Home देश IDFC First Bank मामले में एक्शन, 24 घंटे के अंदर ही सरकार...

IDFC First Bank मामले में एक्शन, 24 घंटे के अंदर ही सरकार ने पैसा किया रिकवर…

2
0

IDFC First Bank से जुड़े 590 करोड़ रुपए के कथित घोटाले मामले में आज यानी मंगलवार को बड़ा एक्शन हुआ है. बैंक से 556 करोड़ रुपए की रिकवरी के साथ ही करीब 25 करोड़ रुपए की ब्याज राशि रिकवर कर ली गई है.

मुख्यमंत्री नायब सैनी ने हरियाणा विधानसभा में जानकारी दी है कि सिर्फ 24 घंटे के अंदर ही सरकार ने IDFC First Bank से गबन की गई राशि को रिकवर कर लिया गया है.

590 करोड़ रुपए में से 556 करोड़ रुपए हरियाणा सरकार के अन्य बैंकों के खातों में IDFC बैंक के द्वारा ट्रांसफर कर दिए गए हैं. बैंक से पूरी रिकवरी 24 घंटे के दौरान ही कर ली गई है.

वित्त सचिव की अध्यक्षता में इस पूरे मामले को लेकर एक हाई लेवल कमेटी बनाई गई है जो आगे भी इस मामले की जांच जारी रखेगी ताकि पता लग सके कि बैंक कर्मचारियों के साथ कहीं हरियाणा सरकार के अलग-अलग विभागों के अधिकारी या कर्मचारी तो इस गबन की सांठ-गांठ में शामिल नहीं थे. बैंक भी अपनी और से जांच जारी रहेगी.

सीएम ने क्या कहा था?

इससे पहले सीएम ने कहा था कि सरकार के पैसे पुराने समय से अलग-अलग बैंकों में रखे जाते हैं. IDFC First Bank में हमारे कुछ विभागों के पैसे थे. सरकार ने प्रो-एक्टिव होकर बैंक खातों का मिलान किया तो पाया कि कुछ खातों का मिलान नहीं है. जनवरी माह के मध्य में कुछ खातों का मिलान नहीं हो पाया था. लेकिन हमने तुरंत बैंक को खाता बंद करने के लिए निर्देशित किया.

उन्होंने आगे कहा कि बैंक ने 21 तारीख को पत्र लिखा जबकि उससे पहले ही सरकार की तरफ से बैंक से कम्युनिकेशन कर लिया गया था. इसके साथ ही सरकार ने बैंक को संपूर्ण राशि ब्याज सहित अधिकृत बैंक में स्थानांतरित करने को कहा है. इसमें बैंक के कर्मचारियों की भूमिका सामने आ रही है. हरियाणा सरकार के विभागों ने इस मामले को ध्यान में लाया है. हरियाणा सरकार ने पूरा मामला एंटी करप्शन ब्यूरो को जांच करने के लिए दिया है.

क्या है पूरा मामला?

IDFC फर्स्ट बैंक ने रविवार को खुलासा किया कि उसके कर्मचारियों और दूसरों ने प्राइवेट सेक्टर के लेंडर के साथ हरियाणा सरकार के ग्रुप ऑफ अकाउंट्स में 590 करोड़ रुपये का फ्रॉड किया है. रविवार को एक रेगुलेटरी फाइलिंग में, IDFC फर्स्ट बैंक ने कहा कि उसने बैंकिंग रेगुलेटर को इस मामले के बारे में बताया है और पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है.

IDFC फर्स्ट बैंक की फाइलिंग में कहा गया है, पहली नजर में, चंडीगढ़ की एक ब्रांच के कुछ कर्मचारियों ने हरियाणा राज्य सरकार के कुछ अकाउंट्स में बिना इजाज़त और फ्रॉड वाली गतिविधियां की हैं और इसमें शायद दूसरे लोग/एंटिटी/काउंटरपार्टी भी शामिल हो सकते हैं. अभी बैंक ने फ्रॉड का साइज 590 करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया है और कहा है कि एक रिकंसिलिएशन एक्सरसाइज आगे की जानकारी मिलने, क्लेम के वैलिडेशन और किसी भी तरह की रिकवरी के आधार पर आखिरी रकम तय करेगी.

दरअसल, हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना खाता बंद कर राशि दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने का अनुरोध किया. इस प्रक्रिया के दौरान खाते की वास्तविक शेष राशि और विभाग द्वारा बताई गई राशि में अंतर पाया गया. 18 फरवरी 2026 से अन्य हरियाणा सरकारी संस्थाओं ने भी अपने खातों के संबंध में बैंक से संपर्क किया. जांच के दौरान उनके बताए गए बैलेंस और बैंक रिकॉर्ड में दर्ज बैलेंस में अंतर पाया गया.