India Forex Reserves: हाल ही में हुए उतार चढ़ाव के बाद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार एक बार फिर से चर्चा में आ चुका है. जनवरी 2026 के पहले हफ्ते में देश के भंडार में 6.80 बिलियन डॉलर की भारी गिरावट देखी गई. इस वजह से बाहरी स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ चुकी थी.
लेकिन अगले ही हफ्ते भंडार 392 मिलियन डॉलर बढ़ गया. इसी के साथ सोने के भंडार में भी काफी बढ़ोतरी हुई. आइए जानते हैं कि भारतीय बैंकों में असल में कितने डॉलर जमा है और भारत का विदेशी मुद्रा भंडार कितना मजबूत है.
कुल विदेशी मुद्रा भंडार
भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 687.19 बिलियन डॉलर है. यह विशाल भंडार भारत को विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में विश्व स्तर पर शीर्ष देशों में रखता है. साथ ही यह आर्थिक झटकों के खिलाफ एक मजबूत ढाल का काम करता है.
कितने डॉलर जमा
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों के रूप में रखा जाता है. यह वर्तमान में 550.87 बिलियन डॉलर है. हालांकि इन परिसंपत्तियों की रिपोर्ट डॉलर के रूप में की जाती है लेकिन यह सिर्फ अमेरिकी डॉलर तक सीमित नहीं है. इनमें अमेरिकी डॉलर, यूरो, ब्रिटिश पाउंड और जापानी येन जैसी वैश्विक मुद्राओं का मिश्रण होता है.
यह विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों आरबीआई द्वारा अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड, फॉरेन गवर्नमेंट सिक्योरिटीज, ट्रेजरी बिल और विदेशी केंद्रीय और वाणिज्यिक बैंकों में जमा के रूप में रखी जाती हैं. इस संरचना की वजह से विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति का मूल्य गैर डॉलर मुद्राओं की विनिमय दर में उतार-चढ़ाव के आधार पर बदल सकता है.
सोने का भंडार
भारत के सोने के भंडार का मूल्य फिलहाल 112.83 बिलियन डॉलर है. बीते कुछ स्थानों में आरबीआई ने ज्यादा डॉलर पर निर्भरता से बचने और दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जानबूझकर सोने की खरीद को बढ़ाया है.
आईएमएफ से संबंधित भंडार
मुद्राओं और सोने के अलावा भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास रखी होल्डिंग्स भी शामिल हैं. भारत के स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स वर्तमान में 18.74 बिलियन डॉलर हैं. यह इंटरनेशनल रिजर्व असेट्स हैं जिनकी वैल्यू दुनिया की प्रमुख करेंसी के बास्केट पर आधारित होती है. इसके अलावा आईएमएफ के साथ भारत की रिजर्व स्थिति $4.76 बिलियन है.
विदेशी मुद्रा भंडार एक आर्थिक सुरक्षा कवच के रूप में काम करता है. यह भारत को कच्चे तेल जैसे जरूरी इंपोर्ट का पेमेंट करने, बाहरी कर्ज की देनदारी को मैनेज करने और ज्यादा उतार-चढ़ाव के समय रुपये की रक्षा करने में मदद करता है. आरबीआई इस रिजर्व का इस्तेमाल करेंसी मार्केट में दखल देने के लिए करता है. जब भी रुपया तेजी से कमजोर होता है तो डॉलर बेचता है और रुपया जब ज्यादा मजबूत होता है तो डॉलर खरीदता है.



