरणों में उम्मीदवारों का चयन करेगी. जिसमें सबसे पहले उम्मीदवारों के आवेदन फॉर्म की जांच की जाएगी. इसके बाद जरूरत पड़ने पर कंपनी CBT यानी कंप्यूटर आधारित परीक्षा या एप्टीट्यूड टेस्ट आयोजित कर सकती है.फिर शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा. इसमें उम्मीदवारों के तकनीकी ज्ञान, व्यवहार और निर्णय क्षमता को परखा जाएगा. लास्ट  चयन से पहले उम्मीदवारों की मेडिकल जांच होगी.

आवेदन शुल्क कितना है?

इस भर्ती के लिए सभी कैटेगरी के उम्मीदवारों को 500 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा. फीस का भुगतान ऑनलाइन मोड में करना होगा.बिना शुल्क जमा किए गए आवेदन फॉर्म स्वीकार नहीं किए जाएंगे.

आवेदन की आखिरी तारीख क्या है?

ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. आवेदन करने की अंतिम तारीख 6 जून 2026 तय की गई है. उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि आखिरी समय का इंतजार न करें, क्योंकि उस दौरान वेबसाइट पर ट्रैफिक बढ़ने से तकनीकी दिक्कत आ सकती है.

ऐसे करें आवेदन

  1. सबसे पहले SAIL की आधिकारिक वेबसाइट https://www.sail.co.in/en पर जाएं.
  2. वेबसाइट के Careers सेक्शन पर क्लिक करें.
  3. अगर आप नए यूजर हैं, तो पहले One Time Registration करें.
  4. इसके बाद लॉगिन करके आवेदन फॉर्म भरें.
  5. अपनी फोटो, सिग्नेचर और जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें.
  6. ऑनलाइन माध्यम से आवेदन शुल्क जमा करें.
  7. फॉर्म सबमिट करने से पहले सभी जानकारी ध्यान से जांच लें.
  8. फाइनल सबमिट के बाद आवेदन फॉर्म की प्रिंट कॉपी सेव करके रख लें.

RCB vs GT Qualifier 1 Rain Chances:  बारिश से रद्द हो गया क्वालीफायर 1, तो क्या होगा.किसको मिलेगा फाइनल का टिकट’

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आज IPL 2026 का पहला क्वालीफायर मैच खेला जाएगा. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू और गुजरात टाइटंस की भिड़ंत धर्मशाला में होगी. यह मैच भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे से शुरू होगा. बेंगलुरू और गुजरात ने पॉइंट्स टेबल के टॉप-2 में फिनिश किया था बेशक यह एक हाई-वोल्टेज मुकाबला साबित होगा. मगर मैच में बारिश आ जाती है, तो क्या होगा? मैच बारिश या किसी अन्य कारण से शुरू ही नहीं हो पाया तो विजेता का फैसला कैसे होगा? यहां जान लीजिए इसके बारे में सबकुछ.

सबसे पहले तो यह जान लीजिए कि इंडियन प्रीमियर लीग में केवल फाइनल मैच के लिए रिजर्व डे का नियम है. बाकी प्लेऑफ मैच यानी क्वालीफायर 1, क्वालीफायर 2 और एलिमिनेटर मैच के लिए रिजर्व डे नहीं होता है.

बारिश से रद्द हो गया क्वालीफायर 1, तो क्या होगा

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू और गुजरात टाइटंस के बीच पहला क्वालीफायर मैच धर्मशाला में खेला जाएगा. अगर मैच में बारिश आ जाती है तो बताते चलें कि क्वालीफायर 1 के लिए कोई रिजर्व डे नहीं होता है. मैच ऑफिशियल्स आज ही मैच को पूरा करवाने का पूरा प्रयास करेंगे.

बारिश आने पर 120 मिनट का अतिरिक्त समय भी जोड़ा जाएगा. अगर 120 मिनट का अतिरिक्त समय जोड़े जाने तक भी पांच-पांच ओवर का मैच शुरू नहीं हो पाता है तो मुकाबले को रद्द घोषित कर दिया जाएगा. चूंकि क्वालीफायर 1 जीतने वाली टीम फाइनल में जाती है, लेकिन बारिश के कारण मैच शुरू ही नहीं हो पाया तो फाइनल में कौन सी टीम जाएगी?

किसको मिलेगा फाइनल का टिकट

क्वालीफायर 1 मैच रद्द होने पर विजेता का फैसला पॉइंट्स टेबल में बेहतर पोजीशन के आधार पर किया जाएगा. इसका मतलब पॉइंट्स टेबल में जो टीम ऊपर थी, उसे फाइनल का टिकट मिलेगा. याद दिला दें कि रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू अंक तालिका में सबसे ऊपर थी, इसलिए आज क्वालीफायर 1 मैच बारिश के कारण शुरू नहीं हो पाता है तो RCB फाइनल में पहुंच जाएगी.

SSC GD परीक्षा: एसएससी जीडी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा देने पहुंचे हजारों युवाओं के लिए आयोग ने कुछ शिफ्टों की परीक्षा रद्द…

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एसएससी जीडी कांस्टेबल परीक्षा के दौरान कई केंद्रों पर क्षमता से अधिक अभ्यर्थियों के पहुंचने और अव्यवस्था के कारण आयोग ने कुछ शिफ्टों की परीक्षा रद्द कर दी है.

एसएससी जीडी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा देने पहुंचे हजारों युवाओं के लिए पिछले दो दिन किसी झटके से कम नहीं रहे. कई परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थी सुबह से उम्मीद लेकर पहुंचे थे, लेकिन वहां का नजारा देखकर हैरान रह गए. कहीं सीटों से ज्यादा उम्मीदवार मौजूद थे, तो कहीं व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी. बढ़ती भीड़, अव्यवस्था और हंगामे के बीच आखिरकार कर्मचारी चयन आयोग (SSC) को बड़ा फैसला लेना पड़ा और कुछ केंद्रों पर आयोजित परीक्षा को रद्द कर दिया गया.

26 मई 2026 को जारी आधिकारिक नोटिस में आयोग ने साफ किया कि जिन केंद्रों पर स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई थी, वहां परीक्षा को निष्पक्ष तरीके से कराना संभव नहीं था. ऐसे में प्रभावित शिफ्टों की परीक्षा रद्द कर दी गई है और अब उसे दोबारा आयोजित किया जाएगा.

परीक्षा केंद्रों पर क्या हुआ?

जानकारी के मुताबिक कई शहरों में परीक्षा केंद्रों पर क्षमता से कहीं ज्यादा अभ्यर्थियों को बुला लिया गया था. जिस केंद्र पर 250 उम्मीदवारों के बैठने की व्यवस्था थी, वहां लगभग दोगुनी संख्या में छात्र पहुंच गए. ऐसे में न सिर्फ बैठने की समस्या पैदा हुई बल्कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित हो गई.

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज, कानपुर और गोरखपुर जैसे शहरों से लगातार शिकायतें सामने आईं. कई जगह उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र के बाहर ही रोक दिया गया. कुछ स्थानों पर गुस्साए अभ्यर्थियों ने विरोध प्रदर्शन किया, जबकि कहीं सड़क जाम और हंगामे की स्थिति भी बन गई. बिहार के मुजफ्फरपुर में भी परीक्षा रद्द होने की खबर के बाद छात्रों का गुस्सा देखने को मिला.

परीक्षा देने आए कई उम्मीदवारों का कहना था कि उन्होंने महीनों तैयारी की थी, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही की वजह से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा. यही कारण रहा कि सोशल मीडिया पर भी पूरे दिन एसएससी जीडी परीक्षा चर्चा का विषय बनी रही.

आयोग ने क्यों लिया परीक्षा रद्द करने का फैसला?

एसएससी का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण है. जब किसी केंद्र पर क्षमता से अधिक उम्मीदवार पहुंच जाएं और व्यवस्था प्रभावित हो जाए, तो परीक्षा को सही तरीके से आयोजित करना मुश्किल हो जाता है. आयोग के सामने लगातार शिकायतें पहुंच रही थीं कि कुछ केंद्रों पर उम्मीदवारों की संख्या निर्धारित सीमा से कहीं ज्यादा थी. ऐसी स्थिति में किसी भी तरह की गड़बड़ी या विवाद से बचने के लिए परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया.

परेशान हों, दोबारा मिलेगी परीक्षा देने की मौका

जिन उम्मीदवारों की परीक्षा 25 और 26 मई को प्रभावित हुई है, उनके लिए राहत की खबर है. एसएससी ने स्पष्ट किया है कि सभी प्रभावित अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा देने का मौका मिलेगा.कर्मचारी चयन आयोग के सेंट्रल रीजन के अनुसार, प्रभावित उम्मीदवारों की परीक्षा अब 27 मई 2026 से दोबारा आयोजित की जाएगी. यानी किसी भी उम्मीदवार का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा.

नए एडमिट कार्ड होंगे जारी

परीक्षा दोबारा होने के कारण उम्मीदवारों को पुराने एडमिट कार्ड के बजाय नया हॉल टिकट डाउनलोड करना होगा.  उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे समय-समय पर एसएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें.

परीक्षा तारीख में भी हुआ बदलाव

एसएससी ने एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया है. पहले कुछ उम्मीदवारों की परीक्षा 28 मई को निर्धारित थी, लेकिन अब उसे 27 मई को आयोजित किया जाएगा. आयोग के अनुसार यह बदलाव सरकारी अवकाश में हुए संशोधन के कारण किया गया है. ऐसे में सभी उम्मीदवारों को अपने नए एडमिट कार्ड में दी गई तारीख और समय का विशेष ध्यान रखना होगा.