राजनांदगांव। जिले में खाद्य तेलों की आत्मनिर्भरता और किसानों की आय बढ़ाने के लिए भारत सरकार एवं राज्य शासन द्वारा संचालित नेशनल मिशन ऑन एडीबल ऑयल-ऑयल पॉम योजना के तहत किसानों को ऑयल पाम खेती को अपनाने पर विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। केंद्र सरकार के अनुदान के साथ ही राज्य शासन द्वारा टॉप-अप अनुदान भी प्रदान किया जा रहा है।
सहायक संचालक उद्यान ने बताया कि ऑयल पाम दीर्घकालीन, कम श्रम और अधिक उत्पादकता वाली फसल है। रोपण के चौथे वर्ष से उत्पादन शुरू होकर 25-30 वर्षों तक लगातार उपज मिलती है। पारंपरिक तिलहन फसलों की तुलना में यह प्रति हेक्टेयर 4 से 6 गुना अधिक तेल उत्पादन देती है, जिससे किसानों को स्थायी आर्थिक लाभ होता है।
राज्य शासन ने प्रारंभिक लागत और 3-4 वर्ष की गेस्टेशन अवधि को ध्यान में रखते हुए किसानों को 1,30,000 रुपए प्रति हेक्टेयर अनुदान के अलावा टॉप-अप अनुदान देने का प्रावधान किया है। इसमें रखरखाव मद के लिए पूर्व निर्धारित 5,250 रुपए में 1,500 रुपए की वृद्धि कर 6,750 रुपए, अंतरवर्तीय फसलों के लिए बढ़ाकर 10,250 रुपए, ड्रिप सिंचाई अपनाने पर अतिरिक्त राशि सहित 22,765 रुपए, और पौधों व फसलों की सुरक्षा हेतु फेंसिंग के लिए 54,485 रुपए प्रति हेक्टेयर अनुदान शामिल है। कुल मिलाकर राज्य सरकार 69,620 रुपए तक अतिरिक्त सहायता प्रदान कर रही है।
किसान योजना के तहत तकनीकी मार्गदर्शन, रोपण सहायता और विस्तृत जानकारी के लिए उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों और अधिकृत कंपनी प्रतिनिधियों से संपर्क कर सकते हैं।



