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मायावती ने नए UGC नियमों का समर्थन किया, सवर्णों के विरोध को बताया…

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मायावती का बयान

बसपा की प्रमुख मायावती ने नए UGC नियमों के संदर्भ में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए इनका समर्थन किया है। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों में इक्विटी कमेटियों के गठन को अनिवार्य बनाने वाले नियमों का स्वागत किया, लेकिन यह भी कहा कि इनका कार्यान्वयन करने से पहले सभी संबंधित पक्षों को विश्वास में लेना आवश्यक था।

मुख्य प्रतिक्रिया

मायावती ने बताया कि इन नियमों का विरोध मुख्यतः

सामान्य वर्ग (सवर्ण) के कुछ व्यक्तियों द्वारा किया जा रहा है, जिनकी जातिवादी सोच है। उन्होंने इसे ‘नाजायज’ और ‘जातिवादी’ करार दिया, क्योंकि ये लोग नियमों को एक साजिश या भेदभाव के रूप में देख रहे हैं।

उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि ये नियम सरकारी और निजी कॉलेजों में जाति-आधारित भेदभाव को समाप्त करने के लिए बनाए गए हैं। हालांकि, सामाजिक तनाव से बचने के लिए नियमों को लागू करने से पहले व्यापक विचार-विमर्श होना चाहिए था।

मायावती ने दलितों और OBC वर्गों से अपील की कि वे स्वार्थी और अवसरवादी नेताओं के भड़काऊ बयानों से प्रभावित न हों, जो गंदी राजनीति कर रहे हैं। ऐसे लोगों से दूर रहना चाहिए और सतर्क रहना चाहिए।

UGC के नए नियम

UGC ने 13 जनवरी 2026 को “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” अधिसूचित किए, जो 2012 के पुराने नियमों को प्रतिस्थापित करते हैं। इसके मुख्य प्रावधान निम्नलिखित हैं:

सभी उच्च शिक्षा संस्थानों (सरकारी और निजी) में इक्विटी कमेटी का गठन अनिवार्य है।

कमेटी में OBC, SC, ST, दिव्यांग और महिलाओं के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए।

उद्देश्य: कैंपस में जाति, लिंग, दिव्यांगता आदि के आधार पर भेदभाव को रोकना और शिकायतों का त्वरित निपटारा (24 घंटे के भीतर कार्रवाई शुरू करना)।

हर संस्थान में Equal Opportunity Centre (EOC), 24/7 हेल्पलाइन, Equity Squads आदि का गठन आवश्यक है।

नियमों का पालन न करने पर UGC द्वारा सख्त कार्रवाई की जाएगी, जैसे डिग्री रोकना या फंडिंग बंद करना।

विरोध का कारण

छात्रों और कुछ संगठनों ने इन नियमों के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं। आलोचकों का कहना है कि कमेटी में सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व अनिवार्य नहीं है, भेदभाव की परिभाषा अस्पष्ट है, और झूठी शिकायतों पर कार्रवाई का प्रावधान कमजोर है, जिससे दुरुपयोग की संभावना है। कई स्थानों पर #UGCRollback ट्रेंड हुआ और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आश्वासन दिया है कि ये नियम किसी के खिलाफ नहीं हैं और भेदभाव के नाम पर गलत इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा।