Harwa Mala Holi Tradition: छत्तीसगढ़ में होली की शुरुआत रंगों से नहीं बल्कि ‘हरवा माला’ की मिठास से होती है, जो प्रेम और भाईचारे का प्रतीक मानी जाती है. बिलासपुर समेत प्रदेशभर में पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा में पहले भगवान को बताशों की माला अर्पित की जाती है, फिर बच्चों और रिश्तेदारों को पहनाई जाती है. गांव-देहात में आज भी यह परंपरा पूरे उत्साह के साथ निभाई जाती है. महंगाई के बावजूद बाजारों में हरवा माला की मांग बनी हुई है और रंग-बिरंगी मालाएं आकर्षण का केंद्र हैं.
Holi Tradition Chhattisgarh: होली मतलब रंग, गुलाल और मस्ती… लेकिन छत्तीसगढ़ में इस त्योहार की शुरुआत रंगों से नहीं, बल्कि मिठास से होती है. यहां ‘हरवा माला’ यानी बताशों से बनी खास माला पहनाकर होली का शुभारंभ किया जाता है. यह सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि प्रेम, सौहार्द और आशीर्वाद का प्रतीक मानी जाती है.
पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा में सबसे पहले भगवान को हरवा माला अर्पित की जाती है. उसके बाद घर के बच्चों को पहनाई जाती है और फिर रिश्तेदारों व दोस्तों को खिलाकर होली की शुरुआत होती है.
रंगों से पहले मिठास की रस्म
जहां देश के कई हिस्सों में लोग सीधे रंग-गुलाल से होली खेलना शुरू कर देते हैं, वहीं छत्तीसगढ़ में पहले शक्कर से बने बताशों की माला भगवान को चढ़ाई जाती है. फिर छोटे बच्चों, मित्रों और समधियों को यह माला पहनाकर शुभकामनाएं दी जाती हैं. यह परंपरा छत्तीसगढ़ को पूरे देश में एक अलग पहचान देती है. यहां होली की पहली पहचान ही मिठास है.
बच्चों के लिए खास आशीर्वाद
होली के दिन बच्चे हरवा माला गले में पहनकर बड़ों से आशीर्वाद लेते हैं. यह रस्म वर्षों से निभाई जा रही है. आशीर्वाद के बाद बच्चे रंग खेलते हैं और जब मन होता है, तो उसी माला को उतारकर खा लेते हैं. मिठास और मस्ती का यह संगम ही इस परंपरा को खास बनाता है.
बाजारों में रौनक, बढ़ी कीमत
समय बदल रहा है, लेकिन गांव-देहात में हरवा की मांग आज भी कम नहीं हुई है. महंगाई के चलते इसकी कीमत करीब 120 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है. देवकीनंदन चौक पर हरवा माला बेच रहे चंदू आनंद बताते हैं कि एक माला 20, 30 और 40 रुपए में बिक रही है. लोग 100 से 200 रुपए तक की खरीदारी कर रहे हैं. हरे, पीले, गुलाबी और नीले रंगों में सजी ये मालाएं बाजार में खास आकर्षण बनी हुई हैं.
लोक संस्कृति की मिठास
‘हरवा’ सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है. बदलते दौर में कई परंपराएं भले फीकी पड़ गई हों, लेकिन होली पर हरवा माला पहनाने और खिलाने की परंपरा आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है. यही मिठास इस त्योहार को खास बनाती है और समाज को जोड़कर रखने का संदेश देती है.



