Mahavir Jayanti 2026: महावीर जयंती जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर महावीर स्वामी के जन्म दिवस के रूप में मनाई जाती है. इस साल महावीर जयंती 31 मार्च 2026 को है. महावीर स्वामी ने सिखाया कि मनुष्य इंद्रियों पर नियंत्रण, सत्य आचरण और तपस्या से आत्मा को शुद्ध कर सकता है और मोक्ष प्राप्त कर सकता है. इस दिन जैन समाज भगवान महावीर के उपदेशों अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह को याद करता है और उनके जीवन से प्रेरणा लेकर धर्म, दया और संयम का पालन करने का संकल्प लेता हैं.
जैन धर्म में तीर्थंकर कौन होते हैं
जैन ग्रंथों तत्तवार्थसूत्र और कल्पसूत्र के अनुसार तीर्थंकर वह दिव्य पुरुष हैं जो सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र के माध्यम से आत्मा को पूर्ण रूप से शुद्ध कर लेते हैं और केवलज्ञान प्राप्त करते हैं. इसके बाद वे संसार के लोगों को धर्म का तीर्थ (मार्ग) स्थापित करके मोक्ष का मार्ग बताते हैं.
कौन हैं महावीर स्वामी
जैन धर्म की मान्यता है कि 12 साल के कठोर मौन तप के बाद भगवान महावीर ने अपनी इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर ली ती, निडर, सहनशील और अहिंसक होने के कारण उनका नाम महावीर पड़ा. 72 साल की उम्र में उन्हें पावापुरी से मोक्ष प्राप्ति हुई. महावीर स्वामी ने ऐसे आदर्श दिए जो व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति, नैतिक जीवन और समाज में शांति स्थापित करने का मार्ग दिखाते हैं।
महावीर जयंती पर क्या करते हैं
मंदिरों में विशेष पूजा और अभिषेक – सुबह जैन मंदिरों में भगवान महावीर की प्रतिमा का जल, दूध, केसर और चंदन से अभिषेक किया जाता है. इसके बाद आरती, पूजा और मंगल पाठ किया जाता है.
शोभायात्रा (रथ यात्रा) निकालना – कई शहरों में भगवान महावीर की प्रतिमा को सजे हुए रथ में बैठाकर भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है. इसमें भजन, कीर्तन और धार्मिक झांकियाँ होती हैं.
उपवास और साधना – कई श्रद्धालु इस दिन उपवास या विशेष व्रत रखते हैं और भगवान महावीर के ध्यान और भक्ति में समय बिताते हैं.
जैन ग्रंथों का पाठ और प्रवचन – इस दिन जैन धर्म के ग्रंथों जैसे कल्पसूत्र का पाठ किया जाता है और आचार्य या साधु-संत महावीर स्वामी के उपदेशों पर प्रवचन देते हैं.
दान-पुण्य और सेवा- इस दिन लोग गरीबों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करते हैं तथा जीवों के प्रति दया दिखाने के लिए पक्षियों को दाना और पशुओं को चारा खिलाते हैं. कहते हैं कि इसके फलस्वरूप व्यक्ति तमाम कष्टों से मुक्ति पाता है और मोक्ष की राह उसके लिए सुलभ होती है.
महावीर स्वामी के प्रमुख उपदेश
- अहिंसा – किसी भी जीव को कष्ट न देना
- सत्य – हमेशा सत्य बोलना
- अस्तेय – चोरी न करना
- ब्रह्मचर्य – इंद्रियों पर नियंत्रण
- अपरिग्रह – अधिक संग्रह न करना



