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BJP National President Election: क्या आम आदमी भी लड़ सकता है BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव?

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भारतीय जनता पार्टी ने अपने अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव का शेड्यूल औपचारिक रूप से जारी कर दिया है. यह निर्वाचन प्रक्रिया 19 जनवरी से शुरू होकर 20 जनवरी तक पूरी होगी.

इसी बीच लोगों के मन में एक सवाल उठ रहा है कि क्या कोई आम आदमी भी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव लड़ सकता है या फिर नहीं. आइए जानते हैं कि इसके लिए कौन सी शर्तों को पूरा करना होगा.

भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन बन सकता है

भाजपा के संविधान के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद डिफॉल्ट रूप से सांसदों, मंत्रियों या फिर वरिष्ठ नेताओं तक सीमित नहीं होता. दरअसल एक जमीनी स्तर का कार्यकर्ता भी चुनाव लड़ सकता है. लेकिन पात्रता की शर्तें इतनी ज्यादा कड़ी हैं कि पार्टी के अंदर का काफी छोटा समूह ही इसके लिए योग्य हो पाता है.

सबसे पहले उम्मीदवार को लंबे समय से भाजपा का सदस्य होना चाहिए. कम से कम 15 साल की पार्टी सदस्यता जरूरी है. इसके अलावा उस व्यक्ति ने कम से कम चार संगठनात्मक कार्यकाल के लिए सक्रिय सदस्य के रूप में काम किया हो.

क्या होती है प्रक्रिया

भाजपा अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ना सिर्फ नामांकन फॉर्म भरने जितना आसान नहीं होता। पार्टी एक सामूहिक समर्थन प्रणाली का पालन करती है. योग्य होने के लिए एक उम्मीदवार को भाजपा के इलेक्टोरल कॉलेज से कम से कम 20 सदस्यों के द्वारा प्रस्तावित किया जाना चाहिए. इसी के साथ ये प्रस्तावक सभी एक ही क्षेत्र से नहीं हो सकते. उन्हें कम से कम पांच अलग-अलग राज्यों से संबंधित होना चाहिए जहां राज्य स्तर के संगठनात्मक चुनाव पहले ही पूरे हो चुके हैं.

भाजपा अध्यक्ष का चुनाव कौन करता है

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव एक खास तौर से गठित इलेक्टोरल कॉलेज द्वारा किया जाता है, ना कि आम पार्टी सदस्यों या फिर जनता द्वारा. इस इलेक्टोरल कॉलेज में भाजपा राष्ट्रीय परिषद के सदस्य और राज्य परिषद के सदस्य जिनके आंतरिक चुनाव पूरे हो चुके हैं शामिल होते हैं.

इसी के साथ एक और जरूरी शर्त यह है कि राष्ट्रपति चुनाव होने से पहले पार्टी के कम से कम 50% संगठनात्मक राज्यों में राज्य अध्यक्ष चुनाव पूरे होने चाहिए.

कार्यकाल और कार्यकाल की सीमा

भाजपा संविधान अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यकाल को साफ तौर से परिभाषित करता है. हर कार्यकाल 3 साल का होता है. इसी के साथ कोई भी व्यक्ति लगातार दो से ज्यादा कार्यकाल के लिए इस पद पर नहीं रह सकता.

तो क्या कोई आम कार्यकर्ता सच में चुनाव लड़ सकता है

कानूनी और संवैधानिक रूप से कोई आम कार्यकर्ता भी चुनाव लड़ सकता है. अगर बात करें व्यावहारिक रूप से तो सिर्फ दशकों के अनुशासित संगठनात्मक काम, व्यापक राष्ट्रीय समर्थन और नेतृत्व के समर्थन के बाद ही कोई आदमी चुनाव लड़ सकता है.