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संक्रांति पर घर वापसी की जंग, NH-65 पर मीलों लंबा जाम

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हैदराबाद में संक्रांति के पावन पर्व पर अपने पैतृक गांवों की ओर जाने के कारण हाईवे पर तगड़ा जाम देखने को मिल रहा है. हैदराबाद-विजयवाड़ा NH-65 पर वाहनों का रेला उमड़ पड़ा है.

संक्रांति पर घर वापसी की जंग

हैदराबाद में संक्रांति के पावन पर्व पर अपने पैतृक गांवों की ओर रुख करने वाले आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के निवासियों के लिए इस बार का सफर किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं साबित हो रहा है. शुक्रवार रात से ही हैदराबाद-विजयवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-65) पर वाहनों का रेला उमड़ पड़ा है. विशेष रूप से चौटुप्पल के पास स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है, जहां अधूरी सड़क परियोजनाओं ने ट्रैफिक की रफ्तार पर पूरी तरह ब्रेक लगा दिया है.

शैक्षणिक संस्थानों में आधिकारिक छुट्टियों की घोषणा के बाद शुक्रवार रात से ही हजारों परिवारों ने अपने निजी वाहनों, विशेष बसों और टैक्सियों के जरिए हैदराबाद से विदाई ली. एनएच-65 जो राजधानी को तटीय आंध्र और मध्य तेलंगाना के जिलों से जोड़ता है, पर अचानक दबाव 200% तक बढ़ गया है.

5 किलोमीटर तक वाहनों की कतारें 
सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र चौटुप्पल टाउन और पंतंगी टोल प्लाजा है. चौटुप्पल में सड़क चौड़ीकरण और फ्लाईओवर का निर्माण कार्य पिछले कई महीनों से चल रहा है. संक्रांति की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने काम रोकने के निर्देश दिए थे, लेकिन निर्माणाधीन ढांचों, सर्विस रोड की कमी और सड़कों पर पड़े मलबे के कारण रास्ता संकरा हो गया है. इसके चलते वाहनों की कतारें 3 से 5 किलोमीटर तक लंबी हो गई हैं.

यात्री ने बयां किया दर्द
नेशनल हाईवे पर फंसे यात्रियों का दर्द बयां करते हुए एक यात्री ने बताया, “हमें हैदराबाद से चौटुप्पल पार करने में ही तीन घंटे लग गए. छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ तपती धूप में इस तरह जाम में फंसना बहुत थकाऊ है.” वाहनों के रेंगने के कारण न केवल ईंधन की बर्बादी हो रही है, बल्कि यात्रियों को पीने के पानी और भोजन के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है. प्रशासनिक स्तर पर, सूर्यपेट पुलिस और राचकोंडा पुलिस ने स्थिति को संभालने के लिए ड्रोन कैमरों की मदद ली है.

अधिकारियों ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे वैकल्पिक मार्गों जैसे नार्केटपल्ली-नलगोंडा-मिर्यालगुडा मार्ग का उपयोग करें ताकि मुख्य राजमार्ग पर दबाव कम हो सके. संक्रांति का यह उत्सव हर साल लाखों लोगों को जोड़ता है, लेकिन बुनियादी ढांचे की धीमी गति इस खुशी के सफर को साल-दर-साल मुश्किल बना रही है.